केन्द्रीय सूचना आयोग

केन्द्रीय सूचना आयोग भारत में सूचना के अधिकार अधिनियम, 2005 के अंतर्गत स्थापित एक महत्वपूर्ण संवैधानिक संस्था है, जिसका उद्देश्य सरकारी कार्यों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना है। यह नागरिकों को सूचना प्राप्त करने के अधिकार की रक्षा करता है और संबंधित अपीलों व शिकायतों का निस्तारण करता है। राजनीतिक व्यवस्था और शासन विषय के अंतर्गत केन्द्रीय सूचना आयोग का अध्ययन लोकतांत्रिक प्रशासन की समझ के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।

केन्द्रीय सूचना आयोग

प्रकृति और स्थापना:

  • केंद्रीय सूचना आयोग (CIC) एक सांविधिक निकाय है, न कि संवैधानिक निकाय।
  • इसका गठन सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के धारा 12 के तहत 12 अक्टूबर 2005 को किया गया था।
  • भारतीय संविधान के अनुच्छेद 19(1) के तहत सूचना का अधिकार (Right to Information – RTI) एक मूलभूत अधिकार के रूप में मान्यता प्राप्त है।
  • महत्वपूर्ण न्यायिक मामले राज नारायण बनाम उत्तर प्रदेश राज्य (1976) में, सुप्रीम कोर्ट ने पुष्टि की कि यह अधिकार अनुच्छेद 19 का हिस्सा है।
  • न्यायालय ने यह स्पष्ट किया कि लोकतंत्र में नागरिकों को यह जानने का अधिकार होना चाहिए कि उनकी सरकार कैसे काम करती है।
  • इसी के परिणामस्वरूप सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 पारित किया गया, जिसने नागरिकों को इस मूलभूत अधिकार का प्रयोग करने के लिए एक प्रणाली (system) बनाई।

RTI अधिनियम की विशेषताएँ और महत्व (Key Points):

  1. शासन में जवाबदेही और पारदर्शिता बढ़ाना – RTI ने सरकारी कार्यों को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाया।
  2. नागरिकों को सशक्त बनाना – नागरिक अब सार्वजनिक प्राधिकरणों (public authorities) से जानकारी मांग सकते हैं।
  3. जनभागीदारी को बढ़ावा देना – पिछले दो दशकों में RTI ने शासन को जवाबदेह और जनता के लिए अधिक participatory बनाया।
  4. 2nd ARC की सिफारिश – 2nd Administrative Reforms Commission की रिपोर्ट के अनुसार, “RTI अच्छे शासन के लिए मुख्य कुंजी (master key)” है।

सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 – उद्देशिका

  • भारत के संविधान ने लोकतंत्रात्मक गणराज्य की स्थापना की है; और लोकतंत्र शिक्षित नागरिक वर्ग तथा ऐसी सूचना की पारदर्शिता की अपेक्षा करता है, जो उसके कार्यकरण तथा भ्रष्टाचार को रोकने के लिए भी और सरकारों तथा उनके परिकरणों को शासन के प्रति उत्तरदायी बनाने के लिए अनिवार्य है; और वास्तविक व्यवहार में सूचना कें प्रकटन से संभवतः अन्य लोक हितों, जिनके अंतर्गत सरकारों के दक्ष प्रचालन, सीमित राज्य वित्तीय संसाधनों के अधिकतम उपयोग और संवेदनशील सूचना की गोपनीयता को बनाए रखना भी है, के साथ विरोध हो सकता है; और लोकतंत्रात्मक आदर्श की प्रभुता को बनाए रखते हुए इन विरोधी हितों के बीच सामंजस्य बनाना आवश्यक है; अतः, अब यह समीचीन है कि ऐसे नागरिकों को, कतिपय सूचना देने के लिए, जो उसे पाने के इच्छुक हैं, उपबंध किया जाए ;भारत गणराज्य के छप्पनवें वर्ष में संसद् द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित हो।

सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005

  • अधिनियम पारित: 15 जून 2005
  • प्रभावी: 12 अक्टूबर 2005
  • उद्देश्य: नागरिकों को सरकारी जानकारी तक पहुँच सुनिश्चित करना और पारदर्शिता बढ़ाना।
  • सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 में कुल 6 अध्याय हैं।
    1. अध्याय 1 – प्रारंभिक
    2. अध्याय 2 – सूचना का अधिकार और लोक प्राधिकारियों की बाध्यताएं
    3. अध्याय 3 – केन्द्रीय सूचना आयोग
    4. अध्याय 4 – राज्य सूचना आयोग
    5. अध्याय 5 – सूचना आयोगों की शक्तियां और कृत्य, अपील तथा शास्तियां
    6. अध्याय 6 – प्रकीर्ण
  • इसके अलावा, अधिनियम में 2 अनुसूचियाँ (Schedules) भी शामिल हैं
    1. मुख्य सूचना आयुक्त, सूचना आयुक्त, राज्य मुख्य सूचना आयुक्त, राज्य सूचना आयुक्त द्वारा ली जाने वाली शपथ या किए जाने वाले प्रतिज्ञान का प्ररूप
    2. केन्द्रीय सरकार द्वारा स्थापित आसूचना और सुरक्षा संगठन
  • सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 (RTI Act, 2005) में कुल 31 धाराएँ (Sections) हैं।
    1. धारा 1 – संक्षिप्त नाम, प्रारंभ और प्रयोज्यता
    2. धारा 2 – परिभाषाएँ
    3. धारा 3 – सूचना का अधिकार
    4. धारा 4 – लोक प्राधिकारियों की बाध्यताएं
    5. धारा 5 – लोक सूचना अधिकारियों का पदनाम 
    6. धारा 6 – सूचना अभिप्राप्त करने के लिए अनुरोध-
    7. धारा 7 – अनुरोध का निपटारा
    8. धारा 8 – सूचना के प्रकट किए जाने से छूट
    9. धारा 9 – कतिपय मामलों में पहुंच के लिए अस्वीकृति के आधार
    10. धारा 10 – पृथक्करणीयता
    11. धारा 11 – पर व्यक्ति सूचना
    12. धारा 12 – केंद्रीय सूचना आयोग का गठन।
    13. धारा 13 – सूचना आयुक्तों की पदावधि और सेवा शर्तें।
    14. धारा 14 – सूचना आयुक्तों को पद से हटाने के प्रावधान।
    15. धारा 15 – राज्य सूचना आयोग का गठन
    16. धारा 16- पदावधि और सेवा की शर्तें
    17. धारा 17 – राज्य मुख्य सूचना आयुक्त या राज्य सूचना आयुक्त का हटाया जाना
    18. धारा 18 – सूचना आयोगों की शक्तियां और कृत्य
    19. धारा 19 – अपील
    20. धारा 20 – शास्ति

संविधानिक प्रावधान:

  • धारा 12: केंद्रीय सूचना आयोग का गठन।
  • धारा 13: सूचना आयुक्तों की पदावधि और सेवा शर्तें।
  • धारा 14: सूचना आयुक्तों को पद से हटाने के प्रावधान।
आयोग की अधिकारिता:
  • आयोग की अधिकारिता केंद्र सरकार और केंद्र शासित प्रदेशों के सभी लोक प्राधिकारियों पर लागू होती है।
  • आयोग की शक्तियाँ और कार्य सूचना का अधिकार अधिनियम की धाराएँ 18, 19, 20, और 25 में निर्धारित हैं।

दृष्टि (VISION)

  • सभी हितधारकों की प्रभावी और दक्ष भागीदारी सुनिश्चित करने में एक गतिशील भूमिका निभाना जैसा कि RTI अधिनियम में वर्णित है, उस शक्ति के प्रयोग के माध्यम से जो केंद्रीय सूचना आयोग को दी गई है, और केंद्रीय सूचना आयोग को सौंपे गए कार्यों का जवाबदेह, संवेदनशील और पारदर्शी तरीके से पालन करना।

मिशन (MISSION)

  • RTI अधिनियम, 2005 के तहत भारतीय नागरिकों को सूचना तक आसान और व्यापक पहुँच सुनिश्चित करना, नागरिक-केंद्रित दृष्टिकोण के माध्यम से।

प्रमुख उद्देश्य (KEY OBJECTIVES)

  1. RTI अधिनियम, 2005 की धारा 18 के तहत किसी भी नागरिक से प्राप्त शिकायतों की प्राप्ति और जांच करना।
  2. RTI अधिनियम, 2005 और RTI नियम 2012 की धारा 19 के तहत किसी भी नागरिक से प्राप्त द्वितीय अपीलों को प्राप्त करना और निर्णय देना
  3. RTI अधिनिम, 2005 के तहत CIC को प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करना।
  4. RTI अधिनियम, 2005 की धारा 25 के तहत “निगरानी और रिपोर्टिंग” का दायित्व निभाना।

संरचना (Composition)

  • सदस्य: आयोग में एक मुख्य सूचना आयुक्त (CIC) और अधिकतम 10 सूचना आयुक्त (ICs) हो सकते हैं।
  • नियुक्ति प्रक्रिया:
    • सभी की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है।
    • नियुक्ति हेतु समिति की सिफारिश ली जाती है, जिसमें शामिल होते हैं:
  1. प्रधानमंत्री (अध्यक्ष),
  2. लोकसभा में विपक्ष के नेता,
  3. प्रधानमंत्री द्वारा नामित एक कैबिनेट मंत्री।
  • पात्रता:
    • सार्वजनिक जीवन में पर्याप्त अनुभव होना चाहिए।
    • विशेषज्ञता आवश्यक: विधि, विज्ञान व तकनीक, सामाजिक सेवा, प्रबंधन, पत्रकारिता, जनसंचार या प्रशासन में।
  • अपात्रता:
    • संसद या किसी राज्य विधानमंडल के सदस्य नहीं होने चाहिए।
    • किसी राजनीतिक दल से जुड़े लाभ के पद पर नहीं होने चाहिए।
    • कोई व्यापार/उद्यम न कर रहे हों।

कार्यकाल एवं सेवा शर्तें (Tenure & Service Conditions)

  • कार्यकाल: 
    • 2005 अधिनियम के अनुसार (मूल प्रावधान)
      • मुख्य सूचना आयुक्त और सूचना आयुक्तों का कार्यकाल –
        • 5 वर्ष या 65 वर्ष की आयु, जो भी पहले हो।
        • उन्हें पुनर्नियुक्ति की पात्रता नहीं होती थी।
    • सूचना का अधिकार (संशोधन) विधेयक, 2019 के अनुसार
      • अब मुख्य सूचना आयुक्त और सूचना आयुक्तों का कार्यकाल केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित किया जाएगा, न कि पूर्व निर्धारित 5 वर्षों का।
      • CIC और IC की पदावधि 3 वर्ष की होगी।
      • उनकी वेतन, भत्ते एवं सेवा शर्तें भी केंद्र सरकार द्वारा तय की जाएंगी।
  • पुनर्नियुक्ति:
    • पुनर्नियुक्ति की अनुमति नहीं है – यह स्थिति संशोधन के बाद भी यथावत बनी रही है।
    • सूचना आयुक्त से मुख्य सूचना आयुक्त की नियुक्ति
      • किसी सूचना आयुक्त को मुख्य सूचना आयुक्त के रूप में नियुक्त किया जा सकता है,
      • बशर्ते सूचना आयुक्त के रूप में उनके कार्यकाल सहित कुल कार्यकाल 5 वर्ष से अधिक न हो।

सीआईसी (CIC) सदस्यों को उनके पद से हटाना

  • राष्ट्रपति निम्नलिखित स्थितियों में पद से हटा सकते हैं:
    • दीवालिया घोषित हो जाएं।
    • नैतिक चरित्रहीनता के अपराध में दोषी ठहराए गए हों।
    • कार्यकाल के दौरान किसी लाभ के पद पर कार्यरत हों।
    • शारीरिक या मानसिक रूप से अक्षम हों।
    • ऐसा कोई लाभ प्राप्त कर रहे हों जिससे कार्य निष्पक्षता प्रभावित होती हो।
  • सिद्ध कदाचार या अक्षमता की स्थिति में:
    • राष्ट्रपति मामला उच्चतम न्यायालय को जांच हेतु भेजते हैं।
    • यदि जाँच के बाद उच्चतम न्यायालय द्वारा हटाने के कारण को सही ठहराया जाता है और ऐसी सलाह दी जाती है, तो राष्ट्रपति द्वारा उन्हें हटाया जा सकता है।

CIC के वेतन और सेवा शर्तें

  • मुख्य सूचना आयुक्त और सूचना आयुक्त के वेतन, भत्ते और अन्य सेवा शर्तें केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित की जाती है।
    • मुख्य सूचना आयुक्त: वेतन, भत्ते व सेवा शर्तें: मुख्य निर्वाचन आयुक्त के समान। 
    • अन्य सूचना आयुक्त: वेतन, भत्ते व सेवा शर्तें: निर्वाचन आयुक्त के समान।
    • वेतन – RTI (संशोधन) विधेयक, 2019
      • मुख्य सूचना आयुक्त: ₹2,50,000 प्रतिमाह।
      • सूचना आयुक्त: ₹2,25,000 प्रतिमाह।
      • यदि नियुक्ति के समय पेंशन प्राप्त कर रहे हों, तो वेतन से पेंशन घटाई जाएगी।
    • उनके वेतन और सेवा शर्तों में उनकी सेवा के दौरान अलाभकारी परिवर्तन नहीं किये जा सकते

सूचना का अधिकार (संशोधन) विधेयक, 2019

  • सूचना का अधिकार (संशोधन) विधेयक, 2019, आरटीआई अधिनियम की धारा 13, 16 और 27 में संशोधन करने का प्रयास करता है।
  • मुख्य सूचना आयुक्त और सूचना आयुक्तों का कार्यकाल केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित किया जाएगा।
    • CIC और IC की पदावधि 3 वर्ष की होगी।
  • नए विधेयक के तहत केंद्र और राज्य स्तर पर मुख्य सूचना आयुक्त एवं सूचना आयुक्तों के वेतन, भत्ते तथा अन्य रोज़गार की शर्तें भी केंद्र सरकार द्वारा ही तय की जाएंगी
  • वेतन –
    • मुख्य सूचना आयुक्त: ₹2,50,000 प्रतिमाह।
    • सूचना आयुक्त: ₹2,25,000 प्रतिमाह।
    • यदि नियुक्ति के समय पेंशन प्राप्त कर रहे हों, तो वेतन से पेंशन घटाई जाएगी।

केंद्रीय सूचना आयोग की शक्तियाँ एवं कार्य

  • आयोग के पास अधिनियम की धारा 18, 19, 20 और 25 में वर्णित कुछ शक्तियाँ और कार्य हैं, जो मुख्यतः निम्नलिखित हैं: 

शिकायतों का निवारण 

  • आयोग का कर्तव्य है कि वह निम्नलिखित प्रकार की शिकायतों का निवारण करे:
    • जब जन-सूचना अधिकारी (PIO) की नियुक्ति नहीं हुई हो।
    • जब मांगी गई सूचना देने से इंकार किया गया हो।
    • जब मांगी गई सूचना निर्धारित समय में प्राप्त नहीं हुई हो।
    • जब मांगी गई सूचना के लिए फीस अनुचित प्रतीत होती हो।
    • जब सूचना अपर्याप्त, झूठी या भ्रामक हो।
    • सूचना से संबंधित अन्य कोई भी समस्या।

स्वप्रेरणा से जांच (Suo-Motu Inquiry)

  • यदि कोई मामला स्पष्ट और गंभीर हो, तो आयोग स्वतः संज्ञान लेकर जांच का आदेश दे सकता है।

जांच के दौरान दीवानी न्यायालय जैसी शक्तियाँ

  • जांच करते समय आयोग को निम्नलिखित न्यायिक शक्तियाँ प्राप्त हैं:
    • व्यक्ति को हाजिर होने और बयान देने हेतु सम्मन जारी करना।
    • दस्तावेज़ों की मांग व जांच करना।
    • शपथपत्र के रूप में साक्ष्य लेना।
    • सार्वजनिक दस्तावेजों को मंगाना।
    • गवाह या दस्तावेजों की जांच के लिए सम्मन देना।
    • अन्य सभी आवश्यक न्यायिक कार्यवाही।

रिकॉर्ड की अनिवार्य जांच

  • आयोग किसी भी लोक प्राधिकारी के नियंत्रणाधीन रिकॉर्ड की जांच कर सकता है।
    • यह रिकॉर्ड आयोग से छिपाया नहीं जा सकता।

निर्णयों के अनुपालन को सुनिश्चित करने की शक्ति

  • आयोग अपने निर्णयों के पालन हेतु लोक प्राधिकारी को निर्देश दे सकता है:
    • सूचना की विशिष्ट रूप में उपलब्धता सुनिश्चित करना।
    • जहाँ PIO नहीं है, वहाँ PIO की नियुक्ति का आदेश देना।
    • सूचना का प्रकाशन कराना।
    • रिकॉर्ड प्रबंधन प्रणाली में आवश्यक सुधार कराना।
    • RTI प्रशिक्षण की व्यवस्था कराना।
    • वार्षिक प्रतिवेदन प्राप्त करना।
    • सूचना न मिलने या क्षति होने पर मुआवजा दिलवाना।
    • अर्थदंड अधिरोपित करना।
    • अयोग्य याचिका को खारिज करना।

वार्षिक प्रतिवेदन प्रस्तुत करना

  • आयोग, अधिनियम के क्रियान्वयन पर आधारित वार्षिक प्रतिवेदन केंद्र सरकार को सौंपता है।
  • सरकार इस प्रतिवेदन को संसद के दोनों सदनों में प्रस्तुत करती है।

अनुपालन न होने पर कार्रवाई

  • यदि कोई लोक प्राधिकारी अधिनियम का अनुपालन नहीं करता है, तो आयोग अनिवार्य कार्यवाही कर सकता है जिससे अधिनियम का पालन सुनिश्चित हो।

द्वितीय अपील का निर्णय: सूचना प्रदान करने के लिए द्वितीय अपीलों का न्यायनिर्णयन करना।

अभिलेखों का रख-रखाव: अभिलेखों के सही रख-रखाव के लिए निर्देश जारी करना।

निर्णय की बाध्यता:
  • आयोग के निर्णय अंतिम और बाध्यकारी होते हैं, यानी इन पर पुनर्विचार या अपील की कोई प्रक्रिया नहीं होती।
  • केंद्रीय सूचना आयोग का मुख्य उद्देश्य सूचना का अधिकार (RTI) के तहत नागरिकों के अधिकारों की सुरक्षा करना और सरकारी कार्यों में पारदर्शिता सुनिश्चित करना है।

केंद्रीय मुख्य सूचना आयुक्तों की सूची

1वजाहत हबीबुल्लाहपहले CIC
2ए.एन. तिवारी
3सत्यानंद मिश्रा
4दीपक संधूपहली महिला CIC
5सुषमा सिंहदूसरी महिला CIC
6राजीव माथुर
7विजय शर्मा
8राधा कृष्ण माथुर
9सुधीर भार्गव 
10बिमल जुल्का
11यशवर्धन कुमार सिन्हा
12हीरालाल सामरिया (वर्तमान)6 नवंबर 2023 से 13 सितंबर 2025
  • अब तक दो महिलाएँ मुख्य सूचना आयुक्त के पद पर रह चुकी हैं:
    • दीपक संधू
    • सुषमा सिंह
  • वर्तमान में:
    • मुख्य सूचना आयुक्त – हीरालाल सामरिया
    • सूचना आयुक्त – श्रीमती आनंदी रामलिंगम
    • सूचना आयुक्त – श्री विनोद कुमार तिवारी

राष्ट्रीय आयोग/केन्द्रीय निकाय तथा संबंधित मंत्रालय

क्रम संख्याआयोग/केन्द्रीय निकायसंबंधित मंत्रालय
1केन्द्रीय सूचना आयोगकार्मिक मंत्रालय
2वित्त आयोगवित्त मंत्रालय
3संघ लोक सेवा आयोग (UPSC)कार्मिक मंत्रालय
4अंतर्राज्यीय परिषद्गृह मंत्रालय
5कर्मचारी चयन आयोग (SSC)कार्मिक मंत्रालय
6राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोगसामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय
7राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोगजनजातीय मामलों का मंत्रालय
8केन्द्रीय सतर्कता आयोग (CVC)कार्मिक मंत्रालय
9क्षेत्रीय परिषदेंगृह मंत्रालय
10केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI)कार्मिक मंत्रालय
11राष्ट्रीय अनुसंधान एजेंसी (NIA)गृह मंत्रालय
12भाषाई अल्पसंख्यकों के आयुक्तगृह मंत्रालय
13बाल अधिकारों के संरक्षण हेतु राष्ट्रीय आयोगमहिला एवं बाल विकास मंत्रालय
14पिछड़े वर्गों के लिए राष्ट्रीय आयोगसामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय
15विकलांग व्यक्तियों के लिए केन्द्रीय आयुक्तसामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय
16केन्द्रीय समाज कल्याण बोर्डमहिला एवं बाल विकास मंत्रालय
17उत्तर-पूर्व परिषदउत्तर-पूर्व क्षेत्र विकास मंत्रालय
18केन्द्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (CAT)कार्मिक मंत्रालय
19अल्पसंख्यकों का राष्ट्रीय आयोगअल्पसंख्यक मामलों का मंत्रालय
20राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC)गृह मंत्रालय
21राष्ट्रीय महिला आयोगमहिला एवं बाल विकास मंत्रालय
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