विकसित राजस्थान 2047

विकसित राजस्थान @2047 का ग्रामीण विकास विजन ग्राम स्वराज को प्राप्त करने पर केंद्रित है।

मुख्य विजन: वर्ष 2047 तक विकेन्द्रीकृत शासन संस्थाएँ सशक्त एवं लोकतांत्रिक बनकर ग्रामीण समुदायों को सशक्त बनाएँगी तथा समावेशी अवसंरचना, आजीविका सुरक्षा, जल सुरक्षा एवं स्वच्छता के माध्यम से ग्राम स्वराज का लक्ष्य हासिल करेंगी।

छह प्रमुख क्षेत्र (Thrust Areas):

  1. समावेशी एवं सुलभ ग्रामीण अवसंरचना
  2. विकेन्द्रीकृत शासन की सशक्त प्रणाली
  3. आजीविका सुरक्षा एवं आय संवर्धन
  4. सशक्त ग्रामीण समुदाय
  5. सुरक्षित एवं जलवायु अनुकूल जल एवं स्वच्छता सेवाएँ
  6. ग्रामीण परिवर्तन हेतु भागीदारी

मध्यावधि एवं दीर्घावधि कार्ययोजना:

  • मध्यावधि (2030–35 तक): सभी ग्राम पंचायतों में कार्यरत पंचायत भवन, 100% स्वास्थ्य, शिक्षा एवं स्वच्छता, डिजिटल साक्षरता केंद्र, महिला छात्रावास एवं एक ग्राम एक उत्पाद।
  • दीर्घावधि (2040–47 तक): 100% ग्रामीण MSME, जीरो-वेस्ट गांव, स्मार्ट गांव, 100% हर घर जल एवं स्वच्छता तथा पूर्ण आर्थिक विविधीकरण।

यह विजन कल्याणकारी दृष्टिकोण से आगे बढ़कर सशक्तिकरण पर आधारित है। MGNREGS, PMAY, SBM एवं RGSA जैसी योजनाओं के समन्वय से आत्मनिर्भर, समृद्ध एवं सतत ग्रामीण राजस्थान का निर्माण किया जाएगा।

विकसित राजस्थान@2047: दीर्घकालिक विजन

“वर्ष 2047 तक राजस्थान नए भारत का अग्रणी राज्य बनेगा – जहां समावेशी विकास, सशक्त नागरिक, विश्वस्तरीय आधारभूत संरचना, सतत विकास और पारदर्शी शासन की झलक दिखेगी। यह विजन राजस्थान की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत में निहित होगा और यहां की जनता की अग्रणी भावना से संचालित होगा।”

विकसित राजस्थान@2047 का विजन चार परस्पर जुड़े प्रमुख विषयों में विभाजित है, जिनके अंतर्गत 13 क्षेत्रीय क्षेत्र आते हैं।

विषय (Themes)क्षेत्रीय स्तंभप्रमुख बाधाएँ
Theme A: Nurturing People, Strengthening Society (जनकल्याण और सामाजिक सशक्तिकरण) 
कृषि-खाद्य प्रणालियों में रूपांतरण
* क्षेत्रीय-रोजगार असंतुलन: कृषि का GSVA में योगदान केवल ~25% किंतु 55%+ श्रमशक्ति को रोजगार, जिससे श्रमिक कम-उत्पादकता वाली गतिविधियों में फँसे रहते हैं; 
* जलवायुगत असुरक्षा असंगत रूप से लघु किसानों, चरवाहों व जनजातीय समुदायों को प्रभावित करती है।
स्वास्थ्य एवं कल्याण
* IMR 30/1000 (राष्ट्रीय 24/1000); NFHS-6 में बाल दुर्बलता 19.8% व कम-वजन 33.3% तक बढ़ी — राष्ट्रीय प्रवृत्ति से खराब; 
* पूर्ण टीकाकरण 75% (राष्ट्रीय ~87% से कम); कम जन्म-वजन शिशु मृत्यु के लगभग 30% कारणों में शामिल।
शिक्षा एवं ज्ञान-आधारित अर्थव्यवस्था
* साक्षरता 66.1% (जनगणना 2011) बनाम राष्ट्रीय 73%; HDI ~0.692 (~23वीं रैंक, 2023); 
* महिला साक्षरता पीछे; 
* नियमित वेतनभोगी नौकरियों की कम हिस्सेदारी कौशल-बाज़ार संयोजन की दुर्बलता दर्शाती है।
सामाजिक सशक्तिकरण एवं समावेशन* बाल लिंगानुपात 888 बनाम कुल 928 — बेटा-प्राथमिकता का संकेत; 
* महिला LFPR (50.5%→54.1%) बढ़ने के बावजूद महिला बेरोजगारी 3.2% से बढ़कर 4.5%; 
* 88% वित्तीय समावेशन के बावजूद स्थानीय शासन में महिला प्रतिनिधित्व सीमित।
Theme B: Accelerating Growth, Building Prosperity & Employability (त्वरित विकास, समृद्धि एवं रोजगार सृजन)औद्योगिक, खनन एवं आर्थिक वृद्धि* शीर्ष 5 जिले (जयपुर, अलवर, जोधपुर, भीलवाड़ा, अजमेर) GSDP के ~37% के लिए उत्तरदायी; 
* PCI ₹2,02,349 अभी भी राष्ट्रीय ₹2,19,575 से ~8% कम; 
* GSDP में 7वें स्थान के बावजूद PCI रैंक तीन दशकों से 20-23वें स्थान पर स्थिर; नियमित वेतनभोगी नौकरियों की राष्ट्रीय औसत से कम हिस्सेदारी।
पर्यटन एवं सांस्कृतिक विकास* पर्यटन-संबंधित सेवाओं का जयपुर–उदयपुर–जैसलमेर पट्टी में क्षेत्रीय संकेंद्रण; 
* पिछड़े जिलों (बांसवाड़ा, डूंगरपुर, बारां, करौली) को सीमित पर्यटन आय व रोजगार प्राप्त होता है।
Theme C: Future-Ready Rajasthan – Infrastructure & Sustainability (भविष्य उन्मुख राजस्थान आधारभूत अवसंरचना और सतत विकास) आधारभूत संरचना* दूरस्थ व जनजातीय क्षेत्रों में अंतिम-मील सड़क व डिजिटल अवसंरचना अपर्याप्त, जिससे हाशिए के समुदायों हेतु आर्थिक अवसर सीमित; 
* इंटरनेट पहुँच दोगुनी होने के बावजूद ग्रामीण महिलाओं व वृद्धों में सार्थक डिजिटल उपयोग कम।
जल सुरक्षा एवं अनुकूलन क्षमता* मुख्यतः शुष्क/अर्ध-शुष्क होने के कारण राजस्थान उच्च जलवायु जोखिमों (सूखा, जल संकट) का सामना करता है, जो पश्चिमी जिलों के लघु व सीमांत किसानों, चरवाहों व जनजातीय समुदायों को असंगत रूप से प्रभावित करते हैं।
पर्यावरणीय सततता एवं जलवायु अनुकूलन* 85% से अधिक यूटिलिटी-स्तरीय सौर व पवन परियोजनाएँ मात्र 4 जिलों (बाड़मेर, बीकानेर, जैसलमेर, जोधपुर) में केंद्रित, जिससे अन्य शुष्क क्षेत्रों को हरित रोजगार व भूमि-पट्टा आय नहीं मिलती; 
* कमज़ोर वर्गों हेतु जलवायु अनुकूलन अंतर।
Theme D: The Enablers – Policy, Finance & Governance (संवर्धक — नीति, वित्त और शासन) ग्रामीण विकास* ग्रामीण जिनी गुणांक 2011-12 के 0.248 से बढ़कर 2022-23 में 0.283 — जबकि राष्ट्रीय स्तर पर 0.283 से घटकर 0.266 हुआ; 
* ग्रामीण-शहरी असमानता आय, स्वास्थ्य, शिक्षा व अवसंरचना में विद्यमान।
शहरी विकास* आर्थिक गतिविधि जयपुर–अलवर–जोधपुर पट्टी में संकेंद्रित; शुष्क व जनजातीय जिले (बाड़मेर, जैसलमेर, बांसवाड़ा, डूंगरपुर) पिछड़े हैं; 
* केवल 3 शहरों की आबादी 10 लाख से अधिक।
प्रभावी शासन एवं सार्वजनिक सेवाएं* MGNREGA व PM-KISAN में स्थानीय स्तर पर रिसाव व प्रवासियों का बहिष्करण; 
* स्थानीय शासन, उद्यमिता व औपचारिक निर्णय-निर्माण में महिला प्रतिनिधित्व सीमित; सीमांत उद्यमियों को ऋण व बाज़ार पहुँच में कठिनाई।
वित्तीय प्रबंधन एवं आर्थिक नीति* तीव्र अंतर-जिला GDDP अंतर — जयपुर ₹2,12,335 करोड़ बनाम जैसलमेर ₹17,903 करोड़ (~12 गुना अंतर); 
* राजस्थान SDG इंडेक्स स्कोर 60.80 के साथ जिलों में विस्तृत अंतर (झुंझुनू 67.13 बनाम जैसलमेर 51.82); 
* संरचनात्मक असंतुलनों को पाटने हेतु राजकोषीय समर्थन अपर्याप्त।

Viksit Rajasthan @2047 का लक्ष्य राज्य को आत्मनिर्भर, समृद्ध और विकसित बनाने का है। इसके लिए बजट 2026-27 में 10 प्रमुख विकास संकल्प/स्तंभ घोषित किए गए हैं। इन संकल्पों को पूरा करने के लिए बजट में इंफ्रास्ट्रक्चर, युवा, उद्योग, सामाजिक सुरक्षा और पर्यटन जैसे क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया गया है।

10 प्रमुख विकास संकल्प ( आधार-स्तंभ )

संकल्प / विकास का आधार-स्तंभबजट 2026-27 की प्रमुख पहलें
1. आधारभूत संरचना का विस्तारराज्य राजमार्गों, रेलवे ओवरब्रिज/रेलवे अंडरब्रिज(ROBs/RUBs), फ्लाईओवर आदि के लिए 1,800 करोड़ रुपये। 250 अटल प्रगति पथ। मुख्यमंत्री जल जीवन मिशन (शहरी) के तहत 5,000 करोड़ रुपये से अधिक। AMRUT 2.0, बीकानेर एवं जैसलमेर में 4,830 मेगावाट क्षमता के सौर पार्क, राजस्थान राज्य जल नीति।
2. नागरिक सुविधाओं के माध्यम से जीवन की गुणवत्ता में सुधार7 लाख स्ट्रीट लाइट्स, पंचगौरव योजना (150 करोड़ रुपये), RAJ-SETU फंड (शहरी एवं आधारभूत संरचना वित्तपोषण के लिए)।
3. औद्योगिक विकास एवं निवेश प्रोत्साहनऔद्योगिक क्षेत्रों के लिए भूमि एकत्रीकरण, लघु एवं सूक्ष्म उद्यमों के लिए प्लग एंड प्ले सुविधाएं (350 करोड़ रुपये), इनलैंड कंटेनर डिपो, मल्टी-मॉडल लॉजिस्टिक हब, राजस्थान फाउंडेशन के 14 नए चैप्टर, वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट (ODOP) नीति 2024 का क्रियान्वयन।
4. मानव संसाधन विकासयुवा नीति, कौशल नीति, रोजगार नीति। मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना (1,000 करोड़ रुपये), स्टार्टअप्स के लिए VIBRANT कार्यक्रम, 150 महाविद्यालयों में रानी लक्ष्मीबाई केंद्र, DREAM कार्यक्रम, राज-सावेरा (नशा मुक्ति), प्रत्येक जिले में कौशल विकास संस्थान, छात्रों के लिए ई-वाउचर, 1,000 स्कूलों में AI आधारित व्यक्तिगत शिक्षा प्रयोगशालाएं, 400 CM-RISE स्कूल, राज-सुरक्षा एवं राज-ममता स्वास्थ्य कार्यक्रम।
5. सामाजिक सुरक्षा को सुदृढ़ करनाग्रामीण महिला बिज़नेस प्रोसेस आउटसोर्सिंग (BPO) केंद्र, मुख्यमंत्री लक्ष्मीपति दीदी ऋण योजना (ऋण सीमा 1 लाख से बढ़ाकर 1.5 लाख रुपये), 50 नए उद्यम, राज सखी स्टोर्स, उद्यमिता केंद्र, मुख्यमंत्री नारी शक्ति उद्यम प्रोत्साहन योजना (ऋण सीमा 50 लाख से बढ़ाकर 1 करोड़ रुपये), 11,000 अमृत पोषण वाटिकाएं, नंदघर, श्रम-सेतु मोबाइल ऐप, प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल नीति।
6. पर्यटन, कला एवं सांस्कृतिक धरोहरखुड़ी-जैसलमेर में अल्ट्रा लग्जरी स्पेशल टूरिज्म जोन, कुलधारा में पर्यटक सुविधा केंद्र, भरतपुर में ब्रज कन्वेंशन सेंटर (100 करोड़ रुपये), शेखावाटी हवेली संरक्षण, थार सांस्कृतिक सर्किट, झुंझुनूं में वॉर म्यूजियम।
7. सुशासन एवं डिजिटल परिवर्तननेक्स्ट जेनरेशन नागरिक सेवा सुधार, स्मार्ट सेवा केंद्र, व्हाट्सएप आधारित सेवाएं, ड्रोन नीति, डी-रेगुलेशन 2.0, राजस्थान जन विश्वास अधिनियम 2.0।
8. कृषि विकास एवं किसान कल्याणसिंचाई परियोजनाएं (11,300 करोड़ रुपये से अधिक), 50,000 सौर पंप, कस्टम हायरिंग केंद्र, मिशन राज GIFT, उत्कृष्टता केंद्र, सहकारी डेयरी इंफ्रास्ट्रक्चर विकास कोष को दोगुना कर 2,000 करोड़ रुपये।
9. हरित विकास एवं पर्यावरणीय सतततामिशन हरियालो राजस्थान (10 करोड़ पौधरोपण), नमो नर्सरी, नमो वन, 16 जिलों में ऑक्सीजन जोन, PRITHWI परियोजना (1,500 करोड़ रुपये), MJSA 2.0 के तहत 5,000 गांवों में 1.10 लाख जल संचयन संरचनाएं (2,500 करोड़ रुपये), जोबनेर में प्राकृतिक खेती उत्कृष्टता केंद्र, सामान्य अपशिष्ट उपचार संयंत्र(CETP), कम्प्रेस्ड बायो गैस प्लांट।
10. 2047 तक 4.3 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्थाकृषि बजट में 7.59 प्रतिशत वृद्धि, निर्यात प्रोत्साहन नीति, MSME नीति, लॉजिस्टिक्स नीति और निवेश-अनुकूल सुधार।

बजट 2026-27 के 10 संकल्प सामूहिक रूप से भौतिक अवसंरचना, मानव विकास, सामाजिक सुरक्षा, हरित विकास एवं आर्थिक रूपांतरण को कवर करते हुए एक समग्र रोडमैप प्रदान करते हैं। इन दस संकल्पों के साथ राजकोषीय आवंटन को संरेखित करते हुए तथा राजकोषीय अनुशासन (घाटा GSDP का 3.69%) बनाए रखते हुए, राजस्थान विकसित राजस्थान@2047 के दृष्टिकोण को साकार करने तथा विकसित भारत का अग्रणी राज्य बनने की एक मजबूत नींव तैयार कर रहा है।

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