रणनीतिक नियंत्रण एवं मूल्यांकन

रणनीतिक मूल्यांकन एवं नियंत्रण रणनीतिक प्रबंधन का अंतिम चरण है, जिसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि संगठन की रणनीतियाँ निर्धारित उद्देश्यों की प्राप्ति कर रही हैं। पारंपरिक दृष्टिकोण मुख्यतः वास्तविक प्रदर्शन की तुलना पूर्व निर्धारित मानकों से करता है, जबकि आधुनिक दृष्टिकोण रणनीति के पूरे क्रियान्वयन के दौरान निरंतर निगरानी एवं समय पर सुधारात्मक कार्यवाही पर बल देता है।

पारंपरिक दृष्टिकोणआधुनिक दृष्टिकोण
मुख्यतः रणनीति के क्रियान्वयन के बाद प्रदर्शन का मूल्यांकन करता है।रणनीति निर्माण एवं क्रियान्वयन के दौरान निरंतर मूल्यांकन पर बल देता है।
पूर्व निर्धारित प्रदर्शन मानकों का निर्धारण किया जाता है।रणनीति के क्रियान्वयन के प्रत्येक चरण की सतत् निगरानी की जाती है।
वास्तविक प्रदर्शन की तुलना निर्धारित मानकों से की जाती है।संभावित समस्याओं की प्रारम्भिक अवस्था में ही पहचान की जाती है।
प्रदर्शन में विचलन की पहचान बाद में की जाती है।आवश्यकता पड़ने पर तत्काल सुधारात्मक कार्यवाही की जाती है।
स्थिर एवं अपेक्षाकृत निश्चित व्यावसायिक वातावरण के लिए उपयुक्त है।गतिशील, प्रतिस्पर्धात्मक एवं तेजी से बदलते व्यावसायिक वातावरण के लिए अधिक उपयुक्त है।
नियंत्रण एवं त्रुटि सुधार पर अधिक बल देता है।निरंतर अधिगम, लचीलापन एवं रणनीतिक अनुकूलन पर बल देता है।

रणनीतिक नियंत्रण: रणनीतिक नियंत्रण इस बात की निगरानी करता है कि संगठन अपने दीर्घकालिक उद्देश्यों की प्राप्ति के लिए सही दिशा में आगे बढ़ रहा है या नहीं। यह सुनिश्चित करता है कि बदलते व्यावसायिक वातावरण में रणनीतियाँ प्रासंगिक बनी रहें।

  1. आधार नियंत्रण: आधार नियंत्रण में यह जाँच की जाती है कि रणनीति निर्माण के समय किए गए मूल अनुमानों की वैधता अभी भी बनी हुई है या नहीं। ये अनुमान आर्थिक परिस्थितियों, बाज़ार प्रवृत्तियों या तकनीकी विकास से संबंधित हो सकते हैं।
    • उदाहरण: यदि कोई वाहन निर्माण कंपनी यह मानकर पेट्रोल वाहनों को बाज़ार में उतारने की योजना बनाती है कि ईंधन की कीमतें स्थिर रहेंगी, लेकिन बाद में ईंधन की कीमतें तेजी से बढ़ जाती हैं, तो कंपनी को अपनी रणनीति बदलकर विद्युत वाहनों की ओर ध्यान देना पड़ सकता है।
  2. क्रियान्वयन नियंत्रण: क्रियान्वयन नियंत्रण यह निगरानी करता है कि रणनीतियाँ नियोजित रूप से लागू हो रही हैं या नहीं। यह क्रियान्वयन के दौरान होने वाले विचलनों की पहचान करने और सुधारात्मक कदम उठाने में सहायता करता है।
    • उदाहरण: यदि कोई कंपनी एक वर्ष में 50 नए खुदरा केंद्र खोलने की योजना बनाती है, लेकिन छह महीनों में केवल 20 केंद्र ही खुल पाते हैं, तो क्रियान्वयन नियंत्रण देरी के कारणों की पहचान करने और क्रियान्वयन में सुधार करने में सहायता करेगा।
  3. विशेष चेतावनी नियंत्रण: विशेष चेतावनी नियंत्रण का उपयोग अचानक और अप्रत्याशित घटनाओं के प्रति प्रतिक्रिया देने के लिए किया जाता है, जो संगठन की रणनीतियों को प्रभावित कर सकती हैं।
    • उदाहरण: कोविड-19 महामारी के दौरान अनेक भोजनालयों ने ग्राहकों के लिए भोजनालय सेवा के स्थान पर ऑनलाइन वितरण प्रणाली को अपनाया।
  4. रणनीतिक पर्यवेक्षण: रणनीतिक पर्यवेक्षण में आंतरिक और बाह्य पर्यावरणीय कारकों की निरंतर निगरानी की जाती है ताकि संभावित अवसरों और खतरों की पहचान की जा सके।
    • उदाहरण: प्रौद्योगिकी कंपनियाँ नई तकनीकी प्रगति पर निरंतर निगरानी रखती हैं ताकि नवाचारों को अपनाकर बाज़ार में प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति बनाए रख सकें।
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