आनुवंशिक अभियांत्रिकी और जैव प्रौद्योगिकी विज्ञान और प्रौद्योगिकी का एक महत्वपूर्ण विषय है, जिसमें जीवों के आनुवंशिक पदार्थ में परिवर्तन तथा जैविक प्रक्रियाओं के तकनीकी उपयोग का अध्ययन किया जाता है। यह क्षेत्र चिकित्सा, कृषि, उद्योग और पर्यावरण संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इस विषय के अंतर्गत हम आनुवंशिक संशोधन, जैव तकनीकी उपकरणों, अनुप्रयोगों तथा आधुनिक नवाचारों का अध्ययन करेंगे।
आनुवंशिक अभियांत्रिकी और जैव प्रौद्योगिकी के मूल सिद्धांत
जैव प्रौद्योगिकी उन तकनीकों का समूह है जिनमें जीवित जीवों या उनके एंजाइमों का उपयोग मानव उपयोगी उत्पाद और प्रक्रियाएं विकसित करने के लिए किया जाता है। उदाहरणार्थ, दही, ब्रेड, वाइन (मदिरा) और टीकों (Vaccines) का उत्पादन। आधुनिक जैव प्रौद्योगिकी के विकास के दो प्रमुख आधार स्तंभ निम्नलिखित हैं:
- आनुवंशिक इंजीनियरिंग (Genetic Engineering): यह वह तकनीक है जिसमें आनुवंशिक सामग्री (DNA और RNA) की रासायनिक संरचना को बदला जाता है, ताकि इसे पोषद जीवों (Host organisms) में प्रवेश कराया जा सके और इस तरह पोषद जीव के लक्षणप्ररूप (Phenotype/Traits) में वांछित परिवर्तन लाया जा सके।
- जैवप्रक्रम इंजीनियरिंग (Bioprocess Engineering): इस प्रक्रिया का उद्देश्य उत्पादन वातावरण को पूरी तरह से स्वच्छ और रोगाणुहीन (अवांछित सूक्ष्मजीवों से मुक्त) बनाए रखना है। यह सुनिश्चित करता है कि केवल वांछित सूक्ष्मजीव या कोशिका ही बड़ी मात्रा में वृद्धि कर सके और उपयोगी जैविक उत्पादों (जैसे- प्रतिजैविक/एंटीबायोटिक्स, टीके, एंजाइम) का कुशलतापूर्वक निर्माण कर सके।
जैव प्रौद्योगिकी के क्षेत्र (Biotechnology Areas)
| रंग वर्गीकरण | क्षेत्र | महत्वपूर्ण उदाहरण और उपयोग |
| नीली जैव प्रौद्योगिकी (Blue Biotechnology) | समुद्री और जलीय जैव प्रौद्योगिकी | समुद्री खाद्य उत्पादन में वृद्धि, हानिकारक जल-जनित जीवों का नियंत्रण, नई दवाओं का विकास। |
| हरित जैव प्रौद्योगिकी (Green Biotechnology) | कृषि जैव प्रौद्योगिकी | पारजीनी (Transgenic)/जीएम फसलें, उन्नत पोषण गुणवत्ता, उच्च उपज, पर्यावरण के अनुकूल उत्पाद। |
| लाल जैव प्रौद्योगिकी (Red Biotechnology) | चिकित्सा और स्वास्थ्य जैव प्रौद्योगिकी | इंसुलिन, प्रतिजैविक (एंटीबायोटिक्स), टीकों और उपचारात्मक एंजाइमों का उत्पादन। |
| सफेद जैव प्रौद्योगिकी (White Biotechnology) | औद्योगिक जैव प्रौद्योगिकी | औद्योगिक उत्प्रेरकों के रूप में एंजाइमों का उपयोग, पर्यावरण के अनुकूल रसायनों का उत्पादन। |
कोशिकांग और उनके कार्य
| केन्द्रक | डीएनए का भंडारण करता है। |
| माइटोकॉन्ड्रिया | ऊर्जा उत्पादन (ATP) कोशिका का शक्ति गृह |
| राइबोसोम | प्रोटीन उत्पादन |
| लाइसोसोम | कोशिकीय अपशिष्ट का विघटन और पुनर्चक्रण (कोशिका का पाचन तंत्र)प्रोटीन विनाश भी करते हैं।आत्मघाती थैलियां। |
| रिक्तिका | कोशिका में जल, पोषक तत्व, और अपशिष्ट पदार्थों को संग्रहित करता है। |
पादप कोशिका बनाम जंतु कोशिका (Plant Cell vs Animal Cell)
| विशेषता | पादप कोशिका | जंतु कोशिका |
| कोशिका भित्ति | उपस्थित (बाहरी आवरण, सेलुलोज की बनी होती है) + आंतरिक कोशिका झिल्ली। | अनुपस्थित, केवल कोशिका झिल्ली (Cell membrane) उपस्थित। |
| रिक्तिका (Vacuole) | बड़ी, एकल केंद्रीय रिक्तिका (स्फीति दाब बनाए रखती है, पोषक तत्वों का संग्रहण करती है)। | अनेक छोटी रिक्तिकाएँ, जो प्रकृति में अस्थायी होती हैं। |
| हरितलवक | उपस्थित, प्रकाश संश्लेषण का स्थल (क्लोरोफिल युक्त) | अनुपस्थित, प्रकाश संश्लेषण नहीं होता |
| आकार | सामान्यतः कठोर, आयताकार (कोशिका भित्ति के कारण) | सामान्यतः गोलाकार, अनियमित आकार |
| लाइसोसोम्स | बहुत कम पाए जाते हैं (यदि हों तो कम प्रमुख) | संख्या में अधिक और प्रमुख |
| सेंट्रिओल्स (तारककाय) | अनुपस्थित (निम्न श्रेणी के पादपों को छोड़कर) | उपस्थित, कोशिका विभाजन के लिए महत्वपूर्ण। |
| पोषण का प्रकार | स्वपोषी (प्रकाश संश्लेषण संभव) | परपोषी (भोजन के अंतर्ग्रहण पर निर्भर)। |
आनुवंशिकी के मूल सिद्धांत
- आनुवंशिकी: जीव विज्ञान की वह शाखा जो वंशागति (Heredity) और विविधता (Variation) के अध्ययन से संबंधित है, आनुवंशिकी कहलाती है। ‘जेनेटिक्स’ शब्द का सर्वप्रथम प्रयोग बेटसन (1905) द्वारा किया गया था।
- जीन (Gene): जीन DNA का वह खंड है जिसमें एक कार्यात्मक उत्पाद (आमतौर पर एक प्रोटीन) बनाने के लिए आवश्यक जानकारी होती है। जीनों का आकार और कार्य भिन्न हो सकता है; मनुष्यों में लगभग 19,000-25,000 जीन होने का अनुमान है।
- युग्मविकल्पी या एलील: किसी एक लक्षण (जैसे रंग, लंबाई) को नियंत्रित करने वाले जीन के वैकल्पिक रूप को युग्मविकल्पी या एलील कहते हैं। उदाहरण: पौधे की लंबाई एक जीन द्वारा नियंत्रित होती है जिसके दो एलील T (लंबापन) और t (बौनापन) होते हैं।
- गुणसूत्र (Chromosome)
- प्रत्येक कोशिका के केंद्रक में, DNA अणु धागे जैसी संरचनाओं में लिपटे होते हैं जिन्हें गुणसूत्र कहा जाता है।
- ये जीन के रूप में आनुवंशिक जानकारी ले जाते हैं, जो एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में जाने वाले वंशानुगत लक्षणों को निर्धारित करते हैं।
- मनुष्यों में 46 गुणसूत्र होते हैं, जो 23 जोड़ों में व्यवस्थित होते हैं।
- जीन प्ररूप (Genotype): किसी जीव के DNA में मौजूद जीनों का वह विन्यास या पैटर्न जो विशिष्ट लक्षणों के लिए उत्तरदायी होता है (यह आंतरिक संरचना है)।
- लक्षण प्ररूप (Phenotype): किसी जीव के दिखने वाले प्रत्यक्ष भौतिक गुण (जैसे रंग, रूप, ऊंचाई)।
- न्यूक्लिक अम्ल:
- संरचना: ये न्यूक्लियोटाइड्स के बहुलक होते हैं। प्रत्येक न्यूक्लियोटाइड तीन मुख्य घटकों से बना होता है:
- शर्करा अणु (Sugar Molecule): यह संरचनात्मक आधार प्रदान करता है।
- फॉस्फेट समूह (Phosphate Group): यह न्यूक्लियोटाइड्स को आपस में जोड़ता है।
- नाइट्रोजनी क्षारक (Nitrogenous Base): यह आनुवंशिक कूट (कोड) को निर्धारित करता है।
- क्षारक उदाहरण: एडिनीन (A), गुआनीन (G), साइटोसीन (C)।
- विशिष्ट क्षारक: थायमीन (T) (केवल DNA में) और यूरैसिल (U) (केवल RNA में)।
- न्यूक्लिक अम्ल दो प्रकार के होते हैं:
- DNA: डीऑक्सीराइबोन्यूक्लिक अम्ल
- RNA: राइबोन्यूक्लिक अम्ल
- संरचना: ये न्यूक्लियोटाइड्स के बहुलक होते हैं। प्रत्येक न्यूक्लियोटाइड तीन मुख्य घटकों से बना होता है:



डीएनए और आरएनए के बीच प्रमुख अंतर
| विशेषता | DNA (डीऑक्सी राइबोन्यूक्लिक एसिड) | RNA (राइबोन्यूक्लिक एसिड) |
| शर्करा | डीऑक्सीराइबोज | राइबोज |
| संरचना | द्विसूत्री हेलिक्स | एक-सूत्रीय |
| नाइट्रोजन क्षार | एडेनिन (A),थाइमिन (T), गुआनिन (G) और साइटोसिन (C) | A, U, G, C (यूरेसिल थायमिन का स्थान लेता है) |
| स्थान | न्यूक्लियस और माइटोकॉन्ड्रिया | केन्द्रक, कोशिका द्रव्य, राइबोसोम |
| कार्य | दीर्घकालिक आनुवंशिक भंडारण | सूचना के स्थानांतरण और अभिव्यक्ति में सहायक → प्रोटीन संश्लेषण (mRNA, tRNA, rRNA) |
| स्थिरता | अधिक स्थिर | कम स्थिर (अतिरिक्त -OH समूह के कारण), अल्पकालिक |
| प्रतिकृति (Replication) | स्वयं की प्रतिकृति बनाता है | DNA से संश्लेषित होता है |
डीएनए से संबंधित कुछ महत्वपूर्ण अपडेट
माइटोकॉन्ड्रियल डीएनए (mtDNA) / सूत्रकणिकीय डीएनए
| पहलू | विवरण |
| स्थिति | यह माइटोकॉन्ड्रिया (कोशिका द्रव्य) में पाया जाता है, और केंद्रकीय डीएनए से अलग होता है। |
| संरचना | छोटा, वृत्ताकार और द्विरज्जुकीय (Double-stranded) डीएनए (लगभग 16,500 क्षार युग्म; मनुष्यों में 37 जीन)। |
| जीन(37) | 13 प्रोटीन (ऑक्सीडेटिव फास्फोरिलेशन) + 22 tRNAs + 2 rRNAs (माइटोकॉन्ड्रियल प्रोटीन संश्लेषण)। (इसमें mRNA → अनुपस्थित होता है)। |
| वंशागति | मातृ वंशागति → यह लगभग विशेष रूप से केवल माता से ही संतान में स्थानांतरित (वंशागत) होता है। |
| कार्य | र्जा उत्पादन (ATP), उपापचय नियमन, संकेतन, और एपोप्टोसिस (क्रमादेशित कोशिका मृत्यु)। |
| केंद्रकीय डीएनए से अंतर | – पृथक जीनोम, वृत्ताकार (जबकि केंद्रक में रेखीय)।- हिस्टोन प्रोटीन का अभाव → → इसलिए यह केंद्रकीय डीएनए की तुलना में अधिक तेजी से उत्परिवर्तित होता है। – यह आकार में छोटा होता है और इसकी कूटलेखन (Coding) क्षमता सीमित होती है। – यह विशेष रूप से केवल माता से प्राप्त होता है (जबकि केंद्रकीय डीएनए → माता और पिता दोनों से प्राप्त होता है)। |
| चिकित्सीय महत्व | इसमें होने वाले उत्परिवर्तन के कारण माइटोकॉन्ड्रियल रोग होते हैं (उदाहरण: लेह सिंड्रोम, MELAS)। |
| अन्य महत्व | फोरेंसिक में उपयोग (मातृ वंश, क्षतिग्रस्त नमूने), वंशावली अध्ययन, उम्र बढ़ने और कैंसर से संबंधित। |
डार्क डीएनए और जंक डीएनए (Dark DNA and Junk DNA)
- डार्क डीएनए: जीनोम (किसी जीव का पूरा आनुवंशिक कोड) का वह हिस्सा है जिसे पता लगाना या समझना मुश्किल होता है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि इसमें बहुत अधिक बदलाव (उत्परिवर्तन) होते हैं या यह बार-बार दोहराया जाता है। माना जाता है कि यह जीन नियमन, उद्विकास और प्रजातियों के अनुकूलन के लिए महत्वपूर्ण है।
- जंक डीएनए: वह डीएनए है जो पहले बेकार या बिना कार्य वाला माना जाता था। अब वैज्ञानिक मानते हैं कि इसका अधिकांश हिस्सा जीनों को नियंत्रित करने और क्रोमोसोम (कोशिका के अंदर धागे जैसी संरचनाएँ जिनमें जीन होते हैं) की संरचना को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
सेल-फ्री डीएनए (cfDNA)
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पहलू |
विवरण |
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परिभाषा |
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स्रोत |
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प्रकृति |
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प्रमुख विशेषता |
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अनुप्रयोग |
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आरएनए के प्रमुख प्रकार
- mRNA (संदेशवाहक आरएनए)
- डीएनए से आनुवंशिक जानकारी की प्रतिलिपि बनाता है (ट्रांसक्रिप्शन/अनुलेखन) और प्रोटीन संश्लेषण के लिए उन्हें राइबोसोम तक ले जाता है।
- आरएनए पोलीमरेज़ एंजाइम का उपयोग करके ट्रांसक्राइब (अनुलेखन) किया जाता है।
- tRNA (ट्रांसफर आरएनए)
- ट्रांसलेशन के दौरान अमीनो अम्लों को राइबोसोम तक लाता है।
- mRNA को ट्रिपलेट्स (कोडॉन्स – 3 न्यूक्लियोटाइड अनुक्रम) में पढ़ता है → प्रत्येक कोडॉन एक विशिष्ट अमीनो अम्ल के लिए कोड करता है।
- rRNA (राइबोसोमल आरएनए)
- राइबोसोम का संरचनात्मक और उत्प्रेरक घटक।
- पेप्टाइड बंधन निर्माण को सुगम बनाता है (राइबोजाइम के रूप में कार्य करता है)।
नोबेल पुरस्कार – चिकित्सा, 2024 (विक्टर एम्ब्रोज़ और गैरी रुवकुन
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किसके लिए? |
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अनुलेखन-पश्च जीन नियमन के बारे में |
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माइक्रो आरएनए के बारे में (microRNA) |
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प्रोटीन संश्लेषण (आणविक जीव विज्ञान का मूल सिद्धांत)
- यह कोशिकाओं में आनुवंशिक सूचनाओं के प्रवाह का वर्णन करता है: डीएनए → आरएनए → प्रोटीन (DNA → RNA → Protein)।

- जीन अभिव्यक्ति: वह प्रक्रिया जिसके द्वारा डीएनए (DNA) में निहित निर्देशों को कार्यात्मक प्रोटीन (Functional proteins) में परिवर्तित किया जाता है। यह मुख्य रूप से दो चरणों में संपन्न होती है:
- प्रतिलेखन (ट्रांसक्रिप्शन)
- स्थान: यह केंद्रक (Nucleus) में होता है।
- प्रक्रिया: mRNA, डीएनए से एक जीन के अनुक्रम की प्रतिलिपि बनाता है।
- एंजाइम: RNA पोलीमरेज़।
- परिणाम: नव-संश्लेषित mRNA (संदेशवाहक आरएनए) केंद्रक से बाहर निकलकर → कोशिका द्रव्य (Cytoplasm) में आ जाता है।
- अनुवादन (ट्रांसलेशन) (राइबोसोम में कोशिका द्रव्य में होता है)
- स्थान: यह कोशिका द्रव्य में राइबोसोम पर होता है।
- प्रक्रिया: राइबोसोम mRNA अनुक्रम को पढ़ते हैं।
- tRNA की भूमिका: अंतरण आरएनए (tRNA) विशिष्ट अमीनो अम्लों को राइबोसोम तक लाते हैं।
- परिणाम: अमीनो अम्ल आपस में जुड़कर एक पॉलीपेप्टाइड श्रृंखला बनाते हैं, जिसके परिणामस्वरूप प्रोटीन संश्लेषण संपन्न होता है।
- प्रतिलेखन (ट्रांसक्रिप्शन)

जीनोम अनुक्रमण (Genome Sequencing)
- जीनोम अनुक्रमण वह प्रक्रिया है जिसमें किसी जीव के डीएनए के पूरे सेट में न्यूक्लियोटाइड (A, T, C, G) के सटीक क्रम का निर्धारण किया जाता है।
- जीनोम (Genome): किसी जीव का डीएनए का पूर्ण सेट।
- जीनोम में कोडिंग और नॉन-कोडिंग डीएनए दोनों शामिल होते हैं।
- मानव जीनोम = 23 जोड़ी गुणसूत्रों में लगभग 3 अरब बेस पेयर्स।
- पूर्ण जीनोम अनुक्रमण (WGS): एक प्रयोगशाला तकनीक है जो एक ही प्रक्रिया में पूरे जीनोम के चारों बेस (A, T, C, G) के क्रम को पढ़ती है।
महत्वपूर्ण जीनोम अनुक्रमण पहल
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परियोजना / पहल |
विवरण / उद्देश्य |
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मानव जीनोम परियोजना (1990-2003) |
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इंडिजेन (IndiGen)(2019) |
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जीनोम इंडिया प्रोजेक्ट (2020-2023) |
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वन डे वन जीनोम इनिशिएटिव (One Day One Genome Initiative) |
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टेलोमियर टू टेलोमियर (T2T) कंसोर्टियम |
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इंडिगउ (INDIGAU) |
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राष्ट्रीय जीनोम ग्रिड |
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डीपवेरिएंट DeepVariant: जीनोमिक्स में एआई |
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अल्फाफोल्ड (AlphaFold) (रसायन विज्ञान में नोबेल पुरस्कार 2024) |
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टेमेसिप्टेरिस ओब्लेंसियोलाटा (Tmesipteris oblanceolata)
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यह क्या है? |
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जीनोम का आकार |
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सी-वैल्यू पैराडॉक्स (C-value Paradox) |
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जीन संपादन (Gene Editing)
पुनर्योगज/पुनर्संयोजित डीएनए तकनीक (Recombinant DNA Technology)
- पुनर्योगज डीएनए तकनीक वह प्रक्रिया है जिसमें किसी जीव के आनुवंशिक कोड (डीएनए) में सीधे हेरफेर करके वांछित लक्षण प्राप्त किए जाते हैं।
- इसमें एक जीवित प्राणी के जीनोम में डीएनए को जोड़ना, हटाना, बदलना या प्रतिस्थापित करना शामिल है।
- मूल सिद्धांत: किसी जीव से वांछित जीन या डीएनए अनुक्रम को अलग करना और उसे किसी अन्य जीव के जीनोम में प्रविष्ट करना। प्रविष्ट किया गया जीन उसी प्रजाति से या किसी अन्य प्रजाति से हो सकता है।
पुनर्योगज डीएनए तकनीक के प्रमुख चरण
- आनुवंशिक पदार्थ का पृथक्करण और पहचान: स्रोत जीव से शुद्ध डीएनए प्राप्त करना।
- डीएनए का खंडन: विशिष्ट स्थलों पर डीएनए को काटने के लिए प्रतिबंधन एंजाइमों (Restriction enzymes) (जैसे- EcoRI) का उपयोग करना, जिससे छोटे डीएनए खंड प्राप्त होते हैं।
- जीन प्रवर्धन: पॉलीमरेज़ चेन रिएक्शन (PCR) का उपयोग करके वांछित जीन की अनेक प्रतियाँ तैयार करना।
- वाहक (वेक्टर) में प्रविष्टि: डीएनए लाइगेज एंजाइम की सहायता से डीएनए खंड को प्लाज्मिड या वायरल वेक्टर में जोड़ना।
- आतिथ्य कोशिका में स्थानांतरण: रूपांतरण (Transformation) प्रक्रिया द्वारा इस पुनर्योगज डीएनए को बैक्टीरिया या अन्य कोशिकाओं में डालना।
- पुनः संयोजित कोशिकाओं का चयन: एंटीबायोटिक प्रतिरोध जैसे चयन सूचकों (markers) का उपयोग करके उन कोशिकाओं का चयन करना जिनमें पुनर्योगज डीएनए सफलतापूर्वक प्रविष्ट हुआ है।
- विदेशी जीन की अभिव्यक्ति: चयनित कोशिकाओं द्वारा वांछित प्रोटीन का उत्पादन कराना।
- डाउनस्ट्रीम प्रोसेसिंग (Downstream Processing): इस प्रक्रिया में जीन उत्पाद (प्रोटीन) का शुद्धिकरण और विश्लेषण शामिल है।

पुनर्योगज डीएनए तकनीक के उपकरण (Tools of rDNA Technology)
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जैव प्रौद्योगिकी उपकरण / घटक |
विवरण / कार्य |
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प्रतिबंधन एंजाइम / प्रतिबंधन एंडोन्यूक्लिएज |
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डीएनए लाइगेज़ (DNA Ligase) |
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संवाहक (Vectors) |
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पोषद/मेजबान जीव (Host Organisms) |
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जीन स्थानांतरण विधियाँ / रूपांतरण उपकरण |
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जेल वैद्युत कण संचलन (Gel Electrophoresis) |
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डीएनए पॉलीमरेज़ (DNA Polymerase) |
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जीन संपादन / जीन संशोधन तकनीकें |
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क्रिस्पर-कैस9 तकनीक (CRISPR-Cas9 Technology)
- क्लस्टर्ड रेगुलरली इंटरस्पेस्ड शॉर्ट पैलिंड्रोमिक रिपीट्स (CRISPR)
- क्रिस्पर जीनोम संपादन के लिए एक अत्यंत शक्तिशाली उपकरण है, जो शोधकर्ताओं को डीएनए अनुक्रमों को आसानी से बदलने और जीन के कार्य को संशोधित करने की अनुमति देता है।
- कैस9 (Cas9): क्रिस्पर-संबद्ध प्रोटीन 9
- Cas9 एक एंजाइम है जो CRISPR तकनीक में आणविक कैंची (molecular scissors) की तरह कार्य करता है।
- Cas9 + गाइड RNA → डीएनए को एक विशिष्ट अनुक्रम पर सटीक रूप से लक्षित करता है और काटता है।
- यह दोषपूर्ण जीनों (Defective genes) के सुधार या नए जीनों के प्रवेश को सक्षम बनाता है।
- #हालिया विकास: Cas9 और Cas12 प्रोटीन के विकल्प के रूप में ISDra2TnpB की पहचान की गई है। (यह डाइनोकोकस रेडियोड्यूरंस नामक जीवाणु से व्युत्पन्न/प्राप्त किया गया है – जो चरम पर्यावरणीय परिस्थितियों में भी जीवित रहने में सक्षम है)।

सिकल सेल एनीमिया के इलाज के लिए CRISPR-आधारित जीन-संपादन उपचार विकसित करने की परियोजना
- पाँच वर्षीय परियोजना, जिसकी शुरुआत 2021 में हुई।
- सीएसआईआर (CSIR) अपने सिकल सेल एनीमिया मिशन के तहत इन उपचारों का विकास कर रहा है।
- भारत में CRISPR-आधारित उपचार के लिए लक्षित की जाने वाली यह पहली बीमारी है।
- CSIR के इंस्टीट्यूट ऑफ जीनोमिक्स एंड इंटीग्रेटिव बायोलॉजीने सिकल सेल एनीमिया के लिए स्वदेशी रूप से CRISPR-आधारित चिकित्सीय समाधान विकसित किया है, जिसे अब नैदानिक परीक्षणों के लिए तैयार किया जा रहा है।
पुनर्योगज डीएनए तकनीक के अनुप्रयोग
- चिकित्सा और स्वास्थ्य देखभाल:
- उपचारात्मक प्रोटीनों का उत्पादन:
- मानव इंसुलिन पहला उपचारात्मक/चिकित्सीय प्रोटीन था जिसे ई. कोलाई (E. coli) में आनुवंशिक रूप से क्लोन किया गया था।
- मोनोक्लोनल प्रतिरक्षियों (Monoclonal antibodies) का निर्माण।
- टीके (Vaccines): हेपेटाइटिस बी का टीका (यीस्ट का उपयोग करके उत्पादित)। HIV, मलेरिया और कोविड के विभिन्न प्रकारों के लिए पुनर्योगज टीकों के लिए निरंतर अनुसंधान जारी है।
- जीन चिकित्सा (Gene therapy):
- rDNA उपकरणों (जैसे, CRISPR-Cas9) का उपयोग करके दोषपूर्ण जीनों को ठीक करना (उदाहरण के लिए- हीमोफीलिया)।
- 2003 में चीन द्वारा कैंसर के उपचार के लिए अनुमोदित पहला व्यावसायिक जीन चिकित्सा उत्पाद ‘गेंडिसीन’ (Gendicine) था।
- आनुवंशिक परीक्षण/निदान: आनुवंशिक विकारों और संक्रामक रोगों (जैसे- HIV और हेपेटाइटिस) के लिए पीसीआर-आधारित (PCR-based) परीक्षण।
- कार्यात्मक जीनोमिक्स→ जीन के कार्यों का अध्ययन।
- उपचारात्मक प्रोटीनों का उत्पादन:
- फसल उत्पादन और कृषि
- सूखा, लवणता, कीट, शाकनाशी और विषाणु प्रतिरोध; फलों के पकने में देरी (जैसे- फ्लेवर सेवर टमाटर के लिए आनुवंशिक रूप से संशोधित फसलें।
- आनुवंशिक रूप से संशोधित (GM) फसलें: बीटी कपास (बॉलवर्म/मुकुल कृमि के प्रति प्रतिरोधी), सुनहरा चावल (विटामिन A से भरपूर)।
- पोषण संबंधी सुधार: rDNA तकनीक का उपयोग करके जैव-पुष्टिकरण (Biofortification)।
- खाद्य टीके (Edible vaccines)।
- जैव ईंधन: बायो-ब्यूटेनॉल (Bio-butanol) → गैसोलीन (पेट्रोल) का संभावित विकल्प।
- सूखा, लवणता, कीट, शाकनाशी और विषाणु प्रतिरोध; फलों के पकने में देरी (जैसे- फ्लेवर सेवर टमाटर के लिए आनुवंशिक रूप से संशोधित फसलें।
- खाद्य प्रसंस्करण: स्वाद, पोषण और शेल्फ लाइफ (भंडारण आयु) बढ़ाने के लिए किण्वित खाद्य पदार्थ जैसे चीज़ (पनीर), योगर्ट (दही), विशिष्ट प्रोबायोटिक्स और छाछ।
- पर्यावरण संरक्षण
- जैवोपचारण (Bioremediation): आनुवंशिक रूप से रूपांतरित (इंजीनियर्ड) जीवाणु जो तेल रिसाव, प्लास्टिक और विषैले अपशिष्ट को अपघटित करते हैं।
1. फसल उत्पादन और कृषि
फसलों में आनुवंशिक अभियांत्रिकी क्या है?
| विशेषता | विवरण |
| परिभाषा | विशिष्ट लक्षणों (Traits) में वृद्धि करने के लिए फसलों के डीएनए (DNA) में परिवर्तन करना। |
| तकनीक | पुनर्योगज डीएनए, क्रिस्पर (CRISPR), जीन साइलेंसिंग |
| संशोधित लक्षण | कीट (Pest) प्रतिरोध, पोषण, सूखा सहिष्णुता। |
जीएम फसलें: हालिया विकास
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जीएम फसलें |
जीएम फसलें: हालिया विकास |
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Bt कपास (Bt Cotton) |
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HTBT कपास (शाकनाशी प्रतिरोधी बीटी कपास) |
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Bt बैंगन (Bt Brinjal) |
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GM रबर (GM Rubber) |
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GM सोयामील |
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नाइट्रोजन स्थिरीकरण के लिए GM जीवाणु |
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सुनहरा चावल/गोल्डन राइस |
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खाद्य टीके (Edible Vaccines) |
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प्रोटैटो (Protato) |
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DMH-11 (धारा मस्टर्ड हाइब्रिड)
- GEAC (आनुवंशिक अभियांत्रिकी मूल्यांकन समिति) ने इसके पर्यावरणीय विमोचन को स्वीकृति दी है।
- यह एक ट्रांसजेनिक हाइब्रिड सरसों की फसल है जिसे दिल्ली विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने विकसित किया है।
- विकास: इसे भारतीय सरसों ‘वरुणा’ (Barnase Line) और पूर्वी यूरोपीय अर्ली हीरा-2 म्यूटेंट (Barstar Line) के संकरण से तैयार किया गया है।
- आनुवंशिक स्रोत: इसमें प्रयुक्त विदेशी जीन एक मृदा जीवाणु, ‘बैसिलस एमाइलोएक्वेफासिएन्स’ से लिए गए हैं।
- नोट:
- सरसों के पौधे सामान्यतः स्व-परागणीय (Self-pollinating) होते हैं, जिस कारण विभिन्न किस्मों के बीच क्रॉस-पॉलिनेशन नहीं होता।
- परिणामस्वरूप, सरसों की संकर (हाइब्रिड) किस्में उपलब्ध नहीं थीं और पादप प्रजनक (Plant Breeders) वांछित लक्षणों को सफलतापूर्वक इसमें शामिल नहीं कर पाते थे।
- लाभ (Benefits):
- फसल की उपज में 20–30% तक की वृद्धि।
- खाद्य तेल बीज उत्पादन में आत्मनिर्भरता प्राप्त करने की दिशा में एक कदम।
- जुड़े मुद्दे/चिंताएं (Issues):
- शाकनाशी सहनशीलता: आनुवंशिक संशोधन के बाद, यह हाइब्रिड किस्म ग्लूफोसिनेट-अमोनियम नामक खरपतवारनाशी (Herbicide) के प्रति प्रतिरोधी (सहिष्णु) हो जाती है।
- पर्यावरणीय प्रभाव: क्षेत्रीय परीक्षणों में ग्लाइफोसेट, एंडोसल्फान जैसे खरपतवारनाशियों का व्यापक उपयोग किया गया। आशंका है कि इन रसायनों का उपयोग मधुमक्खियों को नुकसान पहुंचा सकता है, जो सरसों के खेतों की सबसे महत्वपूर्ण परागणकर्ता हैं।
फ्लेवर सेवर टमाटर (Flavr Savr Tomato)
- फ्लेवर सेवर टमाटर मानव उपभोग के लिए अनुमोदित पहली आनुवंशिक रूप से संशोधित जीव (GMO) फसल थी। इसे Calgene Inc. द्वारा विकसित किया गया था।
- इसे 1994 में अमेरिका में व्यावसायिक रूप से बाजार में उतारा गया।
- लाभ:
- आनुवंशिक संशोधन के माध्यम से पॉलीगैलेक्ट्यूरोनेज़ एंजाइम को निष्क्रिय किया गया। यह एंजाइम टमाटर को नरम बनाने के लिए जिम्मेदार होता है।
- इस निष्क्रियता ने टमाटर को बेल पर पूरी तरह से पकने की अनुमति दी, जिससे स्वाद में सुधार हुआ।
- साथ ही, परिवहन के दौरान उसकी कठोरता (Firmness) बनी रही, जिससे उसकी शेल्फ लाइफ में मदद मिली।
- सीमाएँ:
- संरचना (Texture) और शेल्फ लाइफ में सुधार के बावजूद, इसकी स्वाद गुणवत्ता अपेक्षाकृत कम रही।
- उपभोक्ताओं ने इसे पारंपरिक रूप से बेल पर पके टमाटरों की तुलना में कम संतोषजनक पाया।
भारत विश्व का पहला देश बन गया है जिसने जीनोम-संपादित धान की किस्में विकसित की हैं।
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श्रेणी / पहलू |
विवरण |
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विकसित किस्में |
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प्रयुक्त तकनीक |
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लक्षित राज्य |
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महत्व |
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“माइनस 5 और प्लस 10” सूत्र
- धान की खेती का क्षेत्रफल 50 लाख हेक्टेयर घटाना। उसी क्षेत्र से धान उत्पादन में 10 मिलियन टन की वृद्धि करना।
- उद्देश्य: दालों और तिलहनों की खेती के लिए भूमि मुक्त करना।
भारत में जीएम फसलों के नियामक (GM Crops Regulators in India)
भारत में आनुवंशिक रूप से संशोधित (जीएम) फसलों का विनियमन और नियंत्रण निम्नलिखित निकायों द्वारा किया जाता है:
- पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय
- नियंत्रण: जीएम फसलों को 1986 के पर्यावरण संरक्षण अधिनियम के तहत नियंत्रित किया जाता है।
- GEAC (आनुवांशिक अभियांत्रिकी मूल्यांकन समिति): यह मंत्रालय के अधीन नियामक निकाय है, जो निम्न के लिए जिम्मेदार है:
- भारत में जीएम फसलों को स्वीकृति देना।
- क्षेत्रीय परीक्षण (Field Trials) की अनुमति देना।
- बड़े पैमाने पर पर्यावरणीय विमोचन को मंजूरी देना।
- जैव प्रौद्योगिकी विभाग (DBT) – विज्ञान एवं तकनीकी मंत्रालय के अंतर्गत
- नोडल एजेंसी: यह जीएम अनुसंधान और सुरक्षा मानकों के निर्धारण के लिए नोडल एजेंसी है।
- भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) – कृषि मंत्रालय के तहत
- कार्य: यह जीएम फसलों पर अनुसंधान और विकास (R&D) करता है।
- भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI)
- जीएम खाद्य पदार्थों को 2006 के खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम के तहत FSSAI द्वारा नियंत्रित किया जाता है।
आनुवंशिक अभियांत्रिकी मूल्यांकन समिति (GEAC)
- यह पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 के तहत गठित एक वैधानिक निकाय (Statutory Body) है।
- यह पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEF&CC) के प्रशासनिक नियंत्रण में कार्य करती है।
- संरचना (Composition):
- अध्यक्षता: MoEF&CC के एक वरिष्ठ अधिकारी द्वारा।
- सह-अध्यक्षता: जैव प्रौद्योगिकी विभाग (DBT) के प्रतिनिधि द्वारा।
- सदस्य: इसमें भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR), भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR), कोशिका एवं आणविक जीवविज्ञान केंद्र (CCMB) जैसे संस्थानों के विशेषज्ञ शामिल होते हैं।
- मुख्य दायित्व:
- जीएम जीवों (GMOs) के बड़े पैमाने पर अनुसंधान और औद्योगिक उपयोग के लिए अनुमोदन देना।
- जीएम फसलों के पर्यावरणीय विमोचन (जैसे Bt कपास) को स्वीकृति प्रदान करना।
- नोट: किसी भी जीएम उत्पाद के वाणिज्यिक उपयोग से पहले GEAC की स्वीकृति प्राप्त करना अनिवार्य है।



महत्वपूर्ण संकर फसल किस्में
| फसल | किस्में |
| Pusa Vivek QPM 9 | पहला उच्च विटामिन-A वाला मक्का हाइब्रिड। |
| DMRH 1308 | एक उच्च उपज देने वाला मक्का हाइब्रिड, जो व्यापक अनुकूलता के लिए विकसित किया गया है। |
| Girnar 5 | ओलिक अम्ल से समृद्ध हाइब्रिड मूंगफली। |
| Virat (IPM 205-7) | निया की पहली एक्स्ट्रा अर्ली सिंक्रोनस मूंग फसल। |
| IPL 220 | बायो फोर्टिफाइड दाल की किस्म। |
| JRO 524 | जूट की किस्म, जिसे बांग्लादेश में निर्यात किया जाता है। |
| PSL-17 | दाल की एक किस्म। |
फूड फोर्टिफिकेशन (Food Fortification)
- प्रसंस्करण के दौरान खाद्य पदार्थों में आवश्यक सूक्ष्म पोषक तत्वों (Micronutrients) की मात्रा को जानबूझकर बढ़ाना ताकि पोषण गुणवत्ता में सुधार हो और न्यूनतम जोखिम के साथ सार्वजनिक स्वास्थ्य लाभ मिल सके।
- भारत में,
- गेहूँ का आटा और चावल → आयरन, विटामिन B12, फोलिक एसिड
- दूध और खाद्य तेल → विटामिन A और D
- डबल फोर्टिफाइड नमक → आयोडीन + आयरन।
फोर्टिफाइड चावल (Fortified Rice)
- तकनीक: कोटिंग (Coating), डस्टिंग (Dusting), और एक्सट्रूज़न (Extrusion)।
- कैबिनेट समिति (CCEA) ने लक्षित सार्वजनिक वितरण प्रणाली (TPDS) में फोर्टिफाइड चावल की आपूर्ति को मंजूरी दी।
- 1 किग्रा सामान्य चावल में 10 ग्राम FRK (Fortified Rice Kernel) मिलाना अनिवार्य।
- फोर्टिफाइड चावल जूट बैग में पैक किया जाएगा, जिस पर ‘+F’ का लोगो और यह पंक्ति होगी: “Fortified with Iron, Folic Acid, and Vitamin B12”।
बायोफोर्टिफिकेशन (Biofortification)
- फसलों को इस प्रकार विकसित करना कि उनकी पोषण मूल्य (गुणवत्ता) बढ़ जाए।
- यह पारंपरिक चयनात्मक प्रजनन (Selective Breeding) या आनुवंशिक अभियांत्रिकी (Genetic Engineering) दोनों तरीकों से किया जा सकता है।
- उदाहरण:
- सुनहरा चावल: विटामिन A से बायो फोर्टिफाइड (भारत में अभी तक इसे व्यापक रूप से नहीं अपनाया गया है)।
- लौह-समृद्ध बाजरा (Iron-rich pearl millet): ‘धनशक्ति’ किस्म।
- जिंक-समृद्ध चावल और गेहूँ: ICAR (भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद) कार्यक्रमों के तहत जारी ‘DRR धान 45’ और गेहूँ की किस्में।
- प्रोटीन-समृद्ध मक्का (Protein-rich maize)।
- विटामिन A समृद्ध शकरकंद (Sweet potato)।
2. चिकित्सा एवं स्वास्थ्य देखभाल
A. जीन थेरेपी
- जीन थेरेपी जैव प्रौद्योगिकी का एक तेज़ी से विकसित होता क्षेत्र है, जिसका उद्देश्य रोग-कारक जीनों की अभिव्यक्ति (Expression) को संशोधित करके आनुवंशिक रोगों का उपचार करना है।
- इसमें दोषपूर्ण जीनों को प्रतिस्थापित या पूरक करने के लिए स्वस्थ जीनों को कोशिकाओं में प्रविष्ट कराया जाता है। यह प्रक्रिया आनुवंशिक असामान्यताओं को सुधारती है।
- पारंपरिक दवाओं के विपरीत, जीन थेरेपी सीधे कोशिकाओं के भीतर आनुवंशिक बीमारी के मूल कारण को लक्षित करती है।
- जीन थेरेपी के प्रकार
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कायिक कोशिका जीन थेरेपी (Somatic Cell Gene Therapy) |
जनन कोशिका जीन थेरेपी (Germline Gene Therapy) |
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- जीन थेरेपी में कोशिकाओं का स्रोत:
- ऑटोलॉगस (Autologous): उपचार के लिए रोगी की स्वयं की कोशिकाओं का उपयोग।
- एलोजेनिक (Allogeneic): उपचार के लिए दाता (donor) की कोशिकाओं का उपयोग।
- उपयोग: यह चिकित्सा एकल जीन उत्परिवर्तन से होने वाली बीमारियों, जैसे SCID, हीमोफीलिया, और मस्कुलर डिस्ट्रॉफी के उपचार में प्रभावी है।
- भारत में महत्वपूर्ण पहल:
- जैव प्रौद्योगिकी विभाग (DBT) ने हीमोफीलिया-A के इलाज हेतु Lentiviral Vectors (जीन स्थानांतरण के वायरल संवाहक) का उपयोग कर पहली बार मानव पर जीन थेरेपी सफलतापूर्वक की।
- क्रिश्चियन मेडिकल कॉलेज (CMC), वेल्लोर (तमिलनाडु) में हीमोफीलिया A (FVIII की कमी) के लिए जीन थेरेपी का पहला मानव नैदानिक परीक्षण (Clinical Trial) संपन्न हुआ।
अमेरिकी खाद्य एवं औषधि प्रशासन (USFDA) द्वारा अनुमोदित प्रमुख उपचार
- जीन थेरेपी
- सिकल सेल रोग (Sickle Cell Disease) के लिए दो जीन थेरेपी को मंजूरी:
- कैस्गेवी (Casgevy): यह CRISPR तकनीक पर आधारित है। यह आणविक “कैंची” (Molecular Scissors) का उपयोग करके जीन के दोषपूर्ण हिस्सों को काटकर उन्हें निष्क्रिय या सामान्य डीएनए के नए तंतुओं से बदल देती है।
- लाइफजेनिया (Lyfgenia): यह एक पारंपरिक जीन थेरेपी है, जिसमें कोशिकाओं में जीन स्थानांतरित करने के लिए वायरस (Viral Vector) का उपयोग किया जाता है।
- आनुवंशिक रेटिनल रोग (IRD) के लिए पहली जीन थेरेपी:
- लक्सटर्ना (Luxturna): यह RPE65 जीन की कार्यात्मक प्रतिलिपि पहुंचाने के लिए एडेनो-एसोसिएटेड वायरस (AAV2) वेक्टर का उपयोग करती है।
- सिकल सेल रोग (Sickle Cell Disease) के लिए दो जीन थेरेपी को मंजूरी:
- एंजाइम प्रतिस्थापन चिकित्सा (Enzyme Replacement Therapy – ERT)
- विश्व की पहली एंजाइम रिप्लेसमेंट थेरेपी (ERT) को मंजूरी दी गई है।
- एडज़िन्मा: यह ERT के लिए पहला आनुवंशिक रूप से संशोधित प्रोटीन उत्पाद है।
- उपयोग: यह एक दुर्लभ रक्त जमाव विकार, जन्मजात थ्रोम्बोटिक थ्रोम्बोसाइटोपेनिक पुरपुरा (cTTP) के उपचार के लिए है।
- विश्व की पहली एंजाइम रिप्लेसमेंट थेरेपी (ERT) को मंजूरी दी गई है।
B. जीन ड्राइव तकनीक
- यह एक आनुवंशिक अभियांत्रिकी तकनीक है जिसका उपयोग जीनों को इस प्रकार संशोधित करने के लिए किया जाता है कि वे वंशानुक्रम (Heredity) के सामान्य नियमों का पालन न करें।
- यह किसी विशेष जीन समूह को अगली पीढ़ी में स्थानांतरित संभावना बढ़ा देती है, जिससे जीन तेजी से पूरी आबादी में फैल सकता है और प्राकृतिक चयन (Natural Selection) को प्रभावित कर सकता है।
- सामान्य वंशानुक्रम बनाम जीन ड्राइव
- सामान्य वंशागति: किसी भी माता-पिता से जीन के विरासत में मिलने की 50% संभावना होती है।
- जीन ड्राइव (Gene Drive): विशिष्ट जीन स्वयं को दोनों गुणसूत्रों (Chromosomes) पर कॉपी कर लेता है, जिससे विरासत की संभावना लगभग 100% हो जाती है।
- अनुप्रयोग: कृषि कीट नियंत्रण, रोगवाहक नियंत्रण।

- अनुप्रयोग के उदाहरण
- लक्ष्य (Target): मादा मच्छर (मलेरिया वाहक)।
- जीन (Gene): doublesex जीन को CRISPR द्वारा संपादित करना → सामान्य मादा विकास बाधित।
- परिणाम (Outcome): संपादित जीन के कारण मच्छर बाँझ (Sterile) हो जाते हैं या नर-सदृश विकसित होते हैं। ये मच्छर न तो काट सकते हैं और न ही प्रजनन कर सकते हैं। यह तकनीक लगभग 8 पीढ़ियों के भीतर मादा मच्छरों का लगभग पूर्ण उन्मूलन कर सकती है, जिससे मलेरिया का संचरण कम हो जाएगा।

वोल्बाचिया विधि (Wolbachia Method)
- यह डेंगू, जीका और चिकनगुनिया जैसी मच्छर-जनित बीमारियों को कम करने की एक जैविक नियंत्रण रणनीति है।
- इसमें वोल्बाचिया नामक प्राकृतिक रूप से पाए जाने वाले जीवाणु (Bacteria) उपयोग किया जाता है, जो कई कीट प्रजातियों में मौजूद होता है, लेकिन एडीज मच्छरों (रोग वाहक) में सामान्य रूप से नहीं पाया जाता।
- परिणाम:
- जब एक संक्रमित नर मच्छर एक जंगली मादा (गैर-संक्रमित) के साथ प्रजनन करता है, तो अंडे नहीं निकलते, जिससे मच्छरों की संख्या घटती है।
- जब एक संक्रमित मादा मच्छर किसी भी नर के साथ प्रजनन करती है, तो उसकी संतान Wolbachia को विरासत में प्राप्त करती है, जिससे यह लक्षण आगे की पीढ़ियों में फैलता है।
C. मोनोक्लोनल प्रतिरक्षी (mAbs)
- ये प्रयोगशाला में निर्मित (कृत्रिम) प्रोटीन हैं जो शरीर की प्राकृतिक एंटीबॉडीज़ के स्थानापन्न (substitute) के रूप में कार्य करते हैं।
- इनका मुख्य कार्य विकारों और बाह्य पदार्थों के विरुद्ध शरीर की सुरक्षा करना है, जिसके लिए ये प्राकृतिक एंटीबॉडीज़ के व्यवहार की नकल करते हैं।
- इन प्रोटीनों को विशेष रूप से किसी एक एंटीजन (रोगजनक अणु) से जुड़ने और उसे निष्क्रिय करने के लिए अभिकल्पित (design) किया जाता है।
एंटीबॉडी और मोनोक्लोनल एंटीबॉडी में अंतर
| विशेषता | एंटीबॉडी | मोनोक्लोनल एंटीबॉडी |
| स्रोत | प्रतिरक्षा तंत्र द्वारा स्वाभाविक रूप से निर्मित | प्रयोगशाला में बड़ी मात्रा में निर्मित |
| विशिष्टता | बहुविशिष्ट (Polyvalent) – अनेक एंटीजन को लक्षित करती है | एकल-विशिष्ट (Monospecific) – केवल एक एंटीजन को लक्षित करती है |
| उदाहरण | किसी भी संक्रमण के दौरान बनी एंटीबॉडीज़ | कोविड-19, कैंसर चिकित्सा में प्रयुक्त mAbs |

मोनोक्लोनल एंटीबॉडी के अनुप्रयोग
- निपाह वायरस: हाल ही में भारत ने केरल में निपाह वायरस प्रकोप से निपटने हेतु ऑस्ट्रेलिया से मोनोक्लोनल एंटीबॉडी खुराक प्राप्त करने का प्रयास किया।
- कोविड-19: कोविड-19 महामारी के दौरान मोनोक्लोनल एंटीबॉडी को SARS-CoV-2 वायरस के स्पाइक प्रोटीन से जुड़ने हेतु अभिकल्पित किया गया।
- → परिणाम: वायरस का कोशिकाओं में प्रवेश रोका गया → रोग की गंभीरता कम हुई।
- कैंसर: ये विशिष्ट कैंसर कोशिकाओं को लक्षित कर सकती हैं। → वृद्धि संकेतों को अवरुद्ध करना या कैंसर कोशिकाओं को प्रतिरक्षा तंत्र द्वारा नष्ट करने हेतु चिन्हित करना।

D. टीके (Vaccines)
टीकाकरण के प्रकार (Types of Vaccination)
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टीके का प्रकार |
विवरण / उदाहरण |
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Inactivated (निष्क्रिय टीका) |
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Live-attenuated (जीवित- क्षीणित टीका) |
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mRNA |
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Subunit Vaccine (उपघटक टीके) |
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विषाक्तक (Toxoid) |
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Viral Vector (वायरल वेक्टर टीका) |
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भारत में वैक्सीन तकनीक में प्रगति
कोविड 19 वैक्सीन
| वैक्सीन | व्याख्या |
| ZyCoV-D (2021) | विश्व का पहला और भारत का स्वदेशी रूप से विकसित डीएनए-आधारित कोविड-19 टीका, ज़ाइडस कैडिला द्वारा विकसित। |
| CORBEVAX (2022) | भारत का पहला प्रोटीन सबयूनिट कोविड-19 टीका, बायोलॉजिकल ई द्वारा विकसित। |
| iNCOVACC (2023) | सुई-रहित (Needle-free) इंट्रा नेज़ल कोविड-19 टीका, भारत बायोटेक द्वारा विकसित। |
| GEMCOVAC-19 (2023) | भारत का पहला mRNA कोविड-19 टीका, जेनोवा बायोफार्मा द्वारा विकसित। |
अन्य महत्वपूर्ण टीके
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वैक्सीन |
व्याख्या |
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CERVAVAC (2023) |
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मॉस्क्विरिक्स (Mosquirix) (RTS,S/AS01)
- विश्व का पहला मलेरिया टीका।
- प्रकार: पुनः संयोजक (Recombinant) प्रोटीन-आधारित टीका।
- लक्ष्य: प्लास्मोडियम फाल्सिपेरम – सबसे घातक मलेरिया परजीवी।
- विकासकर्ता: GlaxoSmithKline (GSK), PATH और WHO के सहयोग से।
- कैमरून पहला देश बना जिसने इस टीके को अपने नियमित टीकाकरण कार्यक्रम का हिस्सा बनाया।
R21/मैट्रिक्स-M टीका
- बच्चों के लिए मलेरिया टीका।
- प्रकार: Matrix-M adjuvant के साथ पुनः संयोजक प्रोटीन-आधारित टीका।
- विकासकर्ता: ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय + सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (SII)।
टीबी टीका (M72/AS01E)
- वर्तमान में चरण-III परीक्षण (Phase III trials) में।
- गेट्स फाउंडेशन द्वारा समर्थित।
टीकों से संबंधित कुछ शब्दावली
- व्युत्क्रम वैक्सीन (Inverse Vaccine)
- स्व-प्रतिरक्षित रोगों (Autoimmune Diseases) में प्रतिरक्षा तंत्र स्वस्थ ऊतकों पर आक्रमण करता है (जैसे Psoriatic Disease)।
- इनवर्स वैक्सीन प्रतिरक्षा तंत्र को स्वस्थ कोशिकाओं पर आक्रमण करने से रोकती है और उसे पुनः प्रशिक्षित करती है ताकि वह स्वस्थ कोशिकाओं को बचाए।
- स्व-प्रवर्धक आरएनए (saRNA): CEPI द्वारा वित्तपोषित, तेज़ और कम-खुराक वाले टीकों के अनुकूलन हेतु।
- वायरस-समदृश कण (VLPs)
- रोगजनकों की सुरक्षित और प्रभावी नकल।
- उपयोग: HPV, COVID बूस्टर, और उभरते रोगजनक।
- CERVAVAC VLP (Virus-Like Particles) पर आधारित है।
- टी-कोशिका आधारित टीके: एंटीबॉडी से परे दीर्घकालिक प्रतिरक्षा (Durable Immunity) पर केंद्रित।
- संयोजन टीके (Combination Vaccines): COVID + Flu + RSV को एक ही खुराक में सम्मिलित करने वाले टीके।
3. पर्यावरण संरक्षण
जैव निक्षालन (Bioleaching)
- जैव निक्षालन: सूक्ष्मजीवों (जीवाणु, कवक) का उपयोग करके अयस्कों (Ores) से धातुओं का निष्कर्षण।
- यह पारंपरिक प्रगलन (Smelting) और रासायनिक निक्षालन (Chemical leaching) का एक पर्यावरण-अनुकूल विकल्प है।
जैव उपचारण (Bioremediation)
- यह एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें जीवित जीवों (सूक्ष्मजीव, कवक, पौधे आदि) का उपयोग करके मिट्टी, जल और वायु में उपस्थित प्रदूषकों को विघटित (degrade), हटाया (remove) या निष्क्रिय (neutralize) किया जाता है।
- राजस्थान में जैव उपचारण का उपयोग करके भूजल से आर्सेनिक को हटाने के लिए प्रायोगिक परियोजनाएं चलाई जा रही हैं।
- जैव उपचारण मुख्य रूप से दो प्रकार का होता है:
- अंतः स्थाने (In situ) जैव उपचारण
- इसमें संदूषित सामग्री को बिना वहां से हटाए उसी स्थल पर उपचारित किया जाता है।
- उदाहरण:
- तेल रिसाव (Oil spills) → Alcanivorax borkumensis बैक्टीरिया समुद्री जल में हाइड्रोकार्बन को निम्नीकृत करते हैं।
- भूजल प्रदूषण (Groundwater contamination) → सूक्ष्मजीव क्लोरीनयुक्त विलायकों को विघटित करते हैं।
- बाह्य स्थाने (Ex situ) जैव उपचारण
- इसमें प्रदूषित पदार्थ (मिट्टी, पानी आदि) को स्थल से हटाकर किसी अन्य स्थान पर नियंत्रित वातावरण (जैसे बायोरिएक्टर या कम्पोस्ट पाइल) में उपचारित किया जाता है, जहाँ प्रदूषक अधिक कुशलता से विघटित होते हैं।
- उदाहरण:
- बायोरिएक्टर: मृदा या जल को एक ऐसे रिएक्टर के माध्यम से पंप किया जाता है जिसमें प्रदूषकों को निम्नीकृत करने वाले सूक्ष्मजीव मौजूद होते हैं।
- कम्पोस्टिंग: संदूषित मृदा को कार्बनिक पदार्थों और सूक्ष्मजीवों के साथ मिलाया जाता है, जिससे संदूषकों के विघटन की प्रक्रिया तेज हो जाती है।
- अंतः स्थाने (In situ) जैव उपचारण
जैव उपचारण की क्रियाविधियाँ
- जैव संवर्धन (Bioaugmentation): प्रदूषकों को निम्नीकृत करने के लिए पर्यावरण में विशिष्ट सूक्ष्मजीवों को बाहर से मिलाना।
- जैव उद्दीपन (Biostimulation): पर्यावरण में पहले से मौजूद प्राकृतिक या स्वदेशी सूक्ष्मजीवों की वृद्धि को प्रेरित करने के लिए पोषक तत्वों को मिलाना।
- पादप उपचारण (Phytoremediation): मृदा, जल या वायु से प्रदूषकों को अवशोषित या निम्नीकृत करने के लिए पौधों का उपयोग करना।
- कवक उपचारण (Mycoremediation): पर्यावरण से प्रदूषकों को निम्नीकृत और समाप्त करने के लिए कवकों का उपयोग करना।
