भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 के अंतर्गत लोक न्यूसेंस की अवधारणा धारा 152 (अध्याय XI – लोक व्यवस्था और प्रशांति बनाए रखना) में वर्णित है। यह एक निवारक प्रावधान है जो कार्यपालक मजिस्ट्रेटों को जनता को असुविधा, खतरा या हानि पहुँचाने वाली स्थितियों के विरुद्ध त्वरित कार्रवाई करने की शक्ति देता है।
अर्थ और क्षेत्र
लोक न्यूसेंस से आशय ऐसी किसी क्रिया, लोप या स्थिति से है जो:
- सार्वजनिक स्थानों (सड़क, नदी, जलमार्ग आदि) के उपयोग में बाधा या असुविधा पैदा करती हो।
- जन स्वास्थ्य, सुरक्षा या आराम को खतरे में डालती हो।
- आग, विस्फोट या अन्य जोखिम पैदा करती हो।
यह निजी विवाद नहीं, बल्कि आम जनता को प्रभावित करने वाली समस्या है।
महत्वपूर्ण विशेषताएँ
- निवारक स्वरूप: हानि होने से पहले रोकने के लिए।
- संक्षिप्त प्रक्रिया: त्वरित कार्रवाई।
- सिविल न्यायालय का वर्जन: उचित आदेश को सिविल कोर्ट में चुनौती नहीं दी जा सकती।
- आपातकालीन शक्ति: जरूरी मामलों में तुरंत कार्रवाई।
BNSS, 2023 की धारा 2 के अनुसार अपराधों को दो श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया है, जो पुलिस को बिना वारंट गिरफ्तारी की शक्ति पर आधारित है।
| अंतर का आधार | संज्ञेय अपराध (Cognizable) | असंज्ञेय अपराध (Non-Cognizable) |
| परिभाषा | वह अपराध जिसमें पुलिस बिना वारंट गिरफ्तार कर सकती है | वह अपराध जिसमें पुलिस बिना वारंट गिरफ्तार नहीं कर सकती |
| गंभीरता | सामान्यतः अधिक गंभीर | सामान्यतः कम गंभीर / लघु अपराध |
| पुलिस कार्रवाई | पुलिस स्वयं जांच व गिरफ्तारी कर सकती है | पुलिस केवल मजिस्ट्रेट के आदेश के बाद ही जांच कर सकती है |
| एफआईआर | पुलिस को अनिवार्य रूप से FIR दर्ज करनी होती है | पुलिस सीधे FIR दर्ज नहीं कर सकती (केवल मजिस्ट्रेट को परिवाद) |
| जमानती / गैर-जमानती | प्रायः गैर-जमानती | प्रायः जमानती |
| उदाहरण | हत्या, बलात्कार, चोरी, दहेज मृत्यु, दंगा | मानहानि, साधारण चोट, धोखाधड़ी (कुछ मामले) |
| BNSS प्रथम अनुसूची | स्तंभ 3 में उल्लेखित | स्तंभ 4 में उल्लेखित |
धारा 14 भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 कार्यपालक मजिस्ट्रेटों की नियुक्ति एवं शक्तियों से संबंधित है।
कार्यपालक मजिस्ट्रेटों की शक्तियाँ:
- कार्यपालक मजिस्ट्रेट अपनी शक्तियाँ धारा 14 तथा BNSS की अन्य धाराओं से प्राप्त करते हैं।
- जिला मजिस्ट्रेट (DM) जिले में कार्यपालक मजिस्ट्रेटों का प्रमुख होता है और उसे निम्नलिखित व्यापक शक्तियाँ प्राप्त हैं:
- कानून-व्यवस्था बनाए रखना।
- निवारक कार्रवाई के आदेश जारी करना (धारा 143, 144 आदि)।
- लोक न्यूसेंस के मामलों को संभालना (धारा 152)।
- लाइसेंस देना या रद्द करना।
- पुलिस एवं अधीनस्थ कार्यपालक मजिस्ट्रेटों की निगरानी करना।
- आपातकालीन स्थितियों में शक्तियों का प्रयोग करना।
- अपर जिला मजिस्ट्रेट (ADM) को राज्य सरकार द्वारा निर्देशित जिला मजिस्ट्रेट की सम्पूर्ण या कुछ शक्तियाँ प्राप्त होती हैं।
- उप-खंड मजिस्ट्रेट (SDM) अपने उप-खंड क्षेत्र में शक्तियों का प्रयोग करता है, जैसे:
- शांति बनाए रखने के लिए निवारक उपाय करना।
- कुछ मामलों में जांच करना।
- जिला मजिस्ट्रेट द्वारा सौंपी गई मजिस्ट्रेटीय शक्तियों का प्रयोग करना।
राज्य सरकार आवश्यकतानुसार जितने भी कार्यपालक मजिस्ट्रेट नियुक्त कर सकती है और उन्हें विशिष्ट शक्तियाँ सौंप सकती है। DM के अनुपस्थिति में कार्यभार संभालने वाला अधिकारी स्वतः DM की समस्त शक्तियों का प्रयोग करता है।
