समूह गतिशीलता एवं दल निर्माण

समूह गतिशीलता से आशय उन जटिल शक्तियों से है जो समूह के अंदर कार्य करती हैं। यह उन व्यवहारिक एवं मनोवैज्ञानिक प्रक्रियाओं का अध्ययन है जो लोगों के समूह में अंतःक्रिया करते समय घटित होती हैं। इसमें समूह के सदस्यों के आपसी प्रभाव, समूह की कार्यप्रणाली तथा उसके विकास का अध्ययन किया जाता है।

कर्ट लेविन के अनुसार, समूह गतिशीलता समूहों की प्रकृति, निर्माण, आंतरिक प्रक्रियाओं तथा अन्य समूहों व संगठन के साथ अंतःक्रिया का अध्ययन है। इसमें समूह संगठन (Group Cohesiveness), समूह मानदंड, संचार, नेतृत्व और संघर्ष आदि शामिल हैं।

टकमैन के समूह विकास के चरण (Tuckman’s Stages – 1965)

ब्रूस टकमैन ने समूह विकास का पाँच चरणों वाला मॉडल प्रस्तुत किया:

  1. फॉर्मिंग (Forming) – सृजन चरण यह प्रारंभिक चरण है जिसमें समूह के सदस्य एकत्र होते हैं। अनिश्चितता, चिंता और नेता पर निर्भरता अधिक होती है। सदस्य एक-दूसरे को जानने का प्रयास करते हैं।
  2. स्टॉर्मिंग (Storming) – संघर्ष चरण यह संघर्ष और प्रतिस्पर्धा का चरण है। सदस्य अपनी व्यक्तिगत भिन्नताएँ व्यक्त करते हैं। भूमिकाओं, जिम्मेदारियों और प्रक्रियाओं को लेकर मतभेद होते हैं।
  3. नॉर्मिंग (Norming) – मानकीकरण चरण समूह संघर्षों का समाधान करता है और नियम-मानदंड स्थापित करता है। सदस्यों के बीच एकता और ‘हम’ की भावना विकसित होती है।
  4. परफॉर्मिंग (Performing) – प्रदर्शन चरण समूह अपनी परिपक्वता और उच्च उत्पादकता प्राप्त कर लेता है। सदस्य स्वतंत्र रूप से और कुशलतापूर्वक कार्य करते हैं।
  5. अडजर्निंग (Adjourning) – विसर्जन चरण कार्य पूर्ण होने पर समूह का विघटन होता है। सदस्य उपलब्धियों पर चिंतन करते हैं और नई टीमों की ओर बढ़ते हैं।

समूह गतिशीलता समूह के अंदर अंतर्क्रियाओं और शक्तियों को संदर्भित करती है। इसका प्रदर्शन पर सकारात्मक और नकारात्मक दोनों प्रभाव पड़ता है।

सकारात्मक प्रभाव

  • तालमेल: सामूहिक बुद्धिमत्ता बेहतर समाधान देती है।
  • सामाजिक सहारा: अभिप्रेरणा बढ़ाती है और तनाव कम करती है।
  • ज्ञान साझा: सीखने और समस्या समाधान को बढ़ावा देती है।

नकारात्मक प्रभाव

  • समूह सोच: असहमति को दबाकर गलत निर्णय लेना।
  • सामाजिक आलस्य: कुछ सदस्य कम प्रयास करते हैं।
  • संघर्ष: अनसुलझे संघर्ष समय और मनोबल बर्बाद करते हैं।

समूह गतिशीलता का प्रभावी प्रबंधन (टीम निर्माण, स्पष्ट भूमिकाएँ और खुला संचार) संगठनात्मक सफलता के लिए आवश्यक है।

टीम निर्माण कोई एक बार की गतिविधि (जैसे एक कार्यशाला या पिकनिक) नहीं है। यह एक निरंतर प्रक्रिया है क्योंकि टीमें गतिशील वातावरण में कार्य करती हैं जहाँ चुनौतियाँ, सदस्य, लक्ष्य और प्रौद्योगिकी लगातार बदलते रहते हैं। इसे एक बार की गतिविधि मानने से केवल अस्थायी सुधार होता है।

टीम निर्माण निरंतर क्यों है?

  1. टीम की संरचना में परिवर्तन नए सदस्य आते हैं और पुराने सदस्य जाते हैं। प्रत्येक नए सदस्य को टीम की संस्कृति, भूमिकाओं और कार्य शैली में शामिल करना पड़ता है।
  2. संगठनात्मक लक्ष्यों और वातावरण में परिवर्तन बाजार, प्रौद्योगिकी और नीतियाँ बदलती रहती हैं। टीम को लगातार नई चुनौतियों के अनुसार खुद को तैयार रखना पड़ता है।
  3. विश्वास और संबंधों का विकास विश्वास और अच्छे संबंध रातोंरात नहीं बनते। इसके लिए निरंतर अंतर्क्रिया, फीडबैक और संघर्ष समाधान जरूरी है।
  4. कौशल विकास और सीखना नियमित प्रशिक्षण, ज्ञान साझा करना और कौशल उन्नयन निरंतर टीम निर्माण का हिस्सा है।
  5. प्रदर्शन की निगरानी और फीडबैक नियमित समीक्षा, उपलब्धियों का सम्मान और सुधारात्मक फीडबैक आवश्यक है।
  6. संघर्ष प्रबंधन संघर्ष स्वाभाविक हैं। निरंतर प्रयासों से उन्हें समय पर सुलझाया जा सकता है।

निरंतर टीम निर्माण के व्यावहारिक तरीके

  • नियमित टीम बैठकें और ऑफ-साइट रिट्रीट।
  • अंतर-कार्यात्मक परियोजनाएँ।
  • नेतृत्व विकास कार्यक्रम।
  • समय-समय पर टीम स्वास्थ्य जाँच।
  • छोटी सफलताओं का उत्सव और असफलताओं से सीखना।

टीम निर्माण एक यात्रा है, कोई मंजिल नहीं। जो संगठन निरंतर टीम विकास में निवेश करते हैं, वे लचीली और उच्च प्रदर्शन वाली टीमें बनाते हैं जो बदलाव के साथ अनुकूलन कर सफलता प्राप्त कर सकती हैं। इसे एक बार की गतिविधि मानना एक आम गलती है जो समय के साथ टीम की प्रभावशीलता को कम कर देती है।

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