चयन

रोजगार परीक्षण (Employment Tests) ऐसे मानकीकृत एवं वस्तुनिष्ठ परीक्षण हैं जिनका उपयोग चयन प्रक्रिया के दौरान अभ्यर्थियों के ज्ञान, कौशल, अभिक्षमता, व्यक्तित्व तथा किसी विशेष पद के लिए उनकी उपयुक्तता का मूल्यांकन करने के लिए किया जाता है। ये परीक्षण प्रबंधकों को अभ्यर्थियों के बारे में वैज्ञानिक एवं विश्वसनीय जानकारी प्रदान करते हैं, जिससे उचित व्यक्ति का उचित पद पर चयन संभव हो पाता है तथा चयन प्रक्रिया अधिक निष्पक्ष एवं प्रभावी बनती है।

रोजगार परीक्षणों की भूमिका

  • अभ्यर्थियों का वस्तुनिष्ठ मूल्यांकन: रोजगार परीक्षण सभी अभ्यर्थियों का समान मापदण्डों पर मूल्यांकन करते हैं। इससे चयन प्रक्रिया में व्यक्तिगत पक्षपात, पूर्वाग्रह तथा पक्षधरता की संभावना कम हो जाती है।
  • कार्य-संबंधी योग्यताओं का परीक्षण: विभिन्न प्रकार के परीक्षण अभ्यर्थियों की बुद्धि, तकनीकी ज्ञान, अभिक्षमता, व्यक्तित्व, अभिरुचि तथा व्यावहारिक कौशल का मूल्यांकन करते हैं, जिससे संगठन पद की आवश्यकताओं के अनुरूप सर्वाधिक उपयुक्त उम्मीदवार का चयन कर सकता है।
  • भविष्य के कार्य-निष्पादन का अनुमान: अभिक्षमता एवं मनोवैज्ञानिक परीक्षण यह संकेत देते हैं कि अभ्यर्थी नई परिस्थितियों को कितनी शीघ्रता से सीख सकता है, समस्याओं का समाधान कैसे करेगा तथा भविष्य में उसका कार्य-निष्पादन कैसा रहेगा।
  • गलत चयन की संभावना में कमी: वैज्ञानिक परीक्षणों के माध्यम से अनुपयुक्त अभ्यर्थियों के चयन की संभावना कम हो जाती है, जिससे कर्मचारियों के स्थानांतरण, त्यागपत्र, अनुशासन संबंधी समस्याओं तथा पुनः भर्ती की लागत में कमी आती है।
  • संगठनात्मक उत्पादकता में वृद्धि: जब संगठन योग्य एवं सक्षम कर्मचारियों का चयन करता है, तो कार्यकुशलता, कार्य की गुणवत्ता तथा समग्र संगठनात्मक प्रदर्शन में सुधार होता है।

साक्षात्कार चयन प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण चरण है, क्योंकि इसके माध्यम से नियोक्ता एवं अभ्यर्थी के बीच प्रत्यक्ष संवाद स्थापित होता है। यह अभ्यर्थी के संचार कौशल, आत्मविश्वास, व्यक्तित्व, अभिवृत्ति तथा पद के प्रति उसकी उपयुक्तता का मूल्यांकन करने में सहायता करता है। किन्तु केवल साक्षात्कार के आधार पर प्रभावी चयन संभव नहीं है, क्योंकि यह अभ्यर्थी की क्षमता का केवल सीमित एवं व्यक्तिपरक आकलन करता है। इसलिए इसे अन्य वैज्ञानिक चयन तकनीकों के साथ अपनाना आवश्यक है।

साक्षात्कार की सीमाएँ
  • व्यक्तिपरकता एवं पक्षपात: साक्षात्कारकर्ता का व्यक्तिगत दृष्टिकोण, पूर्वाग्रह, प्रथम प्रभाव (First Impression) अथवा हेलो प्रभाव (Halo Effect) निर्णय को प्रभावित कर सकता है, जिससे निष्पक्ष चयन बाधित हो सकता है।
  • क्षमताओं का सीमित मूल्यांकन: साक्षात्कार मुख्यतः अभ्यर्थी के व्यक्तित्व एवं संचार कौशल का मूल्यांकन करता है, जबकि उसकी तकनीकी योग्यता, बुद्धि, अभिक्षमता तथा व्यावहारिक कौशल का समुचित आकलन नहीं कर पाता।
  • अस्थायी प्रभाव की संभावना: कई बार अभ्यर्थी केवल साक्षात्कार के दौरान प्रभावशाली प्रस्तुति देकर सकारात्मक छाप छोड़ देता है, जबकि वास्तविक कार्य-निष्पादन में वह अपेक्षित स्तर का प्रदर्शन नहीं कर पाता।
  • विश्वसनीयता का अभाव: अलग-अलग साक्षात्कारकर्ता एक ही अभ्यर्थी का अलग-अलग मूल्यांकन कर सकते हैं, जिससे चयन प्रक्रिया की एकरूपता एवं वस्तुनिष्ठता प्रभावित होती है।
अन्य चयन तकनीकों की आवश्यकता

प्रभावी एवं वैज्ञानिक चयन सुनिश्चित करने के लिए साक्षात्कार के साथ निम्नलिखित तकनीकों का उपयोग किया जाना चाहिए—

  • रोजगार परीक्षण (Employment Tests): बुद्धि, अभिक्षमता, व्यक्तित्व, तकनीकी ज्ञान तथा व्यावहारिक कौशल का वस्तुनिष्ठ मूल्यांकन करते हैं।
  • समूह चर्चा (Group Discussion): नेतृत्व क्षमता, टीम भावना, संचार कौशल एवं समस्या-समाधान क्षमता का परीक्षण करती है।
  • संदर्भ जाँच (Reference Check): अभ्यर्थी के चरित्र, अनुभव एवं पूर्व कार्य-निष्पादन का सत्यापन करती है।
  • चिकित्सीय परीक्षण (Medical Examination): अभ्यर्थी की शारीरिक एवं मानसिक उपयुक्तता सुनिश्चित करता है।

विभिन्न पदों एवं संगठनात्मक आवश्यकताओं के अनुसार अलग-अलग प्रकार के साक्षात्कारों का उपयोग किया जाता है।

साक्षात्कार के प्रकार
  • प्रारम्भिक साक्षात्कार (Preliminary Interview): यह चयन प्रक्रिया का प्रथम चरण होता है, जिसका उद्देश्य स्पष्ट रूप से अनुपयुक्त अभ्यर्थियों को प्रारम्भ में ही अलग करना होता है। इसमें शैक्षणिक योग्यता, सामान्य व्यक्तित्व, संचार कौशल तथा पद के लिए प्रारम्भिक उपयुक्तता का मूल्यांकन किया जाता है।
  • संरचित / प्रतिरूप साक्षात्कार (Patterned/Structured Interview): इसमें सभी अभ्यर्थियों से पूर्व निर्धारित प्रश्न एक ही क्रम में पूछे जाते हैं। इससे चयन प्रक्रिया में वस्तुनिष्ठता, एकरूपता तथा निष्पक्ष तुलना सुनिश्चित होती है।
  • गहन साक्षात्कार (Depth Interview): इसमें अभ्यर्थी की शैक्षणिक योग्यता, कार्य-अनुभव, उपलब्धियाँ, व्यक्तित्व, अभिप्रेरणा, कैरियर लक्ष्य तथा व्यवहार का विस्तृत अध्ययन किया जाता है। यह विशेष रूप से प्रबंधकीय एवं व्यावसायिक पदों के चयन में उपयोगी होता है।
  • तनाव साक्षात्कार (Stress Interview): इस प्रकार के साक्षात्कार में जानबूझकर तनावपूर्ण अथवा चुनौतीपूर्ण परिस्थितियाँ उत्पन्न की जाती हैं ताकि अभ्यर्थी की भावनात्मक स्थिरता, धैर्य, आत्म-नियंत्रण तथा दबाव में कार्य करने की क्षमता का मूल्यांकन किया जा सके। यह रक्षा, पुलिस, ग्राहक सेवा तथा उच्च प्रबंधकीय पदों के लिए उपयुक्त होता है।
  • समूह साक्षात्कार (Group Interview): इसमें अनेक अभ्यर्थियों का एक साथ साक्षात्कार लिया जाता है। इसका उद्देश्य नेतृत्व क्षमता, टीम भावना, संचार कौशल, आत्मविश्वास तथा समूह में कार्य करने की योग्यता का मूल्यांकन करना होता है।
  • बोर्ड / पैनल साक्षात्कार (Board/Panel Interview): इसमें विभिन्न विभागों के विशेषज्ञों का एक पैनल मिलकर अभ्यर्थी का साक्षात्कार लेता है। इससे अभ्यर्थी का समग्र, संतुलित एवं निष्पक्ष मूल्यांकन संभव होता है तथा व्यक्तिगत पक्षपात की संभावना कम हो जाती है।
  • निर्गमन साक्षात्कार (Exit Interview): यह कर्मचारी के संगठन छोड़ने के समय लिया जाता है। इसका उद्देश्य त्यागपत्र के कारणों को समझना, संगठन की कमियों की पहचान करना तथा मानव संसाधन नीतियों एवं कार्य परिस्थितियों में सुधार करना होता है।
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