समावेशी संवृद्धि

समावेशी विकास एक ऐसा विकास दृष्टिकोण है जो आर्थिक वृद्धि को व्यापक,, भागीदारीपूर्ण और सतत बनाता है। यह केवल राज्य सकल घरेलू उत्पाद (GSDP) बढ़ाने तक सीमित नहीं रहता, बल्कि गरीबी और असमानता को कम करने, उत्पादक रोजगार के अवसर पैदा करने, मानव विकास के बेहतर परिणाम सुनिश्चित करने तथा विभिन्न क्षेत्रों, लिंगों और सामाजिक समूहों के बीच अवसरों की समान पहुँच पर विशेष ध्यान देता है।

समावेशी विकास की व्यापक समझ के लिए इसे निम्नलिखित प्रमुख श्रेणियों के अंतर्गत अध्ययन किया जा सकता है: आर्थिक, रोजगार, सामाजिक, क्षेत्रीय, बुनियादी ढाँचा, शासन तथा पर्यावरणीय।

श्रेणी

चुनौतियाँ / मुद्दे

सरकारी योजनाएँ / कदम

आर्थिक

  • वृद्धि एवं पूंजी निर्माण: GSDP ₹18.75 लाख करोड़, 10.24% वृद्धि; GFCF GSDP का 29.53% (25% बेंचमार्क से ऊपर)
  • क्षेत्रीय वृद्धि असंतुलन: विकास मुख्यतः जयपुर-अलवर-जोधपुर गलियारे में केंद्रित; बाड़मेर, जैसलमेर, बांसवाड़ा, डूंगरपुर पिछड़े।
  • प्रति व्यक्ति आय: ₹2,02,349 (2025-26); राष्ट्रीय औसत से ~8% कम।
  • क्षेत्रीय-रोजगार असंतुलित कृषि: GSVA का ~25% लेकिन कार्यबल का 55%+ हिस्सा।
  • गरीबी उन्मूलन: MPI गरीबी 28.86% → 15.31%; 1.08 करोड़ लोग गरीबी से बाहर; पश्चिमी/आदिवासी जिलों में धीमी गति।
  • ग्रामीण उपभोग असमानता [गिनी गुणांक बढ़ा (0.248 → 0.283), जबकि राष्ट्रीय स्तर पर कमी हुई।]
  • राजस्थान GCC पॉलिसी 2025, RIPS 2024, Ease of Doing Business सुधार।
  • आकांक्षी जिला कार्यक्रम (बारां, करौली, जैसलमेर, धौलपुर, सिरोही); जनजातीय उप-योजना (TSP); जिला स्तर विकास योजनाएँ।
  • रोजगार नीति 2026; जिला स्तर रोजगार योजनाएँ।
  • RUDA (ग्रामीण गैर-कृषि विकास एजेंसी); PM-MITRA (टेक्सटाइल); MSME विविधीकरण (RIPS 2024)
  • मुख्यमंत्री कन्यादान योजना; पालनहार योजना; रसोई गैस सब्सिडी योजना (गरीबी से जुड़ा DBT)।
  • मनरेगा; राजीविका स्व-सहायता समूह; लखपति दीदी योजना।

रोजगार

  • LFPR: 64.8% → 67.6% (भारत: 64.3% से बेहतर) महिला LFPR: 50.5% → 54.1%
  • बेरोजगारी दर: 4.9% → 4.7% (भारत: 3.5% से ऊपर) महिला बेरोजगारी: 3.2% → 4.5% (ख़राब)
  • नियमित वेतन वाली नौकरियों का हिस्सा राष्ट्रीय औसत से कम कार्यबल निम्न उत्पादकता वाले कृषि एवं अनौपचारिक क्षेत्र में केंद्रित।
  • रोजगार नीति 2026; मॉडल करियर सेंटर (16 स्थापित); रोजगार सहायता शिविर (49,497 नियुक्त)
  • मुख्यमंत्री युवा संबल योजना (बेरोजगारी भत्ता ₹4,000–4,500 प्रति माह, महिलाओं के लिए अधिक)
  • PMVBRY – औपचारिकरण प्रोत्साहन (18,263 प्रतिष्ठान पंजीकृत); EPFO विस्तार (22.26 लाख खाते)
  • राजस्थान स्किल पॉलिसी 2025; RSLDC (9+ लाख युवाओं को प्रशिक्षण, 2025-26); DDU-GKY

सामाजिक

  • वित्तीय समावेशन (महिलाएँ): 15-49 वर्ष की 88% महिलाओं के पास बैंक या बचत खाता (NFHS-6) — राष्ट्रीय औसत (89%) के लगभग बराबर।
  • संस्थागत प्रसव: 94.1% (NFHS-6) — राष्ट्रीय औसत 90.6% से ऊपर।
  • बाल पोषण (बर्बादी/कम वजन): वेस्टिंग 19.8%, कम वजन(अंडरवेट) 33.3% (NFHS-6) — राष्ट्रीय प्रवृत्ति से खराब।
  • टीकाकरण कवरेज: घटकर 75% रह गया, राष्ट्रीय औसत ~87% से कम।
  • मानव विकास सूचकांक (HDI): ~0.692 (मध्यम श्रेणी, राष्ट्रीय स्तर पर ~23वाँ स्थान, 2023)।
  • साक्षरता दर: 66.1% (2011 जनगणना) बनाम राष्ट्रीय 73%।
  • औसत आयु: 69.4 वर्ष (राष्ट्रीय औसत के लगभग बराबर)।
  • शिशु मृत्यु दर (IMR): 30 प्रति 1000 बनाम राष्ट्रीय 24 प्रति 1000; कम जन्म वजन एवं नवजात जटिलताएँ शिशु मृत्यु का ~30% कारण।
  • शिशु लिंगानुपात: 888 बनाम कुल लिंगानुपात 928 (2011 जनगणना) — पुत्र-प्राथमिकता की निरंतरता का संकेत।
  • जन आधार-लिंक्ड DBT; मुख्यमंत्री नारी शक्ति उद्यम प्रोत्साहन योजना (₹50 लाख तक ऋण)
  • जननी सुरक्षा योजना (JSY); लाडो प्रोत्साहन योजना (JSY से जुड़ी संस्थागत प्रसव की शर्त)
  • ICDS/आंगनबाड़ी नेटवर्क (63,064 केंद्र); सुपोषण न्यूट्रि-किट; पीएम पोषण; मुख्यमंत्री अमृत आहार
  • ICDS स्वास्थ्य जाँच घटक; प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना।
  • विकसित राजस्थान@2047 के अंतर्गत स्वास्थ्य, शिक्षा और आय संबंधी योजनाओं का अंतर्संबंध।
  • काली बाई भील महिला संबल शिक्षा सेतु योजना (ड्रॉपआउट महिलाओं/लड़कियों को शिक्षा से जोड़ना)
  • सार्वभौमिक स्वास्थ्य पहुँच पहलें; राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM)।
  • मुख्यमंत्री मातृत्व पोषण योजना; PMMVY; सुपोषण न्यूट्रि-किट।
  • बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ; लाडो प्रोत्साहन योजना (लड़की बच्ची के लिए 7 किस्तों में ₹1.5 लाख

क्षेत्रीय

  • जिला GDDP असमानता: जयपुर ₹2,12,335 करोड़ बनाम जैसलमेर ₹17,903 करोड़ (~12 गुना अंतर)
  • शीर्ष जिलों में एकाग्रता: शीर्ष 5 जिले (जयपुर, अलवर, जोधपुर, भीलवाड़ा, अजमेर) = राज्य GSDP का ~37%
  • SDG सूचकांक अंतर: राष्ट्रीय फ्रंट रनर (~67); राज्य समग्र स्कोर 60.80; झुंझुनू (67.13) बनाम जैसलमेर (51.82)।
  • ग्रामीण-शहरी विभाजन।
  • रोजगार परिणाम सूचकांक (EOI) – जिला स्तर पर ट्रैकिंग; जिला रोजगार योजनाएँ (रोजगार नीति 2026)।
  • SDG-अनुरूप राज्य नियोजन का पुनर्गठन (13 प्रमुख क्षेत्र, विकसित राजस्थान@2047)।
  • ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग की योजनाएँ; RUIDP (शहरी), मनरेगा (ग्रामीण)

बुनियादी ढाँचा

  • बिजली पहुँच: लगभग सार्वभौमिक कवरेज
  • पानी एवं स्वच्छता: मजबूत प्रगति।
  • आवास: अच्छा कवरेज, गुणवत्ता/पूर्णता में भिन्नता।
  • डिजिटल समावेशन (महिलाएँ): इंटरनेट उपयोग दोगुना (NFHS-6); ग्रामीण महिलाओं/बुजुर्गों में अभी भी कम।
  • अंतिम छोर तक कनेक्टिविटी।
  • आदिवासी/दूरस्थ क्षेत्रों में अपर्याप्त।
  • सौभाग्य योजना
  • जल जीवन मिशन (JJM); स्वच्छ भारत मिशन (SBM)
  • PMAY-G; PMAY-Urban; निर्माण श्रमिक सुलभ आवास योजना (निर्माण मजदूर)
  • मुख्यमंत्री वर्क फ्रॉम होम/जॉब वर्क योजना; राजस्थान रोजगार पोर्टल (EEMS 2.0)
  • प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY)-

शासन

  • DBT प्रभावशीलता: आधार-लिंक्ड DBT में मजबूत प्रदर्शन, रिसाव में कमी।
  • महिलाओं की प्रतिनिधित्व: वित्तीय समावेशन में सुधार के बावजूद स्थानीय शासन/उद्यमिता में सीमित।
  • अंतिम छोर तक योजनाओं की पहुँच (मनरेगा/पीएम-किसान): अच्छा कवरेज; स्थानीय रिसाव एवं प्रवासी बहिष्करण की समस्याएँ बनी हुई।
  • कमजोर उद्यमियों को सहयोग: पिछड़े क्षेत्रों एवं महिला उद्यमियों के लिए ऋण/बाजार पहुँच में कठिनाई।
  • जन आधार प्लेटफॉर्म; लाडो प्रोत्साहन, PMMVY, पालनहार आदि योजनाओं के लिए DBT रूटिंग
  • साथिन कार्यक्रम (10,908 ग्रामीण स्तर की महिला कार्यकर्ताएँ)
  • मनरेगा (1,554.85 लाख मानव-दिवस सृजित); ई-श्रम पोर्टल (1.52 करोड़ असंगठित श्रमिक पंजीकृत)
  • “राइजिंग राजस्थान” एमएसएमई फोकस; RIPS 2024; मुख्यमंत्री नारी शक्ति उद्यम प्रोत्साहन योजना।

पर्यावरणीय

  • नवीकरणीय ऊर्जा एकाग्रता: सोलर/विंड क्षमता का 85% से अधिक हिस्सा केवल 4 जिलों (बाड़मेर, बीकानेर, जैसलमेर, जोधपुर) में।
  • जलवायु संवेदनशीलता: सूखा/जल की कमी का सबसे अधिक प्रभाव छोटे किसानों, पशुपालकों और आदिवासी समुदायों पर।
  • ग्रीन हाइड्रोजन पॉलिसी; PM-KUSUM
  • आपदा प्रबंधन विभाग राहत कार्य; RUDA (सूखा प्रभावित क्षेत्रों में कारीगरों के लिए वैकल्पिक आजीविका)

समावेशी विकास विकसित राजस्थान@2047 का केंद्रीय स्तंभ है। इसकी प्राप्ति हेतु क्षेत्रीय (जिला-स्तरीय GDDP अंतर), क्षेत्रीय (कृषि-रोजगार असंतुलन), सामाजिक (लैंगिक व पोषण) तथा पर्यावरणीय (जलवायुगत असुरक्षा) विभाजनों को लक्षित, प्रमाण-आधारित व समता-केंद्रित हस्तक्षेपों द्वारा पाटना अनिवार्य है — जिससे राजस्थान की आर्थिक प्रगति समाज के सभी वर्गों के लिए बेहतर आजीविका, अधिक अवसर व उत्तम जीवन गुणवत्ता में परिवर्तित हो सके।

संशोधित बजट 2024-25 में “सबका साथ, सबका विकास” के सिद्धांत पर आधारित विकसित राजस्थान@2047 के अंतर्गत समावेशी विकास हेतु दस संकल्प प्रस्तुत किए गए, ताकि समतापूर्ण विकास हेतु 5 वर्षीय अमृत काल कार्य योजना तैयार की जा सके।

मुख्य बिंदु

  • उद्देश्य: समाज के हर वर्ग व राज्य के हर क्षेत्र तक पहुंचने वाली समावेशी, समतापूर्ण व सतत वृद्धि प्राप्त करना।
  • चार प्रमुख लक्षित स्तंभ:
    • गरीब – गरीबी उन्मूलन व सामाजिक सुरक्षा
    • युवा – कौशल विकास, रोजगार, उद्यमिता
    • अन्नदाता – कृषि उत्पादकता व किसान कल्याण
    • नारी शक्ति – आर्थिक स्वतंत्रता व सुरक्षा
  • प्रमुख संकल्प: कृषि आधुनिकीकरण, औद्योगिक विस्तार, नवीकरणीय ऊर्जा तथा पर्यटन/डिजिटल अर्थव्यवस्था के माध्यम से राजस्थान को 2029 तक $350 बिलियन की अर्थव्यवस्था में बदलना।

बजट 2026-27 संरेखण: इन दस स्तंभों के अनुरूप विभिन्न विभागों में नई पहलों का प्रस्ताव किया गया है, जो स्कीमैटिक बजट आवंटन के माध्यम से दृष्टिकोण को क्रियान्वित करती हैं।

error: Content is protected !!
Scroll to Top
Telegram WhatsApp Chat