समावेशी विकास एक ऐसा विकास दृष्टिकोण है जो आर्थिक वृद्धि को व्यापक,, भागीदारीपूर्ण और सतत बनाता है। यह केवल राज्य सकल घरेलू उत्पाद (GSDP) बढ़ाने तक सीमित नहीं रहता, बल्कि गरीबी और असमानता को कम करने, उत्पादक रोजगार के अवसर पैदा करने, मानव विकास के बेहतर परिणाम सुनिश्चित करने तथा विभिन्न क्षेत्रों, लिंगों और सामाजिक समूहों के बीच अवसरों की समान पहुँच पर विशेष ध्यान देता है।
समावेशी विकास की व्यापक समझ के लिए इसे निम्नलिखित प्रमुख श्रेणियों के अंतर्गत अध्ययन किया जा सकता है: आर्थिक, रोजगार, सामाजिक, क्षेत्रीय, बुनियादी ढाँचा, शासन तथा पर्यावरणीय।

श्रेणी | चुनौतियाँ / मुद्दे | सरकारी योजनाएँ / कदम |
आर्थिक |
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रोजगार |
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सामाजिक |
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क्षेत्रीय |
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बुनियादी ढाँचा |
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शासन |
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पर्यावरणीय |
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समावेशी विकास विकसित राजस्थान@2047 का केंद्रीय स्तंभ है। इसकी प्राप्ति हेतु क्षेत्रीय (जिला-स्तरीय GDDP अंतर), क्षेत्रीय (कृषि-रोजगार असंतुलन), सामाजिक (लैंगिक व पोषण) तथा पर्यावरणीय (जलवायुगत असुरक्षा) विभाजनों को लक्षित, प्रमाण-आधारित व समता-केंद्रित हस्तक्षेपों द्वारा पाटना अनिवार्य है — जिससे राजस्थान की आर्थिक प्रगति समाज के सभी वर्गों के लिए बेहतर आजीविका, अधिक अवसर व उत्तम जीवन गुणवत्ता में परिवर्तित हो सके।
संशोधित बजट 2024-25 में “सबका साथ, सबका विकास” के सिद्धांत पर आधारित विकसित राजस्थान@2047 के अंतर्गत समावेशी विकास हेतु दस संकल्प प्रस्तुत किए गए, ताकि समतापूर्ण विकास हेतु 5 वर्षीय अमृत काल कार्य योजना तैयार की जा सके।
मुख्य बिंदु
- उद्देश्य: समाज के हर वर्ग व राज्य के हर क्षेत्र तक पहुंचने वाली समावेशी, समतापूर्ण व सतत वृद्धि प्राप्त करना।
- चार प्रमुख लक्षित स्तंभ:
- गरीब – गरीबी उन्मूलन व सामाजिक सुरक्षा
- युवा – कौशल विकास, रोजगार, उद्यमिता
- अन्नदाता – कृषि उत्पादकता व किसान कल्याण
- नारी शक्ति – आर्थिक स्वतंत्रता व सुरक्षा
- प्रमुख संकल्प: कृषि आधुनिकीकरण, औद्योगिक विस्तार, नवीकरणीय ऊर्जा तथा पर्यटन/डिजिटल अर्थव्यवस्था के माध्यम से राजस्थान को 2029 तक $350 बिलियन की अर्थव्यवस्था में बदलना।

बजट 2026-27 संरेखण: इन दस स्तंभों के अनुरूप विभिन्न विभागों में नई पहलों का प्रस्ताव किया गया है, जो स्कीमैटिक बजट आवंटन के माध्यम से दृष्टिकोण को क्रियान्वित करती हैं।
