राजस्थान के विभिन्न ऐतिहासिक स्थल एवं उनका महत्व

 बिजोलिया 1170 ई. का एक शिलालेख है, जो संस्कृत में लिखा गया है, बिजोलिया में सोमेश्वर चौहान के प्राचीन पार्श्वनाथ मंदिर के पास स्थित है, जिसे जैन श्रावक लोलाक द्वारा स्थापित किया गया है।

Bijolia Inscription

महत्व:

  • अजमेर और सांभर के चौहानों को ‘वत्स गोत्रीय ब्राह्मण’ बताया गया है।
  • तत्कालीन भूमि अनुदान अर्थात दोहली के बारे में जानकारी।
  • प्राचीन स्थानों के नामों की जानकारी, जैसे जाबिलपुर (जालौर), शाकम्बरी (सांभर), ढिल्लिका (दिल्ली), उत्तमाद्रि (बिजोलिया)।
  1. बिजौलिया अभिलेख : 
  • बिजौलिया 1170 ई. का एक शिलालेख है, जो संस्कृत में लिखा गया है।
  • यह पार्श्वनाथ मंदिर के पास स्थित है, जिसे जैन श्रावक लोलाक द्वारा स्थापित किया गया है।
  • महत्व:
    • अजमेर और सांभर के चौहानों को ‘वत्स गोत्रीय ब्राह्मण’ बताया गया है।
    • तत्कालीन भूमि अनुदान अर्थात दोहली के बारे में जानकारी।
    • प्राचीन स्थानों के नामों की जानकारी, जैसे जाबिलपुर (जालौर), शाकम्बरी (सांभर), ढिल्लिका (दिल्ली), उत्तमाद्रि (बिजौलिया)।

2. सामोली अभिलेख : 

  • यह 646 ई. गुहिल राजा शिलादित्य के समय का एक शिलालेख है, जो की दक्षिणी मेवाड़ के भोमट तहसील के समोली गाँव से मिला है 
  • इसकी भाषा संस्कृत तथा लिपि कुटिल है।
  • महत्व :
    • गुहिल वंश के काल का निर्धारण करने में सहायक।
    • ज़ावर के पास तांबे और जस्ता खनन के प्रमाण।
    • उस समय मेवाड़ की आर्थिक और साहित्यिक स्थिति पर ध्यान केंद्रित।
  1.   कणसवा अभिलेख : 
    • यह 738 ई. का कोटा के निकट कणसवा गाँव में लगा हुआ शिलालेख है।  
    • इसकी भाषा संस्कृत है।
    • यह मौर्य शासक धवल के बारे में जानकारी देता है।
    • यह शिलालेख महत्वपूर्ण है क्योंकि इसके बाद राजस्थान में मौर्य वंश के शासकों का कोई उल्लेख नहीं मिलता।
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