HR योजना एक व्यवस्थित प्रक्रिया है जिसमें तीन मुख्य चरण होते हैं।
HR नियोजन के चरण
- रणनीतिक अभिप्राय का निर्माण
- इसमें कर्मचारी प्रयासों को संगठनात्मक उद्देश्यों के साथ जोड़ने के लिए संगठन के मिशन, कार्य भूमिकाओं और श्रम विभाजन को परिभाषित करना शामिल है।
- मानव संसाधन एकीकरण चरण : यह निम्नलिखित पर ध्यान केंद्रित करता है :
- प्रशिक्षण के माध्यम से दक्षता विकास
- कार्य-निष्पादन प्रबंधन और पुरस्कार प्रणाली
- संगठनात्मक डिजाइन और संचार
- नेतृत्व निर्देशन
- क्रियान्वयन चरण :
- इसमें HR कार्यों को प्राथमिकता देना, संसाधनों का आवंटन और बदलती संगठनात्मक आवश्यकताओं के आधार पर कार्मिक योजनाओं को निरंतर समायोजित करना शामिल है।
यह कथन वर्तमान गतिशील व्यवसायिक वातावरण में अत्यंत प्रासंगिक है। मानव संसाधन योजना (HRP) कठोर नहीं हो सकती क्योंकि संगठन निरंतर बदलते आंतरिक और बाह्य वातावरण में कार्य करते हैं। सफलता के लिए लचीलापन आवश्यक है।
लचीलापन क्यों महत्वपूर्ण है?
1. तीव्र प्रौद्योगिकी एवं आर्थिक परिवर्तन
- प्रौद्योगिकी उन्नति से कौशल अप्रचलित हो जाते हैं। लचीली HRP समय पर पुनर्कौशल विकास और जनशक्ति आवश्यकताओं में समायोजन संभव बनाती है।
2. अनिश्चित व्यवसायिक वातावरण
- बाजार माँग, सरकारी नीतियों, प्रतिस्पर्धा और आर्थिक स्थितियों में परिवर्तन HR योजनाओं की निरंतर समीक्षा की माँग करते हैं।
3. जनशक्ति असंतुलन से बचाव
- कठोर योजना से कर्मचारियों की अधिकता या कमी हो जाती है। लचीलापन सटीक पूर्वानुमान और समय पर सुधारात्मक कदमों में सहायता करता है।
4. रणनीतिक संरेखण
- लचीली HRP मानव संसाधन रणनीतियों को बदलते संगठनात्मक लक्ष्यों और दीर्घकालिक विजन से जोड़े रखती है।
5. कार्यबल की गतिशील प्रकृति
- कर्मचारी अपेक्षाएँ, जनसांख्यिकीय परिवर्तन और कौशल आवश्यकताएँ बदलती रहती हैं। लचीली योजना विविधता और नई अपेक्षाओं को समाहित करती है।
लचीलापन HRP को स्थिर अभ्यास से गतिशील रणनीतिक उपकरण में बदल देता है। इसके बिना HRP अपनी प्रासंगिकता खो देती है और संगठनात्मक सफलता में योगदान नहीं कर पाती। इसलिए संगठनों को लचीले, चक्रीय और अनुकूलनीय मैनपावर प्लानिंग अपनानी चाहिए।
मानव संसाधन नियोजन एक व्यापक प्रक्रिया है, जो यह सुनिश्चित करती है कि संगठन में आवश्यक कौशल वाले कर्मचारियों की उचित संख्या उपलब्ध हो। यह केवल भर्ती और चयन तक सीमित नहीं है, बल्कि कर्मचारियों के विकास, कल्याण, अभिप्रेरणा तथा मानव संसाधनों के प्रभावी उपयोग को भी सम्मिलित करता है।
- व्यावसायिक विकास तथा कार्मिक व्यवस्था: मानव संसाधन नियोजन में उचित कार्मिक व्यवस्था शामिल होती है, जिसके अंतर्गत
- भर्ती एवं चयन
- पदस्थापन एवं स्थानांतरण
- पदोन्नति शामिल हैं।
- प्रशिक्षण एवं विकास पर बल: मानव संसाधन नियोजन कर्मचारियों के प्रशिक्षण एवं विकास पर भी ध्यान देता है, जिसके लिए—
- प्रशिक्षण कार्यक्रम
- पुनश्चर्या पाठ्यक्रम
- आवश्यक निर्देश
- अध्ययन-अवकाश प्रदान किए जाते हैं।
- सेवा की शर्तें एवं कर्मचारी कल्याण: सेवा की शर्तों में शामिल हैं –
- वेतन प्रशासन
- प्रोत्साहन
- अतिरिक्त सुविधाएँ
- सेवानिवृत्ति लाभ
- कर्मचारी कल्याण: चिकित्सा सुविधाएँ, अवकाश, मनोरंजन सुविधाएँ, आवास सुविधा, अवकाश यात्रा रियायत, बच्चों की शिक्षा की सुविधा।
ये सभी उपाय कर्मचारियों की संतुष्टि तथा उनके समग्र कल्याण को बढ़ाने में सहायक होते हैं।
