रॉकेट प्रणोदन विज्ञान और प्रौद्योगिकी का एक महत्वपूर्ण विषय है, जो रॉकेट को गति प्रदान करने तथा उसे अंतरिक्ष में प्रक्षेपित करने की प्रक्रिया से संबंधित है। इसमें ईंधन के दहन से उत्पन्न गैसों के निष्कासन द्वारा थ्रस्ट (बल) उत्पन्न किया जाता है, जिससे रॉकेट पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण को पार करने में सक्षम होता है। इस विषय के अंतर्गत हम रॉकेट प्रणोदन के विभिन्न प्रकारों, उनकी कार्यप्रणाली तथा अंतरिक्ष अभियानों में उनके उपयोग का अध्ययन करेंगे।
रॉकेट प्रणोदन के प्रकार एवं कार्यप्रणाली
- कार्यकारी सिद्धांत: रॉकेट इंजन की कार्यप्रणाली न्यूटन के गति के तृतीय नियम (क्रिया-प्रतिक्रिया का नियम) पर आधारित है। इस नियम के अनुसार, प्रत्येक क्रिया के बराबर और विपरीत दिशा में प्रतिक्रिया होती है।
- प्रक्रिया:
- रॉकेट के नोजल (Nozzle) से अत्यधिक वेग के साथ निकलने वाली गैसों का द्रव्यमान एक ‘क्रिया’ (Action) उत्पन्न करता है।
- यही गैसें रॉकेट पर विपरीत दिशा में एक धक्का लगाती हैं, जिसे वैज्ञानिक भाषा में प्रणोद (Thrust) कहा जाता है।
- इसी प्रणोद के कारण रॉकेट ऊपर की ओर तीव्र गति से उड़ान भरता है।
इसरो के प्रक्षेपण यान
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प्रक्षेपण यान |
विवरण / विनिर्देश |
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ध्वनि रॉकेट |
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SLV (उपग्रह प्रक्षेपण यान ) |
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ASLV (संवर्धित SLV) 1992 |
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PSLV (ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान) |
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GSLV Mk-II (भू-तुल्यकालिक उपग्रह प्रक्षेपण यान) |
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GSLV Mk-III (LVM3) |
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RLV-TD (पुन: प्रयोज्य प्रक्षेपण यान – प्रौद्योगिकी प्रदर्शक) 2016 |
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लघु उपग्रह प्रक्षेपण यान (SSLV) |
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नेक्स्ट जनरेशन लॉन्च व्हीकल (NGLV) |
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लूनर मॉड्यूल लॉन्च व्हीकल (LMLV) (2035 तक तैयार होने की संभावना) |
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PSLV के महत्वपूर्ण मिशन
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मिशन कोड |
मिशन का नाम / विवरण |
मुख्य बिंदु |
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PSLV-C11 |
चंद्रयान-1 (अक्टूबर 2008) |
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PSLV-C25 |
मंगलयान (MOM) (नवंबर 2013) |
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PSLV-C30 |
एस्ट्रोसैट (AstroSat) |
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PSLV-C37 |
विश्व रिकॉर्ड (फरवरी 2017) |
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PSLV-C45 |
EMISAT + 28 उपग्रह (2019) |
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PSLV-C48 |
PSLV 50वीं उड़ान (दिसंबर 2019) |
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PSLV-C51 |
प्रथम वाणिज्यिक प्रक्षेपण (2021) |
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PSLV-C54 |
EOS-06 (नवंबर 2022) |
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PSLV-C55 |
TeLEOS-2 और Lumelite-4 (अप्रैल 2023) |
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PSLV-C57 |
आदित्य-L1 (सितंबर 2023) |
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PSLV-C58 |
XPoSat (जनवरी 2024) |
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PSLV-C59 |
Proba-3 (दिसंबर 2024) |
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PSLV-C60 |
SpaDeX (दिसंबर 2024) |
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PSLV-C61 |
EOS-09 |
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PSLV-C62 |
EOS-N1/अन्वेषा (जनवरी 2026) |
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PSLV-C63 |
TDS-01 (2026 – आगामी) |
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PSLV N1 |
EOS-10 (आगामी – मार्च 2026) |
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GSLV के महत्वपूर्ण मिशन
GSLV Mk II (स्वदेशी क्रायोजेनिक चरण युक्त)
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मिशन कोड |
विवरण और महत्व |
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GSLV-D5 (2014) |
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GSLV-F09 (2017) |
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GSLV-F12 (2023) |
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GSLV-F14 (2024) |
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GSLV-F15 (2025) |
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GSLV-F16 (2025) |
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GSLV-F17 (2026) |
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GSLV Mk III (LVM3 – ‘फैट बॉय’)
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मिशन कोड |
विवरण और महत्व |
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LVM3-X (2014) |
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GSLV Mk III-M1 (2019) |
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LVM3-M2/M3 (2022-23) |
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LVM3-M4 (2023) |
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LVM3-M5 (नवंबर 2025) |
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LVM3-M6 (दिसंबर 2025) |
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इसरो के भविष्य के मिशन |
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SSLV के महत्वपूर्ण मिशन
- SSLV-D1/EOS-02 मिशन
- SSLV-D2/EOS-07 मिशन: इसमें मुख्य उपग्रह EOS-07, अमेरिका का Janus-1 और AzaadiSAT-2 शामिल थे। इस मिशन ने प्रणालीगत सुधारों को सत्यापित किया और उपग्रहों को उनकी सटीक कक्षीय प्रविष्टि में सफलतापूर्वक स्थापित किया।
- SSLV-D3/EOS-08 मिशन
- तीसरी विकासात्मक उड़ान: 16 अगस्त 2024 को सफलतापूर्वक लॉन्च।
- उपग्रह: EOS-08 को सटीक रूप से कक्षा में स्थापित किया।
- पेलोड का प्रकार: SSLV-D3/EOS-08 मिशन एक पृथ्वी अवलोकन उपग्रह को लेकर गया था।
- इस सफल उड़ान के साथ ही SSLV विकास परियोजना पूर्ण हो गई है। अब यह भारतीय उद्योगों और NSIL (न्यू स्पेस इंडिया लिमिटेड) द्वारा भविष्य के परिचालन मिशनों के लिए पूरी तरह तैयार है।
लघु उपग्रह प्रक्षेपण यान (SSLV)
| देश | लघु रॉकेट कार्यक्रम |
| जापान | SS-520, एप्सिलॉन (Epsilon) |
| अमेरिका | रॉकेट लैब (Electron) |
| भारत | इसरो का SSLV (लघु उपग्रह प्रक्षेपण यान) – SSLV-D2 का पहला सफल प्रक्षेपण फरवरी 2023 में श्रीहरिकोटा से हुआ। |
| चीन | CASIC Kuaizhou श्रृंखला |
रॉकेट प्रौद्योगिकी – प्रणोदन प्रणाली (Propulsion System)
इसमें इंजन, टैंक और प्रणोदक (Propellants) शामिल होते हैं। यह रॉकेट के कुल आयतन (Volume) का लगभग 80% हिस्सा घेरता है। प्रणोदन को मुख्य रूप से प्रणोदकों (ईंधन और ऑक्सीकारक) की भौतिक अवस्था के आधार पर वर्गीकृत किया गया है:
प्रणोदन के प्रकार
| प्रकार | प्रणोदक की अवस्था | विशेषताएं | उदाहरण |
| ठोस (Solid) | पूर्व-मिश्रित ईंधन और ऑक्सीकारक (HTPB) | उच्च प्रणोद (Thrust), सरल संरचना, लेकिन एक बार प्रज्वलित होने के बाद इसे बंद नहीं किया जा सकता। | PSLV का प्रथम चरण (S139) |
| तरल (Liquid) | पृथक ईंधन और ऑक्सीकारक (UDMH + नाइट्रोजन टेट्रोक्साइड) | इसे नियंत्रित (Throttleable) किया जा सकता है और पुनः शुरू (Restart) किया जा सकता है; इसकी प्लंबिंग जटिल होती है। | विकास इंजन (Vikas Engine) |
| क्रायोजेनिक (Cryogenic) | द्रवीकृत गैसें (-183°C LOX, -253°C LH2) | सर्वाधिक कुशल (उच्च विशिष्ट आवेग), अत्यधिक जटिल तकनीक। | CE-20(LVM3 में प्रयुक्त) |
| सेमी-क्रायोजेनिक (Semi-Cryogenic) | परिष्कृत केरोसिन (RP-1) और तरल ऑक्सीजन (LOX) | तरल ईंधन से अधिक शक्तिशाली और पूर्ण क्रायोजेनिक की तुलना में रखरखाव में आसान। | SCE-200(आगामी इंजन) |
मीथेन-प्रणोदित रॉकेट (LOX Methane Rockets)
- ईंधन: तरल मीथेन + ऑक्सीकारक: तरल ऑक्सीजन (LOX) → इसे ‘मेथालॉक्स’ (Methalox) कहा जाता है।
- महत्त्व: यह ‘पुन: प्रयोज्य प्रक्षेपण यान’ के लिए उभरती हुई प्रमुख प्रणोदन तकनीक है।
- प्रमुख उदाहरण:
- झूचुए-2 (Zhuque-2): चीन की लैंडस्पेस कंपनी द्वारा विकसित। जुलाई 2023 में कक्षा तक पहुँचने वाला दुनिया का पहला मीथेन-प्रोपेल्ड रॉकेट।
- स्पेसएक्स स्टारशिप: गहरे अंतरिक्ष मिशनों के लिए मीथेन आधारित पुनः उपयोग योग्य रॉकेट।
- रिलेटिविटी स्पेस टेरान 1 (Terran 1): एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग (3D-प्रिंटेड) तकनीक से निर्मित मीथेन रॉकेट। (पहला 3D-मुद्रित रॉकेट)।
- इसरो (ISRO) का प्रयास: इसरो दो मीथेन-संचालित इंजनों को विकसित कर रहा है।
- इनमें से एक परियोजना वर्तमान क्रायोजेनिक इंजन (जो तरल हाइड्रोजन का उपयोग करता है) को LOX-मीथेन इंजन में परिवर्तित करने की है।
- इनका विकास तिरुवनंतपुरम स्थित इसरो के तरल प्रणोदन प्रणाली केंद्र (LPSC) में किया जा रहा है।
आयन रॉकेट (Ion Rockets)
- आयन रॉकेट गहरे अंतरिक्ष अन्वेषण के लिए अत्यधिक कुशल माने जाते हैं।
- वेग: ये 20-80 किमी/सेकंड का वेग प्राप्त कर सकते हैं (जबकि रासायनिक रॉकेट केवल 2-3 किमी/सेकंड तक सीमित होते हैं)।
- ये एक विद्युत प्रणोदन प्रणाली का उपयोग करते हैं, जो आयनों को उच्च वेग पर त्वरित कर बाहर निकालते हैं, जिससे निरंतर प्रणोद (Thrust) प्राप्त होता है।
- प्रमुख मिशन: इनका छोटे पैमाने पर उपयोग नासा के डॉन (Dawn) और डीप स्पेस, ईएसए के लीसा पाथफाइंडर (LISA Pathfinder) और जापान के हायाबुसा (Hayabusa) मिशनों में किया गया है।
इसरो के प्रक्षेपण केंद्र (Launch Stations)
- सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र (SHAR)
- स्थान: श्रीहरिकोटा, आंध्र प्रदेश।
- विशेषता: SHAR में PSLV और GSLV उड़ानों (भारी उपग्रहों) के लिए दो प्रक्षेपण पैड उपलब्ध हैं।
- इसरो का तीसरा प्रक्षेपण पैड (Third Launch Pad – TLP)
- इसे सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र, श्रीहरिकोटा में बनाया जाएगा। (अनुमानित समय: 4 वर्ष – 2029 तक)।
- उद्देश्य:
- प्रक्षेपण आवृत्ति में वृद्धि, गगनयान मिशन और भविष्य के भारी रॉकेटों (जैसे NGLV) का समर्थन करना।
- श्रीहरिकोटा में स्थित द्वितीय प्रक्षेपण पैड (SLP) के लिए एक स्टैंडबाय (Standby) प्रक्षेपण पैड के रूप में कार्य करना।
- कुलसेकरपट्टिनम स्पेसपोर्ट (Kulasekarapattinam Spaceport)
- स्थान: थूथुकुडी जिला, तमिलनाडु।
- उद्देश्य: यह SSLV (लघु उपग्रह प्रक्षेपण यान) के लिए भारत का नया स्पेसपोर्ट है।
- प्रक्षेपण: यहाँ से नैनो और माइक्रो-सैटेलाइट जैसे लघु पेलोड प्रक्षेपित किए जाएंगे।
- लाभ: कुलसेकरपट्टिनम से सीधे दक्षिण दिशा में प्रक्षेपण करने का लाभ मिलता है, जिससे ‘डॉगलेग मैन्युवर’ (Dogleg Manoeuvre) की आवश्यकता नहीं होती। इससे रॉकेट के ईंधन की बचत होती है और पेलोड क्षमता में सुधार होता है।

रॉकेट प्रौद्योगिकी में निजी क्षेत्र का योगदान
अग्निबाण सबऑर्बिटल टेक्नोलॉजी डिमॉन्स्ट्रेटर (Agnibaan SOrTeD)
- प्रक्षेपण: IIT मद्रास स्थित स्टार्टअप ‘अग्निकुल कॉस्मॉस’ (Agnikul Cosmos) द्वारा।
- प्रक्षेपण स्थल: इसे भारत के पहले निजी प्रक्षेपण पैड ‘धनुष’ (अग्निकुल द्वारा निर्मित) से लॉन्च किया गया।
- इंजन: यह ‘अग्निलेट’ (Agnilet) इंजन द्वारा संचालित है, जो दुनिया का पहला एकल-खंड (Single-piece) 3D-मुद्रित इंजन है।
- प्रकार: सेमी-क्रायोजेनिक इंजन (तरल ऑक्सीजन + ATF – एविएशन टर्बाइन फ्यूल)। यह भारत के निजी अंतरिक्ष क्षेत्र में अपनी तरह का पहला इंजन है।
- मिशन प्रकार: सब-ऑर्बिटल टेक्नोलॉजी डिमॉन्स्ट्रेटर (SOrTeD) → जिसका उद्देश्य भविष्य के कक्षीय रॉकेट ‘अग्निबाण’ के लिए उड़ान डेटा एकत्र करना है।
- पेलोड क्षमता: 30-300 किलोग्राम; इसमें मोबाइल लॉन्च (Mobile Launch) की सुविधा है।
- दृष्टिकोण: “कहीं से भी, कभी भी, किफायती रूप से प्रक्षेपण”, अनुकूलन योग्य छोटे उपग्रह प्रक्षेपणों को सक्षम करना।
विक्रम-S (Vikram-S)
- यह भारत का पहला निजी तौर पर निर्मित रॉकेट है, जिसे 18 नवंबर 2022 को ‘स्काईरूट एयरोस्पेस’ द्वारा श्रीहरिकोटा से प्रक्षेपित किया गया था।
- मिशन का नाम: इस रॉकेट लॉन्च के पहले मिशन को ‘प्रारंभ’ (Prarambh) नाम दिया गया था।
- कलम 1200 (KALAM 1200): यह एक ठोस मोटर है, जो विक्रम-1 प्रक्षेपण यान के प्रथम चरण के रूप में कार्य करती है।
