रक्षा प्रौद्योगिकी विज्ञान और प्रौद्योगिकी का एक महत्वपूर्ण विषय है, जो राष्ट्र की सुरक्षा के लिए उन्नत तकनीकों के विकास और उपयोग से संबंधित है। इसमें हथियार प्रणाली, मिसाइल, निगरानी, संचार और आधुनिक युद्ध तकनीकों का अध्ययन शामिल है।इस विषय के अंतर्गत हम विभिन्न रक्षा तकनीकों, उनके अनुप्रयोगों तथा राष्ट्रीय सुरक्षा को सुदृढ़ बनाने में उनकी भूमिका का अध्ययन करेंगे।
मिसाइल प्रणाली के मूल सिद्धांत
- एक मिसाइल (प्रक्षेपास्त्र) एक ऐसी निर्देशित मारक/हथियार प्रणाली है जिसे किसी पेलोड (पारंपरिक या परमाणु विस्फोटक) को सटीकता के साथ लक्ष्य तक पहुंचाने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
- रॉकेट और मिसाइल के बीच मुख्य अंतर उनकी नियंत्रण क्षमता है। रॉकेट के विपरीत, मिसाइलें निर्देशन (Guidance), नौवहन (Navigation) और नियंत्रण प्रणालियों (Control Systems) से लैस होती हैं, जो उन्हें उड़ान के दौरान अपने प्रक्षेप पथ को संशोधित करने की अनुमति देती हैं।
- मिसाइलें रक्षा रणनीति में दो प्रमुख भूमिकाएँ निभाती हैं:
- युद्धक भूमिका (Tactical Role):
- उपयोग: युद्ध क्षेत्र में दुश्मन के सैन्य ठिकानों, वाहनों या सैनिकों के विरुद्ध।
- विशेषता: ये प्रायः कम दूरी की मारक क्षमता वाली होती हैं।
- रणनीतिक भूमिका (Strategic Role):
- मुख्य उद्देश्य: परमाणु निवारण (Nuclear Deterrence) और लंबी दूरी तक प्रहार करने की क्षमता बनाए रखना।
- महत्व: ये राष्ट्र की सुरक्षा और शक्ति संतुलन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होती हैं।
- युद्धक भूमिका (Tactical Role):
मिसाइल प्रणाली के घटक (Components)
मिसाइल प्रणाली को मुख्य रूप से पाँच भागों में वर्गीकृत किया गया है:

वारहेड (Warhead):
वारहेड मिसाइल का वह प्रमुख भाग है जो लक्ष्य को नष्ट करने या अक्षम करने का कार्य करता है। इसे इसमें प्रयुक्त विस्फोटक सामग्री के आधार पर निम्न प्रकार से वर्गीकृत किया गया है:
- पारंपरिक वारहेड (Conventional Warheads):
- ये मुख्य रूप से उच्च विस्फोटक (जैसे TNT, RDX, और HMX) का उपयोग करते हैं।
- ये विस्फोट, विखंडन (fragmentation), या दाहक (incendiary) प्रभावों के माध्यम से क्षति पहुँचाते हैं।
- इनका उपयोग आमतौर पर स्थानीय लक्ष्यों पर सामरिक हमलों (Tactical Strikes) के लिए किया जाता है।
- गैर-पारंपरिक वारहेड/सामूहिक विनाश के हथियार (WMD): इनकी विनाशकारी क्षमता अत्यधिक होती है और इनमें निम्नलिखित शामिल हैं:
- परमाणु वारहेड (Nuclear Warheads): ये ऊर्जा की भारी मात्रा मुक्त करने के लिए नाभिकीय विखंडन (Fission) या संलयन (Fusion) अभिक्रियाओं का प्रयोग करते हैं।
- रासायनिक वारहेड (Chemical Warheads): ये जहरीले रासायनिक एजेंटों को फैलाते हैं जिन्हें चोट पहुँचाने, अक्षम करने या जान लेने के लिए डिज़ाइन किया जाता है।
- जैविक वारहेड (Biological Warheads): इनमें जीवित सूक्ष्मजीव (जैसे रोगजनक या विष) होते हैं, जिनका उद्देश्य बीमारी फैलाना या मृत्यु उत्पन्न करना होता है।
प्रणोदन प्रणाली (Propulsion System):
यह मिसाइल का वह इंजन है जो उसे गति देने और उड़ान पथ पर बनाए रखने के लिए आवश्यक नोद (Thrust) प्रदान करता है। मिसाइल की सीमा (Range), गति और परिचालन वातावरण का निर्धारण इसकी संरचना पर निर्भर करता है।
- मिसाइल इंजन के प्रकार:
- जेट इंजन (वायु-श्वसन/Air-Breathing):
- ये दहन के लिए वायुमंडलीय ऑक्सीजन का उपयोग करते हैं (जैसे विमान के इंजन)।
- वायुमंडल में निरंतर उड़ान के लिए अत्यधिक कुशल होते हैं।
- मुख्य रूप से क्रूज मिसाइलों में उपयोग किए जाते हैं (जैसे- टर्बोफैन, टर्बोजेट, रैमजेट, स्क्रैमजेट)।
- रॉकेट इंजन (गैर-वायु-श्वसन/ Non-Air-Breathing):
- ये ईंधन और आंतरिक ऑक्सीकारक (Oxidizer) (जैसे तरल ऑक्सीजन) दोनों को साथ ले जाते हैं।
- ये वायुमंडल और अंतरिक्ष के निर्वात (Vacuum) दोनों में कार्य कर सकते हैं।
- ये अत्यधिक तीव्र नोद (Thrust) उत्पन्न करते हैं।
- इनका उपयोग बैलिस्टिक मिसाइलों और अंतरिक्ष प्रक्षेपण यानों के लिए किया जाता है।
- नोजल (Nozzle): यह एक महत्वपूर्ण घटक है जो उच्च-वेग वाली निकास गैसों (Exhaust gases) को निर्देशित करता है। यह तापीय ऊर्जा को गतिज ऊर्जा में परिवर्तित करता है, जिससे अधिकतम नोद (Thrust) उत्पन्न होता है।
- जेट इंजन (वायु-श्वसन/Air-Breathing):
प्रणोदन तकनीक (Propulsion Technologies)
- ठोस ईंधन प्रणोदन (Solid-Fuel Propulsion):
- यह सरल संरचना वाली प्रणाली है जो उच्च प्रारंभिक नोद (Initial Thrust) प्रदान करती है।
- एक बार प्रज्वलन (Ignition) होने के बाद इसे नियंत्रित या बंद नहीं किया जा सकता।
- उदाहरण: पृथ्वी मिसाइल, ब्रह्मोस का प्रथम चरण।
- तरल प्रणोदन (Liquid Propulsion):
- इसमें ईंधन और ऑक्सीकारक तरल अवस्था में होते हैं।
- यह नियंत्रित नोद और उच्च दक्षता प्रदान करता है, लेकिन इसकी प्रणाली अधिक जटिल होती है।
- उदाहरण: अग्नि-I, विकास इंजन (ISRO)।
- हाइब्रिड प्रणोदन (Hybrid Propulsion): यह ठोस और तरल दोनों प्रणालियों की विशेषताओं को जोड़ता है (आमतौर पर ठोस ईंधन और तरल ऑक्सीकारक)।
- क्रायोजेनिक प्रणोदन (Cryogenic Propulsion):
- इसमें अत्यधिक कम तापमान पर रखे गए ईंधनों (जैसे तरल ऑक्सीजन – LOX और तरल हाइड्रोजन – LH2) का उपयोग किया जाता है।
- उच्च ऊर्जा घनत्व और बहुत लंबी दूरी के अनुप्रयोगों के लिए। उदाहरण: GSLV Mk III।
- वायु-श्वसन इंजन (Air-Breathing Engines): ये इंजन दहन के लिए बाहरी वातावरण की हवा का उपयोग करते हैं, जिससे मिसाइल हल्की और अधिक ईंधन-कुशल हो जाती है। इनके प्रमुख प्रकार हैं:
- रैमजेट (Ramjet): इसका उपयोग पराध्वनिक गति के लिए किया जाता है (ध्वनि की गति से 1 से 5 गुना तेज़)।
- स्क्रैमजेट (Scramjet): यह ‘सुपरसोनिक कंबशन रैमजेट’ का संक्षिप्त रूप है। इसका उपयोग अति-पराध्वनिक गति (Hypersonic speeds) के लिए किया जाता है (ध्वनि की गति से 5 गुना से अधिक तेज़)। उदाहरण: ब्रह्मोस-II
निर्देशन और नियंत्रण प्रणाली (Guidance and Control System):
यह प्रणाली मिसाइल का ‘मस्तिष्क’ होती है, जो यह सुनिश्चित करती है कि मिसाइल अपने निर्धारित प्रक्षेप पथ पर बनी रहे और बाहरी कारकों (जैसे हवा, गुरुत्वाकर्षण आदि) के प्रभाव को संतुलित कर सके।
- निर्देशन के प्रकार (Guidance Types):
- जड़त्वीय निर्देशन प्रणाली (Inertial Guidance System): यह एक आंतरिक और आत्मनिर्भर प्रणाली है जो जाइरोस्कोप (Gyroscopes) और त्वरणमापी (Accelerometers) का उपयोग करती है। यह एक ज्ञात शुरुआती बिंदु से मिसाइल की स्थिति, वेग और अभिविन्यास को लगातार ट्रैक करती है। यह बाहरी जैमिंग (अवरोधन) के प्रति अत्यधिक प्रतिरोधी होती है।
- उपग्रह निर्देशन (Satellite Guidance): यह उच्च-सटीक स्थान अपडेट प्रदान करने के लिए ‘ग्लोबल नेविगेशन सैटेलाइट सिस्टम’ (जैसे GPS, GLONASS, या भारत का NavIC/IRNSS) के संकेतों का उपयोग करके IGS की क्षमता को बढ़ाता है।
- नियंत्रण सतहें (Control Surfaces): ये वे भौतिक भाग हैं जो निर्देशन प्रणाली के आदेशानुसार मिसाइल की दिशा बदलने के लिए चलते हैं:
- फिन्स और कैनार्ड्स (Fins and Canards): ये छोटे पंखों की तरह होते हैं जो हवा में उड़ान के दौरान मिसाइल को मोड़ने के लिए धुरी पर घूम सकते हैं।
- जेट वेन्स (Jet Vanes): ये गर्मी प्रतिरोधी छोटी सतहें होती हैं जिन्हें सीधे रॉकेट के निकास प्रवाह (Exhaust flow) में रखा जाता है। ये नोद वेक्टरिंग (Thrust Vectoring) के माध्यम से तब भी नियंत्रण प्रदान करती हैं जब मिसाइल धीमी गति में हो या वायुमंडल से बाहर हो।
- थ्रस्टर्स (Thrusters): ये छोटे सहायक रॉकेट मोटर होते हैं जिनका उपयोग मिसाइल के अभिविन्यास नियंत्रण (Attitude control), अंतरिक्ष में त्वरित गति करने और लक्ष्य के करीब पहुँचने पर सूक्ष्म सुधार करने के लिए किया जाता है।
लक्ष्यीकरण और नौवहन (Targeting and Navigation):
यह प्रणाली मिसाइल को लक्ष्य की सटीक पहचान करने और उस पर प्रहार करने में सक्षम बनाती है। इसमें प्रयुक्त उन्नत होमिंग सिस्टम (Seekers) के प्रकार निम्नलिखित हैं:
- रडार निर्देशन (Radar Guidance): मिसाइल स्वयं रडार तरंगें उत्सर्जित करती है (सक्रिय) या किसी बाहरी स्रोत या लक्ष्य से आने वाली रडार तरंगों को ट्रैक करती है (अर्ध-सक्रिय या निष्क्रिय) ताकि लक्ष्य की दूरी, वेग और कोण का सटीक निर्धारण किया जा सके।
- अवरक्त (IR) निर्देशन (Infrared Guidance): यह लक्ष्य के ताप हस्ताक्षर (Heat Signature) या ऊष्मीय उत्सर्जन का पता लगाती है। इसे सामान्यतः “हीट-सीकिंग” (Heat-seeking) तकनीक कहा जाता है। यह विमानों, इंजनों और सैन्य वाहनों के विरुद्ध अत्यधिक प्रभावी है।
- लेजर निर्देशन (Laser Guidance): इसमें लक्ष्य को किसी बाहरी लेजर स्रोत (जैसे- ड्रोन या ग्राउंड यूनिट) द्वारा प्रकाशित (Illuminate) किया जाता है। मिसाइल का साधक (Seeker) लक्ष्य से परावर्तित लेजर ऊर्जा का पीछा करते हुए उस पर सटीक प्रहार करता है।
वारहेड सक्रियण (Warhead Activation):
यह मिसाइल की कार्यप्रणाली का अंतिम चरण है, जहाँ लक्ष्य की पुष्टि होने के बाद वारहेड को विस्फोटित करने का संकेत भेजा जाता है ताकि अधिकतम प्रभाव सुनिश्चित हो सके।
- फ्यूजिंग प्रणाली (Fuzing System): इसे हिंदी में ‘फ्यूज प्रणाली’ ही कहा जाता है। यह एक सुरक्षा और सक्रियण तंत्र है जो यह निर्धारित करता है कि वारहेड को कब और कहाँ विस्फोटित होना है (जैसे- लक्ष्य के संपर्क में आने पर या लक्ष्य के अत्यंत निकट पहुँचने पर)।
मिसाइलों का वर्गीकरण
मिसाइलों को मुख्य रूप से उनके प्रक्षेप पथ (Trajectory Path), प्रक्षेपण विधि (Launch Mode), मारक क्षमता/परास (Range) और उनके वारहेड की प्रकृति के आधार पर वर्गीकृत किया जाता है।
प्रक्षेप पथ के आधार पर (Based on Trajectory Path):
- क्रूज मिसाइल (Cruise Missiles): ये मिसाइलें कम ऊंचाई पर एक स्थिर और नियंत्रित प्रक्षेप पथ पर उड़ान भरती हैं। ये रडार की पकड़ से बचने के लिए जमीन की सतह के समानांतर (Terrain-hugging) चलती हैं। ये निरंतर उड़ान के लिए वायुमंडलीय जेट इंजनों (टर्बोजेट, रैमजेट, स्क्रैमजेट) पर निर्भर करती हैं। उदाहरण: ब्रह्मोस, निर्भय, टॉमहॉक।
- गति की श्रेणियाँ (Speed Categories):
- सबसोनिक (Subsonic): ध्वनि की गति से कम (1 मैक से कम)।
- सुपरसोनिक (Supersonic): ध्वनि की गति से 1 से 5 गुना अधिक (1 से 5 मैक)।
- हाइपरसोनिक (Hypersonic): ध्वनि की गति से 5 गुना से अधिक (5 मैक से अधिक)।
- बैलिस्टिक मिसाइल (Ballistic Missiles): ये मिसाइलें एक उच्च-ऊंचाई वाले परवलयाकार प्रक्षेप पथ का अनुसरण करती हैं। इन्हें शुरुआती चरण में रॉकेट इंजन द्वारा शक्ति प्रदान की जाती है, जिसके बाद ये गुरुत्वाकर्षण के प्रभाव में मुक्त-पतन (Free-falling) करते हुए लक्ष्य की ओर बढ़ती हैं। इनका उपयोग मुख्य रूप से लंबी दूरी के रणनीतिक हमलों के लिए किया जाता है। उदाहरण: अग्नि श्रृंखला, मिनटमैन III
- गति की श्रेणियाँ (Speed Categories):

क्रूज बनाम बैलिस्टिक मिसाइल
| विशेषता | क्रूज मिसाइल | बैलिस्टिक मिसाइल |
| उड़ान पथ | वायुमंडल के भीतर नियंत्रित और क्षैतिज उड़ान | वक्राकार पथ, वायुमंडल में प्रवेश करती है और उससे बाहर निकल सकती है (पूर्व-निर्धारित पथ) |
| प्रणोदन | वायुमंडलीय जेट इंजन (टर्बोजेट, रैमजेट, स्क्रैमजेट) | रॉकेट इंजन (ठोस/तरल ईंधन), केवल बूस्ट चरण में सक्रिय |
| निर्देशन | पूरी उड़ान के दौरान अत्यधिक निर्देशित और सुगम संचालन क्षमता | केवल प्रक्षेपण के दौरान निर्देशित, फिर गुरुत्वाकर्षण आधारित प्रक्षेप पथ का अनुसरण |
| गति | सबसोनिक, सुपरसोनिक या हाइपरसोनिक। | पुन: प्रवेश (Re-entry) के समय अत्यधिक तीव्र अंतिम वेग |
| मारक क्षमता | कम दूरी, आमतौर पर सैकड़ों से एक हजार किलोमीटर तक | लंबी दूरी, हजारों किलोमीटर तक (अंतरमहाद्वीपीय क्षमता) |
| पेलोड | आमतौर पर छोटे, सटीक पारंपरिक या परमाणु वारहेड | बड़े और भारी पेलोड ले जाने में सक्षम, जिसमें MIRVs (एक साथ कई लक्ष्यों पर प्रहार करने वाले वाहन) शामिल हैं |
| प्रक्षेपण मंच | बहुमुखी: थल, जल, नभ और पनडुब्बी | आमतौर पर स्थिर साइलो (Silos), मोबाइल लॉन्चर या पनडुब्बियों से प्रक्षेपित |
2. प्रक्षेपण विधि द्वारा वर्गीकरण (Launch Mode):
यह वर्गीकरण इस आधार पर किया जाता है कि मिसाइल को कहाँ से छोड़ा गया है और उसका लक्ष्य कहाँ स्थित है।
| प्रकार | पूर्ण रूप | प्रक्षेपण स्थल | लक्ष्य | उदाहरण (भारत) |
| SSM | सतह से सतह पर मार करने वाली मिसाइल | स्थल/जलपोत | स्थल/जलपोत | पृथ्वी, अग्नि, ब्रह्मोस (भूमि या ज़मीन सेलॉन्च) |
| SAM | सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल | स्थल/जलपोत | विमान, UAVs, मिसाइल | आकाश, त्रिशूल, MR-SAM, S-400 (रूसी मॉडल) |
| ASM | हवा से सतह पर मार करने वाली मिसाइल | लड़ाकू विमान | स्थल/जलपोत | रुद्रम-I (विकिरण -रोधी), ब्रह्मोस-A |
| AAM | हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइल | लड़ाकू विमान | Aircraft, UAVs | अस्त्र |
| SLBM | पनडुब्बी से प्रक्षेपित बैलिस्टिक मिसाइल | पनडुब्बी | रणनीतिक भूमि आधारित लक्ष्य | K-15 (सागरिका), K-4 |
नोट: कुछ मिसाइलें, जैसे ब्रह्मोस (BrahMos) या हारपून (Harpoon), बहुमुखी होती हैं और उन्हें कई प्लेटफार्मों (जैसे सतह, हवा, पनडुब्बी) से प्रक्षेपित किया जा सकता है। अतः, प्रक्षेपण मंच और मिशन के आधार पर वे एक से अधिक श्रेणियों में आती हैं।
3. मारक क्षमता/परास के आधार पर (बैलिस्टिक मिसाइल)
- अल्प-दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल (SRBM): इनकी मारक क्षमता 1,000 किमी से कम होती है। (उदाहरण: पृथ्वी-II)।
- मध्यम-दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल (MRBM): इनकी मारक क्षमता 1,000 से 3,000 किमी के बीच होती है। (उदाहरण: अग्नि-II)।
- मध्यवर्ती-दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल (IRBM): इनकी मारक क्षमता 3,000 से 5,500 किमी के बीच होती है। (उदाहरण: अग्नि-III)।
- अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM): इनकी मारक क्षमता 5,500 किमी से अधिक होती है। इन्हें रणनीतिक परमाणु निवारण (Nuclear Deterrence) के लिए डिज़ाइन किया गया है और ये कई वारहेड (MIRVs) ले जाने में सक्षम हैं। (उदाहरण: अग्नि-V, मिनटमैन III)।
ICBM का रणनीतिक महत्व:
- ICBM किसी भी राष्ट्र के परमाणु त्रय (Nuclear Triad) का आधार स्तंभ होती हैं। परमाणु त्रय का अर्थ है – भूमि, समुद्र और हवा तीनों माध्यमों से परमाणु हमला करने की क्षमता।
- लंबी दूरी की क्षमता: ये अत्यधिक लंबी दूरी की उड़ानों के लिए डिज़ाइन की गई हैं।
- ये बहु-लक्ष्यीय स्वतंत्र रूप से लक्षित पुन: प्रवेश वाहन (MIRVs) ले जाने में सक्षम हैं। इसका तात्पर्य यह है कि एक ही मिसाइल कई अलग-अलग वारहेड छोड़ सकती है जो विभिन्न लक्ष्यों पर सटीक प्रहार करते हैं।
- प्रभाव: यह तकनीक किसी राष्ट्र की प्रहार क्षमता को बहुत बढ़ा देती है और दुश्मन की मिसाइल रक्षा प्रणालियों को भेदने या उन्हें विफल करने में सहायक होती है।
4. वारहेड के आधार पर वर्गीकरण
- पारंपरिक (Conventional): इसमें उच्च विस्फोटक सामग्री का उपयोग किया जाता है।
- गैर-पारंपरिक/रणनीतिक: इसमें परमाणु, रासायनिक और जैविक हथियार शामिल हैं।
5. अन्य उभरती हुई मिसाइल श्रेणियाँ
- एंटी-बैलिस्टिक मिसाइल (ABM):
- ये रक्षात्मक प्रणालियाँ हैं जिन्हें दुश्मन की ओर से आने वाली बैलिस्टिक मिसाइलों को बीच रास्ते में ही रोकने और नष्ट करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
- उदाहरण: भारत की पृथ्वी एयर डिफेंस (PAD) और एडवांस्ड एयर डिफेंस (AAD) प्रणालियाँ।
- हाइपरसोनिक ग्लाइड वाहन (HGV) और हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइल (HCM): ये मिसाइल तकनीक की अगली पीढ़ी का प्रतिनिधित्व करते हैं:
- हाइपरसोनिक ग्लाइड वाहन (HGV): इन्हें एक बैलिस्टिक मिसाइल बूस्टर द्वारा प्रक्षेपित किया जाता है और फिर ये वायुमंडल में अति-पराध्वनिक गति (Mach 5+) से तैरते (Glide) हुए आगे बढ़ते हैं। इनकी अत्यधिक संचालन क्षमता के कारण इन्हें ट्रैक करना और बीच में रोकना लगभग असंभव होता है।
- हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइल (HCM): ये निरंतर अति-पराध्वनिक उड़ान के लिए स्क्रैमजेट इंजन का उपयोग करती हैं।
- विकिरण-रोधी मिसाइल (ARM):
- ये वे मिसाइल हैं जो दुश्मन के रडार या रेडियो उत्सर्जन के स्रोतों को पहचान कर उन्हें नष्ट कर देती हैं। इनका मुख्य उद्देश्य दुश्मन की संचार और निगरानी प्रणाली को पंगु बनाना होता है।
- उदाहरण: DRDO की रुद्रम (Rudram) श्रृंखला।
भारतीय मिसाइल कार्यक्रम
भारत में निर्देशित मिसाइलों का विकास
- प्रारंभिक रॉकेटरी (18वीं शताब्दी)
- मैसूरी रॉकेट: टीपू सुल्तान द्वारा अंग्रेजों के विरुद्ध युद्ध में उपयोग किए गए लोहे के आवरण वाले प्रथम रॉकेट।
- स्वतंत्रता के बाद का युग (1958 से आगे)
- 1958: भारत ने निर्देशित मिसाइल प्रणालियों के अध्ययन के लिए ‘विशेष हथियार विकास दल’ का गठन किया।
- 1970 का दशक:
- प्रोजेक्ट डेविल (Project Devil): सोवियत SA-2 मिसाइल की रिवर्स इंजीनियरिंग करना।
- प्रोजेक्ट वैलिएंट (Project Valiant): ICBM विकसित करने का प्रयास (सीमित सफलता)।
- 1980 का दशक – एकीकृत निर्देशित मिसाइल विकास कार्यक्रम (IGMDP)
- इस कार्यक्रम की परिकल्पना प्रसिद्ध वैज्ञानिक डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम द्वारा की गई थी ताकि भारत मिसाइल प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता प्राप्त कर सके।
- इसे भारत सरकार से 26 जुलाई, 1983 को स्वीकृति मिली।
- इस कार्यक्रम के तहत पाँच मिसाइलें विकसित की गईं:
- पृथ्वी: सतह से सतह पर मार करने वाली कम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल।
- अग्नि: सतह से सतह पर मार करने वाली मध्यवर्ती दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल।
- त्रिशूल: निम्न स्तर पर सतह से हवा में मार करने वाली कम दूरी की मिसाइल।
- आकाश: सतह से हवा में मार करने वाली मध्यम दूरी की मिसाइल।
- नाग: तीसरी पीढ़ी की टैंक-रोधी निर्देशित मिसाइल।
- समापन: 8 जनवरी, 2008 को DRDO द्वारा सफलतापूर्वक पूर्ण होने की घोषणा।
- वर्तमान क्षमताएं
- मिशन शक्ति (2019):
- सफल एंटी-सैटेलाइट (ASAT) मिसाइल परीक्षण।
- भारत को निम्न पृथ्वी कक्षा (LEO) में उपग्रहों को निष्क्रिय करने की क्षमता मिली।
- भारत यह तकनीक हासिल करने वाला दुनिया का चौथा देश बना।
- मिशन दिव्यास्त्र:
- स्वदेशी अग्नि-5 मिसाइल को MIRV (मल्टीपल इंडिपेंडेंटली टारगेटेड रीएंट्री व्हीकल्स) तकनीक से लैस किया गया।
- एक ही मिसाइल से कई वारहेड्स दागने की क्षमता।
- हाइपरसोनिक हथियार: नवंबर 2024 में 1,500 किमी की मारक क्षमता वाली हाइपरसोनिक मिसाइल का सफल परीक्षण किया गया।
- सफल SFDR-आधारित मिसाइल परीक्षण: भारत SFDR (Solid Fuel Ducted Ramjet) तकनीक विकसित करने वाला पहला देश है। यह तकनीक लंबी दूरी की हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइलों की गति और सटीकता बढ़ाती है।
- मिशन शक्ति (2019):
हालिया अन्य प्रमुख रक्षा प्रणालियाँ
| प्रणाली का नाम | विवरण और विशेषताएं |
| MPATGM | मैन पोर्टेबल एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल: यह तीसरी पीढ़ी की ‘दागो और भूल जाओ’ मिसाइल है, जो ‘टॉप-अटैक’ और रात्रिकालीन परिचालन क्षमता से लैस है। |
| VSHORADS | अल्प दूरी की वायु रक्षा प्रणाली: कम ऊंचाई वाले हवाई खतरों को बेअसर करने वाली मानव-पोर्टेबल प्रणाली। |
| NASM-SR | नौसैनिक एंटी-शिप मिसाइल (अल्प दूरी): भारत की पहली स्वदेशी हवा से लॉन्च की जाने वाली जहाज-रोधी मिसाइल प्रणाली। |
| हेलिना (Helina) | हेलीकॉप्टर-लॉन्च नाग: सभी मौसमों और दिन/रात में कार्य करने वाली तीसरी पीढ़ी की एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल |
| QRSAM | त्वरित प्रतिक्रिया सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल: सामरिक क्षेत्रों के लिए सभी मौसमों में उपयुक्त मोबाइल वायु-रक्षा प्रणाली। |
| अस्त्र (Astra) | दृश्य सीमा से परे (BVR) हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइल, जो अत्यधिक गतिशील सुपरसोनिक लक्ष्यों को भेदने के लिए डिज़ाइन की गई है। |
| LCA तेजस | स्वदेशी बहुउद्देशीय लड़ाकू विमान जो उन्नत लेजर-निर्देशित बमों और मिसाइलों से लैस है। |
| उत्तम (Uttam) AESA राडार | एक्टिव इलेक्ट्रॉनिकली स्कैन्ड एरे रडार, जिसे विभिन्न प्रकार के लड़ाकू विमानों के लिए अनुकूलित किया जा सकता है। |
| शक्ति (Shakti) | भारतीय नौसेना के लिए विकसित उन्नत इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणाली, जो दुश्मन के रडार का पता लगाने और उन्हें ‘जैम’ (अवरुद्ध) करने के लिए बनाई गई है। |
| पिनाका (Pinaka) | मल्टी-बैरल रॉकेट लॉन्चर (MBRL): एक साथ कई रॉकेट दागने वाली प्रणाली। |
| सर्वत्र (Sarvatra) | सेना द्वारा उपयोग की जाने वाली एक बहुमुखी मोबाइल ब्रिजिंग प्रणाली (अस्थायी पुल निर्माण प्रणाली)। |
| MRSAM | महत्वपूर्ण संपत्तियों की सुरक्षा के लिए मोबाइल वायु-रक्षा प्रणाली। |
| स्वाति (Swathi) | हथियार खोजने वाला रडार (WLR): दुश्मन की आर्टिलरी के स्थान का सटीक पता लगाने वाली प्रणाली। |
| AEW&C | हवाई प्रारंभिक चेतावनी और नियंत्रण प्रणाली: विमान-आधारित प्रणाली जो खतरों की पूर्व चेतावनी और नियंत्रण प्रदान करती है। |
भारतीय मिसाइल

क्रूज मिसाइल (Cruise Missiles)
निर्भय मिसाइल (Nirbhay Missile)
- प्रकार: भारत की पहली स्वदेशी रूप से विकसित लंबी दूरी की सबसोनिक क्रूज मिसाइल।
- विकसित: DRDO द्वारा।
- विशेषताएँ
- रेंज: 800-1,000 किमी।
- वॉरहेड: पारंपरिक और नाभिकीय दोनों प्रकार के वारहेड ले जाने में सक्षम।
- लॉन्च प्लेटफॉर्म: भूमि, वायु, समुद्र – तीनों सशस्त्र बलों द्वारा उपयोग योग्य।
- प्रणोदन: दो चरण → ठोस रॉकेट बूस्टर + माणिक टर्बोफैन इंजन (क्रूज चरण)।
- यह अमेरिका की टॉमहॉक मिसाइल के समकक्ष मानी जाती है।
- नोट: यह अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल नहीं है।
ब्रह्मोस मिसाइल (BrahMos Missile)
- यह एक सुपरसोनिक, एंटी-शिप और लैंड अटैक क्रूज मिसाइल है।
- संयुक्त उपक्रम: भारत (50.5%) और रूस (49.5%)
- नामकरण: भारत की ब्रह्मपुत्र और रूस की मोस्कवा नदियों से लिया गया है।
- प्रमुख विशेषताएँ
- रेंज: 290 किमी (कम दूरी), अब 450 किमी (2016 में MTCR सदस्यता के बाद)।
- गति: 2.8 मैक (सुपरसोनिक)।
- प्रणोदन: दो चरण वाली मिसाइल (पहले चरण में ठोस प्रणोदक इंजन और दूसरे चरण में तरल रैमजेट)।
- लॉन्च प्लेटफॉर्म: भूमि, समुद्र, पनडुब्बी, हवा।
- वॉरहेड: केवल पारंपरिक (200–300 किग्रा), सटीक हमले की क्षमता।
- फायर एंड फॉरगेट मिसाइलें।
- निर्यात: भारत ने फिलीपींस को ब्रह्मोस मिसाइल का निर्यात किया है।
ब्रह्मोस के नए संस्करण
- ब्रह्मोस-NG (नेक्स्ट जनरेशन)
- ब्रह्मोस का लघु और हल्का संस्करण।
- LCA तेजस जैसे प्लेटफॉर्म से हवाई-लॉन्च के लिए डिजाइन।
- गति: 3.5 मैक तक।
- ब्रह्मोस 2.0
- विकास चरण में
- रेंज: 500–600 किमी
- गति: 7 मैक (हाइपरसोनिक)।
अन्य मिसाइल (Other Missiles)
|
मिसाइल प्रणाली |
प्रकार |
विशेषताएँ / विनिर्देश |
||||||||||||||||||||||||||||||||||||
|
हवा से हवा (AAM) में मार करने वाली मिसाइल |
अस्त्र मिसाइल श्रृंखला |
अस्त्र एमके-1 मिसाइल (Astra Mk-1 Missile)
अस्त्र एमके-2 मिसाइल
अस्त्र एमके-3 मिसाइल
भारतीय सशस्त्र बलों द्वारा प्रयुक्त विदेशी मिसाइल
|
||||||||||||||||||||||||||||||||||||
|
सतह से हवा (SAM) में मार करने वाली मिसाइल(वायु रक्षा प्रणाली में प्रयुक्त की जाती है) |
आकाश मिसाइल प्रणाली (Akash Missile System) |
|
||||||||||||||||||||||||||||||||||||
|
त्रिशूल (Trishul) मिसाइल |
|
|||||||||||||||||||||||||||||||||||||
|
QRSAM (क्विक रिएक्शन SAM) |
|
|||||||||||||||||||||||||||||||||||||
|
VL-SRSAM (ऊर्ध्वाधर प्रक्षेपण लघु दूरी SAM) |
|
|||||||||||||||||||||||||||||||||||||
|
बराक-8 मिसाइल प्रणाली (Barak-8 Missile System) |
|
|||||||||||||||||||||||||||||||||||||
|
XRSAM (विस्तारित दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल) |
|
|||||||||||||||||||||||||||||||||||||
|
SAMAR (सुनिश्चित प्रतिशोध के लिए सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल) |
|
|||||||||||||||||||||||||||||||||||||
|
वायु से सतह पर मार करने वाली मिसाइल |
|
|||||||||||||||||||||||||||||||||||||
|
विकिरण-रोधी मिसाइल |
रुद्रम श्रृंखला मिसाइल (Rudram Series) |
रुद्रम-I मिसाइल (NGARM)
रुद्रम-II (RudraM-II)
![]() |
||||||||||||||||||||||||||||||||||||
|
पनडुब्बी से प्रक्षेपित बैलिस्टिक मिसाइल (SLBM) |
K-मिसाइल परिवार (K-Missile Family) |
|
||||||||||||||||||||||||||||||||||||
|
टैंक-रोधी मिसाइल (Anti-Tank Missiles) |
नाग मिसाइल परिवार (Nag Family Missiles) |
|
||||||||||||||||||||||||||||||||||||
|
SANT (स्टैंड-ऑफ एंटी-टैंक) मिसाइल |
|
|||||||||||||||||||||||||||||||||||||
|
MPATGM (मैन-पोर्टेबल एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल) |
|
|||||||||||||||||||||||||||||||||||||
|
SAMHO (सेमी-एक्टिव मिशन होमिंग) ATGM |
|
|||||||||||||||||||||||||||||||||||||
|
मिलन (MILAN) |
|
|||||||||||||||||||||||||||||||||||||
|
निर्देशन तकनीक के आधार पर विदेशी ATGM मिसाइल |
|
|||||||||||||||||||||||||||||||||||||
|
सतह से सतह पर मार करने वाली मिसाइल (SSM) |
पृथ्वी श्रृंखला की मिसाइल (Prithvi Series Missiles) |
|
||||||||||||||||||||||||||||||||||||
|
अग्नि श्रृंखला की मिसाइल (Agni Series Missiles) |
अग्नि मिसाइलों का विकास:अग्नि मिसाइल भारत की रणनीतिक निवारक (Strategic Deterrence) शक्ति का आधार हैं।
मिशन दिव्यास्त्र 2024 (Mission Divyastra)
![]() MIRV तकनीक (Multiple Independently Targetable Re-entry Vehicle)
|
|||||||||||||||||||||||||||||||||||||
|
प्रलय मिसाइल (Pralay Missile) |
|
|||||||||||||||||||||||||||||||||||||
|
मल्टी-बैरल रॉकेट लॉन्चर (Multi-Barrel Rocket Launcher – MBRL) |
पिनाका MBRL (Pinaka MBRL) |
![]() |
||||||||||||||||||||||||||||||||||||
|
सूर्यास्त्र रॉकेट प्रणाली (Suryastra Rocket System) |
|
|||||||||||||||||||||||||||||||||||||
|
अन्य प्रमुख MBRL प्रणालियाँ |
|
|||||||||||||||||||||||||||||||||||||
|
जहाज-रोधी मिसाइल (Anti-Ship Missile) |
NASM (नौसैनिक जहाज-रोधी मिसाइल) |
NASM-SR (अल्प दूरी की नौसैनिक जहाज-रोधी मिसाइल)
NASM-MR (मध्यम दूरी की नौसैनिक जहाज-रोधी मिसाइल)
|
||||||||||||||||||||||||||||||||||||
|
लंबी दूरी की जहाज-रोधी मिसाइल (LRAShM) |
|
|||||||||||||||||||||||||||||||||||||
|
हाइपरसोनिक मिसाइल (Hypersonic Missiles) |
HSTDV (हाइपरसोनिक टेक्नोलॉजी डिमॉन्स्ट्रेटर व्हीकल) |
|
||||||||||||||||||||||||||||||||||||
|
प्रोजेक्ट विष्णु (ET-LDHCM) |
|
|||||||||||||||||||||||||||||||||||||
|
SFDR (सॉलिड फ्यूल डक्टेड रैमजेट) |
|
|||||||||||||||||||||||||||||||||||||
|
ध्वनि मिसाइल (Dhvani Missile) |
|
|||||||||||||||||||||||||||||||||||||
|
चर्चा में रही मिसाइल (Missiles in the News) |
स्कैल्प मिसाइल (SCALP/स्टॉर्म शैडो) |
|
||||||||||||||||||||||||||||||||||||
|
ओरेश्निक (Oreshnik) हाइपरसोनिक मिसाइल |
|
|||||||||||||||||||||||||||||||||||||
|
RS-28 सरमत ICBM (Satan-2) |
|
|||||||||||||||||||||||||||||||||||||
|
खुर्रमशहर-5 (Khorramshahr-5) |
|
|||||||||||||||||||||||||||||||||||||
|
AMRAAM मिसाइल |
|
टारपीडो (Torpedoes)
- टारपीडो स्व-प्रणोदित (Self-propelled) हथियार हैं जिनमें एक वारहेड (आयुध) लगा होता है। इनका उपयोग जल की सतह के नीचे या सतह पर किया जा सकता है।
- SMART परीक्षण:‘सुपरसोनिक मिसाइल-असिस्टेड रिलीज ऑफ टारपीडो’ (SMART) प्रणाली का सफल उड़ान परीक्षण 1 मई, 2024 को ओडिशा के तट पर स्थित डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम द्वीप से किया गया।

SMART (सुपरसोनिक मिसाइल-सहायता प्राप्त टारपीडो विमोचन प्रणाली)
- यह अगली पीढ़ी की मिसाइल-आधारित हल्के वजन वाली टारपीडो वितरण प्रणाली है।
- विकास: इसका डिज़ाइन और विकास DRDO (रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन) द्वारा किया गया है।
- उद्देश्य: भारतीय नौसेना की पनडुब्बी-रोधी युद्ध (Anti-submarine warfare) क्षमता को बढ़ाना, विशेष रूप से हल्के वजन वाले टारपीडो की पारंपरिक मारक क्षमता से बहुत आगे तक।
- तकनीकी विवरण: यह एक कनस्तरीकृत मिसाइल प्रणाली है, जो निम्नलिखित उन्नत उप-प्रणालियों से मिलकर बनी है: दो-चरणीय ठोस प्रणोदन प्रणाली, इलेक्ट्रोमैकेनिकल एक्चुएटर प्रणाली, सटीक जड़त्वीय नौवहन प्रणाली।
- प्रक्षेपण विधि: इस मिसाइल को भूमि-आधारित मोबाइल लॉन्चर से लॉन्च किया जाता है।
मारीच (Maareech)
- यह एक उन्नत टारपीडो डिकोय प्रणाली (Advanced Torpedo Decoy System – ATDS) है, जिसे सभी अग्रिम पंक्ति के युद्धपोतों से दागा जा सकता है।
- इसे DRDO की प्रयोगशालाओं (NSTL और NPOL) द्वारा डिजाइन और विकसित किया गया है।
- इसका उत्पादन भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) द्वारा किया जाता है, जो एक रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र का उपक्रम (PSU) है।
- कार्यप्रणाली: ‘मारीच’ दुश्मन की ओर से आने वाले टारपीडो का पता लगाता है, उसकी स्थिति निर्धारित करता है और नौसैनिक जहाज की सुरक्षा के लिए प्रतिकार (Countermeasures) लागू करता है। यह दुश्मन के टारपीडो को भ्रमित कर जहाज से दूर ले जाता है।
वरुणास्त्र (Varunastra)
- यह एक उन्नत, पनडुब्बी-रोधी भारी वजन वाला टारपीडो (Heavyweight Torpedo) है।
- इसे DRDO की नौसेना विज्ञान और तकनीकी प्रयोगशाला (NSTL) द्वारा विकसित किया गया है।
- विशेषता: यह पानी के भीतर अत्यधिक गहराई पर स्थित पनडुब्बियों को नष्ट करने की क्षमता रखता है और इसमें जीपीएस (GPS) आधारित नेविगेशन की सुविधा भी है।
उन्नत हल्का टारपीडो ‘श्येन’ (Advanced Light Torpedo Shyena)
- यह भारत का पहला स्वदेशी हल्का पनडुब्बी-रोधी टारपीडो है।
- इसे DRDO की NSTL प्रयोगशाला द्वारा विकसित किया गया है।
- इसका नाम अग्नि के ‘दिव्य बाज’ के नाम पर रखा गया है।
- उपयोग: इसे जहाजों और हेलीकॉप्टरों दोनों से प्रक्षेपित किया जा सकता है।



