कंप्यूटर संचार और नेटवर्क: विज्ञान व प्रौद्योगिकी के अंतर्गत कंप्यूटर संचार और नेटवर्क विभिन्न कंप्यूटरों एवं उपकरणों के बीच डेटा के आदान-प्रदान की प्रक्रिया और उससे जुड़े तंत्रों का अध्ययन करता है। यह विषय इंटरनेट, लोकल एरिया नेटवर्क (LAN), वाइड एरिया नेटवर्क (WAN) तथा वायरलेस तकनीकों के माध्यम से वैश्विक कनेक्टिविटी और सूचना साझा करने की आधारशिला प्रदान करता है।
संचार प्रणाली (Communication Systems)
- एक कंप्यूटर (प्रेषक) से दूसरे कंप्यूटर (प्राप्तकर्ता) तक सूचना और डेटा के आदान-प्रदान को डेटा संचार के रूप में जाना जाता है।
- एक संचार प्रणाली वह संरचना या नेटवर्क है जो एक विशिष्ट माध्यम और प्रोटोकॉल का उपयोग करके प्रेषक और प्राप्तकर्ता के बीच सूचना (डेटा, आवाज, वीडियो आदि) के आदान-प्रदान को सक्षम बनाती है।
संचार प्रणाली के तत्व (Elements of a Communication System)


संप्रेषण माध्यम या संचार चैनल
- यह वह माध्यम है जिसके माध्यम से सिग्नल (संकेत) प्रेषक से प्राप्तकर्ता तक यात्रा करता है।
- प्रेषण माध्यमों को दो समूहों में विभाजित किया गया है:
- तारयुक्त माध्यम (Guided Media):
- इन माध्यमों में डेटा संचार के लिए भौतिक कनेक्शन या तारों का उपयोग होता है।
- विशेषताएँ: इनमें तांबे के केबल, ऑप्टिकल फाइबर, या कोएक्सियल केबल का उपयोग होता है।
- उदाहरण: लोकल एरिया नेटवर्क में प्रयुक्त ईथरनेट केबल।
- बेतार माध्यम (Unguided Media):
- इन माध्यमों में डेटा संचार के लिए किसी भौतिक तार की आवश्यकता नहीं होती है।
- ये हवा या अंतरिक्ष के माध्यम से सिग्नल प्रसारित करते हैं।
- ये रेडियो, माइक्रोवेव और इन्फ्रारेड (अवरक्त) जैसी विद्युत चुंबकीय तरंगों का उपयोग करते हैं।
- उदाहरण: उपग्रह संचार, वाई-फाई, ब्लूटूथ, मोबाइल नेटवर्क।
- तारयुक्त माध्यम (Guided Media):
बेतार माध्यम (Wireless Media)
| माध्यम | आवृत्ति | दृष्टि रेखा | रेंज | लाभ | सीमाएँ | अनुप्रयोग |
| रेडियो (Radio) | 30 Hz – 300 GHz | आवश्यक नहीं | लंबी | सस्ता, दीवारों के पार जा सकता है। | कम डेटा दर, हस्तक्षेप (Interference)। | AM/FM, टेलीग्राफी, बुनियादी संचार। |
| माइक्रोवेव (Microwave) | 1 – 300 GHz | अनिवार्य | 25 – 30 किमी | उच्च क्षमता, अपेक्षाकृत सस्ता। | टावर और रिपीटर्स की आवश्यकता, मौसम का प्रभाव। | टेलीफोनी, सेलुलर, टीवी। |
| सैटेलाइट (Satellite) | 1 – 40 GHz | अनिवार्य | वैश्विक (Global) | विस्तृत कवरेज (प्रसार)। | अत्यधिक महंगा, सिग्नल में देरी, मौसम संबंधी समस्या। | GPS, टीवी, रक्षा, वैश्विक संचार। |
| इन्फ्रारेड (Infrared) | 300 GHz – 400 THz | अनिवार्य | कुछ मीटर | तेज़, सस्ता, सुरक्षित। | बाधाओं (दीवारों) द्वारा अवरुद्ध हो जाता है। | रिमोट कंट्रोल, एक कमरे में LAN। |
| वाई-फाई (Wi-Fi) | 2.4 / 5 GHz | हमेशा नहीं | 20 – 100 मीटर | उच्च गति, लचीलापन। | सीमित कवरेज क्षेत्र, अन्य संकेतों से हस्तक्षेप। | WLAN, इंटरनेट हॉटस्पॉट। |
| ब्लूटूथ (Bluetooth) | 2.4 GHz | आवश्यक नहीं | ~10 मीटर | केबल रहित, आसान जुड़ाव। | कम दूरी, कम गति। | हेडसेट, माउस, मोबाइल पेयरिंग। |


विद्युत चुंबकीय तरंगों का संचरण (Propagation of Electromagnetic Waves)
| संचरण का प्रकार | आवृत्ति सीमा | संचरण का पथ | मुख्य अनुप्रयोग |
| भू-तरंग संचरण/धरातलीय संचरण | VLF, LF, MF (3 MHz तक) | तरंगें पृथ्वी की सतह के साथ-साथ (वक्रता के अनुसार) गमन करती हैं। | AM (मैडियम वेव) ब्रॉडकास्टिंग, समुद्री संचार, नेविगेशन (नौसंचालन)। |
| आकाश तरंग संचरण (Sky Wave) | HF (3 MHz – 30 MHz) | तरंगें आयनमंडल (Ionosphere) द्वारा परावर्तित होकर वापस पृथ्वी पर आती हैं। | लंबी दूरी के अंतरराष्ट्रीय संचार के लिए शॉर्टवेव (Shortwave) रेडियो प्रसारण। |
| अंतरिक्ष तरंग संचरण (Space Wave) | VHF, UHF, SHF (30 MHz से ऊपर) | तरंगें सीधी रेखा (दृष्टि रेखा / Line-of-Sight) में गमन करती हैं या क्षोभमंडल (Troposphere) द्वारा अपवर्तित/परावर्तित होती हैं। | FM रेडियो, टीवी प्रसारण, मोबाइल संचार (2G/3G/4G/5G), उपग्रह संचार, रडार, वाई-फाई, जीपीएस। |
महत्वपूर्ण वायरलेस संचार आवृत्ति बैंड
- ए.एम. प्रसारण (AM Broadcast): 540–1600 kHz
- एफ.एम. प्रसारण (FM Broadcast): 88–108 MHz
- टी.वी. (TV):
- VHF बैंड: 54–72 MHz, 76–88 MHz
- UHF बैंड: 174–216 MHz, 420–890 MHz
- सेलुलर संचार (Cellular Communication):
- 896–901 MHz → मोबाइल से बेस स्टेशन
- 840–935 MHz → बेस स्टेशन से मोबाइल
- उपग्रह संचार (Satellite Communication):
- अपलिंक (Uplink): 5.925–6.425 GHz
- डाउनलिंक (Downlink): 3.7–4.2 GHz
अंतर्राष्ट्रीय दूरसंचार संघ (ITU) विश्व स्तर पर आवृत्ति आवंटन का प्रबंधन करता है।

उपग्रह संचार (Satellite Communication)
- यह एक ऐसी संचार प्रणाली है जो पृथ्वी पर दो दूरस्थ स्थानों के बीच संकेतों को प्रसारित करने के लिए अंतरिक्ष में स्थित उपग्रहों का उपयोग करती है।
- इसका उपयोग मोबाइल संचार, टीवी प्रसारण और डेटा स्थानांतरण में किया जाता है।
- उपग्रह संचार आमतौर पर केवल एक-मार्गी (One-way) नहीं, बल्कि द्वि-मार्गी संचार (Two-way) का समर्थन करता है।
उपग्रह संचार की कार्यप्रणाली
उपग्रह संचार रेडियो तरंगों के संचरण के मूल सिद्धांत पर कार्य करता है। एक संचार उपग्रह कार्य करने के लिए तीन मुख्य तत्वों का उपयोग करता है:
- अपलिंक (Uplink): यह वह प्रक्रिया है जिसमें पृथ्वी पर स्थित स्टेशन से उपग्रह को संकेत भेजा जाता है।
- डाउनलिंक (Downlink): यह वह प्रक्रिया है जिसमें उपग्रह प्राप्त संकेत को वापस पृथ्वी पर स्थित किसी दूसरे स्टेशन की ओर पुन: प्रसारित करता है।
- ट्रांसपोंडर (Transponder): यह उपकरण स्वयं उपग्रह पर स्थित होता है। ट्रांसपोंडर वह युक्ति है जो संकेत प्राप्त करने, उसे प्रवर्धित करने और फिर उसे पृथ्वी पर वापस भेजने के लिए उत्तरदायी होती है।
संचार में उपयोग होने वाले उपग्रहों के प्रकार: उनकी कक्षीय स्थिति के आधार पर
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उपग्रह का प्रकार |
कक्षा, विशेषताएँ एवं उदाहरण |
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भूस्थिर उपग्रह (GEO) |
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निम्न पृथ्वी कक्षीय उपग्रह (LEO) |
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मध्यम कक्षीय उपग्रह (MEO) |
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सैटेलाइट संचार में आवृत्ति बैंड्स
- L-बैंड: मोबाइल संचार और GPS के लिए उपयोग किया जाता है।
- C-बैंड: पारंपरिक रूप से सैटेलाइट टीवी और डेटा ट्रांसमिशन के लिए उपयोग किया जाता है।
- Ku-बैंड: सैटेलाइट टीवी प्रसारण और इंटरनेट सेवाओं के लिए उपयोग किया जाता है।
- Ka-बैंड: उच्च आवृत्ति बैंड, जिसका उपयोग उच्च-थ्रूपुट सैटेलाइट संचार के लिए किया जाता है, जिसमें ब्रॉडबैंड इंटरनेट शामिल है।
ब्लूटूथ, वाई-फाई और लाई-फाई
ब्लूटूथ बनाम वाई-फाई (Wi-Fi)
| विशेषता | ब्लूटूथ | वाई-फाई |
| नेटवर्क का प्रकार | WPAN (वायरलेस पर्सनल एरिया नेटवर्क) → डिवाइस-टू-डिवाइस कनेक्टिविटी (जैसे ऑडियो, पेरिफेरल्स)। | WLAN (वायरलेस लोकल एरिया नेटवर्क) → राउटर के माध्यम से उपकरणों को नेटवर्क/इंटरनेट से जोड़ना। |
| आवृत्ति बैंड | मुख्य रूप से 2.4 GHz। | 2.4 GHz, 5 GHz, 6 GHz। |
| डेटा दर (गति) | कम – 3 Mbps तक (ब्लूटूथ 5.0)। | उच्च – 10 Gbps तक (वाई-फाई 6/6E)। |
| रेंज (सीमा) | बहुत कम (लगभग 10 मीटर)। | मध्यम (लगभग 30-100 मीटर)। |
| दृष्टि रेखा (LoS) | नहीं (रेडियो तरंगों का उपयोग करता है जो वस्तुओं के पार जा सकती हैं)। | नहीं (रेडियो तरंगों का उपयोग करता है जो वस्तुओं के पार जा सकती हैं)। |
| उपयोग | हेडफ़ोन, फ़ाइल साझा करना, IoT उपकरण। | इंटरनेट एक्सेस, स्ट्रीमिंग, स्मार्ट होम। |
Wi-Fi (वायरलेस फिडेलिटी) and Li-Fi (लाइट फिडेलिटी)
वाई-फाई और ली-फाई दो अलग-अलग वायरलेस संचार तकनीक हैं जो डेटा स्थानांतरण को सक्षम बनाती हैं, अर्थात ये बिना किसी भौतिक केबल (Physical cables) के इंटरनेट से जुड़ने का मार्ग प्रदान करती हैं।
| मापदंड | वाई-फाई (Wi-Fi) | लाई-फाई (Li-Fi) |
| माध्यम | रेडियो तरंगें (2.4 – 5 GHz)। | LED ट्रांसमीटरों का उपयोग करके दृश्य प्रकाश (Visible Light) या पराबैंगनी (UV) प्रकाश। फोटोडिटेक्टर डेटा प्राप्त करता है। |
| रेंज | 30 – 100 मीटर। | लगभग 10 मीटर। |
| गति | 1 – 10 Gbps तक। | 100 Gbps तक (सैद्धांतिक)। |
| दिशा | द्वि-दिशीय | द्वि-दिशीय |
| लाभ | विस्तृत रेंज (अधिक दूरी तक कवरेज)। | तीव्र गति, उच्च सुरक्षा (High security)। |
| सीमाएँ | रेडियो फ्रीक्वेंसी हस्तक्षेप (Interference), विलंबता। | कम दूरी, दृष्टि रेखा (Line-of-Sight) संचार की आवश्यकता। |


वाई-फाई 6.0 (AX वाई-फाई)
- Wi-Fi का अगली पीढ़ी का मानक, जिसे IoT (Internet of Things) की दुनिया के लिए डिज़ाइन किया गया है जिसमें अरबों डिवाइस जुड़े होते हैं।
- मुख्य विशेषताएँ:
- घने नेटवर्क (जैसे स्टेडियम, कार्यालय) में इष्टतम प्रदर्शन
- उच्च सुरक्षा और इंटरऑपरेबिलिटी
- कम विलंबता और कम बैटरी उपयोग
- बढ़ी हुई बैंडविड्थ → बेहतर प्रदर्शन।
आरएफआईडी (RFID) और एनएफसी (NFC)
नियर फील्ड कम्युनिकेशन (NFC) तकनीक
- NFC एक शॉर्ट-रेंज वायरलेस संचार तकनीक है, जो दो NFC-सक्षम उपकरणों के बीच डेटा विनिमय को स्पर्श या नज़दीकी संपर्क के माध्यम से सक्षम करती है।
- कार्य सिद्धांत: डेटा संचारित करने के लिए विद्युत चुंबकीय रेडियो क्षेत्र का उपयोग; प्रभावी दूरी ≤ 4 सेमी।
- आवश्यकता: दोनों उपकरण NFC-सक्षम होने चाहिए और निकट संपर्क/नजदीक में होने चाहिए।
- अनुप्रयोग:
- भुगतान: कॉन्टैक्टलेस बैंकिंग कार्ड, ई-वॉलेट लेनदेन।
- परिवहन: कॉन्टैक्टलेस सार्वजनिक परिवहन टिकट।
- अन्य: वायरलेस चार्जिंग, वेंडिंग मशीनें, पार्किंग मीटर, NFC-सक्षम रिस्टबैंड (उदा., रोगी डेटा ट्रैकिंग), इन्वेंट्री और बिक्री निगरानी।
- सीमाएँ:
- बहुत कम रेंज → केवल कुछ सेंटीमीटर तक प्रभावी।
- कम डेटा स्थानांतरण दर (~कुछ Kbps)।
RFID बनाम NFC
| मापदंड | आर.एफ.आई.डी. (RFID) | एन.एफ.सी. (NFC) |
| पूरा नाम | रेडियो फ्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन | नियर फील्ड कम्युनिकेशन |
| तकनीक का प्रकार | टैग + रीडर के साथ वायरलेस सिस्टम। | कम दूरी का विद्युत चुंबकीय क्षेत्र संचार। |
| रेंज (सीमा) | कुछ सेमी से कई मीटर तक (पैसिव/एक्टिव टैग पर निर्भर)। | अत्यधिक कम दूरी (लगभग 4 सेमी)। |
| डेटा प्रेषण माध्यम | रेडियो तरंगें (Radio waves)। | विद्युत चुंबकीय क्षेत्र (रेडियो आवृत्ति)। |
| डेटा ट्रांसफर की गति | कम से मध्यम (Kbps से Mbps)। | बहुत कम (कुछ Kbps)। |
| शक्ति की आवश्यकता | पैसिव टैग: कोई नहीं; एक्टिव टैग: बैटरी। | दोनों उपकरणों में NFC चिप का होना आवश्यक है। |
| अनुप्रयोग | FASTag, इन्वेंट्री ट्रैकिंग, पशुधन ट्रैकिंग, एक्सेस कंट्रोल। | संपर्क रहित भुगतान, सार्वजनिक परिवहन कार्ड, वेंडिंग मशीन। |
| लाभ | दृष्टि रेखा की आवश्यकता नहीं, कई मीटर तक कार्य करता है। | सरल, अत्यधिक सुरक्षित, ‘टच-टू-यूज़’ में आसान। |

सैटेलाइट आधारित टोल संग्रहण (भारत, 2024)
- सरकार RFID-आधारित FASTag प्रणाली (2016 में शुरू, 2021 से अनिवार्य) को प्रतिस्थापित करेगी।
- टोल GPS/उपग्रह-आधारित सिस्टम के माध्यम से संग्रहित किया जाएगा → वाहनों से यात्रा की गई दूरी के आधार पर शुल्क लिया जाएगा, न कि टोल प्लाजा पर।

मोबाइल टेलीफोनी
मोबाइल टेलीफोनी का विकास (पीढ़ियाँ)
| पीढ़ी | तकनीक | विशेषताएँ और प्रभाव |
| 1G | एनालॉग (Analog), FDMA | बुनियादी वॉयस कॉल, निम्न गुणवत्ता। |
| 2G | डिजिटल (GSM/CDMA) | डिजिटल वॉयस, SMS (लघु संदेश सेवा), सीमित डेटा। |
| 3G | UMTS/HSPA | मोबाइल इंटरनेट, वीडियो कॉलिंग की शुरुआत। |
| 4G | LTE (लॉन्ग टर्म इवोल्यूशन) | उच्च गति डेटा, HD स्ट्रीमिंग, IP-आधारित नेटवर्क। |
| 5G | न्यू रेडियो (NR), MIMO, mmWave, बीमफॉर्मिंग | अति-तीव्र गति, न्यूनतम विलंबता, IoT और AI एकीकरण। |
LTE (लॉन्ग-टर्म इवोल्यूशन – 4G मानक)
- All-IP नेटवर्क: सर्किट-स्विच्ड नेटवर्क (2G/3G में प्रयुक्त) को हटाकर केवल वॉयस और डेटा ओवर IP सक्षम करता है।
- तकनीक:
- OFDMA (ऑर्थोगोनल फ्रीक्वेंसी डिवीजन मल्टीपल एक्सेस) डाउनलिंक के लिए
- SC-FDMA (सिंगल कैरियर फ्रीक्वेंसी डिवीजन मल्टीपल एक्सेस) अपलिंक के लिए।
- MIMO (मल्टीपल इनपुट मल्टीपल आउटपुट) एंटेना – उच्च थ्रूपुट के लिए।
- विशेषताएँ::
- स्पीड: 300 Mbps (डाउनलिंक), 75 Mbps (अपलिंक)
- विलंबता: <10 ms
- VoIP आधारित वॉइस और डेटा
- उपयोग: एचडी स्ट्रीमिंग, ऑनलाइन गेमिंग, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के लिए उपयुक्त।
5G (अल्ट्रा-कनेक्टिविटी – 2020s)
- मुख्य विशेषताएँ:
- स्पीड: 10 Gbps तक
- विलंबता: <1 ms
- 1 मिलियन डिवाइस/किमी² → IoT के लिए उपयुक्त।
- नेटवर्क स्लाइसिंग → कस्टम वर्चुअल नेटवर्क।
- प्रयुक्त तकनीक:
- न्यू रेडियो (NR) → Sub-6 GHz और mmWave (24–100 GHz) → बहुत उच्च गति और कम विलंबता।
- स्मॉल सेल्स + मैसिव MIMO – घने कवरेज के लिए + दक्षता, विश्वसनीयता और क्षमता में वृद्धि।
- बीमफॉर्मिंग: सिग्नल को डिवाइसों की ओर निर्देशित करता है → मजबूत, कुशल कनेक्टिविटी।
- OFDM: स्पेक्ट्रम का कुशल उपयोग, हस्तक्षेप को कम करता है।
- डायनामिक स्पेक्ट्रम शेयरिंग (DSS): 4G और 5G को एक ही स्पेक्ट्रम साझा करने की अनुमति देता है → सहज संक्रमण।
- लाभ:
- स्वायत्त वाहन, रिमोट सर्जरी, AR/VR।
- स्मार्ट सिटी और औद्योगिक स्वचालन।
- उदाहरण:
- डिवाइस → iPhone 15 Pro, Galaxy S23 Ultra।
- भारत → एयरटेल और जियो रोलआउट (2022)।
- वैश्विक प्रभाव → स्वास्थ्य सेवा, विनिर्माण, शिक्षा।
5G में प्रयुक्त स्पेक्ट्रम बैंड्स
- लो-बैंड स्पेक्ट्रम (<1 GHz)
- आवृत्ति: जैसे 700 MHz
- स्पीड: अधिकतम ~100 Mbps
- लाभ: व्यापक कवरेज; बेहतर सिग्नल पैठ → ग्रामीण एवं दूरस्थ क्षेत्रों के लिए उपयुक्त।
- कमियाँ: औद्योगिक/मिशन-महत्वपूर्ण अनुप्रयोगों के लिए गति अपर्याप्त।
- उपयोग: वाणिज्यिक मोबाइल उपयोगकर्ता (बुनियादी कनेक्टिविटी)।
- मिड-बैंड स्पेक्ट्रम (1–6 GHz)
- आवृत्ति: जैसे 3.3–3.6 GHz (Sub-6 GHz)
- स्पीड: लो-बैंड से तेज, परंतु मिलीमीटर-वेव से धीमी।
- लाभ: गति और कवरेज का संतुलन → “स्वीट स्पॉट” माना जाता है।
- कमियाँ: सीमित कवरेज, मध्यम पैठ।
- उपयोग: उद्यम, कारखाने, विशेष नेटवर्क (IoT, इंडस्ट्री 4.0) → निजी 5G नेटवर्क।
- हाई-बैंड स्पेक्ट्रम (>24 GHz)
- आवृत्ति: >24 GHz (उदा. 26 GHz)
- गति: 20 Gbps तक (4G में ~1 Gbps की तुलना में)।
- विलंबता: अत्यधिक कम (<1 मिलीसेकंड)।
- लाभ: अल्ट्रा-फास्ट स्पीड, अत्यधिक न्यून विलंबता।
- कमियाँ: कमजोर पैठ, बहुत सीमित कवरेज; अवरोधों से प्रभावित।
- सर्वोत्तम उपयोग: घने शहरी क्षेत्र, स्टेडियम, स्मार्ट सिटी, स्वायत्त वाहन, AR/VR।
- मिलीमीटर वेव (mmWave) बैंड
- हाई-बैंड स्पेक्ट्रम का हिस्सा (24–100 GHz)।
- लघु तरंगदैर्ध्य → अत्यधिक गति + बहुत कम विलंबता।
- डेटा परिवहन दक्षता को अनुकूलित करता है।
- अति-विश्वसनीय 5G अनुभव के लिए प्रमुख सक्षमकर्ता।
भारत में स्पेक्ट्रम आवंटन
- नीलामीकर्ता: दूरसंचार विभाग (DoT)
- हालिया नीलामी: जुलाई 2022 (₹1.5 लाख करोड़ की बोली)
- बिके बैंड: 700 MHz, 3.5 GHz, 26 GHz
- प्रमुख खरीदार: रिलायंस जियो, भारती एयरटेल, वोडाफोन आइडिया।
- रोलआउट दायित्व: TSPs को चरणबद्ध तरीके से BTSs (बेस ट्रांसीवर स्टेशन) स्थापित करना होगा।
- कवरेज: भारत के 99.6% जिलों में अब 5G कवरेज उपलब्ध है।
6G (भविष्य – 2030s)
- अपेक्षित: 1 Tbps तक की गति।
- स्पेक्ट्रम: 6 GHz से नीचे बैंड, mmWave, टेराहर्ट्ज (भविष्य)।
- विशेषताएँ: AI-चालित नेटवर्क, होलोग्राफिक संचार, मानव-मशीन इंटरफेस, अंतरिक्ष-आधारित इंटरनेट।
- India – भारत 6G विजन (2023):
- लक्ष्य: 2030 तक 6G प्रौद्योगिकी में वैश्विक नेतृत्व प्राप्त करना।
- पेटेंट लक्ष्य: वैश्विक 6G पेटेंट में 10% साझेदारी प्राप्त करना।
- भारत 6G एलायंस (B6GA): उद्योग, अकादमिक और वैश्विक भागीदारों का सहयोग मंच।
- टेक्नोलॉजी इनोवेशन ग्रुप ऑन 6G (TIG‑6G): दूरसंचार विभाग (DoT) द्वारा गठित।
- चुनौतियाँ: अवसंरचना, वित्त पोषण, अनुसंधान एवं विकास।
- ‘भारत 6G 2025’ – तीसरा अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन और प्रदर्शनी
- स्थान: मई 2025: होटल ले-मेरिडियन, नई दिल्ली।
- आयोजक: Bharat Exhibitions
- DoT, वैश्विक उद्योग निकायों (ETSI, BIF, आदि) द्वारा समर्थित।
मुक्त अंतरिक्ष ऑप्टिकल (Free Space Optical) संचार
- FSO संचार एक ऐसी तकनीक है जो ऑप्टिकल संकेतों (प्रकाश या लेज़र बीम) का उपयोग करके मुक्त अंतरिक्ष (जैसे वायुमंडल या निर्वात) के माध्यम से जानकारी प्रसारित करती है। यह ट्रांससीवर्स के बीच लाइन-ऑफ-साइट (LOS) कनेक्शन पर निर्भर करती है।
- इसका मुख्य उपयोग कम दूरी के लिए उच्च गति वाले संचार लिंक स्थापित करना है, जैसे कि इमारतों के बीच या उपग्रह-से-उपग्रह संचार में।
- फायदे
- अति-उच्च डेटा दर: यह 10s से 100s Gbps तक की गति प्रदान कर सकता है, जो HDTV और ब्रॉडबैंड सेवाओं के लिए उपयुक्त है।
- लाइसेंस-फ्री स्पेक्ट्रम: रेडियो या माइक्रोवेव संचार के विपरीत, FSO को उपयोग के लिए स्पेक्ट्रम लाइसेंस की आवश्यकता नहीं होती है।
- लचीलापन और लागत-प्रभावी: ऑप्टिकल फाइबर बिछाने की तुलना में यह आसान और सस्ता है, क्योंकि इसमें खुदाई या केबलिंग की आवश्यकता नहीं होती।
- सुरक्षा: लेज़र बीम संकीर्ण होती है, जिससे संकेतों को बीच में रोकना या इंटरसेप्ट करना काफी कठिन हो जाता है।
- स्केलेबल आर्किटेक्चर: यह विभिन्न टोपोलॉजी (जैसे पॉइंट-टू-पॉइंट, पॉइंट-टू-मल्टीपॉइंट, मल्टीपॉइंट-टू-मल्टीपॉइंट) का समर्थन करता है।
- सीमाएँ
- मौसम पर निर्भर विश्वसनीयता (वायुमंडलीय हस्तक्षेप): यह सबसे बड़ी सीमा है। कोहरा, बारिश, धूल और वायुमंडलीय विक्षोभ (Turbulence) ऑप्टिकल संकेतों को गंभीर रूप से क्षीण (Attenuation) कर सकते हैं या खराब कर सकते हैं, जिससे विश्वसनीयता कम हो जाती है।
- दृष्टि रेखा की अनिवार्यता: सफल संचार के लिए ट्रांससीवर्स के बीच एक स्पष्ट और बाधा रहित मार्ग आवश्यक है।
- सीमित दूरी: यह तकनीक मुख्य रूप से कम से मध्यम दूरी (आमतौर पर कुछ किलोमीटर से कम) के लिए सबसे अच्छा काम करती है।
डीप स्पेस ऑप्टिकल कम्युनिकेशन (DSOC)
- DSOC पृथ्वी-चंद्रमा प्रणाली के बाहर नासा (NASA) का पहला ऑप्टिकल संचार परीक्षण है।
- यह डेटा संचार के लिए पारंपरिक रेडियो तरंगों के बजाय निकट-अवरक्त प्रकाश (Near-infrared light) का उपयोग करता है।
- मुख्य विशेषताएँ
- अत्यधिक तीव्र गति: यह रेडियो फ्रीक्वेंसी (RF) संचार की तुलना में 10 गुना अधिक तेज़ डेटा दर प्रदान करता है।
- उच्च डेटा-दर स्थानांतरण: यह HD छवियों, वीडियो स्ट्रीमिंग और बड़े वैज्ञानिक डेटासेट को तीव्रता से भेजने में सक्षम बनाता है।
- सफल परीक्षण: इसका सफल परीक्षण NASA के साइके (Psyche) अंतरिक्ष यान (2023) के माध्यम से किया गया।
- परीक्षण के दौरान, इसने 31 मिलियन किलोमीटर की दूरी से 15 सेकंड का UHD (अल्ट्रा हाई डेफिनेशन) वीडियो भेजा।
- इस दौरान 267 Mbps की रिकॉर्ड डेटा दर प्राप्त की गई।
- महत्व
- उच्च बैंडविड्थ संचार: यह गहन अंतरिक्ष अन्वेषण के लिए उच्च बैंडविड्थ संचार का मार्ग प्रशस्त करता है।
- भविष्य के मिशनों में उपयोग: यह भविष्य के मानवयुक्त मंगल मिशन, वास्तविक समय डेटा स्थानांतरण और अंतरिक्ष विज्ञान के विस्तार के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
अंतरिक्ष आधारित इंटरनेट परियोजनाएँ

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प्रोजेक्ट |
उद्देश्य |
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स्टारलिंक प्रोजेक्ट |
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फाइव टू 50′ सेवा |
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प्रोजेक्ट Kuiper |
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लून (Loon) प्रोजेक्ट |
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ब्लूवॉकर 3 उपग्रह
- एक प्रोटोटाइप उपग्रह है, जो समान उपग्रहों के एक नियोजित नक्षत्र का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य दुनिया के किसी भी स्थान पर मोबाइल या ब्रॉडबैंड सेवाएं प्रदान करना है।
- इसे एक अमेरिकी कंपनी (AST SpaceMobile) द्वारा लॉन्च किया गया है। यह निम्न-पृथ्वी कक्षा में तैनात किया गया अब तक का सबसे बड़ा वाणिज्यिक एंटीना सिस्टम है।
- इसका फेज्ड-एरे एंटीना (Phased-Array Antenna) इसे रात के आकाश में सबसे चमकीले वस्तुओं में से एक बनाता है।
संचार नेटवर्क (Communication Network)
- कंप्यूटर नेटवर्क आकार, सीमा (Range) और उद्देश्य में भिन्न होते हैं। ये एक ही कमरे में ब्लूटूथ के माध्यम से जुड़े व्यक्तिगत उपकरणों से लेकर लाखों उपकरणों को आपस में जोड़ने वाले वैश्विक नेटवर्क तक हो सकते हैं।
- भौगोलिक क्षेत्र और डेटा स्थानांतरण दर (Data transfer rates) के आधार पर नेटवर्क को मुख्य रूप से चार व्यापक श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया है:
- पर्सनल एरिया नेटवर्क (PAN)
- लोकल एरिया नेटवर्क (LAN)
- मेट्रोपॉलिटन एरिया नेटवर्क (MAN)
- वाइड एरिया नेटवर्क (WAN)
कंप्यूटर नेटवर्क के प्रकार (Types of Computer Networks)
| विशेषता | PAN | LAN | MAN | WAN |
| पूरा नाम | वैयक्तिक क्षेत्र नेटवर्क (Personal Area Network) | स्थानीय क्षेत्र नेटवर्क (Local Area Network) | महानगरीय क्षेत्र नेटवर्क (Metropolitan Area Network) | विस्तृत क्षेत्र नेटवर्क (Wide Area Network) |
| कवरेज क्षेत्र | ~10-100 मीटर | भवन/परिसर (≤ 1 किमी) | शहर/महानगरीय क्षेत्र | देश/महाद्वीप |
| उद्देश्य | व्यक्तिगत उपकरणों को जोड़ना | सीमित क्षेत्र में उपकरणों को जोड़ना | एक शहर के भीतर कई LAN को जोड़ना | LAN और MAN को वैश्विक स्तर पर जोड़ना |
| गति | कम (1–100 Mbps) | उच्च (100 Mbps–10 Gbps) | मध्यम (Moderate) | बहुत उच्च से बहुत कम |
| कनेक्शन माध्यम | ब्लूटूथ, NFC, USB | ईथरनेट (Ethernet), वाई-फाई | फाइबर, माइक्रोवेव (Wi-MAX – शहर में इंटरनेट) | फाइबर, उपग्रह (Satellite), सेलुलर |
| स्वामित्व | व्यक्तिगत | निजी (घर/कार्यालय) | सरकार/बड़े संगठन | सार्वजनिक/निजी |
| उदाहरण | ब्लूटूथ हेडसेट | घर/कार्यालय का वाई-फाई | शहर का वाई-फाई नेटवर्क | इंटरनेट |

Fig: PAN

Fig: MAN

Fig: LAN

Fig: WAN
वर्ल्ड वाइड वेब एवं संबंधित अवधारणाएँ
वर्ल्ड वाइड वेब (WWW)
- प्रारंभ: 13 मार्च 1989, टिम बर्नर्स-ली द्वारा।
- एक ऐसा सिस्टम जो इंटरनेट सर्वर का उपयोग करते हुए हाइपरटेक्स्ट और मल्टीमीडिया को समर्थन देता है।
- विभिन्न कंप्यूटरों के बीच सूचना के आदान-प्रदान को सक्षम बनाता है।
वेब पेज
- WWW की मूल इकाई, जो HTML का उपयोग करके बनाई जाती है।
- प्रकार:
- स्टैटिक वेब पेज: स्थिर सामग्री
- डायनामिक वेब पेज: उपयोगकर्ता की क्रिया या डेटाबेस के अनुसार बदलती सामग्री।
- होम पेज: किसी वेबसाइट का पहला/मुख्य पृष्ठ।
वेबसाइट
- Collection of related web pages under one domain.
- Example:
- एक ही डोमेन के अंतर्गत संबंधित वेब पेजों का संग्रह।
- उदाहरण:
- www.connectcivils.com → वेबसाइट
- www.connectcivils.com/new/ → वेब पेज
वेब ब्राउज़र
- एक सॉफ्टवेयर जो वेब सामग्री को एक्सेस (access), पुनर्प्राप्त (retrieve), और प्रदर्शित (display) करने के लिए उपयोग किया जाता है।
- Types:
- टेक्स्ट ब्राउज़र → केवल टेक्स्ट को प्रदर्शित करता है। उदाहरण: Lynx
- ग्राफिकल ब्राउज़र → टेक्स्ट + ग्राफिक्स दोनों को प्रदर्शित करता है (उदा., गूगल क्रोम, सफारी, ओपेरा, मोज़िला फायर फॉक्स, एमएस इंटरनेट एक्सप्लोरर, नेटस्केप नेविगेटर)।
- पहला ग्राफिकल ब्राउज़र: NCSA Mosaic

वेब सर्वर
- वेब पेजों को संग्रहीत करता और ब्राउज़रों तक पहुँचाता है।
- प्रत्येक सर्वर का एक अद्वितीय IP address होता है।
- उदाहरण: अपाचे HTTP सर्वर, IIS, लाइटटप्ड।
वेब एड्रेस/URL (यूनिफॉर्म रिसोर्स लोकेटर)
- किसी वेबपेज के स्थान की पहचान करता है।
- संरचना:
- http:// → प्रोटोकॉल
- www → वर्ल्ड वाइड वेब
- google.com → डोमेन नाम
- /services/ → डायरेक्टरी
- index.htm → वेब पेज
- पहला URL 1991 में Tim Berners-Lee द्वारा बनाया गया था।
डोमेन नाम
- वेबसाइटों की विशिष्ट पहचानें होती हैं।
- उदाहरण: google.com, yahoo.com
DNS (डोमेन नेम सिस्टम)
- डोमेन नाम ↔ IP पते में अनुवाद करता है।
- मेल एक्सचेंज सर्वरों का प्रबंधन भी करता है।
सर्च इंजन
- वर्ल्ड वाइड वेब (WWW) पर जानकारी खोजने के उपकरण।
- उदाहरण: गूगल, माइक्रोसॉफ्ट बिंग, याहू, अल्टाविस्टा, लाइकॉस, एक्साइट, वेबक्रॉलर।
- हिट → प्रासंगिक परिणाम, मिस → कोई परिणाम नहीं।

इंटरकनेक्टिंग प्रोटोकॉल
- प्रोटोकॉल → डेटा संचार को नियंत्रित करने वाले नियमों का समूह (क्या, कैसे, और कब डेटा संप्रेषित किया जाता है)।
इंटरनेट संचार में उपयोग किए जाने वाले प्रमुख प्रोटोकॉल
- TCP/IP (ट्रांसमिशन कंट्रोल प्रोटोकॉल/इंटरनेट प्रोटोकॉल)
- TCP → विश्वसनीय ट्रांसपोर्ट प्रदान करता है, संदेशों को पैकेट्स में विभाजित करता है (स्रोत पर) → गंतव्य पर पुनः संयोजन करता है।
- IP → नेटवर्क्स के बीच पैकेट्स का एड्रेसिंग और रूटिंग करता है।
- प्रत्येक IP पैकेट में स्रोत और गंतव्य पते शामिल होते हैं।
- IPv4 → 32-बिट; IPv6 → 128-बिट।
- FTP (फाइल ट्रांसफर प्रोटोकॉल)
- इंटरनेट कनेक्टिविटी वाले कंप्यूटरों के बीच फाइल ट्रांसफर करता है।
- विभिन्न ऑपरेटिंग सिस्टम के बीच कार्य करता है।
- उदाहरण: FileZilla, gFTP, Konqueror।
- HTTP (हाइपरटेक्स्ट ट्रांसफर प्रोटोकॉल)
- वेब संदेशों के प्रारूप एवं ट्रांसमिशन को परिभाषित करता है।
- ब्राउज़र-सर्वर संचार को नियंत्रित करता है।
- HTML (हाइपरटेक्स्ट मार्कअप लैंग्वेज) के साथ कार्य करता है → मार्कअप टैग्स (<>) ब्राउज़र को बताते हैं कि सामग्री को कैसे प्रदर्शित किया जाए।
- टेलनेट प्रोटोकॉल
- रिमोट लॉगिन प्रोटोकॉल → उपयोगकर्ता को LAN/Internet पर सर्वरों से कनेक्ट होने की अनुमति देता है।
- वैध उपयोगकर्ता नाम और पासवर्ड आवश्यक।
- रिमोट प्रशासन के लिए उपयोग किया जाता है।
- यूज़नेट (Usenet ) प्रोटोकॉल
- इंटरनेट-आधारित समूह संचार प्रणाली।
- उपयोगकर्ता रुचि के विषयों पर विचारों और सूचनाओं का आदान-प्रदान करते हैं।
- कोई केंद्रीय सर्वर नहीं; newsgroups पर निर्भर।
- PPP (पॉइंट-टू-पॉइंट प्रोटोकॉल)
- मॉडेम का उपयोग कर सीधा डायल-अप इंटरनेट कनेक्शन प्रदान करता है।
- लगभग 9600 bps की गति पर डेटा ट्रांसमिट करता है (पुरानी तकनीक)।
- अब बड़े पैमाने पर ब्रॉडबैंड एवं वायरलेस तकनीक द्वारा प्रतिस्थापित।
- SMTP (सिंपल मेल ट्रांसफर प्रोटोकॉल)
- TCP/IP नेटवर्क्स पर मानक ई-मेल प्रोटोकॉल।
- ईमेल भेजने और प्राप्त करने में सक्षम बनाता है।
- WAP (वायरलेस एप्लिकेशन प्रोटोकॉल)
- सीमित डिस्प्ले और बैंडविड्थ वाले मोबाइल उपकरणों के लिए बनाया गया।
- WAP ब्राउज़र प्रारंभिक मोबाइल फ़ोन (स्मार्टफोन से पहले) में उपयोग होते थे।
- VoIP (वॉयस ओवर इंटरनेट प्रोटोकॉल)
- IP नेटवर्क पर वॉयस कम्युनिकेशन ट्रांसमिट करता है।
- उदाहरण → इंटरनेट कॉल्स (Skype, WhatsApp कॉलिंग)।
कंप्यूटर में फ़ाइल प्रारूप (File Formats)
ऑडियो फॉर्मेट/ध्वनि प्रारूप (Audio Formats)
| प्रारूप | विवरण | उपयोग |
| MP3 | कंप्रेस्ड (संपीडित), लॉसी (Lossy) प्रारूप। इसमें डेटा की कुछ हानि होती है। | संगीत, पॉडकास्ट। |
| WAV | अन-कंप्रेस्ड (अ-संपीडित), उच्च गुणवत्ता वाला प्रारूप। | पेशेवर ऑडियो संपादन (Editing)। |
| AAC | उन्नत संपीड़न, MP3 से बेहतर गुणवत्ता। | एप्पल उपकरण, ऑनलाइन स्ट्रीमिंग। |
| FLAC | लॉसलेस (Lossless) संपीड़न। इसमें बिना गुणवत्ता खोए डेटा सुरक्षित रहता है। | ऑडियोफाइल (उच्च गुणवत्ता) संगीत भंडारण। |
| OGG | ओपन-सोर्स, संपीडित प्रारूप। | गेम्स, ओपन प्लेटफॉर्म। |
| MIDI | वाद्य यंत्रों का डेटा (यह ध्वनि नहीं, बल्कि निर्देश हैं)। | डिजिटल संगीत निर्माण (Synthesizers)। |
वीडियो फॉर्मेट/दृश्य प्रारूप(Video Formats)
| प्रारूप | विवरण | उपयोग |
| MP4 | सबसे सामान्य, संपीडित (Compressed) प्रारूप। | स्ट्रीमिंग, मोबाइल, वेब। |
| AVI | अ-संपीडित (Uncompressed) या हल्का संपीडित प्रारूप। | उच्च गुणवत्ता वाला वीडियो भंडारण। |
| MKV | यह कई ऑडियो और सबटाइटल (उपशीर्षक) ट्रैक का समर्थन करता है। | फिल्में, ओपन-सोर्स प्लेटफॉर्म। |
| MOV | एप्पल (Apple) का विशिष्ट वीडियो प्रारूप। | मैक (Mac) और iOS संपादन (Editing)। |
| WMV | विंडोज मीडिया वीडियो | विंडोज-आधारित प्लेबैक |
| FLV | फ्लैश वीडियो प्रारूप (अब अप्रचलित)। | पुराने समय के वेब वीडियो (Legacy web video)। |
| WebM | वेब के लिए ओपन-सोर्स प्रारूप। | HTML5 वीडियो। |
टेक्स्ट फॉर्मेट/पाठ्य प्रारूप (Text Formats)
| प्रारूप | विवरण | उपयोग |
| TXT | प्लेन टेक्स्ट (Plain text), इसमें कोई फॉर्मेटिंग नहीं होती। | नोट्स, लॉग्स (Logs)। |
| DOC / DOCX | माइक्रोसॉफ्ट वर्ड का प्रारूप। | दस्तावेज़, रिपोर्ट। |
| पोर्टेबल दस्तावेज़ प्रारूप (स्थिर लेआउट)। | ई-बुक्स, फॉर्म, आधिकारिक फाइलें। | |
| RTF | रिच टेक्स्ट फॉर्मेट। | बुनियादी फॉर्मेटिंग, क्रॉस-प्लेटफॉर्म। |
| HTML | वेब पेज मार्अप भाषा। | वेबसाइट, ब्राउज़र। |
| XML | संरचित डेटा प्रारूप | डेटा विनिमय, कॉन्फ़िगरेशन। |
| Markdown (.md) | प्रलेखन के लिए हल्की मार्अप भाषा। | गिटहब (GitHub), प्रलेखन (Documentation)। |
इमेज फ़ाइल के प्रकार
- JPEG (या JPG) – जॉइंट फोटोग्राफिक एक्सपर्ट्स ग्रुप।
- PNG – पोर्टेबल नेटवर्क ग्राफ़िक्स।
- GIF – ग्राफिक्स इंटरचेंज फॉर्मेट।
- TIFF – टैग्ड इमेज फ़ाइल।
- PSD – फोटोशॉप डॉक्यूमेंट।
- PDF – पोर्टेबल डॉक्यूमेंट फॉर्मेट।
- EPS – एनकैप्सूलेटेड पोस्ट स्क्रिप्ट।
- AI – एडोब इलस्ट्रेटर डॉक्यूमेंट।
- SVG – स्केलेबल वेक्टर ग्राफिक
