विजयनगर की राजनीतिक और सांस्कृतिक उपलब्धियां।

विजयनगर की राजनीतिक और सांस्कृतिक उपलब्धियां: प्राचीन व मध्यकालीन इतिहास के अंतर्गत विजयनगर साम्राज्य (14वीं–17वीं शताब्दी) दक्षिण भारत का एक शक्तिशाली और समृद्ध राज्य था, जिसने सुदृढ़ प्रशासनिक व्यवस्था तथा प्रभावी सैन्य संगठन विकसित किया। विशेषकर कृष्णदेव राय के शासनकाल में यह साम्राज्य सांस्कृतिक उत्कर्ष पर पहुँचा, जहाँ भव्य मंदिर वास्तुकला, साहित्य, कला तथा व्यापार का व्यापक विकास हुआ।

अर्थ व महत्त्व

  • विजयनगर का शाब्दिक अर्थ – “जीत का नगर”
  • इसे मध्ययुग का प्रथम हिन्दू साम्राज्य कहा जाता है।
  • राजधानी – तुंगभद्रा नदी के दक्षिणी तट पर स्थित विजयनगर (हम्पी)।
  • यह नगर शक्ति व सम्पदा का प्रतीक था।
अब्दुर्रज्जाक (फारसी यात्री) के अनुसार –

“विजयनगर दुनिया के सबसे भव्य शहरों में से एक था, जिसे उसने देखा या सुना था।”

स्थापना
  • विजयनगर साम्राज्य की स्थापना 1336 ई. में हरिहर एवं बुक्का द्वारा की गई।
  • यह दक्षिण भारत में मुस्लिम सत्ता के विस्तार के विरुद्ध तीव्र प्रतिक्रिया के रूप में उभरा।
 स्थापना के कारण
  • इस्लामी संस्कृति के प्रभाव से हिन्दू धर्म, समाज एवं संस्कृति की रक्षा की भावना।
  • दक्षिण भारत की अस्थिर राजनीति एवं विघटनकारी प्रवृत्तियाँ।
  • अलाउद्दीन खिलजी के समय से दक्षिण में विद्रोह एवं उपद्रव की स्थिति।

हरिहर एवं बुक्का की पृष्ठभूमि

  • प्रारम्भ में काकतीय शासक प्रताप रुद्र के सेवक थे।
  • बाद में कम्पिली चले गये।
  • युद्ध में बन्दी बनाए जाने के पश्चात इस्लाम धर्म स्वीकार कर लिया था।
मुहम्मद बिन तुगलक कालीन घटनाएँ
  • 1334 ई. में कम्पिली प्रान्त में विद्रोह हुआ।
  • विद्रोह दमन हेतु हरिहर एवं बुक्का को दक्षिण भारत भेजा गया। वहाँ पहुँचकर उन्होंने:
    • स्वतंत्र सत्ता ग्रहण की
    •  पुनः हिन्दू धर्म स्वीकार किया।
 विद्यारण्य की भूमिका
  • संत विद्यारण्य ने दोनों भाइयों को:
  • पुनः हिन्दू धर्म में दीक्षित किया
  • स्वतंत्र हिन्दू राज्य निर्माण हेतु प्रेरित किया
  • उनके आशीर्वाद से विजयनगर साम्राज्य की नींव रखी गई।
  • हिन्दू धर्म को संरक्षण एवं प्रोत्साहन प्रदान किया गया।
  • अपने पिता संगम के नाम पर संगम राजवंश की स्थापना की गई।

बुक्का-I (1356–1377 ई.)

  • बुक्का-I को “तीन समुद्रों का अधिपति” कहा गया।
  • 1370–71 ई. में मदुरा (मदुरै) को विजयनगर साम्राज्य में मिलाया।
    • इस अभियान का नेतृत्व: पुत्र कम्पण (कम्पणदेव)
  • 1374 ई. में चीन में दूतमण्डल भेजा गया।
विजयनगर बनाम बहमनी संघर्ष
  • मुख्य कारण:
    1. रायचूर दोआब पर अधिकार
    2. तुंगभद्रा–कृष्णा क्षेत्र की उपजाऊ भूमि
    3. हीरे एवं लौह की खानें
  • अन्य घटनाएँ
    • 1356 ई. – बहमनी शासक अलाउद्दीन बहमनशाह द्वारा रायचूर पर अधिकार।
    • 1367 ई. – बुक्का-I बनाम मुहम्मद शाह-I (बहमनी) संघर्ष:
      • रायचूर दोआब पर युद्ध
      • कृष्णा नदी साम्राज्य की सीमा बनी
      • युद्ध के दौरान आम जनता की हत्या की गई
      • प्रथम बार बारूद (Gunpowder) का प्रयोग

हरिहर-II (1377–1404 ई.)

  • “महाराजाधिराज” एवं “राज परमेश्वर” की उपाधियाँ धारण कीं।
  • राजशाही उपाधि लेने वाला प्रथम शासक
  • कर्नाटक क्षेत्र के:
    • कन्नूर
    • मैसूर
    • त्रिचनापल्ली
    • कांची
      को विजयनगर साम्राज्य में मिलाया।
  • बहमनी से बेलगांव पुनः प्राप्त किया।
  • गोवा को जीतकर:
    • वेंगल
    • चोल
      बंदरगाहों पर अधिकार स्थापित किया।

विदेशी विवरण / साहित्यिक स्रोत

लेखककृति
सायणऐतरेय ब्राह्मण की टीकाकार
माधवाचार्यसुवर्ण संग्रह
श्रीनाथहरविलास
इरुगप्प दण्डनायकसेनापति व “नानार्थ रत्नमाला” के लेखक

उत्तराधिकार क्रम

  • विरुपाक्ष (1404–1406 ई.)
  • बुक्का-II
  • देवराय-I (1406–1422 ई.)

देवराय-I (1406–1422 ई.)

  • विदेशी विवरण
    • इतालवी यात्री निकोलो कॉण्टी के अनुसार:
      “देवराय भारत के अन्य राजाओं से शक्तिशाली था।”
  • बहमनी संघर्ष
    • देवराय बनाम फिरोज शाह बहमनी
    • युद्ध (1406) में:
      • 10 लाख हुन, मोती व हाथी दिए।
      • पुत्री का विवाह फिरोज से।
      • बांकीपुर क्षेत्र दहेज में दिया।
      • अंतिम युद्ध में वारंगल के राजा की सहायता से विजय
  •  जनकल्याण कार्य
    • तुंगभद्रा नदी पर बाँध बनवाया।
    • विजयनगर तक नहर का निर्माण।
    • हरिद्रा नदी पर भी बाँध बनवाया।
  •  सैन्य सुधार
    • अश्वसेना का महत्व समझकर:
      • अरब से घोड़े खरीदे।
    • सेना में:
      • 10,000 मुस्लिम सैनिकों की भर्ती।

देवराय-II (1425/26–1446 ई.)

  • अन्य नाम
    • रामचंद्र
    • (“रामचंद” और “विजयराज” उनके नाम थे; वे क्रमशः उनके चाचा और पिता थे।)
    • इमादी देवराय
  • उपाधि
    • “गजवेटेकर” (हाथियों जैसे बलवान शत्रुओं पर विजय पाने वाला)
  • सेना में सुधार
    • 10,000 मुस्लिम घुड़सवार नियुक्त।
    • 2,000 तुर्क धनुर्धर भर्ती: हिन्दू सैनिकों को तीरंदाजी प्रशिक्षण हेतु।
  • विदेशी विवरण
    • फारसी यात्री अब्दुर रज्जाक:
      • “विजयनगर ऐसा नगर है, जैसा न आँखों ने देखा न कानों ने सुना।”
      • विजयनगर राजसभा में फारस का राजदूत।
  • करदाता राज्य (चीनी स्रोतों के अनुसार)
    • सीलोन (श्रीलंका)
    • पुलिकट
    • पेगू (बर्मा)
    • तेनासेरिम (मलाया)
  • साहित्यिक योगदान
    • महानाटक सुधानिधि की रचना।
    • व्याकरण के ब्रह्मसूत्र पर टीका: “कवि सारंग” की उपाधि।
  •  दरबारी विद्वान
    • श्रीनाथ
      • कृति: दिनिमा (संस्कृत)
    • कवि चामरस
      • कृति: प्रभुलिंग लीला
  • अन्य
    • तेलुगु भाषा को राजकीय घोषित किया।

मल्लिकार्जुन (1446–1465 ई.)

  • उन्होंने कालीकट का दौरा किया

विरुपाक्ष-II (1465–1485 ई.)

  • पुत्र द्वारा हत्या।
  • संगम वंश का अन्तिम शासक

सालुव वंश (1485–1505 ई.)

  • नरसिंह सालुव (चंद्रगिरि सामंत):
    • 1485 ई. में संगम वंश का अंत किया।
  • नायक नरसा के पुत्र वीर नरसिंह:
    • इम्माडि नरसिंह की हत्या कर
    • तुलुव वंश की स्थापना की।

तुलुव वंश (1505–1570 ई.)

कृष्णदेवराय (1509–1529 ई.)

  • राज्याभिषेक: राजाधिराज कृष्णराज
  • युद्ध:
    • कृष्णदेवराय vs महमूद शाह + आदिलशाह (बीजापुर)
    • 1520 ई.: बीजापुर पराजित → रायचूर दोआब पर अधिकार।
    • आदिलशाह + पुर्तगाली (फिगुएरेडो) बनाम कृष्णदेवराय → विजेता: कृष्णदेवराय।
  • 1513 ई.:
    • उड़ीसा (गजपति शासक प्रतापरुद्र देव) पर विजय।
    • तेलंगाना, वारंगल, राजमहेंद्रि जीते।
    • गजपति की पुत्री से विवाह।
  • विजय स्मारक:
    • विजय भवन का निर्माण।

अच्युतदेवराय (1529–1542 ई.)

  • कृष्णदेवराय का अनुज एवं उत्तराधिकारी।
  • तिरुपति मंदिर में राज्याभिषेक।
  • प्रशासन हेतु महामंडलेश्वर की नियुक्ति।

 सदाशिव (1542–1570 ई.)

  • वास्तविक सत्ता:
    • रामराय (अराविडु वंश) के हाथों में।
  • दक्खन मुस्लिम संघ का गठन।

तालीकोटा का युद्ध (1565 ई.)

  • विजयनगर vs बीजापुर + गोलकुंडा + अहमदनगर + बीदर
  • सेनापति:
    • विजयनगर: रामराय
    • विरोधी: हुसैन निजामशाह
  • परिणाम:
    • विजयनगर पराजित
    • रामराय की हत्या
    • विजयनगर का वैभव समाप्त
  • विदेशी विवरण
    • डोमिंगो पायस एवं दुआर्ते बारबोसा (पुर्तगाली यात्री)
  • इतिहासकार का कथन
    • आर. सीवेल – “A Forgotten Empire”
    • → विश्व इतिहास में विजयनगर जैसा वैभवशाली नगर विरल था।

अराविडु वंश (1570–1646 ई.)

  • रामराय के भाई तिरुमल ने:
    • विजयनगर के स्थान पर
    • पेनुगोंडा (Penukonda) को राजधानी बनाया।
  • सदाशिव राय को अपदस्थ किया।
  • तिरुमल को कर्नाटक साम्राज्य का उद्धारक कहा जाता है।
  • उत्तराधिकार क्रम
    • तिरुमाला देव राय (1565-1572)
    • श्रीरंगा देव राय प्रथम (श्रीरंगा प्रथम) (1572-1586)
    • वेंकटपति देव राय द्वितीय (वेंकट द्वितीय) (1586-1614)
    • श्रीरंगा द्वितीय (1614-1617)
    • राम देव राय (1617-1632)
    • पेडा वेंकटा राया (वेंकट तृतीय) (1632-1642)
    • श्रीरंगा तृतीय (1642-1646/1652)

महत्त्वपूर्ण शासक

वेंकट-II (1586–1614 ई.)

  • राजधानी स्थानांतरण:
    • पेनुगोंडा → चंद्रगिरि (1614 ई.)
  • मैसूर स्वतंत्र हुआ (अनुमति सहित)
    • शासक: ओडियार वंश

श्रीरंग-III

  • विजयनगर साम्राज्य का अंतिम शासक
    • प्रमुख क्षेत्र
      • मैसूर
      • वेलूर
      • मदुरा
      • तंजौर
  • → अंततः इन क्षेत्रों द्वारा पराजित/विस्थापित।
  • पतन
    • अंततः विजयनगर साम्राज्य का विनाश।
  • इतिहासकार का मत
  • बर्टन स्टाइन:
    1. Peasant State and Society in Medieval South India
    2. Vijayanagar – The New Cambridge History of India
      • → विजयनगर को एक “खण्ड राज्य” (Segmentary State) के रूप में व्याख्यायित किया।

विजयनगर की सांस्कृतिक उपलब्धियों को तीन स्पष्ट भागों में विभाजित किया गया है —

  • (1) साहित्य
  • (2) स्थापत्य कला और
  • (3) संगीत एवं नृत्य                  

1. साहित्य (Literature)

 सामान्य जानकारी

  • कृष्णदेवराय एक विद्वान, कला प्रेमी और ‘अभिनव भोज’, ‘आंध्र भोज’ तथा ‘आंध्र पितामह’ कहलाते थे।
  • विजयनगर काल में संस्कृत, तमिल और कन्नड़ भाषाओं में साहित्य का विकास हुआ।
  • कृष्णदेव राय स्वयं संस्कृत और तेलुगू के महान कवि थे।

कृष्णदेवराय की रचनाएँ

भाषारचनाविषय / विशेषता
तेलुगूआमुक्त माल्यद (Amuktamalyada)विष्णु अवतार रंगनायक और संत अंडाल के विवाह का वर्णन; राजनीतिक व प्रशासनिक विचार; इसे विष्णुचितीयविस्वुवितीय भी कहा जाता है।
संस्कृतजाम्बवती कल्याण, उषा परिणय, मदालसा चरित्रनाटक एवं काव्य रचनाएँ

तेलुगू साहित्य का स्वर्णयुग (कृष्णदेव राय काल)

  • कृष्णदेव राय के दरबार में 8 प्रसिद्ध कवि थे जिन्हें अष्टदिग्गज कहा जाता था।
  • यह काल तेलुगू साहित्य का शास्त्रीय युग कहलाता है।

अष्टदिग्गज कवि

कविप्रमुख रचनाभाषा
अल्लासानी पेद्दनामनुकारिता (स्वरोचित सम्भव), हरिकथा सरनसमूतेलुगू
नन्दी तिम्मनपारिजात हरणतेलुगू
भट्टमूर्तिनरसभूपालियम, वसुचरित्रतेलुगू
धूर्जटीकालहस्ति माहामात्यतेलुगू
तेनालीरामपांडुरंग माहात्म्यतेलुगू
अन्य कवि: मल्लन, रामचन्द्र, जिर्गली  मूरनतेलुगू
  • अल्लासानी पेद्दना को तेलुगू कविता का पितामह (आंध्र कविता पितामह) कहा जाता है।
  • तेनालीराम की तुलना अकबर के बीरबल से की जाती है।
तेलुगू के पाँच महाकाव्य
  1. आमुक्तमाल्यद – कृष्णदेव राय
  2. मनुकारिताचरितम् – अल्लासानी पेद्दना
  3. वसुचरित – भट्टमूर्ति
  4. राघव पांडवीयम – पिंगली सूरल
  5. पांडुरंग माहात्म्य – तेनालीराम

अन्य साहित्यिक रचनाएँ

संस्कृत में

  • सायण – वेदों पर भाष्य, सुधानिधि, संगीतसार
  • हेमाद्रि – धर्मशास्त्रों पर टीका
  • ईश्वर दीक्षित – हेमकूट पर टीकाएँ
  • आगस्त्य – अनेक काव्य रचनाएँ
  • श्रीनाथ – शृंगार दीपिका, शृंगार नैषध, हरविलासम्
  • माधव विद्यारण्य – काल निर्णय, पाराशर स्मृति पर टीका
  • रामराज पंडित – वसुचरित्र (कन्नड़)
  • राजनाथ – शाल्वभ्युदय, भागवत चंपू

कन्नड़ में

  • मधुर – धर्मनाथ पुराण
  • केतन – दशकुमार चरित का अनुवाद; उपाधि “अभिनव दण्डी”
  • गोमतेश्वर की स्तुति में कविताएँ
  • कृष्णदेव राय के दरबार में संस्कृत एवं कन्नड़ भाषाओं में विभिन्न पुस्तकों की रचना हुई, जिनमें ‘भाव चिंतारण’ तथा ‘वीर शैवामृत’ प्रमुख हैं। 

तमिल में

  • तमिल भाषा पहले से विकसित थी; विजयनगर काल में निरंतर प्रगति हुई।

अन्य उल्लेखनीय

  • मदुरा विजयम्गंगा देवी (कुमार कम्पन्न की पत्नी)
  • वरदाम्बिका परिणयतिरूवलाम्बा (अच्युत राय के विवाह पर)
  • द तमिल कंट्री अंडर विजयनगरए. कृष्णस्वामी

स्थापत्य कला (Architecture)

प्रमुख स्थापत्य विशेषताएँ

  • विजयनगर स्थापत्य की शैली प्रोविडा शैली (बेसर शैली का रूप) कहलाती थी।
  • मुख्य विशेषताएँ:
    • विशाल गोपुरम (राया गोपुरम)
    • हजार स्तंभों का मंडप, कल्याण मंडप, अमान मंडप
    • अलंकृत स्तंभ, छतों की सजावट, स्तंभों के नीचे करंड सज्जा
    • स्तंभों पर दरियाई घोड़े (याली) की आकृतियाँ
    • देव विवाह (कल्याणोत्सव) के लिए विशेष मण्डप

प्रमुख निर्माण कार्य

निर्माणनिर्माताविशेषता
हजारा मंदिरकृष्णदेव रायराम को समर्पित
विट्ठल स्वामी मंदिरकृष्णदेव रायकृष्ण को समर्पित
नागलपुर नगरकृष्णदेव रायमाँ नागला देवी की स्मृति में
हास्पेट नगरकृष्णदेव रायपत्नी की स्मृति में
कमल महलहिन्दू स्थापत्य पर इस्लामी प्रभाव
लेपाक्षी मंदिरसबसे बड़ी एकाश्मक नन्दी मूर्ति; चित्रकला के प्रमाण (लेपाक्षी कला)
  • विजयनगर के शासक शिव देवता विरुपाक्ष के नाम पर शासन करते थे;
  •  कृष्णदेव राय स्वयं वैष्णव थे।

 संगीत एवं नृत्य (Music & Dance)

प्रमुख विशेषताएँ

  • कृष्णदेव राय और अन्य विजयनगर शासकों ने संगीत एवं नृत्य को विशेष संरक्षण दिया।
  • दरबार में अनेक प्रसिद्ध गायक, वादक और नर्तक थे।

संगीत संबंधी ग्रंथ

रचनाकारग्रंथविवरण
सायणसंगीतसारसंगीत सिद्धांतों की व्याख्या
मल्लीनाथमल्लिकार्जुन के संरक्षण में कार्य किया
रामामात्य (मल्लीनाथ के पोते)स्वरमेल कलानिधिसंगीत ग्रंथ
लक्ष्मीनारायणसंगीत सर्वोदयदेवराय द्वितीय के दरबार में
कृष्णदेव राय के दरबारी संगीतकारसंगीत सर्वोदय, स्वरमेव कलानिधि की रचना

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

error: Content is protected !!
Scroll to Top
Telegram WhatsApp Chat