माँ को बच्चे की पहली शिक्षिका बताया गया है।
- मानवीय मूल्यों को विकसित करने में माँ की भूमिका –
- स्नेह, प्रेम, त्याग, धैर्य, निःस्वार्थता
- उदाहरण –
- बलिदान – गांधीजी ने अपनी मां पुतलीबाई से सत्याग्रह की तकनीक सीखी
- मैं जो कुछ भी हूं या बनने की आशा करता हूं, उसके लिए मैं अपनी मां का ऋणी हूं – अब्राहम लिंकन
- शक्ति – ब्रह्मांड में शक्ति की प्रत्येक अभिव्यक्ति माँ है – स्वामी विवेकानन्द
- नैन्सी मैथ्यूज इलियट – थॉमस एडिसन की माँ
- सुभद्रा – अभिमन्यु की माता
- जीजाबाई – शिवाजी की माता
मानवीय मूल्य वह मार्गदर्शक सिद्धांत, विचारधाराएं और विश्वास हैं जो मानवता के मूल में है।
बदलती सामाजिक व्यवस्था एवं प्रभाव –
सकारात्मक प्रभाव –
- बढ़ती स्वीकार्यता और सहिष्णुता – धर्मनिरपेक्षता और सहानुभूति जैसे मूल्य मध्यकालीन या प्राचीन समय की तुलना में आधुनिक समय में अधिक देखे जाते हैं।
- Ex – भारतीय संविधान में धर्मनिरपेक्षता [42वां संवैधानिक संशोधन]
- Ex – शहरीकरण ने जाति-आधारित भेदभाव को कम कर दिया है
- नियम-आधारित सामाजिक व्यवस्था – मजबूत नियम, कानून और कानूनी संस्थाएँ, शांति, अहिंसा, मानवता जैसे मूल्यों को बढ़ावा देते हैं। Ex – संयुक्त राष्ट्र द्वारा मानवाधिकारों की सार्वभौम घोषणा
- अधिक स्वतंत्रता – नई सामाजिक व्यवस्था में स्वतंत्रता के मूल्य को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। जीवन साथी चुनने की स्वतंत्रता (Article 21 – हादिया विवाह मामले के तहत घोषित एक मौलिक अधिकार)
- समाज में प्रौद्योगिकी का हस्तक्षेप – सूचना का लोकतंत्रीकरण, उद्यमिता और सामाजिक पूंजी जैसे मूल्यों को सोशल मीडिया द्वारा बढ़ावा दिया जाता है।
- नागरिक समाज संगठनों की बढ़ती भूमिका – सूचना का अधिकार (MKSS), पर्यावरण नैतिकता (चिपको आंदोलन) जैसे मूल्य
नकारात्मक प्रभाव –
- पारंपरिक मूल्यों का क्षरण – देखभाल की नैतिकता में गिरावट आ रही है
- उदाहरण – वृद्धाश्रमों का बढ़ना
- उदाहरण – एकल परिवार प्रणाली बढ़ने के कारण दादा-दादी द्वारा दिए जाने वाले आध्यात्मिक मूल्यों में गिरावट आयी है
- धार्मिक असहिष्णुता की घटनाएँ – धर्म में राजनीति की बढ़ती भूमिका। उदाहरण – धार्मिक भावनाओं पर आधारित मॉब लिंचिंग [पहलू खान लिंचिंग, पालघर साधु लिंचिंग]
- समाज पर प्रौद्योगिकी का नकारात्मक प्रभाव – प्रमाणीकरण चाहने वाला व्यवहार (लाइक/ डिसलाइक) – हीन भावना, गोपनीयता पर आक्रमण, आदि।
भारतीय गणतंत्र के 14वें राष्ट्रपति स्वर्गीय ए.पी.जे. अब्दुल कलाम को जनता के राष्ट्रपति के रूप में जाना जाता था। उनके नैतिक व्यक्तित्व पर उनके माता-पिता और शिक्षकों का बहुत प्रभाव था।
नैतिक विकास में परिवार की भूमिका –
की भूमिका | मूल्य |
दादा-दादी |
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पिता |
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माता |
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भाई-बहन |
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जीवनसाथी |
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नैतिक विकास में शिक्षकों की भूमिका –
की भूमिका | मूल्य |
शिक्षक |
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पाठ्यक्रम |
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पाठ्येतर गतिविधियां(क्स्ट्रा करिकुलम एक्टिविटीज़) |
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निष्कर्ष – NEP 2020 (नई शिक्षा नीति) माता-पिता की भागीदारी को प्रोत्साहित करती है और एक बच्चे में नैतिक तर्क और पारंपरिक भारतीय मूल्य प्रणाली को विकसित करने के लिए स्कूलों और परिवारों के बीच संचार को बढ़ावा देती है।
