रक्षा प्रौद्योगिकी

रक्षा प्रौद्योगिकी विज्ञान और प्रौद्योगिकी का एक महत्वपूर्ण विषय है, जो राष्ट्र की सुरक्षा के लिए उन्नत तकनीकों के विकास और उपयोग से संबंधित है। इसमें हथियार प्रणाली, मिसाइल, निगरानी, संचार और आधुनिक युद्ध तकनीकों का अध्ययन शामिल है।इस विषय के अंतर्गत हम विभिन्न रक्षा तकनीकों, उनके अनुप्रयोगों तथा राष्ट्रीय सुरक्षा को सुदृढ़ बनाने में उनकी भूमिका का अध्ययन करेंगे।

  • एक मिसाइल (प्रक्षेपास्त्र) एक ऐसी निर्देशित मारक/हथियार प्रणाली है जिसे किसी पेलोड (पारंपरिक या परमाणु विस्फोटक) को सटीकता के साथ लक्ष्य तक पहुंचाने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
  • रॉकेट और मिसाइल के बीच मुख्य अंतर उनकी नियंत्रण क्षमता है। रॉकेट के विपरीत, मिसाइलें निर्देशन (Guidance), नौवहन (Navigation) और नियंत्रण प्रणालियों (Control Systems) से लैस होती हैं, जो उन्हें उड़ान के दौरान अपने प्रक्षेप पथ को संशोधित करने की अनुमति देती हैं।
  • मिसाइलें रक्षा रणनीति में दो प्रमुख भूमिकाएँ निभाती हैं:
    • युद्धक भूमिका (Tactical Role):
      • उपयोग: युद्ध क्षेत्र में दुश्मन के सैन्य ठिकानों, वाहनों या सैनिकों के विरुद्ध।
      • विशेषता: ये प्रायः कम दूरी की मारक क्षमता वाली होती हैं।
    • रणनीतिक भूमिका (Strategic Role):
      • मुख्य उद्देश्य: परमाणु निवारण (Nuclear Deterrence) और लंबी दूरी तक प्रहार करने की क्षमता बनाए रखना।
      • महत्व: ये राष्ट्र की सुरक्षा और शक्ति संतुलन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होती हैं।

मिसाइल प्रणाली के घटक (Components)

मिसाइल प्रणाली को मुख्य रूप से पाँच भागों में वर्गीकृत किया गया है:

वारहेड (Warhead):

वारहेड मिसाइल का वह प्रमुख भाग है जो लक्ष्य को नष्ट करने या अक्षम करने का कार्य करता है। इसे इसमें प्रयुक्त विस्फोटक सामग्री के आधार पर निम्न प्रकार से वर्गीकृत किया गया है:

  1. पारंपरिक वारहेड (Conventional Warheads):
    1. ये मुख्य रूप से उच्च विस्फोटक (जैसे TNT, RDX, और HMX) का उपयोग करते हैं।
    2. ये विस्फोट, विखंडन (fragmentation), या दाहक (incendiary) प्रभावों के माध्यम से क्षति पहुँचाते हैं।
    3. इनका उपयोग आमतौर पर स्थानीय लक्ष्यों पर सामरिक हमलों (Tactical Strikes) के लिए किया जाता है।
  2. गैर-पारंपरिक वारहेड/सामूहिक विनाश के हथियार (WMD): इनकी विनाशकारी क्षमता अत्यधिक होती है और इनमें निम्नलिखित शामिल हैं:
    1. परमाणु वारहेड (Nuclear Warheads): ये ऊर्जा की भारी मात्रा मुक्त करने के लिए नाभिकीय विखंडन (Fission) या संलयन (Fusion) अभिक्रियाओं का प्रयोग करते हैं।
    2. रासायनिक वारहेड (Chemical Warheads): ये जहरीले रासायनिक एजेंटों को फैलाते हैं जिन्हें चोट पहुँचाने, अक्षम करने या जान लेने के लिए डिज़ाइन किया जाता है।
    3. जैविक वारहेड (Biological Warheads): इनमें जीवित सूक्ष्मजीव (जैसे रोगजनक या विष) होते हैं, जिनका उद्देश्य बीमारी फैलाना या मृत्यु उत्पन्न करना होता है।

प्रणोदन प्रणाली (Propulsion System):

यह मिसाइल का वह इंजन है जो उसे गति देने और उड़ान पथ पर बनाए रखने के लिए आवश्यक नोद (Thrust) प्रदान करता है। मिसाइल की सीमा (Range), गति और परिचालन वातावरण का निर्धारण इसकी संरचना पर निर्भर करता है।

  1. मिसाइल इंजन के प्रकार:
    1. जेट इंजन (वायु-श्वसन/Air-Breathing):
      1. ये दहन के लिए वायुमंडलीय ऑक्सीजन का उपयोग करते हैं (जैसे विमान के इंजन)।
      2. वायुमंडल में निरंतर उड़ान के लिए अत्यधिक कुशल होते हैं।
      3. मुख्य रूप से क्रूज मिसाइलों में उपयोग किए जाते हैं (जैसे- टर्बोफैन, टर्बोजेट, रैमजेट, स्क्रैमजेट)।
    2. रॉकेट इंजन (गैर-वायु-श्वसन/ Non-Air-Breathing):
      1. ये ईंधन और आंतरिक ऑक्सीकारक (Oxidizer) (जैसे तरल ऑक्सीजन) दोनों को साथ ले जाते हैं।
      2. ये वायुमंडल और अंतरिक्ष के निर्वात (Vacuum) दोनों में कार्य कर सकते हैं।
      3. ये अत्यधिक तीव्र नोद (Thrust) उत्पन्न करते हैं।
      4. इनका उपयोग बैलिस्टिक मिसाइलों और अंतरिक्ष प्रक्षेपण यानों के लिए किया जाता है।
    3. नोजल (Nozzle): यह एक महत्वपूर्ण घटक है जो उच्च-वेग वाली निकास गैसों (Exhaust gases) को निर्देशित करता है। यह तापीय ऊर्जा को गतिज ऊर्जा में परिवर्तित करता है, जिससे अधिकतम नोद (Thrust) उत्पन्न होता है।
प्रणोदन तकनीक (Propulsion Technologies)
  • ठोस ईंधन प्रणोदन (Solid-Fuel Propulsion):
    • यह सरल संरचना वाली प्रणाली है जो उच्च प्रारंभिक नोद (Initial Thrust) प्रदान करती है।
    • एक बार प्रज्वलन (Ignition) होने के बाद इसे नियंत्रित या बंद नहीं किया जा सकता।
    • उदाहरण: पृथ्वी मिसाइल, ब्रह्मोस का प्रथम चरण।
  • तरल प्रणोदन (Liquid Propulsion):
    • इसमें ईंधन और ऑक्सीकारक तरल अवस्था में होते हैं।
    • यह नियंत्रित नोद और उच्च दक्षता प्रदान करता है, लेकिन इसकी प्रणाली अधिक जटिल होती है।
    • उदाहरण: अग्नि-I, विकास इंजन (ISRO)।
  • हाइब्रिड प्रणोदन (Hybrid Propulsion): यह ठोस और तरल दोनों प्रणालियों की विशेषताओं को जोड़ता है (आमतौर पर ठोस ईंधन और तरल ऑक्सीकारक)।
  • क्रायोजेनिक प्रणोदन (Cryogenic Propulsion):
    • इसमें अत्यधिक कम तापमान पर रखे गए ईंधनों (जैसे तरल ऑक्सीजन – LOX और तरल हाइड्रोजन – LH2) का उपयोग किया जाता है।
    • उच्च ऊर्जा घनत्व और बहुत लंबी दूरी के अनुप्रयोगों के लिए। उदाहरण: GSLV Mk III।
  • वायु-श्वसन इंजन (Air-Breathing Engines): ये इंजन दहन के लिए बाहरी वातावरण की हवा का उपयोग करते हैं, जिससे मिसाइल हल्की और अधिक ईंधन-कुशल हो जाती है। इनके प्रमुख प्रकार हैं:
    • रैमजेट (Ramjet): इसका उपयोग पराध्वनिक गति के लिए किया जाता है (ध्वनि की गति से 1 से 5 गुना तेज़)।
    • स्क्रैमजेट (Scramjet): यह ‘सुपरसोनिक कंबशन रैमजेट’ का संक्षिप्त रूप है। इसका उपयोग अति-पराध्वनिक गति (Hypersonic speeds) के लिए किया जाता है (ध्वनि की गति से 5 गुना से अधिक तेज़)। उदाहरण: ब्रह्मोस-II

निर्देशन और नियंत्रण प्रणाली (Guidance and Control System):

यह प्रणाली मिसाइल का ‘मस्तिष्क’ होती है, जो यह सुनिश्चित करती है कि मिसाइल अपने निर्धारित प्रक्षेप पथ पर बनी रहे और बाहरी कारकों (जैसे हवा, गुरुत्वाकर्षण आदि) के प्रभाव को संतुलित कर सके।

  1. निर्देशन के प्रकार (Guidance Types):
    1. जड़त्वीय निर्देशन प्रणाली (Inertial Guidance System): यह एक आंतरिक और आत्मनिर्भर प्रणाली है जो जाइरोस्कोप (Gyroscopes) और त्वरणमापी (Accelerometers) का उपयोग करती है। यह एक ज्ञात शुरुआती बिंदु से मिसाइल की स्थिति, वेग और अभिविन्यास को लगातार ट्रैक करती है। यह बाहरी जैमिंग (अवरोधन) के प्रति अत्यधिक प्रतिरोधी होती है।
    2. उपग्रह निर्देशन (Satellite Guidance): यह उच्च-सटीक स्थान अपडेट प्रदान करने के लिए ‘ग्लोबल नेविगेशन सैटेलाइट सिस्टम’ (जैसे GPS, GLONASS, या भारत का NavIC/IRNSS) के संकेतों का उपयोग करके IGS की क्षमता को बढ़ाता है।
  2. नियंत्रण सतहें (Control Surfaces): ये वे भौतिक भाग हैं जो निर्देशन प्रणाली के आदेशानुसार मिसाइल की दिशा बदलने के लिए चलते हैं:
    1. फिन्स और कैनार्ड्स (Fins and Canards): ये छोटे पंखों की तरह होते हैं जो हवा में उड़ान के दौरान मिसाइल को मोड़ने के लिए धुरी पर घूम सकते हैं।
    2. जेट वेन्स (Jet Vanes): ये गर्मी प्रतिरोधी छोटी सतहें होती हैं जिन्हें सीधे रॉकेट के निकास प्रवाह (Exhaust flow) में रखा जाता है। ये नोद वेक्टरिंग (Thrust Vectoring) के माध्यम से तब भी नियंत्रण प्रदान करती हैं जब मिसाइल धीमी गति में हो या वायुमंडल से बाहर हो।
    3. थ्रस्टर्स (Thrusters): ये छोटे सहायक रॉकेट मोटर होते हैं जिनका उपयोग मिसाइल के अभिविन्यास नियंत्रण (Attitude control), अंतरिक्ष में त्वरित गति करने और लक्ष्य के करीब पहुँचने पर सूक्ष्म सुधार करने के लिए किया जाता है।

लक्ष्यीकरण और नौवहन (Targeting and Navigation):

यह प्रणाली मिसाइल को लक्ष्य की सटीक पहचान करने और उस पर प्रहार करने में सक्षम बनाती है। इसमें प्रयुक्त उन्नत होमिंग सिस्टम (Seekers) के प्रकार निम्नलिखित हैं:

  • रडार निर्देशन (Radar Guidance): मिसाइल स्वयं रडार तरंगें उत्सर्जित करती है (सक्रिय) या किसी बाहरी स्रोत या लक्ष्य से आने वाली रडार तरंगों को ट्रैक करती है (अर्ध-सक्रिय या निष्क्रिय) ताकि लक्ष्य की दूरी, वेग और कोण का सटीक निर्धारण किया जा सके।
  • अवरक्त (IR) निर्देशन (Infrared Guidance): यह लक्ष्य के ताप हस्ताक्षर (Heat Signature) या ऊष्मीय उत्सर्जन का पता लगाती है। इसे सामान्यतः “हीट-सीकिंग” (Heat-seeking) तकनीक कहा जाता है। यह विमानों, इंजनों और सैन्य वाहनों के विरुद्ध अत्यधिक प्रभावी है।
  • लेजर निर्देशन (Laser Guidance): इसमें लक्ष्य को किसी बाहरी लेजर स्रोत (जैसे- ड्रोन या ग्राउंड यूनिट) द्वारा प्रकाशित (Illuminate) किया जाता है। मिसाइल का साधक (Seeker) लक्ष्य से परावर्तित लेजर ऊर्जा का पीछा करते हुए उस पर सटीक प्रहार करता है।

वारहेड सक्रियण (Warhead Activation):

यह मिसाइल की कार्यप्रणाली का अंतिम चरण है, जहाँ लक्ष्य की पुष्टि होने के बाद वारहेड को विस्फोटित करने का संकेत भेजा जाता है ताकि अधिकतम प्रभाव सुनिश्चित हो सके। 

  • फ्यूजिंग प्रणाली (Fuzing System): इसे हिंदी में ‘फ्यूज प्रणाली’ ही कहा जाता है। यह एक सुरक्षा और सक्रियण तंत्र है जो यह निर्धारित करता है कि वारहेड को कब और कहाँ विस्फोटित होना है (जैसे- लक्ष्य के संपर्क में आने पर या लक्ष्य के अत्यंत निकट पहुँचने पर)।

मिसाइलों का वर्गीकरण

मिसाइलों को मुख्य रूप से उनके प्रक्षेप पथ (Trajectory Path), प्रक्षेपण विधि (Launch Mode), मारक क्षमता/परास (Range) और उनके वारहेड की प्रकृति के आधार पर वर्गीकृत किया जाता है।

प्रक्षेप पथ के आधार पर (Based on Trajectory Path):

  • क्रूज मिसाइल (Cruise Missiles): ये मिसाइलें कम ऊंचाई पर एक स्थिर और नियंत्रित प्रक्षेप पथ पर उड़ान भरती हैं। ये रडार की पकड़ से बचने के लिए जमीन की सतह के समानांतर (Terrain-hugging) चलती हैं। ये निरंतर उड़ान के लिए वायुमंडलीय जेट इंजनों (टर्बोजेट, रैमजेट, स्क्रैमजेट) पर निर्भर करती हैं। उदाहरण: ब्रह्मोस, निर्भय, टॉमहॉक।
    1. गति की श्रेणियाँ (Speed Categories):
      • सबसोनिक (Subsonic): ध्वनि की गति से कम (1 मैक से कम)।
      • सुपरसोनिक (Supersonic): ध्वनि की गति से 1 से 5 गुना अधिक (1 से 5 मैक)।
      • हाइपरसोनिक (Hypersonic): ध्वनि की गति से 5 गुना से अधिक (5 मैक से अधिक)।
      • बैलिस्टिक मिसाइल (Ballistic Missiles): ये मिसाइलें एक उच्च-ऊंचाई वाले परवलयाकार प्रक्षेप पथ का अनुसरण करती हैं। इन्हें शुरुआती चरण में रॉकेट इंजन द्वारा शक्ति प्रदान की जाती है, जिसके बाद ये गुरुत्वाकर्षण के प्रभाव में मुक्त-पतन (Free-falling) करते हुए लक्ष्य की ओर बढ़ती हैं। इनका उपयोग मुख्य रूप से लंबी दूरी के रणनीतिक हमलों के लिए किया जाता है। उदाहरण: अग्नि श्रृंखला, मिनटमैन III

क्रूज बनाम बैलिस्टिक मिसाइल

विशेषताक्रूज मिसाइलबैलिस्टिक मिसाइल
उड़ान पथवायुमंडल के भीतर नियंत्रित और क्षैतिज उड़ानवक्राकार पथ, वायुमंडल में प्रवेश करती है और उससे बाहर निकल सकती है (पूर्व-निर्धारित पथ)
प्रणोदनवायुमंडलीय जेट इंजन (टर्बोजेट, रैमजेट, स्क्रैमजेट)रॉकेट इंजन (ठोस/तरल ईंधन), केवल बूस्ट चरण में सक्रिय
निर्देशनपूरी उड़ान के दौरान अत्यधिक निर्देशित और सुगम संचालन क्षमताकेवल प्रक्षेपण के दौरान निर्देशित, फिर गुरुत्वाकर्षण आधारित प्रक्षेप पथ का अनुसरण
गतिसबसोनिक, सुपरसोनिक या हाइपरसोनिक।पुन: प्रवेश (Re-entry) के समय अत्यधिक तीव्र अंतिम वेग 
मारक क्षमताकम दूरी, आमतौर पर सैकड़ों से एक हजार किलोमीटर तकलंबी दूरी, हजारों किलोमीटर तक (अंतरमहाद्वीपीय क्षमता)
पेलोडआमतौर पर छोटे, सटीक पारंपरिक या परमाणु वारहेडबड़े और भारी पेलोड ले जाने में सक्षम, जिसमें MIRVs (एक साथ कई लक्ष्यों पर प्रहार करने वाले वाहन) शामिल हैं
प्रक्षेपण मंचबहुमुखी: थल, जल, नभ और पनडुब्बीआमतौर पर स्थिर साइलो (Silos), मोबाइल लॉन्चर या पनडुब्बियों से प्रक्षेपित

2. प्रक्षेपण विधि द्वारा वर्गीकरण (Launch Mode):

यह वर्गीकरण इस आधार पर किया जाता है कि मिसाइल को कहाँ से छोड़ा गया है और उसका लक्ष्य कहाँ स्थित है।

प्रकारपूर्ण रूप प्रक्षेपण स्थललक्ष्यउदाहरण (भारत)
SSMसतह से सतह पर मार करने वाली मिसाइलस्थल/जलपोतस्थल/जलपोतपृथ्वी, अग्नि, ब्रह्मोस (भूमि या ज़मीन सेलॉन्च)
SAMसतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलस्थल/जलपोतविमान, UAVs, मिसाइलआकाश, त्रिशूल, MR-SAM, S-400 (रूसी मॉडल)
ASMहवा से सतह पर मार करने वाली मिसाइललड़ाकू विमानस्थल/जलपोतरुद्रम-I (विकिरण -रोधी), ब्रह्मोस-A
AAMहवा से हवा में मार करने वाली मिसाइललड़ाकू विमानAircraft, UAVsअस्त्र
SLBMपनडुब्बी से प्रक्षेपित बैलिस्टिक मिसाइलपनडुब्बीरणनीतिक भूमि आधारित लक्ष्यK-15 (सागरिका), K-4

नोट: कुछ मिसाइलें, जैसे ब्रह्मोस (BrahMos) या हारपून (Harpoon), बहुमुखी होती हैं और उन्हें कई प्लेटफार्मों (जैसे सतह, हवा, पनडुब्बी) से प्रक्षेपित किया जा सकता है। अतः, प्रक्षेपण मंच और मिशन के आधार पर वे एक से अधिक श्रेणियों में आती हैं।

3. मारक क्षमता/परास के आधार पर (बैलिस्टिक मिसाइल)

  1. अल्प-दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल (SRBM): इनकी मारक क्षमता 1,000 किमी से कम होती है। (उदाहरण: पृथ्वी-II)।
  2. मध्यम-दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल (MRBM): इनकी मारक क्षमता 1,000 से 3,000 किमी के बीच होती है। (उदाहरण: अग्नि-II)।
  3. मध्यवर्ती-दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल (IRBM): इनकी मारक क्षमता 3,000 से 5,500 किमी के बीच होती है। (उदाहरण: अग्नि-III)।
  4. अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM): इनकी मारक क्षमता 5,500 किमी से अधिक होती है। इन्हें रणनीतिक परमाणु निवारण (Nuclear Deterrence) के लिए डिज़ाइन किया गया है और ये कई वारहेड (MIRVs) ले जाने में सक्षम हैं। (उदाहरण: अग्नि-V, मिनटमैन III)।

ICBM का रणनीतिक महत्व: 

  • ICBM किसी भी राष्ट्र के परमाणु त्रय (Nuclear Triad) का आधार स्तंभ होती हैं। परमाणु त्रय का अर्थ है – भूमि, समुद्र और हवा तीनों माध्यमों से परमाणु हमला करने की क्षमता।
  • लंबी दूरी की क्षमता: ये अत्यधिक लंबी दूरी की उड़ानों के लिए डिज़ाइन की गई हैं।
  • ये बहु-लक्ष्यीय स्वतंत्र रूप से लक्षित पुन: प्रवेश वाहन (MIRVs) ले जाने में सक्षम हैं। इसका तात्पर्य यह है कि एक ही मिसाइल कई अलग-अलग वारहेड छोड़ सकती है जो विभिन्न लक्ष्यों पर सटीक प्रहार करते हैं।
  • प्रभाव: यह तकनीक किसी राष्ट्र की प्रहार क्षमता को बहुत बढ़ा देती है और दुश्मन की मिसाइल रक्षा प्रणालियों को भेदने या उन्हें विफल करने में सहायक होती है।

4. वारहेड के आधार पर वर्गीकरण

  1. पारंपरिक (Conventional): इसमें उच्च विस्फोटक सामग्री का उपयोग किया जाता है।
  2. गैर-पारंपरिक/रणनीतिक: इसमें परमाणु, रासायनिक और जैविक हथियार शामिल हैं।

5. अन्य उभरती हुई मिसाइल श्रेणियाँ

  1. एंटी-बैलिस्टिक मिसाइल (ABM):
    1. ये रक्षात्मक प्रणालियाँ हैं जिन्हें दुश्मन की ओर से आने वाली बैलिस्टिक मिसाइलों को बीच रास्ते में ही रोकने और नष्ट करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
    2. उदाहरण: भारत की पृथ्वी एयर डिफेंस (PAD) और एडवांस्ड एयर डिफेंस (AAD) प्रणालियाँ।
  2. हाइपरसोनिक ग्लाइड वाहन (HGV) और हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइल (HCM): ये मिसाइल तकनीक की अगली पीढ़ी का प्रतिनिधित्व करते हैं:
    1. हाइपरसोनिक ग्लाइड वाहन (HGV): इन्हें एक बैलिस्टिक मिसाइल बूस्टर द्वारा प्रक्षेपित किया जाता है और फिर ये वायुमंडल में अति-पराध्वनिक गति (Mach 5+) से तैरते (Glide) हुए आगे बढ़ते हैं। इनकी अत्यधिक संचालन क्षमता के कारण इन्हें ट्रैक करना और बीच में रोकना लगभग असंभव होता है।
    2. हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइल (HCM): ये निरंतर अति-पराध्वनिक उड़ान के लिए स्क्रैमजेट इंजन का उपयोग करती हैं।
  3. विकिरण-रोधी मिसाइल (ARM):
    1. ये वे मिसाइल हैं जो दुश्मन के रडार या रेडियो उत्सर्जन के स्रोतों को पहचान कर उन्हें नष्ट कर देती हैं। इनका मुख्य उद्देश्य दुश्मन की संचार और निगरानी प्रणाली को पंगु बनाना होता है।
    2. उदाहरण: DRDO की रुद्रम (Rudram) श्रृंखला।

भारतीय मिसाइल कार्यक्रम

भारत में निर्देशित मिसाइलों का विकास

  • प्रारंभिक रॉकेटरी (18वीं शताब्दी)
    • मैसूरी रॉकेट: टीपू सुल्तान द्वारा अंग्रेजों के विरुद्ध युद्ध में उपयोग किए गए लोहे के आवरण वाले प्रथम रॉकेट।
  • स्वतंत्रता के बाद का युग (1958 से आगे)
    • 1958: भारत ने निर्देशित मिसाइल प्रणालियों के अध्ययन के लिए ‘विशेष हथियार विकास दल’ का गठन किया।
    • 1970 का दशक:
      • प्रोजेक्ट डेविल (Project Devil): सोवियत SA-2 मिसाइल की रिवर्स इंजीनियरिंग करना।
      • प्रोजेक्ट वैलिएंट (Project Valiant): ICBM विकसित करने का प्रयास (सीमित सफलता)।
  • 1980 का दशक – एकीकृत निर्देशित मिसाइल विकास कार्यक्रम (IGMDP)
    • इस कार्यक्रम की परिकल्पना प्रसिद्ध वैज्ञानिक डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम द्वारा की गई थी ताकि भारत मिसाइल प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता प्राप्त कर सके।
    • इसे भारत सरकार से 26 जुलाई, 1983 को स्वीकृति मिली।
    • इस कार्यक्रम के तहत पाँच मिसाइलें विकसित की गईं:
      • पृथ्वी: सतह से सतह पर मार करने वाली कम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल।
      • अग्नि: सतह से सतह पर मार करने वाली मध्यवर्ती दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल।
      • त्रिशूल: निम्न स्तर पर सतह से हवा में मार करने वाली कम दूरी की मिसाइल।
      • आकाश: सतह से हवा में मार करने वाली मध्यम दूरी की मिसाइल।
      • नाग: तीसरी पीढ़ी की टैंक-रोधी निर्देशित मिसाइल
    • समापन: 8 जनवरी, 2008 को DRDO द्वारा सफलतापूर्वक पूर्ण होने की घोषणा।
  • वर्तमान क्षमताएं
    • मिशन शक्ति (2019):
      • सफल एंटी-सैटेलाइट (ASAT) मिसाइल परीक्षण।
      • भारत को निम्न पृथ्वी कक्षा (LEO) में उपग्रहों को निष्क्रिय करने की क्षमता मिली।
      • भारत यह तकनीक हासिल करने वाला दुनिया का चौथा देश बना।
    • मिशन दिव्यास्त्र:  
      • स्वदेशी अग्नि-5 मिसाइल को MIRV (मल्टीपल इंडिपेंडेंटली टारगेटेड रीएंट्री व्हीकल्स) तकनीक से लैस किया गया।
      • एक ही मिसाइल से कई वारहेड्स दागने की क्षमता।
    • हाइपरसोनिक हथियार: नवंबर 2024 में 1,500 किमी की मारक क्षमता वाली हाइपरसोनिक मिसाइल का सफल परीक्षण किया गया।
    • सफल SFDR-आधारित मिसाइल परीक्षण: भारत SFDR (Solid Fuel Ducted Ramjet) तकनीक विकसित करने वाला पहला देश है। यह तकनीक लंबी दूरी की हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइलों की गति और सटीकता बढ़ाती है। 

हालिया अन्य प्रमुख रक्षा प्रणालियाँ

प्रणाली का नामविवरण और विशेषताएं
MPATGMमैन पोर्टेबल एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल: यह तीसरी पीढ़ी की ‘दागो और भूल जाओ’ मिसाइल है, जो ‘टॉप-अटैक’ और रात्रिकालीन परिचालन क्षमता से लैस है।
VSHORADSअल्प दूरी की वायु रक्षा प्रणाली: कम ऊंचाई वाले हवाई खतरों को बेअसर करने वाली मानव-पोर्टेबल प्रणाली।
NASM-SRनौसैनिक एंटी-शिप मिसाइल (अल्प दूरी): भारत की पहली स्वदेशी हवा से लॉन्च की जाने वाली जहाज-रोधी मिसाइल प्रणाली।
हेलिना (Helina)हेलीकॉप्टर-लॉन्च नाग: सभी मौसमों और दिन/रात में कार्य करने वाली तीसरी पीढ़ी की एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल
QRSAMत्वरित प्रतिक्रिया सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल: सामरिक क्षेत्रों के लिए सभी मौसमों में उपयुक्त मोबाइल वायु-रक्षा प्रणाली।
अस्त्र (Astra)दृश्य सीमा से परे (BVR) हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइल, जो अत्यधिक गतिशील सुपरसोनिक लक्ष्यों को भेदने के लिए डिज़ाइन की गई है।
LCA तेजसस्वदेशी बहुउद्देशीय लड़ाकू विमान जो उन्नत लेजर-निर्देशित बमों और मिसाइलों से लैस है।
उत्तम (Uttam) AESA राडारएक्टिव इलेक्ट्रॉनिकली स्कैन्ड एरे रडार, जिसे विभिन्न प्रकार के लड़ाकू विमानों के लिए अनुकूलित किया जा सकता है।
शक्ति (Shakti)भारतीय नौसेना के लिए विकसित उन्नत इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणाली, जो दुश्मन के रडार का पता लगाने और उन्हें ‘जैम’ (अवरुद्ध) करने के लिए बनाई गई है।
पिनाका (Pinaka)मल्टी-बैरल रॉकेट लॉन्चर (MBRL): एक साथ कई रॉकेट दागने वाली प्रणाली।
सर्वत्र (Sarvatra)सेना द्वारा उपयोग की जाने वाली एक बहुमुखी मोबाइल ब्रिजिंग प्रणाली (अस्थायी पुल निर्माण प्रणाली)।
MRSAMमहत्वपूर्ण संपत्तियों की सुरक्षा के लिए मोबाइल वायु-रक्षा प्रणाली।
स्वाति (Swathi)हथियार खोजने वाला रडार (WLR): दुश्मन की आर्टिलरी के स्थान का सटीक पता लगाने वाली प्रणाली।
AEW&Cहवाई प्रारंभिक चेतावनी और नियंत्रण प्रणाली: विमान-आधारित प्रणाली जो खतरों की पूर्व चेतावनी और नियंत्रण प्रदान करती है।

भारतीय मिसाइल

क्रूज मिसाइल (Cruise Missiles)

निर्भय मिसाइल (Nirbhay Missile)
  • प्रकार: भारत की पहली स्वदेशी रूप से विकसित लंबी दूरी की सबसोनिक क्रूज मिसाइल
  • विकसित: DRDO द्वारा।
  • विशेषताएँ
    • रेंज: 800-1,000 किमी।
    • वॉरहेड: पारंपरिक और नाभिकीय दोनों प्रकार के वारहेड ले जाने में सक्षम।
    • लॉन्च प्लेटफॉर्म: भूमि, वायु, समुद्र – तीनों सशस्त्र बलों द्वारा उपयोग योग्य।
    • प्रणोदन: दो चरण → ठोस रॉकेट बूस्टर + माणिक टर्बोफैन इंजन (क्रूज चरण)।
  • यह अमेरिका की टॉमहॉक मिसाइल के समकक्ष मानी जाती है।
  • नोट: यह अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल नहीं है।
ब्रह्मोस मिसाइल (BrahMos Missile)
  • यह एक सुपरसोनिक, एंटी-शिप और लैंड अटैक क्रूज मिसाइल है।
  • संयुक्त उपक्रम: भारत (50.5%) और रूस (49.5%)
  • नामकरण: भारत की ब्रह्मपुत्र और रूस की मोस्कवा नदियों से लिया गया है।
  • प्रमुख विशेषताएँ
    • रेंज: 290 किमी (कम दूरी), अब 450 किमी (2016 में MTCR सदस्यता के बाद)।
    • गति: 2.8 मैक (सुपरसोनिक)।
    • प्रणोदन: दो चरण वाली मिसाइल (पहले चरण में ठोस प्रणोदक इंजन और दूसरे चरण में तरल रैमजेट)।
    • लॉन्च प्लेटफॉर्म: भूमि, समुद्र, पनडुब्बी, हवा।
    • वॉरहेड: केवल पारंपरिक (200–300 किग्रा), सटीक हमले की क्षमता।
  • फायर एंड फॉरगेट मिसाइलें।
  • निर्यात: भारत ने फिलीपींस को ब्रह्मोस मिसाइल का निर्यात किया है।
ब्रह्मोस के नए संस्करण
  • ब्रह्मोस-NG (नेक्स्ट जनरेशन)
    • ब्रह्मोस का लघु और हल्का संस्करण
    • LCA तेजस जैसे प्लेटफॉर्म से हवाई-लॉन्च के लिए डिजाइन।
    • गति: 3.5 मैक तक।
  • ब्रह्मोस 2.0
    • विकास चरण में
    • रेंज: 500–600 किमी
    • गति: 7 मैक (हाइपरसोनिक)।

अन्य मिसाइल (Other Missiles)

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मिसाइल प्रणाली

प्रकार

विशेषताएँ / विनिर्देश

हवा से हवा (AAM) में मार करने वाली मिसाइल

अस्त्र मिसाइल श्रृंखला

अस्त्र एमके-1 मिसाइल (Astra Mk-1 Missile)
  • अस्त्र भारत की पहली दृश्य-सीमा से परे (BVR) हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइल है जिसे लड़ाकू विमानों पर लगाने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
  • इसे भारतीय वायु सेना के लिए DRDO द्वारा विकसित किया गया और भारत डायनामिक्स लिमिटेड (BDL) द्वारा निर्मित किया गया है (SU-30 और LCA तेजस के लिए)।
  • रेंज – 80-110 किमी
  • गति – 4.5 मैक (लगभग हाइपरसोनिक)
  • गाइडेंस सिस्टम: इनर्शियल + टर्मिनल एक्टिव रडार होमिंग
  • प्रणोदन: सिंगल-पल्स ठोस ईंधन रॉकेट।
अस्त्र एमके-2 मिसाइल
  • रेंज: 140–160 किमी (अनुमानित)
  • प्रणोदन: द्वि-पल्स ठोस ईंधन रॉकेट → इसकी रेंज और मारक क्षमता में वृद्धि।
  • ऑपरेशनल रेडीनेस: 2026 तक अनुमानित।
अस्त्र एमके-3 मिसाइल
  • परियोजना: भारत + रूस (विकासाधीन)
  • रेंज: 20 किमी की ऊँचाई पर 340 किमी, 8 किमी की ऊँचाई पर 190 किमी (अनुमानित)।
  • प्रक्षेपण गति: 0.8 से 2.2 मैक।
  • प्रणोदन:डुअल सॉलिड फ्यूल डक्टेड रैमजेट (SFDR) इंजन → दुनिया की सबसे उन्नत (सबसे लंबी दूरी की) बीवीआर हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइल।
भारतीय सशस्त्र बलों द्वारा प्रयुक्त विदेशी मिसाइल
  • मेटिओर (Meteor) मिसाइल
    • एक उन्नत रडार-गाइडेड, बियॉन्ड-विजुअल-रेंज एयर-टू-एयर मिसाइल (BVRAAM)
    • देश: MBDA कंसोर्टियम के नेतृत्व में यूरोपीय भागीदारों का समूह।
    • रेंज: 150–200+ किमी
    • प्रणोदन: रैमजेट प्रणोदन।
  • पाइथन-5 (इज़राइल) – कम दूरी की, उच्च ऑफ-बोरसाइट क्षमता वाली मिसाइल, तेजस और मिराज-2000 में उपयोग की जाती है।
  • एमआईसीए (फ्रांस) – कम/मध्यम दूरी की मिसाइल, राफेल जेट में उपयोग की जाती है (आईआर + आरएफ सीकर)।

सतह से हवा (SAM) में मार करने वाली मिसाइल(वायु रक्षा प्रणाली में प्रयुक्त की जाती है)

आकाश मिसाइल प्रणाली (Akash Missile System)

  • प्रकार: मध्यम दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल (SAM)।
  • उद्देश्य: हवाई खतरों (जैसे लड़ाकू विमान, क्रूज मिसाइलें आदि) से सुरक्षा प्रदान करना।
  • ईंधन: ठोस-ईंधन रॉकेट मोटर।
  • मारक क्षमता/परास : 25 – 30 किमी।
  • गति: पराध्वनिक (Supersonic) – 2.5 मैक।
  • क्षमताएँ: यह एक साथ कई लक्ष्यों को भेदने में सक्षम है; इसमें ‘राजेन्द्र’ रडार प्रणाली का उपयोग किया जाता है।
  • महत्व: यह लगभग 2,000 वर्ग किमी के क्षेत्र को हवाई सुरक्षा कवच प्रदान करती है; इसकी तुलना अमेरिका की ‘पैट्रियट’ (Patriot) प्रणाली से की जाती है।
  • निर्यात: आर्मेनिया ने 15 प्रणालियों का ऑर्डर दिया है (मूल्य ₹6,000 करोड़)।
  • आकाश मिसाइल के उन्नत संस्करण:
    • आकाश-1S (Akash-1S): यह स्वदेशी सीकर तकनीक के साथ उन्नत किया गया संस्करण है।
    • आकाश प्राइम (Akash Prime): इसमें बेहतर सक्रिय RF सीकर लगा है, जो कम तापमान और अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों (जैसे लद्दाख) के लिए अनुकूलित है।
    • आकाश-NG (Next Generation): 
      • इसकी मारक क्षमता बढ़ाकर 70 किमी कर दी गई है और इसकी प्रतिक्रिया समय में भी सुधार किया गया है।
      • गति: 2.5 से 3.5 मैक।
      • यह प्रणाली रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) द्वारा विकसित की गई है और इसका उत्पादन भारत डायनेमिक्स लिमिटेड (BDL) तथा भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) द्वारा किया जाता है।

त्रिशूल (Trishul) मिसाइल

  • कम दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल
  • रेंज – 9 किमी तक
  • निम्न स्तर के हमले का मुकाबला करने के लिए डिज़ाइन की गई (यह परियोजना डीआरडीओ द्वारा आधिकारिक तौर पर बंद कर दी गई थी)।

QRSAM (क्विक रिएक्शन SAM)

  • मोबाइल (गतिशील), हर मौसम में काम करने वाला, एक साथ कई लक्ष्यों को भेद सकता है।
  • कम दूरी – 25-30 किमी।

VL-SRSAM (ऊर्ध्वाधर प्रक्षेपण लघु दूरी SAM)

  • भारतीय नौसेना हेतु विकसित यह प्रणाली एक कम दूरी की, ऊर्ध्वाधर प्रक्षेपण क्षमता वाली, हर मौसम में कार्यरत वायु रक्षा प्रणाली है। 
  • यह मानव-वाहन योग्य नहीं है और इसे जहाजों से प्रक्षेपित किया जाता है।

बराक-8 मिसाइल प्रणाली (Barak-8 Missile System)

  • बराक-8 भारत और इजरायल द्वारा संयुक्त रूप से विकसित एक उन्नत सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल (SAM) प्रणाली है।
  • संयुक्त विकास: इसे भारत के DRDO और इजराइल के इजराइल एयरोस्पेस इंडस्ट्रीज (IAI) द्वारा विकसित किया गया है।
  • अर्थ: हिब्रू भाषा में ‘बराक’ का अर्थ ‘बिजली’ (Lightning) होता है।
  • उद्देश्य: इसे किसी भी प्रकार के हवाई खतरों से रक्षा के लिए डिज़ाइन किया गया है, जिसमें लड़ाकू विमान, हेलीकॉप्टर, जहाज-रोधी मिसाइल, मानवरहित विमान (UAVs), बैलिस्टिक मिसाइल और क्रूज मिसाइल शामिल हैं।
  • मारक क्षमता: 70 से 100 किलोमीटर।
  • बराक-8 के संस्करण 
  • LR-SAM (लंबी दूरी की SAM): यह नौसैनिक जहाजों से प्रक्षेपित (Ship-launch) किया जाने वाला संस्करण है, जिसकी मारक क्षमता 100 किमी है।
  • MR-SAM (मध्यम दूरी की SAM): यह थल सेना के लिए भूमि से प्रक्षेपित (Land-launch) किया जाने वाला संस्करण है, जिसकी मारक क्षमता 70 किमी है।

XRSAM (विस्तारित दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल)

  • यह प्रोजेक्ट कुशा (Project Kusha – विस्तारित दूरी की वायु रक्षा प्रणाली) का हिस्सा है।
  • उद्देश्य: इसे MR-SAM (70 किमी) और S-400 (400 किमी) प्रणालियों के बीच के अंतर (गैप) को भरने के लिए डिज़ाइन किया गया है। यह लंबी दूरी के हवाई खतरों को नष्ट करने में सक्षम है।

SAMAR (सुनिश्चित प्रतिशोध के लिए सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल)

  • प्रकार: यह कम दूरी की, त्वरित प्रतिक्रिया (Quick-reaction) वाली सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल प्रणाली है।
  • विकास: इसे भारतीय वायु सेना (IAF) द्वारा स्वदेशी रूप से विकसित किया गया है।
  • लक्ष्य: यह कम ऊंचाई वाले हवाई खतरों जैसे लड़ाकू विमानों, हेलीकॉप्टरों और मानवरहित विमानों (UAVs) को निशाना बनाने के लिए बनाई गई है।
  • विशेष विवरण: अगस्त 2024 में आयोजित अभ्यास ‘तरंग शक्ति’ के दौरान SAMAR-1 का प्रदर्शन किया गया था।

वायु से सतह पर मार करने वाली मिसाइल 

  • ब्रह्मोस-A, निर्भय, हेलिना/ध्रुवास्त्र, SANT (स्टैंड-ऑफ एंटी-टैंक), रुद्रम।

विकिरण-रोधी मिसाइल

रुद्रम श्रृंखला मिसाइल (Rudram Series)

रुद्रम-I मिसाइल (NGARM)

  • यह भारत की पहली स्वदेशी रूप से विकसित ‘न्यू जनरेशन एंटी-रेडिएशन मिसाइल’ (NGARM) है।
  • विकास: इसे रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) की हैदराबाद स्थित रक्षा अनुसंधान एवं विकास प्रयोगशाला (DRDL) द्वारा विकसित किया गया है।
  • भूमिका: यह एक विकिरण-रोधी (Anti-radiation) मिसाइल है जिसका मुख्य कार्य दुश्मन की वायु रक्षा प्रणालियों का दमन (SEAD – Suppression of Enemy Air Defenses) करना है। यह दुश्मन के कई प्रकार के सैन्य संसाधनों (जैसे राडार और संचार केंद्रों) को नष्ट या निष्क्रिय कर देती है।
  • प्रकार: यह हवा से सतह पर मार करने वाली मिसाइल (ASM) है। यह ठोस प्रणोदक आधारित है और इसे सुखोई-30 MKI लड़ाकू विमान से लॉन्च किया जाता है।
  • मारक क्षमता: 150 किलोमीटर।

रुद्रम-II (RudraM-II)

  • परीक्षण: DRDO ने 29 मई 2024 को ओडिशा के तट से रुद्रम-II का सफलतापूर्वक उड़ान परीक्षण किया।
  • मारक क्षमता: इसकी मारक क्षमता को बढ़ाकर 350 किलोमीटर कर दिया गया है।
रक्षा प्रौद्योगिकी

पनडुब्बी से प्रक्षेपित बैलिस्टिक मिसाइल (SLBM)

K-मिसाइल परिवार (K-Missile Family)

  • ये DRDO द्वारा विकसित परमाणु सक्षम (Nuclear Capable) पनडुब्बी से प्रक्षेपित बैलिस्टिक मिसाइल (SLBMs) हैं।
  • इनका नामकरण भारत के महान वैज्ञानिक और पूर्व राष्ट्रपति डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम के सम्मान में किया गया है।
  • K-श्रृंखला की मिसाइलें भारत के ‘परमाणु त्रय’ का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं, जो भारत को भूमि, वायु और समुद्र से परमाणु हथियार चलाने की क्षमता प्रदान करती हैं।
  • प्रक्षेपण मंच: इन्हें अरिहंत श्रेणी की परमाणु पनडुब्बियों से प्रक्षेपित किया जाता है।
  • विभिन्न संस्करण
    • K-15 (सागरिका) या B-05LV मिसाइल
      • यह भारत की पहली स्वदेशी SLBM है, जो ठोस-ईंधन और परमाणु क्षमता से लैस है।
      • मारक क्षमता: 750 किमी (अल्प दूरी)।
      • पेलोड: 500 किग्रा।
      • शौर्य मिसाइल (Shaurya Missile) – यह K-15 का भूमि/थल-आधारित (Land-based) संस्करण है।
        • प्रकार: यह सतह से सतह पर मार करने वाली सामरिक (Tactical) मिसाइल है।
        • मारक क्षमता: 750 किमी।
        • पेलोड: 200 किग्रा से 1000 किग्रा (पारंपरिक या परमाणु)।
        • विशेषता: उच्च चालन क्षमता (Maneuverability), जिसके कारण यह एंटी-बैलिस्टिक मिसाइल रक्षा प्रणालियों के विरुद्ध कम संवेदनशील है (अर्थात् इसे रोकना कठिन है)।
    • K-4 मिसाइल 
      • मारक क्षमता: 3,000 से 3,500 किमी।
      • पेलोड: 1,000 किग्रा।
    • K-5 और K-6: ये मिसाइलें वर्तमान में विकासाधीन हैं, जिनकी मारक क्षमता 5,000 से 6,000 किमी के बीच होगी।

टैंक-रोधी मिसाइल (Anti-Tank Missiles)

नाग मिसाइल परिवार (Nag Family Missiles)

  • यह तीसरी पीढ़ी की टैंक-रोधी निर्देशित मिसाइल (ATGM) है।
  • तकनीक: “दागो और भूल जाओ”, जिसमें ‘टॉप-अटैक’ (ऊपर से प्रहार करने की) क्षमता है।
  • मारक क्षमता: 4-7 किमी (प्लेटफॉर्म के आधार पर)।
  • नमिका (NAMICA): नाग मिसाइल वाहक (Nag Missile Carrier), जो एक टैंक जैसा वाहन है।
  • प्रमुख संस्करण:
    • प्रोस्पिना (Prospina): नाग ATGM का थल-हमला (भूमि आधारित) संस्करण।
    • हेलिना (Helina): नाग मिसाइल का हेलीकॉप्टर से प्रक्षेपित होने वाला थल सेना संस्करण।
    • ध्रुवास्त्र (Dhruvastra):हेलीकॉप्टर से प्रक्षेपित होने वाला वायु सेना संस्करण।
      • यह प्रणाली सभी मौसमों में दिन-रात कार्य करने में सक्षम है।
      • यह पारंपरिक कवच (Armor) और विस्फोटक प्रतिक्रियाशील कवच (Explosive Reactive Armor – ERA) वाले युद्धक टैंकों को नष्ट कर सकती है।
      • यह ‘डायरेक्ट हिट’ (सीधा प्रहार) और ‘टॉप अटैक’ (ऊपर से हमला) दोनों मोड में लक्ष्य को भेद सकती है।

SANT (स्टैंड-ऑफ एंटी-टैंक) मिसाइल

  • यह हेलिना (HELINA) का स्वदेशी चौथी पीढ़ी का उन्नत संस्करण है, जिसे DRDO द्वारा विकसित किया गया है। 
  • इसकी मारक क्षमता 10 किमी तक है।

MPATGM (मैन-पोर्टेबल एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल)

  • यह पैदल सेना के सैनिकों द्वारा उपयोग के लिए नाग मिसाइल का पोर्टेबल (वहन योग्य) संस्करण है। 
  • मारक क्षमता: 2.5 किमी तक।

SAMHO (सेमी-एक्टिव मिशन होमिंग) ATGM

  • प्लेटफ़ॉर्म: इसे अर्जुन टैंक के लिए डिज़ाइन किया गया है और इसे T-90 टैंकों के अनुकूल भी बनाया जाएगा।
  • लक्ष्य: यह टैंकों और कम ऊंचाई पर उड़ने वाले हमलावर हेलिकॉप्टरों के विरुद्ध प्रभावी है।
  • मारक क्षमता: 5 किमी।

मिलन (MILAN)

  • यह सेना के लिए एक टैंक-रोधी निर्देशित मिसाइल है, जिसे फ्रांस से अधिग्रहित किया जाना है।

निर्देशन तकनीक के आधार पर विदेशी ATGM मिसाइल

  • कमांड-निर्देशित (Command-Guided): TOW (अमेरिका), कोर्नेट/Kornet (रूस)।
  • लेजर-निर्देशित (Laser-Guided): हेलफायर/Hellfire (अमेरिका), HOT (फ्रांस)।
  • अवरक्त-निर्देशित (Infrared-Guided): जेवलिन/Javelin (अमेरिका), स्पाइक/Spike (इजराइल)।

सतह से सतह पर मार करने वाली मिसाइल (SSM)

पृथ्वी श्रृंखला की मिसाइल (Prithvi Series Missiles)

  • यह एक सामरिक युद्धक्षेत्र (Tactical battlefield) सतह से सतह पर मार करने वाली कम/अल्प दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल (SRBM) है। 
  • यह परमाणु वारहेड ले जाने में सक्षम है।
  • इसके तीन संस्करण हैं:
मानक पृथ्वी Iपृथ्वी IIपृथ्वी III
रेंज150 Km250 Km350 Km
पेलोड1000 Kg500 Kg1000 Kg
  • प्रहार (Prahaar): इसे पृथ्वी-I के स्थान पर प्रतिस्थापित करने के लिए बनाया गया है।
    • संस्करण:
      • प्रगति (Pragati – निर्यात संस्करण): मारक क्षमता 170 किमी।
      • प्रणाश (Pranash – उन्नत सामरिक संस्करण): मारक क्षमता 200 किमी।
      • धनुष (Dhanush): पृथ्वी-I और पृथ्वी-II श्रेणी की मिसाइलों का नौसैनिक संस्करण

अग्नि श्रृंखला की मिसाइल (Agni Series Missiles)

अग्नि मिसाइलों का विकास:

अग्नि मिसाइल भारत की रणनीतिक निवारक (Strategic Deterrence) शक्ति का आधार हैं।

संस्करणमारक क्षमतामुख्य विशेषताएंवर्तमान स्थिति
अग्नि-I700–1,200 किमी(SRBM)अल्प दूरी (SRBM), एकल-चरण, ठोस-ईंधनपरिचालन में (सेना)
अग्नि-II2,000–3,500 किमी(MRBM)मध्यम दूरी (MRBM), दो-चरण, रेल/सड़क मोबाइलपरिचालन में
अग्नि-III3,000 – 3,500 किमी(IRBM)मध्यवर्ती दूरी (IRBM), अधिक भारी पेलोड, दो-चरणपरिचालन में
अग्नि-IV~4,000 किमी(IRBM)उन्नत कंपोजिट सामग्री, रिंग-लेजर जाइरोस्कोपपरिचालन में
अग्नि-V5,000–5,500 किमी(ICBM)अंतरमहाद्वीपीय (ICBM), तीन-चरण, कनस्तरीकृत2018 से परिचालन में
अग्नि-V MIRV 5,000+ किमीएक साथ कई लक्ष्यों पर प्रहार करने की तकनीक (MIRVs)सफल परीक्षण (2024)
अग्नि-VI 6,000–8,000 किमी(‘सूर्या’ कोड नाम)MIRV/MARV सक्षम, पनडुब्बी से प्रक्षेपण करने की क्षमता निर्माणाधीन / भविष्य
अग्नि-P (प्राइम)1,000–2,000 किमी(MRBM)अगली पीढ़ी की, परमाणु-सक्षम, हल्की, कनस्तरीकृत, अधिक सटीकता वाली।परीक्षण किया गया, शामिल करने की योजना 
मिशन दिव्यास्त्र 2024 (Mission Divyastra)
  • यह मिसाइल प्रौद्योगिकी, विशेष रूप से MIRV तकनीक से संबंधित है।
  • भारत ने अग्नि-V मिसाइल का सफल परीक्षण किया है जो एक साथ कई लक्ष्यों पर सटीक निशाना साधने के लिए कई वारहेड ले जाने में सक्षम है।
  • इसे DRDO द्वारा क्रियान्वित किया गया है।
  • अग्नि-V भारत की पहली MIRV-सक्षम मिसाइल है (मारक क्षमता > 5,000 किमी)।
रक्षा प्रौद्योगिकी
MIRV तकनीक (Multiple Independently Targetable Re-entry Vehicle)
  • यह तकनीक एक ही मिसाइल के माध्यम से सैकड़ों किलोमीटर दूर स्थित विभिन्न लक्ष्यों पर प्रहार कर सकती है।
  • यह तकनीक यह सुनिश्चित करेगी कि एक ही मिसाइल विभिन्न स्थानों पर कई वारहेड्स को तैनात कर सकती है।
  • MIRV युक्त मिसाइल के वारहेड को अलग-अलग गति और अलग-अलग दिशाओं में छोड़ा जा सकता है।
  • विश्व परिदृश्य: वर्तमान में अमेरिका, रूस, चीन (डोंग फेंग-41), फ्रांस (M51) और ब्रिटेन (ट्राइडेंट-II) के पास यह तकनीक है।
    • अबाबील (Ababeel): पाकिस्तान की MIRV सक्षम मध्यम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल है।
    • इजराइल के पास भी इस तकनीक के होने का संदेह है।
    • सूर्या (Surya)  मिसाइल: भारत 10,000 किमी (विकासाधीन) 3000 किलोग्राम MIRV वारहेड्स।

प्रलय मिसाइल (Pralay Missile)

  • एक स्वदेशी सामरिक अर्ध-बैलिस्टिक मिसाइल (पारंपरिक क्रूज़ और बैलिस्टिक मिसाइल का मिश्रण) है, जिसे इमारत अनुसंधान केंद्र (RCI), हैदराबाद (DRDO) द्वारा विकसित किया गया है।
  • यह एक कम दूरी की सतह से सतह पर मार करने वाली त्वरित प्रतिक्रिया मिसाइल है, जिसे परंपरागत (गैर-परमाणु) सटीक हमलों के लिए डिज़ाइन किया गया है।
  • मुख्य विशेषताएँ
    • रेंज: 150–500 किमी
    • पेलोड: 350–1000 किग्रा (फ्रैगमेंटेशन, PCB, रनवे डिनायल)
    • गति: टर्मिनल वेलोसिटी – मैक 6.1 तक
    • गतिशीलता: रोड-मोबाइल, कनस्तरीकृत प्रक्षेपण प्रणाली।
    • निर्देशन: रडार सीकर के साथ जड़त्वीय नौवहन प्रणाली (INS) और हवा में पैंतरेबाज़ी करने की क्षमता (MaRV – Maneuverable Re-entry Vehicle)।
    • प्रणोदन: ठोस ईंधन आधारित।
  • हालिया विकास
    • 28–29 जुलाई 2025 को ओडिशा से सफल उड़ान परीक्षण
    • परीक्षणों ने इसकी न्यूनतम और अधिकतम सीमा, निर्देशन सटीकता और विश्वसनीयता की पुष्टि की है।
  • रणनीतिक/सामरिक महत्व
    • भारत की गैर-परमाणु स्ट्राइक क्षमता की कमी को पूरा करता है।
    • युद्धक्षेत्र में प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है और इंटीग्रेटेड रॉकेट फोर्स की परिकल्पना को समर्थन देता है।
    • चीनी (DF-12) और पाकिस्तानी (Nasr) अल्प-दूरी मिसाइल प्रणालियों का मुकाबला करने में सक्षम।
    • उन्नत हथियार प्रणालियों में आत्मनिर्भर भारत को बढ़ावा।

मल्टी-बैरल रॉकेट लॉन्चर (Multi-Barrel Rocket Launcher – MBRL)

पिनाका MBRL (Pinaka MBRL)

  • पिनाका एक मल्टी-बैरल रॉकेट लॉन्चर (MBRL) प्रणाली है।
  • MBRL एक ऐसी तोपखाना प्रणाली (Artillery system) है जो दुश्मन के ठिकानों पर भारी बमबारी करने के लिए बहुत कम समय में एक के बाद एक कई रॉकेट दागने में सक्षम है।
  • विकास: इसे शस्त्रागार अनुसंधान एवं विकास स्थापना (ARDE), पुणे और उच्च ऊर्जा सामग्री अनुसंधान प्रयोगशाला (HEMRL) द्वारा विकसित किया गया है (दोनों DRDO की प्रयोगशालाएं हैं)।
  • ऐतिहासिक महत्व: इसका पहली बार उपयोग कारगिल युद्ध के दौरान किया गया था, जहाँ इसने पहाड़ी चोटियों पर मौजूद पाकिस्तानी सेना के ठिकानों को सफलतापूर्वक नष्ट कर दिया था।
  • क्षमता: पिनाका मात्र 44 सेकंड में 12 रॉकेट दाग सकता है और इसे तीव्र, बड़े पैमाने पर गोलाबारी के लिए डिज़ाइन किया गया है।
  • मारक क्षमता (Range): 60-75 किमी।
  • निर्यात: भारत ने आर्मेनिया को पिनाका MBRL प्रणाली के निर्यात को मंजूरी दे दी है, जो स्वदेशी रक्षा निर्यात में एक बड़ा मील का पत्थर है।
  • विभिन्न संस्करण:
    • निर्देशित पिनाका (Mk-II): इसकी मारक क्षमता 75-90 किमी है।
    • पिनाका लंबी दूरी का निर्देशित रॉकेट (LRGR-120):
      • यह उन्नत सटीक निर्देशित (Precision Guided) प्रणाली है।
      • मारक क्षमता: 120 किमी।
रक्षा प्रौद्योगिकी

सूर्यास्त्र रॉकेट प्रणाली (Suryastra Rocket System)

  • यह भारत की पहली स्वदेशी यूनिवर्सल मल्टी-कैलिबर लॉन्ग-रेंज (सार्वभौमिक बहु-क्षमता वाली लंबी दूरी की) रॉकेट लॉन्चर प्रणाली है।
  • क्षमता: यह 150 किमी और 300 किमी की दूरी पर सटीक सतह से सतह पर प्रहार करने में सक्षम है।
  • बहुमुखी प्रतिभा: एक ही प्लेटफॉर्म/मंच पर विभिन्न प्रकार के रॉकेट और मिसाइल प्रकारों को एकीकृत किया जा सकता है।
  • निर्माता: NIBE लिमिटेड (भारत)।
  • तकनीकी आधार: यह इजरायल की PULS (प्रिसाइज एंड यूनिवर्सल लॉन्चिंग सिस्टम) तकनीक पर आधारित है।

अन्य प्रमुख MBRL प्रणालियाँ

  • स्मर्च (Smerch): भारत द्वारा उपयोग की जाने वाली प्रणाली (रूस द्वारा प्रदत्त)। यह अपनी भारी गोलाबारी क्षमता के लिए जानी जाती है।
  • हिमार्स (HIMARS): ‘हाई मोबिलिटी आर्टिलरी रॉकेट सिस्टम’ (उच्च गतिशीलता तोपखाना रॉकेट प्रणाली)। यह यूक्रेन युद्ध के दौरान चर्चा में रही (अमेरिका द्वारा प्रदत्त)।

जहाज-रोधी मिसाइल (Anti-Ship Missile)

NASM (नौसैनिक जहाज-रोधी मिसाइल)

NASM-SR (अल्प दूरी की नौसैनिक जहाज-रोधी मिसाइल)

  • विकास: इसे DRDO द्वारा भारतीय नौसेना के लिए विकसित किया गया है।
  • निर्माता: अडानी डिफेंस एंड एयरोस्पेस।
  • उद्देश्य: यह भारतीय नौसेना के लिए पहली स्वदेशी हवा से लॉन्च की जाने वाली जहाज-रोधी मिसाइल है, जिसे ‘सी ईगल’ (Sea Eagle) मिसाइल को प्रतिस्थापित करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
  • मारक क्षमता (Range): 55 किमी।

NASM-MR (मध्यम दूरी की नौसैनिक जहाज-रोधी मिसाइल)

  • उद्देश्य: इसे छोटे से मध्यम आकार के युद्धपोतों (जैसे फ्रिगेट, कॉर्वेट और विध्वंसक/डिस्ट्रॉयर) के विरुद्ध उपयोग के लिए डिज़ाइन किया गया है।
  • संस्करण (Variants):
    • हवा से लॉन्च संस्करण: मारक क्षमता 290 किमी (180 मील)।
    • जहाज से लॉन्च संस्करण: मारक क्षमता 350 किमी (220 मील)।
    • पनडुब्बी से लॉन्च संस्करण: मारक क्षमता 100 किमी से अधिक (62 मील)।

लंबी दूरी की जहाज-रोधी मिसाइल (LRAShM)

  • यह लंबी दूरी के नौसैनिक लक्ष्यों के लिए भारत की पहली स्वदेशी हाइपरसोनिक ग्लाइड मिसाइल है।
  • विकास: भारतीय नौसेना के लिए DRDO द्वारा विकसित।
  • उद्देश्य: समुद्री निवारक क्षमता में वृद्धि, A2/AD (एंटी-एक्सेस/एरिया डिनायल) क्षमता को मजबूत करना और सुरक्षित दूरी से विमानवाहक पोत स्ट्राइक समूहों को निष्क्रिय करना।
  • प्रमुख विशेषताएं (Key Specs):
    • गति: अति-पराध्वनिक (Hypersonic) – औसत गति 5 मैक से अधिक, अधिकतम 10 मैक के करीब।
    • मारक क्षमता: लगभग 1,500 किमी।
    • डिज़ाइन: बूस्ट-ग्लाइड (प्रक्षेपण के बाद वायुमंडल में तैरते हुए लक्ष्य की ओर बढ़ना)।
    • निर्देशन:INS (जड़त्वीय नौवहन प्रणाली) + उपग्रह + सक्रिय राडार सीकर।

हाइपरसोनिक मिसाइल (Hypersonic Missiles)

HSTDV (हाइपरसोनिक टेक्नोलॉजी डिमॉन्स्ट्रेटर व्हीकल)

  • यह एक प्रौद्योगिकी प्रदर्शक वाहन (Technology demonstrator) है।
  • गति: 6 मैक (ध्वनि की गति से 6 गुना अधिक)।
  • इंजन:स्क्रैमजेट (Scramjet) इंजन, जिसका सफल परीक्षण 2020 में किया गया था।

प्रोजेक्ट विष्णु (ET-LDHCM)

  • यह विस्तारित प्रक्षेप पथ – लंबी अवधि की हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइल है, जिसका परीक्षण जुलाई 2025 में किया गया।
  • प्रकार: हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइल (सतह से सतह, हवा से लॉन्च और समुद्र से लॉन्च; यह एक सुरक्षित दूरी वाले सामरिक/रणनीतिक हथियार के रूप में कार्य कर सकती है)।
  • विकास: इसे DRDO द्वारा ‘प्रोजेक्ट विष्णु’ के तहत विकसित किया गया है।
  • विशिष्टताएँ (Specifications):
    • गति: 8 मैक (लगभग 11,000 किमी/घंटा)।
    • मारक क्षमता (Range): 1,500–2,500 किमी (लंबी दूरी)।
    • वारहेड: पारंपरिक/परमाणु, 1,000–2,000 किग्रा।
    • मंच (Platform): थल, नौसेना और वायु सेना।
    • प्रमुख विशेषताएं:
      • प्रणोदन: स्क्रैमजेट (Scramjet) प्रणोदन तकनीक।
      • उड़ान: कम ऊंचाई पर उड़ान भरने की क्षमता (राडार से बचने के लिए)।
      • पैंतरेबाज़ी: मार्ग-परिवर्तन (Route-maneuvering) और अत्यधिक चालनक्षम
      • गोपनीयता: राडार पर कम दिखाई देने की विशेषता (Low radar signature)।

SFDR (सॉलिड फ्यूल डक्टेड रैमजेट)

  • यह हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइलों के लिए एक उन्नत प्रणोदन तकनीक है।
  • गति: 4–5 मैक (पराध्वनिक गति)।
  • महत्व: यह तकनीक अस्त्र Mk-3 जैसी दृश्य सीमा से परे (BVR) मार करने वाली मिसाइलों को लंबी दूरी तक प्रहार करने में सक्षम बनाती है।

ध्वनि मिसाइल (Dhvani Missile)

  • प्रकार: यह एक हाइपरसोनिक ग्लाइड वाहन (HGV) मिसाइल है।
  • विकास: इसे रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO), द्वारा विकसित किया गया है।
  • उड़ान प्रक्षेप पथ: इसे पहले अत्यधिक ऊंचाई तक प्रक्षेपित किया जाता है, जिसके बाद यह लक्ष्यों की ओर अति-पराध्वनिक (Hypersonic) गति से तैरते हुए (Glide) बढ़ती है।
  • गति: 6 मैक से अधिक (लगभग 7,400 किमी/घंटा)।
  • मारक क्षमता: अनुमानित 6,000–10,000 किमी (यह भारत की सबसे लंबी दूरी की प्रणालियों में से एक है)।
  • प्रणोदन प्रणाली: दो चरणों वाली प्रणाली:
    • प्रथम चरण: ठोस रॉकेट बूस्टर (शुरुआती ऊंचाई और गति के लिए)।
    • द्वितीय चरण: स्क्रैमजेट इंजन या हाइपरसोनिक ग्लाइड वाहन।
  • लक्ष्य क्षमता:थल और समुद्री लक्ष्यों पर सटीक प्रहार करने में सक्षम।

चर्चा में रही मिसाइल (Missiles in the News)

स्कैल्प मिसाइल (SCALP/स्टॉर्म शैडो)

  • यह हवा से लॉन्च की जाने वाली लंबी दूरी की क्रूज मिसाइल है।
  • इसे ब्रिटेन (ब्रिटिश एयरोस्पेस) और फ्रांस (मात्रा) द्वारा संयुक्त रूप से विकसित किया गया था; वर्तमान में इसका उत्पादन MBDA द्वारा किया जाता है।
  • इसे ब्रिटेन में ‘स्टॉर्म शैडो’ (Storm Shadow) और फ्रांस में ‘स्कैल्प ईजी’ (SCALP EG) कहा जाता है।
  • मुख्य विशेषताएँ
    • मारक क्षमता: 250 किमी (MTCR प्रतिबंधों के कारण निर्यात संस्करण की सीमा सीमित) से 500 किमी तक।
    • वारहेड: 450 किग्रा का BROACH (बॉम्ब रॉयल ऑर्डिनेंस ऑगमेंटेड चार्ज) → यह ‘पेनिट्रेटर’ (भेदने वाला) और ‘ब्लास्ट’ (विस्फोटक) तकनीक का मिश्रण है।
    • प्रणोदन: टर्बोजेट इंजन।
    • गति: सबसोनिक (Subsonic) – ध्वनि की गति से कम।
    • स्टील्थ: रडार से बचने के लिए इसका राडार क्रॉस-सेक्शन (Radar cross-section) बहुत कम रखा गया है।
    • प्लेटफार्म: यह राफेल, यूरोफाइटर टाइफून और मिराज-2000 लड़ाकू विमानों के साथ संगत है।
    • परिचालन भूमिका: इसे अत्यधिक मजबूत और उच्च मूल्य वाले लक्ष्यों जैसे बंकरों, वायुसेना ठिकानों और कमांड सेंटरों को नष्ट करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
  • भारत द्वारा इसे पहली बार 2020 में शामिल किया गया (2016 के राफेल सौदे के हिस्से के रूप में)।
  • हालिया संदर्भ: हाल ही में, भारत ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान स्कैल्प मिसाइलों का उपयोग किया।

ओरेश्निक (Oreshnik) हाइपरसोनिक मिसाइल

  • रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने ओरेश्निक मिसाइल के उत्पादन और 2025 के अंत तक बेलारूस में इसे तैनात करने की योजना की घोषणा की है।
  • प्रकार: हाइपरसोनिक मध्यवर्ती दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल (IRBM)
  • गति: 10 मैक (ध्वनि की गति से 10 गुना अधिक)।
  • मारक क्षमता (Range): लगभग 5,000 किमी (3,100 मील)।

RS-28 सरमत ICBM (Satan-2)

  • अमेरिका-रूस के बीच बढ़ते तनाव के बीच रूस की RS-28 सरमत ICBM चर्चा में है, जिसे नाटो (NATO) द्वारा “सैटन-2” (Satan-2) कोड नाम दिया गया है।
  • विशेषता: यह विश्व की सबसे भारी (208 टन) अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल है।
  • मारक क्षमता (Range): 18,000 किमी।
  • गति: लगभग 25,500 किमी/घंटा (~20 मैक)।

खुर्रमशहर-5 (Khorramshahr-5)

  • रिपोर्टों से संकेत मिलता है कि ईरान ने अपनी पहली ICBMखुर्रमशहर-5 विकसित कर ली है या इसके परीक्षण की तैयारी कर रहा है।
  • मारक क्षमता: ~12,000 किमी → यह विभिन्न महाद्वीपों में लक्ष्यों को भेदने में सक्षम है।

AMRAAM मिसाइल

  • अमेरिका ने रेथियॉन टेक्नोलॉजीज के साथ एक संशोधित हथियार अनुबंध में पाकिस्तान को शामिल किया है, जिसके तहत AIM-120 AMRAAM (उन्नत मध्यम दूरी की हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइल) की आपूर्ति की जाएगी।

टारपीडो (Torpedoes)

  • टारपीडो स्व-प्रणोदित (Self-propelled) हथियार हैं जिनमें एक वारहेड (आयुध) लगा होता है। इनका उपयोग जल की सतह के नीचे या सतह पर किया जा सकता है।
  • SMART परीक्षण:‘सुपरसोनिक मिसाइल-असिस्टेड रिलीज ऑफ टारपीडो’ (SMART) प्रणाली का सफल उड़ान परीक्षण 1 मई, 2024 को ओडिशा के तट पर स्थित डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम द्वीप से किया गया।
रक्षा प्रौद्योगिकी

SMART (सुपरसोनिक मिसाइल-सहायता प्राप्त टारपीडो विमोचन प्रणाली)

  • यह अगली पीढ़ी की मिसाइल-आधारित हल्के वजन वाली टारपीडो वितरण प्रणाली है।
  • विकास: इसका डिज़ाइन और विकास DRDO (रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन) द्वारा किया गया है।
  • उद्देश्य: भारतीय नौसेना की पनडुब्बी-रोधी युद्ध (Anti-submarine warfare) क्षमता को बढ़ाना, विशेष रूप से हल्के वजन वाले टारपीडो की पारंपरिक मारक क्षमता से बहुत आगे तक।
  • तकनीकी विवरण: यह एक कनस्तरीकृत मिसाइल प्रणाली है, जो निम्नलिखित उन्नत उप-प्रणालियों से मिलकर बनी है: दो-चरणीय ठोस प्रणोदन प्रणाली, इलेक्ट्रोमैकेनिकल एक्चुएटर प्रणाली, सटीक जड़त्वीय नौवहन प्रणाली।
  • प्रक्षेपण विधि: इस मिसाइल को भूमि-आधारित मोबाइल लॉन्चर से लॉन्च किया जाता है।

मारीच (Maareech) 

  • यह एक उन्नत टारपीडो डिकोय प्रणाली (Advanced Torpedo Decoy System – ATDS) है, जिसे सभी अग्रिम पंक्ति के युद्धपोतों से दागा जा सकता है।
  • इसे DRDO की प्रयोगशालाओं (NSTL और NPOL) द्वारा डिजाइन और विकसित किया गया है।
  • इसका उत्पादन भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) द्वारा किया जाता है, जो एक रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र का उपक्रम (PSU) है।
  • कार्यप्रणाली: ‘मारीच’ दुश्मन की ओर से आने वाले टारपीडो का पता लगाता है, उसकी स्थिति निर्धारित करता है और नौसैनिक जहाज की सुरक्षा के लिए प्रतिकार (Countermeasures) लागू करता है। यह दुश्मन के टारपीडो को भ्रमित कर जहाज से दूर ले जाता है।

वरुणास्त्र (Varunastra)

  • यह एक उन्नत, पनडुब्बी-रोधी भारी वजन वाला टारपीडो (Heavyweight Torpedo) है।
  • इसे DRDO की नौसेना विज्ञान और तकनीकी प्रयोगशाला (NSTL) द्वारा विकसित किया गया है।
  • विशेषता: यह पानी के भीतर अत्यधिक गहराई पर स्थित पनडुब्बियों को नष्ट करने की क्षमता रखता है और इसमें जीपीएस (GPS) आधारित नेविगेशन की सुविधा भी है।

उन्नत हल्का टारपीडो ‘श्येन’ (Advanced Light Torpedo Shyena)

  • यह भारत का पहला स्वदेशी हल्का पनडुब्बी-रोधी टारपीडो है।
  • इसे DRDO की NSTL प्रयोगशाला द्वारा विकसित किया गया है।
  • इसका नाम अग्नि के ‘दिव्य बाज’ के नाम पर रखा गया है।
  • उपयोग: इसे जहाजों और हेलीकॉप्टरों दोनों से प्रक्षेपित किया जा सकता है।

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