राजस्थान काश्तकारी अधिनियम, 1955 की धारा 5(2) के अनुसार, “कृषि” (Agriculture) शब्द का अर्थ निम्नलिखित गतिविधियों से है:
- उद्यान कृषि (Horticulture)
- पशु प्रजनन (Cattle breeding)
- डेयरी फार्मिंग (Dairy farming)
- मुर्गी पालन (Poultry farming)
- वानिकी विकास (Forestry development)
इस परिभाषा में कृषि को व्यापक रूप से लिया गया है, जिसमें केवल पारंपरिक खेती-बाड़ी ही नहीं, बल्कि संबंधित आर्थिक गतिविधियाँ जैसे बागवानी, पशुपालन, डेयरी, मुर्गीपालन और वानिकी भी शामिल हैं। यह परिभाषा काश्तकारी अधिकारों, लगान निर्धारण और भूमि उपयोग के संदर्भ में महत्वपूर्ण है।
राजस्थान काश्तकारी अधिनियम, 1955 की धारा 16 के अनुसार, निम्नलिखित भूमियों पर खातेदारी अधिकार (Khatedari Rights) प्राप्त नहीं होते हैं (Notwithstanding anything contained in the Act):
- चारागाह भूमि (Pasture Land): पशुओं के चरने के लिए आरक्षित भूमि। उदाहरण – गांव की सामुदायिक चारागाह भूमि।
- नदी या तालाब की तली में आकस्मिक या कभी-कभी की जाने वाली खेती की भूमि: नदी या तालाब के सूखे बिस्तर में मौसमी खेती। उदाहरण – नदी किनारे की बाढ़ प्रभावित भूमि।
- जल से ढकी भूमि जो सिंघाड़ा या समान उत्पादन के लिए उपयोग होती है: जलमग्न भूमि। उदाहरण – झील या तालाब में सिंघाड़ा की खेती।
- स्थानांतरित या अस्थिर खेती वाली भूमि (Shifting or Unstable Cultivation): जहां खेती बार-बार स्थान बदलती है। उदाहरण – पर्वतीय क्षेत्रों में झूम खेती।
- राज्य सरकार द्वारा स्वामित्व एवं रखरखाव वाले बागों की भूमि (Gardens owned and maintained by State Government): सरकारी उद्यान। उदाहरण – सरकारी फलोद्यान या वनस्पति उद्यान।
काश्तकार की ज़मीन के संदर्भ में, “सुधार” (Improvement) का मतलब किसी भी ऐसे काम या निर्माण से है जो ज़मीन की कीमत को काफ़ी हद तक बढ़ा देता है, और साथ ही उसके कृषि के उद्देश्य के भी अनुरूप रहता है।
सुधार के मुख्य घटक:
- ढांचागत विस्तार: किरायेदार द्वारा रहने के घर, पशुओं के बाड़े, गोदाम, या अन्य कृषि संबंधी इमारतों का निर्माण।
- ज़मीन और जल प्रबंधन: सिंचाई (कुएं, तालाब, नहरें), जल निकासी, बाढ़ से सुरक्षा, और ज़मीन को खेती लायक बनाने (समतल करना या सीढ़ीदार बनाना) के कार्य।
- रखरखाव और उन्नयन: मौजूदा कामों में बड़े बदलाव, नवीनीकरण, या पुनर्निर्माण (सामान्य मरम्मत को छोड़कर)।
- अपवाद: खेती के सामान्य कामकाज के दौरान किए गए अस्थायी काम (जैसे अस्थायी कुएं, पानी की नहरें, मेड़ें, बाड़े) को सुधार की श्रेणी में नहीं रखा जाता।
- उदाहरण:
- कृषि के उद्देश्यों के लिए पानी के भंडारण, आपूर्ति, या वितरण हेतु मेड़ें, तालाब, कुएं, पानी की नहरें और अन्य निर्माण कार्य करना।
- ज़मीन को बाढ़, कटाव या पानी से होने वाले नुकसान से बचाने के लिए जल निकासी संबंधी निर्माण कार्य करना।
- ज़मीन को खेती लायक बनाना, साफ़ करना, बाड़ लगाना, समतल करना, या सीढ़ीदार बनाना।
- ज़मीन के ठीक आस-पास (गांव की आबादी वाली जगह से अलग) ऐसी इमारत का निर्माण करना जो उस ज़मीन के सुविधाजनक या फायदेमंद इस्तेमाल के लिए ज़रूरी हो।
- ऊपर बताए गए किसी भी काम का नवीनीकरण या पुनर्निर्माण करना।
महत्वपूर्ण बात: सुधार केवल कृषि कार्यों के लिए होना चाहिए, न कि विलासिता (luxury) के लिए। उदाहरण के लिए, एक काश्तकार इस धारा के तहत ‘सुधार’ के रूप में एक लक्जरी विला का निर्माण नहीं कर सकता, क्योंकि यह कृषि उद्देश्य को पूरा नहीं करता।
