राजस्थान सरकार ने केंद्र सरकार की योजनाओं के साथ समन्वय कर किसानों के हित में बीज से बाजार तक समग्र सहायता प्रदान करने वाली अनेक योजनाएँ शुरू की हैं, जिनका लक्ष्य विकसित राजस्थान @2047 है।
1. इनपुट एवं उत्पादन सहायता
- मुख्यमंत्री बीज स्वावलंबन योजना: किसानों को अपने खेत पर गुणवत्तापूर्ण बीज उत्पादन के लिए प्रोत्साहन। छोटे/सीमांत किसानों को 50% सब्सिडी + निःशुल्क मिनीकिट।
- मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना एवं गोवर्धन जैविक उर्वरक योजना: मिट्टी परीक्षण तथा वर्मीकम्पोस्ट इकाई पर 50% सब्सिडी (अधिकतम ₹10,000)। जैविक खेती को बढ़ावा (2047 तक >25% क्षेत्र लक्ष्य)।
- किसान क्रेडिट कार्ड एवं राजस्थान सहकारी गोपाल क्रेडिट कार्ड: शून्य ब्याज पर फसली ऋण तथा डेयरी किसानों के लिए ₹1 लाख तक ब्याज-मुक्त ऋण।
2. जोखिम प्रबंधन एवं बीमा
- प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY): प्राकृतिक आपदाओं, कीट एवं रोग से फसल हानि की सुरक्षा।
3. प्रौद्योगिकी एवं विस्तार सेवाएँ
- नमो ड्रोन दीदी योजना: महिला स्वयं सहायता समूहों को ड्रोन पर 80% सब्सिडी। सटीक छिड़काव एवं महिला सशक्तिकरण।
- कृषि क्लीनिक: हर जिले में मृदा परीक्षण, फसल सलाह एवं कीट प्रबंधन।
- कृषि अवसंरचना कोष (AIF): गोदाम, कोल्ड स्टोरेज एवं प्रसंस्करण इकाइयों पर 3% ब्याज सब्सिडी।
4. कटाई उपरांत प्रबंधन एवं प्रसंस्करण
- प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यम औपचारिकीकरण योजना (PM-FME): व्यक्तिगत इकाइयों को 35% पूंजी सब्सिडी (अधिकतम ₹10 लाख)। ODOP उत्पादों, ब्रांडिंग एवं सामान्य अवसंरचना पर जोर।
- सौर फसल सुखाने वाले यंत्र: कटाई उपरांत हानि कम करने के लिए सब्सिडी।
5. विपणन एवं मूल्य आश्वासन
- ई-नाम (e-NAM): राजस्थान में ~173 मंडियों का एकीकरण। पारदर्शी ऑनलाइन व्यापार, बेहतर मूल्य निर्धारण।
- राजफेड एवं कृषि उपज मंडी समिति (KUMS): एमएसपी पर खरीद, वैज्ञानिक भंडारण।
- कृषक उपहार योजना: ई-नाम के माध्यम से बिक्री पर गिफ्ट कूपन।
6. क्षमता निर्माण एवं समावेशी विकास
- कृषि क्लीनिक, पशु/कृषि सखी (राजीविका), महिला-प्रधान प्रसंस्करण केंद्र।
- अनुसूचित जाति/जनजाति, महिलाओं एवं छोटे किसानों पर विशेष ध्यान।
