इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) से तात्पर्य एक एकीकृत प्रणाली से है, जिसमें भौतिक वस्तुएँ (साधारण घरेलू वस्तुओं से लेकर उन्नत औद्योगिक उपकरणों तक) शामिल होती हैं, जिनमें सेंसर, सॉफ़्टवेयर और अन्य तकनीकों को समाहित किया जाता है, ताकि वे इंटरनेट के माध्यम से आपस में जुड़ सकें और डेटा का आदान-प्रदान कर सकें।
- इसके मुख्यतः दो भाग होते हैं-
- इंटरनेट: यह कनेक्टीविटी का आधार होता है।
- थिंग: इसके अंतर्गत वस्तुयें या उपकरण आते हैं।
- अनुप्रयोग– बिजली, ऑटोमोटिव, सुरक्षा और निगरानी, दूरस्थ स्वास्थ्य प्रबंधन, कृषि, स्मार्ट होम और स्मार्ट सिटी आदि जैसे विभिन्न क्षेत्रों में स्मार्ट बुनियादी ढांचे का निर्माण करना।
- चुनौतियाँ- सुरक्षा और गोपनीयता जोखिम, अंतरसंचालनीयता मुद्दे, विनियामक और कानूनी मुद्दे, डिजिटल विभाजन।
- उदाहरण- भारत का स्मार्ट सिटी मिशन ऊर्जा दक्षता, स्मार्ट अपशिष्ट निपटान और स्मार्ट यातायात विनियमन के विचारों पर आधारित है, ये सभी पहलू IoT द्वारा सक्षम हैं।


इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) सेंसर और सॉफ्टवेयर से लैस इंटरकनेक्टेड उपकरणों का एक नेटवर्क है, जो उन्हें इंटरनेट पर डेटा एकत्र करने और आदान-प्रदान करने की अनुमति देता है, जिससे दूरस्थ निगरानी, नियंत्रण और स्वचालन सक्षम होता है।
IoT के फायदे : | IoT के नुकसान |
कार्यों का स्वचालन:
बढ़ी हुई दक्षता:
दूरस्थ निगरानी:
| सुरक्षा और गोपनीयता जोखिम: IoT उपकरणों में कमजोरियों के कारण व्यक्तिगत डेटा तक अनधिकृत पहुंच हो सकती है या महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा प्रणालियों पर साइबर हमले हो सकते हैं।
उपयोगकर्ताओं में IoT सुरक्षा जागरूकता की कमी:
डेटा अधिभार: सार्थक अंतर्दृष्टि निकालना चुनौतीपूर्ण बना रहा है।
अंतरसंचालनीयता मुद्दे:
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2022 में, उपभोक्ता इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) उपकरणों को सुरक्षित करने के लिए, दूरसंचार विभाग ने एक रिपोर्ट “उपभोक्ता इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) को सुरक्षित करने के लिए अभ्यास संहिता” जारी की है।
