सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 2 में “कम्प्यूटर”, “कम्प्यूटर प्रणाली” एवं “कम्प्यूटर नेटवर्क” की परिभाषाएँ दी गई हैं। ये भारतीय साइबर विधि की आधारभूत अवधारणाएँ हैं।
1. कम्प्यूटर – धारा 2(1)(झ)
- कम्प्यूटर से तात्पर्य ऐसे इलेक्ट्रॉनिक, चुंबकीय, प्रकाशीय अथवा उच्च गति वाले डेटा प्रसंस्करण उपकरण या प्रणाली से है, जो तार्किक, अंकगणितीय तथा स्मृति संबंधी कार्य करता है तथा उससे जुड़ी इनपुट, आउटपुट, स्टोरेज एवं संचार सुविधाएँ भी इसमें शामिल हैं।
- उदाहरण: लैपटॉप, डेस्कटॉप, सर्वर, एटीएम मशीन, स्मार्टफोन।
2. कम्प्यूटर प्रणाली – धारा 2(1)(ठ)
- कम्प्यूटर प्रणाली से आशय ऐसे उपकरण या उपकरणों के समूह से है, जो कंप्यूटर प्रोग्रामों की सहायता से डेटा का प्रसंस्करण करते हैं।
- उदाहरण: रेलवे आरक्षण प्रणाली, एटीएम प्रणाली, व्यक्तिगत कंप्यूटर सेटअप।
3. कम्प्यूटर नेटवर्क – धारा 2(1)(ञ)
- कम्प्यूटर नेटवर्क से आशय तार, बेतार, उपग्रह या अन्य संचार माध्यमों द्वारा दो या अधिक कम्प्यूटरों के परस्पर जुड़ाव से है।
- उदाहरण: इंटरनेट, वाई-फाई, कार्यालय LAN, क्लाउड नेटवर्क।
सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 भारत में साइबर अपराधों और ऑनलाइन धोखाधड़ी को रोकने हेतु एक व्यापक कानूनी ढांचा प्रदान करता है। यह अधिनियम इलेक्ट्रॉनिक लेनदेन को कानूनी मान्यता देने के साथ-साथ साइबर अपराधियों के लिए दंडात्मक प्रावधान भी निर्धारित करता है।
प्रमुख प्रावधान
1. धारा 43 — अनधिकृत पहुँच और डेटा क्षति
- यदि कोई व्यक्ति बिना अनुमति कंप्यूटर, नेटवर्क या डेटा तक पहुँच प्राप्त करता है, वायरस फैलाता है या डेटा नष्ट करता है, तो उसके विरुद्ध क्षतिपूर्ति (Compensation) का प्रावधान है।
2. धारा 65 — कंप्यूटर स्रोत दस्तावेजों से छेड़छाड़
- कंप्यूटर सोर्स कोड को जानबूझकर नष्ट, छिपाने या बदलने पर:
- 3 वर्ष तक कारावास
- ₹2 लाख तक जुर्माना
3. धारा 66 — कंप्यूटर संबंधी अपराध
- हैकिंग, डेटा चोरी, वायरस हमले आदि को दंडनीय बनाया गया है।
- दंड: 3 वर्ष तक कारावास
- ₹5 लाख तक जुर्माना
4. धारा 66C — पहचान की चोरी (Identity Theft)
- किसी अन्य व्यक्ति के:
- पासवर्ड,
- OTP,
- डिजिटल हस्ताक्षर,
- आधार विवरण का दुरुपयोग करने पर दंड दिया जाता है।
5. धारा 66D — प्रतिरूपण द्वारा धोखाधड़ी
- ऑनलाइन बैंक अधिकारी, सरकारी कर्मचारी या अन्य व्यक्ति बनकर धोखाधड़ी करना अपराध है।
- दंड: 3 वर्ष तक कारावास
- ₹1 लाख तक जुर्माना
6. धारा 66E — निजता का उल्लंघन
- किसी व्यक्ति की निजी तस्वीरें बिना अनुमति साझा करना दंडनीय अपराध है।
7. धारा 66F — साइबर आतंकवाद
- देश की सुरक्षा, बैंकिंग प्रणाली या महत्वपूर्ण सूचना अवसंरचना पर साइबर हमला करने पर आजीवन कारावास तक का प्रावधान है।
8. धारा 67, 67A, 67B
- ऑनलाइन अश्लील, यौन स्पष्ट तथा बाल अश्लील सामग्री के प्रकाशन और प्रसारण पर कठोर दंड का प्रावधान है।
9. धारा 72 और 72A — गोपनीयता संरक्षण
- बिना अनुमति किसी व्यक्ति की निजी जानकारी या डेटा साझा करना अपराध है।
10. धारा 75 — अतिरिक्त-क्षेत्रीय अधिकारिता
- यदि कोई विदेशी व्यक्ति भारतीय कंप्यूटर नेटवर्क के विरुद्ध साइबर अपराध करता है, तो भी IT Act लागू होगा।
साइबर आतंकवाद (Cyber Terrorism) आई.टी. अधिनियम, 2000 की धारा 66F के अंतर्गत परिभाषित किया गया है। यह अधिनियम का सबसे गंभीर साइबर अपराध है।
धारा 66F के अंतर्गत साइबर आतंकवाद तब होता है जब कोई व्यक्ति कंप्यूटर संसाधन (Computer Resource) का उपयोग करके भारत की एकता, अखंडता, सुरक्षा या संप्रभुता को खतरे में डालने या लोगों में आतंक फैलाने का इरादा रखते हुए निम्नलिखित कार्य करता है:
भाग (A):
- किसी अधिकृत व्यक्ति को कंप्यूटर संसाधन तक पहुंच से वंचित करना या पहुंच अस्वीकार करना।
- बिना अधिकृत पहुंच के कंप्यूटर संसाधन में प्रवेश करने का प्रयास करना।
- कोई कंप्यूटर contaminant (वायरस, मालवेयर आदि) डालना।
और ऐसा कार्य करने से या संभावित रूप से मृत्यु या चोट, संपत्ति को नुकसान, समुदाय के लिए आवश्यक सेवाओं में व्यवधान, या Critical Information Infrastructure पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।
भाग (B):
- बिना अधिकृत पहुंच के संवेदनशील जानकारी (राष्ट्रीय सुरक्षा, विदेश संबंध, संप्रभुता आदि) प्राप्त करना, जिसका उपयोग भारत के हितों को नुकसान पहुंचाने या विदेशी देश/समूह के लाभ के लिए किया जा सकता है।
दण्ड (Punishment):
- आजीवन कारावास (Imprisonment for Life)
- यह अपराध गैर-जमानती (Non-bailable) और गैर-समनीय (Non-compoundable) है।
