राजस्थान के आर्थिक संवृद्धि संकेतक – राज्य घरेलू उत्पाद एवं प्रति व्यक्ति आय

राज्य सकल घरेलू उत्पाद (GSDP) 

यह राज्य की भौगोलिक सीमा के अंदर एक वर्ष में उत्पादित सभी अंतिम वस्तुओं और सेवाओं का कुल मौद्रिक मूल्य है, जिसमें मूल्यह्रास (depreciation) को घटाए बिना शामिल किया जाता है।

राजस्थान 2025-26 (अग्रिम अनुमान):

  • वर्तमान मूल्यों पर: ₹18.75 लाख करोड़ (वृद्धि 10.24%)
  • स्थिर मूल्यों पर: ₹9.82 लाख करोड़ (वृद्धि 8.66%)
  • अखिल भारतीय GDP में हिस्सा: 5.25%

NSDP (शुद्ध राज्य घरेलू उत्पाद)

राज्य शुद्ध घरेलू उत्पाद (NSDP) राज्य की भौगोलिक सीमा के अंदर किसी वित्तीय वर्ष के दौरान उत्पादित सभी वस्तुओं और सेवाओं का शुद्ध मौद्रिक मूल्य है। इसमें राज्य सकल घरेलू उत्पाद (GSDP) से मूल्यह्रास (स्थिर पूंजी की खपत) को घटा दिया जाता है।

NSDP = GSDP – स्थिर पूंजी का उपभोग (CFC)

CFC = उत्पादन प्रक्रिया में उपयोग हो चुकी पूंजी (मशीनरी, भवनों की टूट-फूट) का प्रतिस्थापन मूल्य।

राजस्थान 2025-26 (अग्रिम अनुमान):

  • वर्तमान मूल्यों पर: ₹16.85 लाख करोड़ (वृद्धि 10.48%)
  • स्थिर मूल्यों पर: ₹8.59 लाख करोड़ (वृद्धि 8.90%)

NSDP बेहतर मापक क्यों है

  1. वास्तविक संपत्ति वृद्धि का प्रतिबिंब – NSDP पूंजी के घिसाव को घटाकर वास्तविक नई संपत्ति (नेट वेल्थ) को दर्शाता है। GSDP इसमें मूल्यह्रास को नजरअंदाज कर आर्थिक उत्पादन को बढ़ा-चढ़ाकर दिखा सकता है।
  2. स्थिरता की जांच – यदि मूल्यह्रास नए निवेश से अधिक हो तो उत्पादक आधार सिकुड़ रहा है, जिसका पता NSDP से आसानी से चल जाता है।
  3. प्रति व्यक्ति आय की आधारशिला – प्रति व्यक्ति आय (PCI) की गणना NSDP को मध्य-वर्ष की जनसंख्या से विभाजित करके की जाती है।
    • राजस्थान 2025-26 में PCI:
    • चालू कीमतों पर: ₹2,02,349
    • स्थिर कीमतों पर: ₹1,03,189
  1. जन-कल्याण का बेहतर सूचक – NSDP लोगों के जीवन स्तर और कल्याण को अधिक सटीक रूप से प्रतिबिंबित करता है।

चालू कीमतों पर प्रति व्यक्ति आय (PCI) किसी राज्य की जनसंख्या के जीवन स्तर व कल्याण को दर्शाती है। पिछले पांच वर्षों में राजस्थान की PCI वृद्धि की अखिल भारतीय औसत से तुलना करने पर पता चलता है कि प्रारंभिक महामारी-पश्चात वर्षों में राजस्थान राष्ट्रीय औसत से पीछे रहा, परंतु हाल के तीन वर्षों में इसने लगातार राष्ट्रीय वृद्धि दर को पीछे छोड़ा है।

वर्षराजस्थान PCI (₹)वृद्धि %अखिल भारत PCI (₹)वृद्धि %अंतर (प्रतिशत बिंदु)
2023-241,67,02712.051,88,89211.7+0.35
2024-251,85,09510.822,05,3248.7+2.12
2025-26 (अ.अ.)2,02,3499.322,19,5756.9+2.42
मुख्य निष्कर्ष
  1. स्थिर कीमतों पर PCI (2025-26): राजस्थान में 7.76% की वृद्धि हुई और यह ₹1,03,189 तक पहुंच गया, जो राष्ट्रीय वास्तविक वृद्धि दर से बेहतर है।
  2. दीर्घकालिक प्रगति: वर्ष 2011-12 में ₹57,192 से बढ़कर 2025-26 में ₹2,02,349 हो गई है – मात्र 14 वर्षों में 3.54 गुना वृद्धि।
तीव्र वृद्धि के कारक
  • मजबूत GSDP वृद्धि (2025-26 में नाममात्र 10.24% और वास्तविक 8.66%) – जो भारत की जीडीपी वृद्धि (क्रमशः 8.0% और 7.4%) से अधिक है।
  • नवीकरणीय ऊर्जा, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSMEs), खनन क्षेत्र (HRRL रिफाइनरी) और पर्यटन की पुनरुत्थान में उल्लेखनीय बढ़ोतरी।
  • राजस्थान निवेश शिखर सम्मेलन 2024 – ₹35 लाख करोड़ के मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (MoUs)।
  • सेवा क्षेत्र की मजबूत भूमिका (GSVA का 47.71%) तथा बैंक ऋण-जमा अनुपात में सुधार (89.61% बनाम राष्ट्रीय 80.43%)।

तीव्र वृद्धि के बावजूद, 2025-26 में राजस्थान की निरपेक्ष प्रति व्यक्ति आय (₹2,02,349) अखिल भारतीय औसत (₹2,19,575) से अभी भी ₹17,226 कम है। यह दर्शाता है कि अंतर कम होना (convergence) शुरू तो हो गया है, लेकिन अभी पूर्ण नहीं हुआ है।

प्रति व्यक्ति आय (PCI), जिसकी गणना राज्य शुद्ध घरेलू उत्पाद (NSDP) को मध्य-वर्ष की जनसंख्या से विभाजित करके की जाती है, एक व्यापक रूप से प्रयुक्त कल्याण सूचक है। परंतु राजस्थान जैसे विषम राज्य में यह समावेशिता और असमानता के महत्वपूर्ण आयामों को छिपा लेता है।

PCI को कल्याण का मापदंड मानने की सीमाएँ

  1. जिले-स्तरीय असमानताओं को छिपाना: राज्य की औसत PCI वर्ष 2024-25 में ₹1,85,095 थी, लेकिन यह आंकड़ा शीर्ष जिलों (जैसे अलवर ₹2,68,321 और जयपुर ₹2,60,991) तथा निचले जिलों (जैसे डूंगरपुर ₹1,06,779 और बांसवाड़ा ₹1,20,686) के बीच लगभग 2.5 गुना के अंतर को पूरी तरह छिपा लेता है।
  2. आय असमानता को नजरअंदाज करना: PCI एक साधारण औसत है, इसलिए यह यह नहीं बताता कि आर्थिक वृद्धि का लाभ पूरे समाज तक पहुंच रहा है या केवल कुछ अमीर वर्ग तक सीमित है। खनन-समृद्ध बाड़मेर और मरुस्थल-ग्रस्त जैसलमेर को एक ही मापदंड से देखा जाता है।
  3. गैर-मौद्रिक कल्याण को अनदेखा करना: PCI स्वास्थ्य, शिक्षा और स्वच्छता जैसे क्षेत्रों के परिणामों को नहीं दर्शाता। राजस्थान की शिशु मृत्यु दर (IMR 29) भारत के औसत (25) से अधिक है तथा साक्षरता दर (66.1%) राष्ट्रीय औसत (73.0%) से कम है।
  4. लिंग और ग्रामीण-शहरी खाई को छिपाना: लिंगानुपात (928 बनाम भारत का 943), महिला साक्षरता (52.1% बनाम 64.6%) तथा ग्रामीण साक्षरता (61.4% बनाम शहरी 79.7%) जैसी गहरी खाइयाँ PCI के औसत आंकड़ों में दिखाई नहीं देतीं।
  5. पर्यावरणीय लागत और जलवायु संवेदनशीलता को नजरअंदाज करना: PCI भूजल की कमी, मरुस्थलीकरण या सूखा-प्रभावित पश्चिमी जिलों की संरचनात्मक कमजोरियों को ध्यान में नहीं रखता। राज्य को आपदा प्रबंधन के लिए SDRF के तहत लगभग ₹4,408.38 करोड़ प्राप्त होते हैं।
  6. बहुआयामी गरीबी को अनदेखा करना: PCI पोषण, आवास और खाना पकाने के ईंधन जैसी वंचनाओं को नहीं मापता, जिन्हें नीति आयोग के बहुआयामी गरीबी सूचकांक (MPI) और सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) में विशेष महत्व दिया गया है।

इस प्रकार, राजस्थान जैसे विविधतापूर्ण राज्य में प्रति व्यक्ति आय (PCI) को केवल अकेले नहीं देखना चाहिए। इसे मानव विकास सूचकांक (HDI), बहुआयामी गरीबी सूचकांक (MPI), SDG भारत सूचकांक (जिसका स्कोर 2020-21 के 60 से बढ़कर 2023-24 में 67 हो गया है – ‘फ्रंट-रनर’ श्रेणी) तथा जिला-स्तरीय आंकड़ों के साथ पढ़ना आवश्यक है।

इन सभी आयामों को मिलाकर ही हम कल्याण की सच्ची तस्वीर प्राप्त कर सकते हैं, जो विकसित राजस्थान@2047 के विजन के अनुरूप हो।

राजस्थान की GSDP में सशक्त वृद्धि हुई है – चालू कीमतों पर यह ₹11.96 लाख करोड़ (2021-22) से बढ़कर ₹18.75 लाख करोड़ (2025-26) हो गई है, जिसमें इन पांच वर्षों में क्रमशः 17.46%, 12.80%, 12.85%, 11.77% और 10.24% की वृद्धि दर रही है। 

GSDP वृद्धि प्रवृत्ति – राजस्थान (हाल के वर्ष)

राजस्थान 2025-26 (अग्रिम अनुमान):

  • वर्तमान मूल्यों पर: ₹18.75 लाख करोड़ (वृद्धि 10.24%)
  • स्थिर मूल्यों पर: ₹9.82 लाख करोड़ (वृद्धि 8.66%)
  • अखिल भारतीय GDP में हिस्सा: 5.25% (भारत में 7वां स्थान)

GFCF GSDP का 29.53% है, जो 25% के मानदंड से अधिक है, तथा मजबूत निवेश गति दर्शाती है। परंतु यह उच्च समग्र वृद्धि क्षेत्रों, लिंगों और सामाजिक समूहों में आनुपातिक समावेशिता में परिलक्षित नहीं हुई है, जैसा कि निम्नलिखित आंकड़ों से स्पष्ट होता है।

  1. PCI में लगातार अंतर: समग्र GSDP में 7वें स्थान के बावजूद, PCI ₹2,02,349 राष्ट्रीय ₹2,19,575 से ~8% कम; PCI रैंक तीन दशकों से 20-23वें स्थान पर स्थिर।
  2. तीव्र अंतर-जिला असमानताएँ: GDDP अंतर ~12 गुना — जयपुर ₹2,12,335 करोड़ बनाम जैसलमेर ₹17,903 करोड़; शीर्ष 5 जिले = ~37% GSDP
  3. कृषि-रोजगार असंतुलन: कृषि = GSVA का ~25% किंतु 55%+ श्रमशक्ति को रोजगार, श्रम कम-उत्पादकता में फँसा।
  4. बढ़ती ग्रामीण असमानता: ग्रामीण जिनी 0.248 (2011-12) → 0.283 (2022-23) — राष्ट्रीय 0.283 → 0.266 की गिरावट के विपरीत।
  5. पोषण में गिरावट: बाल दुर्बलता 19.8%, कम-वजन 33.3% (NFHS-6); टीकाकरण 75% (राष्ट्रीय 87%); IMR 30/1000 बनाम राष्ट्रीय 24।
  6. लैंगिक विरोधाभास: महिला LFPR 50.5% → 54.1% बढ़ी, किंतु महिला बेरोजगारी 3.2% → 4.5%; शासन में महिला प्रतिनिधित्व सीमित।
  7. नवीकरणीय ऊर्जा संकेंद्रण: 85%+ सौर/पवन परियोजनाएँ मात्र 4 जिलों (बाड़मेर, बीकानेर, जैसलमेर, जोधपुर) में।

प्रति-प्रमाण: जहाँ वृद्धि समावेशी रही है

  1. गरीबी उन्मूलन: MPI गरीबी 28.86% → 15.31% (2015-16 से 2019-21); 1.08 करोड़ लोग गरीबी से बाहर।
  2. महिला वित्तीय समावेशन: 88% महिलाओं के पास बैंक खाते (NFHS-6), राष्ट्रीय 89% के लगभग बराबर।
  3. संस्थागत प्रसव: 94.1% (NFHS-6) बनाम राष्ट्रीय 90.6%।
  4. DBT समावेशन: दिसंबर 2025 तक जन आधार-आधारित DBT द्वारा ₹3.91 लाख करोड़ हस्तांतरित।

आलोचनात्मक विश्लेषण

राजस्थान की वृद्धि आंशिक रूप से समावेशी किंतु संरचनात्मक रूप से असमान है। उच्च GSDP बढ़ती ग्रामीण असमानता, क्षेत्रीय संकेंद्रण, बढ़ती महिला बेरोजगारी व घटते बाल पोषण के साथ सह-अस्तित्व में रही है, जबकि संरचनात्मक परिवर्तन (श्रम स्थानांतरण, HDI, क्षेत्रीय अभिसरण) समग्र विस्तार के साथ गति नहीं रख पाया।

आगे का मार्ग

आकांक्षी जिला कार्यक्रम द्वारा पिछड़े जिलों को केंद्रित करना; RUDA, MSMEs व PM-MITRA द्वारा कृषि-रोजगार जाल तोड़ना; PMVBRY-प्रकार के प्रोत्साहनों द्वारा माँग-पक्षीय महिला रोजगार का विस्तार; SHG-बाज़ार संयोजन को सुदृढ़ करना; RE निवेश का विविधीकरण; तथा सभी उपायों को विकसित राजस्थान@2047 के समावेशी विकास हेतु दस संकल्प पर आधारित करना, जिसमें गरीब, युवा, अन्नदाता व नारी शक्ति को प्राथमिकता दी जाए।

निष्कर्ष

कथन काफी हद तक सही है — GSDP की वृद्धि समानुपाती रूप से समावेशी परिणामों में नहीं बदली है। क्षेत्रीय असंतुलन, निम्न गुणवत्ता वाले रोजगार, लिंग अंतर और ग्रामीण असमानता को दूर करने के लिए समानता-केंद्रित विकास मॉडल की जरूरत है, ताकि सबका साथ, सबका विकास के तहत विकसित राजस्थान@2047 का सपना साकार हो सके।

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