नाथद्वारा शैली मेवाड़ शैली का दूसरा महत्वपूर्ण चरण है।
- मुख्य केंद्र: नाथद्वारा में पुष्टिमार्ग संप्रदाय का प्रसिद्ध पीठ (मंदिर)।
- शैली: उदयपुर और ब्रज शैलियों के तत्वों को जोड़ती है (फ्यूजन)।
- पिछवाई पेंटिंग: एक प्रमुख योगदान, ये सजावट के लिए श्रीनाथजी की मूर्ति के पीछे लटकाए गए बड़े कपड़े के चित्र हैं।
- विषय: कृष्ण की किंवदंतियों को दर्शाता है, जिसमें यशोदा, नंद, बचपन के दोस्त, गोपियाँ और वल्लभ संप्रदाय के संत जैसे चरित्र शामिल हैं।
- रंग : मुख्य रूप से हरे और पीले रंग का उपयोग किया जाता है।
- विशेषताएँ:
- केंद्र में श्रीनाथजी की छवि
- चारों ओर घूमती गायें
- स्वर्ग से नीचे देखते देवता
- पृष्ठभूमि में घनी वनस्पति
- केले के पेड़ों की प्रधानता
- प्रमुख चित्रकार: बाबा रामचंद्र, नारायण, चतुर्भुज, रामलिंग, चंपालाल, घासीराम, तुलसीराम।
- उल्लेखनीय महिला चित्रकार: कमला और इलाइची।
बूंदी चित्रकला की प्रमुख विशेषताएं →
- प्रारंभ में इस पर मेवाड़ स्कूल का प्रभाव था; बाद में मुगल और यूरोपीय शैलियों ने भी इस पर प्रभाव डाला। 19वीं सदी के अंत तक इसमें गिरावट शुरू हो गई।
- प्रमुख चित्रकार → डालू, रामलाल, साधुराम, रघुनाथ (ट्रिक → डीआरएस लेलो)
- हरे एवं नीले रंग का प्रयोग
- महत्वपूर्ण चित्र और विषयवस्तु
- राग रागिनी, बारहमासा, शासकों का जुलूस; जल तालाब; पक्षी और जानवर
- गोवर्धन पर्वत को उठाने जैसे कृष्ण लीला प्रसंग
- पशु शिकार : राव उम्मेद सिंह को जंगली सूअर का शिकार करते हुए दिखाया गया है।
