निजी संबंध – 

  • व्यक्तिगत नैतिकता – सहानुभूति मानवीय मूल्य – करुणा
  • सामाजिक मानदंड – बड़ों , रिश्तेदारों का सम्मान करें, सामाजिक पूंजी
  • धार्मिक सिद्धांत – हिंदू विवाह में 7 प्रतिज्ञाएं, सिख धर्म में आनंद कारज
  • कानून – माता -पिता और वरिष्ठ नागरि कों का भरण-पो षण और कल्याण अधिनियम, 2007

सार्वजनिक संबंध – 

  • संविधान – Article 14, 15, 16 आदि 
  • आचार संहिता – अखिल भारतीय सेवा आचार संहिता 1968, राजस्थान सिविल सेवा आचरण नियम 1971
  • आचार संहिता (Hota समिति)
  • कानून – IPC/CrPC/GST laws

Definition – निजी संबंधों में नैतिकता अनौपचारिक, स्वयं आरोपित और परिवार, भाई-बहन, मित्र, पत्नी इत्यादि द्वारा विरासत में मिली होती है, जबकि सार्वजनिक संबंधों में नैतिकता औपचारिक एवं बाहरी रूप से थोपी जाती है जैसे  डॉक्टर-रोगी, सिविल सेवक – नागरिक 

Quite different –

Factors

Private

Public

Example

नियंत्रणकर्ता

जुनून (भावनाएँ)

तर्क (नियम एवं कानून)

  • Private – माँ का प्यार (भावनाएँ) Public – पुलिस (IPC/CrPC) 

गुण

व्यक्तिपरकता, गोपनीयता, आत्मीयता, प्रेम, स्नेह, निष्ठा, विश्वास, करुणा, जिम्मेदारी, धीरज, सहयोग, देखभाल की नैतिकता

वस्तुनिष्ठता, पारदर्शिता, जवाबदेही, दक्षता, व्यावसायिकता, राष्ट्रवाद, लोकतांत्रिक मूल्य, प्रतिस्पर्धा, न्याय 

  • व्यावसायिकता – Doctor 

स्थायित्व

अपेक्षाकृत स्थायी, लगातार प्रयास की जरूरत

अस्थायी, अवकाश, सेवानिवृत्ति आदि

  • Private -एक पिता या माता कभी सेवानिवृत्त नहीं होते हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार जीवनसाथी अगले जन्म में भी बना रहता है

प्रभाव/परिणाम

त्रुटियों के प्रति अधिक सहनशीलता – बार-बार गलतियाँ होने पर विश्वास और प्रतिष्ठा की हानि

कम या जीरो टॉलरेंस – कारण बताओ नोटिस, निलंबन, जुर्माना या यहां तक ​​कि जेल की सजा

  • Private – जेल की सजा के बाद परिवार अपराधी को स्वीकार करता है Public – हाल ही में राजस्थान मुख्यमंत्री ने ड्यूटी से अनुपस्थित रहने पर 3 नर्सिंग अधिकारियों को निलंबित कर दिया

प्रकृति

अंतिम उद्देश्य के रूप में बिना शर्त

  • सहायक 
  • क्विड प्रो क्वो (‘कुछ के लिए कुछ’)
  • साँझा लाभ
  • Ex – माँ की बिना शर्त 24*7 ड्यूटी (भारत में महिलाओं का 66% काम अवैतनिक है – देश की जीडीपी का 7.2%) Ex – सिविल सेवकों को कर्तव्य निर्वहन के लिए वेतन और अन्य सुविधाएं मिलती हैं

कारक/स्रोत

  • व्यक्तिगत नैतिकता – सहानुभूति मानवीय मूल्य – करुणा सामाजिक मानदंड – बड़ों, रिश्तेदारों का सम्मान करें, सामाजिक पूंजी धार्मिक सिद्धांत – हिंदू विवाह में 7 प्रतिज्ञाएं, सिख धर्म में आनंद कारज कानून – माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों का भरण-पोषण और कल्याण अधिनियम, 2007
  • संविधान – Article 14, 15, 16 आदि 
  • आचार संहिता – अखिल भारतीय सेवा आचार संहिता 1968, 
  • राजस्थान सिविल सेवा आचरण नियम 1971 
  • नैतिक  आचार संहिता (Hota समिति) कानून –
  • IPC/CrPC/GST laws
  • उदाहरण – विक्रेता और उपभोक्ता संबंध, उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 1986 द्वारा विनियमित होते है

पूर्ण अलगाव न तो वांछनीय है और न ही संभव है क्योंकि – 

  1. निजी मूल्य सार्वजनिक मूल्यों के लिए आधार प्रदान करते हैं – करुणा, सत्यनिष्ठा जैसे कुछ मूल्यों का सकारात्मक प्रभाव पड़ता है 
  2. लोक चयन उपागम – बेहतर प्रशासन के लिए, हमें नागरिक-अनुकूल प्रथाओं, सहानुभूति, प्रशंसा जैसे मूल्यों को अपनाने की आवश्यकता है 
  3. अनार्चो-कम्युनिस्टों का तर्क है कि राज्य और निजी संपत्ति अन्योन्याश्रित संस्थाएँ हैं। राज्य का अस्तित्व निजी संपत्ति की रक्षा के लिए है, और निजी संपत्ति के मालिक राज्य की रक्षा करते हैं 
  4. कुछ निजी कृत्यों का सार्वजनिक प्रभाव होता है, इसलिए उन्हें अलग नहीं किया जा सकता. Ex -समलैंगिकता न केवल निजी बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए भी ख़तरा है
  5. निजी क्षेत्र की ऐतिहासिक ग़लतियों को सार्वजनिक कृत्यों द्वारा सुधारना. Ex – सबरीमाला फैसला, तीन तलाक

निष्कर्ष – निजी और सार्वजनिक जीवन का पूर्ण पृथक्करण न तो वांछनीय है और न ही व्यवहार्य। एक प्रशासक को ‘लक्ष्मण रेखा’ का सम्मान करना चाहिए और स्वयं और समाज के लाभ को अधिकतम करने के लिए अपनी भावनात्मक बुद्धि का उपयोग करना चाहिए।

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