महात्मा गांधी ने मीरा बाई को एक महान सत्याग्रही कहा, क्योंकि उनका जीवन सत्याग्रह के मूल सिद्धांतों को दर्शाता था।
- सत्य : मीरा बाई ने कृष्ण को अपना इकलौता आराध्य मानकर यह कहा – “महारो तो गिरधर गोपाल, दूजो ना कोई।” वे अपने आध्यात्मिक सत्य पर अडिग रहीं, जैसा कि सत्याग्रह में सत्य से चिपके रहना मुख्य सिद्धांत है।
- अहिंसा: मीरा ने सामाजिक और पारिवारिक दबावों का अहिंसक विरोध किया। उन्हें ज़हर और साँप से मारने की कोशिश की गई, पर उन्होंने कभी हिंसा का सहारा नहीं लिया। उनके भजन ही उनके प्रत्यारोप के शांतिपूर्ण माध्यम बने।
- तपस्या : मीरा ने अपमान और पीड़ा को श्रद्धा का हिस्सा मानकर स्वीकार किया। उन्होंने कहा – “राणा जी स्याणे, या बदनामी लागे मीठी…”। यह दिखाता है कि वे अपने सत्य के लिए कष्ट सहने को तैयार थीं, जैसा एक सत्याग्रही करता है।
- अनुशासन और भक्ति : मीरा प्रतिदिन मंदिर जातीं, कृष्ण की भक्ति में घंटों गीत-नृत्य करतीं। यह अनुशासित भक्ति ही उन्हें विरोध के बावजूद मार्ग पर टिके रहने की शक्ति देती थी, जैसे सत्याग्रही संकल्प में दृढ़ रहते हैं।
- वैराग्य : मीरा ने भौतिक सुख-सुविधाएं और राजसी पद त्यागकर एक त्यागी साध्वी का जीवन अपनाया। उनका यह त्याग सत्याग्रह की भावना को दर्शाता है, जहाँ कोई भी सत्य और न्याय के लिए स्वार्थों का परित्याग करता है।
इन सभी गुणों — सत्य, अहिंसा, तपस्या, अनुशासन, और वैराग्य — के कारण ही गांधी जी ने मीरा बाई को एक सच्ची सत्याग्रही कहा था।
गांधीवादी दर्शन उनकी माँ, सहकर्मियों, पश्चिम मूल के लोगों इत्यादि के साथ बातचीत और उनके जीवनकाल में पढ़ी गई किताबों का परिणाम है।
पश्चिमी और भारतीय दर्शन का मिश्रण | सार्वभौमिक और शाश्वत |
अहिंसा का सिद्धांत –
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सत्य की अवधारणा –
| सत्य के लिए जीवन का बलिदान (समय और स्थान के बंधन से परे उदाहरण) –
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सेवा भाव –
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कर्तव्य की अवधारणा –
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ईश्वर की अवधारणा –
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Intro –
- Background – महात्मा गांधी की 11 प्रतिज्ञाएं भारतीय और पश्चिमी दुनिया के विविध दर्शनों के साथ गांधी के संपर्क का परिणाम हैं
- Facts – 11 प्रतिज्ञाओं में से पहली 6 प्रतिज्ञाओं का संबंध आत्म-विकास और आत्म-संयम से है, और बाकी 5 का संबंध सामाजिक कल्याण से है।
- Definition – प्रत्येक व्यक्ति में राम और रावण, भगवान और शैतान, अच्छाई और बुराई है, और प्रत्येक व्यक्ति में रावण और शैतान पर अंकुश लगाना महत्वपूर्ण है, जिसे एक प्रतिज्ञा या ‘व्रत’ के माध्यम से पूरा किया जा सकता है। गांधीजी ने मनुष्य की बुराइयों पर लगाम लगाने के लिए ऐसी 11 प्रतिज्ञाएं दीं
- Current – हाल ही में, भारत सरकार द्वारा गांधी जी की 150वीं वर्षगांठ (जन्मदिन) मनाई गयी। गाँधी जी के 11 प्रतिज्ञाओं को प्रभावी और समावेशी नीति निर्माण की नींव के रूप में देखना ही उनको सच्ची श्रदांजलि होगी
11 Vows | Policy making |
सत्य – मन, वचन और कर्म में सामंजस्य |
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अहिंसा |
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ब्रह्मचर्य |
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अस्तेय |
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अपरिग्रह |
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अस्वादा |
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शरीर श्रम |
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स्वदेशी |
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अभय |
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अस्पृश्यता निवारण |
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सर्व धर्म समभाव |
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Conclusion –
- Summary – गांधी जी की 11 प्रतिज्ञाएं आज के समय में पहले से कहीं अधिक प्रासंगिक हैं और इसलिए इनका अक्षरश: पालन किया जाना चाहिए ।
- Target – अमृत काल में भारतीय प्रशासन को जवाबदेह बनाए रखने और 2047 तक भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाने के लिए गांधी के ये सभी सिद्धांत आवश्यक हैं ।
- Intro के साथ लिंक करें- ये प्रतिज्ञाएं प्रत्येक नागरिक के भीतर राम का आह्वान करेंगी और राम राज्य के सपने की परिकल्पना करेंगी।
