आधार

तलपट के मिलान को प्रभावित करने वाली अशुद्धियाँ

तलपट के मिलान को प्रभावित न करने वाली अशुद्धियाँ

अर्थ

ये अशुद्धियाँ तलपट के डेबिट और क्रेडिट के योग को असमान बना देती हैं।

ये अशुद्धियाँ तलपट के डेबिट और क्रेडिट योग की समानता को प्रभावित नहीं करती हैं।

अशुद्धियों की प्रकृति

एकपक्षीय अशुद्धियाँ (केवल एक पक्ष को प्रभावित करती हैं – डेबिट या क्रेडिट)।

द्विपक्षीय अशुद्धियाँ (डेबिट और क्रेडिट दोनों पक्षों को समान रूप से प्रभावित करती हैं)।

ज्ञात होना

ये अशुद्धियाँ आसानी से ज्ञात हो जाती हैं क्योंकि तलपट का मिलान नहीं होता।

ये अशुद्धियाँ तलपट से ज्ञात नहीं होतीं तथा खाताबही और मूल प्रविष्टियों की गहन जाँच करनी पड़ती है।

सुधार प्रक्रिया

सुधार सरल होता है तथा आवश्यकता पड़ने पर उच्चंत खाता/सस्पेंस खाता के माध्यम से किया जा सकता है।

सुधार अधिक जटिल होता है क्योंकि इसमें सामान्यतः दो या अधिक खातों को प्रभावित करने वाली रोज़नामचा प्रविष्टियाँ करनी पड़ती हैं।

उदाहरण

  • कमीशन की अशुद्धियाँ (लेखपालकीय अशुद्धियाँ) – जैसे, केवल एक पक्ष में गलत खतौनी, किसी खाते का गलत योग।
  • किसी खाते का गलत जोड़ या गलत शेष निकालना।
  • राशि का केवल एक स्तम्भ (डेबिट या क्रेडिट) में दर्ज होना।
  • आंशिक भूल/चूक – जैसे, लेन-देन के केवल एक पक्ष की खतौनी।
  • सैद्धांतिक अशुद्धियाँ – जैसे, पूंजीगत व्यय को राजस्व व्यय के रूप में दर्ज करना।
  • पूर्ण भूल/चूक – पूरा लेन-देन छोड़ देना।
  • क्षतिपूरक अशुद्धियाँ – ऐसी त्रुटियाँ जो एक-दूसरे के प्रभाव को शून्य कर देती हैं।
  • दोहराव संबंधी त्रुटियाँ – एक ही लेन-देन को एक से अधिक बार दर्ज करना।
  • कमीशन की अशुद्धियाँ जहाँ डेबिट और क्रेडिट दोनों समान गलत राशि से दर्ज किए गए हों।
विवरण
प्रारंभिक रहतिया50,000
अंतिम रहतिया60,000
शुद्ध लाभ2,17,900
10% ऋणपत्र2,50,000
परिचालन से आगम4,00,000
सकल लाभ 1,94,000
रोकड़ एवं रोकड़ तुल्य40,000
अंश वारंट के विरुद्ध प्राप्त राशि20,000
व्यापारिक प्राप्य1,00,000
व्यापारिक देय1,90,000
अन्य चालू दायित्व70,000
अंश पूंजी 2,00,000
संचय एवं आधिक्य1,20,000

तरलता अनुपात 

तरल सम्पत्तियाँ / चालू दायित्व

  • तरल सम्पत्तियाँ = रोकड़ एवं रोकड़ तुल्य + व्यापारिक प्राप्य 
  • तरल सम्पत्तियाँ = 40,000 + 1,00,000 = 1,40,000 
  • चालू दायित्व = व्यापारिक देय + अन्य चालू दायित्व 
  • चालू दायित्व = 1,90,000 + 70,000 = 2,60,000 
  • तरलता अनुपात = 1,40,000 / 2,60,000 = 0.54 : 1

स्कन्द आवर्त अनुपात / स्टॉक टर्नओवर अनुपात

विक्रयित माल की लागत / औसत रहतिया

  • विक्रयित माल की लागत = परिचालन से आगम – सकल लाभ 
  • विक्रयित माल की लागत = 4,00,000 – 1,94,000 = 2,06,000 
  • औसत रहतिया = (प्रारंभिक रहतिया + अंतिम रहतिया) / 2 
  • औसत रहतिया = (50,000 + 60,000) / 2 = 55,000 
  • स्टॉक टर्नओवर अनुपात = 2,06,000 / 55,000 = 3.75

सकल लाभ अनुपात

(सकल लाभ / परिचालन से आगम) × 100

  • सकल लाभ = 1,94,000 
  • परिचालन से आगम = 4,00,000 
  • सकल लाभ अनुपात = (1,94,000 / 4,00,000) × 100 = 48.5%

निवेशित पूंजी पर लाभ अनुपात (ROCE)

(ब्याज एवं कर पूर्व आय / निवेशित पूंजी) × 100

  • ऋणपत्रों पर ब्याज = 2,50,000 का 10% = 25,000 
  • ब्याज एवं कर पूर्व आय (EBIT) = शुद्ध लाभ + ब्याज 
  • EBIT = 2,17,900 + 25,000 = 2,42,900 
  • निवेशित पूंजी = अंश पूंजी + संचय एवं आधिक्य + अंश वारंट के विरुद्ध प्राप्त राशि + ऋणपत्र 
  • निवेशित पूंजी = 2,00,000 + 1,20,000 + 20,000 + 2,50,000 = 5,90,000 
  • निवेशित पूंजी पर लाभ अनुपात = (2,42,900 / 5,90,000) × 100 = 41.17%

आधार

निवेश गतिविधियों से रोकड़ प्रवाह

वित्तीय गतिविधियों से रोकड़ प्रवाह

अर्थ

निवेश गतिविधियों में दीर्घकालीन परिसंपत्तियों तथा ऐसे अन्य विनियोगों का क्रय और विक्रय सम्मिलित होता है जो रोकड़ समकक्षों में शामिल नहीं होते।

वित्तीय गतिविधियाँ उद्यम की दीर्घकालीन निधियों या पूँजी से संबंधित होती हैं तथा स्वामियों की पूँजी और उधारों के आकार एवं संरचना में परिवर्तन उत्पन्न करती हैं।

उद्देश्य

ये गतिविधियाँ उन संसाधनों के अधिग्रहण हेतु किए गए व्यय को प्रदर्शित करती हैं जो भविष्य में रोकड़ प्रवाह उत्पन्न करेंगे।

ये गतिविधियाँ दर्शाती हैं कि व्यवसाय का वित्तपोषण अंश पूँजी, ऋण तथा लाभांश भुगतान के माध्यम से किस प्रकार किया जाता है।

संबंधित

स्थायी परिसंपत्तियों तथा विनियोगों के क्रय और विक्रय से संबंधित।

पूँजी एवं उधारों को प्राप्त करने तथा उनके पुनर्भुगतान से संबंधित।

अन्तः प्रवाह के उदाहरण

  1. स्थायी परिसंपत्तियों के विक्रय से रोकड़ प्राप्तियाँ।
  2. विनियोगों के विक्रय से रोकड़ प्राप्तियाँ। 
  3. ब्याज एवं लाभांश की रोकड़ प्राप्तियाँ।
  1. समता अंशों तथा पूर्वाधिकार अंशों के निर्गमन से रोकड़ प्राप्तियाँ। 
  2. ऋणपत्रों के निर्गमन से रोकड़ प्राप्तियाँ। 
  3. ऋण एवं उधार प्राप्तियों से रोकड़ प्राप्तियाँ।

बहिः प्रवाह के उदाहरण

  1. स्थायी परिसंपत्तियों के क्रय हेतु रोकड़ भुगतान। 
  2. विनियोगों के क्रय हेतु रोकड़ भुगतान। 
  3. तृतीय पक्षों को दिए गए रोकड़ ऋण एवं अग्रिम।
  1. ऋणों, ऋणपत्रों एवं उधारों का पुनर्भुगतान। 
  2. ऋणों एवं ऋणपत्रों पर ब्याज का भुगतान। 
  3. समता एवं पूर्वाधिकार अंशों पर लाभांश का भुगतान।

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