मुख्यमंत्री व राज्य मंत्रिपरिषद् राजस्थान राजनीतिक व्यवस्था का एक केंद्रीय तत्व है, जो राज्य की कार्यपालिका का नेतृत्व करता है। मुख्यमंत्री राज्य सरकार का प्रमुख होता है तथा मंत्रिपरिषद् उसके सहयोग से नीतियों का निर्माण एवं क्रियान्वयन सुनिश्चित करती है। यह व्यवस्था राज्य प्रशासन को प्रभावी, उत्तरदायी और समन्वित बनाती है।
मुख्यमंत्री व राज्य मंत्रिपरिषद्: संवैधानिक प्रावधान

मुख्यमंत्री व राज्य मंत्रिपरिषद् से संबंधित अनुच्छेद
अनुच्छेद 163: राज्यपाल को सहायता और सलाह देने के लिए मंत्रिपरिषद –
अनुच्छेद 163(1):
- राज्यपाल को संविधान में दिए गए उसके विवेकाधीन कार्यों को छोड़कर अन्य सभी कार्यों के लिए एक मंत्रिपरिषद की सलाह और सहायता प्राप्त होगी, जिसका प्रधान मुख्यमंत्री होगा।
नोटः- राज्यपाल द्वारा मंत्रिपरिषद् के परामर्श को पुनर्विचार हेतु लौटने का प्रावधान संविधान में नहीं है। जबकि 44वें संविधान संशोधन 1978 द्वारा राष्ट्रपति के लिए यह प्रावधान अनुच्छेद 74(1) में किया गया।
अनुच्छेद 163(2):
- जिन मामलों में राज्यपाल को विवेकाधीन शक्तियाँ दी गई हैं, उनमें राज्यपाल का निर्णय अंतिम होगा।
अनुच्छेद 163(3):
- न्यायालय यह जाँच नहीं करेगा कि मंत्रिपरिषद ने राज्यपाल को सलाह दी थी या नहीं, और यदि दी थी, तो क्या सलाह दी थी।
अनुच्छेद 164: मंत्रियों के बारे में अन्य उपबंध
अनुच्छेद 164(1): मुख्यमंत्री की नियुक्ति-
- मुख्यमंत्री की नियुक्ति राज्यपाल द्वारा की जाती है। अन्य मंत्रियों की नियुक्ति राज्यपाल मुख्यमंत्री की सलाह पर करेगा।
- मंत्री राज्यपाल के प्रसादपर्यंत अपने पद पर रहता है, अर्थात् वे सामूहिक रूप से विधानसभा के प्रति उत्तरदायी होते हैं, लेकिन व्यक्तिगत रूप से राज्यपाल के प्रति जिम्मेदार होते हैं। वस्तुतः, यह मुख्यमंत्री की सलाह पर निर्भर करता है।
नोट:-मंत्रियों के लिए संसदीय शासन होने के कारण संविधान में किसी विशेष योग्यता का उल्लेख नहीं है लेकिन उनका विधानमण्डल का सदस्य होना आवश्यक है। पद पर नियुक्ति के समय मंत्रियों के लिए विधानमण्डल का सदस्य होना आवश्यक नहीं है लेकिन उसके लिए यह आवश्यक है कि नियुक्ति तिथि से 6 माह की अवधि में वे विधानमण्डल के किसी एक सदन की सदस्यता ग्रहण करे अर्थात् बिना विधानमण्डल का सदस्य बने कोई व्यक्ति अधिकतम 6 माह तक मंत्री रह सकता है।
अनुच्छेद 164(1क): मंत्रिपरिषद का आकार-
- मूल संविधान में मंत्रिपरिषद के आकार को लेकर कोई प्रावधान नहीं था।
- 91वां संविधान संशोधन 2003: इस संशोधन के तहत अनुच्छेद 164(1क) जोड़ा गया, जो राज्य मंत्रिपरिषद के आकार को निश्चित करता है। इस प्रावधान के अनुसार, किसी राज्य की मंत्रिपरिषद में मुख्यमंत्री सहित मंत्रियों की कुल संख्या, उस राज्य की विधानसभा की कुल सदस्य संख्या के 15% से अधिक नहीं होगी, जबकि मंत्रियों की न्यूनतम संख्या 12 होना अनिवार्य है। यदि इस अधिनियम के लागू होने के समय किसी राज्य में मंत्रियों की संख्या निर्धारित 15% की सीमा से अधिक है, तो उसे राष्ट्रपति द्वारा अधिसूचित तिथि से 6 माह के भीतर घटाकर इस खंड के उपबंधों के अनुरूप (अर्थात 15% के दायरे में) लाया जाएगा।
- छोटे राज्यों में मंत्रियों की न्यूनतम संख्या: सिक्किम, मिजोरम और गोवा जैसे छोटे राज्यों के लिए यह व्यवस्था की गई है कि विधान सभा सदस्यों की संख्या कम होने के बावजूद न्यूनतम 7 मंत्री नियुक्त किए जा सकते हैं।
- राजस्थान विधानसभा का संदर्भ: राजस्थान विधानसभा में 200 सदस्य हैं, जिसके अनुसार राज्य में मुख्यमंत्री सहित अधिकतम 30 मंत्री हो सकते हैं।
अनुच्छेद 164(1ख): दल-बदल कानून-
- 91वें संविधान संशोधन 2003: इस संशोधन के अनुसार यदि किसी राज्य विधानमंडल के सदस्य को दल-बदल के आधार पर अयोग्य घोषित किया जाता है, तो वह व्यक्ति मंत्री पद से भी अयोग्य घोषित हो जाएगा।
अनुच्छेद 164(2) सामूहिक उत्तरदायित्व:
- मंत्रिपरिषद सामूहिक रूप से विधानसभा के प्रति उत्तरदायी होती है। इसका अर्थ है कि कैबिनेट द्वारा लिया गया कोई भी निर्णय मंत्रिपरिषद का सामूहिक निर्णय माना जाता है। कोई भी मंत्री इस निर्णय का विरोध नहीं कर सकता।
- कोई मंत्री इस निर्णय के विरूद्ध नहीं जा सकता सभी मंत्री साथ साथ तैरते है साथ साथ डूबते है
अनुच्छेद 164(3) शपथ ग्रहण :
- मंत्रिपरिषद के सदस्य राज्यपाल के समक्ष तीसरी अनुसूची के अनुसार पद और गोपनीयता की शपथ ग्रहण करते हैं।
अनुच्छेद 164(4): विधानमंडल सदस्यता
- यदि कोई मंत्री छह महीने तक राज्य विधानमंडल का सदस्य नहीं है, तो वह इस अवधि के बाद मंत्री पद पर नहीं रह सकता।
अनुच्छेद 164(5): मंत्रियों के वेतन और भत्ते
- मंत्रियों के वेतन और भत्तों को राज्य विधानमंडल द्वारा समय-समय पर निर्धारित किया जाता है। इनका उल्लेख संविधान की दूसरी अनुसूची में किया गया है।
अनुच्छेद 167: राज्यपाल को जानकारी देने आदि के सम्बन्ध में मुख्यमंत्री के कर्तव्य
- प्रत्येक राज्य के मुख्यमंत्री का यह कर्तव्य होगा कि वह-:
- राज्य के कार्यो के प्रशासन सम्बन्धी और विधान विषयक प्रस्थापनाओं संबंधी मंत्रिपरिषद के सभी विनिश्चय राज्यपाल को संसूचित करें।
- राज्य के कार्यो के प्रशासन सम्बधी और विधान विषयक प्रस्थापनाओं संबंधी जो जानकारी राज्यपाल मांगे, वह दे और
- किसी विषय को जिस पर किसी मंत्री ने विनिश्चय कर दिया है किन्तु मंत्रिपरिषद ने विचार नहीं किया है, राज्यपाल द्वारा अपेक्षा किये जाने पर परिषद् के समक्ष विचार के लिए रखे।
अन्य प्रावधान:
- विधानसभा के सदस्य का अधिकार: यदि एक मंत्री किसी सदन का सदस्य है, तो उसे दूसरे सदन की कार्यवाही में भाग लेने और बोलने का अधिकार होता है, लेकिन वह मतदान केवल उसी सदन में कर सकता है, जिसका वह सदस्य है।
- राज्यपाल के विवेकाधीन निर्णय: अनुच्छेद 163(2)- जिन मामलों में राज्यपाल को विवेकाधीन शक्तियाँ दी गई हैं, उनमें राज्यपाल का निर्णय अंतिम होगा। राज्यपाल के विवेकाधीन निर्णय न्यायिक जाँच के अधीन नहीं होते और उनके निर्णय को अंतिम माना जाता है।
- राज्यपाल का परामर्श लौटाने का प्रावधान: संविधान में यह प्रावधान नहीं है कि राज्यपाल मंत्रिपरिषद की सलाह को पुनर्विचार हेतु लौटा सकता है। हालाँकि, 44वें संविधान संशोधन (1978) द्वारा राष्ट्रपति के लिए यह प्रावधान किया गया।
- विशेष प्रावधान (मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, और ओडिशा): इन राज्यों में अनुसूचित जनजातियों के कल्याण के लिए एक विशेष भारसाधक मंत्री नियुक्त किया जाता है।
- मुख्यमंत्री विधानसभा का सत्र बुलाने और स्थगित करने के संबंध में राज्यपाल को सलाह देता है।
- इसके अलावा, मुख्यमंत्री राज्यपाल को विधानसभा भंग करने की सिफारिश भी कर सकता है।
राजस्थान के मुख्यमंत्री
हीरालाल शास्त्री (मनोनीत)
- जन्म 24 नवंबर, 1899 को जोबनेर (जयपुर) में हुआ।
- 1929 में ‘जीवन कुटीर’ और 1935 में पत्नी रतन शास्त्री के साथ मिलकर ‘वनस्थली विद्यापीठ’ (टोंक) की स्थापना की।
- 1937 में जयपुर प्रजामंडल से जुड़े, इसके अध्यक्ष व महासचिव रहे और 1939 में जेल गए।
- 1947 में अखिल भारतीय देशी राज्य लोक परिषद के महासचिव बने और संविधान सभा के सदस्य मनोनीत हुए।
- 1948 में जयपुर के प्रधानमंत्री और 7 अप्रैल 1949 को राजस्थान के प्रथम मनोनीत मुख्यमंत्री बने।
- 5 जनवरी, 1951 को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दिया, जिसके बाद सी.एस. वेंकटचारी सीएम बने।
- वे दूसरी लोकसभा के सांसद भी रहे और 1976 में इनके सम्मान में डाक टिकट जारी किया गया।
- उनकी आत्मकथा का नाम ‘प्रत्यक्ष जीवन शास्त्र’ और प्रसिद्ध गीत ‘प्रलय प्रतीक्षा नमो नमः’ है।
- उनका निधन 28 दिसंबर, 1974 को हुआ
सी.एस. वेंकटाचारी (मनोनीत)
- इनका जन्म 11 जुलाई, 1899 को मैसूर राज्य के कोलार जिले में हुआ था।
- ये भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) के अधिकारी थे, जिन्हें केंद्र सरकार द्वारा राजस्थान का मुख्यमंत्री मनोनीत किया गया था।
- इन्होंने हीरालाल शास्त्री के बाद 6 जनवरी, 1951 से 25 अप्रैल, 1951 तक (कुल 3 माह 20 दिन) कार्यभार संभाला।
- ये पूर्व में जोधपुर रियासत के दीवान और संविधान सभा के निर्वाचित सदस्य भी रहे थे।
- बाद में इन्होंने राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद के सचिव और कनाडा में भारत के उच्चायुक्त के रूप में सेवाएँ दीं।
श्री जयनारायण व्यास (मनोनीत)
- इनका जन्म 18 फरवरी, 1899 को जोधपुर में हुआ था।
- इन्होंने मारवाड़ हितकारिणी सभा की स्थापना की और भंवरलाल सर्राफ के साथ मिलकर जोधपुर प्रजामंडल की नींव रखी।
- वर्ष 1938 में इन्होंने सुभाष चंद्र बोस से प्रेरित होकर मारवाड़ लोक परिषद् का गठन किया।
- वर्ष 1948 में ये जोधपुर राज्य के प्रधानमंत्री बने और 26 अप्रैल, 1951 को राजस्थान के तीसरे मनोनीत मुख्यमंत्री के रूप में कार्यभार संभाला।
- इन्हीं के मुख्यमंत्री काल में राजस्थान के प्रथम विधानसभा चुनाव (1952) आयोजित हुए थे।
- वे प्रथम विधानसभा चुनाव हार गए थे, परंतु बाद में किशनगढ़ विधानसभा क्षेत्र से उपचुनाव जीतकर आए।
- प्रथम विधानसभा में इन्होंने प्रोटेम स्पीकर के रूप में भी कार्य किया।
- वे 1 नवंबर, 1952 से 12 नवंबर, 1954 तक निर्वाचित मुख्यमंत्री के पद पर रहे, इस प्रकार वे मनोनीत और निर्वाचित दोनों श्रेणियों में रहने वाले एकमात्र मुख्यमंत्री हैं।
- वे राजस्थान से दो बार राज्यसभा के लिए भी निर्वाचित हुए थे।
- इनका निधन 14 मार्च, 1963 को दिल्ली में हुआ और इनके सम्मान में भारतीय डाक विभाग ने 25 पैसे का डाक टिकट जारी किया।
- जयनारायण व्यास ने बम्बई से ‘अखण्ड भारत’ (दैनिक), ब्यावर से ‘आगीबाण’ (राजस्थानी भाषा का प्रथम राजनीतिक समाचार पत्र) और अंग्रेजी में ‘पीप’ (Peep) का संपादन किया।
- इन्हें इनके प्रखर व्यक्तित्व के कारण ‘लोकनायक’, ‘शेर-ए-राजस्थान’, ‘धुन के धनी’ और ‘लक्कड़ का फक्कड़’ जैसी उपाधियों से नवाजा गया है।
टीकाराम पालीवाल (प्रथम निर्वाचित)
- इनका जन्म 24 अप्रैल, 1909 को महुआ (वर्तमान दौसा जिला) में हुआ था।
- हीरालाल शास्त्री सरकार में इन्होंने राजस्व मंत्री के रूप में अपनी सेवाएँ दी थीं।
- वर्ष 1952 के प्रथम आम चुनाव में जयनारायण व्यास के दोनों सीटों से चुनाव हार जाने के कारण, टीकाराम पालीवाल 3 मार्च, 1952 को राजस्थान के प्रथम निर्वाचित मुख्यमंत्री बने।
- इन्होंने 1952 के आम चुनाव में दो विधानसभा सीटों (महुआ और मलारना चौड़) से जीत दर्ज की थी।
- ये राजस्थान के एकमात्र ऐसे मुख्यमंत्री हैं, जिन्होंने मुख्यमंत्री पद से हटने के बाद उपमुख्यमंत्री का पद संभाला (जयनारायण व्यास के मंत्रिमंडल में)।
- इन्हें राजस्थान की प्रथम ‘कामचलाऊ’ (केयर टेकर) सरकार के मुख्यमंत्री के रूप में भी जाना जाता है।
- इनके कार्यकाल में ही प्रथम विधानसभा में अविश्वास प्रस्ताव का सामना करना पड़ा था।
- ये वर्ष 1952 और 1957 में महुआ से विधानसभा सदस्य, 1958 में राज्यसभा सदस्य और 1962 में लोकसभा सदस्य के रूप में चुने गए।
- वर्ष 1962 में गठित प्रसिद्ध भ्रष्टाचार निरोधक समिति (संथानम समिति) के सदस्य के रूप में भी इन्होंने कार्य किया।
- हीरालाल शास्त्री की भांति टीकाराम पालीवाल भी राजस्थान के ऐसे मुख्यमंत्री रहे जो पद पर रहते हुए कभी सरकारी आवास में नहीं रहे।
3(2) जयनारायण व्यास
- मनोनीत – 26.04.1951 से 03.03.1952
- निर्वाचित – 01.11.1952 से 12.11.1954
- मुख्यमंत्री रहते हुए विधानसभा का चुनाव हार गये।
- किशनगढ़ सीट से कांग्रेस विधायक चांदमल मेहता के त्यागपत्र देने के बाद वहां हुए उपचुनाव में जयनारायण व्यास विजयी रहे तथा राज्य के मुख्यमंत्री बने।
- राज्यसभा सदस्य भी रहे तथा इसी पद पर रहते हुए मृत्यु हुई।
मोहनलाल सुखाड़िया
- इनका जन्म 31 जुलाई, 1916 को झालावाड़ में हुआ था और इनके पिता पुरुषोत्तम लाल सुखाड़िया बॉम्बे व सौराष्ट्र टीम के प्रसिद्ध क्रिकेटर थे।
- सुखाड़िया को आधुनिक राजस्थान का निर्माता माना जाता है और वे 38 वर्ष की आयु में राजस्थान के सबसे युवा मुख्यमंत्री बने थे।
- वे सर्वाधिक समय (16 वर्ष 194 दिन) तक राजस्थान के मुख्यमंत्री रहे और उन्होंने कुल चार बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ग्रहण की।
- प्रथम बार उन्हें राजप्रमुख सवाई मानसिंह द्वितीय ने शपथ दिलाई थी, जबकि वे एकमात्र ऐसे मुख्यमंत्री हैं जिन्हें एक ही राज्यपाल (गुरुमुख निहाल सिंह) द्वारा दो बार शपथ दिलाई गई।
- उनके राजनीतिक जीवन की शुरुआत नाथद्वारा में एक इलेक्ट्रिक दुकान से हुई, जो उदयपुर प्रजामंडल की बैठकों का मुख्य केंद्र बनी।
- इन्होंने 1 जून, 1938 को इंदुबाला के साथ अंतरजातीय विवाह किया और वर्ष 1943 में भीलवाड़ा की बाढ़ के दौरान राहत कार्यों में सक्रिय भूमिका निभाई।
- सुखाड़िया ने जयनारायण व्यास को विधायक दल के नेता के चुनाव में पराजित कर सत्ता संभाली और अपने कार्यकाल में जागीरदारी प्रथा का उन्मूलन किया।
- इन्होंने ही वर्ष 1962 में राजस्थान में संभागीय व्यवस्था को समाप्त किया था और राज्य में पहली बार संसदीय सचिव व उपमंत्री के पद सृजित किए।
- इनके कार्यकाल के दौरान ही 13 मार्च, 1967 को राजस्थान में पहली बार राष्ट्रपति शासन लागू हुआ था।
- इन्होंने मुख्यमंत्री रहते हुए सर्वाधिक विधानसभाओं और सर्वाधिक बार (6 बार) अविश्वास प्रस्तावों का सामना किया।
- केंद्रीय नेतृत्व के निर्देश पर इस्तीफा देने के बाद वे कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु के राज्यपाल भी रहे।
- उनका निधन 7 फरवरी, 1982 को बीकानेर में हुआ और उनके सम्मान में भारतीय डाक विभाग ने वर्ष 1988 में डाक टिकट जारी किया।
| कार्यकाल | अवधि | शपथ दिलाने वाले (राजप्रमुख/राज्यपाल) |
| प्रथम | 13.11.1954 से 11.04.1957 | सवाई मानसिंह द्वितीय (राजप्रमुख) |
| द्वितीय | 11.04.1957 से 11.03.1962 | गुरुमुख निहाल सिंह (राज्यपाल) |
| तृतीय | 12.03.1962 से 13.03.1967 | गुरुमुख निहाल सिंह (राज्यपाल) |
| चतुर्थ | 26.04.1967 से 09.07.1971 | सरदार हुकम सिंह (राज्यपाल) |
बरकतुल्लाह खाँ
- इनका जन्म 25 अगस्त, 1920 को जोधपुर में हुआ था।
- ये राजस्थान के प्रथम अल्पसंख्यक (मुस्लिम) मुख्यमंत्री बने थे।
- मोहनलाल सुखाड़िया के इस्तीफे के बाद इन्होंने 9 जुलाई, 1971 को मुख्यमंत्री का पदभार संभाला और 11 अक्टूबर, 1973 तक पद पर रहे।
- मुख्यमंत्री बनते समय वे अलवर की तिजारा विधानसभा सीट से चुनाव जीतकर आए थे।
- इनके कार्यकाल के दौरान ही वर्ष 1971 का भारत-पाकिस्तान युद्ध हुआ था।
- ये राजस्थान से प्रथम राज्यसभा चुनाव में निर्वाचित होकर राज्यसभा सदस्य भी रहे थे।
- बरकतुल्लाह खान राजस्थान के पहले ऐसे मुख्यमंत्री हैं जिनकी मृत्यु पद पर रहते हुए (11 अक्टूबर, 1973 को) हुई थी।
- इन्हें इनके मित्र और जनप्रिय स्वभाव के कारण ‘प्यारे मियाँ’ के नाम से भी जाना जाता था।
हरिदेव जोशी
- इनका जन्म 17 दिसंबर, 1920 को बांसवाड़ा जिले के खांडू ग्राम में हुआ था और वे डूंगरपुर प्रजामंडल के संस्थापक सदस्यों में से एक थे।
- वे राजस्थान के एक मात्र ऐसे नेता हैं जो वर्ष 1952 से अपनी मृत्यु तक लगातार 10 बार विधानसभा के सदस्य निर्वाचित हुए।
- इन्होंने पहली बार 1952 में डूंगरपुर से, 1957 में घाटोल से और उसके बाद लगातार 8 बार बांसवाड़ा विधानसभा क्षेत्र से चुनाव जीता।
- हरिदेव जोशी ने राजस्थान के मुख्यमंत्री के रूप में तीन बार शपथ ग्रहण की, लेकिन एक बार भी अपना पाँच वर्ष का कार्यकाल पूरा नहीं कर सके।
- अपने प्रथम कार्यकाल (1973-1977) के दौरान उन्होंने जोगिंदर सिंह और वेदपाल त्यागी जैसे राज्यपालों के साथ कार्य किया।
- इन्होंने वर्ष 1987 में अपने दूसरे कार्यकाल के दौरान राजस्थान में संभागीय व्यवस्था को पुनः लागू किया, जिसे मोहनलाल सुखाड़िया ने बंद कर दिया था।
- वर्ष 1988 में प्रसिद्ध दिवराला सती कांड के कारण उत्पन्न नैतिक दबाव के चलते उन्हें मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा था।
- तीसरे कार्यकाल (1989) में मुख्यमंत्री बनते समय वे विधानसभा के सदस्य नहीं थे और इस दौरान सुखदेव प्रसाद व डी.पी. चट्टोपाध्याय राज्यपाल रहे।
- वे राजस्थान विधानसभा में ‘सरकारी मुख्य सचेतक’ (1957-1964), नेता प्रतिपक्ष और ‘हरिजन सेवक संघ’ के अध्यक्ष भी रहे।
- प्रशासनिक अनुभव के साथ उन्होंने असम, मेघालय और पश्चिम बंगाल के राज्यपाल के रूप में भी अपनी सेवाएँ दीं।
- उनका निधन 28 मार्च, 1995 को हुआ और उनके सम्मान में बांसवाड़ा में ‘हरिदेव जोशी पत्रकारिता और जनसंचार विश्वविद्यालय’ की स्थापना की गई।
| कार्यकाल | अवधि | शपथ दिलाने वाले राज्यपाल |
| प्रथम | 11.10.1973 से 29.04.1977 | जोगिंदर सिंह |
| द्वितीय | 10.03.1985 से 20.01.1988 | ओ.पी. मेहरा |
| तृतीय | 04.12.1989 से 04.03.1990 | सुखदेव प्रसाद |
भैरोंसिंह शेखावत:
- इनका जन्म 23 अक्टूबर, 1925 को सीकर जिले के खाचरियावास ग्राम में हुआ था और इन्हें ‘बाबोसा’ तथा ‘राजस्थान का शेर’ जैसे उपनामों से जाना जाता है।
- शेखावत ने पुलिस इंस्पेक्टर की नौकरी से इस्तीफा देकर 1952 में पहली बार रामगढ़ सीट से जनसंघ के टिकट पर विधानसभा चुनाव जीता और वे कुल 10 बार विधायक रहे।
- वे वर्ष 1977 में राजस्थान के प्रथम गैर-कांग्रेसी मुख्यमंत्री बने और उन्होंने कुल तीन बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली।
- प्रथम बार मुख्यमंत्री नियुक्त होते समय वे विधानसभा सदस्य नहीं थे बल्कि मध्य प्रदेश से राज्यसभा सदस्य थे, बाद में उन्होंने छबड़ा उपचुनाव जीतकर सदस्यता प्राप्त की।
- अपने दूसरे कार्यकाल में वे धौलपुर से चुनाव जीते, जबकि तीसरे कार्यकाल में उन्होंने बाली और गंगानगर दो सीटों से चुनाव लड़ा, जिसमें वे केवल बाली से विजयी रहे।
- इनके कार्यकाल के दौरान ही राजस्थान में ‘अंत्योदय अन्न योजना’ शुरू हुई, जिसके कारण विश्व बैंक के अध्यक्ष रॉबर्ट मैक्कनमारा ने उन्हें ‘भारत का रॉकफेलर’ कहा था।
- ये राजस्थान विधानसभा में दो बार नेता प्रतिपक्ष, ग्यारहवीं विधानसभा में प्रोटेम स्पीकर रहे और इन्होंने अविश्वास व विश्वास प्रस्तावों का सामना भी किया।
- वर्ष 1975 के आपातकाल के दौरान इन्हें गिरफ्तार कर रोहतक जेल में रखा गया था और इनके प्रथम कार्यकाल में छठी विधानसभा को समय से पहले भंग किया गया था।
- शेखावत वर्ष 2002 में सुशील कुमार शिंदे को हराकर भारत के 11वें उपराष्ट्रपति बने और वे उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफा देकर राष्ट्रपति चुनाव लड़ने वाले (प्रतिभा पाटिल के विरुद्ध) प्रथम व्यक्ति थे।
- इन्हें वर्ष 2003 में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया और इनकी प्रसिद्ध पुस्तक का नाम “चिंतन और अवधारणा” है।
- इनका निधन 15 मई, 2010 को जयपुर के सवाई मानसिंह अस्पताल में हुआ।
| कार्यकाल | अवधि | शपथ दिलाने वाले राज्यपाल | चुनाव क्षेत्र (जीत) |
| प्रथम | 22.06.1977 से 16.02.1980 | रघुकुल तिलक | छबड़ा (उपचुनाव) |
| द्वितीय | 04.03.1990 से 15.12.1992 | डी.पी. चट्टोपाध्याय | धौलपुर |
| तृतीय | 04.12.1993 से 01.12.1998 | बलीराम भगत | बाली |
जगन्नाथ पहाड़िया
- इनका जन्म 15 जनवरी, 1932 को भरतपुर जिले के भुसावर में हुआ था।
- ये राजस्थान के प्रथम और अब तक के एकमात्र दलित मुख्यमंत्री बने।
- पहाड़िया राजस्थान के दूसरे ऐसे मुख्यमंत्री थे जो नियुक्ति के समय विधानसभा के सदस्य नहीं थे; उन्होंने बाद में वैर (भरतपुर) विधानसभा सीट से उपचुनाव जीता था।
- इन्होंने 6 जून, 1980 से 14 जुलाई, 1981 तक मुख्यमंत्री के रूप में कार्य किया।
- ये राजस्थान के ऐसे मुख्यमंत्री रहे जिन्होंने लोकसभा और राज्यसभा दोनों सदनों में प्रतिनिधित्व किया और केंद्र सरकार में मंत्री के रूप में भी सेवाएँ दीं।
- वे सवाई माधोपुर और बयाना सीटों से कुल चार बार लोकसभा सांसद (दूसरी, चौथी, पांचवीं और सातवीं लोकसभा) चुने गए तथा दो बार राज्यसभा सदस्य रहे।
- इनकी पत्नी शांति पहाड़िया भी लोकसभा सांसद रही थीं।
- मुख्यमंत्री के रूप में इनके कार्यकाल की सबसे प्रमुख उपलब्धि प्रदेश में सम्पूर्ण शराबबंदी लागू करना थी।
- प्रसिद्ध कवयित्री महादेवी वर्मा पर की गई एक आपत्तिजनक टिप्पणी के कारण उपजे विवाद के बाद इन्हें मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा था।
- राजनीतिक करियर के दौरान इन्होंने बिहार और हरियाणा के राज्यपाल के रूप में भी महत्वपूर्ण संवैधानिक दायित्व निभाए।
शिवचरण माथुर
- इनका जन्म 14 फरवरी, 1927 को मध्य प्रदेश में हुआ था और इन्होंने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत भीलवाड़ा से की।
- ये भीलवाड़ा म्यूनिसिपल बोर्ड के अध्यक्ष, जिला प्रमुख और राजस्थान विद्यार्थी कांग्रेस के जनरल सेक्रेटरी रहे।
- इन्होंने राजस्थान के मुख्यमंत्री के रूप में दो बार (1981-1985 और 1988-1989) शपथ ग्रहण की।
- मुख्यमंत्री नियुक्त होते समय ये भीलवाड़ा की मांडलगढ़ विधानसभा सीट से निर्वाचित होकर आए थे।
- वर्ष 1985 में डीग के विधायक राजा मानसिंह की पुलिस मुठभेड़ में मृत्यु के बाद उत्पन्न विवाद के कारण इन्हें मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा था।
- ये केंद्र और राज्य राजनीति में सक्रिय रहे; इन्होंने तीसरी और दसवीं लोकसभा के सदस्य (सांसद) के रूप में कार्य किया।
- राजस्थान सरकार में ये 1973 से 1977 तक खाद्य आपूर्ति, कृषि, पशुपालन और डेयरी मंत्री के पदों पर रहे।
- इन्होंने वर्ष 1999 से 2003 के बीच राजस्थान प्रशासनिक सुधार आयोग के अध्यक्ष के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
- अपने राजनीतिक करियर के उत्तरार्ध में इन्होंने असम के राज्यपाल के रूप में भी सेवाएँ दीं।
| कार्यकाल | अवधि | विशेष घटना |
| प्रथम | 14.07.1981 से 23.02.1985 | राजा मानसिंह कांड के कारण इस्तीफा |
| द्वितीय | 20.01.1988 से 04.12.1989 | प्रशासनिक सुधारों पर जोर |
हीरालाल देवपुरा –
- इनका जन्म वर्ष 1925 में हुआ था और इन्होंने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत की, हालांकि ये प्रथम विधानसभा चुनाव कुंभलगढ़ सीट से हार गए थे।
- हीरालाल देवपुरा के नाम राजस्थान के मुख्यमंत्री के रूप में न्यूनतम कार्यकाल (मात्र 16 दिन) का रिकॉर्ड है।
- इन्होंने 23 फरवरी, 1985 से 10 मार्च, 1985 तक मुख्यमंत्री के रूप में कार्य किया और इस दौरान वे कुंभलगढ़ विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर रहे थे।
- ये राजस्थान के ऐसे मुख्यमंत्री रहे जिन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान एक बार भी विधानसभा का सामना नहीं किया।
- मुख्यमंत्री पद के अलावा, इन्होंने राजस्थान विधानसभा के अध्यक्ष (Speaker) के रूप में भी गौरवपूर्ण सेवाएँ दीं।
- प्रशासनिक अनुभव के तौर पर इन्होंने दूसरे राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष के रूप में भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभाई।
अशोक गहलोत –
- इनका जन्म 3 मई, 1951 को जोधपुर में हुआ था और इन्होंने अपने सेवाभावी जीवन की शुरुआत में पश्चिम बंगाल में शरणार्थी कैंपों में कार्य किया था।
- अशोक गहलोत ने कुल तीन बार राजस्थान के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली और मोहनलाल सुखाड़िया के बाद राजस्थान के दूसरे सबसे लंबे समय तक रहने वाले मुख्यमंत्री बने।
- ये राजस्थान के चौथे ऐसे मुख्यमंत्री थे जो नियुक्ति के समय विधानसभा के सदस्य नहीं थे (1998 में); बाद में इन्होंने सरदारपुरा सीट से मानसिंह देवड़ा के इस्तीफे के बाद उपचुनाव जीता।
- ये सरदारपुरा विधानसभा क्षेत्र से लगातार विधायक रहे हैं और अब तक 5 बार सांसद (लोकसभा) व 6 बार विधायक निर्वाचित हुए हैं।
- मुख्यमंत्री पद पर रहते हुए इन्होंने रिकॉर्ड 10 बार राज्य का बजट पेश किया और ‘पानी बचाओ, बिजली बचाओ, सबको पढ़ाओ, वृक्ष लगाओ’ का प्रसिद्ध नारा दिया।
- इन्होंने केंद्र सरकार में सातवीं, आठवीं, दसवीं, ग्यारहवीं और बारहवीं लोकसभा के दौरान नागरिक उड्डयन, पर्यटन और खेल जैसे महत्वपूर्ण विभागों में केंद्रीय मंत्री के रूप में कार्य किया।
- 1977 में अपना पहला विधानसभा चुनाव हारने के बाद, इन्होंने राजनीति में लंबी पारी खेली और शिवचरण माथुर के मंत्रिमंडल में भी थोड़े समय के लिए मंत्री रहे।
- इनके तीनों कार्यकालों के दौरान इन्होंने अंशुमान सिंह, एस.के. सिंह, प्रभा राव, मार्गरेट अल्वा, कल्याण सिंह और कलराज मिश्र जैसे कई राज्यपालों के साथ कार्य किया।
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कार्यकाल |
अवधि |
साथ में कार्य करने वाले राज्यपाल |
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प्रथम कार्यकाल |
01.12.1998 से 08.12.2003 |
1. नवरंग लाल टिबरेवाल (कार्यवाहक) 2. अंशुमान सिंह 3. निर्मल चंद जैन 4. कैलाशपति मिश्रा (अतिरिक्त प्रभार) |
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द्वितीय कार्यकाल |
13.12.2008 से 13.12.2013 |
1. एस. के. सिंह 2. प्रभा राव 3. शिवराज पाटिल4. मार्गरेट अल्वा |
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तृतीय कार्यकाल |
17.12.2018 से 15.12.2023 |
1. कल्याण सिंह 2. कलराज मिश्र |
वसुंधरा राजे –
- इनका जन्म 8 मार्च, 1953 को मुंबई में हुआ था और वे राजस्थान की प्रथम महिला मुख्यमंत्री बनीं।
- इन्होंने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत 1985 में धौलपुर से विधायक बनकर की, जिसके बाद वे 12वीं से 16वीं विधानसभा तक लगातार झालरापाटन (झालावाड़) से निर्वाचित हो रही हैं।
- संसदीय राजनीति में इन्होंने झालावाड़ लोकसभा सीट से लगातार 5 बार (9वीं से 13वीं लोकसभा) सांसद के रूप में प्रतिनिधित्व किया।
- अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में इन्होंने केंद्रीय राज्य मंत्री (विदेश मामले) तथा लघु एवं सूक्ष्म उद्योग, पेंशन और सामाजिक सुधार जैसे महत्वपूर्ण विभागों को संभाला।
- ये दो बार राजस्थान की मुख्यमंत्री रहीं और राजस्थान विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष के रूप में भी अपनी भूमिका निभाई।
- मुख्यमंत्री के रूप में इन्होंने कुल 10 बार बजट पेश किया (दोनों कार्यकालों को मिलाकर)।
- इनके प्रथम कार्यकाल के दौरान ही राजस्थान को प्रतिभा पाटिल के रूप में प्रथम महिला राज्यपाल मिलीं।
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कार्यकाल |
अवधि |
साथ में कार्य करने वाले राज्यपाल |
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प्रथम कार्यकाल |
08.12.2003 से 13.12.2008 |
1. निर्मल चंद जैन 2. कैलाशपति मिश्रा (अतिरिक्त प्रभार) 3. मदन लाल खुराना 4. टी.वी. राजेश्वर (अतिरिक्त प्रभार) 5. प्रतिभा पाटिल (प्रथम महिला राज्यपाल) 6. ए.आर. किदवई (अतिरिक्त प्रभार) 7. शैलेंद्र कुमार सिंह |
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द्वितीय कार्यकाल |
13.12.2013 से 17.12.2018 |
1. मार्गरेट अल्वा 2. राम नाईक (अतिरिक्त प्रभार) 3. कल्याण सिंह |
भजनलाल शर्मा (राजस्थान के वर्तमान मुख्यमंत्री)
- इनका जन्म 15 दिसंबर, 1967 को भरतपुर जिले की नदबई तहसील के अटारी गाँव में हुआ था।
- इन्होंने अपनी उच्च शिक्षा राजस्थान विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान में M.A. (स्नातकोत्तर) के रूप में पूर्ण की है।
- भजनलाल शर्मा वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव में जयपुर की सांगानेर विधानसभा सीट से जीतकर पहली बार विधायक बने।
- इन्होंने 15 दिसंबर, 2023 को राजस्थान के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली, इन्हें शपथ राज्यपाल कलराज मिश्र द्वारा दिलाई गई।
- मुख्यमंत्री बनने से पहले ये भारतीय जनता पार्टी के संगठन में अत्यंत सक्रिय रहे और लगातार चार बार प्रदेश महामंत्री के पद पर कार्य किया।
- इन्होंने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत जमीनी स्तर से की थी और वे अपने पैतृक गाँव अटारी के सरपंच भी रह चुके हैं।
- ये छात्र जीवन से ही ABVP और RSS से जुड़े रहे हैं तथा 1992 के श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन के दौरान जेल भी गए थे।
- इनके साथ राज्य में दो उपमुख्यमंत्री, दीया कुमारी और प्रेम चंद बैरवा ने भी शपथ ग्रहण की।
राजस्थान के उपमुख्यमंत्रियों की सूची
| क्र.सं. | उपमुख्यमंत्री | अवधि | विधानसभा | मुख्यमंत्री | विशेष तथ्य |
| 1 | टीकाराम पालीवाल | 01.11.1952 से 13.11.1954 | प्रथम | जयनारायण व्यास | राज्य के प्रथम उपमुख्यमंत्री। |
| 2 | हरिशंकर भाभड़ा | 04.12.1993 से 30.11.1998 | 10वीं | भैरोंसिंह शेखावत | सर्वाधिक लंबी अवधि (4 वर्ष, 11 माह, 28 दिन) तक पद पर रहे। ये विधानसभा अध्यक्ष भी रहे। |
| 3 | बनवारी लाल बैरवा | 19.05.2002 से 04.12.2003 | 11वीं | अशोक गहलोत | – |
| 4 | डॉ. कमला बेनीवाल | 12.01.2003 से 04.12.2003 | 11वीं | अशोक गहलोत | राज्य की प्रथम महिला उपमुख्यमंत्री एवं पहली महिला मंत्री। इनका कार्यकाल न्यूनतम रहा। |
| 5 | सचिन पायलट | 17.12.2018 से 14.07.2020 | 15वीं | अशोक गहलोत | – |
| 6 | दीया कुमारी | 15.12.2023 से निरंतर | 16वीं | भजनलाल शर्मा | वर्तमान उपमुख्यमंत्री। |
| 7 | प्रेम चंद बैरवा | 15.12.2023 से निरंतर | 16वीं | भजनलाल शर्मा | वर्तमान उपमुख्यमंत्री। |
राजस्थान के मुख्यमंत्री: विशिष्ट तथ्य
राजस्थान के मनोनीत मुख्यमंत्री –
- हीरालाल शास्त्री
- सी.एस. वेंकटाचारी
- जयनारायण व्यास
राजस्थान के ऐसे मुख्यमंत्री जो राजस्थान विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष रहे-
- भैरोंसिंह शेखावत
- हरिदेव जोशी
- वसुंधरा राजे
राजस्थान के ऐसे मुख्यमंत्री जो संविधान सभा के सदस्य रहे-
- हीरालाल शास्त्री
- सी.एस.वेंकटाचारी
- जयनारायण व्यास
राजस्थान के ऐसे मुख्यमंत्री जो राज्यसभा के सदस्य रहे-
- जयनारायण व्यास
- भैरोंसिह शेखावत
- जगन्नाथ पहाड़िया
राजस्थान के ऐसे मुख्यमंत्री जो लोकसभा के सदस्य रहे-
- हीरालाल शास्त्री
- टीकाराम पालीवाल
- जगन्नाथ पहाड़िया
- शिवचरण माथुर
- वसुंधरा राजे
- अशोक गहलोत
शपथ के समय विधानसभा सदस्य नहीं थे
- भैरोंसिंह शेखावत (प्रथम बार)
- जगन्नाथ पहाड़िया
- हरिदेव जोशी (तीसरी बार)
- अशोक गहलोत (प्रथम बार)।
केवल 01 ही बार राजस्थान के मुख्यमंत्री:
- हीरा लाल शास्त्री 07 Apr 1949 -05 Jan 1951 INC
- सी एस वेंकटाचार्य 06 Jan 1951- 25 Apr 1951 INC
- टीकाराम पालीवाल 03 Mar 1952 – 31 Oct 1952 INC
- बरकतुल्ला खान 09 Jul 1971- 11 Aug 1973 INC
- जगन्नाथ पहाड़िया 06 Jun 1980 – 13 Jul 1981 INC
मुख्यमंत्री जिन्होंने बाद में राज्यपाल के रूप में कार्य किया
- मोहनलाल सुखाडिया : कर्नाटक, आन्ध्रप्रदेश, तमिलनाडु
- हरिदेश जोशी : असम, मेघालय और पश्चिम बंगाल
- जगन्नाथ पहाड़िया: बिहार, हरियाणा
- शिवचरण माथुर: असम
एक से अधिक बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ग्रहण करने वाले मुख्यमंत्री –
- मोहनलाल सुखाड़िया (4 बार)
- हरिदेव जोशी (3 बार)
- भैरोंसिंह शेखावत (3 बार)
- अशोक गहलोत (3 बार)
- जयनारायण व्यास (2 बार)
- शिवचरण माथुर (2 बार)
- वसुंधरा राजे (2 बार)
सर्वाधिक कार्यकाल वाले मुख्यमंत्री –
- मोहनलाल सुखाड़िया (लगभग 17 वर्ष)
- अशोक गहलोत
- भैरोंसिंह शेखावत
न्यूनतम अवधि वाले मुख्यमंत्री :-
- हीरालाल देवपुरा (मात्र 16 दिन)।
- मुख्यमंत्री सहायता कोष:
- इसकी स्थापना 1 अप्रैल, 1999 को की गई।
- विधायक क्षेत्र विकास निधि (MLA LAD):
- इसका शुभारंभ 1999-2000 में अशोक गहलोत के समय हुआ। वर्तमान में यह राशि 5 करोड़ रुपये प्रति वर्ष है।
मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO)
- स्थापना: 1951
- प्रशासनिक प्रमुख: मुख्यमंत्री का सचिव (वरिष्ठ IAS अधिकारी)।
- मुख्य कार्य: मुख्यमंत्री को नीतिगत मुद्दों पर सलाह देना और विधानसभा कार्यों में सहायता करना।
- 1998 से पूर्व
- दिसंबर 1998 से पहले, मुख्यमंत्री के सचिव के अधीन निम्नलिखित अधिकारियों का ढांचा कार्यरत था:
- उप सचिव और सहायक सचिव।
- तीन विशेषाधिकारी (O.S.D.)।
- तीन प्रेस सलाहकार।
- उपनिदेशक और पुलिस अधीक्षक (सतर्कता)।
- अन्य मंत्रालयिक कर्मचारी।
- दिसंबर 1998 से पहले, मुख्यमंत्री के सचिव के अधीन निम्नलिखित अधिकारियों का ढांचा कार्यरत था:
- 1998 का परिवर्तन: श्री अशोक गहलोत ने संगठन में सुधार करते हुए दो सचिवों (प्रथम व द्वितीय) की नियुक्ति की।
- कार्य विभाजन: इन दो सचिवों के बीच राज्य के 14 विभागों का बंटवारा कर उन्हें समन्वयकर्ता (Coordinator) बनाया गया।
- वर्तमान ढांचा: सचिवों के अधीन उप-सचिव, विशेषाधिकारी (OSD) और अन्य कार्मिक कार्यरत होते हैं।
मुख्यमंत्री की अध्यक्षता और सदस्यता
- अध्यक्ष:राजस्थान राज्य आयोजना बोर्ड, राज्य नियोजन विभाग, और राज्य पर्यटन सलाहकार समिति।
- सभापति: राजस्थान राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण।
- उपाध्यक्ष: राजस्थान राज्य रेड क्रॉस सोसाइटी।
- सदस्य: नीति आयोग (NITI Aayog), राष्ट्रीय विकास परिषद (NDC), और अनुच्छेद 263 के तहत गठित अंतर-राज्य परिषद।
रीति (RITI) – राजस्थान इंस्टिट्यूट ऑफ ट्रांसफार्मेशन एंड इनोवेशनमुख्यमंत्री इसके अध्यक्ष होते हैं।गठन: 3 मार्च, 2024 को किया गया।कार्य प्रारंभ: 13 मार्च, 2024 से।
महत्वपूर्ण तथ्य-
- राजस्थान की मंत्री परिषद सामूहिक रूप से विधानसभा के प्रति उत्तरदायी होती है अर्थात यदि विधानसभा किसी एक मंत्री के विरुद्ध अविश्वास प्रस्ताव पारित कर दे तो वह समस्त मंत्री परिषद के विरुद्ध अविश्वास प्रस्ताव माना जाएगा ऐसी स्थिति में मुख्यमंत्री सहित सभी मंत्रियों को त्यागपत्र देना पड़ेगा।
- यदि राजस्थान का मुख्यमत्री पद से त्यागपत्र देता है तो यह त्यागपत्र परे मंत्रिमंडल के सदस्यों का त्यागपत्र माना जाता है। इसका मतलब मुख्यमंत्री के त्यागपत्र के समय सभी मंत्रियों को भी त्यागपत्र देता पड़ता है
- यदि कोई मंत्री अपने पद से त्यागपत्र देता है तो अन्य मंत्रिमंडल के सदस्यों को त्यागपत्र देने की आवश्यकता नही होती है।
- मंत्रिमंडल को निर्णय प्रक्रिया में सहायता प्रदान करने के लिए मंत्रिमंडलीय सचिवालय कार्य करता है। जिसका प्रशासनिक प्रमुख सचिव तथा राजनीतिक प्रमुख मुख्यमंत्री होता है।
- राजस्थान विधानसभा नियमावली के अनुसार मंत्री शब्द का तात्पर्य है
- मंत्री परिषद का कोई सदस्य
- राज्य मंत्री
- उप मंत्री से है
मुख्यमंत्री एवं मंत्रिपरिषद् के सदस्यगण की अद्यतन सूची
श्री भजन लाल शर्मा, मुख्यमंत्री
- कार्मिक विभाग
- आबकारी विभाग
- गृह विभाग
- आयोजना विभाग
- सामान्य प्रशासन विभाग
- नीति निर्धारण प्रकोष्ठ – मुख्यमंत्री सचिवालय सूचना एवं जनसंपर्क विभाग
- भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी)
सुश्री दिया कुमारी, उप मुख्यमंत्री
- वित्त विभाग
- पर्यटन विभाग
- कला, साहित्य, संस्कृति और पुरात्व विभाग
- सार्वजनिक निर्माण विभाग
- महिला एवं बाल विकास विभाग
- बाल अधिकारिता विभाग
- पंचायतीराज के अधीनस्थ महिला एवं बाल विकास विभाग का स्वतंत्र प्रभार
डॉ. प्रेमचन्द बैरवा, उप मुख्यमंत्री
- तकनीकी शिक्षा विभाग
- उच्च शिक्षा विभाग
- आयुर्वेद, योग व प्राकृतिक चिकित्सा, यूनानी, सिद्धा एवं होम्योपैथी (आयुष) विभाग
- परिवहन एवं सड़क सुरक्षा विभाग
कर्नल राज्यवर्धन राठौड़
- उद्योग एवं वाणिज्य विभाग
- सूचना, प्रौद्योगिकी एवं संचार विभाग
- युवा मामले और खेल विभाग
- कौशल, नियोजन एवं उद्यमिता विभाग सैनिक कल्याण विभाग
श्री मदन दिलावर
- विद्यालयी शिक्षा विभाग (स्कूल एजूकेशन)
- पंचायती राज विभाग
- संस्कृत शिक्षा विभाग
- पंचायतीराज के अधीनस्थ प्राथमिक शिक्षा विभाग का स्वतंत्र प्रभार
श्री कन्हैेयालाल चौधरी
- जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग .
- भू-जल विभाग
श्री जोगाराम पटेल
- संसदीय कार्य विभाग
- विधि एवं विधिक कार्य विभाग और विधि परामर्शी कार्यालय
- न्याय विभाग
श्री सुरेश सिंह रावत
- जल संसाधन विभाग
- जल संसाधन (आयोजना) विभाग
श्री अविनाश गहलोत
- सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग ,
- पंचायतीराज के अधीनस्थ सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग का स्वतंत्र प्रभार
श्री सुमित गोदारा
- खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग
- उपभोक्ता मामले विभाग
श्री जोराराम कुमावत
- पशुपालन एवं डेयरी विभाग
- गोपालन विभाग
- देवस्थान विभाग
श्री बाबूलाल खराड़ी
- जनजाति क्षेत्रीय विकास विभाग गृह रक्षा विभाग
श्री हेमंत मीणा
- राजस्व विभाग
- उपनिवेशन विभाग
मंत्रिपरिषद की संरचना:
- मंत्रिपरिषद में तीन प्रकार के मंत्री होते हैं:
- कैबिनेट मंत्री
- राज्य मंत्री
- उपमंत्री
- मंत्रिपरिषद की एक छोटी, लेकिन महत्वपूर्ण इकाई मंत्रिमंडल होती है, जिसमें प्रथम स्तर के मंत्री सम्मिलित होते हैं।
- मंत्रिमंडल की बैठकें सरकार की नीति निर्माण और निर्णय लेने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
संसदीय सचिव
- संसदीय सचिव मंत्रिपरिषद का हिस्सा नहीं होते।
- इनकी नियुक्ति मुख्यमंत्री द्वारा की जाती है
- शपथ भी मुख्यमंत्री के समक्ष लेते हैं।
- मुख्यमंत्री मोहनलाल सुखाड़िया ने राजस्थान में पहली बार संसदीय सचिव व उपमंत्री बनाये।
