महाधिवक्ता(Advocate General)

महाधिवक्ता(Advocate General) राजस्थान राज्य का सर्वोच्च विधिक अधिकारी होता है, जो राज्य सरकार को विधिक मामलों में सलाह प्रदान करता है। यह पद संविधान के अनुच्छेद 165 के अंतर्गत स्थापित है और राज्य की न्यायिक तथा प्रशासनिक व्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। राजस्थान राजनीतिक व्यवस्था के अंतर्गत महाधिवक्ता शासन और न्यायपालिका के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में कार्य करता है

  • यह एक संवैधानिक पद है।
  • इसका उल्लेख भारतीय संविधान के अनुच्छेद 165 में किया गया है।
  • यह राज्य का सर्वोच्च विधि अधिकारी होता है।
  • राज्य की कार्यपालिका में निम्न पद शामिल होते हैं –
    • राज्यपाल
    • मुख्यमंत्री
    • मंत्रिपरिषद
    • महाधिवक्ता
  • कार्यालय राजस्थान में राज्य पुनर्गठन अधिनियम, 1956 के बाद स्थापित हुआ।
  • राजस्थान के प्रथम महाधिवक्ता – जी. सी. कासलीवाल (1957) थे।

राज्य के महाधिवक्ता से संबंधित अनुच्छेद

अनुच्छेदविषय-वस्तु
165राज्य के महाधिवक्ता
177राज्य विधायिका के सदनों तथा उसकी समितियों में महाधिवक्ता के अधिकार
194महाधिवक्ता की शक्तियाँ तथा विशेषाधिकार 

संवैधानिक प्रावधान (अनुच्छेद 165)

नियुक्ति
  • प्रत्येक राज्य का राज्यपाल ऐसे व्यक्ति को महाधिवक्ता नियुक्त करता है, जो उच्च न्यायालय का न्यायाधीश बनने के लिए अर्हित (qualified) हो।
योग्यता
  • महाधिवक्ता बनने के लिए वही योग्यता आवश्यक है जो उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के लिए होती है:
    • भारत का नागरिक होना
    • कम से कम 10 वर्ष तक उच्च न्यायालय में अधिवक्ता रहा हो या
    • कम से कम 10 वर्ष तक न्यायिक पद पर कार्य किया हो

कार्यकाल

  • निश्चित कार्यकाल नहीं होता।
  • वह राज्यपाल के प्रसादपर्यंत (Pleasure of Governor) पद पर बना रहता है।
  • राज्यपाल उसे किसी भी समय पद से हटा सकता है।
  • वह राज्यपाल को अपना त्यागपत्र भी दे सकता है।

वेतन / पारिश्रमिक

  • वेतन व भत्ते राज्यपाल द्वारा निर्धारित किए जाते हैं।

विधानमंडल में अधिकार (अनुच्छेद 177)

  • राज्य का महाधिवक्ता राज्य विधानसभा की कार्यवाही में भाग ले सकता है।
  • सदन में भाषण दे सकता है और चर्चा में भाग ले सकता है।
  • विधानसभा की समितियों में भी भाग ले सकता है।
  • लेकिन मतदान (Voting) का अधिकार नहीं होता।

कार्य व शक्तियाँ (अनुच्छेद 194)

  • राज्य सरकार को विधि (कानूनी) संबंधी विषयों पर सलाह देना।
  • राज्यपाल द्वारा सौंपे गए विधिक कर्तव्यों का पालन करना।
  • संविधान या अन्य कानूनों द्वारा दिए गए कार्यों का निर्वहन करना।
  • राज्य सरकार का उच्च न्यायालय व अन्य न्यायालयों में प्रतिनिधित्व करना।
  • राज्य के किसी भी न्यायालय में सुनवाई (Right of Audience) का अधिकार।
  • सरकार से जुड़े मामलों में कानूनी राय देना।

राजस्थान के महाधिवक्ता (क्रमानुसार)

क्र.सं.

महाधि वक्ता का नाम

महत्वपूर्ण तथ्य

1

जी. सी. कासलीवाल

  • प्रथम महाधिवक्ता
  • सबसे लंबा कार्यकाल

2

डॉ. लक्ष्मी मल सिंघवी

पद्मभूषण से सम्मानित

3

डॉ. एस. के. तिवारी

6

ए. के. माथुर

कार्यवाहक (मार्च 1982 में)

16

जी. एस. बाफना

17

एन. एम. लोढ़ा

18

महेंद्र सिंह सिंघवी

19

राजेन्द्र प्रसाद गुप्ता 

  • वर्तमान
  • पदभार ग्रहण – 3 फरवरी 2024
एक से अधिक बार AG बनने वाले –
  • डॉ. एस. के. तिवारी – 2 बार
  • बी. पी. अग्रवाल – 3 बार (सबसे अधिक बार)
  • एस. एम. मेहता – 2 बार
  • एन. एम. लोढ़ा – 2 बार

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