राजस्थान में 1857 की क्रांति : कारण, घटनाएँ और प्रभाव राजस्थान का इतिहास का एक महत्वपूर्ण अध्याय है, जिसमें राजस्थान में 1857 की क्रांति, उस समय के पोलिटिकल एजेंट, 1857 की क्रांति के दौरान शासक, राजस्थान की 6 सैनिक छावनियाँ (1857 के समय) तथा राजस्थान के प्रमुख क्रांतिकारी जैसे विषयों का समग्र अध्ययन किया जाता है। यह विषय अंग्रेज़ी शासन के विरुद्ध हुए जनआंदोलन की व्यापकता और उसके दूरगामी प्रभावों को समझने में सहायक है।
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राजस्थान में 1857 की क्रांति
- पूर्व पृष्ठभूमि (1818–1856) –
- 1818 ई. – राजस्थान की रियासतों ने अंग्रेजों से संधियाँ कीं।
- अंग्रेजों ने आंतरिक शासन में हस्तक्षेप शुरू किया।
- सामंतों के अधिकार सीमित हुए।
- किसानों, व्यापारियों, कारीगरों पर आर्थिक शोषण बढ़ा।
- ब्राउन बेस राइफल के स्थान पर एनफील्ड राइफल लागू हुई।
- कारतूसों में गाय व सूअर की चर्बी – धार्मिक असंतोष फैला।
- राजपूताना एजेंसी की स्थापना – 1832 ई., मुख्यालय अजमेर।
- 1857 में ए.जी.जी. – जॉर्ज पैट्रिक लॉरेंस।
1857 की क्रांति के दौरान पोलिटिकल एजेंट:
| रियासत | पोलिटिकल एजेंट | शासक |
| जयपुर | विलियम ईडन | राम सिंह द्वितीय |
| जोधपुर | मैक-मेसन | तख्त सिंह |
| उदयपुर | शावर्स | स्वरूप सिंह |
| कोटा | मेजर बर्टन | राम सिंह द्वितीय |
| भरतपुर | मॉरिसन | जसवंत सिंह |
| सिरोही | जे.डी हॉल | शिव सिंह |

1857 की क्रांति के दौरान शासक
| राज्य (रियासत) | शासक |
| धौलपुर | महाराजा भगवंत सिंह |
| भरतपुर | महाराजा जसवंत सिंह |
| जोधपुर | महाराजा तख्त सिंह |
| उदयपुर (मेवाड़) | महाराणा स्वरूप सिंह |
| बीकानेर | महाराजा सरदार सिंह |
| करौली | महाराजा मदन पाल |
| टोंक | नवाब वजीरुदौला |
| बूंदी | महाराव रामसिंह |
| जयपुर | महाराजा सवाई रामसिंह द्वितीय |
| अलवर | महाराजा विनय सिंह |
| प्रतापगढ़ | महारावल दलपतसिंह |
| बांसवाड़ा | महारावल लक्ष्मण सिंह |
| डूंगरपुर | महारावल उदयसिंह |
| झालावाड़ | राजराणा पृथ्वी सिंह |
| जैसलमेर | महारावल रणजीत सिंह |
| कोटा | महाराव रामसिंह द्वितीय |
| सिरोही | महारावल शिवसिंह |
1857 की क्रांति के प्रतीक व तथ्य –
- कमल का फूल व रोटी – प्रतीक।
- घोषित तिथि – 31 मई 1857।
- वास्तविक आरंभ – 10 मई 1857।
- नेता – बहादुरशाह जफर।
- गवर्नर जनरल – कैनिंग।
राजस्थान की 6 सैनिक छावनियाँ (1857 के समय)
- नसीराबाद (अजमेर) – 15वीं बंगाल नेटिव इन्फैंट्री
- नीमच (म.प्र.) – फर्स्ट बंगाल कैवेलरी
- देवली (टोंक) – कोटा कंटिग्जेंट
- ब्यावर – मेर रेजीमेंट
- एरिनपुरा (पाली) – जोधपुर लीजन
- खैरवाड़ा (उदयपुर) – मेवाड़ भील कोर
- कुल सैनिक – लगभग 5000
- सबसे शक्तिशाली – नसीराबाद छावनी
क्रांति का वास्तविक प्रारंभ (मेरठ → नसीराबाद)
- 10 मई 1857 – मेरठ से क्रांति प्रारंभ।
- 28 मई 1857 – नसीराबाद (अजमेर) में विद्रोह।
- 15वीं बंगाल नेटिव इन्फैंट्री ने विद्रोह किया।
- मेजर स्पॉटिस हुड व न्यूब्री की हत्या।
- छावनी लूटी गई।
- 18 जून 1857 – विद्रोही सैनिक दिल्ली पहुँचे।
नीमच विद्रोह (3 जून 1857) –
- मोहम्मद अली बेग ने अंग्रेजों की शपथ मानने से इंकार किया।
- नेतृत्त्व – हीरासिंह।
- शस्त्रागार जलाया गया।
- एक अंग्रेज अफसर की पत्नी व बच्चों की हत्या।
- नीमच → चित्तौड़ → हमीरगढ़ → बनेड़ा → शाहपुरा।
- 5 जून – देवली छावनी पर अधिकार।
- टोंक → आगरा → दिल्ली प्रस्थान।
एरिनपुरा विद्रोह (21 अगस्त 1857, पाली) –
- जोधपुर लीजन ने विद्रोह किया।
- आबू में अंग्रेजों पर हमला।
- शेष सैनिकों को साथ लेकर दिल्ली के लिए कूच।
- खरवा में आऊवा के ठाकुर कुशाल सिंह से भेंट।
- बिठोड़ा का युद्ध (08 सितम्बर 1857)-
- चेलावास का युद्ध (18 सितम्बर 1857 – गोरे बनाम काले) –
- सेना का नेतृत्त्व – जॉर्ज लॉरेंस।
- लॉरेंस पराजित हुआ।
- जोधपुर का एजेंट मॉक मेसन मारा गया।
- जोधपुर लीजन दिल्ली की ओर बढ़ी।
कोटा विद्रोह (14–15 अक्टूबर 1857) –
- 14 अक्टूबर – मेजर बर्टन ने महाराव को चेतावनी दी।
- 15 अक्टूबर – मेजर बर्टन, उसके पुत्र व डॉक्टर की हत्या।
- नेतृत्त्व – लाला जयदयाल व मेहराब खां।
- महाराव से पत्र पर हस्ताक्षर –
- हत्या का दायित्व
- लाला जयदयाल को मुख्य प्रशासक घोषित।
- धौलपुर (अक्टूबर–दिसम्बर 1857) –
- महाराजा भगवंत सिंह अंग्रेज पक्षधर।
- ग्वालियर व इन्दौर के सैनिकों का प्रवेश।
- 2 माह विद्रोहियों का नियंत्रण।
- दिसम्बर 1857 – विद्रोह का दमन।
आऊवा का युद्ध (20 जनवरी 1858) –
- अंग्रेज सेना – ब्रिगेडियर होम्स।
- कुशाल सिंह ने सलूम्बर में शरण ली।
- पृथ्वी सिंह ने नेतृत्त्व किया।
- किला गिराया गया।
- सुगाली माता की मूर्ति अजमेर ले जाई गई।
- 1860 – कुशाल सिंह का आत्मसमर्पण।
- मेजर टेलर आयोग – साक्ष्य के अभाव में रिहाई।
तात्या टोपे का राजस्थान भ्रमण –
- प्रथम आगमन –
- मांडलगढ़ (भीलवाड़ा) से प्रवेश।
- कुआडा युद्ध – हार → बूंदी।
- नाथद्वारा → चित्तौड़ → सिंघोली → बाँसवाड़ा → झालावाड़।
- पृथ्वी सिंह को हराया।
- द्वितीय आगमन – 11 सितम्बर –
- बाँसवाड़ा में लक्ष्मण सिंह पराजित।
- सलूम्बर → भीण्डर → टोंक।
- नसीर मोहम्मद खान का सहयोग।
- 21 जनवरी – सीकर पहुँचे।
- मानसिंह ने धोखे से पकड़वाया।
- 8 अप्रैल – फाँसी का आदेश।
- 18 अप्रैल 1859 – शिप्री (शिवपुरी) में फाँसी।
- सीकर में तात्या टोपे की छतरी।
राजस्थान के प्रमुख क्रांतिकारी –
- कुशल सिंह – आऊवा
- पृथ्वी सिंह – आऊवा
- लाला जयदयाल – कोटा
- मेहराब खां – कोटा
- हीरासिंह – नीमच
- डूंगर जी ,जवाहर जी – सीकर
- अमरचंद बाठिया – बीकानेर
- तात्या टोपे – समग्र राजस्थान
राजस्थान की प्रमुख महिला क्रांतिकारी –
सुधा कंवर (लाडनूं–डीडवाना–कुचामन)
- पुरुष वेश में युद्ध।
- अंग्रेजों को भगाया।
- राजस्थान की एकमात्र प्रसिद्ध महिला योद्धा।
- राजस्थानी साहित्यकारों की भूमिका –
- बाँकीदास – “आयो अंग्रेज मुलक रे ऊपर”
- सूर्यमल्ल मीसण – “वीर सतसई” (288 दोहे)
विभिन्न रियासतों की भूमिका –
- भरतपुर –
- जनता क्रांतिकारियों के साथ।
- सेना अंग्रेजों के पक्ष में।
- अलवर –
- दीवान फैजुल्ला खान – विद्रोही समर्थक।
- महाराजा बन्नेसिंह – अंग्रेज समर्थक।
- बीकानेर –
- महाराजा सरदार सिंह – अंग्रेज समर्थक।
- 41 गाँव पुरस्कार स्वरूप मिले।
- जयपुर –
- विलायत, सादुल, उस्मान – विद्रोही।
- शासक रामसिंह द्वितीय – अंग्रेज समर्थक।
- टोंक –
- नवाब अंग्रेज समर्थक।
- जनता व सेना विद्रोही।
- महिलाओं की भागीदारी।
- कोटा का पतन (22 मार्च 1858) –
- जनरल रॉबर्ट्स ने कोटा पुनः जीता।
- लाला जयदयाल व मेहराब खां को फाँसी।
- रामसिंह-II की तोपें 17 से घटाकर 13 कर दी गई।
अंग्रेज अधिकारियों की टिप्पणियाँ –
- लॉर्ड कैनिंग – राजा-महाराजाओं ने तूफान रोका।
- जॉन लॉरेंस – नेतृत्त्व होता तो हम हार जाते।
- कैप्टन प्रिचार्ड – इसे केवल सैनिक विद्रोह बताया।
- अंतिम स्थिति –
- राजस्थान में क्रांति की शुरुआत – नसीराबाद।
- अंत – सीकर (तात्या टोपे की गिरफ्तारी)।
- विद्रोह सैनिक से जनआंदोलन बना।
- जनता, किसान, गुर्जर, भील, मेव – सभी शामिल।
- यह संघर्ष आगे के राष्ट्रीय आंदोलन की नींव बना।
