राजस्थान इतिहास के अध्ययन में प्रमुख राजवंशों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही है, क्योंकि इन्हीं के शासनकाल ने प्रदेश की संस्कृति, राजनीति और सामाजिक संरचना को आकार दिया। इन राजवंशों की वीरता, प्रशासनिक दक्षता और सांस्कृतिक संरक्षण ने राजस्थान को एक विशिष्ट ऐतिहासिक पहचान प्रदान की।
राजस्थान के प्रमुख राजवंश
राजपूत युग का उदय
- हर्षवर्धन की मृत्यु के बाद भारत की राजनैतिक एकता समाप्त हो गई।
- केंद्रीय शक्ति के अभाव में भारत अनेक छोटे-छोटे राज्यों में विभक्त हो गया।
- विभिन्न वंशों के राज्य होते हुए भी इन्हें सामूहिक रूप से ‘राजपूत’ कहा गया।


अग्निकुण्ड से उत्पत्ति मत –
- स्रोत: पृथ्वीराज रासो (चंदबरदाई)
- ऋषि वशिष्ठ ने राक्षसों के विनाश हेतु अग्निकुण्ड में यज्ञ किया, जिससे पहले तीन योद्धा उत्पन्न हुए: – परमार , चालुक्य (सोलंकी) , प्रतिहार
- ये राक्षसों से रक्षा में सफल न हुए, तब हथियारों से युक्त चौथे योद्धा को उत्पन्न किया गया: – चौहान
- समर्थनकर्ता: – सूर्यमल मिश्रण, मुहणोत नैणसी, जोधराज
- चंदबरदाई ने राजपूतों की 36 शाखाएँ बताई।
- यह मत पौराणिक माना जाता है, ऐतिहासिक आधार नहीं।
भारतीय आर्यों से उत्पत्ति (क्षत्रिय मत) –
- राजपूतों की उत्पत्ति प्राचीन भारतीय सूर्यवंशी व चन्द्रवंशी क्षत्रियों से।
- समर्थनकर्ता: – जी.एस. ओझा , डॉ. दशरथ शर्मा , सी.वी. वैद्य , डॉ. जगदीश सिंह गहलोत
- अभिलेखीय साक्ष्य: – आबू शिलालेख , शृंगी ऋषि लेख, आटपुर (आहड़/आटपुर) अभिलेख (977 ई.) ,नाथ अभिलेख
- इन अभिलेखों में गुहिलों को रघुकुल (सूर्यवंशी) बताया गया।
- यह मत सबसे अधिक ऐतिहासिक प्रमाणयुक्त माना जाता है।
ब्राह्मणों की संतान मत –
- राजपूतों की उत्पत्ति ब्राह्मण वंश से मानी।
- समर्थनकर्ता: – डॉ. भंडारकर , डॉ. गोपीनाथ शर्मा , डॉ. दशरथ शर्मा
- डॉ. भंडारकर: – गुहिल नागर ब्राह्मणों की संतान।
विदेशी उत्पत्ति मत
| विद्वान | मत |
| जेम्स टॉड | राजपूत शक एवं सीथियन वंशज। |
| वी.ए. स्मिथ | राजपूत गुर्जर और हूण वंशज। |
| विलियम क्रूक | राजपूत शक, कुषाण, पह्लव(पल्लव), हूण मूल; विशेषतः गुर्जर = हूण वंश। |
| डॉ. भंडारकर | गुर्जर हूण + खिजर जनजाति के मिश्रण से। |
| नोट – यह मत आक्रमणकारी जनजातियों के भारतीयकरण पर आधारित। | |
मिश्रित जातियों से उत्पत्ति मत –
- शक्तिकुमार के शिलालेख के अनुसार: –
- हूण कन्या हरियादेवी का विवाह मेमड़/मांडोर के अल्लट से।
- इसे राजपूतों की मिश्रित जातीय उत्पत्ति का प्रमाण माना जाता है।
- समर्थनकर्ता: – डॉ. गोपीनाथ शर्मा , देवीप्रसाद चट्टोपाध्याय , डॉ. दशरथ शर्मा
