राजस्थान के प्रमुख किले

राजस्थान के प्रमुख किले राज्य के गौरवशाली इतिहास, वीरता और स्थापत्य कला के अद्भुत प्रतीक हैं। राजस्थानी कला व संस्कृति के अध्ययन में इन किलों का विशेष महत्व है, क्योंकि ये राजपूत शासकों की शक्ति, रणनीति और समृद्ध जीवनशैली को दर्शाते हैं। अरावली की पहाड़ियों से लेकर मरुस्थल तक फैले ये किले राजस्थान की ऐतिहासिक विरासत को जीवंत रूप में प्रस्तुत करते हैं।

राजस्थान में महाराष्ट्र और मध्यप्रदेश के बाद सर्वाधिक गढ़ और दुर्ग बने हुए हैं।

शुक्रनीति – 9 प्रकार के दुर्ग

प्रकार दुर्ग
धान्वन दुर्गचारों ओर मरुस्थल से घिरा  – सोनारगढ़ (जैसलमेर), जूनागढ़ (बीकानेर)
औदक/जल दुर्गजल राशि से घिरा – गागरोन का किला 
वन दुर्गसघन बीहड़ वन में बसा दुर्ग – सिवाणा दुर्ग
पारिख दुर्गवह दुर्ग जिसके चारों तरफ गहरी खाई हो – भरतपुर का लोहागढ़ दुर्ग
पारिध दुर्गचारों ओर बड़ी दीवार के परकोटे वाला – कुंभलगढ़, चित्तौड़, बीकानेर 
गिरि दुर्गऊँची दुर्गम पहाड़ी पर स्थित दुर्ग – मेहरानगढ़, रणथम्भौर
एरण दुर्गखाई, कांटो एवं पत्थरों के कारण दुर्गम पहुँच वाला – चित्तौड़, जालौर दुर्ग
सैन्य दुर्गजिसमे सैन्य टुकड़ी निवास करती हो – चित्तौड़गढ़, गागरोन
सहाय दुर्गराजा को आपात स्थिति में सहायता के उद्देश्य से – सिवाना दुर्ग

कौटिल्य – दुर्गों के 4 प्रकार

प्रकार दुर्ग
औदक / जल दुर्ग जल से घिरा हुआ
गिरी / पर्वत दुर्गऊँची दुर्गम पहाड़ी पर स्थित दुर्ग
धान्वन दुर्गचारों ओर मरुस्थल से घिरा
वन दुर्ग सघन बीहड़ वन में बसा दुर्ग

विष्णु धर्मसूत्र – 4 प्रकार के दुर्ग

प्रकार दुर्ग
धान्व दुर्गखुली भूमि पर 
मही दुर्गपत्थर या ईंटों से निर्मित प्रकारों वाला 
जल दुर्गजल से घिरा हुआ 
वार्क्ष दुर्गकंटीली झाड़ियों से युक्त 

यूनेस्को विश्व धरोहर में राजस्थान के 6 क़िले (21जून 2013)

  • Trick – चीकू-गाजर-आम 
    • चित्तौड़गढ़ का क़िला
    • कुंभलगढ़ क़िला 
    • गागरोन का क़िला 
    • जैसलमेर का क़िला 
    • णथम्भौर का क़िला 
    • आमेर का क़िला

अजमेर संभाग के किले

किला

जानकारी

तारागढ़ दुर्ग (अजमेर)

  • अन्य नाम – अजयमेरू दुर्ग, राजस्थान का हृदय, अरावली का अरमान, राजपूताना की कुंजी, गढ़ बीठली 
  • निर्माण – 7वीं शताब्दी; अजयपाल (1105–1133 ई.) द्वारा (कर्नल जेम्स टॉड के अनुसार अजयराज)
  • नामकरण – पृथ्वीराज चौहान की पत्नी ताराबाई के नाम पर 
  • प्रसिद्ध कथन – 
    • बिशप हैबर: “राजस्थान का जिब्राल्टर” 
    • डॉ. हरविलास शारदा: भारत का प्रथम गिरि दुर्ग 
    • लॉर्ड विलियम बैंटिक: “दुनिया का दूसरा जिब्राल्टर”
  • ऐतिहासिक तथ्य – सर्वाधिक स्थानीय आक्रमण इसी दुर्ग पर, दाराशिकोह का जन्म; धौलपुर युद्ध में पराजय के बाद दाराशिकोह ने यहाँ शरण ली 
  • ब्रिटिश काल – तारागढ़ की घाटी में इसे सेनेटोरियम (आरोग्य निवास) के रूप में प्रयोग किया गया
  • प्रमुख स्थल – मियाँ मीरान साहब की दरगाह(तारागढ़ के प्रथम गवर्नर मीर सैयद हुसैन), घोड़े की मजार(मीरान साहब का सबसे प्रिय घोड़ा), रूठी रानी उमादे की छतरी, पृथ्वीराज स्मारक, नाना साहब का झालरा, गोल झालरा, बड़ा झालरा, इब्राहिम शरीफ का झालरा, कचहरी भवन
  • बुर्ज – लगभग 14 विशाल बुर्ज (घूंघट, गूगड़ी, बंदारा, फूटी, पीपली, दोराई, खिड़की, इब्राहिम शहीद, नक्कारची, आर-पार का अत्ता, जानूनायक, श्रृंगार, फतेहबुर्ज, इमली आदि)

अकबर का किला (अजमेर)

  • अन्य नाम – दौलतखाना, मैगजीन दुर्ग 
  • निर्माण – 1570 ई., अकबर द्वारा (ख्वाजा मुइनुद्दीन चिश्ती के सम्मान में) 
  • विशेषता – राजस्थान का एकमात्र किला जो पूर्णतः मुस्लिम किला वास्तुकला में निर्मित 
  • इतिहास – 1576 में हल्दीघाटी युद्ध की योजना यहीं बनी; जहाँगीर 3 वर्ष तक यहीं रहा; 10 जनवरी 1616 को सर टॉमस रो की जहाँगीर से यहीं भेंट
  • 1801 में अंग्रेजों ने कब्जा कर शस्त्रागार (मैगजीन) बनाया

नागौर का किला

  • अन्य नाम – नागाणा दुर्ग, नाग दुर्ग, अहिछत्रपुर दुर्ग
  • निर्माण – 1154 ई. (वि.सं. 1211), चौहान शासक सोमेश्वर के सामंत कैमास द्वारा 
  • संरचना – 28 गोल बुर्ज; तोप के गोले महलों को क्षति पहुँचाए बिना ऊपर से निकल जाते थे 
  • यूनेस्को सम्मान – 2007, Award of Excellence
  • वास्तुकला – भारतीय स्थापत्य शैली 
  • प्रमुख स्थल – 16 खंभों की छतरी (अमरसिंह राठौड़), बादल महल, शीशमहल, शुक्र तालाब 
  • 6 विशाल दरवाजे – सिराईपोल, कचहरी पोल, बिचली पोल, सूरजपोल, राजपोल, ध्रुवपोल

कुचामन का किला

  • निर्माण – मेड़तिया शासक जालिमसिंह द्वारा 
  • दुर्ग प्रकार – गिरि दुर्ग / एरण दुर्ग 
  • उपनाम – “जागीरी किलों का सिरमौर” 
  • प्रसिद्ध कथन – “ऐसा किला राणी जाये के पास भले हो, ठुकराणी जाये के पास नहीं”

मांडलगढ़ दुर्ग

  • स्थिति – बनास, बेड़च व मेनाल नदियों के संगम पर
  • लोककथा के अनुसार इसका निर्माण चानणा गुर्जर ने मांडिया नामक भील के नाम पर कराया था। वहीं श्रृंगी ऋषि के शिलालेख में इसके कटोरे जैसी आकृति के कारण इसका नाम मांडलगढ़ बताया गया है। बाद में महाराणा कुम्भा ने  इसका पुनर्निर्माण कराया।  
  • ऐतिहासिक महत्व – अकबर ने महाराणा प्रताप के विरुद्ध अपने अभियानों की शुरुआत इसी किले से की, क्योंकि यह मेवाड़ में प्रवेश का महत्वपूर्ण मार्ग था। 
  • प्रमुख स्थल – मदीना मस्जिद, बीजासन पहाड़ी, उंडेश्वर मंदिर, चारभुजानाथ मंदिर, ऋषभदेव जैन मंदिर, सागर तालाब, सागरी तालाब, जालेश्वर तालाब, देवसागर तालाब

केहरीगढ़ (किशनगढ़), टॉडगढ़ (ब्यावर – जेम्स टॉड ने बनवाया, इसमें गोपाल सिंह खरवा, विजय सिंह पथिक को नजरबंद रखा था) 

जयपुर संभाग के किले

अलवर के दुर्ग

किला

जानकारी

बाला किला (अलवर)

  • अन्य नाम – बड़ा किला, अलवर का किला, बावनगढ़ का लाड़ला 
  • प्रकार – गिरि दुर्ग 
  • उपनाम – आँख वाला किला (दीवार में बंदूक के छेद के कारण) 
  • निर्माण – 1049 ई. में कोकिल देव के पुत्र अलुघराय द्वारा 
  • पुनर्निर्माण – 1524 ई., हसन खाँ मेवाती द्वारा, अकबर ने पुत्र जहाँगीर को यहाँ नजरबंद रखा 
  • राव राजा प्रताप सिंह ने बिना युद्ध किला जीता व अलवर बसाया 
  • इसके बाद किले पर कभी युद्ध नहीं हुआ, इसलिए नाम बाला (कुँवारा) किला पड़ा 
  • प्रमुख स्थल – सलीम सागर (शेरशाह सूरी के हकीम हाजी खाँ द्वारा), सूरजकुंड जल तड़ाग, काबुल खुर्द, सीताराम मंदिर (प्रताप सिंह द्वारा)

कांकणवाड़ी किला

  • निर्माण – सवाई जयसिंह द्वारा अकाल राहत कार्य हेतु 
  • औरंगज़ेब ने दारा शिकोह को यहाँ कैद रखा

अजबगढ़ (राजगढ़)

  • निर्माण – 635 ई. में अजबसिंह द्वारा 
  • भानगढ़ व अजबगढ़ को “इतिहास और पुरातत्व का खजाना” कहा जाता है

भानगढ़ दुर्ग

  • उपनाम – खंडहरों का नगर, भूतहा किला 
  • स्थिति – सावां नदी (बाणगंगा की सहायक) के तट पर, सरिस्का अभयारण्य, राजगढ़ तहसील 
  • निर्माण – 1574 ई. में आमेर के राजा भगवन्तदास द्वारा

जयपुर के दुर्ग

आमेर दुर्ग

The Origin of Rajputs
  • पौराणिक नाम – आम्बेर, अंबिकापुर, अम्बरीश, अम्बावती आदि 
  • निर्माण – दुल्हेराय द्वारा; पुनर्निर्माण राजा मानसिंह ने कराया, पूर्णता मिर्जा राजा जयसिंह के समय 
  • नाम परिवर्तन – बहादुर शाह प्रथम ने नाम मोमिनाबाद रखा
  • प्रमुख द्वार/स्थल – जयपोल, सूरजपोल, चांदपोल, सिंहपोल, जलेब चौक (घुड़दौड़), गणेशपोल (सवाई जयसिंह; फर्ग्यूसन – विश्व का सर्वश्रेष्ठ प्रवेशद्वार), दीवान-ए-आम, मजलिस विलास, दीवान-ए-खास, शीश महल, बालांबाई की साल, कदमी महल (राजतिलक स्थल) 
  • प्रमुख मंदिर/उद्यान – शिला देवी, जगत शिरोमणि (रानी कनकावती; कृष्ण की काले पत्थर की मूर्ति – मीराबाई द्वारा पूजित), अम्बिकेश्वर महादेव, नरसिंह जी, दिलखुश महल, 24 रानियों का महल, बुखारा गार्डन, सुख मन्दिर, यश/जस मन्दिर, सौभाग्य/सुहाग मन्दिर (चंदन किवाड़, हाथीदांत कार्य), भूल-भुलैया, केसर क्यारी, मावठा झील, दिलाराम का बाग (निर्माण 1664 ई., मिर्जा राजा जयसिंह)  (1664 ई.), आरामबाग 
  • प्रसिद्ध कथन – बिशप रेजिनाल्ड हैबर: क्रेमलिन (रूस के मॉस्को में स्थित किला) व अलहम्ब्रा (स्पेन में स्थित एक ऐतिहासिक किला) से भी भव्य”

जयगढ़ दुर्ग

  • स्थिति – चील का टीला (ईगल हिल); रहस्यमयी दुर्ग 
  • निर्माण – मूल निर्माण मिर्जा राजा मानसिंह; गोपीनाथ शर्मा के अनुसार जयसिंह; कई महल सवाई जयसिंह द्वितीय द्वारा 
  • विशेषता – भारत का एकमात्र दुर्ग जहाँ एशिया का सबसे बड़ा तोप ढालने का कारखाना 
  • प्रमुख तोपजयबाण (202 फुट नली, मारक क्षमता 22 मील) – एशिया की सबसे बड़ी पहियों पर चलित तोप
  • अन्य तोपें – बादली, बजरंगबाण, मचवान 
  • प्रवेश द्वार – डूंगर पोल (नाहरगढ़), अवनी पोल (आमेर), भैरू दरवाजा (सागर जलाशय) 
  • दर्शनीय स्थलललित मंदिर (ग्रीष्मकालीन निवास), आराम मंदिर, विलास मंदिर, सुभट मंदिर (दीवान-ए-आम), जलेब चौक, राणावत चौक, श्रीराम हरिहर मंदिर, काल भैरव मंदिर, बैल-चलित लेथ मशीन 
  • अन्य – इसमें लघु दुर्ग विजयगढ़ी है (राजकोष व कैदी हेतु), दीया बुर्ज (निगरानी हेतु 7 मंजिला प्रकाश स्तंभ)

नाहरगढ़ दुर्ग

  • अन्य नाम – सुलक्षण दुर्ग, सुदर्शनगढ़, जयपुर ध्वजगढ़, जयपुर का मुकुट, महलों का दुर्ग, मीठड़ी का किला 
  • नामकरण – नाहरसिंह भौमिया के नाम पर
  • निर्माण – 1734 ई., सवाई जयसिंह द्वितीय (मराठों के विरुद्ध) 
  • वर्तमान स्वरूप – 1868 ई., सवाई रामसिंह
  • 9 महल – माधोसिंह द्वितीय द्वारा विक्टोरियन शैली में नौ रानियों हेतु बने ये महल माधवेन्द्र भवन कहलाते हैं
  • 9 महल नाम – सूरज प्रकाश, चाँद प्रकाश, लक्ष्मी प्रकाश, आनंद प्रकाश, खुशहाल प्रकाश, ललित प्रकाश, जवाहर प्रकाश, फूल प्रकाश, बसंत प्रकाश
  • अन्य तथ्य – इसके पास राजस्थान का प्रथम जैविक उद्यान
अन्य किले

दुर्ग

जानकारी

दौसा का किला

  • स्थिति – देवगढ़ की पहाड़ी पर 
  • निर्माण – गुर्जर प्रतिहार (बड़गुर्जर) शासकों द्वारा
  • आकार – सूप / छाजले के आकार का किला 
  • ऐतिहासिक महत्व – कछवाहा राजवंश की प्रारंभिक राजधानी 
  • दर्शनीय स्थल – प्रेतेश्वर भौमिया जी का मंदिर, राजाजी का कुआँ, 14 राजाओं की साल, भौमैया के महल (सूरजमल भोमिया)

चौमू का किला

  • अन्य नाम – चौमुहागढ़, धाराधारगढ़, रघुनाथगढ़
  • विशेषता – किले के शीर्ष भाग की बनावट कमल के फूल जैसी

लक्ष्मणगढ़ किला

  • निर्माण – 1805 ई. में राजा लक्ष्मण सिंह द्वारा 
  • स्थिति – बेड़ नामक पहाड़ी पर

कोटा संभाग के किले

अन्य नामतारागढ़, तिलस्मी किला
निर्माण4वीं शताब्दी में राव बरसिंह हाड़ा द्वारा
प्रमुख महलछत्र महल, अनिरुद्ध महल, रतन महल, बादल महल, फूल महल, रंगमहल (शत्रुशाल जी द्वारा), रंगविलास चित्रशाला (उम्मेदसिंह जी द्वारा), रतनदौलत दरीख़ाना (राजतिलक हेतु)
प्रसिद्ध कथन रुडयार्ड किपलिंग – “ये महल मानव नहीं, प्रेतों द्वारा बनाए गए लगते हैं।”
प्रमुख तोपगर्भ गुंजन तोप

गागरोन का किला

विवरण

जानकारी

अन्य नाम

  • डोड़गढ़, धूलरगढ़, जल दुर्ग, औदक दुर्ग, मुस्तफाबाद (महमूद खिलजी प्रथम द्वारा), गगर्राटपुर

स्थिति

  • झालावाड़ ज़िला; कालीसिंध व आहू नदियों के संगम (सामेलजी) पर

प्रकार

  • जल दुर्ग / औदक दुर्ग

विशेषता

  • राजस्थान का एकमात्र दुर्ग जो बिना नींव के एक ही चट्टान पर (विंध्याचल पर्वतमाला) खड़ा है

निर्माण

  • 12वीं शताब्दी में डोड़ राजा बीजलदेव द्वारा; बाद में खींची राजवंश के संस्थापक देवनसिंह ने डोड़ शासकों को हराकर  इसका नाम गगरोन रखा गया 

  • संत पीपा (राजा प्रताप राव) गागरोन के शासक व संत रामानंद के शिष्य थे; इन्होंने वैभव त्यागकर राज्य अचलदास खींची को सौंपा
  • 1423 ई. – मांडू के सुल्तान हुशंगशाह ने किले पर कब्ज़ा किया

मुगल काल

  • अकबर ने किला बीकानेर के पृथ्वीराज राठौड़ को सौंपा
  • ‘वेली कृष्ण रुक्मणी री’ (1577) ग्रंथ इसी किले में लिखा गया

2 साके

  • 1423 ई. – अचलदास खींची व रानी लीला मेवाड़ी 
  • 1444 ई. – महमूद खिलजी प्रथम का आक्रमण

यूनेस्को विश्व धरोहर

  • 21 जून 2023 – राजस्थान के 6 किले (Mnemonic: चीकू गाजर आम Trick)

प्रमुख स्थल

  • पीर हमीदुद्दीन चिश्ती (मिट्ठे साहब) की दरगाह, बुलंद दरवाजा (औरंगज़ेब द्वारा), संत पीपा जी की समाधि, जालिमकोट (झाला जालिम सिंह द्वारा निर्मित विशाल परकोटा)

अन्य दुर्ग

विवरण

जानकारी

शेरगढ़ दुर्ग (बारां)

  • स्थिति – परवन नदी के किनारे कोषवर्धन पहाड़ी पर अन्य नाम – कोषवर्धन का किला 
  • शेरशाह सूरी द्वारा पुनर्निर्माण के बाद नाम शेरगढ़ पड़ा, बाद में मुगलों के आधिपत्य में रहा। 
  • फर्रुखसियर ने इसे महाराव भीम सिंह को पुरस्कार में दिया, भीम सिंह ने नाम बदलकर बरसाना रखा 
  • प्रमुख स्थल – झलाओं की हवेली, अमीर ख़ान का महल

शाहबाद किला (बारां)

  • अन्य नाम – सलीमाबाद दुर्ग (शेरशाह सूरी के पुत्र सलीम के नाम पर)
  • निर्माण – 1521 ई., मुकुन्दरा पहाड़ी पर 
  • निर्माता – चौहान राजा मुकुट मणिदेव 
  • प्रमुख स्थल – बाला किला (अंदर चतुष्कोणीय महल), बादल महल, अलल पंख (बादल महल के दरवाज़ों पर बनी प्रतिमाएँ), जामा मस्जिद, नवलबाण तोप, कुंडकोह झरना

नाहरगढ़ किला (बारां)

  • उपनाम – हाड़ौती का लाल किला

कोटा दुर्ग

  • निर्माण – माधोसिंह द्वारा चंबल नदी के किनारे 
  • विशेषता – आगरा किले को छोड़कर भारत में किसी भी किले का परकोटा कोटा दुर्ग से बड़ा नहीं
  • झाला हवेली – अपने भित्ति चित्रों के लिए प्रसिद्ध

उदयपुर संभाग के किले

कुंभलगढ़ दुर्ग

विवरण

जानकारी

अन्य नाम

  • मत्स्येन्द्र, कमलमीर, कुंभपुर, कुम्भलमेर दुर्ग

स्थिति

  • मेवाड़–मारवाड़ की सीमा पर, सादड़ी गाँव के समीप गोडवाड़ क्षेत्र की सुरक्षा हेतु

निर्माण 

  • ‘वीर विनोद’ के अनुसार महाराणा कुम्भा ने वि.सं. 1505 (1448 ई.) में मौर्य शासक सम्प्रति (अशोक का द्वितीय पुत्र) द्वारा निर्मित एक प्राचीन दुर्ग के ध्वंसावशेषों पर इस दुर्ग का निर्माण किया। 

मुख्य शिल्पी

  • मंडन (कुम्भा के प्रमुख शिल्पी व वास्तुविद)

प्रसिद्ध कथन 

  • अबुल फ़ज़ल “इतनी बुलंदी पर बना है कि नीचे से ऊपर देखने पर सिर से पगड़ी गिर जाती है”
  • रायबहादुर हरबिलास शारदा – “कुम्भा की सैनिक मेधा का प्रतीक”
  • कर्नल टॉड ने एटुस्कन (इटली) स्थापत्य से तुलना की

ऐतिहासिक घटनाएँ

  • महाराणा प्रताप का जन्म, उदयसिंह का राज्याभिषेक, महाराणा कुम्भा की हत्या (मामादेव कुंड के पास)

मुगल विजय

  • केवल एक बार – शाहबाजखाँ (अकबर का सेनानायक) द्वारा 1578 ई. में

सुरक्षा दीवार की लंबाई

  • 36 किलोमीटर, एक साथ 8 घुड़सवार चल सकते हैं – अत: “भारत की महान दीवार” कहा जाता है 

प्रमुख स्थल

  • उड़ना राजकुमार पृथ्वीराज की छतरी (12 खंभे), झालीबाव बावड़ी, मामदेव कुंड, कुम्भस्वामी मंदिर, बादल महल, झाली रानी का बाव

प्रमुख दरवाजे

  • आरेठपोल, हल्लापोल, हनुमानपोल, विजयपोल, भैरवपोल, नीबूपोल, चौगानपाल, पागडापोल, गणेशपोल, दानीबट्टा (मेवाड़–मारवाड़ जोड़ता है)

प्रमुख मंदिर

  • नीलकंठ महादेव मंदिर, वेदी मंदिर (108 अग्नि वेदियाँ), कुम्भास्वामी विष्णु मंदिर, गोलराव मंदिर

कुंभलगढ़ प्रशस्ति (1460 ई.)यह मामादेव मंदिर के पास लगी हैयह 5 शिलाओं पर अंकित थी इसमें 1,3,4 शिलाएँ ही उपलब्ध है।

चित्तौड़ का किला

Tourism in Rajasthan

विवरण

जानकारी

भौगोलिक स्थिति

  • मेसा (Mesa) के पठार पर स्थित, क्षेत्रफल की दृष्टि से भारत का सबसे बड़ा किला, सबसे बड़ा लिविंग फोर्ट 

नदी संगम

  • गंभीरी एवं बेड़च नदियों के संगम पर

दुर्ग कोटी

  • आचार्य शुक्र की 9 दुर्ग कोटियों में से केवल ‘धन्व दुर्ग’ को छोड़कर सभी में सम्मिलित

अन्य नाम 

  • मालवा का प्रवेश द्वार, चित्रकूट दुर्ग, खिज्राबाद, प्राचीन किलों का सिरमौर, राजस्थान का गौरव, राजस्थान का दक्षिणी प्रवेश द्वार, “गढ़ तो चित्तौड़गढ़ बाकी सब गढ़ैया”

प्रारंभिक निर्माण

  • वीर विनोद के अनुसार 8वीं शताब्दी में चित्रांगद मौर्य (मौर्यवंशी राजा बृहद्रथ का पुत्र) द्वारा

नामकरण

  • अलाउद्दीन खिलजी ने ‘खिज्राबाद’ नाम रखा (पुत्र खिज्र खाँ के नाम पर)

कुम्भा का योगदान

  • दुर्ग का जीर्णोद्धार, 7 प्रवेश द्वार, विजय स्तंभ, कुंभश्याम मंदिर, श्रृंगार चंवरी – इसलिए “चित्तौड़गढ़ दुर्ग का आधुनिक निर्माता” कहा जाता है 

7 प्रवेश द्वार 

  • पाड़नपोल/पाटनपोल(पहला), भैरवपोल, हनुमानपोल, गणेशपोल, जोड़लापोल, लक्ष्मणपोल, रामपोल (अंतिम)

3 आक्रमण

  • 1303 ई. – अलाउद्दीन खिलजी; 1534 ई. – गुजरात का बहादुरशाह; 1568 ई. – अकबर

3 साके / जौहर 

  • 1303 ई. – रानी पद्मिनी; 1534 ई. – रानी कर्णावती; 1568 ई. – रानी फूलकंवर

प्रमुख स्थल 

  • रानी पद्मिनी का महल, गोरा-बादल महल, नवलखा महल (मीरा बाई की साधना स्थली), नवलखा बुर्ज

प्रमुख स्तंभ

  • विजय स्तंभ, जैन कीर्ति स्तंभ (7 मंज़िला)

जल स्रोत

  • पद्मिनी जौहर कुंड, गौमुख कुंड, भीम कुंड, रत्नेश्वर तालाब, कुंकडेश्वर कुंड (महाभारतकालीन)

छतरियाँ / वीर स्मारक

  • देवलिया रावत बाघसिंह सिसोदिया स्मारक, वीर कल्ला राठौड़ (4 खम्भों) की छतरी, जयमल (6 खम्भों) की छतरी, रैदास व जयमल की छतरियाँ

अन्य स्थापत्य

  • भामाशाह की हवेली, त्रिपोलिया गेट, बीका खो बुर्ज, मृगवन, मोहर मगरी (चित्तौड़ी बुर्ज के नीचे पहाड़ी), 

प्रमुख मंदिर

  • कुंभ श्याम मंदिर (प्रतिहार कालीन), सोमदेव मंदिर, मीरा मंदिर, कालिका माता मंदिर (प्राचीन सूर्य मंदिर – प्रतिहार कालीन), तुलजा भवानी माता मंदिर, समिधेश्वर/त्रिभुवन्नारायण मंदिर (मोकल जी मंदिर), सतबीस देवरी जैन मंदिर

विजय स्तंभ

  • इसे विष्णु को समर्पित होने के कारण विष्णु ध्वज गढ़ (उपेंद्र नाथ डे द्वारा)/ मूर्तियों का अजायबघर/ भारतीय मूर्तिकला का विश्वकोश (डॉ. गोटूज द्वारा)/ विक्ट्री स्तम्भ/ कीर्ति स्तम्भ आदि नामों से जाना जाता है। 
  • इसका निर्माण कुंभा ने 1437 ई. में लड़े गये सारंगपुर युद्ध में महमूद खिलजी प्रथम पर विजय की स्मृति में करवाया। 
  • यह स्तम्भ नौ मंजिला (20 फीट ऊंचा) है। इसमें 57 सीढ़ियाँ हैं। इसकी तीसरी मंजिल पर नौ बार अल्लाह लिखा हुआ है।
  • इस पर अत्रि एवं महेश द्वारा रचित कीर्ति प्रशस्ति उत्कीर्ण है। इसकी 9वीं मंजिल बिंजली गिरने से टूट गई, जिसका पुनः निर्माण स्वरूप सिंह ने करवाया। 
  • कर्नल जेम्स टॉड ने इसके बारे में कहा कि ”यह कुतुबमीनार से भी बेहतरीन इमारत है।” 
  • यह राजस्थान की प्रथम इमारत है जिस पर 15 अगस्त , 1949 को एक रूपये का डाक टिकट जारी किया गया। 
  • विजय स्तम्भ राजस्थान पुलिस व माध्यमिक शिक्षा बोर्ड, अजमेर का प्रतीक चिह्न है। 
  • इसका निर्माण कार्य जैता तथा उसके पुत्र नाथा (नापा), पोमा तथा पूंजा के निर्देशन में किया गया
  • फर्ग्यूसन ने इसकी तुलना ‘रोम के ट्राजन स्तंभ’ से की है।

अन्य दुर्ग

दुर्ग

जानकारी

सज्जनगढ़ दुर्ग (उदयपुर)

  • उपनाम – मेवाड़ का मुकुटमणि 
  • स्थिति – फतेहसागर झील के पास, बाँसधारा पहाड़ी पर

उंटाला किला

  • महाराणा प्रताप की मृत्यु के बाद जहाँगीर ने अधिकार किया 
  • महाराणा अमर सिंह के समय ऊँटाला का युद्ध (1600 ई.) हुआ 
  • इसी युद्ध में जैतसिंह चुण्डावत ने सिर काटकर किले में फेंका, जिससे हरावल का नेतृत्व चुण्डावतों के पास रहा

सराड़ा किला (सलूम्बर)

  • उपनाम – मेवाड़ का काला पानी 
  • प्रजामंडल आंदोलन के दौरान कैदियों को यहाँ रखा जाता था

भैंसरोड़गढ़ दुर्ग

  • प्रकार – जल दुर्ग 
  • उपनाम – राजस्थान का वैल्लोर 
  • निर्माता – भैंसाशाह (व्यापारी) व रोड़ा चारण
  • स्थित – चम्बल व बामनी नदी के संगम/मुहाने पर 
  • उद्देश्य – पर्वतीय लुटेरों से रक्षा 
  • कर्नल टॉड – “यदि मुझे राजस्थान में कोई जागीर दी जाए तो मैं इसी गढ़ को चुनूँगा”

भरतपुर संभाग के किले

रणथम्भौर किला (सवाईमाधोपुर)

विवरण

जानकारी

अन्य नाम 

  • रणस्तम्भपुर / रंतःपुर (हम्मीर रासो के अनुसार – रण की घाटी में स्थित नगर), दुर्गाधिराज, चित्तौड़गढ़ का छोटा भाई, हम्मीर की आन-बान का प्रतीक

निर्माण 

  • 8वीं शताब्दी – महेश्वर के ठाकुर रन्तिदेव अथवा चौहान शासक जयंत
  • 994 ई. – सपादलक्ष के चौहान राजा रणथंभन देव

आकार

  • अंडाकार (G.H. ओझा के अनुसार)

भौगोलिक विशेषता

  • पहाड़ियों से घिरा होने के कारण अबुल फ़ज़ल का कथन – “अन्य सब दुर्ग नंगे हैं, यह दुर्ग बख्तरबंद है”

धार्मिक विशेषता

  • राजस्थान का एकमात्र दुर्ग जिसके सुपारी महल में मंदिर, मस्जिद व गिरजाघर तीनों स्थित हैं

जलालुद्दीन खिलजी

  • 2 बार असफल आक्रमण; कथन – “मैं ऐसे दुर्ग को मुस्लिम के सिर के बाल के बदले वार दूँ”

राजस्थान का प्रथम साका

  • 1301 ई. – अलाउद्दीन खिलजी बनाम हम्मीरदेव (रानी रंगदेवी द्वारा जल-जौहर)

अलाउद्दीन की विजय पर 

  • अमीर ख़ुसरो – “आज कुफ़्र का दरवाज़ा टूट गया है”

हम्मीर से जुड़ा दोहा

  • “सिंह गमन, सत्पुरुष वचन… हम्मीर हठ, चढ़े न दूजी बार”

लोहागढ़ दुर्ग (भरतपुर)

The Origin of Rajputs

विवरण

जानकारी

अन्य नाम 

  • लोहागढ़, अजेय दुर्ग, भट्टी का किला, अजयगढ़, मिट्टी से बना किला, पूर्वी सीमांत का प्रहरी, खेमकरण जाट की कुटिया 

विशेषता

  • 1733 ई., सूरजमल जाट (जाटों का प्लेटो/अफलातून)

  • चारों ओर गहरी खाई; मोती झील से सुजान गंगा नहर द्वारा जल आपूर्ति 

प्रमुख बुर्ज

  • विजय बुर्ज (जवाहर सिंह), फतेह बुर्ज (रणजीत सिंह), सिनसिनी, गोकुला, कालिका, बागरवाली, नवलसिंह 

प्रवेश द्वार

  • उत्तरी (अष्टधातु दरवाजा), दक्षिणी (लोहिया दरवाजा) 

महल

  • किशोरी महल, कचहरी कला, वजीर की कोठी, कोठी खास दादी माँ का महल

मंदिर

  • बिहारी मंदिर, राजेश्वरी माता (भरतपुर वंश की कुलदेवी)

बयाना दुर्ग (भरतपुर)

विवरण

जानकारी

अन्य नाम 

  • बादशाह दुर्ग, बाणासुर दुर्ग, श्रीपुर दुर्ग, श्रीपंथ दुर्ग, शोणितपुर (पुराणों में) 

निर्माण 

  • विजयपाल द्वारा, दमदमा पहाड़ी पर

प्रमुख विशेषता / स्थल 

  • भीमलाट/विजय स्तंभ
    • राजस्थान का पहला विजय स्तंभ, राजस्थान की कुतुबमीनार
    • गुप्तकालीन; समुद्रगुप्त के सामंत विष्णुवर्धन पुंडरीक द्वारा निर्मित 
  • उषा मंदिर, अकबरी छतरी, जहाँगीरी दरवाजा, दाऊद खाँ की मीनार, लोदी मीनार
अन्य दुर्ग

दुर्ग

जानकारी

डीग का किला

  • निर्माण – 1730 ई., राजा बदनसिंह के शासनकाल में सूरजमल द्वारा 
  • बुर्ज – कुल 12 
  • प्रमुख स्थल – सूरजमल का महल, सुल्तान सिंह की समाधि, मिर्ज़ा शफ़ी का कक्ष (दिल्ली वज़ीर), सावन-भादों महल

शेरगढ़ किला (धौलपुर)

  • अन्य नाम – दक्कन का द्वारगढ़, धौलदेहरागढ़, धौलपुर दुर्ग, 
  • पूर्वी राजस्थान का द्वारगढ़ 
  • निर्माण – कुषाण काल में राजा मालदेव द्वारा, चंबल नदी के किनारे ऊँचे बीहड़ पर 
  • पुनर्निर्माण – 1540 ई., शेरशाह सूरी (तभी नाम शेरगढ़ पड़ा)
  • स्थिति – राजस्थान-मध्यप्रदेश-उत्तरप्रदेश की सीमा पर 
  • अन्य – सैयद की मज़ार, हुनहुकार तोप

तिमनगढ़ / त्रिभुवन गढ़ (करौली)

  • निर्माण – बयाना के राजा त्रिभुवनपाल द्वारा
  • स्थितित्रिभुवनगिरि पहाड़ी पर 
  • प्रमुख स्थल – ननद भोजाई का कुआँ 
  • प्रवेश द्वार – जगनपोल, सूरजपोल

बीकानेर संभाग के किले

जूनागढ़ किला

राजपूतों का उत्पत्ति | राजस्थान के प्रमुख किले

विवरण

जानकारी

अन्य नाम 

  • तारामणि, जमीन का जेवर, चिंतामणि, राती घाटी का किला

प्रकार

  • पारिख दुर्ग

नींव

  • 1485 ई. – राव बीका

पुनर्निर्माण

  • 1589 ई. के बाद – रायसिंह द्वारा, मंत्री कर्मचन्द की देखरेख में

वास्तु शैली

  • हिंदू-मुगल शैली

प्रमुख द्वार

  • करणपोल (प्रवेश द्वार), सूरजपोल (जयमल-पत्ता की मूर्तियाँ), चांदपोल, दौलतपोल, त्रिपोलिया

प्रमुख महल

  • कर्ण महल (गजसिंह), अनूप महल (सूरतसिंह – राजतिलक स्थल), गज मंदिर, फूल महल (गजसिंह), छत्र महल (डूंगरसिंह – लकड़ी की छत), गंगा निवास दरबार हॉल

अन्य प्रमुख स्थल

  • सुरतखाना (ऊँटशाला), सूरसागर झील, सरदार निवास, बादल महल, हेरम्ब गणपति (सिंह पर सवार गणेश प्रतिमा)

अभिलेख

  • राजसिंह प्रशस्ति – इतिहासकार जैता, भाषा संस्कृत

अन्य विशेषता

  • ब्रिटिश लड़ाकू विमान DH-9 Havilland सुरक्षित

भटनेर किला

विवरण

जानकारी

अन्य नाम 

  • उत्तरी सीमा का प्रहरी, उत्तरी भड़किवाड़, हनुमानगढ़ 

निर्माण 

  • घग्घर नदी के किनारे, 295 ई. (तीसरी शताब्दी) में राजा भूपत भाटी द्वारा, शिल्पी –  कैकेया

प्रकार 

  • धान्वन दुर्ग – मिट्टी से निर्मित; परकोटा ईंटों का, 52 बुर्ज

ऐतिहासिक महत्व

  • राजस्थान का सबसे प्राचीन किला (दूसरा –चित्तौड़गढ़)
  • राजस्थान का उत्तरी प्रवेश द्वार का रक्षक 
  • राजस्थान में सर्वाधिक विदेशी आक्रमण झेलने वाला दुर्ग

प्रमुख  स्थल

  • गोरखनाथ मंदिर, मामा-भांजा की दरगाह, शेर खाँ की कब्र (इल्तुतमिश का दुर्गाध्यक्ष), 6 स्त्रियों की मूर्तियाँ, हनुमान मंदिर

आक्रमण

  • 1001 ई. – महमूद गजनवी1206 ई. – कुबाचा (मोहम्मद गौरी का गवर्नर)1210–1236 ई. – इल्तुतमिश1398 ई. – तैमूर लंग1527 ई. – राव जैतसी (बीकानेर)1534 ई. – कामरान का आक्रमण1805 ई. – महाराजा सूरतसिंह ने जीतकर नाम हनुमानगढ़ रखा

प्रसिद्ध कथन

  • तुजुक-ए-तैमूरी – “इतना मजबूत व सुरक्षित किला पूरे हिन्दुस्तान में कहीं नहीं देखा”

चूरू का किला

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निर्माण

  • 1739 ई. में ठाकुर कुशलसिंह द्वारा निर्मित

प्रमुख स्थल

  • मेहता मेघराज की देवली, गोपीनाथ मंदिर (निर्माता – शिवसिंह)

ऐतिहासिक महत्व

  • चाँदी के गोले बरसाने वाला किला” के नाम से प्रसिद्ध [युद्ध के दौरान सीसा समाप्त होने पर सेठ साहुकारों व जनसामान्य ने घरों से चाँदी लाकर दी; तोपों से चाँदी के गोले दागे गए]

जोधपुर संभाग के किले

मेहरानगढ़

राजपूतों का उत्पत्ति | राजस्थान के प्रमुख किले

विवरण

जानकारी

अन्य नाम

  • मिहिरगढ़, मयूरध्वज गढ़ (मयूराकृति), मेहरानगढ़ (विशालता के कारण), गढ़ चिंतामणि, कागमुखी दुर्ग, सूर्यगढ़ (Sun Fort), जबरोगढ़, कागमुखी दुर्ग (कौए के मुख जैसे आकार का)

स्थिति 

  • पंचेटिया/चिड़ियाटूँक पहाड़ी पर स्थित गिरी दुर्ग (योगी चिड़ियानाथ की तपोभूमि)

निर्माण 

  • 1459 ई. में राव जोधा द्वारा लाल बलुआ पत्थर से निर्मित; नींव 13 मई 1459 को करणी माता(रिद्धि बाई) द्वारा रखी गई

नींव बलि प्रसंग

  • राजिया/राजाराम (12 मई 1459) को नींव में जीवित गाड़ा गया; उसी स्थान पर वर्तमान में सिलहखाना व नक्कारखाना

जल संरचनाएँ

  • रानीसर तालाब (1459 ई., हाड़ा रानी जसमादे), पदमसागर तालाब (सेठ पदमचंद शाह की सहायता से); रहट द्वारा जल आपूर्ति

प्रमुख प्रवेश द्वार

  • लोहापोल (मुख्य व अंतिम; 1548 मालदेव–विजयसिंह द्वारा पूर्ण), जयपोल (1808, मानसिंह), फतेहपोल (अजीतसिंह), सूरजपोल, इमरत पोल, कांगरा पोल, ध्रुव पोल, जोधाजी का फलसा

लोहापोल से संबंधित तथ्य

  • 81 वीरांगनाओं के हाथों के छाप (1843 ई.); मामा-भांजा की छतरी (धन्ना-भर्भीया, 10 स्तम्भ)

प्रमुख महल

  • फतेह महल (अजीतसिंह), चोखेलाव महल (भित्ति चित्र), ख्वाबगाह/ख्वाब महल (A.H. Müller का तेलचित्र), फूल महल (1724, अभयसिंह; दीवान-ए-खास), मोती महल (सूरसिंह), तख्त विलास (तख्तसिंह), अजीत विलास, जानकी महल, दीपक महल, दौलतखाना, तलहटी महल (सूरसिंह), जसवंत थड़ा (1899, सरदार सिंह; मारवाड़ का ताजमहल), शृंगार चौकी (राज्याभिषेक स्थल), मानसिंह पुस्तक प्रकाश संग्रहालय (1805)

धार्मिक स्थल

  • नागणेची माता मंदिर (राठौड़ों की कुलदेवी), चामुण्डा माता मंदिर, मुरली मनोहर मंदिर, आनंदघन मंदिर, सूरी मस्जिद (शेरशाह सूरी), भूरे खाँ की मजार

चामुण्डा माता घटना

  • 30 सितम्बर 2008 भगदड़; 216 मृत्युएँ; जाँच हेतु जसराज चोपड़ा आयोग (रिपोर्ट 2019)

प्रमुख तोपें

  • किलकिला, शम्भूषण, गजनीखां (1607, जालौर विजय), कड़क बिजली, बगसवाहन, धुड़धाणी, बिच्छुबाण, गुब्बार, जमजमा, नुसरत, मनोहर, नागपली, गजक, मीरबख्श, रहस्यकला, आनन्दघन

प्रमुख युद्ध 

  • 1544 ई. गिरी-सुमेल युद्ध (मालदेव–शेरशाह)
  • 1565 ई. हसन कुली खाँ का अधिकार; बाद में अकबर द्वारा मोटा राजा उदयसिंह को इनायत; 1678 ई. जसवंतसिंह प्रथम की मृत्यु के बाद मुगल खालसा; 
  • दुर्गादास राठौड़ के संघर्ष से अजीतसिंह द्वारा पुनः राठौड़ आधिपत्य

प्रसिद्ध कथन

  • जैकलिन कैनेडी – विश्व का 8वाँ आश्चर्य
  • रूडयार्ड किपलिंग – “परियों व देवताओं द्वारा निर्मित”
  • कर्नल टॉड – जोधाजी के पुत्र खिड़की से पूरे राज्य पर दृष्टि रख सकते थे

मंडोर का किला

  • प्राचीन राजधानी – मारवाड़ रियासत की इसका प्राचीन नाम – मंडोवर / मांडव्यपुर दुर्ग (मांडव्य ऋषि के नाम पर) 
  • यह किला प्रारम्भ में नागवंश, उसके बाद प्रतिहारों, चौहानों के अधिकार में भी रहा
  • प्रतिहारों की इन्दा शाखा का शासन, बाद में वीरम देव राठौड़ के पुत्र चुण्डा को दहेज में दिया

जालौर दुर्ग

राजस्थान के प्रमुख किले

विवरण

जानकारी

अन्य नाम

  • जाबालिपुर, सोनगिरि, सुवर्णगिरि, सोनलगढ़, कांचनगिरी, कनकाचल (पहाड़ी के नाम पर), जालंधर दुर्ग, जलालाबाद दुर्ग

निर्माण 

  • G.H. ओझा के अनुसार – परमार शासक धारावर्ष व मुंज द्वारा 
  • दशरथ शर्मा के अनुसार – प्रतिहार शासक नागभट्ट प्रथम द्वारा सूकड़ी नदी के तट पर

प्रमुख स्थल

  • चामुण्डा माता मंदिर, जोगमाया माता मंदिर, मलिक शाह पीर की मस्जिद, अलाउद्दीन खिलजी / तोप मस्जिद, परमार कालीन कीर्ति स्तम्भ, झालर बावड़ी, सोहन बावड़ी, जाबलि कुंड, राजा मानसिंह का महल, स्वर्णगिरी जैन मंदिर

ऐतिहासिक कथन

  • हसन निज़ामी – “यह ऐसा किला है जिसका दरवाजा कोई भी आक्रमणकारी खोल नहीं सका।”

साका

  • जालौर का साका- 1311 ई.

जैसलमेर किला

राजस्थान के प्रमुख किले

विवरण

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अन्य नाम

  • गोरहरागढ़ (पहाड़ी पर निर्मित), स्वर्णगिरी, सोनार किला/सोनारगढ़, गोल्डन फोर्ट, रेगिस्तान का गुलाब, गलियों का दुर्ग, पश्चिमी सीमा का प्रहरी, राजस्थान का दूसरा लिविंग फोर्ट, राजस्थान का अंडमान, त्रिकूटगढ़

निर्माण

  • 1155 ई. में भाटी शासक रावल जैसल ने प्रारम्भ; अधिकांश निर्माण शालिवाहन द्वितीय द्वारा पूर्ण

वंशीय परंपरा

  • भाटी शासक स्वयं को यदुवंशी श्रीकृष्ण का वंशज मानते हैं

प्रवेश द्वार

  • अक्षय पोल (प्रमुख), सूरजपोल, भूतापोल, हवापोल

प्रमुख महल

  • रंगमहल, मोतीमहल, सर्वोत्तम विलास, गजविलास

प्रमुख मंदिर

  • खुशाल राज राजेश्वरी मंदिर, लक्ष्मीनाथ मंदिर, रत्नेश्वर महादेव मंदिर, ऋषभदेव मंदिर, स्वांगियाँ देवी मंदिर, सूर्य मंदिर

वास्तु व संरचना

  • पीले पत्थरों से निर्मित; सीमेंट/चूने का प्रयोग नहीं; लकड़ी की छत

विशेषताएँ

  • राजस्थान का सबसे प्राचीन किला, धान्वन दुर्ग की श्रेणी, ढाई साके, 99 बुर्ज, लिविंग फोर्ट

जल प्रबंधन

  • घूट नाली (वर्षा जल निकास प्रणाली)

अन्य तथ्य

  • जैसलू कुआँ (कृष्ण भगवान से संबद्ध), फिल्म ‘सोनार क़िला’ (सत्यजीत रे), जिनभद्र सूरी ग्रंथ भंडार (दुर्लभ हस्तलिखित ग्रंथ)

प्रसिद्ध कहावतें

  • “घोड़ा कीजे काठ का, पग कीजे पाषाण, बस्तर कीजे लौह का, तब पहुँचे जैसाण।” (अबुल फ़ज़ल) गढ़ दिल्ली गढ़ आगरे, अधगढ़ बीकानेर, भलो चिणायो भाटियाँ सिरै तो जैसलमेर।”

सिवाणा दुर्ग – बालोतरा

विवरण

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अन्य नाम

  • प्रारम्भिक नाम – कुम्थाना / कुम्बाना, कुमट दुर्ग (कुमट झाड़ी की अधिकता के कारण), जालौर दुर्ग की कुंजी, मारवाड़ के राठौड़ शासकों की शरणस्थली, खेड़ाबाद / खैराबाद (अलाउद्दीन द्वारा), ‘अणखलो सिवाणो’ 

स्थिति व दुर्ग प्रकार

  • छप्पन की पहाड़ियों में स्थित हैदरगढ़ पहाड़ी पर
  • गिरि दुर्ग एवं वन दुर्ग का उदाहरण

निर्माण

  • 954 ई. (10वीं शताब्दी) में परमार शासक वीरनारायण परमार द्वारा (राजा भोज का पुत्र)

प्रथम साका (1310 ई.)

  • अलाउद्दीन खिलजी का आक्रमण (सेनापति – कमालुद्दीन गुर्ग) 
  • शासक वीर सातलदेव/शीतलदेव व सोमदेव वीरगति को प्राप्त
  • मीणादे (शीतलदेव की पत्नी) के नेतृत्व में जौहर
  • भांडेलाव तालाब को गोमांस से दूषित कर जलस्रोत नष्ट

द्वितीय साका (1582 ई.)

  • अकबर के कहने पर मोटा राजा उदयसिंह का आक्रमण 
  • शासक वीर कल्ला राठौड़ / कल्ला रायमलोत 
  • हाड़ी रानी (कल्ला की पत्नी, सुरजन हाड़ा की पुत्री) द्वारा जौहर

प्रमुख स्थल

  • महाराजा अजीतसिंह का दरवाज़ा, कोट (किला परिसर), हल्देश्वर महादेव मंदिर, कल्ला रायमलोत का थड़ा (थान)

  • जयनारायण व्यास (शेर-ए-राजस्थान) को प्रजामंडल आंदोलन के दौरान यहीं कैद किया गया

प्रसिद्ध कथन

  • अमीर खुसरो – “राजपूतों के सिर कट गए, फिर भी वे लड़ते रहे” 
  • अलाउद्दीन खिलजी – “भयानक जंगल में स्थित यह दुर्ग, जहाँ सातलदेव सिमुर्ग की भांति रहता है” (तारीख-ए-फरिश्ता)

अचलगढ़ दुर्ग

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जानकारी

स्थिति

  • आबू पर्वत / अर्बुदांचल / अर्बदागिरी पर स्थित गिरि दुर्ग

निर्माण 

  • मूल निर्माण लगभग 900 ई. में परमार शासकों द्वारा भग्नावशेषों पर 1452 ई. में महाराणा कुम्भा द्वारा पुनर्निर्माण

ऐतिहासिक महत्व

  • आबू पर्वतीय क्षेत्र की सामरिक सुरक्षा का प्रमुख दुर्ग • मेवाड़–गुजरात सीमा की रक्षा का केंद्र

प्रमुख धार्मिक स्थल

  • अचलेश्वर महादेव मंदिर (आबू पर्वत के अधिष्ठाता देव; शिवलिंग के स्थान पर ब्रह्मखड्ड, शिव के पैर के अंगूठे की पूजा), अर्बुदा माता मंदिर, गौमुख मंदिर (सर्वधातु की 14 प्रतिमाएँ), कुंभस्वामी मंदिर (राणा कुम्भा द्वारा निर्मित), ऋषभदेव व पार्श्वनाथ के जैन मंदिर (2)

जल संरचनाएँ

  • मंदाकिनी कुंड (अचलेश्वर मंदिर के पास), कपूर सागर तालाब, सावन-भादो झील

महल व स्थापत्य

  • ओखी रानी का महल (कुम्भा की पत्नी), आलम टावर (परमारों द्वारा निर्मित), चम्पापोल, भैरवपोल, सावन-भादवा(राणा कुम्भा व उदा की मूर्तियां), दुरसा आढ़ा की पीतल प्रतिमा, मंदाकिनी कुंड के किनारे महाराव मानसिंह (सिरोही) की छतरी, भंवराथल (एक स्थान जहाँ महमूद बेगड़ा ने आक्रमण के समय देवी प्रतिमाएँ तोड़ने पर मधुमक्खियों के झुंड का आक्रमण)

परीक्षा की दृष्टि से कुछ महत्वपूर्ण तथ्य

किलाप्रसिद्ध तोप
मेहरानगढ़ (जोधपुर)किलकिला, शम्भूबाण, गजनीखां, कड़क बिजली, बगसवाहन, धुड़धाणी, बिच्छुबाण, गुब्बार, जमजमा, नुसरत, मनोहर, आनन्दघन, नागपली, गजक, मीरबख्श, रहस्य कला
जयगढ़ किलाजयबाण तोप
बूंदी का किलागर्भगुंजन तोप
शाहबाद किला (बारां)नवलबाण तोप
खंडार किला (सवाई माधोपुर) शारदा तोप 
शेरगढ़ किला (धौलपुर)हूणहुंकार तोप 
क़िलासंबंधित पहाड़ी / पठार
सज्जनगढ़ किला (उदयपुर)बासंदरा पहाड़ी
तारागढ़ दुर्ग (अजमेर)बिठली पहाड़ी
जयगढ़ किला (जयपुर)ईगल पहाड़ी
सोजत का किला (पाली)नानी सिरड़ी पहाड़ी
चित्तौड़गढ़ किलामेसा पठार
मेहरानगढ़ दुर्ग (जोधपुर)चिड़ियाटूँक / पंचेटिया पहाड़ी
दौसा का किलादेवगिरी पहाड़ी
जैसलमेर किला (जैसलमेर)त्रिकुट पहाड़ी
शेरगढ़ किला (बारां)कोशवर्द्धन पहाड़ी
आमेर किला (जयपुर)कालीखोह पहाड़ी
कोटड़े का किला (बाड़मेर)भाखरी पहाड़ी
जालौर का किलाकनकाचल पहाड़ी
बयाना का किला (भरतपुर)मानी / नैनी पहाड़ी
शाहबाद का किला (बारां)भामती पहाड़ी
कुम्भलगढ़ (राजसमंद)हेमकुट / गंधमादन
लक्ष्मणगढ़ किला (सीकर)बेड़ पहाड़ी
किले का नामआक्रमणकारीबदला हुआ नाम
चित्तौड़गढ़अलाउद्दीन खिलजीखिज्राबाद (1301)
आमेरबहादुरशाह प्रथममोमिनाबाद (1707)
जालौरअलाउद्दीन खिलजीजलालाबाद (1311)
सिवाणाअलाउद्दीन खिलजीखैराबाद (1310)
गागरोनमहमूद खिलजी प्रथममुस्तफाबाद (1444)
शाहबाद किलाशेरशाह सूरीसलीमाबाद 

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