राजस्थान के स्मारक

राजस्थान के स्मारक: राजस्थानी कला व संस्कृति के अंतर्गत राजस्थान के स्मारक राज्य की समृद्ध ऐतिहासिक विरासत, स्थापत्य कला और सांस्कृतिक विविधता को दर्शाते हैं। यहाँ की प्रमुख हवेलियाँ, छतरियाँ, दरगाहें, मस्जिदें, गुरुद्वारे, स्तंभ, बावड़ियाँ और जलाशय विभिन्न कालों की उत्कृष्ट शिल्पकला और वास्तुकला के उदाहरण हैं। ये स्मारक राजस्थान की परंपराओं, धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक पहचान के महत्वपूर्ण प्रतीक माने जाते हैं।

जैसलमेर की हवेलियां

पटवों की हवेली –
  • सेठ गुमान चंद पटवा द्वारा, जैसलमेर की सबसे पहली एवं बड़ी, खिड़कियाँ पत्थर से बनी 
  • पाँच मंजिला (पांच बेटों के लिए)
  • भारतीय + सिंध + यहूदी + मुगल स्थापत्य का समन्वय
नथमल की हवेली –
  • कुल मंजिल – 5
  • जैसलमेर प्रधानमंत्री नथमल द्वारा 
  • निर्माण – दो भाईयों लालू और हाथी द्वारा
सालिम सिंह की हवेली – 
  • नौ मंजिला हवेली, जैसलमेर के प्रधानमंत्री सालिम सिंह मेहता द्वारा 
  • सात खण्ड पत्थर से निर्मित, आठवां (रंगमहल) एवं नवां (शीशमहल) खण्ड़ लकडी से निर्मित
  • अन्य नाम – मोती महल, जहाज महल

झुंझुनू की हवेलियां

  • सर्वाधिक हवेलियाँ नवलगढ़, इसलिए नवलगढ़ हवेलियों का नगर व शेखावाटी की स्वर्ण नगरी /गोल्डन सिटी कहलाता है 
  • नवलगढ़ – भगोरिया की हवेली, भगतों की हवेली, पोद्दार की हवेली, लालधर जी व धरका जी की हवेली 
  • झुंझुनूं – टीबड़ेवालों की हवेली, शताधिक खिड़कियों वाली ईसरदास मोदी की हवेली
  • बिसाऊ – सेठ जयदयाल केड़िया की हवेली, नाथूराम पोद्दर की हवेली, हीराराम बनारसी लाल की हवेली, सीताराम सिंगतिया की हवेली
  • मंडावा – रामदेव चौखाणी की हवेली, सागरमल लड़िया की हवेली, गोयनका की हवेली (भित्ति चित्रों के लिए प्रसिद्ध )
  • महनसर – सोने-चांदी की हवेली
  • पिलानी – बिड़ला हवेली
  • डूंडलोद – सेठ लालचंद गोयनका हवेली

सीकर की हवेलियां

  • पंसारी की हवेली (श्रीमाधोपुर)
  • बिनाणियों कौ हवेली,
  • गनेड़ी वालों की हवेली,
  • केड़िया एवं राठी की हवेली (लक्ष्मणगढ़)
  • खेमका सेठों की हवेली, रामगोपाल पोद्दार की हवेली (रामगढ़),

चूरू की हवेलियां

  • दानचन्द चौपड़ा की हवेली
  • सुराणों के हवामहल/हवेली
  • रामविलास गोयनका की हवेली 
  • मंत्रियों की मोटी हवेली

बीकानेर की हवेलियां

  • लाल पत्थर के प्रयोग के लिए प्रसिद्ध
  • बच्छावतों की हवेली, रामपुरियाहवेली, कोठारी हवेली, गुलेच्छा हवेली, सेठिया की हवेलियाँ, मोहता हवेली, बिन्नाणी की हवेली

जोधपुर की हवेलियां

  • पुष्य हवेली –
    • विश्व की एक ही नक्षत्र में बनी एकमात्र हवेली 
    • निर्माण – जोधपुर नरेश जसवंत सिंह II के कामदार पुष्करणा रघुनाथमल जोशी 
  • बड़े मियाँ की हवेली 
  • पच्चीसां हवेली, पोकरण हवेली, राखी हवेली
  • लालचन्द ढड्ढा की हवेली (फलौदी)

जयपुर की हवेलियां

  • पुरोहित जी की हवेली
  • चूरसिंह जी की हवेली  
  • रत्नाकर भट्ट पुण्डरीक की हवेली 
  • मथुरा वालों की हवेली (नक्कालों की हवेली)

टोंक

  • सुनहरी को

उदयपुर की हवेलियां

  • बागोर/बागरा की हवेली 
    • निर्माण – मेवाड़ के तत्कालीन प्रधानमंत्री श्री अमरचंद बड़वा द्वारा, पिछोला झील के निकट
    • इसमें विश्व की सबसे बड़ी पगड़ी रखी है

छतरियाँ

विशेषता

जोधपुर

  • जसवंत थड़ा 
    • उपनाम – राजस्थान का ताजमहल
    • निर्माण – महाराणा सरदार सिंह द्वारा 1899 ई. में, जसवंतसिंह II की स्मृति में
    • [हाड़ौती का ताजमहल अबली मीणी का महल]
  • पंचकुण्ड की छतरियाँ 
    • मण्डोर में यहाँ राठौड़ों की छतरियां स्थित हैं, जिनमें सबसे प्राचीन राव गांगा की छतरी है
    • इसके दक्षिण में रानियों की छतरियाँ है 
  • जैसलमेर रानी की छतरी
  • राज सिंह कुम्पावत की छतरी 
    • मंडोर – 18 खम्भों की छतरी
    • प्रधानमंत्री राजसिंह कुम्पावत द्वारा महाराजा जसवंत सिंह की प्राण रक्षा में बलिदान होने पर इस छतरी का निर्माण करवाया गया
  • रानी सूर्य कँवर की छतरी
    • 32 खम्भो की छतरी
  • अखैराज सिंघवी की छतरी
    •  20 खम्भों की 
    • निर्माण – अखैराज सिंघवी द्वारा (जोधपुर राजा भीमसिंह के सेनापति)
  • गोरा धाय की छतरी
    • निर्माण राजा अजीतसिंह ने 1711 ई. में अपनी धाय की स्मृति में
    • उपनाम – मारवाड़ की पन्ना धाय (गोराधाय)
  • कागा की छतरी
  • इंद्रराज सिंघी की छत्तरी
  • मामा-भांजा की छतरी
  • ब्राह्मण देवता की छतरी
  • राव मालदेव की छतरी

जयपुर की  छतरी

  • गैटोर की छतरियाँ
    • कछवाहा वंश की छतरियां 
    • निर्माण – पंचायतन शैली में 
    • सवाई जयसिंह द्वितीय से माधोसिंह द्वितीय तक की छतरियाँ है (सवाई ईश्वरीसिंह के अलावा)
  • मानसिंह प्रथम की छतरी (आमेर में)
  • ईसरलाट/सरगासूली 
    • मराठों पर विजय के उपलक्ष्य में ईश्वरीसिंह ने बनवाया, 
    • जहाँ से कूदकर उसने आत्महत्या की

अलवर की  छतरी 

  • 80 खंभों की छतरी
    • इसे मूसी महारानी की छतरी भी कहते हैं
    • निर्माण – 1815, विनयसिंह ने करवाया था
    • इसकी ऊपरी मंजिल में रामायण महाभारत के भित्ति चित्रण मिलते हैं
    • 2 मंजिला
      • 1 मंजिल – लाल पत्थर से
      • 2 मंजिल – श्वेत संगमरमर से 
    • शैली – इंडो-इस्लामिक 
  • टहला को छतरी (भित्ति चित्र)
  • नेड़ा की छतरी (सरिस्का)
  • ज़ोधसिंह की छतरी
    • 32 खम्भे, बदनौर (ब्यावर)

उदयपुर की  छतरी

  • महासतियाँ (उदयपुर, आहड़)
    • सबसे पुरानी छतरी – महाराजा अमरसिंह I
    • आहड़ में मेवाड़ महाराणाओं की श्मशान भूमि
  • गफूर बाबा फकीर की छतरी
    • जगमंदिर में, शाहजहाँ द्वारा 
  • उदयसिंह की छतरी (गोगुन्दा में)
  • चेतक की छतरी – बलीचा गाँव

बूंदी की  छतरी

  • 84 खम्भों की छतरी
    • निर्माण – 1683 ई. में राव अनिरुद्ध सिंह ने धाय माँ का पुत्र (धाबाई देवा गुर्जर) की याद में 
    • दो मंजिला, हाथी, घोड़ों की आकृतियों के साथ-साथ उच्च तीक्ष्ण विधि में शिव पार्वती, राधा कृष्ण, विष्णु वराह अवतार, ढोला -मारु, गजलक्ष्मी, समुद्रमंथन एवं नाभी से ब्रह्मा की उत्पत्ति के चित्र
  • केसरबाग की छतरियाँ 
    • 66 छतरियों का समूह, (बूँदी राजपरिवार की छतरियाँ)
    • जिनमें सबसे प्राचीन राव दूदा की छतरी, नवीनतम महाराव विष्णुसिंह की है

जैसलमेर की  छतरी

  • बड़ा बाग की छतरियां
    • जैसलमेर राजपरिवार की छतरियां
  • पालीवालों की छतरियाँ 
  • महारावल जैतसिंह की छतरी

बीकानेर की  छतरी

  • देवीकुण्ड सागर की छतरियाँ
    • बीकानेर के राजपरिवार की छतरियाँ
    • रिड़मलसर गाँव में स्थित
    • इसमें राव कल्याणमल से लेकर राव डूंगरसिंह तक छतरियाँ 
    • राव कल्याणमल की छतरी सबसे पुरानी 
    • सूरज सिंह राठौड़ की छतरी सबसे सुंदर
  • एल. पी. टैस्सीटोरी की छतरी

सवाई माधोपुर की छतरी

  • शिवलिंग की छतरी
  • जैत्रसिंह की छतरी/न्याय की छतरी
    • 32 खम्भों की छतरी
    • निर्माण – रणथंभौर शासक हम्मीर देव चौहान द्वारा अपने पिता की स्मृति में
    • धौलपुर के लाल पत्थर का उपयोग
  • कुत्ते की छतरी 
    • रणथम्भौर दुर्ग के निकट कुक्कराज घाटी 
  • शिवलिंग की छतरी

अजमेर  की  छतरी

  • रूठी रानी कौ छतरी (तारागढ़)
  • आँतेड़ की छतरी (दिगम्बर जैन सम्प्रदाय)

भीलवाड़ा की छतरियाँ 

  • महाराणा सांगा की छतरी (माण्डलगढ़)
  • जगन्नाथ/जगदीश कछवाहा की छतरी
    • शाहजहाँ द्वारा 
    • 32 खंभों की छतरी 
  • गंगा बाई की छतरी (गंगापुर)

चित्तौड़गढ़ की छतरियां 

  • रेदास/रायदास/स्वामी रविदास
    • कुंभश्याम मंदिर में 
  • कल्ला जी की छतरी 
  • जयमल राठौड की छतरी 
  • रावत बाघसिंह की छतरी

अन्य छतरियाँ 

  • बंजारों की छतरी (लालसोट)
  • महाराणा प्रताप की छतरी
    •  बाण्डोली (सलूम्बर)
    • 8 खम्भों की छत्री
  • पृथ्वीराज सिसोदिया की छतरी (कुंभलगढ़ )
    • 12 खंभों की छतरी 
  • थानेदार नाथू सिंह को छतरी (शाहबाद, बारां)
  • राव शेखा की छतरी ( नवलगढ़ झूँझुनू )
  • जोगीदास की छतरी (झुंझुनू)
  • अकबर को छतरी (बयान दुर्ग के पास)
  • राव जैतसी की छतरी (भटनेर, हनुमानगढ़ )
  • अमरसिंह राठौड़ की छतरी (नागौर)
  • एक खम्भे की छतरी (रणथम्भौर)

दरगाहें और मकबरे

महत्वपूर्ण तथ्य

ख्वाजा मुइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह (अजमेर)

  • जन्म – संजरी (फारस)
  • स्थान – तारागढ़ पहाड़ी में; ख्वाजा साहब (1142-1233 ई.); पक्की मजार 1464 ई. (मोहम्मद खिलजी के समय)
  • दरगाह बनाने की शुरुआत इल्तुतमिश ने की तथा पूर्ण हुमायूँ
  • उर्स – पहली रज्जब से छठवी रज्जब तक 
  • विशेषताएं
    • 75 फीट बुलन्द दरवाजा; अकबरी मस्जिद, मुख्य मजार (ग्यासुद्दीन खिलजी, चाँदी का कटहरा (सवाई जयसिंह), शाहजहाँनी मस्जिद (शाहजहाँ), बेगमी दालान (शाहजहाँ की बेटी जहाँआरा द्वारा)
    • बड़ी देग (अकबर, 1567 ई.), छोटी देग (जहाँगीर, 1613 ई.)
    • निजाम द्वार (हैदराबाद के निजाम मीर उस्मान अली द्वारा); बुलन्द दरवाजा (महमूद खिलजी द्वार निर्मित) महफिल खाना (शीरूद्दौला, 1888 ई., उर्स पर कव्वाली) 
  • कब्रगाहबीबी हाफिज जमाल (ख़्वाजा साहब की पुत्री), चिमनी बेगम (शाहजहाँ की पुत्री), मिश्ती निजामुद्दीन सक्का (जिसने हुमायूँ को डूबने से बचाया) आदि

अढ़ाई दिन का झोपड़ा (अजमेर)

  • तारागढ़ पहाड़ी की तलहटी में
  • नाम: अढ़ाई दिन का उर्स (फकीर पंजाब शाह) के कारण
  • इतिहास – मूल रूप से चौहान शासक बीसलदेव द्वारा 1153 ई. में संस्कृत महाविद्यालय; 1192 ई. में मोहम्मद गौरी द्वारा मस्जिद में परिवर्तित; कुतुबुद्दीन ऐबक ने सात मेहराब बनवाए

शेख अलाउद्दीन खान का मकबरा (अजमेर)

  • निर्माण – 1659 ई. में
  • आयताकार भवन, 16 खंभों पर टिका; तीन गुम्बद; ‘सोला थम्बा‘ नाम से जाना जाता; पाँच मजारें

हजरत शक्कर पीर बाबा की दरगाह, नरहड़ (झुंझुनूं)

  • लोकप्रिय नाम नरहड़ पीर था, शेख सलीम चिश्ती के शिष्य थे
  • मेला – कृष्ण जन्माष्टमी पर भव्य 

हमीमुद्दीन नागौरी की दरगाह (नागौर)

  • अन्य नाम – राजस्थान का दूसरा ख्वाजा /तारकीन सुल्तानों का फ़क़ीर/संन्यासियों का सुल्तान 
  • स्थान – गिनाणी तालाब के पास
  • विशेषताएं: 52 फीट ऊँचा बुलन्द दरवाजा; पीले पत्थर की कलात्मक खुदाई
  • महत्व: सूफी संत हमीमुद्दीन (सुल्तान-ए-तारकीन); राजस्थान का दूसरा सबसे बड़ा मुस्लिम मेला

सैफुद्दीन अब्दुल वहाब दरगाह 

  • बड़े पीर का दरगाह
  • सूफ़ियों की कादरिया शाखा के जन्मदाता

सैयद फखरूद्दीन नागौरी दरगाह , गलियाकोट (डूंगरपुर)

  • अन्य नाम – मजार-ए-फखरी
  • माही नदी के किनारे पर 
  • महत्व: दाऊदी बोहरा संप्रदाय का सबसे बड़ा उर्स (डूंगरपुर का उर्स); मोहर्रम के 27वें दिन

संत अब्दुल्ला पीर का मकबरा(बांसवाड़ा)

  • भगवानपुरा (बांसवाड़ा)
  • दाऊदी बोहरा संप्रदाय का दूसरा महत्वपूर्ण स्थल, वार्षिक उर्स

भरतपुर की जामा मस्जिद

  • निर्माण: महाराजा बलवंत सिंह द्वारा
  • विशेषताएं: प्रवेश द्वार बुलन्द दरवाजे पर आधारित; इमारत दिल्ली की जामा मस्जिद पर आधारित; दीवारों पर कुरान आयतें

मजनूं की मजार, (अनूपगढ़)

  • लैला को ढूंढते मजनूं की मृत्यु स्थल; क्षेत्र में सज्जी के पेड़ थे (सोडा बनाने के लिए, अब नष्ट)

अब्दुल्ला खाँ का मकबरा (अजमेर)

  • निर्माण: 1710 ई. में सफेद संगमरमर से
  • सामने अब्दुल्ला खाँ की बीबी का मकबरा

कबीरशाह की दरगाह (करौली)

  • 120 वर्ष पूर्व; सूफी संत कबीरशाह द्वारा जीवनकाल में निर्माण; शिष्य सादिक अली द्वारा दफन
  • उत्कृष्ट शिल्प

मीरा साहब की दरगाह (बूँदी)

  • जैस सागर के निकट पहाड़ी पर, बूँदी का पूरा दृश्य दिखता है

शाहबाद की जामा मस्जिद, (बारां)

  • शहर शाहजहाँ द्वारा बसाया; मस्जिद औरंगजेब द्वारा

सरवाड़ की दरगाह (अजमेर)

  • सरवाड़ गाँव में हजरत सैयद ख्वाजा फखरूद्दीन की दरगाह

राती थेड़ी (करणपुर)

  • सूफी संत शेख फरीद (थेड़ी वाले बाबा)पुराना नाम – राती थेड़ी

काकाजी पीर को दरगाह (प्रतापगढ़) 

  • अन्य नाम – काँठल का ताजमहल ” 

अन्य प्रसिद्ध दरगाहें और मकबरे

  • चल फिर शाह की दरगाह (चित्तौड़)
  • सैयद बादशाह की दरगाह (शिवगंज, सिरोही)
  • हजरत दीवान शाह की दरगाह (कपासन, चित्तौड़गढ़)
  • हजरत शेख अब्दुल अजीज मक्की (केशवरायपाटन)
  • मीठेशाह की दरगाह (गागरोण, झालावाड़)
  • मर्दान शाह पीर की दरगाह (करौली)
  • पीर सदरुद्दीन की दरगाह (रणथम्भौर)
  • पीर हाजी निजामुद्दीन (फतेहपुर, सीकर)
  • शेख बाबा इस्हाक की दरगाह (खाटू,सीकर)
  • गैबी पीर (जहाजपुर, भीलवाड़ा)
  • गुलाम खां का मकबरा (जोधपुर)
  • रजिया सुल्तान का मकबरा (टोंक) 
  • मालिक शाहपीर की मजार (जालौर)
  • हज़रत मखदून पीर की दरगाह (जालौर)
  • अलाउद्दीन आलमशाह का मकबरा (तिजारा)
  • नौंगजा पीर की मजार (चित्तौड़गढ़ दुर्ग)
  • जार जरीना मकबरा (धौलपुर)
  • नवाब दौलत खां का मकबरा (फतेहपुर, सीकर)
  • बाबा गफूर की मजार (जगमंदिर, उदयपुर)
  • अब्दुल्ला खां की बीबी का मकबरा (अजमेर)
  • मीरान॑ साहब की दरगाह (तारागढ़ दुर्ग अजमेर)
  • सैयद ख्वाजा फखरूद्दीन (सरवाड़, अजमेर)
  • मलिक संत का मकबरा (जालौर दुर्ग)
  • शेख अब्दुल अजीज मक्की की दरगाह (बूंदी)
  • कमरूद्दीन शाह (झुंझुनूं)
  • नवाब रूहेल खाँ का मकबरा (झुंझुनूं)
  • पीर मस्तान (सौजत)
  • मिर्जा की दरगाह, हजीरा की दरगाह (अमरसर)
  • हसामुद्दीन चिश्ती, लालपीर की डूंगरी (सांभर, जयपुर)
  • नेवटा बाबा की मजार (सांगानेर, जयपुर)
  • खानकाह हरजरत हसनपीर (आंधी, जयपुर)
  • शाह जल्लाल (चाकसू, जयपुर)
  • शेख बुरानुद्दीन चिश्ती (ताला, जयपुर)

प्रमुख मस्जिदें

मस्जिदमस्जिदमस्जिद
अकबरी मस्जिद (आमेर)अलाउद्दीन मस्जिद (जालौर)जामा मस्जिद (जयपुर)
नालीयासर मस्जिद (सांभर)इक मीनार मस्जिद (जोधपुर)उषा मस्जिद (बयाना)
गुलाम कलंदर (जोधपुर)जामा मस्जिद (शाहबाद, बारां)पीर दुल्लेशाह की मीनार (केरला, पाली)
मेड़ता मस्जिद (मेड़ता)फतहजंग गुम्बद (अलवर)पठान गुलाम कलन्दर की मस्जिद (मण्डोर)
लाल मस्जिद (अमरसर, जयपुर)जनाना मस्जिद (अमरसर, जयपुर)

गुरुद्वारा

महत्वपूर्ण तथ्य

गुरुद्वारा बुढ्ढ़ा जोहड़ (गंगानगर)

  • स्थान – रायसिंहनगर के पास
  • निर्माण – 1954 में संत बाबा फतेहसिंह द्वारा; 5 वर्ष तक कार्य
  • संगमरमर का मुख्य द्वार; कीर्तन दरबार
  • मेले – अमावस्या पर; श्रावण अमावस्या पर बड़ा मेला
  • इतिहास – जत्थेदार बुढ्ढासिंह द्वारा अधर्मी मस्सारंग का सिर काटकर लाया गया

साहवा का गुरुद्वारा (चूरू)

  • मेला – कार्तिक पूर्णिमा पर 
  • गुरु ग्रंथ साहब की पूजा

शेर शिकार गुरुद्वारा, मचकुण्ड (धौलपुर)

  • मान्यता – स्नान से चर्मरोग दूर; पानी में गंधक और रसायन
  • एतिहासिकता – सिख गुरु हर गोविंद सिंह (1662) द्वारा शेर का शिकार; उनकी स्मृति में गुरुद्वारा

डाडा पम्पाराम का डेरा (विजयनगर)

  • मेला – फाल्गुन में 7 दिवसीय 

तख्त हजारा(सार्दुलशहर)

  • स्थित – सार्दुलशहर के पास तख्त हजारा गाँव 
  • रांझा की प्रेम कथा (हीर स्यालकोट से)

अन्य गुरुद्वारे

  • साहवा (चूरू)
  • बुड़ा जोहड़ (रायसिंहनगर, श्रीगंगानगर)
  • नरैना (जयपुर)

स्तंभ/मीनारें

महत्वपूर्ण तथ्य

विजय स्तंभ (चित्तौड़)

  • कुंभा द्वारा मालवा विजय; 1440-48 ई.; 9 मंजिला, 122 फीट; ‘मूर्तिकला विश्वकोष‘; विष्णु ध्वज; क्रांतिकारी प्रेरणा

ईसर लाट (जयपुर)

  • ईश्वरी सिंह द्वारा 1749 (मराठा विजय)
  • नाय नाम – सरगासूली

जैन कीर्ति स्तंभ (चित्तौड़)

  • 12 वीं शताब्दी में दिगम्बर संप्रदाय के बघेरवाल महाजन सानाय के पुत्र जीजाक द्वारा
  • आदिनाथ समर्पित, 7 मंजिला

धर्म स्तूप (चूरू)

  • 1925 में गोपाल दास द्वारा रामनवमी के दिन, सर्व धर्म सद्भाव के प्रतीक 
  • लाल पत्थरों से बना घंटाघर

धौलपुर शाही घंटाघर

  • निहाल सिंह  द्वारा (1880-1910)
  • सात मंजिला, 7 धातु घंटा
  • दुनिया की सबसे ऊँची घड़ी

कोटा वेली टावर

  • एक घंटाघर, पोलिटिकल एजेंट वेली के नाम पर उम्मेद सिंह द्वितीय काल में 
  • कोटा की प्रथम आधुनिक इमारत

विजय स्तंभ, (तनोट)

  • 1965 भारत-पाक विजय
  • नेहर खां की मीनार – कोटा

बावड़ियाँ

राजस्थान में जल स्थापत्य कला

  • बावड़ी – उन सीढ़ीदार कुंओं या तालाबों को कहते है जिनके तल तक सीढ़ियों के सहारे-सहारे नीचे तक आसानी से पहुंचा जा सकता है।
  • बावड़ियों को कन्नड़ में कल्याणी या पुष्करणी, मराठी में बाख, गुजराती में बाव और संस्कृत मे वापि, वाप, दीर्घा आदि नामों से जानते है।
  • अपराजित पृच्छा नामक पुस्तक वास्तुशास्त्र पर आधारित है। इसके लेखक भुवन देवाचार्य ने बावड़ियों के चार प्रकार बताये है।
    • नंदा (1) प्रवेश द्वार)
    • भद्रा (2) प्रवेश द्वार)
    • जया (3) प्रवेश द्वार)
    • विजया (4) प्रवेश द्वार)

नोट- 

  • दीर्घाका – 32 हाथ लम्बी बावड़ी और तीन प्रवेश द्वार
  • भालेरी – संकड़ी सीढ़ियाँ और कुंआ वाला भाग बड़ा
  • जीवती – पानी कभी खत्म नहीं होता।
  • सर्वाधिक स्थापत्य कला वाली बावड़ियों बूंदी और शेखावाटी
  • City of step well – Bundi
  • 29 दिसम्बर, 2017 को निम्नलिखित बावड़ियों पर डाक टिकट जारी किये गये।
    • नीमराणा की बावड़ी, कोटपुतली-बहरोड़ 15 रूपये
    • नागर सागर कुण्ड – बूंदी 15 रूपये
    • रानीजी की बावड़ी – बूंदी – 5 रूपये
    • चांद बावड़ी आभानेरी दौसा – 5 रूपये
    • तुंवरजी का झालरा, जोधपुर – 5 रूपये
    • पन्ना मीणा की बावड़ी, आमेर – 5 रूपये
बावड़ी / कुआंमहत्वपूर्ण तथ्य
रानीजी की बावड़ी (बूँदी)राजस्थान की सबसे बड़ी बावड़ी
निर्माण – 8वीं सदी के पूर्वार्द्ध, राव राजा अनिरुद्ध सिंह की विधवा रानी नाथावतजी द्वारा पुत्र बुद्ध सिंह के शासनकाल में 
बुआजी -भतीजी बावड़ी भी कहलाती है 
बावड़ी गीतों के लिए प्रसिद्ध; 
मुगल-राजपूत स्थापत्य का मिश्रण; ASI द्वारा संरक्षित
नागर सागर कुंड (बूंदी)रानी चंद्रभानु कँवरी ने निर्माण कराया।
गंगासागर यमुना सागर के नाम से प्रसिद्ध थी
2017 में 15 रुपये का डाक टिकट जारी
अनारकली की बावड़ी(बूँदी)निर्माण रानी नाथावतजी की दासी अनारकली द्वारा निर्माण करवाया गया।
 व काला जी की बावड़ी आदि बूँदी की अन्य प्रसिद्ध बावड़ियाँ हैं।
अन्य बावड़ियाँ (बूंदी) – भाँवल बावड़ी, अनार बावड़ी, जैतसागर तालाब, कालाजी की बावड़ी, काकाजी की बावड़ी, गुल्ला की बावड़ी, चम्पा बाग की बावड़ी, पठान की बावड़ी, नारूजी की बावड़ी
तुंवरजी का झालरानिर्माण महाराणा अभयसिंह की रानी बड़ी तुंवरजी द्वारा; 
तापी बावड़ी (जोधपुर)निर्माण तापोजी तेजावत द्वारा; 
गुलाब सागर (जोधपुर)निर्माण महाराजा विजयसिंह द्वारा अपनी पासवान गुलाबराय की स्मृति में
महिला बाग झालरा (जोधपुर)गुलाब सागर के पास स्थित; 
निर्माण 1776 ई. में महाराजा विजयसिंह की पासवान गुलाबराय द्वारा; 
महिलाओं का ‘लौटियों का मेला’ आयोजित होता था
सामने हर्षद माता मंदिर (गुर्जर प्रतिहार, महामारू शैली); मंदिर स्वास्तिक आकार
परिधि के कक्ष को ‘अंधेरी उजाला’ कहते हैं।
ईदगाह बावड़ी जोधपुरआयरलैण्ड के पर्यटक कैरन रान्सलै ने साफ किया जिसके कारण चर्चा में रही
अन्य जलाशय – जोधपुररानीसर-पदमसर, फतेहसागर, तख्तसागर, बहू जी रो तालाब / स्वरुप सागर तालाब, नवलखा झालरा, शेखावत जी का तालाब
अन्य बावड़ियाँ – जोधपुरदेवकुण्ड, नैणसी बावड़ी, श्रीनाथजी का झालरा, हाथी बावड़ी, खरबूजा बावड़ी, रघुनाथ बावड़ी, घाटा बावड़ी, व्यास जी की बावड़ी, एक चट्टान बावड़ी
चाँदबावड़ी / आभानेरी बावड़ी (दौसा)निर्माण 8वीं सदी, प्रतिहार निकुंभ राजा चाँद द्वारा; 
13 मंजिल, लगभग 3500 सीढ़ियाँ
तिलिस्मी स्थापत्य के लिए विश्व प्रसिद्ध;
भाडारेंज बावड़ी / बड़ी बावड़ी (दौसा)तीन मंजिला बावड़ी; ‘बड़ी बावड़ी’ के नाम से प्रसिद्ध
काका जी की बावड़ी (दौसा)बांदीकुई तहसील में स्थित; लगभग 100 फीट गहरी
चमना बावड़ीशाहपुरा (भीलवाड़ा)विशाल तीन मंजिला बावड़ी।
निर्माण सन् 1800 में महाराजा उम्मेद सिंह प्रथम ने चमना नामक गणिका की इच्छा पर करवाया था।
सीतारामजी की बावड़ी, भीलवाड़ाबावड़ी में एक गुफा बनी हुई है, जिसमें बैठकर रामस्नेही सम्प्रदाय के प्रवर्तक स्वामी रामचरणजी ने 36 हजार पदों की रचना की तथा रामस्नेही सम्प्रदाय की स्थापना की।
अन्य बावड़ियाँ (भीलवाड़ा) चोखी बावड़ी (बनेड़ा, शाहपुरा), चमना बावड़ी (शाहपुरा), कच्छवाया कुंड (शाहपुरा), बाईराज की बावड़ी
नौलखा बावड़ी (डूंगरपुर)निर्माण – 1556 ई. में आसकरण की पत्नी प्रेमल दे ने कराया
शिल्पी – लीलाधर
अन्य बावड़ियाँ (डूंगरपुर) – केला बावड़ी, उदय बावड़ी (1880 में महारावल उदय सिंह द्वारा बनवाई गई)
नीमराणा की बावड़ी (अलवर)इस 9 मंजिली बावड़ी का निर्माण राजा टोडरमल ने 18 वीं शताब्दी में करवाया था।
विशेषता – इस बावड़ी के निचले भाग में तापमान 19° कम हो जाता है।
अन्य बावड़ियाँ (अलवर) – रानी जी का कुआँ, महंत जी की बावड़ी (राजगढ़) 
पन्ना मीणा की बावड़ी (आमेर, जयपुर)निर्माण 17वीं शताब्दी में मिर्जा राजा जयसिंह के काल में
अन्य बावड़ियाँ (जयपुर) – मांजी बावड़ी (मानसिंह प्रथम), चार घोड़ों की बावड़ी, चुली बावड़ी
त्रिमुखी बावड़ी(उदयपुर)निर्माण – मेवाड़ महाराणा राजसिंह की रानी रामरसदे ने करवाया था।
अन्य बावड़ियाँ (उदयपुर) – वीरुपुरी की बावड़ी, गंगा कुण्ड, आयड़ (उदयपुर), सुल्तान बावड़ी (बेदला, उदयपुर)
गड़सीसर सरोवर (जैसलमेर)निर्माण 1340 ई. में रावल गड़सी के शासनकाल में; कृत्रिम सरोवर; मुख्य प्रवेश द्वार ‘टीलों की पिरोल’ के नाम से प्रसिद्ध
अन्य बावड़ियाँ (जैसलमेर) – मेहता सागर, जैसुल का कुँआ 
घोसुण्डी की बावड़ी (चित्तौड़)श्रृंगार देवी (जोधा की पुत्री) ने निर्माण कराया जो महाराणा रायमल की रानी थी।
अन्य बावड़ियाँ (चित्तौड़गढ) – खातन बावड़ी, तेल- घी की बावड़ी, सुनार बावड़ी (बेंगू)
कोड़मदेसर की बावड़ी (बीकानेर)निर्माण राव जोधा की माता कोडम दे द्वारा; 
पश्चिमी राजस्थान की सबसे बड़ी बावड़ी
पातालतोड़ बावड़ी (धौलपुर)7 मंजिला दिखाई देती  है; 
राजस्थान की सबसे गहरी / सबसे लंबी बावड़ी
बाटाडू का कुआँ (बाड़मेर)बाटाडू गाँव में स्थित; 
निर्माण रावल गुलाबसिंह द्वारा; संगमरमर का कुआँ
रेगिस्तान का जलमहल’ कहलाता है
डिग्गी तालाब (अजमेर)अजयमेरू पहाड़ियों के नीचे स्थित; नैसर्गिक जल स्रोत
सरडा रानी की बावड़ी (टोडारायसिंह, टोंक)विशिष्ट कलात्मक बनावट के लिए प्रसिद्ध; 
टोडारायसिंह के महल के पीछे स्थित बुद्ध सागर रमणीक स्थल;
अन्य बावड़ियाँ (अलवर) – खारी बावड़ी (निवाई), फूटी बावड़ी (निवाई), ख्वाजा बावड़ी (टोंक), बुद्ध सागर / शुद्ध सागर (टोडारायसिंह / केकड़ी, किनारे पीपा की गुफा) हाड़ी रानी की बावड़ी और कुण्ड (टोडारायसिंह/केकड़ी)
फूल बावड़ी (छोटी खाटू, नागौर)यहाँ नाग कन्या की 8वीं सदी की प्रतिमा उत्कीर्ण है
राजसमन्द की बावड़ियां  झालीबाव / झाली बावड़ी, कुम्भलगढ़ दुर्ग (राजसमंद)
बादशाह बावड़ी कुम्भलगढ़ दुर्ग के पास
मामादेव कुण्ड़, कुम्भलगढ़ दुर्ग
कृष्ण कुण्ड, लालबाग कुण्ड अहिल्या कुण्ड, नाथद्वारा
रंगमहल की बावड़ी (सूरतगढ़)हूणों के आक्रमण से नष्ट रंगमहल के उत्खनन में प्राप्त; 
2×2 फुट की ईंटों का प्रयोग
आनंद सागर तालाब(बाँसवाड़ा) बाई का तालाब भी कहते हैं।
कमल की खेती हेतु प्रसिद्ध।
कमल के आकार का है।
नोट- बाई जी की बावड़ी बनेड़ा (शाहपुरा)
सिरोही की बावड़ियाँ दूध बावड़ी (माउंट आबू), सरजाबाव, कनकाबाव, मृगा बावड़ी
प्रतापगढ़बिनोता की बावड़ी
कोटाबड़गांव बावड़ी (जयपुर-जबलपुर राजमार्ग पर, कोटा से 8 किमी दूर)
भोपण का कुँआ (कैथून)
बारांतपसी बावड़ी (शाहबाद)
ओस्ती जी बावड़ी (शाहबाद)
राजा जी की बावड़ी (बारां)
सवाई- माधोपुररनिहाड़ तालाब
पद्माला तालाब (रणथम्भौर दुर्ग)
भरतपुरननंद भौजाई का कुँआ
गोल बावड़ी
गडूरिया कुँआ
पालीलाखण बावड़ी
रानी जी की बावड़ी
जालौरतलवी बावड़ी
लाहिणी बावड़ी
झुंझुनूअजीत सागर
पन्नालाल शाह का तालाब (खेतड़ी)
मेड़तणी बावड़ी, भूत बावड़ी, खेतानों की बावड़ी, जीतमल का जोहड़ा, तुलस्यानों की बावड़ी, लोहार्गल तीर्थस्थल पर बनी चेतनदास की बावड़ी
चुरूपीथाणा
पथराला
करौलीरानी जी का कुंड

तालाब, झील, बांध

तालाब, झील, बांध

मुख्य विशेषताएँ

फतेह सागर झील(उदयपुर)

  • पिछोला झील के उत्तर में; नहर से जुड़ी
  • राष्ट्रीय झील संरक्षण कार्यक्रम में शामिल
  • मूल रूप से महाराणा जय सिंह द्वारा देवली गांव के निकट 
  • महाराणा फतेह सिंह द्वारा नवीनीकृत और कोनॉट बांध बनवाया
  • उद्घाटन: क्वीन विक्टोरिया के पुत्र ड्यूक ऑफ कोनॉट द्वारा
  • सबसे छूटा टापू – माउंटबैटन 
  • आकर्षण:
    • नेहरू पार्क (नेहरू द्वीप पर)
    • सहेलियों की बाड़ी (महाराणा संग्राम सिंह द्वारा)
    • महाराणा प्रताप स्मारक
    • सज्जनगढ़ किला और अभयारण्य
    • नीमच माता मंदिर
  • उदयपुर सौर वेधशाला (कैलिफोर्निया वेधशाला पर आधारित; भारत सरकार द्वारा 1976 में; 2015 में MAST – मल्टी एप्लीकेशन सोलर टेलीस्कोप, बेल्जियम की मदद से)

स्वरूप सागर झील(उदयपुर)

  • अन्य नाम – कुम्हारिया तालाब
  • निर्माण – महाराणा स्वरूप सिंह

पिछोला झील (उदयपुर)

  • निर्माण – 1362, पिच्छू बंजारा द्वारा राजा लाखा के शासनकाल में
  • महाराणा उदय सिंह ने उदयपुर बसाया और किनारों को पक्का करवाया
  • राष्ट्रीय झील संरक्षण कार्यक्रम में शामिल
  • सहायक झीलें – स्वरूप सागर, दूध तलाई, रंग सागर 
  • आकर्षण –
    • नटनी का चबूतरा
    • बागोर हवेली
      • (मेवाड़ पीएम अमरचंद बड़वा द्वारा; 
      • पश्चिमी क्षेत्रीय सांस्कृतिक केंद्र का मुख्यालय)
    • दूध तलाई
    • शिल्पग्राम
  • 4 द्वीप
  • जग मंदिर – जगत सिंह प्रथम द्वारा; प्रिंस खुर्रम (शाहजहां) को शरण दी; 1857 विद्रोह में 40 ब्रिटिश परिवारों ने शरण ली
  • जग निवास – 1747 में जगत सिंह द्वितीय द्वारा; अब लेक पैलेस होटल
  • मोहन मंदिर – गणगौर देखने के लिए बनाया
  • आरसी महल – सूर्योदय/सूर्यास्त देखने के लिए; जंतु अभयारण्य
  • जल स्रोत – सिसर्मा (कोटरा नदी की सहायक) और देवास जल सुरंग (वाकल नदी)

जयसमंद झील(उदयपुर)

  • निर्माण1685, मेवाड़ के महाराजा जय सिंह द्वारा; सलुम्बर के निकट बांध
  • एशिया की सबसे बड़ी मीठे पानी की कृत्रिम झील (अन्य नाम – ढेबर झील )
  • विश्व की दूसरी सबसे बड़ी कृत्रिम झील (प्रथम – आसवन सागर मिस्र)
  • भारत में दूसरी सबसे बड़ी (उत्तर प्रदेश के गोविंद बल्लभ पंत सागर के बाद)
  • उच्च जलीय जीवों की संख्या; “जलीय प्रजातियों का बस्ती” के नाम से जाना जाता है
  • गोमती नदी (धेबार दर्रे से), रूपारेल, झालवा और बागार का पानी रोककर
  • 7 द्वीप
    • सबसे बड़ा: बाबा का मगरा/भागड़ा
    • सबसे छोटा: प्यारी
    • निवासी: भील जनजाति (भेल नावों से परिवहन)
    • एक द्वीप पर आइलैंड रिसॉर्ट होटल
  • किनारे पर:
    • नर्मदेश्वर मंदिर
    • रूठी रानी का पैलेस
    • समर पैलेस
  • 1950 के बाद विकास: नहरें बनाई गईं (श्यामपुरा और भट/भारत)

उदय सागर झील(उदयपुर)

  • निर्माण – महाराणा उदय सिंह द्वारा 1560 के दशक में
  • स्थान – उदयपुर के पूर्व में
  • जल प्रवाह –
    • प्रवाह: आयड़ नदी
    • निकास: बेडाच नदी का प्रारंभ
  • ऐतिहासिक महत्व – महाराणा प्रताप और आमेर के मानसिंह की मुलाकात का स्थान

फॉय सागर झील(अजमेर)

  • 1892 में अकाल राहत परियोजना के तहत एडवर्ड फॉय द्वारा
  • दूसरी अकाल राहत झील (प्रथम राजसमंद)
  • परिवर्तित नाम – ‘वरुण सागर’

आना सागर झील(अजमेर)

  • निर्माण – 1137, आना जी (अर्णोराज) द्वारा तुर्कों पर विजय के बाद अजमेर को साफ करने के लिए; चंद्रा नदी के जल को रोककर
  • स्थान – तारागढ़ और नागपहाड़ के बीच
  • ऐतिहासिक –
    • जहांगीर ने दौलत पार्क बनवाया (अब सुभाष गार्डन)
    • शाहजहां ने बारादरी (छतरी) बनवाई – 378 मीटर लंबी, संगमरमर की पारकोटा और पैवेलियन
    • नूर जहां ने रूठी रानी पैलेस में रहकर चश्म-ए-नूर (गुलाब इत्र) बनाया।
  • विशेषताएं
    • ऋषि उद्यान: महर्षि दयानंद सरस्वती की अस्थियां
    • आर्य समाज मंदिर
    • दयानंद आश्रम
  • राष्ट्रीय झील संरक्षण कार्यक्रम में शामिल

राजसमंद झील(राजसमंद)

  • निर्माण – 1663, मेवाड़ के महाराजा राज सिंह द्वारा (जैसलमेर से लौटते हुए)
  • उद्देश्य – बाढ़ नियंत्रण, सूखा प्रबंधन
  • लागत: 1.5 करोड़
  • जल स्रोत: गोमती नदी इसमें गिरती है (दो नहरें: श्यामपुरा और भट); बनास फीडर नहर से जुड़ी
  • आकर्षण –
    • कोई चौकी पाल नहीं
    • राज प्रशस्ति शिलालेख रणछोड़ भट्ट तेलंग द्वारा 9 काले संगमरमर की पट्टियों पर संस्कृत में (मेवाड़ का इतिहास)
    • किनारे पर सुंदर घर और नौ चौकी
    • मंदिर: घेवर माता मंदिर, द्वारकाधीश मंदिर
    • ऐतिहासिक: द्वितीय विश्व युद्ध में ब्रिटिश सीप्लेन बेस (सिडनी और लंदन के बीच स्टॉपओवर)
    • राजसमंद पैनोरामा।

नक्की झील(सिरोही)

  • ऊंचाई: समुद्र तल से 1200 मीटर (राजस्थान में सबसे ऊंची)
  • राष्ट्रीय झील संरक्षण कार्यक्रम में शामिल
  • किवदंती – देवताओं के नाखूनों से बनी
  • अस्थि विसर्जन – गरासिया जनजाति के लिए पवित्र 
  • 12 फरवरी 1948 को गांधी जी का अस्थि वित्सर्जन (गांधी घाट बनाया)
  • आकर्षण
    • हाथी, चंबा और रामझरोखा गुफा
    • कुंवारी कन्या मंदिर 
    • रसिया बालम मंदिर
    • रघुनाथ मंदिर
    • सनसेट पॉइंट
  • किनारे पर चट्टानें –
    • टोड रॉक
    • नन रॉक
    • कपल रॉक
    • नंदी रॉक
    • पैरट रॉक

सिलिसेर झील(अलवर)

  • निर्माण – 20वीं शताब्दी, राजा विनय सिंह द्वारा रानी शीला देवी के ग्रीष्म अवकाश के लिए (नंदन कानन के बीच)
  • विशेषताएं:
    • RTDC होटल: लेक पैलेस
    • नहर सिंचाई प्रणाली
    • अलवर शहर के पश्चिम में, अरावली पहाड़ियों से घिरी

बालसमंद झील(जोधपुर)

  • किनारे पर बालसमंद पैलेस (राजपरिवार का ग्रीष्मकालीन निवास)
  • निर्माण – गुर्जर प्रतिहार शासक बालकरण द्वारा मंडोर के स्थानीय लोगों के लिए 1159 में
  • विशेषताएं –
    • जनाना गार्डन
    • अष्ठखंबा पैलेस (महाराजा सूर सिंह द्वारा)
    • मंडोर गार्डन पास में

कायलाना झील(जोधपुर)

  • जोधपुर शहर के लिए पीने का पानी 
  • निर्माण – 1872, महाराजा प्रताप सिंह द्वारा
  • जल स्रोत: हाथी नहर से जुड़ी हुई, जो IGNP की राजीव गांधी लिफ्ट नहर से जुड़ी है (ऐसी एकमात्र झील)

गजनेर झील(बीकानेर)

  • निर्माण : 1920 (गंगा सरोवर का निर्माण महाराजा गंगा सिंह द्वारा)
  • अतिरिक्त निर्माण: गजनेर पैलेस का निर्माण महाराजा गज सिंह द्वारा।
  • विशेषताएं: साफ पानी के कारण दर्पण (मिरर) झील के नाम से जाना जाता है।

गढ़सीसर झील(जैसलमेर) 

  • 1367रावल गढ़सीसर
  • जैसलमेर का पेयजल स्त्रोत्र

अमरसागर (जैसलमेर) 

  • अन्य नाम – गजरूप सागर, मूलसागर 
  • सामने भारती बाबा का मठ 
  • पहाड़ी पर देवी स्वांगिया मंदिर

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