राजस्थान के स्मारक: राजस्थानी कला व संस्कृति के अंतर्गत राजस्थान के स्मारक राज्य की समृद्ध ऐतिहासिक विरासत, स्थापत्य कला और सांस्कृतिक विविधता को दर्शाते हैं। यहाँ की प्रमुख हवेलियाँ, छतरियाँ, दरगाहें, मस्जिदें, गुरुद्वारे, स्तंभ, बावड़ियाँ और जलाशय विभिन्न कालों की उत्कृष्ट शिल्पकला और वास्तुकला के उदाहरण हैं। ये स्मारक राजस्थान की परंपराओं, धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक पहचान के महत्वपूर्ण प्रतीक माने जाते हैं।
प्रमुख हवेलियाँ
जैसलमेर की हवेलियां
पटवों की हवेली –
- सेठ गुमान चंद पटवा द्वारा, जैसलमेर की सबसे पहली एवं बड़ी, खिड़कियाँ पत्थर से बनी
- पाँच मंजिला (पांच बेटों के लिए)
- भारतीय + सिंध + यहूदी + मुगल स्थापत्य का समन्वय
नथमल की हवेली –
- कुल मंजिल – 5
- जैसलमेर प्रधानमंत्री नथमल द्वारा
- निर्माण – दो भाईयों लालू और हाथी द्वारा
सालिम सिंह की हवेली –
- नौ मंजिला हवेली, जैसलमेर के प्रधानमंत्री सालिम सिंह मेहता द्वारा
- सात खण्ड पत्थर से निर्मित, आठवां (रंगमहल) एवं नवां (शीशमहल) खण्ड़ लकडी से निर्मित
- अन्य नाम – मोती महल, जहाज महल
झुंझुनू की हवेलियां
- सर्वाधिक हवेलियाँ नवलगढ़, इसलिए नवलगढ़ हवेलियों का नगर व शेखावाटी की स्वर्ण नगरी /गोल्डन सिटी कहलाता है
- नवलगढ़ – भगोरिया की हवेली, भगतों की हवेली, पोद्दार की हवेली, लालधर जी व धरका जी की हवेली
- झुंझुनूं – टीबड़ेवालों की हवेली, शताधिक खिड़कियों वाली ईसरदास मोदी की हवेली
- बिसाऊ – सेठ जयदयाल केड़िया की हवेली, नाथूराम पोद्दर की हवेली, हीराराम बनारसी लाल की हवेली, सीताराम सिंगतिया की हवेली
- मंडावा – रामदेव चौखाणी की हवेली, सागरमल लड़िया की हवेली, गोयनका की हवेली (भित्ति चित्रों के लिए प्रसिद्ध )
- महनसर – सोने-चांदी की हवेली
- पिलानी – बिड़ला हवेली
- डूंडलोद – सेठ लालचंद गोयनका हवेली
सीकर की हवेलियां
- पंसारी की हवेली (श्रीमाधोपुर)
- बिनाणियों कौ हवेली,
- गनेड़ी वालों की हवेली,
- केड़िया एवं राठी की हवेली (लक्ष्मणगढ़)
- खेमका सेठों की हवेली, रामगोपाल पोद्दार की हवेली (रामगढ़),
चूरू की हवेलियां
- दानचन्द चौपड़ा की हवेली
- सुराणों के हवामहल/हवेली
- रामविलास गोयनका की हवेली
- मंत्रियों की मोटी हवेली
बीकानेर की हवेलियां
- लाल पत्थर के प्रयोग के लिए प्रसिद्ध
- बच्छावतों की हवेली, रामपुरियाहवेली, कोठारी हवेली, गुलेच्छा हवेली, सेठिया की हवेलियाँ, मोहता हवेली, बिन्नाणी की हवेली
जोधपुर की हवेलियां
- पुष्य हवेली –
- विश्व की एक ही नक्षत्र में बनी एकमात्र हवेली
- निर्माण – जोधपुर नरेश जसवंत सिंह II के कामदार पुष्करणा रघुनाथमल जोशी
- बड़े मियाँ की हवेली
- पच्चीसां हवेली, पोकरण हवेली, राखी हवेली
- लालचन्द ढड्ढा की हवेली (फलौदी)
जयपुर की हवेलियां
- पुरोहित जी की हवेली
- चूरसिंह जी की हवेली
- रत्नाकर भट्ट पुण्डरीक की हवेली
- मथुरा वालों की हवेली (नक्कालों की हवेली)
टोंक
- सुनहरी को
उदयपुर की हवेलियां
- बागोर/बागरा की हवेली
- निर्माण – मेवाड़ के तत्कालीन प्रधानमंत्री श्री अमरचंद बड़वा द्वारा, पिछोला झील के निकट
- इसमें विश्व की सबसे बड़ी पगड़ी रखी है
प्रमुख छतरियाँ
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छतरियाँ |
विशेषता |
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जोधपुर |
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जयपुर की छतरी |
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अलवर की छतरी |
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उदयपुर की छतरी |
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बूंदी की छतरी |
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जैसलमेर की छतरी |
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बीकानेर की छतरी |
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सवाई माधोपुर की छतरी |
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अजमेर की छतरी |
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भीलवाड़ा की छतरियाँ |
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चित्तौड़गढ़ की छतरियां |
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अन्य छतरियाँ |
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प्रसिद्ध दरगाहें और मकबरे
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दरगाहें और मकबरे |
महत्वपूर्ण तथ्य |
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ख्वाजा मुइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह (अजमेर) |
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अढ़ाई दिन का झोपड़ा (अजमेर) |
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शेख अलाउद्दीन खान का मकबरा (अजमेर) |
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हजरत शक्कर पीर बाबा की दरगाह, नरहड़ (झुंझुनूं) |
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हमीमुद्दीन नागौरी की दरगाह (नागौर) |
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सैफुद्दीन अब्दुल वहाब दरगाह |
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सैयद फखरूद्दीन नागौरी दरगाह , गलियाकोट (डूंगरपुर) |
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संत अब्दुल्ला पीर का मकबरा(बांसवाड़ा) |
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भरतपुर की जामा मस्जिद |
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मजनूं की मजार, (अनूपगढ़) |
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अब्दुल्ला खाँ का मकबरा (अजमेर) |
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कबीरशाह की दरगाह (करौली) |
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मीरा साहब की दरगाह (बूँदी) |
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शाहबाद की जामा मस्जिद, (बारां) |
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सरवाड़ की दरगाह (अजमेर) |
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राती थेड़ी (करणपुर) |
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काकाजी पीर को दरगाह (प्रतापगढ़) |
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अन्य प्रसिद्ध दरगाहें और मकबरे
- चल फिर शाह की दरगाह (चित्तौड़)
- सैयद बादशाह की दरगाह (शिवगंज, सिरोही)
- हजरत दीवान शाह की दरगाह (कपासन, चित्तौड़गढ़)
- हजरत शेख अब्दुल अजीज मक्की (केशवरायपाटन)
- मीठेशाह की दरगाह (गागरोण, झालावाड़)
- मर्दान शाह पीर की दरगाह (करौली)
- पीर सदरुद्दीन की दरगाह (रणथम्भौर)
- पीर हाजी निजामुद्दीन (फतेहपुर, सीकर)
- शेख बाबा इस्हाक की दरगाह (खाटू,सीकर)
- गैबी पीर (जहाजपुर, भीलवाड़ा)
- गुलाम खां का मकबरा (जोधपुर)
- रजिया सुल्तान का मकबरा (टोंक)
- मालिक शाहपीर की मजार (जालौर)
- हज़रत मखदून पीर की दरगाह (जालौर)
- अलाउद्दीन आलमशाह का मकबरा (तिजारा)
- नौंगजा पीर की मजार (चित्तौड़गढ़ दुर्ग)
- जार जरीना मकबरा (धौलपुर)
- नवाब दौलत खां का मकबरा (फतेहपुर, सीकर)
- बाबा गफूर की मजार (जगमंदिर, उदयपुर)
- अब्दुल्ला खां की बीबी का मकबरा (अजमेर)
- मीरान॑ साहब की दरगाह (तारागढ़ दुर्ग अजमेर)
- सैयद ख्वाजा फखरूद्दीन (सरवाड़, अजमेर)
- मलिक संत का मकबरा (जालौर दुर्ग)
- शेख अब्दुल अजीज मक्की की दरगाह (बूंदी)
- कमरूद्दीन शाह (झुंझुनूं)
- नवाब रूहेल खाँ का मकबरा (झुंझुनूं)
- पीर मस्तान (सौजत)
- मिर्जा की दरगाह, हजीरा की दरगाह (अमरसर)
- हसामुद्दीन चिश्ती, लालपीर की डूंगरी (सांभर, जयपुर)
- नेवटा बाबा की मजार (सांगानेर, जयपुर)
- खानकाह हरजरत हसनपीर (आंधी, जयपुर)
- शाह जल्लाल (चाकसू, जयपुर)
- शेख बुरानुद्दीन चिश्ती (ताला, जयपुर)
प्रमुख मस्जिदें
| मस्जिद | मस्जिद | मस्जिद |
| अकबरी मस्जिद (आमेर) | अलाउद्दीन मस्जिद (जालौर) | जामा मस्जिद (जयपुर) |
| नालीयासर मस्जिद (सांभर) | इक मीनार मस्जिद (जोधपुर) | उषा मस्जिद (बयाना) |
| गुलाम कलंदर (जोधपुर) | जामा मस्जिद (शाहबाद, बारां) | पीर दुल्लेशाह की मीनार (केरला, पाली) |
| मेड़ता मस्जिद (मेड़ता) | फतहजंग गुम्बद (अलवर) | पठान गुलाम कलन्दर की मस्जिद (मण्डोर) |
| लाल मस्जिद (अमरसर, जयपुर) | जनाना मस्जिद (अमरसर, जयपुर) |
राजस्थान के प्रमुख गुरुद्वारे
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गुरुद्वारा |
महत्वपूर्ण तथ्य |
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गुरुद्वारा बुढ्ढ़ा जोहड़ (गंगानगर) |
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साहवा का गुरुद्वारा (चूरू) |
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शेर शिकार गुरुद्वारा, मचकुण्ड (धौलपुर) |
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डाडा पम्पाराम का डेरा (विजयनगर) |
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तख्त हजारा(सार्दुलशहर) |
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अन्य गुरुद्वारे |
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प्रमुख स्तंभ/मीनारें
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स्तंभ/मीनारें |
महत्वपूर्ण तथ्य |
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विजय स्तंभ (चित्तौड़) |
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ईसर लाट (जयपुर) |
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जैन कीर्ति स्तंभ (चित्तौड़) |
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धर्म स्तूप (चूरू) |
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धौलपुर शाही घंटाघर |
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कोटा वेली टावर |
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विजय स्तंभ, (तनोट) |
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मानव निर्मित जलाशय
बावड़ियाँ
राजस्थान में जल स्थापत्य कला
- बावड़ी – उन सीढ़ीदार कुंओं या तालाबों को कहते है जिनके तल तक सीढ़ियों के सहारे-सहारे नीचे तक आसानी से पहुंचा जा सकता है।
- बावड़ियों को कन्नड़ में कल्याणी या पुष्करणी, मराठी में बाख, गुजराती में बाव और संस्कृत मे वापि, वाप, दीर्घा आदि नामों से जानते है।
- अपराजित पृच्छा नामक पुस्तक वास्तुशास्त्र पर आधारित है। इसके लेखक भुवन देवाचार्य ने बावड़ियों के चार प्रकार बताये है।
- नंदा (1) प्रवेश द्वार)
- भद्रा (2) प्रवेश द्वार)
- जया (3) प्रवेश द्वार)
- विजया (4) प्रवेश द्वार)
नोट-
- दीर्घाका – 32 हाथ लम्बी बावड़ी और तीन प्रवेश द्वार
- भालेरी – संकड़ी सीढ़ियाँ और कुंआ वाला भाग बड़ा
- जीवती – पानी कभी खत्म नहीं होता।
- सर्वाधिक स्थापत्य कला वाली बावड़ियों बूंदी और शेखावाटी
- City of step well – Bundi
- 29 दिसम्बर, 2017 को निम्नलिखित बावड़ियों पर डाक टिकट जारी किये गये।
- नीमराणा की बावड़ी, कोटपुतली-बहरोड़ 15 रूपये
- नागर सागर कुण्ड – बूंदी 15 रूपये
- रानीजी की बावड़ी – बूंदी – 5 रूपये
- चांद बावड़ी आभानेरी दौसा – 5 रूपये
- तुंवरजी का झालरा, जोधपुर – 5 रूपये
- पन्ना मीणा की बावड़ी, आमेर – 5 रूपये
| बावड़ी / कुआं | महत्वपूर्ण तथ्य |
| रानीजी की बावड़ी (बूँदी) | राजस्थान की सबसे बड़ी बावड़ी; निर्माण – 8वीं सदी के पूर्वार्द्ध, राव राजा अनिरुद्ध सिंह की विधवा रानी नाथावतजी द्वारा पुत्र बुद्ध सिंह के शासनकाल में बुआजी -भतीजी बावड़ी भी कहलाती है बावड़ी गीतों के लिए प्रसिद्ध; मुगल-राजपूत स्थापत्य का मिश्रण; ASI द्वारा संरक्षित |
| नागर सागर कुंड (बूंदी) | रानी चंद्रभानु कँवरी ने निर्माण कराया। गंगासागर यमुना सागर के नाम से प्रसिद्ध थी 2017 में 15 रुपये का डाक टिकट जारी |
| अनारकली की बावड़ी(बूँदी) | निर्माण रानी नाथावतजी की दासी अनारकली द्वारा निर्माण करवाया गया। व काला जी की बावड़ी आदि बूँदी की अन्य प्रसिद्ध बावड़ियाँ हैं। |
| अन्य बावड़ियाँ (बूंदी) – भाँवल बावड़ी, अनार बावड़ी, जैतसागर तालाब, कालाजी की बावड़ी, काकाजी की बावड़ी, गुल्ला की बावड़ी, चम्पा बाग की बावड़ी, पठान की बावड़ी, नारूजी की बावड़ी | |
| तुंवरजी का झालरा | निर्माण महाराणा अभयसिंह की रानी बड़ी तुंवरजी द्वारा; |
| तापी बावड़ी (जोधपुर) | निर्माण तापोजी तेजावत द्वारा; |
| गुलाब सागर (जोधपुर) | निर्माण महाराजा विजयसिंह द्वारा अपनी पासवान गुलाबराय की स्मृति में |
| महिला बाग झालरा (जोधपुर) | गुलाब सागर के पास स्थित; निर्माण 1776 ई. में महाराजा विजयसिंह की पासवान गुलाबराय द्वारा; महिलाओं का ‘लौटियों का मेला’ आयोजित होता था सामने हर्षद माता मंदिर (गुर्जर प्रतिहार, महामारू शैली); मंदिर स्वास्तिक आकार परिधि के कक्ष को ‘अंधेरी उजाला’ कहते हैं। |
| ईदगाह बावड़ी जोधपुर | आयरलैण्ड के पर्यटक कैरन रान्सलै ने साफ किया जिसके कारण चर्चा में रही |
| अन्य जलाशय – जोधपुर | रानीसर-पदमसर, फतेहसागर, तख्तसागर, बहू जी रो तालाब / स्वरुप सागर तालाब, नवलखा झालरा, शेखावत जी का तालाब |
| अन्य बावड़ियाँ – जोधपुर | देवकुण्ड, नैणसी बावड़ी, श्रीनाथजी का झालरा, हाथी बावड़ी, खरबूजा बावड़ी, रघुनाथ बावड़ी, घाटा बावड़ी, व्यास जी की बावड़ी, एक चट्टान बावड़ी |
| चाँदबावड़ी / आभानेरी बावड़ी (दौसा) | निर्माण 8वीं सदी, प्रतिहार निकुंभ राजा चाँद द्वारा; 13 मंजिल, लगभग 3500 सीढ़ियाँ; तिलिस्मी स्थापत्य के लिए विश्व प्रसिद्ध; |
| भाडारेंज बावड़ी / बड़ी बावड़ी (दौसा) | तीन मंजिला बावड़ी; ‘बड़ी बावड़ी’ के नाम से प्रसिद्ध |
| काका जी की बावड़ी (दौसा) | बांदीकुई तहसील में स्थित; लगभग 100 फीट गहरी |
| चमना बावड़ीशाहपुरा (भीलवाड़ा) | विशाल तीन मंजिला बावड़ी। निर्माण सन् 1800 में महाराजा उम्मेद सिंह प्रथम ने चमना नामक गणिका की इच्छा पर करवाया था। |
| सीतारामजी की बावड़ी, भीलवाड़ा | बावड़ी में एक गुफा बनी हुई है, जिसमें बैठकर रामस्नेही सम्प्रदाय के प्रवर्तक स्वामी रामचरणजी ने 36 हजार पदों की रचना की तथा रामस्नेही सम्प्रदाय की स्थापना की। |
| अन्य बावड़ियाँ (भीलवाड़ा) – चोखी बावड़ी (बनेड़ा, शाहपुरा), चमना बावड़ी (शाहपुरा), कच्छवाया कुंड (शाहपुरा), बाईराज की बावड़ी | |
| नौलखा बावड़ी (डूंगरपुर) | निर्माण – 1556 ई. में आसकरण की पत्नी प्रेमल दे ने कराया शिल्पी – लीलाधर |
| अन्य बावड़ियाँ (डूंगरपुर) – केला बावड़ी, उदय बावड़ी (1880 में महारावल उदय सिंह द्वारा बनवाई गई) | |
| नीमराणा की बावड़ी (अलवर) | इस 9 मंजिली बावड़ी का निर्माण राजा टोडरमल ने 18 वीं शताब्दी में करवाया था। विशेषता – इस बावड़ी के निचले भाग में तापमान 19° कम हो जाता है। |
| अन्य बावड़ियाँ (अलवर) – रानी जी का कुआँ, महंत जी की बावड़ी (राजगढ़) | |
| पन्ना मीणा की बावड़ी (आमेर, जयपुर) | निर्माण 17वीं शताब्दी में मिर्जा राजा जयसिंह के काल में |
| अन्य बावड़ियाँ (जयपुर) – मांजी बावड़ी (मानसिंह प्रथम), चार घोड़ों की बावड़ी, चुली बावड़ी | |
| त्रिमुखी बावड़ी(उदयपुर) | निर्माण – मेवाड़ महाराणा राजसिंह की रानी रामरसदे ने करवाया था। |
| अन्य बावड़ियाँ (उदयपुर) – वीरुपुरी की बावड़ी, गंगा कुण्ड, आयड़ (उदयपुर), सुल्तान बावड़ी (बेदला, उदयपुर) | |
| गड़सीसर सरोवर (जैसलमेर) | निर्माण 1340 ई. में रावल गड़सी के शासनकाल में; कृत्रिम सरोवर; मुख्य प्रवेश द्वार ‘टीलों की पिरोल’ के नाम से प्रसिद्ध |
| अन्य बावड़ियाँ (जैसलमेर) – मेहता सागर, जैसुल का कुँआ | |
| घोसुण्डी की बावड़ी (चित्तौड़) | श्रृंगार देवी (जोधा की पुत्री) ने निर्माण कराया जो महाराणा रायमल की रानी थी। |
| अन्य बावड़ियाँ (चित्तौड़गढ) – खातन बावड़ी, तेल- घी की बावड़ी, सुनार बावड़ी (बेंगू) | |
| कोड़मदेसर की बावड़ी (बीकानेर) | निर्माण राव जोधा की माता कोडम दे द्वारा; पश्चिमी राजस्थान की सबसे बड़ी बावड़ी |
| पातालतोड़ बावड़ी (धौलपुर) | 7 मंजिला दिखाई देती है; राजस्थान की सबसे गहरी / सबसे लंबी बावड़ी |
| बाटाडू का कुआँ (बाड़मेर) | बाटाडू गाँव में स्थित; निर्माण रावल गुलाबसिंह द्वारा; संगमरमर का कुआँ; ‘रेगिस्तान का जलमहल’ कहलाता है |
| डिग्गी तालाब (अजमेर) | अजयमेरू पहाड़ियों के नीचे स्थित; नैसर्गिक जल स्रोत |
| सरडा रानी की बावड़ी (टोडारायसिंह, टोंक) | विशिष्ट कलात्मक बनावट के लिए प्रसिद्ध; टोडारायसिंह के महल के पीछे स्थित बुद्ध सागर रमणीक स्थल; |
| अन्य बावड़ियाँ (अलवर) – खारी बावड़ी (निवाई), फूटी बावड़ी (निवाई), ख्वाजा बावड़ी (टोंक), बुद्ध सागर / शुद्ध सागर (टोडारायसिंह / केकड़ी, किनारे पीपा की गुफा) हाड़ी रानी की बावड़ी और कुण्ड (टोडारायसिंह/केकड़ी) | |
| फूल बावड़ी (छोटी खाटू, नागौर) | यहाँ नाग कन्या की 8वीं सदी की प्रतिमा उत्कीर्ण है |
| राजसमन्द की बावड़ियां | झालीबाव / झाली बावड़ी, कुम्भलगढ़ दुर्ग (राजसमंद) बादशाह बावड़ी कुम्भलगढ़ दुर्ग के पास मामादेव कुण्ड़, कुम्भलगढ़ दुर्ग कृष्ण कुण्ड, लालबाग कुण्ड अहिल्या कुण्ड, नाथद्वारा |
| रंगमहल की बावड़ी (सूरतगढ़) | हूणों के आक्रमण से नष्ट रंगमहल के उत्खनन में प्राप्त; 2×2 फुट की ईंटों का प्रयोग |
| आनंद सागर तालाब(बाँसवाड़ा) | बाई का तालाब भी कहते हैं। कमल की खेती हेतु प्रसिद्ध। कमल के आकार का है। नोट- बाई जी की बावड़ी बनेड़ा (शाहपुरा) |
| सिरोही की बावड़ियाँ | दूध बावड़ी (माउंट आबू), सरजाबाव, कनकाबाव, मृगा बावड़ी |
| प्रतापगढ़ | बिनोता की बावड़ी |
| कोटा | बड़गांव बावड़ी (जयपुर-जबलपुर राजमार्ग पर, कोटा से 8 किमी दूर) भोपण का कुँआ (कैथून) |
| बारां | तपसी बावड़ी (शाहबाद) ओस्ती जी बावड़ी (शाहबाद) राजा जी की बावड़ी (बारां) |
| सवाई- माधोपुर | रनिहाड़ तालाब पद्माला तालाब (रणथम्भौर दुर्ग) |
| भरतपुर | ननंद भौजाई का कुँआ गोल बावड़ी गडूरिया कुँआ |
| पाली | लाखण बावड़ी रानी जी की बावड़ी |
| जालौर | तलवी बावड़ी लाहिणी बावड़ी |
| झुंझुनू | अजीत सागर पन्नालाल शाह का तालाब (खेतड़ी) मेड़तणी बावड़ी, भूत बावड़ी, खेतानों की बावड़ी, जीतमल का जोहड़ा, तुलस्यानों की बावड़ी, लोहार्गल तीर्थस्थल पर बनी चेतनदास की बावड़ी |
| चुरू | पीथाणा पथराला |
| करौली | रानी जी का कुंड |
तालाब, झील, बांध
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तालाब, झील, बांध |
मुख्य विशेषताएँ |
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फतेह सागर झील(उदयपुर) |
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स्वरूप सागर झील(उदयपुर) |
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पिछोला झील (उदयपुर) |
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जयसमंद झील(उदयपुर) |
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उदय सागर झील(उदयपुर) |
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फॉय सागर झील(अजमेर) |
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आना सागर झील(अजमेर) |
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राजसमंद झील(राजसमंद) |
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नक्की झील(सिरोही) |
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सिलिसेर झील(अलवर) |
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बालसमंद झील(जोधपुर) |
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कायलाना झील(जोधपुर) |
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गजनेर झील(बीकानेर) |
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गढ़सीसर झील(जैसलमेर) |
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अमरसागर (जैसलमेर) |
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