तुगलक वंश (1320–1412 ई.)

तुगलक वंश (1320–1412 ई.) दिल्ली सल्तनत का एक महत्वपूर्ण काल रहा, जिसकी स्थापना गयासुद्दीन तुगलक (गाजी मलिक) (1320–1325 ई.) ने की। इस वंश के प्रमुख शासकों में मुहम्मद बिन तुगलक (1325–1351 ई.) और फिरोज तुगलक (1351–1388 ई.) शामिल रहे, जिनके शासन में अनेक प्रशासनिक प्रयोग और सुधार किए गए। प्राचीन एवं मध्यकालीन भारत के अध्ययन में तुगलक काल विशेष महत्व रखता है, क्योंकि इसी दौर में शासन व्यवस्था की उपलब्धियाँ और सीमाएँ स्पष्ट रूप से सामने आती हैं।

परिचय
  • इब्नबतूता के अनुसार तुगलक तुर्की की करौना/कराना शाखा से था — यह तुर्क-मंगोल मिश्रित जनजाति थी।
  • “तुगलक” किसी जाति का नहीं बल्कि गयासुद्दीन का व्यक्तिगत नाम था।
  • तुगलक वंश ने दिल्ली सल्तनत पर सबसे लंबा शासन (93 वर्ष) किया।
 गयासुद्दीन तुगलक (गाजी मलिक) (1320–1325 ई.)
  • गयासुद्दीन तुगलक, वास्तविक नाम गाजी मलिक, तुगलक वंश का संस्थापक था। मंगोलों को बार-बार पराजित करने के कारण उसे “मलिक-उल-गाजी” कहा जाता था। 
  • उसने दिल्ली में तुगलकाबाद शहर बसाया और इसे अपनी राजधानी बनाया।
  • गयासुद्दीन तुगलक के प्रमुख सैन्य अभियान
    • वारंगल अभियान (1321-23 ई.): जौना खां (मुहम्मद बिन तुगलक) ने वारंगल [शासक प्रतापरूद्र देव] पर विजय प्राप्त कर इसे सुल्तानपुर नाम दिया और दिल्ली सल्तनत में शामिल किया।
    • बंगाल विजय (1324 ई.): गयासुद्दीन ने बंगाल और मिथिला क्षेत्र को जीतकर तुर्क साम्राज्य को उत्तरी बिहार तक विस्तारित किया।
    • जाजनगर (उड़ीसा) अभियान (1324 ई.): जौना खां ने उड़ीसा के शासक भानुदेव द्वितीय को पराजित कर अपार धन अर्जित किया।
  • प्रशासन और सुधार
    • गयासुद्दीन ने नहरों और सड़कों का निर्माण, पुलों की मरम्मत, और डाक व्यवस्था को प्रोत्साहन दिया। 
    • उसने राजस्व वृद्धि के लिए उत्पादन बढ़ाने पर जोर दिया और भू-राजस्व में सीमित वृद्धि का आदेश दिया।
  • अमीर खुसरो के अनुसार ‘सैकड़ों पण्डितों की पगड़ी अपने मुकुट के पीछे छुपाए रहता था अर्थात वह बहुत विद्वान था’।
  • गयासुद्दीन तुगलक का सूफी संत निजामुद्दीन औलिया से मनमुटाव था जब सुल्तान औलिया को दण्डित करने के लिए बंगाल से वापस लौट रहा था तो औलिया ने कहा था – ‘हुनोज दिल्ली दूरस्त’ अर्थात दिल्ली अभी दूर है।
  • 1321 ई. में उसने अपने पुत्र जूना खां(मु. बिन तुगलक/उलुग खां) को तेलंगाना पर आक्रमण के लिए भेजा। तेलंगाना को सुल्तान ने सल्तनत में मिला लिया एवं वारंगल का नाम सुल्तानपुर रख दिया।
  • राजमुद्री अभिलेख में जूना खां (मु. बिन तुगलक) को विश्व का खान कहा है।
  • जूना खां ने गयासुद्दीन तुगलक के लिए अफगानपुर के निकट लकड़ी का महल बनवाया था। इसी महल के गिरने से गयासुद्दीन तुगलक की मृत्यु हुई थी।
  • इस लकड़ी के महल का शिल्पकार आयाज का पुत्र अहमद था।

तथ्य

  • इब्नबतूता, वरनी, अबुफजल, बदायुंनी एवं निजामुद्दीन ने गयासुद्दीन तुगलक की मृत्यु का कारण जूना खां का षड़यंत्र के तहत निर्मित महल माना है।
स्थापत्य 
  • कबीरुद्दीन औलिया का मकबरा
  • इसका निर्माण नसीरुद्दीन महमूद शाह (तुगलक वंश के अंतिम शासक) के शासनकाल के दौरान हुआ था।
  • यह मकबरा सूफी संत शेख कबीर-उद-दीन औलिया को समर्पित है, जो प्रसिद्ध सूफी संत शेख रोशन चिराग-ए-दिल्ली के शिष्य थे।
  • प्रचलित नाम: “लाल गुम्बद”।
  • इस मकबरे को “लाल गुंबद” इसलिए कहा जाता है क्योंकि इसमें मुख्य रूप से लाल बलुआ पत्थर (Red Sandstone) का उपयोग किया गया है।
मुहम्मद बिन तुगलक (1325–1351 ई.) 

व्यक्तित्व व राज्यारोहण

  • अपने पिता गयासुद्दीन तुगलक की मृत्यु के पश्चात् जूना खां, मोहम्मद बिन तुगलक के नाम से 1325 ई. में सुल्तान बना।
  • इसे इतिहास में एक बुद्धिमान मूर्ख शासक के रूप में जाना जाता है।
  • इसका मूल नाम जूना खां (जौना खां) था इसे उलूग खां की उपाधि दी गयी थी।
  • इसके शासन काल में अफ्रीकी यात्री इब्न-बतूता आया। इब्ने-बतूता को दिल्ली का काजी नियुक्त किया एवं राजदूत बनाकर चीन भेजा।
  • बरनी के अनुसार : मोहम्मद बिन तुगलक ने 5 परियोजनाएं शुरू की –
  1. राजधानी परिवर्तन(1326-27)
  • मुहम्मद बिन तुगलक किसी ऐसे नगर को अपनी राजधानी बनाना चाहता था, जो सामरिक महत्व के साथ-साथ सल्तनत के विस्तृत साम्राज्य के केंद्र में हो।
  • मोहम्मद बिन तुगलक ने देवगिरी का नाम बदलकर दौलताबाद कर दिया एवं इसे अपनी राजधानी बनाया।
  • विद्रोहों के कारण शीघ्र ही दक्षिणी क्षेत्र सल्तनत से बाहर हो गये और देवगिरी को राजधानी बनाए जाने का औचित्य समाप्त हो गया।
  • 1335 ई. में दिल्ली पुनः राजधानी बनी।
  1. सांकेतिक मुद्रा का प्रचलन
  • मोहम्मद बिन तुगलक ने चांदी की कमी के कारण तांबे एवं कांसे के सिक्के चलाए। इन सिक्कों का मूल्य चांदी के सिक्कों के बराबर घोषित किया गया।
  • जनता ने इस परिवर्तन को स्वीकार नहीं किया। बहुत अधिक मात्रा में नकली सिक्के बनने लगे। इसके बदले सुल्तान को खजाने से असली सिक्के देने पड़े जिससे खजाना खाली हो गया एवं योजना विफल हो गयी।
  1. खुरासान अभियान
  • सुल्तान ने मध्य एशिया में स्थित खुरासान राज्य की अव्यवस्था का लाभ उठाकर वहां कब्जा करना चाहा। 
  • इसके लिए 3 लाख 70 हजार लोगों की एक विशाल सैना तैयार की तथा 1 वर्ष का वेतन पहले ही दे दिया परन्तु खुरासान में स्थिति सामान्य हो गयी एवं यह योजना भी विफल हो गयी।
  1. कराचिल अभियान
  • यह अभियान खुरासान के तुरंत बाद कुल्लू/कांगड़ा अथवा कुमाऊं पहाड़ी में स्थित कराचिल के शासक के विरूद्ध था इसमें सुल्तान को जन-धन की हानि हुई परन्तु कराचिल के शासक ने शासक ने सुल्तान की अधीनता स्वीकार कर ली।
  1. दो आब में कर वृद्धि
  • मोहम्मद बिन तुगलक के असफल योजनाओं से राजकीय कोष में आर्थिक हानि हुई इसकी पूर्ति के लिए दोआब क्षेत्र की उपजाऊ भूमि पर कर में वृद्धि कर दी। दुर्भाग्य से इसी वर्ष इस क्षेत्र में अकाल पड़ गया। 
  • किसान एवं जमींदारों से कर वसूल करने में सख्ती बरती गयी।  इस स्थिति में किसानों ने कृषि कार्य छोड़ दिया एवं उपज को आग लगा दी एवं शक्तिशाली जमींदारों ने विद्रोह कर दिया। 
  • उसने वारंगल पर विजय प्राप्त की और द्वारसमुद्र, माबर तथा अनैगोंडी को भी दिल्ली सल्तनत मे मिला लिया। दूसरी तरफ उसने उत्तर-पश्चिम के कालानूर एवं फरशूर (पेशावर) को भी अपने अधीन कर लिया।
  • उसकी क्रूर नीतियों के कारण विद्रोह का आरंभ हो गया जिसके फलस्वरूप दक्षिण में नये स्वतंत्र राज्यों की स्थापना हुई और ये क्षेत्र दिल्ली सल्तनत से पृथक हो गए। बंगाल भी स्वतंत्र हो गया।
  • इस प्रकार मुहम्मद बिन तुगलक द्वारा विस्तार का चरमोत्कर्ष विघटन के लिए उत्तरदायी साबित हुआ।

अन्य तथ्य

  • मोहम्मद बिन तुगलक ने कृषि के विकास के लिए दीवान-ए-कोही नामक विभाग की स्थापना की। इसका प्रधान अमीर-ए-कोही होता था।
  • इसके काल में दिल्ली में प्लेग(ब्लैक डेथ) नामक महामारी फैल गयी। इस कारण सुल्तान कुछ वर्ष स्वर्गद्वारी (कनौज के निकट) जाकर रहा।
  • इब्ने-बतूता ने समकालीन पुस्तक ‘सफरनामा(रेहला)’ लिखी। इब्ने-बतूता मोरक्को का यात्री था।
  • मोहम्मद बिन तुगलक पहला सुल्तान था जिसने होली का त्यौहार मनाया।
  • मोहम्मद बिन तुगलक ने जैन विद्वान राजशेखर को संरक्षण दिया।
  • मोहम्मद बिन तुगलक के समय दक्षिण भारत में हिन्दु राज्य विजयनगर एवं मुस्लिम राज्य बहमनी स्थापित हुए।
  • मोहम्मद बिन तुगलक ने कृषि भूमि के आकलन के लिए एक रजिस्टर तैयार करवाया तथा अकाल पीड़ितों के लिए ‘अकाल संहिता’ तैयार करवायी।
  • मोहम्मद बिन तुगलक के शासन काल में सर्वाधिक विद्रोह हुए। अंततः 1351 ई. में सिंध के विद्रोह को दबाते हुए सुल्तान की मृत्यु हो गयी।
  • मोहम्मद बिन तुगलक की मृत्यु पर अब्दुल कादिर बदायुंनी ने लिखा है, ‘सुल्तान को अपनी प्रजा से तथा प्रजा को सुल्तान से मुक्ति मिल गयी’।
स्थापत्य कला 
  • सतपलाह
    • मुहम्मद बिन तुगलक द्वारा सात मेहराबों वाला एक दो मंजिला पुल का निर्माण है जो कृत्रिम झील में पानी पहुँचाने के लिए किया गया था।

फिरोज तुगलक (1351–1388 ई.)

  • मोहम्मद बिन तुगलक की मृत्यु के बाद उसका चचेरा भाई फिरोज शाह तुगलक सुल्तान बना। इसका राज्यभिषेक थट्टा (सिंध) में हुआ।
  • इसने ब्राह्मणों पर भी जजिया कर लगाया।
  • उलेमा का समर्थन एवं प्रशंसा पाने के उद्देश्य से फिरोज ने पुरी एवं वहां स्थित जगन्नाथ के मंदिर को लूटा व मंदिर की मूर्ति समुद्र में फेंक दी गई। बाध्य होकर जाजनगर के राजा ने सुल्तान की अधीनता स्वीकार कर ली। वह प्रतिवर्ष कर के रूप में कुछ हाथी देने पर सहमत हो गया। जाजनगर के बाद वीरभूमि का हिंदू-राजा और अनेक सामंतों को पराजित करता हुआ, उनसे अपनी अधीनता स्वीकार करवाता हुआ सुल्तान दिल्ली लौट गया।
  • फिरोजशाह, सैनिक व्यवस्था के दृष्टिकोण से पूरी तरह असफल सिद्ध हुआ। उसने सेना में वंशवाद को बढ़ावा दिया तथा सैनिकों को वेतन के रूप में भूमि प्रदान की। उसके शासन काल में सेना में भ्रष्टाचार फैल चुका था।
  • फिरोजशाह तुगलक ने खराज (लगान), खुम्स (लूट का सामान), जजिया (गैर-मुसलमानों पर लगने वाला कर) और जकात (मुस्लिम आय से कर जो मुस्लिमों पर ही खर्च किया जाता था) को छोड़कर अन्य सभी कर समाप्त कर दिए।
  • किसानों पर शुर्ब (सिंचाई कर) लगाया गया।
  • फिरोजशाह को आर्थिक एवं प्रशासनिक सुधारों के कारण सल्तनत काल का अकबर कहा जाता है। (हेनरी दलिएट और एलिफिंस्टन ने कहा)
  • फिरोजशाह तुगलक ने हिसार, फिरोजाबाद, फतेहबाद, जौनपुर नगरों की स्थापना की एवं दिल्ली में फिरोज शाह कोटला नगर बसाया।
  • फिरोजशाह तुगलकर ने कुतुबमीनार की चौथी मंजिल की मरम्मत करवायी एवं पांचवीं मंजिल का निर्माण करवाया।
  • फिरोज शाह ने दासों के लिए दीवान-ए-बंदगान विभाग की स्थापना की।
  • उसने महिलाओं एवं बच्चों की आर्थिक सहायता के लिए दीवान-ए-खैरात [दान विभाग] की स्थापना की।
  • उसने खैराती अस्पताल दारूल-सफा की स्थापना की।
  • फिरोज शाह तुगलक ने मैरिज ब्यूरो, लोक निर्माण विभाग एवं रोजगार कार्यालय की स्थापना की।
  • फिरोजशाह ने दो नए सिक्के अधा (जीतल का आधा) तथा बिख (जीतल का 1/4) चलाए। फिरोजशाह ने शशगानी (6 जीतल का) सिक्का भी चलाया।
  • प्रसिद्ध इतिहासकार बरनी उसका दरबारी था उसने ‘तारीख-ए-फिरोजशाही’ तथा ‘फतवा-ए-जहांदारी’ नामक प्रसिद्ध पुस्तकें लिखीं।

वास्तुकाल/ स्थापत्य 

  • फिरोजशाह तुगलक वास्तुकला का महान संरक्षक था।
  • उसने लोक निर्माण विभाग (PWD / दीवान-ए-ख़ैरात) की स्थापना की।
  • निर्माण कार्य
  • फिरोजशाह ने 5 नहरों का निर्माण करवाया जिनमें उलुगखानी नहर एवं रजबहा नहर प्रमुख हैं।
    • यमुना–दिल्ली → हिसार (उलुगखानी नहर, 150 मील)
    • सतलज → घग्गर (रजबहा नहर, 96 मील)
    • सिरमौर → हाँसी
    • घग्गर → फिरोजाबाद
    • यमुना → फिरोजाबाद
  • 50 नगर, 20 महल, 30 अस्पताल, 40 मस्जिदें
  • 100 शिक्षालय, 100 स्नानगृह, 5 मकबरे
  • 150 पुल तथा अनेक नहरों का निर्माण
  • नगर स्थापना
    • फिरोजाबाद, फतेहाबाद, हिसार, जौनपुर
    • पुराने नगरों का पुनर्निर्माण भी कराया।

कोटला फिरोजशाह

  • दिल्ली में कोटला फिरोजशाह दुर्ग का निर्माण।
  • शाहजहानाबाद से दोगुने क्षेत्रफल में फैला।
  • आम जनता हेतु 8 स्तम्भों वाला भवन तथा उलेमा के लिए 1 मस्जिद निर्मित।
  • दुर्ग के अंदर स्थित जामा मस्जिद के सामने अशोक का टोपरा स्तंभ स्थापित किया गया।
  • अशोक का दूसरा स्तंभ मेरठ से लाकर कुश्क-ए-शिकार (शिकार महल) के सामने लगाया गया।
  • दुर्ग के भीतर ही दो मंजिला इमारत के अवशेष प्राप्त हुए हैं, जिसका उपयोग विद्यालय (मदरसा) के रूप में किया जाता था।
  • फिरोजशाह का मकबरा
    • हौज खास (दिल्ली) में स्थित।
    • यह मकबरा वर्गाकार योजना पर बना है।
  • खिड़की मस्जिद
    • तहखानों के ऊपर निर्मित।
    • निर्माण: फिरोजशाह तुगलक के काल में।
    • स्थान: जहाँपनाह (दिल्ली)।
    • वर्गाकार योजना।
    • अनेक सुंदर खिड़कियाँ (जालियाँ) — इसी कारण नाम “खिड़की मस्जिद”।
  • काली मस्जिद
    • निर्माण: फिरोजशाह तुगलक (FST) के काल में।
    • स्थान: दिल्ली।
    • दो मंजिला संरचना।
    • अर्धवृत्तीय मेहराबों का प्रयोग।
    • मस्जिद का प्रांगण चार भागों में विभाजित।
  • बेगमपुरी मस्जिद
    • निर्माण: फिरोजशाह तुगलक के काल में।
    • स्थान: जहाँपनाह।
  • काला मस्जिद
    • निर्माण: FST काल में।
    • स्थान: शाहजहानाबाद।
    • तहखानों के ऊपर निर्मित।

उत्तराधिकारी व तुगलक वंश का पतन

गियासुद्दीन द्वितीय
  • 1388 ई. में फिरोजशाह की मृत्यु के बाद,तुगलकशाह गयासुद्दीन द्वितीय के नाम से शासक बना।
  • वह एक अनुभवहीन तथा भौतिकवादी शासक था
  • उसने सल्तनत की सुदृढ़ता के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए।
  • फिरोज तुगलक ने सल्तनत की शासन-व्यवस्था को काफी हद तक सुदृढ़ कर दिया था, पर गयासुद्दीन के समय शासन-व्यवस्था चरमरा गयी। अंततः उसके आचरणों से क्रुद्ध होकर मलिकों और अमीरों ने उसे अपदस्थ कर दिया।
अबू बक्र
  • गयासुद्दीन द्वितीय के बाद 1389 ई. में अबू बक्र दिल्ली का सुल्तान बना। वह जफर खां का पुत्र था।
  • इसके शासनकाल में फिरोज के नायक के रूप में कार्य कर चुके शाहजादा मुहम्मद ने सल्तनत की सत्ता प्राप्त करने की कोशिश की।
  • 24 अप्रैल, 1389 ई. में उसने समाना में स्वयं को सुल्तान घोषित कर दिया।
  • इसके बाद मुहम्मद और अबू बक्र के बीच सत्ता का संघर्ष हुआ।
  • इस संघर्ष के बाद अबू बक्र को 1390 ई. में सिंहासन छोड़ना पड़ा।
महमूद
  • 1388 ई. में फिरोजशाह की मृत्यु के बाद सुल्तानों की होड़ लग गई। गयासुद्दीन द्वितीय, अबूबक्र, नासिरूद्दीन, अलाउद्दीन और नुसरतशाह क्रमशः 1398 ई. तक शासक बने।
  • 1398-99 के बीच तैमूर ने उत्तर भारत के क्षेत्रों पर आक्रमण किया।
  • इस बीच दिल्ली सल्तनत का विघटन होने लगा-मालवा और खानदेश अलग हो गए।
  • तैमूर के आक्रमण के बाद गुजरात भी दिल्ली सल्तनत से अलग हो गया। तैमूर ने 1396-97 ई. में उच्छ और दीपालपुर के क्षेत्रों को जीत लिया।
  • 1405 ई. में सुल्तान महमूद दिल्ली वापस लौटा और उसने 1412 ई. तक शासन किया। लगभग 94 वर्षों के तुगलक वंश की सत्ता का अंत तब हो गया जब दौलत खां नामक एक सरदार ने दिल्ली पर अधिकार कर लिया।
  • महमूद शाह की मृत्यु 1412 ई. में हो जाने के बाद तुगलक वंश समाप्त हो गया और खिज्र खां ने 1414 ई. में एक नए वंश की स्थापना की जिसे सैयद वंश कहा जाता है।
तैमूर का भारत पर आक्रमण
तैमूर लंग
  • तैमूर ने तैमूरी राजवंश की स्थापना की। 
  • तैमूर, चंगेज खां की तरह समस्त संसार को अपनी शक्ति से रौंदना एवं सिकन्दर की तरह विश्व विजय की कामना रखता था। 
भारत पर आक्रमण के कारण
  1. मूर्तिपूजकों को एवं मूर्तिपूजा को विध्वंस करना तथा इस्लाम का प्रचार करना
  2. भारत की सम्पत्ति को लूटना
  3. लूटपाट एवं विश्व को अपनी शक्ति से रौंदना
तैमूर का आक्रमण
  • भारत पर तैमूर का आक्रमण 1398 ई. में सुल्तान नासिरूद्दीन ममहमूद के समय में हुआ।
  • तैमूर के आक्रमण के समय खिज्र खां ने तैमूर की सहायता की।
  • तैमर उत्तर पश्चिम से होते हुए पंजाब, हरियाणा को लूटता हुआ दिल्ली तक पहुंचा। तैमूर दिल्ली में 15 दिन रहा एवं दिल्ली को लूटा एवं स्त्री, शिल्पियों को अपने साथ ले गया।
  • दिल्ली में भयंकर कत्लेआम किया हजारों-लाखों लोगों को काट दिया गया। मंदिर एवं मूर्ति तोड़े गए, लूटा गया।
तैमूर आक्रमण का प्रभाव
  1. तैमूर के आक्रमण ने तुगलक वंश का अंत कर दिया।
  2. सल्तनत की शक्ति का समाप्त करने एवं सल्तनत के विघटन में अहम भूमिका निभायी।
  3. विजित प्रदेशों पर तैमूर ने खिज्र खां को राज्यपाल नियुक्त किया।

तुगलक वंश – तुगलक शैली

विशेषताएँ
  • वास्तुकला का “संकट काल”।
  • भारी, स्थूल, खुरदरे मेहराब; न्यून अलंकरण।
  • धूसर बलुआ पत्थर, सस्ते सामग्री का प्रयोग।
  • ढलवां दीवारें (Batter Walls) → मजबूती का आभास।
  • प्रवेश द्वार: मेहराब + सरल शैली का संयोजन।

प्रमुख निर्माण:

  • गयासुद्दीन का मकबरा (1321)
    • तुगलकाबाद किले से जुड़ा; अनियमित पंचभुजाकार प्रांगण।
    • 3 कब्रें (गयासुद्दीन, बेगम, मुहम्मद बिन तुगलक)।
तुगलक वंश (1320–1412 ई.)
  • तुगलकाबाद किला, जहांपनाह, फिरोजाबाद नगर।
  • आदिलाबाद किला, खिर्की मस्जिद, बारह खम्भा
  • निजामुद्दीन औलिया का मकबरा
  • छप्पन कोट्ट (दिल्ली) – गयासुद्दीन का महल, “सुनहरी ईंटों” से निर्मित।
  • ख़ान ए जहाँ तेलंगानी का मक़बरा दिल्ली में निर्मित प्रथम अष्टभुजाकार मक़बरा।

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