स्वातंत्र्योत्तर राष्ट्र-निर्माण (2000 तक)

स्वातंत्र्योत्तर राष्ट्र-निर्माण (2000 तक): आधुनिक भारत का इतिहास के अंतर्गत स्वतंत्रता के बाद भारत ने राजनीतिक स्थिरता, आर्थिक विकास और सामाजिक न्याय के लक्ष्यों के साथ राष्ट्र-निर्माण की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया। संविधान का क्रियान्वयन, पंचवर्षीय योजनाएँ, हरित क्रांति, औद्योगीकरण तथा लोकतांत्रिक संस्थाओं का सुदृढ़ीकरण इस काल की प्रमुख उपलब्धियाँ रहीं, जिन्होंने 2000 तक आधुनिक भारत की नींव को मजबूत किया।

स्वतंत्रता और 1947 के बाद का भारत   

  • 15 अगस्त, 1947 भारतीय इतिहास में ब्रिटिश औपनिवेशिक सत्ता की समाप्ति का प्रतीक बना।
  • जवाहरलाल नेहरू ने, प्रथम प्रधानमंत्री के रूप में, ऐतिहासिक भाषण दिया जिसे
    • “ट्रिस्ट विद डेस्टिनी” (भाग्य से मिलन) के नाम से जाना जाता है।
  • सरदार वल्लभ भाई पटेल:
    • उप-प्रधानमंत्री।
    • दिसंबर 1950 में अपनी मृत्यु तक पद पर बने रहे।
  • गवर्नर-जनरल:
    • लॉर्ड माउंटबेटन (1948 तक)।
    • सी. राजगोपालाचारी (26 जनवरी, 1950 तक)।

मंत्रिपरिषद 

मंत्रीविभाग / विवरण
जवाहरलाल नेहरूप्रधानमंत्री
सरदार वल्लभ भाई पटेलउप-प्रधानमंत्री; गृह; सूचना एवं प्रसारण; रियासत (राज्य) के मामले
मौलाना अबुल कलाम आजादशिक्षा
जॉन मथाईरेलवे एवं परिवहन
सरदार बलदेव सिंहरक्षा
जगजीवन रामश्रम
सी.एच. भाभावाणिज्य
अमृत कौरस्वास्थ्य
रफी अहमद किदवईसंचार
एन.वी. गाडगिललोक निर्माण, खान और विद्युत मंत्री
आर.के. षणमुखम चेट्टी/ शनमुखम चेट्टीवित्त
के.सी. नियोगी राहत एवं पुनर्वास
बी.आर. अंबेडकरविधि (कानून); अनुसूचित जाति संघ के सदस्य; 1951 में इस्तीफा दिया
श्यामा प्रसाद मुखर्जीउद्योग एवं आपूर्ति; हिंदू महासभा; इस्तीफा देने वाले पहले व्यक्ति (अप्रैल 1950)
एन.जी. अय्यंगरविभाग रहित मंत्री; केंद्र सरकार और पूर्वी पंजाब सरकार के बीच संपर्क अधिकारी।
मोहनलाल सक्सेनाविभाग रहित मंत्री 

देसी रियासतों का एकीकरण

पृष्ठभूमि
  • राज्य जन आंदोलनों का पुनरुद्धार (1946-47)।
  • नेहरू ने उन रियासतों को गंभीर परिणामों की चेतावनी दी, जो भारतीय संघ में सम्मिलित होने का विरोध कर रही थी।
  • रियासतों से संबंधित मुद्दों से निपटने के लिए जुलाई 1947 में ‘रियासत विभाग‘ की स्थापना की गई।
  • वल्लभभाई पटेल ने रियासत विभाग का नेतृत्व किया।
  • प्रथम चरण (15 अगस्त 1947 से पहले)
    • रियासतों ने भारतीय संघ को केवल रक्षा, विदेश नीति और संचार के क्षेत्रों में ही संप्रभुता सौंपी।
    • राजाओं ने आंतरिक स्वायत्तता बनाए रखी।
  • द्वितीय चरण (15 अगस्त 1947 के बाद)
    • प्रांतों या नए संघों (राजस्थान, मध्य प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, आदि) में पूर्ण एकीकरण।
    • संवैधानिक परिवर्तन पेश किए गए।
    • रियासतों के शासकों को ‘प्रिवी पर्स’ (राज भत्ता) तथा राज्यपाल या ‘राजप्रमुख’ जैसे पदों के रूप में प्रोत्साहन प्रदान किए गए।
    • यह पटेल की सबसे बड़ी उपलब्धि थी।

जनमत संग्रह और सैन्य कार्रवाई – 

जूनागढ़
  • शासक: नवाब मुहम्मद महाबत खानजी III
  • जनसंख्या: हिंदू बहुसंख्यक
  • नवाब की इच्छा: पाकिस्तान में सम्मिलित होने की थी।
  • जनता की इच्छा: भारत में सम्मिलित होने की थी।
  • नवाब ने दमनकारी उपाय अपनाए; उनके दीवान (शाह नवाज़ भुट्टो) ने पाकिस्तान में विलय के उनके निर्णय का समर्थन किया।
  • जनमत संग्रह आयोजित किया गया (फरवरी 1948)।
  • परिणाम: निर्णय भारत के पक्ष में रहा।
हैदराबाद 
  • शासक: निज़ाम मीर उस्मान अली
  • संप्रभु दर्जे की मांग की।
  • भारत के साथ ‘यथास्थिति समझौते’ (Standstill Agreement) पर हस्ताक्षर किए (नवंबर 1947)।
  • रज़ाकार (निज़ाम का अर्धसैनिक बल): उग्रवादी हो गए और निज़ाम के विरोधियों का दमन किया।
  • भारत सरकार के हस्तक्षेप के कारण:
    • हिंसा
    • विदेशी हथियारों की आपूर्ति
  • भारतीय सेना की कार्रवाई (1948): ऑपरेशन पोलो
    • इसे “पुलिस कार्रवाई” (Police Action) के रूप में वर्णित किया गया।
  • हैदराबाद का विलय: सितंबर 1948
कश्मीर
  • जम्मू और कश्मीर:
    • हिंदू शासक (महाराजा हरिसिंह)
    • मुस्लिम-बहुसंख्यक जनसंख्या
  • महाराजा हरिसिंह की इच्छा:
    • संप्रभु दर्जा (Sovereign status)।
  • विलय में देरी की।
  • पाकिस्तान:
    • कबायली/जनजातीय लड़ाकों के वेश में सेना भेजी।
    • श्रीनगर की ओर आगे बढ़े।
  • विलय पत्र (Instrument of Accession):
    • 26 अक्टूबर 1947 को हस्ताक्षर किए गए।
    • भारत में विलय।
    • शेख अब्दुल्ला द्वारा समर्थित।
  • आक्रमणकारियों को खदेड़ने के लिए भारतीय सैनिक भेजे गए।
  • भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) का रुख किया।
  • भारत ने जनमत संग्रह का प्रस्ताव दिया ।
  • परिणाम:
    • युद्धविराम 
    • 84,000 वर्ग किमी या एक-तिहाई हिस्सा पाकिस्तान के नियंत्रण में।

संविधान सभा की मांग

  • सर्वप्रथम एम.एन. रॉय द्वारा मांग की गई।
  • संविधान निर्माण पर एक सतत प्रक्रिया के रूप में लंबे समय से विचार-विमर्श चल रहा था, उदाहरण के लिए:
    • 1895 का स्वराज विधेयक
    • 1925 का कॉमनवेल्थ ऑफ इंडिया बिल
    • 1928 की नेहरू रिपोर्ट
    • 1934 का कराची प्रस्ताव
    • 1944 की सप्रू समिति की रिपोर्ट
  • कांग्रेस ने आधिकारिक तौर पर 1934 में इस मांग को अपनाया।
  • लखनऊ अधिवेशन (1936):
    • बाह्य रूप से थोपे गए किसी भी संविधान को अस्वीकार कर दिया गया।
  • क्रिप्स प्रस्ताव (1942):
    • संविधान सभा के सिद्धांत को स्वीकार किया गया।
  • कैबिनेट मिशन (1946):
    • संविधान सभा + अंतरिम सरकार का प्रस्ताव दिया।

भारतीय संविधान सभा 

  • संविधान सभा का चुनाव अप्रत्यक्ष रूप से किया जाना था।
  • सीटों का आवंटन:
    • सीटें जनसंख्या के आधार पर आवंटित की गयी।
    • प्रति दस लाख की जनसंख्या पर एक सदस्य।
  • सदस्यों का चुनाव प्रांतीय विधान सभाओं द्वारा किया गया था।
  • प्रांतीय सभाओं का चुनाव भारत सरकार अधिनियम, 1935 के तहत किया गया था।
  • 1935 के अधिनियम के तहत मताधिकार निम्नलिखित आधारों पर सीमित था:
    • कर संबंधी योग्यताएँ 
    • संपत्ति संबंधी योग्यताएँ 
    • शैक्षिक योग्यताएँ 
    • 70% से अधिक वयस्क जनसंख्या को मतदान से बाहर रखा गया था।
  • प्रत्येक प्रांत की सीटों को तीन समुदायों में विभाजित किया गया था:
    • मुस्लिम
    • सिख 
    • सामान्य (हिंदू और अन्य, मुस्लिमों और सिखों को छोड़कर)
  • निर्वाचन की पद्धति:
    • प्रांतीय विधानसभाओं में प्रत्येक समुदाय के प्रतिनिधियों द्वारा सदस्यों का चुनाव किया गया।
    • आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली का उपयोग किया गया था।
    • मतदान पद्धति: एकल संक्रमणीय मत 
    • देसी रियासतों के प्रतिनिधियों को उनके शासकों द्वारा मनोनीत किया जाना था।
  • जवाहरलाल नेहरू अंतरिम सरकार के प्रधानमंत्री बने।
  • नोट: मुस्लिम लीग ने इसका बहिष्कार किया और मुहम्मद अली जिन्ना ने इसके गठन के प्रति दी गई अपनी पूर्व सहमति को आधिकारिक रूप से वापस ले लिया।

संविधान सभा का प्रथम सत्र

  • संविधान सभा की पहली बैठक 9 दिसंबर 1946 को संविधान हॉल, नई दिल्ली में हुई।
  • 13 दिसंबर 1946 को जवाहरलाल नेहरू द्वारा ‘उद्देश्य प्रस्ताव’ पेश किया गया।
  • डॉ. सच्चिदानंद सिन्हा अस्थायी अध्यक्ष थे।
  • डॉ. राजेंद्र प्रसाद संविधान सभा के स्थायी अध्यक्ष थे।
  • कुल सदस्य : 389
    • ब्रिटिश भारत: 296 सीटें
    • देसी रियासतें: 93 सीटें
  • कांग्रेस की जीत:
    • 208 सीटें
    • 9 को छोड़कर सभी ‘सामान्य’ सीटों पर विजय प्राप्त की।
  • मुस्लिम लीग:
    • 73 सीटें
    • 5 को छोड़कर सभी ‘मुस्लिम’ सीटों पर विजय प्राप्त की।
  • देसी रियासतें:
    • प्रारंभ में बहिष्कार किया।
    • अगस्त 1947 तक धीरे-धीरे शामिल हो गईं।

संविधान का निर्माण 

  • बी.एन. राव ने अक्टूबर 1947 तक पहला प्रारूप प्रस्तुत किया:
    • 240 धाराएं 
    • 13 अनुसूचियां
  • प्रारूप समिति 
    • अध्यक्ष: डॉ. बी.आर. अंबेडकर (स्वतंत्र)
    • सदस्य:
      • के.एम. मुंशी (कांग्रेस)
      • अल्लादी कृष्णास्वामी अय्यर (स्वतंत्र)
      • एन. गोपालस्वामी आयंगर
      • बी.एल. मित्रा → इनके स्थान पर एन. माधव राव (स्वतंत्र) आए।
      • सैयद मोहम्मद सादुल्ला (मुस्लिम लीग के सदस्य)
      • डी.पी. खेतान (स्वतंत्र) → इनके स्थान पर टी.टी. कृष्णमाचारी (कांग्रेस) आए।
  • तेज बहादुर सप्रू और जयप्रकाश नारायण को भी संविधान सभा के सदस्य के रूप में आमंत्रित किया गया था।
    • लेकिन, सप्रू स्वास्थ्य कारणों से इसे स्वीकार नहीं कर सके।
    • जयप्रकाश नारायण ने इस प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया।
  • प्रक्रिया 
    • 15 नवंबर, 1948 से 8 जनवरी, 1949 तक संविधान सभा ने अनुच्छेदों पर विस्तृत चर्चा की। इस दौरान 67 अनुच्छेदों पर विचार-विमर्श किया गया। इसे संविधान का ‘प्रथम पठन/प्रथम वाचन’ कहा जाता है।
    • ‘द्वितीय वाचन’ 16 नवंबर, 1949 को समाप्त हुआ।
    • ‘तृतीय वाचन’ 26 नवंबर, 1949 तक चला और अंततः संविधान सभा द्वारा प्रारूप संविधान को औपचारिक रूप से अपना लिया गया।
    • संविधान की कुल तीन मूल प्रतियाँ थीं: पहली प्रति अंग्रेजी में (हस्तलिखित); दूसरी अंग्रेजी में मुद्रित प्रति तथा तीसरी प्रति हिंदी में थी।
    • सदस्यों द्वारा संविधान की प्रतियों पर अपने हस्ताक्षर करने के पश्चात, “जन-गण-मन” और “वंदे मातरम” के गायन के साथ ‘सभा’ को संविधान सभा के रूप में समाप्त कर दिया गया। 26 जनवरी, 1950 को संविधान सभा भारतीय गणराज्य की (अंतरिम) संसद के रूप में परिवर्तित हो गई।
संविधान का अंगीकरण 
  • 26 नवंबर 1949: डॉ. अंबेडकर ने संविधान को अंगीकार करने का प्रस्ताव पेश किया।
    • संविधान को जनता द्वारा स्वयं को अंगीकृत, अधिनियमित और आत्मार्पित किया गया।
    • सभा के अध्यक्ष डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने इस पर हस्ताक्षर किए।
    • 24 जनवरी 1950: कुल 299 सदस्यों में से 284 सदस्यों ने संविधान की मूल प्रतियों पर अपने हस्ताक्षर अंकित किए।
  • 24 जनवरी 1950: यह संविधान सभा का अंतिम दिन था।
  • ‘प्रस्तावना’ को सबसे अंत में अपनाया गया।
  • निर्माण में लगा समय: 2 वर्ष, 11 महीने और 18 दिन।
संविधान सभा के अन्य कार्य 
  • अंगीकरण (Adoption):
    • राष्ट्रीय ध्वज: 22 जुलाई, 1947 को अपनाया गया।
    • राष्ट्रगान एवं राष्ट्रगीत: 24 जनवरी, 1950 को अपनाया गया।
  • निर्वाचन:
    • डॉ. राजेंद्र प्रसाद को भारत के प्रथम राष्ट्रपति के रूप में चुना गया।
  • 1952 के आम चुनावों तक संविधान सभा ने अस्थायी संसद के रूप में कार्य किया।
  • नोट:
    • संविधान सभा की सबसे बड़ी समिति (सदस्यता की दृष्टि से) ‘मौलिक अधिकारों, अल्पसंख्यकों और जनजातीय एवं बहिष्कृत क्षेत्रों पर सलाहकार समिति’ थी।
    • अजमेर के अंतर्गत मसूदा और खरवा दो ऐसी रियासतें थीं, जिनके विलय के निर्णय को सरदार पटेल ने रद्द कर दिया था।

भाषा नीति और राज्यों का भाषाई पुनर्गठन

भाषा नीति
  • गांधीजी और नेहरू का दृष्टिकोण:
    • महात्मा गांधी ने राष्ट्रीय एकता के लिए ‘हिंदुस्तानी’ को बढ़ावा दिया।
    • जवाहरलाल नेहरू ने हिंदी की ओर क्रमिक संक्रमण का समर्थन किया। 
  • समझौता सूत्र :
    • हिंदी (देवनागरी लिपि) = संघ की राजभाषा घोषित की गई।
    • अंग्रेजी का प्रयोग प्रशासनिक कार्यों के लिए अगले 15 वर्षों तक जारी रखने का निर्णय लिया गया।
  • राजभाषा अधिनियम, 1963 :
    • हिंदी को राजभाषा का दर्जा दिया गया।
    • अंग्रेजी को “सह-राजभाषा” के रूप में अनिश्चित काल के लिए (बिना किसी अंतिम तिथि के) जारी रखने का प्रावधान किया गया।
राज्यों का भाषाई पुनर्गठन 
  • प्रारंभिक विरोध: कांग्रेस ने प्रारंभ में राष्ट्रीय एकता बनाए रखने के लिए भाषायी राज्यों का विरोध किया।
  • प्रारंभिक घटनाक्रम
    • 1948: धर आयोग ने भाषायी आधार पर राज्यों के गठन का विरोध किया।
    •  1948: जेवीपी (जवाहरलाल नेहरू, वल्लभभाई पटेल और पट्टाभि सीतारमैया) समिति ने भी भाषायी राज्यों के विरुद्ध अपनी रिपोर्ट दी।
  • तेलुगु आंदोलन
    • पोट्टि श्रीरामुलु ने अलग आंध्र राज्य की मांग को लेकर 56 दिनों का आमरण अनशन किया→ 1 अक्टूबर, 1953 आंध्र राज्य का गठन हुआ।
  • राज्य पुनर्गठन आयोग, 1953
    • फजल अली आयोग 
    • सदस्य: के.एम. पणिक्कर और हृदय नाथ कुंजरू।
  • सिफारिश:
    • राज्य के पुनर्गठन के लिए जिन कारकों पर विचार किया गया, उनमें एकता और सुरक्षा, भाषाई और सांस्कृतिक समरूपता और वित्तीय, आर्थिक और प्रशासनिक विचार शामिल हैं। कुंजरू ने 1955 में रिपोर्ट सौंपी, जिसे राज्य पुनर्गठन अधिनियम, 1956 के माध्यम से लागू किया गया।
    • आयोग की सिफारिश: 16 राज्य और 3 केंद्र शासित प्रदेश।
    • अधिनियम का क्रियान्वयन (1956): अंततः 14 राज्य और 6 केंद्र शासित प्रदेश बनाए गए।
  • नोट:
    • भाषायी आधार पर पहला आंदोलन 1886 में ओडिशा में शुरू हुआ था।
    • यह आंदोलन अंततः 1936 में अपने उद्देश्य को प्राप्त करने में सफल रहा जब उड़ीसा प्रांत, उड़िया राष्ट्रवाद के जनक मधुसूदन दास के प्रयासों के कारण, साझा भाषाओं के आधार पर संगठित होने वाला पहला भारतीय राज्य बना।

स्वतंत्रता के बाद भारत में राजनीतिक विकास 

प्रथम आम चुनाव (1951–52) 

  • चुनाव आयोग की स्थापना: 25 जनवरी 1950 
  • प्रथम मुख्य चुनाव आयुक्त: सुकुमार सेन (ICS अधिकारी)
    • पदभार ग्रहण किया: 21 मार्च 1950
  • सीटें और आरक्षण
लोकसभा
  • चुनाव द्वारा भरी जाने वाली कुल सीटें: 489
  • आरक्षित सीटें:
    • 72 अनुसूचित जातियों के लिए
    • 26 अनुसूचित जनजातियों के लिए
  • कुल निर्वाचन क्षेत्र: 401
  • निर्वाचन क्षेत्रों के प्रकार:
    • 314 एकल-सदस्यीय
    • 86 द्वि-सदस्यीय
    • 1 त्रि-सदस्यीय राज्य विधानसभाएं
  • कुल सीटें: 3,283
  • आरक्षित सीटें:
    • 477 अनुसूचित जातियों के लिए
    • 192 अनुसूचित जनजातियों के लिए
  • महत्वपूर्ण राजनीतिक दल
  • श्यामा प्रसाद मुखर्जी: अक्टूबर 1951 में भारतीय जनसंघ (BJS) की स्थापना की।
  • डॉ. बी. आर. अंबेडकर: ‘शेड्यूल्ड कास्ट्स फेडरेशन’ (अनुसूचित जाति संघ) को पुनर्जीवित किया।
    • बाद में इसका नाम बदलकर ‘रिपब्लिकन पार्टी’ कर दिया गया।
  • जे. बी. (आचार्य) कृपलानी:
    • पूर्व कांग्रेस नेता। 
    • ‘किसान मजदूर प्रजा पार्टी’ (KMPP) की स्थापना की।
  • राम मनोहर लोहिया और जयप्रकाश नारायण: सोशलिस्ट पार्टी (समाजवादी दल) के प्रमुख प्रणेता।
  • कम्युनिस्ट पार्टी (भारतीय कम्युनिस्ट दल)
  • स्वतंत्र पार्टी (1959):
    • विचारधारा: रूढ़िवादी (संरक्षणवादी), समाजवाद-विरोधी और ‘अहस्तक्षेप’ (Laissez-faire) की आर्थिक नीति।
    • नेतृत्व: सी. राजगोपालाचारी, मीनू मसानी, एन. जी. रंगा और के. एम. मुंशी।
    • समर्थन आधार: उद्योगपति और व्यवसायी, जमींदार और रियासतों के राजा, धनी और मध्यम वर्ग के किसान, तथा कुछ सेवानिवृत्त सिविल सेवक।
    • चुनावी प्रदर्शन: 1962 के चुनावों में इसने लोकसभा की 18 सीटें जीतीं।
  • निर्वाचन आयोग के अनुसार, प्रथम आम चुनावों के दौरान 14 दलों को राष्ट्रीय दल का दर्जा प्राप्त था।
परिणाम – लोकसभा
  • भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने बहुमत प्राप्त किया। 
  • भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी, सोशलिस्ट पार्टी, किसान मजदूर प्रजा पार्टी (KMPP), भारतीय जनसंघ (BJS) और निर्दलीय उम्मीदवारों ने भी कुछ सीटों पर विजय प्राप्त की।
  • प्रमुख चुनावी हार
    • डॉ. बी. आर. अंबेडकर:
      • बंबई (उत्तर मध्य) आरक्षित निर्वाचन क्षेत्र से चुनाव हार गए। 
      • बाद में राज्यसभा के माध्यम से संसद में प्रवेश किया।
    • आचार्य कृपलानी: फैजाबाद (उत्तर प्रदेश) से चुनाव हार गए।
    • सुचेता कृपलानी:
      • दिल्ली से विजयी हुईं। 
      • उन्होंने कांग्रेस उम्मीदवार मनमोहिनी सहगल को पराजित किया।

प्रथम लोकसभा का गठन 

  • चुनाव परिणामों की घोषणा के पश्चात 2 अप्रैल 1952 को प्रथम लोकसभा का गठन किया गया।
  • लोकसभा के गठन से पूर्व तक, संविधान सभा ने ही अंतरिम विधायिका (संसद) के रूप में कार्य किया।
  • लोकसभा के प्रथम अध्यक्ष जी. वी. मावलंकर थे।
राज्य विधानसभा चुनाव परिणाम 
  • कांग्रेस ने सभी राज्यों में सरकारें बनायी।
  • कांग्रेस को निम्नलिखित राज्यों में पूर्ण बहुमत प्राप्त नहीं हुआ था:
    • मद्रास 
    • त्रावणकोर-कोचीन 
    • उड़ीसा
    • पेप्सू (PEPSU – पटियाला एंड ईस्ट पंजाब स्टेट्स यूनियन)
  • 27 मई 1964 को भारत के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू का निधन हुआ।
  • नोट-
  • 1957 में  भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) ने ई.एम.एस. नंबूदरीपाद के नेतृत्व में केरल में सरकार बनाई। यह कांग्रेस के एक दलीय वर्चस्व के दौर में एक महत्वपूर्ण विचलन था।
    • यह चुनावों के माध्यम से गठित होने वाली विश्व की पहली कम्युनिस्ट सरकार थी।
  • जुलाई 1959 में, केंद्र सरकार ने नंबूदिरीपाद सरकार को बर्खास्त कर दिया और राष्ट्रपति शासन लागू कर दिया।
  • यह भारत में अनुच्छेद 356 के तहत राष्ट्रपति शासन का पहला प्रयोग था।

लाल बहादुर शास्त्री

  • नेहरू जी के निधन के पश्चात वे भारत के द्वितीय प्रधानमंत्री बने।
    • उन्होंने 9 जून 1964 से 11 जनवरी 1966 तक प्रधानमंत्री के रूप में कार्य किया।
  • लाल बहादुर शास्त्री ने मुख्य रूप से नेहरू की विदेश नीति के दृष्टिकोण का ही अनुसरण किया।
  • उन्होंने दक्षिण-पूर्वी एशियाई पड़ोसी देशों के साथ संबंधों को मजबूत किया।
  • 1965 में, गुजरात के कच्छ के रण को लेकर संघर्ष छिड़ गया।
    • पाकिस्तान ने कश्मीर में घुसपैठ के लिए ‘ऑपरेशन जिब्राल्टर’ शुरू किया।
    • भारत ने इसका प्रभावी ढंग से उत्तर दिया और सितंबर 1965 में युद्ध समाप्त हुआ।
    • ताशकंद घोषणा (10 जनवरी 1966): सोवियत संघ के एलेक्सी कोसिगिन की मध्यस्थता से ताशकंद समझौते पर हस्ताक्षर किए गए। 
    • इस घोषणापत्र पर भारतीय प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री और पाकिस्तानी राष्ट्रपति अयूब खान ने हस्ताक्षर किए थे।
  • “जय जवान, जय किसान”: शास्त्री जी ने सैनिकों और किसानों को प्रोत्साहित करने के लिए यह ऐतिहासिक नारा दिया था, जो 1965 के युद्ध और खाद्य संकट के समय अत्यंत प्रासंगिक था।

इंदिरा गांधी

  • लाल बहादुर शास्त्री के निधन के पश्चात वे भारत की प्रधानमंत्री बनीं।
  • वर्ष 1971 में, पूर्व रियासतों के राजाओं को दी जाने वाली विशेष धनराशि ‘प्रिवी पर्स’ को समाप्त करने के लिए एक संवैधानिक संशोधन पारित किया गया।
  • 3 जुलाई 1972 को इंदिरा गांधी और ज़ुल्फ़िकार अली भुट्टो के बीच ‘शिमला समझौते’ पर हस्ताक्षर किए गए।
    • इस समझौते के तहत दोनों देश बाहरी या संयुक्त राष्ट्र (UN) के हस्तक्षेप के बिना, आपसी विवादों को द्विपक्षीय (Bilateral) रूप से सुलझाने पर सहमत हुए।
    • शिमला समझौता उनकी विदेश नीति की महत्वपूर्ण सफलता थी।
  • 25–26 जून 1975 की मध्यरात्रि को अनुच्छेद 352(1) के तहत देश में आपातकाल की घोषणा की गई। यह आपातकाल औपचारिक रूप से 21 मार्च, 1977 को समाप्त हुआ।
  • 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 के माध्यम से ‘शिक्षा’ को राज्य सूची से हटाकर समवर्ती सूची में शामिल कर दिया गया।
  • भारत-सोवियत शांति, मैत्री और सहयोग संधि उनकी विदेश नीति की एक बड़ी उपलब्धि थी।

मोरारजी देसाई

  • 1971 के बाद पहली बार कांग्रेस को हार का सामना करना पड़ा और 1977 के चुनावों के बाद मोरारजी देसाई भारत के प्रधानमंत्री बने। 
  • इसी कालखंड के दौरान बाद में चौधरी चरण सिंह भी प्रधानमंत्री बने।
  • मोरारजी देसाई ने विमुद्रीकरण की नीति प्रस्तुत की।
प्रथम पिछड़ा वर्ग आयोग
  • 29 जनवरी 1953 को प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने इसका गठन किया।
  • इस आयोग की अध्यक्षता काका कालेलकर ने की थी।
  • कालेलकर आयोग ने 30 मार्च 1955 को अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की।
  • कालेलकर आयोग की सिफारिशें काफी हद तक अप्रभावी रहीं।
मंडल आयोग
  • 20 दिसंबर 1978 को मोरारजी देसाई सरकार ने एक नए पिछड़ा वर्ग आयोग की घोषणा की।
  • इस आयोग के अध्यक्ष बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री बिंदेश्वरी प्रसाद मंडल थे।
  • मंडल आयोग ने सामाजिक, शैक्षिक और आर्थिक मानदंडों पर जातियों का मूल्यांकन किया।
  • आयोग ने भारत में 3,743 पिछड़ी जातियों की पहचान की।मंडल आयोग ने 12 दिसंबर 1980 को अपनी रिपोर्ट को अंतिम रूप दिया।
  • जब तक रिपोर्ट प्रस्तुत की गई, तब तक मोरारजी देसाई सरकार गिर चुकी थी।
  • मंडल आयोग ने अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए सरकारी नौकरियों में 27% आरक्षण की सिफारिश की।
  • वी.पी. सिंह ने कुछ संशोधनों के साथ मंडल आयोग की सिफारिशों को लागू किया।

इंदिरा गांधी

  • 1980 के आम चुनाव में, इंदिरा गांधी ने भारी बहुमत के साथ सत्ता में वापसी की।
  • अपने दूसरे कार्यकाल के दौरान, उन्होंने नई दिल्ली में 9वें एशियाई खेलों की सफल मेजबानी की।
  • भारत ने 1983 में नई दिल्ली में 7वें गुटनिरपेक्ष शिखर सम्मेलन की भी मेजबानी की।
  • अप्रैल 1984 में सियाचिन में पाकिस्तान के विरुद्ध ‘ऑपरेशन मेघदूत’ चलाया गया।
  • पंजाब में आतंकवाद पर अंकुश लगाने के लिए 3 जून से 8 जून 1984 तक ‘ऑपरेशन ब्लू स्टार’ चलाया गया।
  • 31 अक्टूबर 1984 को, इंदिरा गांधी की उनके अपने ही सुरक्षा कर्मियों द्वारा हत्या कर दी गई।
  • 1965 से 1984 की अवधि में देश का नेतृत्व लाल बहादुर शास्त्री, इंदिरा गांधी, मोरारजी देसाई और चौधरी चरण सिंह द्वारा किया गया।

राजीव गांधी

  • राजीव गांधी 1984 से 1989 तक भारत के प्रधानमंत्री रहे।
  • उनकी जयंती, 20 अगस्त, को सद्भावना दिवस, समरसता दिवस और ‘राजीव गांधी अक्षय ऊर्जा दिवस’ के रूप में मनाया जाती है।
  • उन्होंने आर्थिक सुधारों की शुरुआत की और अमेरिका तथा सोवियत संघ के साथ भारत के संबंधों को मजबूत किया।
  • उन्हें भारत में संचार और सूचना प्रौद्योगिकी (IT) क्रांति शुरू करने का श्रेय दिया जाता है।
    • ओडिशा में जन्मे सैम पित्रोदा ने भारत की दूरसंचार क्रांति में अग्रणी भूमिका निभाई।
    • उन्होंने अगस्त 1984 में भारत में एक स्वायत्त संगठन के रूप में C-DOT (सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ टेलीमैटिक्स) की स्थापना की।
    • दिल्ली और मुंबई में दूरसंचार सेवाओं के लिए 1986 में महानगर टेलीफोन निगम लिमिटेड (MTNL) की स्थापना हुई।
    • स्कूली स्तर पर बड़े पैमाने पर कंप्यूटर साक्षरता कार्यक्रम शुरू किए गए।
  • संवैधानिक संशोधन:
    • 52 वें  संविधान संशोधन अधिनियम, 1985 द्वारा दसवीं अनुसूची जोड़ी गई और दलबदल विरोधी कानून लागू किया गया।
    • 61 वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1989 के माध्यम से मतदान की आयु 21 वर्ष से घटाकर 18 वर्ष कर दी गई।
  • राजीव गांधी ने सार्क (SAARC) के गठन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
    • सार्क की स्थापना 7-8 दिसंबर 1985 को ढाका, बांग्लादेश में हुई थी।
    • सार्क का प्रथम शिखर सम्मेलन ढाका में आयोजित किया गया था।
  • शिक्षा के क्षेत्र में सुधार
    • उनके कार्यकाल के दौरान राष्ट्रीय शिक्षा नीति 1986 तैयार की गई।
    • सितंबर 1985 में शिक्षा मंत्रालय का नाम बदलकर मानव संसाधन विकास मंत्रालय (MHRD) कर दिया गया।
    • ‘अनुसूचित जातियों के लिए शैक्षिक सुविधाओं का विस्तार करने हेतु ‘राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार कार्यक्रम’ (NREP) और ‘ग्रामीण भूमिहीन रोजगार गारंटी कार्यक्रम’ (RLEGP) का उपयोग किया गया।
    • प्रमुख संस्थान:
      • इन्दिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय (IGNOU): 1985 में स्थापित।
      • जिला शिक्षा और प्रशिक्षण संस्थान (DIETs) की स्थापना की गई।
      • राजीव गांधी द्वारा 1985 में जवाहर नवोदय विद्यालय स्थापित किए गए।
  • नोट: 
  • 1994 की राष्ट्रीय दूरसंचार नीति ने ‘ऑन-डिमांड’ टेलीफोन सेवा और किफायती गुणवत्तापूर्ण सेवाओं की नींव रखी।
  • भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (TRAI) की स्थापना 1997 में की गई थी।
  • राष्ट्रीय दूरसंचार नीति, 1999: इसका मुख्य ध्यान विश्व स्तरीय दूरसंचार बुनियादी ढांचे के विकास पर था।
  • वर्ष 2000 में भारत संचार निगम लिमिटेड (BSNL) की स्थापना की गई।

विश्वनाथ प्रताप सिंह

  • 1989 के आम चुनावों के बाद, नेशनल फ्रंट (राष्ट्रीय मोर्चा) के नेता विश्वनाथ प्रताप सिंह भारत के 8 वें प्रधानमंत्री बने।
  • प्रधानमंत्री के रूप में उनका कार्यकाल अल्पकालिक (लगभग 11 महीने) रहा।
  • उन्होंने मंडल आयोग की सिफारिशों को लागू किया।
  • अखिल भारतीय आरक्षण विरोधी मोर्चा के अध्यक्ष, उज्ज्वल सिंह, ने इसे सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी।
    • 16 नवंबर 1992 को सर्वोच्च न्यायालय की नौ न्यायाधीशों वाली संविधान पीठ ने मंडल आयोग की सिफारिशों को लागू करने के निर्णय को बरकरार रखा और आरक्षण की अधिकतम सीमा 50% निर्धारित कर दी।
  • इस निर्णय के बाद, सरकार ने सरकारी नौकरियों में OBC के लिए 27% आरक्षण प्रदान करने की अधिसूचना जारी की।

पामुलपती वेंकट नरसिम्हा राव

  • वे भारत के 9वें प्रधानमंत्री बने (1991–1996)।
  • उन्होंने तत्कालीन वित्त मंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के साथ मिलकर उदारीकरण, निजीकरण और वैश्वीकरण की नीतियों की शुरुआत की।
  • नरसिम्हा राव को ‘भारतीय आर्थिक सुधारों का जनक’ माना जाता है।
  • उनके कार्यकाल के दौरान भारत के परमाणु और मिसाइल कार्यक्रमों ने गति पकड़ी।
  • पंजाब में आतंकवाद को प्रभावी ढंग से समाप्त किया गया।

अटल बिहारी वाजपेयी

  • वे पहली बार 16 मई 1996 को प्रधानमंत्री बने, लेकिन बहुमत के अभाव के कारण उनकी सरकार मात्र 13 दिनों में गिर गई।
  • इसके बाद संयुक्त मोर्चा की सरकार बनी, जिसका नेतृत्व क्रमशः एच.डी. देवेगौड़ा और इन्द्र कुमार गुजराल ने किया।
  • इन्द्र कुमार गुजराल सरकार ने ‘गुजराल सिद्धांत’ पेश किया, जिसका उद्देश्य पड़ोसी देशों के साथ संबंधों को सौहार्दपूर्ण और बेहतर बनाना था।
  • वाजपेयी 19 मार्च 1998 को पुनः प्रधानमंत्री बने और 1999 के आम चुनावों में जीत के बाद 22 मार्च 2004 तक इस पद पर रहे।
  • 1998 में भारत ने पोखरण-II परमाणु परीक्षण किए, जिसका कूट नाम (Codename) ‘ऑपरेशन शक्ति’ था।
    • यह परीक्षण डॉ. आर. चिदंबरम के नेतृत्व में संपन्न हुआ।
    • 11 मई और 13 मई 1998 को कुल तीन भूमिगत परमाणु परीक्षण किए गए।
    • इन परीक्षणों के बाद वाजपेयी जी ने “जय जवान, जय किसान, जय विज्ञान” का नारा दिया।  
    • भारत का परमाणु सिद्धांत ‘विश्वसनीय न्यूनतम प्रतिरोध’ तथा ‘नो फर्स्ट यूज’ (पहले उपयोग नहीं) के सिद्धांतों पर आधारित है।
  • सम्पूर्ण भारत में कनेक्टिविटी सुधारने के लिए 2001 में स्वर्णिम चतुर्भुज राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजना की शुरुआत की गई।  
  • सर्व शिक्षा अभियान: प्राथमिक शिक्षा के सार्वभौमिकरण के लिए इस ऐतिहासिक कार्यक्रम को लागू किया गया।
  • अप्रवासी भारतीयों (NRIs) और भारतीय प्रवासियों (Diaspora) के साथ संबंधों को मजबूत करने के लिए विशेष प्रयास किए गए।
  • फरवरी 1999 में दिल्ली-लाहौर बस सेवा (सदा-ए-सरहद)  का उद्घाटन किया गया।
  • वाजपेयी जी की लाहौर यात्रा के दौरान दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों ने ‘लाहौर घोषणा पत्र’ पर हस्ताक्षर किए।
    • इस घोषणा पत्र में आतंकवाद की निंदा की गई और शिमला समझौते की पुष्टि करते हुए आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप न करने का समर्थन किया गया।
  • भारत और पाकिस्तान के बीच 1999 में जम्मू-कश्मीर के कारगिल जिले में कारगिल युद्ध लड़ा गया था।
    • पाकिस्तानी सैनिकों ने भारतीय क्षेत्र में घुसपैठ की और नियंत्रण रेखा (LoC) के पास ऊँची पहाड़ियों पर सामरिक ठिकानों पर कब्जा कर लिया।
    • भारतीय सैनिकों को बेहद कठिन परिस्थितियों में निचले और दुर्गम इलाकों से लड़ना पड़ा।
  • 26 जुलाई 1999 को ‘ऑपरेशन विजय’ के तहत भारत ने कारगिल युद्ध में विजय प्राप्त की।

राष्ट्रवादी विदेश नीति

स्वतंत्रता से पूर्व संस्थापक सदस्यता

भारत स्वतंत्रता से पूर्व निम्नलिखित अंतर्राष्ट्रीय संगठनों का संस्थापक सदस्य रहा है:

  • लीग ऑफ नेशंस (राष्ट्र संघ) 
  • अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO)
  • अंतरराष्ट्रीय न्यायालय
  • स्वतंत्रता के पश्चात
  • जवाहरलाल नेहरू को भारत की विदेश नीति का ‘शिल्पकार’ (Architect) माना जाता है।
    • पंचशील (1954)
      • पंचशील को पहली बार औपचारिक रूप से 29 अप्रैल 1954 को तिब्बत के संबंध में भारत और चीन के बीच एक समझौते के रूप में व्यक्त किया गया था। 
      • इन सिद्धांतों की संयुक्त घोषणा जवाहरलाल नेहरू और चीनी प्रधानमंत्री चाऊ एन-लाई द्वारा की गई थी।
      • पंचशील के पांच सिद्धांत:
        • एक-दूसरे की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का पारस्परिक सम्मान।
        • पारस्परिक अनाक्रमण
        • एक-दूसरे के आंतरिक मामलों में अहस्तक्षेप
        • समानता और पारस्परिक लाभ।
        • शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व।
    • गुटनिरपेक्ष आंदोलन (NAM)
      • नेहरू के प्रयासों के परिणामस्वरूप 1955 में बांडुंग, इंडोनेशिया में ‘एफ्रो-एशियाई सम्मेलन’ आयोजित किया गया।
      • इसी सम्मेलन ने गुटनिरपेक्ष आंदोलन की आधारशिला रखी।
      • NAM के संस्थापक नेता:
        • जवाहरलाल नेहरू (भारत)
        • जोसिप ब्रोज़ टिटो (यूगोस्लाविया)
        • गमाल अब्देल नासिर (मिस्र)
        • क्वामे न्क्रुमा (घाना)
        • सुकर्णो (इंडोनेशिया)
      • गुटनिरपेक्ष आंदोलन का पहला शिखर सम्मेलन 1961 में बेलग्रेड, यूगोस्लाविया में आयोजित किया गया था। 
  • परमाणु संधियाँ (Nuclear Treaties)
    • भारत ने 1963 की आंशिक परीक्षण प्रतिबंध संधि (PTBT) पर बिना किसी विलंब के हस्ताक्षर किए।
    • भारत ने 1968 की परमाणु अप्रसार संधि (NPT) पर इसके भेदभावपूर्ण स्वरूप के कारण हस्ताक्षर नहीं किए।

भारत-बांग्लादेश संबंध

  • 1971 के भारत-पाक युद्ध के परिणामस्वरूप एक स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में बांग्लादेश का उदय हुआ।
  • भारत ने 9 अगस्त 1971 को भारत-सोवियत शांति, मित्रता और सहयोग संधि पर हस्ताक्षर किए।
  • इस युद्ध में अदम्य साहस के लिए अल्बर्ट एक्का और मेजर होशियार सिंह को मरणोपरांत परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया।
  • 1971 के युद्ध में पाकिस्तान पर भारत की विजय की स्मृति में प्रत्येक वर्ष 16 दिसंबर को ‘विजय दिवस’ मनाया जाता है।
  • भारत-बांग्लादेश मित्रता संधि
    • 1972 में, भारतीय प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और बांग्लादेशी प्रधानमंत्री शेख मुजीबुर रहमान ने 25 वर्षीय संधि पर हस्ताक्षर किए।
  • मुहुरी नदी सीमा विवाद
    • मुहुरी नदी भारत और बांग्लादेश के बीच बहती है और इसका उद्गम त्रिपुरा में होता है।
    • 1974 में, एक समझौते के तहत मुहुरी नदी की मध्य रेखा को त्रिपुरा-नोआखली सीमा के रूप में तय किया गया।
  • तीस्ता जल संधि
    • 1983 में, भारत और बांग्लादेश ने तीस्ता जल-बंटवारा समझौते पर हस्ताक्षर किए।
    • यह समझौता शुष्क मौसम (गर्मी) के दौरान जल के तदर्थ (Ad hoc) बँटवारे के लिए था और प्रकृति में अस्थायी था।
  • गंगा जल बँटवारा संधि (फरक्का समझौता)
    • 1996 में, फरक्का में 30 वर्षीय गंगा जल बँटवारा संधि पर हस्ताक्षर किए गए।
    • इस संधि पर बांग्लादेशी प्रधानमंत्री शेख हसीना और भारतीय प्रधानमंत्री एच.डी. देवेगौड़ा ने हस्ताक्षर किए थे।
  • चकमा शरणार्थी समस्या
    • चकमा मुख्य रूप से बौद्ध धर्मावलंबी हैं। इन्होंने 1960 के दशक के दौरान मुख्य रूप से चटगाँव पहाड़ी क्षेत्रों (Chittagong Hill Tracts) से पलायन किया।
  • बड़ी संख्या में चकमाओं ने भारत के त्रिपुरा, अरुणाचल प्रदेश, मिजोरम और असम जैसे राज्यों में शरण ली।
  • 1997 में भारत और बांग्लादेश के बीच चकमा शरणार्थियों की वापसी के लिए एक समझौता हुआ, किंतु यह समस्या आज भी बनी हुई है।

भारत – श्रीलंका

  • नेहरू-कोटलेवाला समझौता 1954
    • प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और श्रीलंका के प्रधानमंत्री जॉन कोटलेवाला के बीच।
    • श्रीलंका में रह रहे भारतीय मूल के लोगों को मतदान के अधिकार और नागरिकता से वंचित कर दिया गया था। 
    • इस अन्यायपूर्ण व्यवहार के समाधान हेतु यह समझौता किया गया।
  • भंडारनायके-शास्त्री समझौता 1964
    • नागरिकता के मुद्दे पर समझौता।
  • कच्चाथीवू द्वीप विवाद
    • यह भारत और श्रीलंका के बीच एक दीर्घकालिक विवाद रहा है।
    • 1974 में, भारत ने एक द्विपक्षीय समझौते के माध्यम से भारत ने श्रीलंका की कच्चातिवु द्वीप पर संप्रभुता को मान्यता दे दी।
  • श्रीलंकाई तमिल मुद्दा
    • 29 जुलाई 1987 को भारत-श्रीलंका शांति समझौते पर हस्ताक्षर किए गए।
    • इस समझौते पर भारतीय प्रधानमंत्री राजीव गांधी और श्रीलंकाई राष्ट्रपति जे.आर. जयवर्धने ने हस्ताक्षर किए थे।
    • इस समझौते के तहत, भारतीय शांति सेना (IPKF) को श्रीलंका भेजा गया, और तमिल उग्रवादियों को निशस्त्र करने के लिए उनके द्वारा ‘ऑपरेशन पवन’ शुरू किया गया था।

भारत – नेपाल

  • जुलाई 1950 में भारत और नेपाल के बीच ‘भारत-नेपाल शांति और मित्रता संधि’ पर हस्ताक्षर किए गए। यह संधि दोनों देशों के बीच खुले आवागमन और सुरक्षा सहयोग का आधार बनी।

भारत – भूटान

  • मैत्री संधि (1949): अगस्त 1949 में ‘भारत-भूटान संधि’ पर हस्ताक्षर किए गए। इस संधि ने दोनों देशों के बीच स्थायी शांति और मित्रता का आश्वासन दिया।
  • संधि के अनुच्छेद 2 में उल्लेख किया गया कि भूटान अपनी आंतरिक स्वायत्तता बनाए रखेगा तथा बाह्य संबंधों में भारत की सलाह से निर्देशित होने के लिए सहमत है।
  • भूटान की प्रथम पंचवर्षीय योजना (1961) भारत द्वारा 100% वित्तपोषित की गई थी।
  • 1962 के भारत-चीन युद्ध के बाद, भूटान ने अपनी सुरक्षा संबंधी चिंताओं का उत्तरदायित्व भारत को सौंप दिया।

भारत – अमेरिका

  • शुरुआती तनाव: 1947 में, अमेरिका ने संयुक्त राष्ट्र (UN) में कश्मीर मुद्दे पर पाकिस्तान के रुख का समर्थन किया, जबकि भारत ने 1950 के कोरियाई युद्ध का विरोध किया।
  • वियतनाम युद्ध: वियतनाम युद्ध के दौरान भारत-अमेरिका संबंधों में और अधिक कड़वाहट आई।
  • मार्च 2000 में अमेरिकी राष्ट्रपति बिल क्लिंटन ने भारत की यात्रा की। इसके बाद सितंबर 2000 में प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने अमेरिका का दौरा किया।
  • इन यात्राओं के बाद भारत-अमेरिका संबंधों में महत्वपूर्ण सुधार हुआ और दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी की नींव पड़ी।
  • अमेरिका ने भारत को तारापुर परमाणु ऊर्जा संयंत्र स्थापित करने में महत्वपूर्ण सहायता प्रदान की थी।

नियोजन और आर्थिक सुधार

नियोजन और आर्थिक सुधार
  • 1934 में, सर एम. विश्वेश्वरैया ने अपनी पुस्तक ‘प्लान्ड इकोनॉमी इन इंडिया’ में नियोजित विकास का एक मॉडल प्रस्तावित किया।
    • उन्होंने कृषि से अतिरिक्त (अधिशेष) श्रम को उद्योगों में स्थानांतरित करके दस वर्षों में राष्ट्रीय आय को दोगुना करने का सुझाव दिया।
  • 1938 में, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अधिवेशन में जवाहरलाल नेहरू की अध्यक्षता में राष्ट्रीय योजना समिति का गठन किया गया।
    • इस समिति की रिपोर्ट ही भारत में आर्थिक नियोजन का आधार बनी।
  • योजना आयोग : स्थापना 15 मार्च 1950; प्रधानमंत्री इसके पदेन अध्यक्ष होते हैं।
    • इसकी स्थापना के. सी. नियोगी के नेतृत्व वाले योजना सलाहकार बोर्ड (1946) की सिफारिशों पर की गई थी।
    • नेहरू के अलावा वी. टी. कृष्णमाचारी, सी. डी. देशमुख, जे. सी. घोष और के. सी. नियोगी इसके प्रमुख सदस्य थे।
    • प्रथम पंचवर्षीय योजना के दौरान कार्य विभाजन:
      • वी. टी. कृष्णमाचारी: कृषि, सिंचाई और ऊर्जा।
      • जे. सी. घोष: शिक्षा, समाज कल्याण और सामुदायिक विकास।
      • के. सी. नियोगी: उद्योग, वाणिज्य और परिवहन।
      • सी. डी. देशमुख: वित्तीय प्रबंधन।
  • राष्ट्रीय विकास परिषद (NDC): स्थापना 6 अगस्त 1952।
  • जनवरी 1955 के कांग्रेस अवाडी अधिवेशन में, नेहरू ने भारत में एक समाजवादी समाज की स्थापना का लक्ष्य घोषित किया।
  • नेहरू ने लोकतांत्रिक समाजवाद की वकालत की। उनके समाजवादी विचार उनकी पुस्तक ‘व्हिदर इंडिया’ (Whither India) में व्यक्त किए गए हैं।

पंचवर्षीय योजनाएँ:

प्रथम योजना (1951–56):

  • प्रथम पंचवर्षीय योजना का मुख्य उद्देश्य अर्थव्यवस्था के विभिन्न क्षेत्रों के बीच संतुलन स्थापित करते हुए देश को विकास के पथ पर अग्रसर करना था।
  • इसमें कृषि, सिंचाई और ऊर्जा (बिजली) को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई। सिंचाई और विद्युत उत्पादन के लिए बांध निर्माण पर विशेष बल दिया गया।
  • इस दौरान लौह एवं इस्पात उद्योग, रसायन उद्योग और विद्युत उपकरण फर्मों की स्थापना की गई।
  • शिक्षा, तकनीकी प्रशिक्षण और स्वास्थ्य जैसे सामाजिक क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया गया।
  • नेहरू ने बड़े बांधों को “आधुनिक भारत के मंदिर” के रूप में वर्णित किया।
    • इस योजना के तहत भाखड़ा नांगल, हीराकुंड और दामोदर घाटी जैसी प्रमुख बहुउद्देशीय सिंचाई परियोजनाओं की शुरुआत की गई।
  • उच्च शिक्षा को मजबूत करने के लिए 1956 में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) की स्थापना की गई।
संस्थानस्थापना / उद्घाटन का विवरण
केंद्रीय विद्युत रासायनिक अनुसंधान संस्थान (CECRI), कराइकुडीजनवरी 1953 में CSIR प्रयोगशाला के रूप में स्थापित
केंद्रीय औषधि अनुसंधान संस्थान (CDRI), लखनऊ17 फरवरी 1951 को जवाहरलाल नेहरू द्वारा उद्घाटन किया गया
केंद्रीय खाद्य प्रौद्योगिकी अनुसंधान संस्थान (CFTRI), मैसूर1950 में CSIR के तहत स्थापित
केंद्रीय कांच और सिरेमिक अनुसंधान संस्थान, कोलकाताऔपचारिक रूप से 26 जनवरी 1950 को उद्घाटन किया गया
केंद्रीय चर्म अनुसंधान संस्थान, चेन्नई24 अप्रैल 1948 को स्थापित
राष्ट्रीय रासायनिक प्रयोगशाला (NCL)रासायनिक अनुसंधान के लिए 1950 में स्थापित
राष्ट्रीय धातुकर्म प्रयोगशाला, जमशेदपुर26 नवंबर 1950 को जवाहरलाल नेहरू द्वारा उद्घाटन किया गया
राष्ट्रीय भौतिकी प्रयोगशाला (NPL), दिल्लीजनवरी 1947 में नींव रखी गई, 21 जनवरी 1950 को सरदार वल्लभभाई पटेल द्वारा उद्घाटन किया गया
भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL), बैंगलोर1954 में स्थापित
हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड, विशाखापत्तनम1941, विशाखापत्तनम में स्थापित

द्वितीय योजना

  • अप्रैल 1954 में योजना के शुभारंभ से पहले, योजना आयोग ने राज्य सरकारों से जिला और ग्राम स्तर की योजनाएँ तैयार करने का आग्रह किया।
    • स्थानीय स्तर पर इन योजनाओं को तैयार करने का मुख्य कारण प्रत्येक क्षेत्र की भिन्न आवश्यकताएँ, भौगोलिक संरचना और विकास का स्तर था।
    • इस प्रकार, योजना में आम नागरिकों को शामिल करने का एक सफल प्रयास किया गया।
  • इसके उद्देश्य निम्नलिखित थे:
    • प्रथम योजना में स्थापित संस्थानों और उनमें किए गए शोध कार्यों को भारत के विकास में उपयोग के लिए विकसित करना।
    • औद्योगिक और तकनीकी विकास को प्राथमिकता देना।
    • राष्ट्रीय आय में वृद्धि करना ताकि नागरिकों के जीवन स्तर को सुधारा जा सके।
    • रोजगार के अवसरों में वृद्धि करना।
    • आय और धन के वितरण में व्याप्त असमानता को कम करना।
  • भारी उद्योग, समाजवादी ढांचा (पी.सी. महालनोबिस मॉडल)।
  • महालनोबिस ने कृषि और संबद्ध क्षेत्रों को समर्थन देने के लिए आधारभूत और भारी उद्योगों की स्थापना पर बल दिया।
  • 1956 में एक नई औद्योगिक नीति की घोषणा की गई। 
  • राष्ट्रीय आय में 10 प्रतिशत की वृद्धि हुई।
संस्थान / परियोजनास्थापना का विवरण
भिलाई इस्पात संयंत्र1955 में सोवियत संघ (USSR) की सहायता से स्थापित
तेल एवं प्राकृतिक गैस आयोग (ONGC)तेल और गैस अन्वेषण के लिए 14 अगस्त 1956 को स्थापित
भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (BHEL)1956 में भारी इलेक्ट्रिकल (बिजली) उपकरणों के निर्माण के लिए सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम के रूप में स्थापित, बाद में 1964 में भेल (BHEL) नाम दिया गया
हिंदुस्तान टेलीप्रिंटर्स लिमिटेडसंचार उपकरणों के निर्माण के लिए 1960 में चेन्नई में निगमित 

तृतीय योजना: 1961-1966

  • इस योजना के मुख्य उद्देश्य निम्नलिखित थे:
    • राष्ट्रीय आय में प्रति वर्ष 5 प्रतिशत की वृद्धि करना।
    • खाद्यान्न उत्पादन में आत्मनिर्भरता प्राप्त करना और उद्योगों की आपूर्ति तथा निर्यात के लिए कृषि उत्पादों में वृद्धि करना।
    • बुनियादी उद्योगों को विकसित करना ताकि 10 वर्षों में आंतरिक संसाधनों से देश की औद्योगिक जरूरतों को पूरा किया जा सके;
    • रोजगार के अवसरों में वृद्धि करना;
  • इसका प्रारंभिक ढांचा मार्च 1960 में राष्ट्रीय विकास परिषद (NDC) की बैठक में प्रस्तुत किया गया था।
  • विभिन्न बाधाओं (जैसे 1962 और 1965 के युद्ध और अकाल) के बावजूद, इस अवधि के दौरान राष्ट्रीय आय में 13.8% और प्रति व्यक्ति आय में 5.3% की वृद्धि दर्ज की गई।
सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम / संस्थानतीसरी पंचवर्षीय योजना के दौरान स्थिति
खनिज एवं धातु व्यापार निगम (MMTC)1963 में स्थापित
भारतीय यूनिट ट्रस्ट (UTI)1964 में स्थापित
राष्ट्रीय बीज निगम लिमिटेड (NSC)1963 में स्थापित
भारतीय खाद्य निगम (FCI)1965 में स्थापित
हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL)1940 में स्थापित, लेकिन बाद में विस्तार और सुदृढ़ीकरण किया गया
भारतीय सीमेंट निगम1965 में स्थापित
हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड1966 में स्थापित
भारतीय औद्योगिक विकास बैंक (IDBI)1964 में स्थापित 
सांभर साल्ट्स लिमिटेड1964 में स्थापित
  • तृतीय योजना के तहत क्षेत्र-वार आवंटन:
    • उद्योग, खनिज, परिवहन और संचार: इन क्षेत्रों के लिए कुल परिव्यय का 20-20% आवंटित किया गया।
    • सामाजिक सेवाएँ और विविध क्षेत्र: इनके लिए लगभग 17% बजट निर्धारित किया गया।
    • कृषि और सामुदायिक सेवाएँ: इनके लिए लगभग 14% आवंटन किया गया।
  • 1962 और 1965 के युद्धों तथा 1965-66 के भीषण सूखे ने योजना के लक्ष्यों को प्रतिकूल रूप से प्रभावित किया।
  • आर्थिक कठिनाइयों और रुपये के अवमूल्यन (1966) के कारण चौथी योजना को स्थगित करना पड़ा। 
  • 1966-1969 की अवधि को “योजनावकाश” (Plan Holiday) के रूप में जाना जाता है, जिसमें पंचवर्षीय योजना के स्थान पर वार्षिक योजनाएँ लागू की गईं।

चौथी पंचवर्षीय योजना (1969-1974)

  • स्थिरता के साथ विकास, आत्मनिर्भरता, सामाजिक न्याय और समानता पर केंद्रित।
  • परिवार नियोजन कार्यक्रमों का कार्यान्वयन।

पाँचवीं पंचवर्षीय योजना (1974-79)

  • यह डी.पी. धर मॉडल (उच्च विकास मॉडल) पर आधारित थी।
  • आत्मनिर्भरता और गरीबी उन्मूलन के साथ-साथ मुद्रास्फीति नियंत्रण का लक्ष्य।
  • पाँचवीं पंचवर्षीय योजना के दौरान गरीबी उन्मूलन को एक प्रमुख उद्देश्य के रूप में स्वीकार किया गया था।
  • 1971 के लोकसभा चुनावों के दौरान कांग्रेस पार्टी द्वारा “गरीबी हटाओ” का नारा दिया गया था।
  • 1977 में सत्ता परिवर्तन के बाद जनता पार्टी सरकार ने इस योजना को एक वर्ष पहले ही 1978 में समाप्त कर दिया।
  • इसके पश्चात 1978-80 के दौरान दो वार्षिक योजनाएँ (जिन्हें अक्सर ‘रोलिंग प्लान’ के नाम से जाना जाता है) लागू की गईं।

छठी पंचवर्षीय योजना (1980-1985)

  • आर्थिक उदारीकरण, गरीबी उन्मूलन और तकनीकी आत्मनिर्भरता पर केंद्रित।
  • यह योजना अत्यंत सफल रही, जिसमें 5.2% के लक्ष्य के विरुद्ध 5.7% की वास्तविक विकास दर दर्ज की गई।

सातवीं पंचवर्षीय योजना (1985-1990)

  • प्राथमिक लक्ष्य: खाद्यान्न उत्पादन में वृद्धि करना, रोजगार के अवसर पैदा करना और आर्थिक उत्पादकता में सुधार करना।

आठवीं पंचवर्षीय योजना (अप्रैल 1992 – 1997)

  • राजनीतिक और अंतर्राष्ट्रीय अस्थिरता के कारण यह योजना देरी से शुरू हुई। यह आर्थिक सुधारों (LPG) के दौर की पहली योजना थी।
  • प्राथमिकता: इस योजना में मानव विकास, बुनियादी शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार पर विशेष बल दिया गया।

नौवीं पंचवर्षीय योजना (1997–2002)

  • वैश्वीकरण के दौर में उत्पादक रोजगार, बुनियादी ढांचा और संतुलित क्षेत्रीय विकास पर ध्यान केंद्रित किया गया।
  • बैंकों का राष्ट्रीयकरण –
    • बैंकिंग कंपनियां (उपक्रमों का अधिग्रहण और हस्तांतरण) अध्यादेश, 1969 जारी किया गया।
    • 19 जुलाई 1969 को 14 प्रमुख वाणिज्यिक बैंकों का राष्ट्रीयकरण किया गया।
    • 1980 में, छह अतिरिक्त बैंकों का राष्ट्रीयकरण किया गया जिनमें आंध्रा बैंक, कॉर्पोरेशन बैंक, न्यू बैंक ऑफ इंडिया, ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स, पंजाब एंड सिंध बैंक और विजया बैंक शामिल थे।
  • भूमि सुधार –
    • स्वतंत्र भारत की सरकार द्वारा उठाए गए सबसे पहले महत्वपूर्ण कदमों में से एक भूमि सुधार था।
    • इसका प्राथमिक उद्देश्य सामंती शोषण को समाप्त करने के लिए जमींदारी प्रथा का उन्मूलन करना था।
    • भारतीय संविधान के तहत भूमि सुधार एक राज्य सूची का विषय है, इसलिए प्रत्येक राज्य को अपने स्वयं के कानून बनाने थे।
    • कई राज्यों ने भूमि सुधार कानून बनाए, जिनमें ज़मींदारी उन्मूलन अधिनियम (1961) और भूमि जोत सीमा निर्धारण अधिनियम (Land Ceiling Acts) जैसे प्रमुख कानून देशभर में लागू किए गए।
    • व्यवहार में, भूमि के निरंतर कानूनी और अवैध हस्तांतरण के कारण ये कानून अप्रभावी साबित हुए।
    • 1970 में इस मुद्दे पर फिर से जोर दिया गया। 1972 में राज्यों के साथ परामर्श के बाद, ‘भूमि जोत सीमा निर्धारण अधिनियम’ को पुनर्गठित करने का निर्णय लिया गया।
    • स्वतंत्रता के बाद भूमि सुधार दो मुख्य चरणों में विकसित हुए।
  • प्रथम चरण: स्वतंत्रता से 1960 के दशक की शुरुआत तक
    • यह चरण जमींदारों और जागीरदारों जैसे मध्यस्थों/बिचौलियों को समाप्त करने पर केंद्रित था।
    • इस चरण को “संस्थागत सुधारों का युग” कहा जाता है।
    • काश्तकारों को स्वामित्व का अधिकार दिया गया, भूमि स्वामित्व पर अधिकतम सीमा लागू की गई, और सहकारी खेती तथा सामुदायिक विकास कार्यक्रमों को बढ़ावा दिया गया।
  • द्वितीय चरण: 1960 के दशक के मध्य से अंत तक
    • यह चरण हरित क्रांति के साथ शुरू हुआ।
    • इस चरण को “तकनीकी सुधारों का युग” कहा जाता है।
  • क्रमिक पंचवर्षीय योजनाओं में निरंतर भूमि सुधारों पर जोर दिया गया। प्रथम पंचवर्षीय योजना में वास्तविक जोतदार को भूमि का स्वामी बनाने पर बल दिया गया।
    • इसमें मध्यस्थों के उन्मूलन, लगान (Land revenue) में कमी और काश्तकारों को मालिकाना हक देने पर बल दिया गया।
    • विखण्डित (बिखरी हुई) जोतों की चकबंदी को बढ़ावा दिया गया।
  • सफलता: 1956 तक, अधिकांश राज्यों में जमींदारी उन्मूलन अधिनियम पारित कर दिए गए थे। प्रथम और द्वितीय पंचवर्षीय योजनाओं के दौरान, जमींदार, जागीरदार और अन्य लगान वसूलने वाले बिचौलियों को समाप्त कर दिया गया था।
  • पंडित जवाहरलाल नेहरू के नेतृत्व में एक समिति ने भूमि जोत पर अधिकतम सीमा तय करने की सिफारिश की।
    • यह सुझाव दिया गया कि निश्चित सीमा से अधिक भूमि का अधिग्रहण राज्य द्वारा किया जाना चाहिए और अतिरिक्त भूमि को ग्राम सहकारी समितियों को सौंप दिया जाना चाहिए।
  • जे.सी. कुमारप्पा की अध्यक्षता वाली कांग्रेस कृषि सुधार समिति ने जुलाई 1949 में अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की।
    • समिति ने भूमि जोत सीमा की नीति का समर्थन किया।
    • कृषि योग्य भूमि की अधिकतम सीमा एक ‘आर्थिक जोत’ (परिवार के भरण-पोषण के लिए आवश्यक न्यूनतम भूमि) की तुलना में 3 गुना निर्धारित की जाए।
  • प्रथम और द्वितीय पंचवर्षीय योजनाओं के दौरान भूमि प्रबंधन सुधारों पर जोर दिया गया।
  • सहकारी आंदोलन का सबसे सफल प्रयोग गुजरात के खेड़ा जिले में जमीनी स्तर पर शुरू हुआ (जिसने बाद में ‘अमूल’ और श्वेत क्रांति की आधारशिला रखी)।

भूदान आंदोलन –

  • इस आंदोलन का नेतृत्व 1950 के दशक की शुरुआत में आचार्य विनोबा भावे ने किया था।
  • विनोबा भावे ने सर्वोदय समाज की स्थापना की थी।
  • विनोबा भावे और उनके अनुयायियों ने गाँव-गाँव की पदयात्रा की और भूस्वामियों से अपनी भूमि का कम से कम छठा हिस्सा (1/6) दान करने की अपील की।
  • दान में दी गई भूमि, जिसे “भूदान” कहा गया, का उद्देश्य भूमिहीन और निर्धन किसानों को संसाधन उपलब्ध कराना था।
  • इस आंदोलन का लक्ष्य 5 करोड़ एकड़ भूमि एकत्र करना था।
  • जयप्रकाश नारायण जैसे नेता इस आंदोलन में शामिल हुए।
  • भूमि का पहला दान 18 अप्रैल 1951 को आंध्र प्रदेश के तेलंगाना क्षेत्र के पोचमपल्ली गांव में प्राप्त हुआ था।
  • 1955 के अंत तक, यह आंदोलन एक नए चरण में विकसित हुआ जिसे “ग्रामदान” कहा गया।
  • ग्रामदान गाँवों में भूमि पर सामूहिक स्वामित्व (Collective Ownership) और समान अधिकारों की प्रथा अपनाई गई।
  • ग्रामदान आंदोलन की शुरुआत ओडिशा में हुई और वहाँ इसे महत्वपूर्ण सफलता प्राप्त हुई।
  • नोट
  • ग्रामीण क्षेत्र के विकास के लिए 1982 में नाबार्ड (NABARD) की स्थापना की गई थी।
    • नाबार्ड की स्थापना शिवरामन समिति की सिफारिश पर की गई थी।
वर्ष/अवधिकार्यक्रम / नीतिमुख्य विशेषताएं / उद्देश्य
1973–74सूखा प्रवण क्षेत्र कार्यक्रम (DPAP)मृदा संरक्षण, जल संसाधन विकास, भूमि और वन विकास के माध्यम से सूखा प्रवण क्षेत्रों की अर्थव्यवस्था में सुधार
1974–78न्यूनतम आवश्यकता कार्यक्रम (MNP)बुनियादी जरूरतों को पूरा करने और जीवन स्तर में सुधार के लिए पाँचवीं पंचवर्षीय योजना में शुरू किया गया
1975बीस सूत्री कार्यक्रमगरीबी उन्मूलन और गरीब एवं वंचित वर्गों के जीवन की गुणवत्ता में सुधार; रोजगार, शिक्षा, आवास, स्वास्थ्य, कृषि, भूमि सुधार, सिंचाई, पेयजल, कमजोर वर्गों का संरक्षण।
1978–79एकीकृत ग्रामीण विकास कार्यक्रम (IRDP)स्वरोजगार पर आधारित प्रमुख गरीबी उन्मूलन कार्यक्रम।
1979ग्रामीण युवाओं को स्वरोजगार के लिए प्रशिक्षण (TRYSEM)ग्रामीण बेरोजगार युवाओं (18-35 वर्ष) के लिए कौशल और उद्यमिता प्रशिक्षण
1980राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार कार्यक्रम (NREP)सामाजिक वानिकी, वृक्षारोपण, तालाब, सिंचाई, कुएं, स्कूल और पंचायत भवनों के माध्यम से मजदूरी रोजगार।
1982–83ग्रामीण क्षेत्रों में महिला एवं बाल विकास (DWCRA)गरीबी रेखा से नीचे की ग्रामीण महिलाओं के लिए आय-सृजन गतिविधियों हेतु IRDP की उप-योजना
1983ग्रामीण भूमिहीन रोजगार गारंटी कार्यक्रम (RLEGP)सामाजिक वानिकी, वृक्षारोपण, ग्रामीण सड़कों और स्कूल भवनों के माध्यम से रोजगार
1985इंदिरा आवास योजना (IAY)अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और मुक्त कराए गए बंधुआ मजदूरों को मुफ्त आवास के लिए RLEGP की उप-योजना
1989 (1 अप्रैल)NREP और RLEGP का विलयजवाहर रोजगार योजना (JRY) का गठन
1989–90JRY के तहत IAYइन्दिरा आवास योजना, जवाहर रोजगार योजना का हिस्सा बनी।
1992ग्रामीण कारीगरों को उन्नत टूलकिट की आपूर्ति (SITRA)ग्रामीण कारीगरों को आधुनिक उपकरण प्रदान करने वाली IRDP की उप-योजना
1993 (2 अक्टूबर)रोजगार आश्वासन योजना (EAS)पिछड़े, सूखा प्रवण, रेगिस्तानी, जनजातीय और पहाड़ी क्षेत्रों में मजदूरी रोजगार
1996इंदिरा आवास योजना (स्वतंत्र)IAY को JRY से अलग कर एक स्वतंत्र योजना बनाया गया
1997 (दिसंबर)स्वर्ण जयंती शहरी रोजगार योजना (SJSRY)पूर्ववर्ती योजनाओं (शहरी स्वरोजगार कार्यक्रम और शहरी मजदूरी रोजगार कार्यक्रम) को मिलाकर शहरी गरीबी उन्मूलन योजना
1999 (1 अप्रैल)जवाहर ग्राम समृद्धि योजना (JGSY)JRY का पुनर्गठन; ग्रामीण सामुदायिक संपत्तियों के निर्माण पर ध्यान केंद्रित।
1999 (1 अप्रैल)स्वर्ण जयंती ग्राम स्वरोजगार योजना (SGSY)IRDP, TRYSEM, DWCRA, MWS (मिलियन वेल्स स्कीम), SITRA और GKY का इसमें विलय कर दिया गया।
1999गंगा कल्याण योजना (GKY)गरीबी रेखा से नीचे के छोटे और सीमांत किसानों के लिए सिंचाई सुविधाएं
2000अंत्योदय अन्न योजना (AAY)निर्धनतम परिवारों के लिए खाद्य सुरक्षा; गेहूँ ₹2/किलो, चावल ₹3/किलो। प्रारंभ में 1 करोड़ परिवारों को लक्षित किया गया।
2000–01प्रधानमंत्री ग्रामोदय योजना (PMGY)स्वास्थ्य, शिक्षा, पेयजल, आवास और ग्रामीण सड़कों पर ध्यान केंद्रित।

विज्ञान और प्रौद्योगिकी क्षेत्र में विकास

  • प्रधानमंत्री वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद (CSIR) के अध्यक्ष बने।
  • मार्च 1958 में लोकसभा द्वारा विज्ञान नीति पारित की गई।
  • 1948 में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस (राष्ट्रीय विज्ञान संस्थान) की स्थापना।
  • परमाणु ऊर्जा –
    • 1948 में होमी जे. भाभा के नेतृत्व में परमाणु ऊर्जा आयोग की स्थापना की गई।
    • डॉ. होमी जे. भाभा परमाणु ऊर्जा आयोग के पहले अध्यक्ष बने।
    • 1948 में परमाणु ऊर्जा अधिनियम पारित किया गया।
    • 1954 में परमाणु ऊर्जा विभाग का गठन किया गया, डॉ. होमी जहांगीर भाभा इसके सचिव बने।
    • भारत का प्रधानमंत्री सीधे परमाणु ऊर्जा विभाग का पर्यवेक्षण करता है।
    • भारत का पहला परमाणु रिएक्टर ‘अप्सरा’ अगस्त 1956 में बॉम्बे (मुंबई) में चालू हुआ। यह न केवल भारत का, बल्कि एशिया का भी पहला परमाणु रिएक्टर था।

अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी –

  • 1962 में, डॉ. होमी जहांगीर भाभा ने ‘भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष अनुसंधान समिति’ (INCOSPAR) का गठन किया। यह परमाणु ऊर्जा विभाग के अंतर्गत कार्य करता था।
    • INCOSPAR की अध्यक्षता डॉ. विक्रम साराभाई ने की।
    • INCOSPAR ने ऊपरी वायुमंडलीय अनुसंधान के लिए तिरुवनंतपुरम में ‘थुम्बा भूमध्यरेखीय रॉकेट प्रक्षेपण केंद्र’ (TERLS) की स्थापना की।
  • भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) की स्थापना 1969 में हुई।
  • जून 1972 में ‘अंतरिक्ष विभाग’ का गठन किया गया।
  • सैटेलाइट इंस्ट्रक्शनल टेलीविजन एक्सपेरिमेंट (SITE) 1975-76 के दौरान संचालित किया गया था।
    • इसे 1975-76 के दौरान ‘दुनिया का सबसे बड़ा समाजशास्त्रीय प्रयोग’ माना गया, जिससे छह राज्यों के 2400 गांवों को लाभ हुआ।
    • SITE ने कार्यक्रमों के प्रसारण के लिए अमेरिकी ‘टेक्नोलॉजी सैटलाइट’ (ATS-6) का उपयोग किया।
  • ‘सैटलाइट टेलीकम्युनिकेशन एक्सपेरिमेंट्स प्रोजेक्ट’ (STEP) 1977-79 के दौरान संचालित किया गया था।
    • STEP, इसरो और डाक एवं तार विभाग की एक संयुक्त परियोजना थी।
    • STEP ने फ्रेंको-जर्मन सिम्फनी उपग्रह का उपयोग किया।
  • 1984 में राकेश शर्मा अंतरिक्ष की यात्रा करने वाले पहले भारतीय बने।
  • SITE के बाद खेड़ा संचार परियोजना (KCP) शुरू हुई, जिसने गुजरात के खेड़ा जिले में आवश्यकता-आधारित और स्थानीय-विशिष्ट कार्यक्रम प्रसारण के लिए एक फील्ड प्रयोगशाला के रूप में कार्य किया।
    • 1984 में ग्रामीण संचार दक्षता के लिए KCP को यूनेस्को-IPDC (संचार के विकास के लिए अंतर्राष्ट्रीय कार्यक्रम) पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।
  • भारत का पहला उपग्रह ‘आर्यभट्ट’ इसी अवधि में विकसित किया गया और सोवियत प्रक्षेपक की सहायता से प्रक्षेपित किया गया।
  • SLV-3 ने 1980 में अपनी पहली सफल उड़ान भरी।
  • ‘एरियन पैसेंजर पेलोड एक्सपेरिमेंट’ (APPLE) भविष्य की संचार उपग्रह प्रणालियों का अग्रदूत बना।

परमाणु परीक्षण

  • 1972 में, भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (BARC) की अपनी यात्रा के दौरान इन्दिरा गांधी ने परमाणु उपकरण बनाने की मौखिक अनुमति दी थी।
  • भारत के पहले परमाणु परीक्षण को ‘पोखरण-I’ के नाम से जाना जाता है।
  • पोखरण-I परीक्षण 18 मई 1974 को आयोजित किया गया था।
  • इस परीक्षण का कोड नेम “स्माइलिंग बुद्धा” था।
  • इस परमाणु परीक्षण में विखंडनीय सामग्री के रूप में प्लूटोनियम का उपयोग किया गया था।
  • यह परीक्षण जैसलमेर (राजस्थान) स्थित पोखरण सैन्य परीक्षण रेंज में आयोजित किया गया था।
  • इस परीक्षण की सफलता में होमी सेठना और राजा रमन्ना ने निर्णायक भूमिका निभाई।
  • होमी एन. सेठना परमाणु ऊर्जा आयोग के अध्यक्ष थे।
  • एक केमिकल इंजीनियर के रूप में, उन्होंने ‘प्लूटोनियम-ग्रेड’ हथियारों को विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
  • डॉ. राजा रमन्ना भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र के निदेशक थे।
  • वे परमाणु उपकरण के डिजाइन और निर्माण के लिए मुख्य रूप से उत्तरदायी थे।
  • पोखरण-I के साथ भारत, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के पाँच स्थायी सदस्यों के अलावा परमाणु परीक्षण करने वाला विश्व का पहला देश बन गया।

हरित क्रांति –

  • एम.एस. स्वामीनाथन को भारत में हरित क्रांति के अग्रदूत के रूप में जाना जाता है।
  • 1960-61 में ‘गहन कृषि जिला कार्यक्रम’ (IADP) शुरू किया गया था।
    • प्रारंभ में, इस कार्यक्रम में 3 जिले शामिल थे और बाद में 1962-63 तक इसका विस्तार 7 जिलों तक कर दिया गया।
      • राजस्थान का पाली जिला इन चयनित जिलों में से एक था।
    • इस कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को ऋण, बीज, उर्वरक और उपकरण प्रदान करना था।
    • इस कार्यक्रम के तहत गहन खेती के लिए बुनियादी ढांचे का विकास किया गया।
  • भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) का पुनर्गठन किया गया।
    • पहली बार किसी वैज्ञानिक, डॉ. बी.पी. पाल को ICAR का प्रमुख नियुक्त किया गया।
  • इस दौरान निम्नलिखित संस्थागत ढांचा भी तैयार किया गया:
    • जनवरी 1965 में कृषि मूल्य आयोग की स्थापना की गई।
    • जनवरी 1965 में ही भारतीय खाद्य निगम की स्थापना हुई।
    • इस अवधि के दौरान राष्ट्रीय बीज निगम की स्थापना की गई।
    • भंडारण और वितरण में सहायता के लिए केंद्रीय भंडारण निगम की स्थापना की गई।
  • भारत में हरित क्रांति की शुरुआत 1966-67 के दौरान हुई।
    • प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री ने हरित क्रांति को बढ़ावा देने में प्रमुख भूमिका निभाई।
    • उनके बाद इन्दिरा गांधी ने इन कृषि सुधारों को निरंतरता प्रदान की और इन्हें और अधिक सुदृढ़ बनाया।
    • तत्कालीन कृषि मंत्री चिदंबरम सुब्रमण्यम ने नीति निर्माण और उनके सफल क्रियान्वयन में निर्णायक भूमिका निभाई।
    • मैक्सिको से गेहूँ के उन्नत किस्म के बीज (HYV seeds) आयात किए गए थे।
    • इस सफलता का श्रेय वैश्विक स्तर पर नोबेल पुरस्कार विजेता अमेरिकी वैज्ञानिक नॉर्मन अर्नेस्ट बोरलॉग और भारत में एम.एस. स्वामीनाथन को जाता है।
‘फूड फॉर पीस’ कार्यक्रम 
  • अमेरिका में 1954 में ‘कृषि व्यापार विकास और सहायता अधिनियम’ पारित किया गया था।
  • इस अधिनियम को लोकप्रिय रूप से PL-480 के नाम से जाना जाता है।
  • PL-480 ने अमेरिका के अधिशेष खाद्यान्न को मित्र देशों को रियायती शर्तों पर भेजने की अनुमति दी।
  • भारत ने 1956 में PL-480 के तहत खाद्यान्न आयात करना शुरू किया।
  • 1965 के भारत-पाक युद्ध के दौरान, अमेरिकी राष्ट्रपति लिंडन बी. जॉनसन ने PL-480 समझौते के तहत गेहूं की आपूर्ति रोकने की धमकी दी थी।
  • शास्त्री जी ने नागरिकों से सप्ताह में एक समय का भोजन स्वेच्छा से त्यागने की अपील की थी।

श्वेत क्रांति

  • दूध के उत्पादन में तीव्र वृद्धि को श्वेत क्रांति के रूप में जाना जाता है।
  • डॉ. वर्गीज कुरियन को भारत में श्वेत क्रांति के जनक के रूप में जाना जाता है।

डॉ. वर्गीज कुरियन –

  • वर्ष 1949 में, त्रिभुवन दास पटेल के अनुरोध पर उन्होंने ‘खेड़ा जिला सहकारी दुग्ध उत्पादक लिमिटेड’ का कार्यभार संभाला।
  • इस डेयरी की स्थापना सरदार वल्लभभाई पटेल की पहल पर की गई थी।
  • बाद में सरदार पटेल के सुझाव पर कुरियन ने डेयरी को एक प्रसंस्करण उद्योग (Processing Industry) के रूप में विकसित किया, जिसके परिणामस्वरूप ‘अमूल’ का जन्म हुआ।
  • डॉ. वर्गीज कुरियन ने गुजरात के आणंद में एक छोटे से गैरेज से अमूल की शुरुआत की थी।
  • कुरियन ने त्रिभुवन दास पटेल की मदद से खेड़ा जिला सहकारी समिति की भी स्थापना की।
  • 1962 में, डॉ. कुरियन ने गुजरात में डेयरी सहकारी संघ की स्थापना की।
  • डॉ. कुरियन भैंस के दूध से मिल्क पाउडर बनाने वाले दुनिया के पहले व्यक्ति थे।
  • डॉ. कुरियन को 1965 में पद्मश्री, 1966 में पद्म भूषण और 1999 में पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया था।
  • उन्हें 1963 में सामुदायिक नेतृत्व के लिए रेमन मैग्सेसे पुरस्कार मिला।
  • उन्हें 1989 में विश्व खाद्य पुरस्कार से सम्मानित किया गया। उन्हें 1986 में कृषि रत्न पुरस्कार प्राप्त हुआ।
  • अमूल की व्यापक सफलता के बाद, लाल बहादुर शास्त्री ने अमूल के मॉडल को अन्य जगहों पर लागू करने का निर्णय लिया।
    • लाल बहादुर शास्त्री ने इसी उद्देश्य के लिए 1965 में राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (NDDB) की स्थापना की।
      • डॉ. वर्गीज कुरियन को NDDB का पहला अध्यक्ष नियुक्त किया गया था।
      • डॉ. कुरियन ने 1965 से 1998 तक NDDB के अध्यक्ष के रूप में कार्य किया।
      • श्वेत क्रांति को गति देने के लिए, राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड ने 1970 में ‘ऑपरेशन फ्लड’ शुरू किया।
      • ऑपरेशन फ्लड का प्रस्ताव डॉ. वर्गीज कुरियन द्वारा दिया गया था और इसका नेतृत्व भी उन्होंने ही किया।
    • NDDB ने अमूल के अनुभव को देश भर में दोहराने के लिए “दुग्ध धारा अभियान” (Milk River Campaign) शुरू किया।
    • राष्ट्रीय डेयरी योजना 15 साल की एक केंद्रीय क्षेत्र की योजना है, जिसका उद्देश्य मवेशियों की दुग्ध उत्पादन क्षमता बढ़ाना और दुधारू पशुओं की नस्ल में सुधार करना है।
    • राष्ट्रीय डेयरी योजना का प्रथम चरण 2011-12 से 2018-19 की अवधि तक चला।
  • शिक्षा:
    • 1948-49: डॉ. एस. राधाकृष्णन की अध्यक्षता में भारतीय विश्वविद्यालय शिक्षा आयोग का गठन।
    • 1953: विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) की स्थापना; 1956 में यूजीसी अधिनियम पारित किया गया।
    • 1952: माध्यमिक शिक्षा में सुधार के लिए मुदलियार आयोग।
    • 1961: स्कूली शिक्षा और पाठ्यक्रम में सहायता के लिए NCERT की स्थापना।
    • 1964 में सैनिक स्कूलों की स्थापना की गई थी।
    • 1962 से केंद्रीय विद्यालयों की स्थापना की गई थी।
संस्थागत निर्माण
भारतीय विज्ञान संस्थान
विवरणजानकारी
स्थानबेंगलुरु
स्थापना1909 ई.
संस्थापकजमशेदजी टाटा
प्रथम भारतीय निदेशकसर सी. वी. रमन

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IITs)

संस्थानवर्ष / विवरणविशेष तथ्य
IIT खड़गपुर1951 में अनौपचारिक रूप से उद्घाटन; मार्च 1952 में आधारशिला रखी गईभारत का पहला IIT; मौलाना अबुल कलाम आजाद द्वारा उद्घाटन किया गया; जवाहरलाल नेहरू द्वारा आधारशिला रखी गई
IIT बॉम्बे1958 में शुरू हुआविदेशी सहायता (सोवियत संघ) से स्थापित भारत का पहला संस्थान
IIT कानपुरनवंबर 1959
IIT मद्रास1959जर्मन सहयोग से स्थापित
IIT दिल्ली1963

नोट:

  • MIT (अमेरिका) के मॉडल पर 1952 में पांच IIT की आधारशिला रखी गई थी।
  • संसद के अधिनियमों द्वारा सभी IIT को ‘राष्ट्रीय महत्व के संस्थान’ घोषित किया गया।

नेहरू युग के दौरान संस्थागत विकास

क्र. सं.संस्थानस्थापना वर्षमुख्यालय
1हिंदुस्तान मशीन टूल्स (HMT)फरवरी 1953बेंगलुरु
2इंटीग्रल कोच फैक्ट्री (ICF)अक्टूबर 1955चेन्नई
3राष्ट्रीय कोयला विकास निगम (NCDC)1956रांची

नेहरू युग के इस्पात संयंत्र 

इस्पात संयंत्रवर्षविदेशी सहयोगस्थान
बोकारो इस्पात संयंत्र1964सोवियत संघझारखंड
दुर्गापुर इस्पात संयंत्र1959ग्रेट ब्रिटेनदुर्गापुर (पश्चिम बंगाल)
राउरकेला इस्पात संयंत्र1959जर्मनीराउरकेला (ओडिशा)

अन्य महत्वपूर्ण व्यक्तित्व

वी.ओ. चिदंबरम पिल्लई
  • तूतीकोरिन कोरल मिल हड़ताल का आयोजन किया।
  • स्वदेशी स्टीम नेविगेशन कंपनी (तूतीकोरिन) की स्थापना की।
सरला देवी घोषाल (चौधरानी)
  • रवींद्रनाथ टैगोर की भतीजी।
  • कलकत्ता विश्वविद्यालय की पहली महिला टॉपर।
  • ‘पद्मावती स्वर्ण पदक’ विजेता।
  • एक भूमिगत क्रांतिकारी समूह की स्थापना की।
  • ‘भारत स्त्री महामंडल’ की स्थापना की।
  • आत्मकथा: ‘जीबनेर झोरा पाता’ (Jiboner Jhora Pata)।
बसंती देवी
  • सी.आर. दास की पत्नी।
  • गिरफ्तारी देने वाली शुरुआती महिलाओं में से एक (1921)।
मातंगिनी हाजरा
  • 73 वर्षीय किसान महिला।
  • 29 सितंबर 1942 को राष्ट्रीय ध्वज फहराते समय अंग्रेजों की गोली लगने से वे शहीद हो गईं।
सखाराम गणेश देउसकर
  • ‘देशेर कथा’ के लेखक।
  • दादाभाई नौरोजी और आर.सी. दत्त से प्रभावित।
  • 1910 में पुस्तक पर प्रतिबंध लगा दिया गया।
  • बंगाल में शिवाजी उत्सव की शुरुआत की।
  • ‘स्वराज’ शब्द का पहला आधुनिक उपयोग किया (शिवाजी पर 1902 के पर्चे में)।
सिंगारवेलु चेट्टियार
  • मद्रास में श्रम आयोजक।
  • दक्षिण भारत के पहले कम्युनिस्ट।
एस.ए. डांगे और सहयोगी
  • आर.बी. लोटवाला से प्रभावित कट्टरपंथी छात्र।
  • डांगे ने ‘गांधी बनाम लेनिन’ (1921) लिखी।
अश्विनी कुमार बनर्जी:
  • इंडियन मिल हैंड्स यूनियन (1906)।
मोतीलाल घोष:
  • ‘अमृत बाजार पत्रिका’।
अंबालाल साराभाई और कस्तूरभाई लालभाई
  • मोतीलाल नेहरू के साथ सहयोग किया।
  • कांग्रेस और बॉम्बे के मिल मालिकों के बीच की खाई को पाटने में मदद की।
चंद्रप्रभा सैकियानी
  • असम में कछारी आदिवासियों को संगठित किया।
  • वन कानूनों का उल्लंघन किया।

विविध  

वारेन हेस्टिंग्स (1773–1785)
  • रेगुलेटिंग एक्ट, 1773
  • पिट्स इंडिया एक्ट, 1784
  • बनारस के राजा चैत सिंह के साथ हुए संघर्ष के कारण वारेन हेस्टिंग्स को इंग्लैंड में महाभियोग का सामना करना पड़ा।
  • शियाटिक सोसाइटी ऑफ बंगाल (1784): सर विलियम जोन्स के साथ मिलकर स्थापना।
लॉर्ड कार्नवालिस (1786–1793)
  • कार्नवालिस कोड (1793): प्रशासन का यूरोपीयकरण और नागरिक सेवाओं (सिविल सर्विसेज) की शुरुआत
  • बंगाल में स्थायी बंदोबस्त (1793)
लॉर्ड वेलेजली (1798–1805)
  • सहायक संधि प्रणाली (1798); हैदराबाद के निजाम के साथ पहली संधि।
लॉर्ड विलियम बेंटिक (1828–1835)
  • सती प्रथा का उन्मूलन (1829)
  • ठगी प्रथा का दमन (1830): कर्नल स्लीमन की सहायता से।
  • चार्टर एक्ट, 1833
  • 1835 का प्रस्ताव (मैकाले मिनट): शैक्षिक सुधार और अंग्रेजी को आधिकारिक भाषा घोषित करना।
  • इनका विलय किया गया:
    • मैसूर (1831)
    • कुर्ग (1834)
    • मध्य कछार (1834)
लॉर्ड मेटकाफ (1835–1836)
  • नया प्रेस कानून: इन्हें ‘भारतीय प्रेस का मुक्तिदाता’ कहा जाता है क्योंकि इन्होंने प्रेस को स्वतंत्रता दी।
लॉर्ड हार्डिंग प्रथम (1844–1848)
  • सामाजिक सुधार: कन्या भ्रूण हत्या और मानव बलि प्रथा का उन्मूलन।
लॉर्ड डलहौजी (1848–1856)
  • व्यपगत का सिद्धांत :
    • सतारा (1848)
    • जैतपुर, संबलपुर (1849)
    • उदयपुर/उदेपुर (1852)
    • झाँसी (1853)
    • नागपुर (1854)
    • अवध (1856 – कुशासन के आधार पर)।
  • वुड्स डिस्पैच (1854): भारतीय शिक्षा का ‘मैग्नाकार्टा’।
  • रेलवे मिनट (1853): बॉम्बे से ठाणे के बीच पहली रेल लाइन।
  • दूरसंचार सुधार: टेलीग्राफ और पोस्ट ऑफिस एक्ट (1854)।
  • विधवा पुनर्विवाह अधिनियम (1856): ईश्वर चंद्र विद्यासागर के प्रयासों से।
लॉर्ड कैनिंग (1856–1857)
  • कलकत्ता, बॉम्बे और मद्रास में विश्वविद्यालयों की स्थापना (1857)
  • 1857 का विद्रोह
लॉर्ड कैनिंग (1858–1862) – प्रथम वायसराय
  • भारत सरकार अधिनियम, 1858
  • ‘श्वेत विद्रोह’(1859)
  • भारतीय परिषद अधिनियम, 1861
लॉर्ड लिटन (1876–1880)
  • भीषण अकाल (1876–78): रिचर्ड स्ट्रेची की अध्यक्षता में प्रथम अकाल आयोग (1878) का गठन।
  • राजकीय उपाधि अधिनियम (1876): महारानी विक्टोरिया को ‘कैसर-ए-हिंद’ की उपाधि।
  • वर्नाकुलर प्रेस एक्ट (1878)
  • शस्त्र अधिनियम, 1878
  • द्वितीय अफगान युद्ध (1878–80)
लॉर्ड रिपन (1880–1884)
  • वर्नाकुलर प्रेस एक्ट को रद्द करना
  • प्रथम कारखाना अधिनियम (1881)
  • स्थानीय स्वशासन प्रस्ताव (1882) – भारत में स्थानीय स्वशासन के जनक
  • हंटर शिक्षा आयोग (1882)
  • इल्बर्ट बिल विवाद
लॉर्ड डफरिन (1884–1888)
  • तृतीय बर्मा युद्ध
  • भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का गठन (1885)
लॉर्ड कर्जन (1899–1905)
  • पुलिस आयोग (1902)
  • विश्वविद्यालय आयोग और भारतीय विश्वविद्यालय अधिनियम (1904)
  • कलकत्ता कॉर्पोरेशन एक्ट (1899)
  • प्राचीन स्मारक संरक्षण अधिनियम (1904)
  • बंगाल का विभाजन (1905)
  • कर्जन-किचनर विवाद
  • तिब्बत में यंग हसबैंड मिशन
लॉर्ड हार्डिंग द्वितीय (1910–1916)
  • राजधानी दिल्ली स्थानांतरित की गई
  • दिल्ली दरबार/राज्याभिषेक दरबार (1911)
लॉर्ड चेम्सफोर्ड (1916–1921)
  • अगस्त घोषणा (1917)
  • भारत सरकार अधिनियम (1919)
  • रॉलेट एक्ट
  • जलियांवाला बाग हत्याकांड
  • असहयोग और खिलाफत आंदोलन
  • सैडलर आयोग 
लॉर्ड इरविन (1926–1931)  
  • साइमन कमीशन  
  • नेहरू रिपोर्ट
  • लाहौर कांग्रेस और पूर्ण स्वराज
  • दांडी मार्च
  • गांधी-इरविन समझौता
  • प्रथम गोलमेज सम्मेलन
लॉर्ड विलिंगडन/वेलिंगटन (1931–1936)
  • सांप्रदायिक पंचाट 
  • पूना पैक्ट (पूना समझौता)  
  • भारत सरकार अधिनियम, 1935  
लॉर्ड लिनलिथगो (1936–1944)
  • कांग्रेस मंत्रिमंडलों का इस्तीफा
  • अगस्त प्रस्ताव
  • क्रिप्स मिशन
  • भारत छोड़ो आंदोलन

लॉर्ड वेवेल (1944–1947)

  • सी.आर. फॉर्मूला (राजगोपालाचारी फार्मूला)
  • वेवेल योजना और शिमला सम्मेलन
  • कैबिनेट मिशन
  • प्रत्यक्ष कार्यवाही दिवस 
  • अंतरिम सरकार
  • भारत छोड़ने का ब्रिटिश निर्णय

लॉर्ड माउंटबेटन (1947–1948)

  • 3 जून की योजना (माउंटबेटन योजना)
  • भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम
  • रेडक्लिफ की अध्यक्षता में सीमा आयोग
अन्य आयोग  
अकाल आयोग
  • कैम्पबेल आयोग
  • स्ट्रेची आयोग 
  • लॉयल आयोग 
  • मैकडोनेल आयोग
मुद्रा आयोग:
  • मैसफ़ील्ड आयोग: 1886 में लॉर्ड डफरिन द्वारा गठित।
  • भारतीय मुद्रा समिति या फाउलर समिति
  • हिल्टन यंग आयोग: 1926 में लॉर्ड लिनलिथगो के कार्यकाल के दौरान गठित 
अन्य महत्वपूर्ण आयोग 
  • स्कॉट-मोनक्रीफ आयोग (सिंचाई): 1901 में लॉर्ड कर्जन द्वारा।
  • फ्रेजर आयोग (पुलिस सुधार): 1902 में लॉर्ड कर्जन द्वारा।
  • हंटर आयोग (पंजाब उपद्रव/जलियांवाला बाग): 1919 में लॉर्ड चेम्सफोर्ड द्वारा।
  • व्हिटली आयोग (श्रम): 1929 में लॉर्ड इरविन द्वारा।
  • सप्रू आयोग (बेरोजगारी): 1935 में लॉर्ड लिनलिथगो द्वारा।
  • फ्लाउड आयोग (बंगाल में काश्तकारी): 1940 में लॉर्ड लिनलिथगो द्वारा।

भारतीय प्रेस का विकास 

शुरुआती समाचार पत्र: 
  • 1780: जेम्स ऑगस्टस हिक्की ने ‘द बंगाल गजट’ (भारत का पहला समाचार पत्र) शुरू किया।
    • सरकार की आलोचना करने के कारण 1782 में इसे जब्त कर लिया गया।
  • प्रेस पर प्रारंभिक प्रतिबंध/विनियमन
    • सेंसरशिप ऑफ प्रेस एक्ट, 1799 (लॉर्ड वेलेजली): प्रेस पर कठोर नियंत्रण।
  • बाद में लॉर्ड हेस्टिंग्स द्वारा इसमें ढील दी गई; 1818 में पूर्व-सेंसरशिप (प्रकाशन से पूर्व जांच) हटा दी गई।
  • लाइसेंसिंग रेगुलेशन (अनुज्ञप्ति नियमन), 1823 (जॉन एडम्स):
    • इसे पत्रिकाओं, पुस्तिकाओं और पुस्तकों तक विस्तारित किया गया।
  • मुख्य रूप से भारतीय भाषाओं के समाचार पत्रों को लक्षित किया गया; उदाहरण के लिए, राजा राममोहन राय के ‘मिरात-उल-अखबार’ का प्रकाशन बंद हो गया।
  • प्रेस अधिनियम, 1835 / मेटकाफ अधिनियम:
    • इसने 1823 के प्रतिबंधात्मक लाइसेंसिंग अधिनियम को निरस्त कर दिया; इसे पिछले अधिनियम की तुलना में उदार माना गया।
    • मुद्रकों/प्रकाशकों को परिसर का विवरण देना आवश्यक था और कुछ मामलों में प्रकाशन की प्रतियां सरकार को उपलब्ध कराना अनिवार्य था।
    • चार्ल्स मेटकाफ को “भारतीय प्रेस का मुक्तिदाता” कहा जाता है।
  • लाइसेंसिंग अधिनियम, 1857:
    • 1857 के विद्रोह के दौरान आपातकालीन स्थिति में लागू किया गया।
    • सरकार किसी भी मुद्रित सामग्री के प्रकाशन या प्रसार को रोक सकती थी।
  • पंजीकरण अधिनियम , 1867:
    • यह नियामक था, प्रतिबंधात्मक नहीं।
    • पुस्तकों/समाचार पत्रों पर मुद्रक, प्रकाशक और प्रकाशन के स्थान का नाम छपना अनिवार्य था।
    • प्रकाशन के एक महीने के भीतर स्थानीय सरकार को एक प्रति जमा करनी होती थी।
प्रारंभिक राष्ट्रवादी और प्रेस की स्वतंत्रता
  • राजा राममोहन राय (1824) ने प्रेस पर प्रतिबंधों का विरोध किया।

वर्नाकुलर प्रेस एक्ट, 1878

  • मुख्य प्रावधान:
    • जिला मजिस्ट्रेट मुद्रक/प्रकाशक से बॉन्ड (बंधपत्र) की मांग कर सकता था; उल्लंघन होने पर प्रेस के उपकरण जब्त किए जा सकते थे।
    • मजिस्ट्रेट की कार्रवाई अंतिम मानी जाती थी, इसके खिलाफ कोई अपील नहीं की जा सकती थी।
    • यदि ‘प्रूफ’ (प्रमाण) सरकारी सेंसर को प्रस्तुत किए जाते, तो छूट मिल सकती थी।
  • इसे गैगिंग एक्ट उपनाम दिया गया।
  • यह कानून ‘सोम प्रकाश’, ‘भारत मिहिर’, ‘ढाका प्रकाश’ जैसे समाचार पत्रों के विरुद्ध दमनकारी था।
  • अमृत बाज़ार पत्रिका जैसे कुछ पत्रों ने इस कानून से बचने के लिए रातों-रात अपनी भाषा बदलकर अंग्रेजी कर ली।
  • 1882 में लॉर्ड रिपन द्वारा इसे निरस्त (रद्द) कर दिया गया।
  • 1883: कलकत्ता उच्च न्यायालय के एक न्यायाधीश की आलोचना करने के कारण सुरेंद्रनाथ बनर्जी को जेल भेजा गया। 
  • बाल गंगाधर तिलक:
    • उन्होंने साम्राज्यवाद विरोधी चेतना जगाने के लिए अपने समाचार पत्रों (केसरी और मराठा) के साथ-साथ गणपति एवं शिवाजी उत्सवों को जन-जुड़ाव के माध्यम के रूप में इस्तेमाल किया।
    • उन्होंने विदेशी कपड़ों के बहिष्कार (1896) और ‘कर-नहीं’ (No-tax) अभियानों की वकालत की।
    • रैंड (Rand) हत्या कांड के बाद उन्हें राजद्रोह के आरोप में गिरफ्तार किया गया और 18 महीने के कारावास की सजा सुनाई गई।
    • वे “लोकमान्य” और राष्ट्रवादी प्रतिरोध के प्रतीक बने।
  • 1898: धारा 124A में संशोधन किया गया; धारा 153A जोड़ी गई (सरकार के प्रति अवमानना करना या घृणा पैदा करना अपराध माना गया)।
  • 1908: समाचार पत्र (अपराध उद्दीपन) अधिनियम
    • चरमपंथी राष्ट्रवादी गतिविधियों को लक्षित किया गया।
    • मजिस्ट्रेट को ऐसी प्रेस संपत्ति ज़ब्त करने का अधिकार दिया गया, जो हिंसा भड़काने वाली सामग्री प्रकाशित करती थी।
    • बाल गंगाधर तिलक को मांडले जेल (6 वर्ष) की सजा सुनाई गई।
  • भारतीय प्रेस अधिनियम, 1910
    • इसने वर्नाकुलर प्रेस एक्ट के सबसे दमनकारी प्रावधानों को पुनर्जीवित कर दिया।
    • मुद्रकों/प्रकाशकों को ‘ज़मानत राशि’ जमा करनी पड़ती थी; सरकार समाचार पत्रों का पंजीकरण रद्द या ज़मानत ज़ब्त कर सकती थी।
    • 1910-1915 के बीच लगभग 500 प्रकाशनों को प्रतिबंधित किया गया, ~1,000 पर मुकदमा चला और जमानत राशि के रूप में लगभग 5 लाख रुपये एकत्र किए गए।
  • 1921: तेज बहादुर सप्रू की अध्यक्षता वाली प्रेस समिति पर आधारित:
    • 1908 और 1910 के प्रेस अधिनियमों को निरस्त कर दिया गया।
भारतीय प्रेस (आपातकालीन शक्तियाँ) अधिनियम, 1931
  • इसे प्रारंभ में सविनय अवज्ञा आंदोलन को कुचलने के लिए लाया गया था।
  • 1932 का संशोधन: इसका दायरा उन सभी गतिविधियों तक बढ़ा दिया गया जो सरकारी सत्ता को कमज़ोर करने के उद्देश्य से की जाती थीं।
  • द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान भारत रक्षा नियमों के तहत:
    • समाचारों पर पूर्व-सेंसरशिप लागू कर दी गई।
    • प्रेस आपातकालीन अधिनियम और आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम में कठोर संशोधन किए गए।
    • एक समय ऐसा भी आया जब कांग्रेस की गतिविधियों से संबंधित सभी समाचारों का प्रकाशन अवैध घोषित कर दिया गया था।

शिक्षा का विकास 

प्रारंभिक शैक्षणिक संस्थान
  • कलकत्ता मदरसा (1781)
    • वारेन हेस्टिंग्स द्वारा स्थापित।
    • मुस्लिम कानून और संबंधित विषयों के अध्ययन के लिए।
  • संस्कृत कॉलेज, बनारस (1791)
    • जोनाथन डंकन द्वारा स्थापित।
    • हिंदू कानून और दर्शन के अध्ययन के लिए।
  • फोर्ट विलियम कॉलेज (1800)
    • लॉर्ड वेलेजली द्वारा स्थापित।
    • उद्देश्य: कंपनी के सिविल सेवकों (civil servants) को भारतीय भाषाओं और रीति-रिवाजों में प्रशिक्षित करना।
    • 1802 में इसका संचालन बंद कर दिया गया।
  • भारतीयों और मिशनरियों की भूमिका
    • प्रबुद्ध भारतीयों और ईसाई मिशनरियों ने आधुनिक शिक्षा की मांग की।
    • सेरामपुर  के मिशनरी सबसे अधिक सक्रिय थे।
1813 का चार्टर अधिनियम 
  • कंपनी द्वारा शिक्षा की पहली आधिकारिक मान्यता।
  • प्रावधान:
    • ₹1 लाख का वार्षिक अनुदान।
  • समस्याएं:
    • इस धन के उपयोग को लेकर उत्पन्न विवाद के कारण यह राशि केवल 1823 में जारी की जा सकी।
1813 के बाद के घटनाक्रम
  • कलकत्ता हिन्दू कॉलेज, कलकत्ता (1817)
  • शिक्षित बंगालियों द्वारा स्थापित
    • राजा राममोहन राय द्वारा समर्थित
  • प्राच्यवादी-आंग्लवादी विवाद 
  • आंग्लवादी 
    • आधुनिक पश्चिमी शिक्षा के पक्षधर थे
    • वे चाहते थे कि सरकारी धन केवल आधुनिक अध्ययन के लिए हो।
  • प्राच्यवादी 
    • पारंपरिक भारतीय शिक्षा के पक्षधर थे।
    • नौकरियों के लिए सीमित पश्चिमी शिक्षा का समर्थन किया।
  • शिक्षा के माध्यम पर बहस
    • आंग्लवादी दो वर्गों में विभाजित थे:
    • प्रथम समूह: यह वर्ग अंग्रेजी को शिक्षा के माध्यम के रूप में अपनाने के पक्ष में था।
    • द्वितीय समूह: यह वर्ग क्षेत्रीय भाषाओं को शिक्षा के माध्यम के रूप में अपनाने का समर्थक था।
  • इनके बीच निम्न को लेकर भ्रम/दुविधा की स्थिति थी:
    • शिक्षा का माध्यम 
    • अध्ययन के विषय के रूप में भाषा 
लॉर्ड मैकाले मिनट (विवरण पत्र) (1835)
  • इसने आंग्लवादियों के पक्ष में विवाद को पूरी तरह समाप्त कर दिया।
  • प्रमुख निर्णय:
    • केवल पश्चिमी विज्ञान और साहित्य की शिक्षा दी जाएगी।
    • शिक्षा का माध्यम अंग्रेजी होगा।
  • विचार: भारतीय शिक्षा/ज्ञान, यूरोपीय शिक्षा की तुलना में निम्न स्तर का है (विशेषकर विज्ञान के क्षेत्र में)।
  • मुख्य उद्देश्य: उनका लक्ष्य एक ऐसा वर्ग तैयार करना था जो:
    • “रक्त और रंग में तो भारतीय हो, लेकिन अपनी रुचि, विचारों, नैतिकता और बुद्धि में अंग्रेज हो।”  
  • इस नीति को ‘अधोमुखी निस्यंदन सिद्धांत’ कहा गया। 

अधोमुखी निस्यंदन सिद्धांत (विप्रवेशन का सिद्धांत) :

  • यह ब्रिटिश औपनिवेशिक नीति इस धारणा पर आधारित थी कि यदि भारतीयों के एक छोटे और प्रबुद्ध वर्ग को अंग्रेजी माध्यम में शिक्षित किया जाए, तो ज्ञान और पश्चिमी विचार समाज के निचले स्तरों तक स्वतः ‘छनकर’ पहुंच जाएंगे।
  • ऐसी मान्यता थी कि यह शिक्षा अंततः जनसाधारण तक प्रसारित होगी, जिससे बिचौलियों/मध्यस्थों का एक ऐसा वर्ग तैयार होगा जो ‘रक्त और रंग में तो भारतीय हो, परंतु अपनी रुचि, विचारों और बुद्धिमत्ता में अंग्रेज हो’, ताकि वे ब्रिटिश प्रशासन के लिए सहायक बन सकें।
  • इस दृष्टिकोण के तहत सरकार के सीमित संसाधनों को केवल उच्च वर्ग की उच्च शिक्षा पर केंद्रित किया गया।
  • इसका उद्देश्य यह था कि शिक्षित वर्ग सामान्य जनता का उत्थान करेगा, लेकिन व्यावहारिक रूप से इसने एक गहरी शैक्षणिक और सामाजिक खाई पैदा कर दी और बहुसंख्यक आबादी को इसका कोई लाभ नहीं मिला। 

जेम्स थॉमसन के प्रयास (1843–53)

  • उत्तर-पश्चिमी प्रांत के लेफ्टिनेंट-गवर्नर
    • प्रमुख पहल: ग्राम पाठशालाओं की शुरुआत की।
    • शिक्षा का माध्यम: स्थानीय/देशी भाषाएँ 

वुड्स डिस्पैच (1854)

  • चार्ल्स वुड द्वारा तैयार
  • इसे भारत में ‘अंग्रेजी शिक्षा का मैग्नाकार्टा कहा जाता है।
  • प्रमुख सिफारिशें:
    • जन शिक्षा का उत्तरदायित्व राज्य (सरकार) पर है।
    • बंगाल, बॉम्बे, मद्रास, पंजाब और उत्तर-पश्चिमी प्रांतों में ‘लोक शिक्षण विभाग’ प्रस्तावित किए गए।
    • शैक्षणिक पदानुक्रम
      • ग्रामीण प्राथमिक विद्यालय (स्थानीय भाषा)
      • एंग्लो-वर्नाकुलर हाई स्कूल
      • जिला कॉलेज
      • प्रेसीडेंसी शहर: विश्वविद्यालय
  • शिक्षा का माध्यम:
    • उच्च शिक्षा: अंग्रेजी माध्यम।
    • स्कूली शिक्षा: स्थानीय भाषाएँ ।
  • विशेष बल: महिला शिक्षा, व्यावसायिक शिक्षा और शिक्षक प्रशिक्षण पर जोर दिया गया।
  • शिक्षा को धर्मनिरपेक्ष रखा जाए।
  • निजी संस्थानों के लिए सहायता-अनुदान प्रणाली।
  • विश्वविद्यालयों की स्थापना (1857):
    • कलकत्ता
    • बॉम्बे
    • मद्रास
  • प्रांतों में शिक्षा विभागों की स्थापना की गई।
  • बेथुन स्कूल (1849):
    • जे.ई.डी. बेथुन द्वारा स्थापित 
    • यह लड़कियों के लिए पहला प्रमुख विद्यालय था।
  • कन्या विद्यालयों को भी ‘सहायता अनुदान’ के दायरे में लाया गया।
  • तकनीकी संस्थान:
    • पूसा कृषि संस्थान, बिहार (1905) (जिसे बाद में दिल्ली स्थानांतरित कर दिया गया)।
    • रुड़की इंजीनियरिंग कॉलेज (1847)

हंटर शिक्षा आयोग (1882–83) –

  • डब्ल्यू.डब्ल्यू. हंटर की अध्यक्षता में
  • प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा पर केंद्रित
  • सिफारिशें
    • प्राथमिक शिक्षा का विस्तार
    • माध्यम: स्थानीय भाषा 
    • प्राथमिक शिक्षा का हस्तांतरण:
      • जिला बोर्डों को
      • नगर पालिकाओं को
    • माध्यमिक शिक्षा का विभाजन:
      • साहित्यिक (विश्वविद्यालय के लिए)
      • व्यावसायिक (वाणिज्यिक उद्देश्यों के लिए)
    • महिला शिक्षा पर विशेष जोर।
    • इस आयोग में अध्यक्ष के अलावा 20 सदस्य थे जिनमें से 8 भारतीय थे (आनंद मोहन बोस, के.टी. तेलंग, सैयद अहमद खान, पी. रंगानंद मुदलियार, बाबू भूदेव मुखर्जी, अमृतसर के हाजी गुलाम हुसैन और महाराजा ज्योतिंद्र मोहन टैगोर आदि)।
    • शिक्षा के क्षेत्र में गैर-सरकारी प्रयासों को प्रोत्साहन और सरकार को माध्यमिक एवं कॉलेज शिक्षा से पीछे हट जाना चाहिए।
  • विश्वविद्यालयों का विस्तार
    • पंजाब विश्वविद्यालय (1882)
    • इलाहाबाद विश्वविद्यालय (1887)
रेले आयोग, 1902 (विश्वविद्यालय आयोग) –
  • सितंबर 1901 में, लॉर्ड कर्जन ने शिमला में भारत के सभी विश्वविद्यालय अधिकारियों का एक सम्मेलन बुलाया।
  • इस बैठक में पारित प्रस्ताव “शिमला प्रस्ताव” के रूप में प्रसिद्ध हुए।
  • कर्जन ने मैकाले की शिक्षा नीति की आलोचना की क्योंकि यह भारतीय (स्थानीय) भाषाओं के प्रचार-प्रसार के विरुद्ध थी।
  • 1902 में, कर्जन की कार्यकारी परिषद के सदस्य सर थॉमस रेले की अध्यक्षता में विश्वविद्यालय आयोग की स्थापना की गई।
  • आयोग में दो भारतीय सदस्य थे:
    • सैयद हुसैन बिलग्रामी (हैदराबाद के निज़ाम के अधीन लोक शिक्षण निदेशक)।
    • गुरुदास बनर्जी (कलकत्ता उच्च न्यायालय के न्यायाधीश)।
  • रेले आयोग की सिफारिशों के आधार पर भारतीय विश्वविद्यालय अधिनियम, 1904 पारित किया गया।
भारतीय विश्वविद्यालय अधिनियम, 1904 –
  • रेले आयोग (1902) पर आधारित
  • प्रावधान –
    • विश्वविद्यालय सीनेट का पुनर्गठन किया गया और उनका आकार घटा दिया गया (50-100 सदस्य)। प्रत्येक सदस्य का कार्यकाल छह वर्ष का था।
    • निर्वाचित फेलो की संख्या बॉम्बे, कलकत्ता और मद्रास विश्वविद्यालयों में 50 और अन्य विश्वविद्यालयों में 15 तक सीमित कर दी गई।
    • अधिकांश फेलो सरकार द्वारा नियुक्त किए जाने थे, जिससे विश्वविद्यालय प्रशासन में राज्य का प्रभाव बढ़ गया।
    • गवर्नर-जनरल को विश्वविद्यालयों की क्षेत्रीय सीमाएँ निर्धारित करने और कॉलेजों की संबद्धता को विनियमित करने का अधिकार दिया गया।
    • विश्वविद्यालयों और संबद्ध कॉलेजों को सीधे सरकारी पर्यवेक्षण के अधीन कर दिया गया।
    • वित्तीय अनुदान: उच्च शिक्षा और अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए पांच वर्षों हेतु ₹5 लाख का वार्षिक अनुदान शुरू किया गया। अध्ययन और अनुसंधान पर जोर दिया गया।
  • प्रतिक्रिया –
    • कर्जन: गुणवत्ता और दक्षता के लिए।
    • राष्ट्रवादी:
      • इसे साम्राज्यवादी नियंत्रण के रूप में देखा।
      • गोखले ने इसे “प्रतिगामी उपाय” कहा।
शिक्षा नीति पर सरकारी प्रस्ताव (1913) –
  • अनिवार्य शिक्षा से इनकार किया गया।
  • निरक्षरता उन्मूलन की नीति को स्वीकार किया गया।
सैडलर विश्वविद्यालय आयोग (1917–19) –
  • अध्यक्ष: माइकल सैडलर
  • स्कूल से लेकर विश्वविद्यालय तक की शिक्षा की समीक्षा की गई।
  • सिफारिशें –
    • 12 वर्षीय स्कूली पाठ्यक्रम।
    • माध्यमिक शिक्षा के लिए अलग बोर्ड।
    • विश्वविद्यालयों का स्वरूप:
      • आवासीय 
      • शिक्षण आधारित 
      • स्वायत्त निकाय 
  • सैडलर आयोग का प्रभाव –
    • नए विश्वविद्यालय:
      • मैसूर
      • पटना
      • बनारस
      • अलीगढ़
      • ढाका
      • लखनऊ
      • उस्मानिया
      • दिल्ली
      • आगरा
      • अन्नामलाई
  • अंतर-विश्वविद्यालय बोर्ड (1925) की स्थापना।
  • छात्र कल्याण बोर्ड की शुरुआत।
  • विश्वविद्यालय के मुख्य कार्यकारी अधिकारी के रूप में पूर्णकालिक वैतनिक कुलपति की नियुक्ति।
  • विभागों, संकायों, अध्ययन बोर्डों और वैधानिक शैक्षणिक निकायों का बेहतर संगठन।
  • विशेषज्ञता को बढ़ावा देने के लिए ऑनर्स पाठ्यक्रमों की शुरुआत।
  • व्याख्यान के साथ-साथ ट्यूटोरियल और व्यावहारिक कार्यों का समावेश।
  • इंजीनियरिंग, चिकित्सा, कानून, कृषि और प्रौद्योगिकी जैसे व्यावसायिक क्षेत्रों में शिक्षण का प्रावधान।
  • द्वैध शासन के तहत शिक्षा –
    • शिक्षा को प्रांतीय मंत्रालयों को हस्तांतरित कर दिया गया।
    • केंद्र सरकार ने अपनी भागीदारी कम कर दी।
    • सरकारी अनुदान बंद कर दिए गए।

भारत में सांप्रदायिकता

19वीं शताब्दी के उत्तरार्ध में देश में सांप्रदायिकता उभरी, जिससे राष्ट्रीय एकता को गंभीर खतरा पैदा हो गया।

  • कारक:
    • औपनिवेशिक ‘फूट डालो और राज करो’ की नीति।
    • आर्थिक पिछड़ापन और बेरोजगारी।
    • मुसलमानों के बीच सामाजिक और शैक्षणिक अंतराल।
    • प्रतिक्रियावादी जमींदारों और कुलीन वर्ग (एलीट) का प्रभाव।
    • इतिहास की गलत व्याख्या और धार्मिक सुधार/उग्रवादी आंदोलनों का प्रभाव।
    • मुस्लिम सांप्रदायिकता का विकास और द्विराष्ट्र सिद्धांत 
  • “द इंडियन मुसलमान्स” (1871): सर विलियम विल्सन हंटर द्वारा लिखित।
    • इसमें ब्रिटिश भारत में मुसलमानों की स्थिति और उनकी वफादारी का विश्लेषण किया गया था।
    • 1887: अंग्रेजों ने कांग्रेस के विरोध में सैयद अहमद खान जैसे मुस्लिम नेताओं का समर्थन करना शुरू किया।
    • 1906: मुस्लिम लीग की स्थापना; पृथक निर्वाचक मंडल की मांग की गई।
मुस्लिम लीग –
  • अलीगढ़ कॉलेज के प्रिंसिपल आर्चबोल्ड द्वारा प्रोत्साहित किए जाने पर, सर आगा खान के नेतृत्व में एक मुस्लिम प्रतिनिधिमंडल 1 अक्टूबर, 1906 को शिमला में गवर्नर जनरल लॉर्ड मिंटो से मिला।
  • 30 दिसंबर 1906 को, ढाका में मोहम्मडन एजुकेशनल कॉन्फ्रेंस के एक सत्र में लगभग 3,000 प्रतिनिधियों ने भाग लिया, जहाँ ऑल इंडिया मुस्लिम लीग बनाने का प्रस्ताव रखा गया।
  • यह नाम नवाब ख्वाजा सर सलीमुल्लाह बहादुर द्वारा प्रस्तावित किया गया था और हकीम अजमल खान ने इसका समर्थन किया था।
  • मुस्लिम लीग के संस्थापक ख्वाजा सलीमुल्लाह, बाकर-उल-मुल्क, सैयद अमीर अली, सैयद नबी उल्लाह, खान बहादुर गुलाम और मुस्तफा चौधरी थे।
  • लीग के पहले मानद अध्यक्ष सर सुल्तान मुहम्मद शाह (सर आगा खान) थे।
  • मोहम्मद अली जिन्ना 1913 में मुस्लिम लीग में शामिल हुए।
  • 1908 के अमृतसर अधिवेशन में मुस्लिम लीग ने मुसलमानों के लिए पृथक निर्वाचन मंडल की माँग की।
  • 1909: पृथक निर्वाचक मंडल की शुरुआत (मार्ले-मिंटो सुधार)।
  • 1915: हिंदू महासभा की स्थापना; शुरुआती हिंदू सांप्रदायिक समूह उभरे।
  • 1916: कांग्रेस-लीग लखनऊ समझौता; मुस्लिम लीग को वैधता मिली।
  • 1920-1930 का दशक: सांप्रदायिक दंगे; शुद्धि और तबलीगी आंदोलन; कांग्रेस सांप्रदायिक आधार पर विभाजित।
  • 1928: नेहरू रिपोर्ट का मुस्लिम कट्टरपंथियों द्वारा विरोध; जिन्ना ने अपनी ’14 सूत्री माँगें’ प्रस्तुत कीं।
  • 1932: सांप्रदायिक पंचाट ने मुस्लिम मांगों को स्वीकार किया।
  • 1937: मुस्लिम लीग ने एक अलग राष्ट्र के रूप में पाकिस्तान की वकालत शुरू की।
  • पंजाब हिंदू सभा (1909), हिंदू महासभा (1915), और आरएसएस (1925) जैसे संगठनों ने हिंदू सांप्रदायिक हितों को बढ़ावा दिया।
द्वि-राष्ट्र सिद्धांत के प्रारंभिक चरण –
  • 1887:
    • वायसराय डफरिन और लेफ्टिनेंट गवर्नर कोल्विन ने कांग्रेस पर हमला किया।
    • अंग्रेजों द्वारा कांग्रेस विरोधी मोर्चे के रूप में सैयद अहमद खान और भिंगा के राजा शिव प्रसाद का समर्थन किया गया।
  • 1906:
    • आगा खान ने पृथक निर्वाचक मंडल की मांग को लेकर शिमला प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किया।
    • वायसराय मिंटो ने विशेष रूप से सांप्रदायिक प्रतिनिधित्व का वादा किया। ऑल इंडिया मुस्लिम लीग की स्थापना हुई।
  • 1909:
    • मार्ले-मिंटो सुधारों ने मुसलमानों को पृथक निर्वाचक मंडल प्रदान किया।
    • यू.एन. मुखर्जी और लाल चंद द्वारा पंजाब हिंदू सभा की स्थापना की गई।
  • 1915:
    • कासिम बाजार के महाराजा की अध्यक्षता में अखिल भारतीय हिंदू महासभा का पहला सत्र आयोजित हुआ।
  • 1912–24:
    • मुस्लिम लीग पर युवा मुस्लिम राष्ट्रवादियों का वर्चस्व रहा; राष्ट्रवाद सांप्रदायिक दृष्टिकोण से प्रभावित था। पहले वे कांग्रेस के करीब आए, लेकिन 1919-20 के आसपास सांप्रदायिक राजनीति की ओर झुक गए।
  • पृथक राजनीतिक पहचान का मजबूत होना –
  • 1916:
    • कांग्रेस ने पृथक निर्वाचक मंडल के लिए मुस्लिम लीग की मांग स्वीकार कर ली।
    • दोनों ने सरकार के समक्ष संयुक्त मांगें प्रस्तुत की, जिससे मुस्लिम लीग को राजनीतिक वैधता मिली।
  • 1920–22:
    • मुसलमानों ने रॉलेट और खिलाफत आंदोलनों में भाग लिया, लेकिन सांप्रदायिक दृष्टिकोण बना रहा।
  • 1920 का दशक:
    • आर्य समाज ने ‘शुद्धि’ आंदोलन (हिंदू धर्म में वापसी) को बढ़ावा दिया।
    • इसके प्रत्युत्तर में मुस्लिमों ने तबलीग और तंजीम आंदोलन शुरू किए।
    • अली बंधुओं ने कांग्रेस पर हिंदू हितों का पक्ष लेने का आरोप लगाते हुए आलोचना की। 
    • कांग्रेस सांप्रदायिकता का प्रभावी ढंग से मुकाबला करने में विफल रही।
  • 1928:
    • नेहरू रिपोर्ट का मुस्लिम कट्टरपंथियों और सिख लीग द्वारा विरोध किया गया।
    • जिन्ना ने अपनी ’14 सूत्री माँगें’ प्रस्तुत कीं, जिसमें:
      • पृथक निर्वाचक मंडल 
      • सेवाओं और स्वशासी निकायों में मुसलमानों के लिए आरक्षण की माँग की गई।
  • 1930–34:
    • कुछ मुस्लिम समूहों (जमात-ए-उलेमा-ए-हिंद, खुदई खिदमतगार) ने सविनय अवज्ञा आंदोलन में भाग लिया, लेकिन समग्र मुस्लिम भागीदारी कम रही।
    • कांग्रेस के विपरीत, सांप्रदायिक गुटों ने तीनों गोलमेज सम्मेलनों में भाग लिया।
  • इकबाल –
    • उन्होंने 1930 के इलाहाबाद अधिवेशन में अपने संबोधन के दौरान पहली बार ब्रिटिश भारत में एक पृथक मुस्लिम राज्य की अवधारणा को स्पष्ट रूप से व्यक्त किया।
    • उन्होंने उत्तर-पश्चिम में मुस्लिम बहुल क्षेत्रों (पंजाब, सिंध, उत्तर-पश्चिमी सीमांत प्रांत और बलूचिस्तान) को मिलाकर एक एकीकृत क्षेत्र बनाने का प्रस्ताव दिया।
  • चौधरी रहमत अली एक भारतीय मुस्लिम राष्ट्रवादी थे जिन्होंने “पाकिस्तान” शब्द गढ़ा था।
    • अपने 1933 के पैम्फलेट, “नाउ ऑर नेवर” (Now or Never) में।
    • ब्रिटिश भारत के उत्तर-पश्चिमी मुस्लिम-बहुसंख्यक क्षेत्रों में एक अलग मुस्लिम मातृभूमि की मांग की, मुसलमानों के लिए एक विशिष्ट राष्ट्रीय पहचान की वकालत की, और एक संक्षिप्त नाम प्रस्तावित किया: पंजाब (P), अफगान (NWFP) (A), कश्मीर (K), सिंध (S), और -स्तान (बलूचिस्तान)।

कट्टरपंथ और जन सांप्रदायिकता –

  • 1937 के चुनावों के बाद:
    • मुस्लिम लीग का प्रदर्शन खराब रहा → चरम सांप्रदायिकता का मार्ग अपनाया।
  • जन आंदोलन का आधार: मध्यम और उच्च वर्ग; जेड.ए. सुलेरी, एफ.एम. दुर्रानी, फजल-उल-हक द्वारा दुष्प्रचार (प्रोपेगैंडा) किया गया।
  • पूर्ववर्ती सांप्रदायिकता से भिन्नता:
    • 1937 से पहले: इस दौरान मुख्य मांगें संवैधानिक सुरक्षा और आरक्षण तक सीमित थी, जिसमें राष्ट्रीय एकता के साथ सह-अस्तित्व का भाव मौजूद था।
    • 1937 के बाद: चरम सांप्रदायिकता – भय, घृणा और हिंसा का समावेश हुआ; उग्र हिंदू राष्ट्रवाद (हिंदू महासभा, आरएसएस, गोलवलकर) का भी उभार हुआ।
  • चरम सांप्रदायिकता के कारण:
    • कट्टरपंथ → प्रतिक्रियावादी तत्वों ने सामाजिक आधार की तलाश की।
    • ब्रिटिश प्रशासन ने राष्ट्रवादियों को विभाजित करने के अन्य सभी तरीके आजमा लिए थे।
    • सांप्रदायिकता का मुकाबला करने में पिछली असफलताओं ने इन ताकतों को और मजबूत कर दिया।
विभाजन की ओर ले जाने वाले प्रमुख घटनाक्रम –
  • 1937-39:
    • जिन्ना ने मांग की कि कांग्रेस स्वयं को एक हिंदू संगठन घोषित करे और लीग को मुसलमानों के एकमात्र प्रतिनिधि के रूप में मान्यता दे → इससे समझौते के रास्ते बंद हो गए।
  • पीरपुर रिपोर्ट (1938) और शरीफ रिपोर्ट (1939):
    • इन रिपोर्टों में ऑल इंडिया मुस्लिम लीग द्वारा तैयार दस्तावेज थे, जिनमें 1937-39 के दौरान विभिन्न प्रांतों में कांग्रेस मंत्रिमंडलों के शासन में मुसलमानों पर कथित अत्याचारों और भेदभाव का विवरण दिया गया था।
    • ये रिपोर्टें कांग्रेस के शासन को “हिंदू राज” के रूप में चित्रित करने और एक अलग मुस्लिम राज्य की मांग को मजबूत करने के लीग के अभियान के लिए महत्वपूर्ण थीं, जिससे भारत के विभाजन की ओर ले जाने वाले राजनीतिक माहौल में सीधा योगदान मिला।
    • “मुक्ति दिवस” (Day of Deliverance): जब अक्टूबर-नवंबर 1939 में कांग्रेस मंत्रिमंडलों ने द्वितीय विश्व युद्ध में भारत को शामिल करने के विरोध में इस्तीफा दिया, तो जिन्ना ने 22 दिसंबर 1939 को ‘मुक्ति दिवस’ के रूप में मनाने का आह्वान किया।
  • 24 मार्च, 1940:
    • पाकिस्तान प्रस्ताव (लाहौर अधिवेशन):
      • मुस्लिम-बहुसंख्यक क्षेत्रों को स्वतंत्र राज्यों के रूप में वर्गीकृत किया गया।
  • पाकिस्तान प्रस्ताव – लाहौर (मार्च, 1940):
    • प्रस्ताव की रूपरेखा खलीक उज्जमान, फजल-उल-हक और सिकंदर हयात खान द्वारा तैयार की गई थी।
    • फज़ल-उल-हक ने प्रस्ताव प्रस्तुत किया और खलीक उज्ज़मान ने इसका अनुमोदन किया।
    • प्रस्ताव में उत्तर-पश्चिम और पूर्वी भारत के मुस्लिम बहुल क्षेत्रों को मिलाकर एक स्वतंत्र, स्वायत्त और संप्रभु राज्य बनाने की माँग की गई। साथ ही, अल्पसंख्यक मुस्लिम क्षेत्रों में उनके हितों की रक्षा के प्रावधानों की माँग की गई।
  • द्वितीय विश्व युद्ध की अवधि:
    • लीग ने सभी वार्ताओं (अगस्त प्रस्ताव, क्रिप्स प्रस्ताव, शिमला सम्मेलन, कैबिनेट मिशन) में अलग पाकिस्तान की मांग की।
  • प्रत्यक्ष कार्यवाही दिवस, 16 अगस्त 1946: लीग द्वारा पहली बार कलकत्ता में ‘प्रत्यक्ष कार्यवाही दिवस’ मनाया गया।
  • 1947:
    • पंजाब, सिंध, बलूचिस्तान, उत्तर-पश्चिमी सीमांत प्रांत (NWFP) और बंगाल के मुस्लिम बहुल क्षेत्रों को मिलाकर पाकिस्तान का निर्माण हुआ।

समाचार पत्र 

वर्षनामव्यक्तित्वटिप्पणी
1780बंगाल गजटजेम्स ऑगस्टस हिक्कीभारत और एशिया का प्रथम समाचार पत्र
1784मद्रास कूरियरमद्रास से प्रकाशित प्रथम समाचार पत्र
1818दिग्दर्शनजे. सी. मार्शमैनप्रथम बंगाली मासिक
1818समाचार दर्पणविलियम कैरी, जे. सी. मार्शमैनप्रथम बंगाली समाचार पत्र (सेरामपुर, बंगाल)
1821संवाद कौमुदीराम मोहन राय
1822मिरात-उल-अखबारराम मोहन रायफारसी भाषा की प्रथम पत्रिका
बंगदूतद्वारकानाथ टैगोर
1826उदंत मार्तंडजुगल किशोर शुक्लप्रथम हिंदी साप्ताहिक (कोलकाता)
तत्वबोधिनी पत्रिकादेवेन्द्रनाथ टैगोर, अक्षय कुमार दत्त
राफ्त गोफ्तारदादाभाई नौरोजी
हिन्दू पैट्रियटहरीश चंद्र मुकर्जीनील बागान मालिकों का मुखपत्र
1859सोमप्रकाशद्वारकानाथ, विद्याभूषण, ईश्वर चंद्र विद्यासागरमूल विचार ईश्वर चंद्र विद्यासागर का था
इंडियन मिररदेवेन्द्रनाथ टैगोर, मनमोहन घोष
द बंगालीसुरेंद्रनाथ बनर्जी
अमृत बाजार पत्रिकाशिशिर कुमार घोष, मोतीलाल घोष
भारत श्रमजीवीशशिपाद बनर्जीश्रमिक वर्ग की प्रथम भारतीय पत्रिका
मद्रास मेलभारत का प्रथम सांध्य दैनिक (Evening paper)
तहजीब-उल-अखलाकसर सैयद अहमद खान
द हिंदूजी. सुब्रमण्यम अय्यर
धूमकेतुकाजी नजरुल इस्लामबंगाली
केसरीबी. जी. तिलक
मराठाबी. जी. तिलक
द ट्रिब्यूनदयाल सिंह मजीठिया, लाला हरकिशन लाललाहौर
स्वदेश मित्रम्जी. सुब्रमण्यम अय्यरतमिल समाचार पत्र
संजीवनी पत्रिकाकृष्ण कुमार मित्रसाधारण ब्रह्म समाज का मुखपत्र; 13 जुलाई 1905 को पहली बार इसमें ‘बहिष्कार’ की घोषणा की गई
वॉयस ऑफ इंडियादादाभाई नौरोजीबॉम्बे
सुधारकजी. के. गोखले
इंडियन ओपिनियनएम. के. गांधीनटाल प्रांत, दक्षिण अफ्रीका
वंदे मातरमअरविंद घोष
द इंडियन सोशियोलॉजिस्टश्यामजी कृष्ण वर्मालंदन में शुरू किया गया
संध्याबी. बी. उपाध्याय
युगांतरबारीन्द्र कुमार घोष
भारत माताअजीत सिंहपत्रिका (अंजुमन-ए-मोहब्बतैन)
वंदे मातरम (पेरिस)मैडम कामा
द लीडरमदन मोहन मालवीय
बॉम्बे क्रॉनिकलफिरोजशाह मेहता
तलवारबीरेंद्र नाथ चट्टोपाध्यायबर्लिन
हितवादगोपाल कृष्ण गोखले
अल-हिलालअबुल कलाम आजाद
प्रतापगणेश शंकर विद्यार्थी
हिंदुस्तान गदरयुगांतर आश्रम (गदर पार्टी)सैन फ्रांसिस्को
न्यू इंडियाएनी बेसेंट
कॉमनवीलएनी बेसेंट
इंडिपेंडेंटमोतीलाल नेहरू
यंग इंडिया / नवजीवन / हरिजनएम. के. गांधी
मूकनायक / बहिष्कृत भारतबी. आर. अंबेडकरमराठी साप्ताहिक
इंडियन सोशलिस्टएस. ए. डांगेप्रथम कम्युनिस्ट पत्रिका
वैनगार्डएम. एन. रॉयकम्युनिस्ट पत्रिका
फ्री हिंदुस्तानतारकनाथ दासवैंकूवर
हिंदुस्तान / लीडर (अंग्रेजी)एम. एम. मालवीय
डॉन (Dawn)मोहम्मद अली जिन्ना
नेशनल हेराल्ड (दैनिक)जवाहरलाल नेहरू
कुडी अरासुई. वी. रामास्वामी नायकर (पेरियार)
1864नेटिव ओपिनियनवी. एन. मांडलिक

पुस्तकें  

पुस्तक का नाम 

लेखक

विशेष विवरण

  • विधवा विवाह
  • बहुविवाह

ईश्वर चंद्र विद्यासागर

नील दर्पण

दीनबंधु मित्र

  • माइकल मधुसूदन दत्त द्वारा अनुवादित;
  • नील विद्रोह पर आधारित
  • दुर्गेश नंदिनी
  • आनंदमठ,
  •  बंगदर्शन
  • कपालकुंडल
  • मृणालिनी

बंकिम चंद्र चटर्जी

  • दुर्गेश नंदिनी: प्रथम बंगाली उपन्यास; 
  • आनंदमठ (1882):
    • संन्यासी विद्रोह से प्रेरित, “वंदे मातरम” गीत इसी का हिस्सा है
  • पावर्टी एंड अन-ब्रिटिश रूल इन इंडिया

दादाभाई नौरोजी

  • कविवचन सुधा

भारतेंदु हरिश्चंद्र

  • इंडियन मुसलमान्स

विलियम विल्सन हंटर

  • गुलामगिरी

ज्योतिराव फुले

  • सत्यार्थ प्रकाश, गौकरुणानिधि

स्वामी दयानंद सरस्वती

  • न्यू लैम्प्स फॉर ओल्ड
  • लाइफ डिवाइन
  • भवानी मंदिर
  • वंदे मातरम

अरविंद घोष

“न्यू लैम्प्स फॉर ओल्ड” इंदु प्रकाश पत्रिका में प्रकाशित हुई

  • प्रबुद्ध भारत
  • उद्बोधन

स्वामी विवेकानंद

  • द इकोनॉमिक हिस्ट्री ऑफ इंडिया

रमेश चंद्र दत्त

  • इंडियन वार ऑफ इंडिपेंडेंस

वी. डी. सावरकर

  • बंदी जीवन

सचिंद्रनाथ सान्याल

  • अनहैप्पी इंडिया

लाला लाजपत राय

  • ए नेशन इज मेकिंग

एस. एन. बनर्जी

  • द फिलॉसफी ऑफ बॉम्ब

भगवती चरण वोहरा

घोषणा पत्र (HSRA)

  • द इंडियन स्ट्रगल

सुभाष चंद्र बोस

आत्मकथा

  • इंडिया डिवाइडेड

राजेंद्र प्रसाद

  • द स्टोरी ऑफ द इंटीग्रेशन ऑफ द इंडियन स्टेट्स,
  • द ट्रांसफर ऑफ पावर इन इंडिया

वी. पी. मेनन

  • इंडिया विन्स फ्रीडम

अबुल कलाम आजाद

  • गीता बोध
  • गीता माता
  • द ग्लोरी ऑफ द गीता
  • हिंद स्वराज
  • सत्य के साथ मेरे प्रयोग

महात्मा गांधी

हिंद स्वराज: गुजराती भाषा, लंदन से दक्षिण अफ्रीका की यात्रा के दौरान लिखी गई, स्वराज पर विचार

  • गीता रहस्य
  • द आर्कटिक होम ऑफ द वेदाज

बाल गंगाधर तिलक

  • मैं नास्तिक क्यों हूँ

भगत सिंह

  • पाथेर पांचाली

बिभूतिभूषण बनर्जी

  • द प्रिजन डायरी
  • टू ऑल फाइटर्स ऑफ फ्रीडम

जयप्रकाश नारायण

  • द इंडियन नेशनल इवोल्यूशन

अंबिका चरण मजूमदार

  • बेताल पंचविंशति

शिवदास

कांग्रेस के अधिवेशन 

वर्षस्थानअध्यक्षविशेष विवरण 
1885बॉम्बेडब्ल्यू.सी. बनर्जी72 प्रतिनिधियों ने भाग लिया
1886कलकत्तादादाभाई नौरोजीनेशनल कांग्रेस और नेशनल कॉन्फ्रेंस का विलय
1887मद्राससैयद बदरुद्दीन तैयबजीप्रथम मुस्लिम अध्यक्ष
1888इलाहाबादजॉर्ज यूलप्रथम अंग्रेज अध्यक्ष
1896कलकत्तारहीमतुल्ला सयानीराष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ का पहली बार सार्वजनिक गायन
1905बनारसगोपाल कृष्ण गोखलेबंगाल विभाजन के विरुद्ध रोष व्यक्त किया गया
1906कलकत्तादादाभाई नौरोजी“स्वराज” और “स्वदेशी” शब्द का पहली बार उल्लेख
1907सूरतरास बिहारी घोषकांग्रेस का नरम दल और गरम दल में विभाजन
1908मद्रासरास बिहारी घोष
1911कलकत्ताबिशन नारायण धरसरला देवी चौधरानी द्वारा ‘जन गण मन’ का प्रथम सार्वजनिक गायन
1916लखनऊअंबिका चरण मजूमदारलखनऊ समझौता 
1917कलकत्ताएनी बेसेंटप्रथम महिला अध्यक्ष
1921अहमदाबादसी.आर. दाससी.आर. दास जेल में थे; हकीम अजमल खान कार्यकारी अध्यक्ष बने
1924बेलगामएम.के. गांधीगांधीजी की अध्यक्षता वाला एकमात्र सत्र
1925कानपुरसरोजिनी नायडूINC की प्रथम भारतीय महिला अध्यक्ष
1928कलकत्तामोतीलाल नेहरूपूर्ण स्वराज का प्रस्ताव पारित
1931कराचीवल्लभभाई पटेलमौलिक अधिकार और राष्ट्रीय आर्थिक कार्यक्रम पारित
1936 (अप्रैल)लखनऊजवाहरलाल नेहरू
1936 (दिसंबर)फैजपुरजवाहरलाल नेहरू
1938हरिपुरासुभाष चंद्र बोसनेहरू की अध्यक्षता में राष्ट्रीय योजना समिति का गठन
1939त्रिपुरीसुभाष चंद्र बोसबाद में इस्तीफा दे दिया; राजेंद्र प्रसाद अध्यक्ष बने
1940रामगढ़मौलाना अबुल कलाम आजाद
1948जयपुरपट्टाभि सीतारमैयाआजादी के बाद का पहला सत्र

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