Day 34 | RAS Mains 2025 Answer Writing | 90 Days

90 Days RAS Mains 2025 Answer Writing

This is Day 34 | 90 Days RAS Mains 2025 Answer Writing, We will cover the whole RAS Mains 2025 with this 90-day answer writing program

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GS Answer Writingवैज्ञानिक और तकनीकी प्रगति- रोबोटिक्स, मशीन लर्निंग, ऑगमेंटेड रियलिटी, नैनो प्रौद्योगिकी, आरएफआईडी, क्वांटम कंप्यूटिंग । निबंध लेखन

मशीन लर्निंग, कृत्रिम बुद्धिमत्ता का एक हिस्सा, कंप्यूटर को डेटा से सीखने, पैटर्न को पहचानने और न्यूनतम मानवीय हस्तक्षेप के साथ निर्णय लेने की अनुमति देता है, जिससे विश्लेषणात्मक मॉडल का निर्माण सुव्यवस्थित हो जाता है। 

  • कार्यविधि
    • निर्णय प्रक्रिया: पूर्वानुमान लगाने के लिए प्रशिक्षित मॉडल को लागू करना।
    • त्रुटि मापन: पूर्वानुमान  की सटीकता को मापकर मॉडल प्रदर्शन का मूल्यांकन करना।
    • मॉडल अनुकूलन: त्रुटियों को कम करने के लिए मापदंडों के भारिता(वेटेज) को समायोजित करके मॉडल की  सटीकता में सुधार करना।

अनुप्रयोग

  • वाक् पहचान: जैसे- सिरी, एलेक्सा, आदि।
  • ग्राहक सेवा: जैसे- स्लश, माया चैटबॉट्स, आदि।

पहलूवर्चुअल रियलिटी (VR)ऑगमेंटेड रियलिटी (AR)
पर्यावरणकंप्यूटर-निर्मित वातावरण जो वास्तविक दुनिया का स्थान लेता है।वास्तविक दुनिया का वातावरण जिसमें डिजिटल सामग्री को जोड़ा जाता है।
तल्लीनता पूरी तरह से तल्लीनताआंशिक  तल्लीनता 
कार्यप्रणाली ग्राफिक्स-प्रधान प्रणाली जो एक आभासी वातावरण का निर्माण करती है।वास्तविक दृश्य में प्रासंगिक जानकारी को जोड़ती है।
उद्देश्य  पूरी तरह से कंप्यूटर-निर्मित अपनी अलग वास्तविकता का निर्माण करना।डिजिटल सामग्री द्वारा वास्तविक दुनिया के अनुभव को संवर्धित करना
उपकरण हेडसेट या चश्में जो भौतिक दुनिया को पूरी तरह से अवरुद्ध कर देते हैं।ऐसे हेडसेट, चश्मे या मोबाइल उपकरण जो भौतिक दुनिया पर डिजिटल सामग्री प्रदर्शित करते हैं।
अनुप्रयोग गेमिंग, सिमुलेशन, प्रशिक्षण, मनोरंजननेविगेशन, शिक्षा, गेमिंग, मार्केटिंग, प्रशिक्षण
गति उपयोगकर्ता आभासी दुनिया में 3D वस्तुओं को घुमा सकते हैं, बढ़ा-घटा सकते हैं और स्थानांतरित कर सकते हैंउपयोगकर्ता वास्तविक दुनिया में 3D वस्तुओं को घुमा सकते हैं, बढ़ा-घटा सकते हैं, स्थानांतरित और नियंत्रित कर सकते हैं
वास्तविक दुनिया से संपर्कउपयोगकर्ता वास्तविकता से कट जाते हैं; उनके चारों ओर सब कुछ कृत्रिम होता है।उपयोगकर्ता वास्तविक दुनिया से जुड़े रहते हैं और उसके साथ अंतःक्रिया करते हैं।
  उदाहरण Oculus Rift, HTC Vive, PlayStation VRLenskart AR चश्मे, Pokémon Go, Flipkart 360 डिग्री, Snapchat

  1. क्वांटम कंप्यूटिंग-पारंपरिक कंप्यूटिंग :
पक्षपारंपरिक कंप्यूटिंग क्वांटम संगणना (Quantum Computing)
मूल इकाईबिट्स (0 या 1)क्यूबिट्स (0, 1 या दोनों एक साथ – (0, 1, or both simultaneously)
शासित सिद्धांतशास्त्रीय भौतिकी (Classical Physics)क्वांटम भौतिकी (Quantum Physics) → क्वांटम एन्टैंगलमेंट (Entanglement) और क्वांटम सुपरपोज़िशन (Superposition)
प्रसंस्करण विधिक्रमिक प्रसंस्करण (Sequential Processing)समांतर प्रसंस्करण (Parallel Processing)
गणना की गतिशास्त्रीय भौतिकी और मूर के नियम द्वारा सीमितक्वांटम समांतरता के कारण संभावित रूप से अत्यधिक तीव्र गति
शक्ति (Power)ट्रांजिस्टरों की संख्या के साथ 1:1 अनुपात में शक्ति बढ़ती हैक्यूबिट्स की संख्या के अनुपात में शक्ति घातांकीय रूप से बढ़ती है
शोर सहनशीलताअत्यंत न्यून शोरशोर के प्रति अत्यधिक संवेदनशील (डिकोहेरेंस)
मापनबिट्स के लिए निश्चित मान प्राप्त होते हैंसंभाव्य मापन (Probabilistic Measurement)
प्रतिलिपि पर रोक जानकारी की प्रतिलिपि पर कोई प्रतिबंध नहींक्वांटम जानकारी की प्रतिलिपि करने से उसकी अवस्था नष्ट हो जाती है
संचालन तापमानसामान्य कक्ष तापमान पर कार्य करता हैस्थायित्व हेतु प्रायः क्रायोजेनिक तापमान की आवश्यकता होती है
प्रसंस्करण तंत्रशास्त्रीय लॉजिक गेट्स (जैसे AND, OR, NOT)क्वांटम गेट्स (जैसे हैडामार्ड, CNOT)
अनुप्रयोगसामान्य प्रयोजन कंप्यूटिंगपूर्णांक गुणनखंडीकरण, अनुकूलन (Optimization), और क्वांटम सिमुलेशन
  1. सुपरपोजिशन और एन्टैंगलमेंट :

(क्वांटम एन्टैंगलमेंट → क्यूबिट्स के बीच सहसंबंध सक्षम करता है, क्वांटम सुपरपोजिशन → क्यूबिट्स  को एक साथ कई अवस्थाओं में मौजूद रहने की अनुमति देता है)

सुपरपोजिशन: सुपरपोजिशन किसी क्वांटम यूनिट , जैसे कि क्यूबिट (क्वांटम बिट), की एक साथ कई अवस्था में मौजूद रहने की क्षमता को संदर्भित करता है। सुपरपोज़िशन में एक क्यूबिट एक ही समय में विभिन्न अनुपातों में 0 और 1 दोनों का प्रतिनिधित्व कर सकता है। यह गुण क्वांटम कंप्यूटरों को बड़े पैमाने पर क्वांटम समानांतरवाद (parallelism) को सक्षम कर एक साथ कई गणनाएँ को एक साथ तेज़ी से करने की अनुमति देता है ।

एन्टैंगलमेंट:  एन्टैंगलमेंट एक ऐसी घटना है जहां दो या दो से अधिक कणों (क्यूबिट जोड़ी) की क्वांटम स्थिति इस तरह से सहसंबद्ध हो जाती है कि एक कण की स्थिति को दूसरों की स्थिति से स्वतंत्र रूप से वर्णित नहीं किया जा सकता है, भले ही वे बड़ी दूरी से अलग हों ।इसका मतलब यह है कि एक कण की स्थिति तुरंत दूसरे कण की स्थिति को प्रभावित करती है, चाहे उनके बीच की दूरी कुछ भी हो। इसका उपयोग जटिल गणना करने और क्वांटम क्रिप्टोग्राफी जैसे सुरक्षित संचार प्रोटोकॉल को सक्षम करने के लिए किया जा सकता है।
  1. राष्ट्रीय क्वांटम मिशन के मुख्य प्रावधान:
राष्ट्रीय क्वांटम मिशन (NQM ) : विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) द्वारा 6000 करोड़ रुपये की कुल लागत के साथ लॉन्च किया गया। (2023-24 से 2030-31 तक)

उद्देश्य: मिशन का उद्देश्य क्वांटम टेक्नोलॉजी  में वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान एवं विकास को पोषित करना और बढ़ाना है, जिससे एक जीवंत और अभिनव पारिस्थितिकी तंत्र को बढ़ावा मिलता है।

मिशन प्रदेय : इंटरमीडिएट-स्केल क्वांटम कंप्यूटर (50-1000 भौतिक क्यूबिट) विकसित करें, उपग्रह-आधारित सुरक्षित क्वांटम संचार स्थापित करें, सटीक समय के लिए उच्च-संवेदनशीलता मैग्नेटोमीटर और परमाणु घड़ियां विकसित करना।

मिशन कार्यान्वयन : शीर्ष शैक्षणिक और राष्ट्रीय अनुसंधान एवं विकास संस्थानों में निम्नलिखित पर ध्यान केंद्रित करते हुए चार विषयगत हब (टी-हब) स्थापित करना:
क्वांटम कम्प्यूटिंग
क्वांटम संचार
क्वांटम सेंसिंग और मेट्रोलॉजी
क्वांटम सामग्री और उपकरण

Paper 4 (Comprehension part) –  निबंध

किसी भी शोषण का अहिंसक प्रतिरोध, स्व से पहले दूसरों की सेवा, संचय से पहले त्याग, झूठ के स्थान पर सच, अपने बजाय देश और समाज की चिंता करना आदि विचारों को समग्र रूप से ‘गांधीवाद’ की संज्ञा दी जाती है। गांधीवादी विचार व्यापक रूप से प्राचीन भारतीय दर्शन से प्रेरणा पाते हैं और इन विचारों की प्रासंगिकता अभी भी बरकरार है। आज के दौर में जब समाज में कल्याणकारी आदशों का स्थान असार, अवसरवाद, धोखा, चालाकी, लालच व स्वार्थपरता जैसे संकीर्ण विचारों द्वारा लिया जा रहा है तो समाज सहिष्णुता, प्रेम, मानवता, भाईचारे जैसे उच्च आदर्शों को विस्मृत करता जा रहा है। विश्व शक्तियाँ शस्त्र एकत्र करने की स्पर्धा में लगी हुई हैं। कई देश ऐसे अस्त्र-शस्त्र लिये बैठे हैं, जिनसे एक बार में ही संपूर्ण मानवता को नष्ट किया जा सकता है। ऐसे में विश्व शांति की पुनर्स्थापना के लिये, मानवीय मूल्यों को पुनः प्रतिष्ठित करने के लिये आज गांधीवाद नए स्वरूप में पहले से कहीं अधिक प्रासंगिक हो उठा है।

गांधी जी धर्म व नैतिकता में अटूट विश्वास रखते थे। उनके लिये धर्म, प्रथाओं व आडंबरों की सीमा में बंधा हुआ नहीं वरन् आचरण की एक विधि था। गांधी जी के अनुसार धर्मविहीन राजनीति मृत्युजाल है, धर्म व राजनीति का सह-अस्तित्व ही समाज की बेहतरी के लिये नींव तैयार करता है। गांधी जी साधन व साध्य दोनों की शुद्धता पर बल देते थे। उनके अनुसार साधन व साध्य में बीज व पेड़ के जैसा संबंध है एवं दूषित बीज होने की दशा में स्वस्थ पेड़ की उम्मीद करना अकल्पनीय है।

सत्य और अहिंसा गांधीवाद के आधार स्तंभ हैं। गांधी जी का मत था कि सत्य सदैव विजयी होता है और यदि आपका संघर्ष सत्य के लिये है तो आप हिंसा का लेशमात्र उपयोग किये बिना भी अपनी सफलता सुनिश्चित कर सकते हैं। गांधी जी के विचारों का मूल लक्ष्य सत्य एवं अहिंसा के माध्यम से विरोधियों का हृदय परिवर्तन करना है। गांधी जी व्यक्तिगत जीवन से लेकर वैश्विक स्तर पर ‘मनसा वाचा कर्मणा’ अहिंसा के सिद्धांत का पालन करने पर बल देते थे। आज के संघर्षरत विश्व में अहिंसा जैसा आदर्श अति आवश्यक है। गांधी जी बुद्ध के सिद्धांतों का अनुगमन कर इच्छाओं की न्यूनता पर भी बल देते थे। यदि इस सिद्धांत का पालन किया जाए तो आज क्षुद्र राजनीतिक व आर्थिक उद्देश्यों की पूर्ति के लिये व्याकुल समाज व विश्व अपनी कई समस्याओं का निदान खोज सकता है।

गांधीवाद केवल अध्यात्म अथवा दर्शन तक सीमित हो ऐसा नहीं था। अपने सिद्धांतों में गांधी जी ने राजनीतिक व आर्थिक दृष्टिकोण का भी समाहार किया था। वे दोनों क्षेत्रों में विकेंद्रीकरण के प्रबल पक्षधर थे। आत्मनिर्भर व स्वायत्त ग्राम पंचायतों की स्थापना के माध्यम से ग्रामीण समाज के अंतिम छोर पर मौजूद व्यक्ति तक शासन की पहुँच सुनिश्चित करना ही गांधी जी का ग्राम स्वराज्य सिद्धांत था। आर्थिक मामलों में भी गांधी जी विकेंद्रीकृत अर्थव्यवस्था के माध्यम से लघु, सूक्ष्म व कुटीर उद्योगों की स्थापना पर बल देते थे। उनका मत था कि भारी उद्योगों की स्थापना के पश्चात् इनसे निकलने वाली जहरीली गैसें व धुआँ पर्यावरण को प्रदूषित करते हैं, साथ ही बहुत बड़े उद्योगों का अस्तित्व श्रमिक वर्ग के शोषण का भी मार्ग तैयार करता है। जलवायु परिवर्तन आज विश्व की सबसे बड़ी समस्या है। ऐसे में गांधी जी के ये विचार शत-प्रतिशत सत्य व प्रासंगिक प्रतीत होते हैं। गांधी जी ने अपने आर्थिक आदशों में पूंजीवाद व समाजवाद का अद्वितीय समन्वय किया। न तो वे पूंजी के केंद्रीकरण के पक्षधर थे और न ही वे अमीरों की पूंजी गरीबों में बाँट देने की बात करते थे। उनके विचार में धन व उत्पादन के साधनों पर सामूहिक नियंत्रण की स्थापना हेतु एक न्यास जैसी व्यवस्था स्थापित करने पर बल दिया जाना चाहिये। उनके अनुसार न तो पूंजीवाद को नष्ट करना संभव था व न ही मार्क्स के सुझाए साम्यवाद की स्थापना। अतः एक मध्यमार्ग ही उचित विकल्प होगा।

गांधी जी शिक्षा के संदर्भ में अध्ययन व जीविका कमाने का कार्य एक साथ करने पर बल देते थे। आज जब बेरोज़गारी देश की इतनी बड़ी समस्या है तब गांधी जी के इस विचार को ध्यान में रखकर शिक्षा नीतियाँ बनाना लाभप्रद होगा। गांधी जी का राष्ट्र का विचार भी अत्यंत प्रगतिशील था। उनका राष्ट्रवाद ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ के विचार से प्रेरित था। वे राष्ट्रवाद की अंतिम परिणति केवल एक राष्ट्र के हितों तक सीमित न मानते हुए उसे विश्व कल्याण की दिशा में विस्तृत करने पर बल देते थे। आजकल राष्ट्रवाद का अतिवादी होता स्वरूप को देखते हुए गांधीवादी राष्ट्रवाद सटीक लगता है।

गांधीवाद की प्रासंगिकता को समझते हुए हमारे देश के संविधान में भी उनके कई विचारों को स्थान दिया गया व उन विचारों का आज भी प्रासंगिक होना यह सिद्ध करता है कि गांधी के विचार कभी भी पुराने नहीं पड़ सकते। विश्व की समस्याओं का समाधान खोजने की राह गांधीवाद में समुचित नवाचार कर उसे प्रयोग करने से काफी आसान हो सकेगी।

Day 34 | 90 Days RAS Mains 2025 Answer Writing

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