भारतीय साहित्य (सिंधु सभ्यता से ब्रिटिश काल तक)

  • आर्यभट्ट ने “आर्यभटीय” और “आर्य-सिद्धांत” लिखा।
    • इसमें  सूर्य और चंद्र ग्रहण की घटना  तथा पृथ्वी आकार में गोलाकार है और यह अपनी धुरी पर घूमती है, का वर्णन है |
    • शून्य का ज्ञान आर्यभट्ट की स्थान-मूल्य प्रणाली, π के सन्निकटन, साइन की अवधारणा (अर्ध-ज्य) में निहित था।
  • ब्रह्मगुप्त
    • “ब्रह्मस्फुटसिद्धांत”: अंकगणितीय जोड़-तोड़ के लिए नियम 
    • गुरुत्वकर्षणम् (गुरुत्वाकर्षण) की अवधारणा दी।
    • “खंडखाद्यक”: ग्रहों के देशांतर, दैनिक घूर्णन, चंद्र और सूर्य ग्रहण आदि का वर्णन
  • वराहमिहिर ने ज्योतिष शास्त्र पर “पंच सिद्धांतिका” और “बृहदसंहिता” की रचना की
  • चिकित्सा के क्षेत्र में वाग्भट्टअष्टांगसंग्रह” (चिकित्सा की आठ शाखाओं का सारांश) के रचयिता थे।
विशेषताश्रुति (Shruti)स्मृति (Smriti)
अर्थ“सुनी गई” (दैवीय रूप से प्रकट ज्ञान)“स्मरण की गई” (मनुष्यों द्वारा रचित और स्मरण की गई)
उदाहरणवेद (ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद, अथर्ववेद), उपनिषदधर्मशास्त्र (मनुस्मृति), इतिहास (रामायण, महाभारत), पुराण
प्रामाणिकताहिंदू धर्म में सर्वोच्च और शाश्वत प्रामाणिकताद्वितीयक प्रामाणिकता, समय के साथ संशोधित या अनुकूलित की जा सकती है
विषय-वस्तुदार्शनिक, आध्यात्मिक और वैदिक अनुष्ठानों का ज्ञानसामाजिक कानून, नैतिकता, रीति-रिवाज, और ऐतिहासिक कथाएँ
लचीलापन          स्थायी और अपरिवर्तनीयपरिवर्तनशील और सामाजिक परिवर्तनों के अनुरूप अनुकूलनशील

विजयनगर के सबसे महान शासक कृष्णदेव राय तुलुव वंश के थे। वह साहित्य और कला के महान संरक्षक थे और उन्हें आंध्र भोज के नाम से जाना जाता था।

  • एक निपुण विद्वान: कृष्णदेवराय स्वयं बहुभाषी थे और कन्नड़, संस्कृत, तेलुगु और तमिल में पारंगत थे। उन्होंने स्वयं एक महाकाव्य तेलुगु कविता अमुक्तमाल्यदा की रचना की। उनकी संस्कृत कृतियों में ‘मदालसा चरित’, ‘सत्यवदु परिणय’, ‘रसमंजरी’ और ‘जाम्बवती कल्याण‘ शामिल हैं।
  • साहित्यिक उपलब्धि का शिखर : कृष्णदेवराय का शासनकाल तेलुगु साहित्य का स्वर्ण युग कहा जाता है। आठ तेलुगु कवियों को उनकी साहित्यिक सभा के आठ स्तंभ माना जाता था और अष्टदिग्गज के नाम से जाना जाता था। अल्लासानि पेद्दन्ना सबसे महान थे और उन्हें आंध्रकविता पितामगा कहा जाता था। उनके महत्वपूर्ण कार्यों में मनुचरितम् और हरिकथासारम शामिल हैं। पिंगली सुरन्ना और तेनाली रामकृष्ण अन्य महत्वपूर्ण विद्वान थे।
  • सांस्कृतिक योगदान: उन्होंने विजयनगर में प्रसिद्ध विट्ठलस्वामी और हजारा रामास्वामी मंदिरों का भी निर्माण कराया। उन्होंने अपनी रानी नागलादेवी की याद में नागालपुरम नामक एक नया शहर भी बसाया
  • इस प्रकार, कृष्णदेव राय का शासनकाल, जो उनकी बौद्धिक प्रतिभा से परिपूर्ण था, विजयनगर के इतिहास में सांस्कृतिक पुनर्जागरण का एक गौरवशाली युग सिद्ध हुआ।

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