धारा 149 के अनुसार, विधि-विरुद्ध जमाव तब माना जाता है जब 5 या अधिक व्यक्ति किसी साझा उद्देश्य (Common Object) के साथ इकट्ठा होते हैं और वह उद्देश्य निम्नलिखित में से कोई एक हो:
- किसी व्यक्ति को आपराधिक बल प्रयोग करके डराना या चोट पहुँचाना।
- किसी संपत्ति को क्षति पहुँचाना।
- किसी व्यक्ति को अवैध रूप से रोकना या confinement करना।
- किसी अपराध को करने के लिए बल प्रयोग करना।
- सार्वजनिक शांति भंग करना या किसी अपराध को अंजाम देना।
जब पाँच या अधिक व्यक्ति ऐसे साझा उद्देश्य के साथ इकट्ठे होते हैं, तो पूरा जमाव विधि-विरुद्ध जमाव माना जाता है।
दण्ड (Punishment):
- धारा 149: यदि कोई व्यक्ति विधि-विरुद्ध जमाव का सदस्य है, तो वह उस जमाव द्वारा किए गए किसी भी अपराध के लिए दंडनीय होगा, भले ही उसने स्वयं अपराध न किया हो।
- धारा 150: विधि-विरुद्ध जमाव का सदस्य होने पर — 6 माह तक की कैद या जुर्माना या दोनों।
- धारा 151: यदि कोई व्यक्ति विधि-विरुद्ध जमाव में शामिल होने से मना करने के बाद भी शामिल होता है — 6 माह तक की कैद या जुर्माना या दोनों।
- धारा 152: यदि विधि-विरुद्ध जमाव सार्वजनिक सेवक द्वारा आदेश दिए जाने के बावजूद नहीं बिखरता — 2 वर्ष तक की कैद या जुर्माना या दोनों।
धारा 268 के अनुसार, “सार्वजनिक उपद्रव” वह कार्य है जिसमें कोई व्यक्ति कोई कृत्य करता है या कोई अवैध लोप (illegal omission) करता है, जिससे जनसाधारण को या आस-पास रहने वाले लोगों को सामान्य चोट, खतरा या परेशानी होती है, या जो किसी सार्वजनिक अधिकार का उपयोग करने वाले व्यक्तियों को बाधा, खतरा या परेशानी अवश्यम्भावी रूप से उत्पन्न करता है।
सरल शब्दों में: जब कोई कार्य या लोप इतना व्यापक होता है कि वह आम जनता की सुविधा, स्वास्थ्य, सुरक्षा या आराम को प्रभावित करता है, तो उसे सार्वजनिक उपद्रव कहा जाता है।
आवश्यक तत्व (Essential Ingredients):
- कृत्य या अवैध लोप — कोई सक्रिय कार्य या कानूनी कर्तव्य न निभाना।
- जनसाधारण को प्रभाव — उपद्रव एक या कुछ व्यक्तियों को नहीं, बल्कि जनता के बड़े वर्ग को प्रभावित करे।
- अवैधता या अनुचितता — कार्य अवैध या युक्तिसंगत न हो।
- चोट, खतरा या परेशानी — स्वास्थ्य, संपत्ति, सुविधा या सार्वजनिक अधिकारों को नुकसान पहुँचना।
दण्ड (Punishment):
- धारा 290: सामान्य सार्वजनिक उपद्रव के लिए — 500 रुपये तक का जुर्माना।
- धारा 291: यदि मजिस्ट्रेट द्वारा उपद्रव बंद करने का आदेश दिए जाने के बाद भी व्यक्ति उपद्रव जारी रखता है, तो — 6 माह तक की कैद या जुर्माना या दोनों।
