• भरण-पोषण का अधिकार: ऐसे माता-पिता या दादा-दादी जो स्वयं का भरण-पोषण करने में असमर्थ हों, वे अपने बच्चों (अवयस्क बच्चों को छोड़कर) से भरण-पोषण की मांग कर सकते हैं। संतानहीन वरिष्ठ नागरिक अपने संबंधी/रिश्तेदारों से भरण-पोषण की मांग कर सकते हैं।
  • भरण-पोषण के लिए आवेदन: वरिष्ठ नागरिक या माता-पिता स्वयं या किसी अधिकृत व्यक्ति के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं। न्यायाधिकरण (Tribunal) स्वप्रेरणा से भी कार्यवाही कर सकता है।
  • भरण-पोषण न्यायाधिकरण: राज्य सरकारों को छह माह के भीतर उपखंड अधिकारी (SDO) स्तर के अधिकारी की अध्यक्षता में न्यायाधिकरण स्थापित करना अनिवार्य है।
  • भरण-पोषण का आदेश: यदि संतान या रिश्तेदार भरण-पोषण से इनकार करते हैं, तो न्यायाधिकरण मासिक भत्ता (अधिकतम ₹10,000 तक) देने का आदेश दे सकता है।
  • अपील: वरिष्ठ नागरिक या माता-पिता 60 दिनों के भीतर अपीलीय न्यायाधिकरण (Appellate Tribunal) में अपील कर सकते हैं। विलंबित अपील उचित कारण होने पर स्वीकार की जा सकती है।
  • भरण-पोषण अधिकारी: जिला सामाजिक कल्याण अधिकारी (District Social Welfare Officer) कार्यान्वयन की निगरानी करता है।
  • वृद्धाश्रम: राज्य को निर्धन वरिष्ठ नागरिकों के लिए वृद्धाश्रम स्थापित करना अनिवार्य है, प्रत्येक में कम से कम 150 निवासियों की क्षमता होनी चाहिए
  • भरण-पोषण से तात्पर्य माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों के सम्मानजनक जीवनयापन के लिए आवश्यक बुनियादी सहायता से है।
  • अधिनियम की धारा 2(ख) के अनुसार, इसमें निम्नलिखित शामिल हैं:
    • भोजन
    • वस्त्र
    • निवास और
    • चिकित्सा सहायता और उपचार।
  • बच्चे और उत्तराधिकारी कानूनी रूप से भरण-पोषण प्रदान करने के लिए बाध्य हैं।

धारा 4 के अधीन भरणपोषण के लिए कोई आवेदन-

  • यथास्थिति, किसी वरिष्ठ नागरिक या किसी माता-पिता द्वारा किया जा सकेगा; या
  • यदि वह अशक्त है तो उसके द्वारा प्राधिकृत किसी अन्य व्यक्ति या संगठन द्वारा किया जा सकेगा; या
  • अधिकरण स्वप्रेरणा से संज्ञान ले सकेगा।

स्पष्टीकरण – इस धारा के प्रयोजनों के लिए “संगठन” से सोसाइटी रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 1860 या तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि के अधीन रजिस्ट्रीकृत कोई स्वैच्छिक संगम अभिप्रेत है।

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