सामाजिक लेखा परीक्षा: किसी संगठन के सामाजिक और नैतिक प्रदर्शन का व्यवस्थित और आलोचनात्मक मूल्यांकन, सामाजिक सेवा वितरण प्रभावशीलता का आकलन करने के लिए हितधारकों-समुदाय के सदस्यों, गैर सरकारी संगठनों और लाभार्थियों द्वारा सहयोगात्मक रूप से किया जाता है। यह किसी संगठन के प्रदर्शन को मापने, उसका आकलन करने और उसे बेहतर बनाने में सहायता करता है।

सामाजिक लेखा परीक्षा के प्राथमिक उद्देश्यों में शामिल हैं:

  1. जवाबदेही: नीतियों, परियोजनाओं और कानूनों के कार्यान्वयन में सार्वजनिक जवाबदेही सुनिश्चित करना।
  2. पारदर्शिता: रिपोर्टिंग और वित्तीय लेखांकन में पारदर्शिता को बढ़ावा देना।
  3. अनुपालन: यह सत्यापित करना कि संगठन स्थानीय और अंतर्राष्ट्रीय कानूनों, नैतिक मानकों और स्थिरता प्रथाओं का पालन करता है।
  4. प्रभाव: स्थानीय समुदाय पर संगठन के सामाजिक और पर्यावरणीय प्रभाव का आकलन करना।
  5. संगति: सार्वजनिक नीति के वादों और वास्तविक परिणामों के बीच संगति को मापना।
  6. भ्रष्टाचार: भ्रष्ट प्रथाओं को रोकना और गलत कामों को उजागर करना।
  7. सुधार: अंतराल की पहचान करना, नैतिक आचरण को बढ़ावा देना और संगठन की प्रभावशीलता में सुधार करना।
  8. सार्वजनिक धारणा: समय के साथ संगठन की सार्वजनिक धारणा में सुधार करना।

निष्पादन अंकेक्षण एक स्वतंत्र मूल्यांकन है, जिसमें किसी संगठन, परियोजना या कार्यक्रम का यह आकलन किया जाता है कि क्या वह अपेक्षित परिणाम (Intended Outcomes) को प्रभावी तरीके से (Effectively) और कुशलतापूर्वक (Efficiently) प्राप्त कर रहा है या नहीं।

  • योजनाओं के वास्तविक कार्यान्वयन की निगरानी करके और यह मूल्यांकन करके कि क्या अपेक्षित परिणाम प्राप्त हुए हैं, जवाबदेही को बढ़ावा देता है।
  • यह मूल्यांकन करता है कि क्या सार्वजनिक कार्यक्रम और योजनाएँ न्यूनतम संसाधनों के साथ अधिकतम परिणाम प्रदान करती हैं।
  • यह जाँच करता है कि क्या सभी संसाधन, अर्थात् वित्तीय, मानवीय और भौतिक संसाधन, प्रभावी ढंग से उपयोग किए जा रहे हैं।
  • यह जाँच करता है कि क्या सरकारी विभागों या कार्यक्रमों में परिचालन संबंधी बाधाओं, प्रक्रियागत देरी और प्रणालीगत कमज़ोरियों की पहचान करता है और प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित करने के उपाय सुझाता है।
  • पूँजी पर प्रतिफल: सरकार या सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयों (पीएसयू) द्वारा निवेशित पूँजी, लाभ, सेवाओं या सार्वजनिक लाभ के रूप में कितनी प्रभावी रूप से प्रतिफल उत्पन्न कर रही है।
  • क्षमता उपयोग: उपलब्ध क्षमता (संयंत्र, कार्यबल, प्रणालियाँ) का, संभावित क्षमता की तुलना में, कितना उपयोग किया जा रहा है? कम क्षमता उपयोग, अकुशलता का संकेत देता है।
  • मानव संसाधन, मशीनों और सामग्रियों का इष्टतम उपयोग: क्या मानव संसाधन, उपकरण और कच्चे माल का उपयोग कुशलतापूर्वक, बिना किसी अपव्यय या कम उपयोग के किया जा रहा है।

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