राजस्थान के प्रमुख महल

राजस्थान के प्रमुख महल: राजस्थान की कला एवं संस्कृति अपनी भव्य स्थापत्य परंपरा और शाही विरासत के लिए प्रसिद्ध है। राजस्थान के प्रमुख महल राज्य के राजपूत शासकों की समृद्ध संस्कृति, वास्तुकला और ऐतिहासिक वैभव को दर्शाते हैं। ये महल न केवल ऐतिहासिक दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं, बल्कि राजस्थान की कला एवं संस्कृति के गौरवशाली प्रतीक भी हैं।

जयपुर संभाग के महल

महल

निर्माण, वास्तुकला एवं प्रमुख विशेषताएँ

हवामहल  (जयपुर)

  • निर्माण – 1799 ई., सवाई प्रतापसिंह 
  • वास्तुकार: लालचन्द उस्ता 
  • बिना नींव की बनी इमारत (953 झरोखे व 365 खिड़कियाँ), गुलाबी-लाल बलुआ पत्थर, पाँच मंजिलें: शरद (पहली), रत्न, विचित्र, प्रकाश, हवा मंदिर (पाँचवी), कृष्ण मुकुट के समान आकृति, • महिलाओं द्वारा उत्सव देखने हेतु निर्मित
  • प्रथम मंजिल पर स्थित प्रताप मंदिर महाराजा प्रतापसिंह का निजी कक्ष था

सिटी पैलेस (जयपुर)

  • निर्माण: 1729–1732 ई., सवाई जयसिंह द्वितीय
  • शैली: राजपूत-मुगल-यूरोपीय मिश्रित, सर सैमुअल स्विंटन जैकब की देखरेख
  • प्रमुख भवन:
    • चन्द्र महल
      • 7 मंजिला राजनिवास, वास्तुकार: विद्याधर
      • मंजिलें: चन्द्र मंदिर, सुख निवास, रंग मंदिर, शोभा निवास, छवि निवास, श्रीनिवास, साखी मंजिल 
    • मुबारक महल
      • सर सैमुअल स्विंटन जैकब
      • अतिथि निवास हेतु, वर्तमान में यह वस्त्रालय है
    • दीवान-ए-आम 
      • इसमें महाराजा का निजी पुस्तकालय (पोथीखाना) एवं शस्त्रागार था 
    • दीवान-ए-खास (सर्वतोभद्र चौक)
      • इसमें विश्व के सबसे बड़े चाँदी के दो गंगाजल पात्र रखे हुए हैं जो की माधोसिंह द्वितीय इंग्लैण्ड यात्रा में साथ लेके गये थे
    • प्रीतम निवास चौक
      • चार ऋतु प्रतीक द्वार
      • मयूर (शरद ऋतु), कमल (ग्रीष्म ऋतु), लहरिया/हरा (बसंत ऋतु), गुलाब (शिशिर ऋतु) 
    • गोविन्द देव जी मंदिर
  • प्रवेश द्वार: त्रिपोलिया गेट (मुख्य), विरेंद्र पोल, उदय पोल (सिरह-ड्योढ़ी)

बादल महल (जयपुर)

  • जयपुर की प्राचीनतम इमारतों में

जलमहल (मानसागर झील)

  • निर्माण: सवाई जयसिंह 
  • 5 मंजिला, केवल 2 मंजिल जल से ऊपर 
  • झील निर्माण: मानसिंह प्रथम (गर्भावती नदी पर बाँध) 
  • ‘आई बॉल’ के नाम से प्रसिद्ध/ ’रोमांटिक महल’ के नाम से भी जाना जाता है

जन्तर-मन्तर (जयपुर)

  • निर्माण: 1724–1734 ई., सवाई जयसिंह द्वितीय
  • जयसिंह जी द्वारा बनवाई गई पाँच खगोलीय वेधशालाओं (दिल्ली – सबसे पहली, जयपुर, उज्जैन – भारत का ग्रीनविच, मथुरा और बनारस) में सबसे विशाल
  • 19 खगोलीय यंत्र, विश्व की सबसे बड़ी सूर्य घड़ी (वृहत् सम्राट यंत्र) 
  • यूनेस्को विश्व धरोहर: 31 जुलाई 2010

जयपुर का परकोटा

  • 7 दरवाजे: सूरजपोल, चाँदपोल, अजमेरी, सांगानेरी, घाट, न्यू, ध्रुव पोल 
  • 1876 ई. में सवाई रामसिंह द्वितीय द्वारा गुलाबी रंग
  • यूनेस्को विश्व धरोहर: 6 जुलाई 2019

अल्बर्ट हॉल संग्रहालय

  • निर्माण: रामसिंह द्वितीय, शैली: इंडो-सार्सेनिक
  • राजस्थान का सबसे पुराना संग्रहालय (1887)
  • 2300 वर्ष पुरानी मिस्र की ममी ‘तुतु

ईसरलाट / सरगासूली

  • निर्माण: 1749 ई., ईश्वरी सिंह 
  • मराठों पर विजय की स्मृति 
  • 1750 ई. में ईश्वरी सिंह ने यहीं से कूदकर आत्महत्या की

सिसोदिया रानी का बाग

  • निर्माण: 1728 ई., सवाई जयसिंह द्वितीय 
  • मुगल शैली के बगीचे

सामोद महल

  • निर्माण: लगभग 1550 ई., रावल श्योसिंह
  • यह एक शीशमहल है, जिसे सुल्तान महल भी कहते हैं
  • वर्तमान में हेरिटेज होटल

खेतड़ी महल (झुंझुनूं)

  • निर्माण: 1770 ई., महाराजा भोपालसिंह द्वारा ग्रीष्म ऋतु में विश्राम हेतु 
  • पाँच मंजिला, कृष्ण के मुकुट की शक्ल, कोई भी झरोखा / द्वार नहीं है 
  • शेखावाटी का हवामहल’/ ‘राजस्थान का दूसरा हवा महल
  • स्वामी विवेकानन्द 1891 ई. में यहाँ रुके

विजय मंदिर पैलेस  (अलवर)

  • निर्माण: 1918 ई., महाराजा जयसिंह (अलवर)
  • विजय सागर झील के किनारे स्थित 
  • जहाज की आकृति में निर्मित
  • परिसर में सीताराम जी का भव्य मंदिर

अलवर सिटी पैलेस 

  • निर्माण: 1793 ई., महाराजा बख्तावर सिंह राजपरिवार का निवास स्थल
  • आंगन में कमल के फूल के आकार का संगमरमर का मण्डप
  • पीछे मूसी महारानी की छतरी
  • पास में सागर जलाशय स्थित

सिलीसेढ़ पैलेस (अलवर)

  • निर्माण: 1845 ई., विनय सिंह
  • रानी शीला के लिए निर्मित
  • सिलीसेढ़ झील के किनारे स्थित
  • झील निर्माण: रूपारेल की सहायक नदी रोककर
  • राजस्थान का प्रवेश द्वार 
  • वर्तमान में RTDC होटल

सरिस्का पैलेस  (अलवर)

  • निर्माण: 1902 ई., महाराजा जयसिंह (अलवर)
  • ड्यूक ऑफ एडिनबर्ग के शिकार प्रवास हेतु
  • सरिस्का टाइगर रिज़र्व के मध्य स्थित
  • करण-अर्जुन फिल्म में ठाकुर दुर्जनसिंह की हवेली

पुर्जन विहार(अलवर)

  • निर्माण: 1868 ई., महाराजा शिवदान सिंह
  • इस बगीचे के मध्य में समर हाउस (महाराजा मंगल सिंह), कंपनी गार्डन भी कहते हैं

होप सर्कस / कैलाश बुर्ज – (अलवर)

  • निर्माण: 1939–40 ई., महाराजा तेज सिंह
  • वायसराय लिनलिथगो की पुत्री मिस होप के नाम पर
  • 3 मंजिला इमारत, शीर्ष पर शिव मंदिर
  • अन्य नाम – अलवर का हृदय स्थल / कैलाश बुर्ज
Palaces | राजस्थान के प्रमुख महल

हवा बंगला (खैरथल- तिजारा)

  • तिजारा की पहाड़ी पर 
  • निर्माण – बख्तावर सिंह विनय सिंह

अन्य महल – रेशमा महल(सीकर), सुल्तान महल (जयपुर)

जोधपुर संभाग के महल

महल

निर्माण, वास्तुकला एवं प्रमुख विशेषताएँ

उम्मेद भवन पैलेस (जोधपुर)

  • 1929-1943, अकाल राहत कार्य के रूप में
  • वास्तुकार – हेनरी वॉघन लैन्चेस्टर
  • छीतर पहाड़ी पर निर्मित होने के कारण ’छीतर महल’ भी कहलाता है
  • विश्व का सबसे बड़ा रिहायशी महल
  • शैली – ’इंडो सरसेनिक क्लासिकल रिवाइवल’ और पश्चिमी आर्ट डेको शैली की मिश्रित संरचना

मोती महल (जोधपुर)

  • एक सभा मंडप, जहां शाही परिवार अपनी प्रजा के साथ रूबरू होते थे
  • विशेषता – कांच की खिड़कियाँ, पांच कोने

एक थम्बा महल (मण्डोर)

  • महाराजा अजीत सिंह द्वारा 
  • अन्य नाम – प्रहरी मीनार/एक खम्भा महल
  • अष्टकोणीय खम्भे के आकार में बना तीन मंजिला इमारत

जसवंत थड़ा (जोधपुर)

  • 1899 में सरदार सिंह जी द्वारा पिता जसवंत सिंह की स्मृति में
  •  “मारवाड़ का ताजमहल”

चोखेलाव महल (जोधपुर)

  • चित्रों के लिए प्रसिद्ध – मारवाड़ चित्र शैली, जन-जीवन से जुड़े चित्र

मंदिर पैलेस(जैसलमेर)

  • 1884 – ताज़िया के आकार में होने के कारण इसे ’ताज़िया टॉवर’ भी कहते हैं
  • पाँच मंजिला (बादल विलास – शहर की सबसे ऊँची इमारत)

अन्य महल – शीश महल (मेहरानगढ़ किला), फूल महल (पुष्प के समान स्वर्ण अलंकरण, महाराज के मनोरंजन कक्ष), सरदार समंद महल-पाली (1933, महाराजा उम्मेद सिंह), अजीत भवन पैलेस (जोधपुर), राईका बाग पैलेस (जोधपुर) – जसवंत सिंह-I, बुलानी महल (जोधपुर), सरदार क्लॉक टॉवर -जोधपुर(1910 महाराजा सरदार सिंह), बीजोलाई का महल -जोधपुर (महाराजा तख्तसिंह, शिकार गृह), गडरा शहीद स्मारक (बाड़मेर), सर्वोत्तम विलास महल(जैसलमेर), राजविलास महल(जैसलमेर), जवाहर विलास (जैसलमेर), गज विलास(जैसलमेर), घानेराव महल (पाली)

उदयपुर संभाग के महल

महल

निर्माण, वास्तुकला एवं प्रमुख विशेषताएँ

राजमहल / सिटी पैलेस (उदयपुर)

  • 1559 ई., महाराणा उदयसिंह
  • पिछोला झील के तट पर
  • मुख्य आकर्षण – मोर चौक, चीनी चित्रशाला, जनाना महल, सिल्वर गैलरी, प्रताप संग्रहालय, कृष्णा विलास, माणक चौक, मोती महल
  • फर्ग्यूसन ने लंदन के “विंडसर महल” से तुलना

जग मंदिर (उदयपुर)

  • 1620–1652 ई. महाराणा कर्णसिंह – जगतसिंह प्रथम 
  • शाहजहाँ (खुर्रम) को शरण; 1857 क्रांति में अंग्रेज परिवारों को शरण
  • पिछोला झील के मध्य, ग्रीष्म कालीन निवास 
  • ऐसा कहा जाता है कि इस महल से प्रेरित एवं प्रभावित होने के फलस्वरूप ही सम्राट शाहजहां ने आगे चलकर ताजमहल का निर्माण किया

जगनिवास / लेक पैलेस (उदयपुर)

  • 1746 ई., जगतसिंह-II; 
  • पिछोला झील के मध्य, वर्तमान में ताज लेक पैलेस

सज्जनगढ़ पैलेस 

  • 19वीं शताब्दी, एक खगोलीय केन्द्र के रूप में, अब ‘मानसून पैलेस’ के नाम से प्रसिद्ध

हाड़ी रानी का महल (सलूम्बर)

  • राव रतनसिंह की पत्नी; “चुंडावत मांगी सैनाणी…”; मेघराज मुकुल द्वारा रचित कविता
  • महाराजा/राजकुमार के महल (सलूम्बर) – जयसमंद झील के किनारे, फ़तेह सिंह जी द्वारा

दिवेर विजय स्मारक (राजसमंद)

  • स्थानीय भाषा में – मेवाड़ का मथारा 
  • NH-58 के पास

मानगढ़ धाम स्मारक (बाँसवाड़ा)

  • 17 नवम्बर 1913 आदिवासी बलिदान; 
  • संत गोविन्द गुरू की कर्मस्थली 
  • “राजस्थान का जलियाँवाला बाग”

उदयविलास पैलेस (डूंगरपुर)

  • महारावल उदयसिंह-II ; गैपसागर झील किनारे
  • महल को रानीवास,जूना महल, उदय विलास और कृष्ण प्रकाश में विभाजित किया गया है

जूना महल / ओल्ड पैलेस (डूंगरपुर)

  • रावल वीरसिंह देव; 7 मंज़िला
  • धनमाता पहाड़ी (भित्ति चित्रों के लिए प्रसिद्ध)

एक थम्बिया महल (डूंगरपुर)

  • महारावल शिवसिंह राजमाता ज्ञानकुंवर की स्मृति में शिवालय के रूप में 
  • चारों तरफ़ से 4 महलों से घिरा –  विजय निवास, उदय विलास, लक्ष्मण निवास खुमाण निवास

बादल महल(डूंगरपुर)

  • गैप सागर झील के किनारे स्थित
  • पारेवा पत्थर का उपयोग

अन्य महल – राज मंदिर/सिटी पैलेस  – (बाँसवाड़ा), स्वरूप निवास महल/केसर निवास महल/केसर विलास पैलेस (सिरोही), ओखा रानी का महल (अचलगढ़), गोरा-बादल महल (चित्तौड़), फतेह प्रकाश महल (चित्तौड़ क़िले में प्रताप द्वारा ), पद्मिनी महल (चित्तौड़)

कोटा संभाग के महल

महल

निर्माण, वास्तुकला एवं प्रमुख विशेषताएँ

छत्रविलास जगमंदिर महल (कोटा)

  • किशोर सागर तालाब के मध्य; 1743–45 ई.;
  • महाराव दुर्जनशाल सिंह जी की सिसोदिया महारानी ब्रज कंवर जी द्वारा

अबली मीणी का महल (कोटा)

  • राव मुकुन्दसिंह द्वारा निर्मित 
  • ‘हाड़ौती का ताजमहल’ / ‘राजस्थान का दूसरा ताजमहल’ (नोट – राजस्थान का ताजमहल – जोधपुर में स्थित जसवंत थड़ा)

अभेड़ा महल (कोटा)

  • चम्बल नदी किनारे, महाराव अभयसिंह हाड़ा द्वारा हाड़ौती का हवामहल
  • इसमें राजकुमारी धीरदेह ने पानी का कृत्रिम जलाशय बनाया था

रंग विलास महल (बूंदी)

  • उम्मेद सिंह के द्वारा चित्रशाला के रूप मे

रंगमहल

  • महाराव छत्रसाल
  • बूंदी में भित्ति चित्रों हेतु

काठ का रैन बसेरा महल  (झालावाड़)

  • 1936, कृष्ण सागर झील के तट पर झील किनारे
  • देहरादून वन शोध संस्थान (FRI) द्वारा लकड़ी से निर्मित विश्रामगृह

अन्य महल – गढ़ पैलेस/सिटी पैलेस (कोटा), गुलाब महल उदयपुर (राव जैत्रसिंह हाड़), सुख महल बूंदी (जैतसागर झील किनारे, 1773 ई.-राजा विष्णुसिंह), उम्मेद महल (बूंदी), फूल सागर महल (बूंदी), छत्रमहल, राजगढ़ महल (बूंदी का राजमहल)

भरतपुर संभाग के महल

महल

निर्माण, वास्तुकला एवं प्रमुख विशेषताएँ

डीग के महल (डीग)

  • डीग के महल – बदन सिंह द्वारा 1725 ई.
  • डीग के जलमहल – महाराजा सूरजमल द्वारा  
  • डीग -“जलमहलों की नगरी”/ दीर्घपुर (पुराना नाम )
  • सावन-भादों महलगोपाल महल (बदन सिंह जी द्वारा)

निहाल टॉवर (धौलपुर)

  • 8 मंज़िला घंटाघर (1880–1910)
  • निहाल सिंह द्वारा प्रारंभ – रामसिंह द्वारा पूरा 
  • राजस्थान का सबसे बड़ा घंटाघर

तालाब शाही महल (धौलपुर)

  • 1622 ई. सलेह ख़ान द्वारा शाहजहाँ के लिए निर्मित

धौलपुर महल (धौलपुर)

  • शाही निवास
  • ’राज निवास पैलेस / सिटी पैलेस

अन्य महल – किशोरी महल (भरतपुर), जोगी महल (रणथम्भौर दुर्ग), सुपारी महल (रणथम्भौर)

अजमेर संभाग के महल

महल

निर्माण, वास्तुकला एवं प्रमुख विशेषताएँ

अढ़ाई दिन का झोंपड़ा (अजमेर)

  • मूलत: बीसलदेव की संस्कृत पाठशाला, बाद में कुतुबुद्दीन ऐबक ने मस्जिद में बदला (1198 ई.) सुल्तान इल्तुतमिश ने इसे और ज्यादा सुशोभित किया 
  • वास्तुकार अबू बक्र

मेयो कॉलेज (अजमेर)

  • स्थापना रिचर्ड बॉर्क द्वारा 1875 ई. में;
  • डिजाइन सैमुअल स्विंटन जैकब; सफेद संगमरमर

पृथ्वीराज स्मारक (अजमेर)

  • पृथ्वीराज चौहान तृतीय की स्मृति में 
  • तारागढ़ पहाड़ी मार्ग पर

विक्टोरिया जुबली क्लॉक टॉवर (अजमेर)

  • यह घन्टा घर सन् 1887 में महारानी विक्टोरिया की स्वर्ण जयंती के उपलक्ष्य में 

जहाँगीर के महल (पुष्कर)

  • पुष्कर झील किनारे; वराह घाट के सामने

मुबारक महल (टोंक)

  • 1817; इस्लामिक शैली
  • बकरा ईद पर ऊँट कुर्बानी दी जाती थी (नवाब इब्राहिम अली खाँ द्वारा शुरू)

अन्य महल – राजमहल(टोंक), सुनहरी कोठी / जरगिनार / गोल्डन मैन्शन (टोंक), बघेरा का तोरण द्वार (अजमेर)

बीकानेर संभाग के महल

महल

निर्माण, वास्तुकला एवं प्रमुख विशेषताएँ

लालगढ़ महल (बीकानेर)

  • निर्माण – महाराजा गंगासिंह पिता लालसिंह की स्मृति में (लाल पत्थरों से)
  • यूरोपीय शैली; डिजाइन सैमुअल स्विंटन जैकब
  • इसमें अनूप संस्कृति लाइब्रेरी, सार्दुल संग्रहालय

अन्य महल – गजनेर महल (गजसिंह ने अकाल राहत कार्य के तहत्‌), कर्ण महल, रंगमहल, अनूप महल 

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