सामाजिक एवं भावनात्मक बुद्धि: कार्यस्थल पर महत्व एवं समावेशन

इसमें सामाजिक बुद्धिमत्ता के 5 प्रमुख आयामों को “S.P.A.C.E.” के रूप में प्रस्तुत किया गया है:

  1. Situational Awareness (स्थितिजन्य जागरूकता) : किसी स्थिति के संदर्भ समझने और सामाजिक परिस्थितियों में संकेतों को पढ़ने की क्षमता।
  2. Presence (उपस्थिति) : आप स्वयं को कैसे प्रस्तुत करते हैं और दूसरों पर क्या प्रभाव डालते हैं।
  3. Authenticity (प्रामाणिकता) : बातचीत में वास्तविक, विश्वसनीय और पारदर्शी होना।
  4. Clarity (स्पष्टता) : प्रभावी और स्पष्ट तरीके से संवाद करना।
  5. Empathy (सहानुभूति) : दूसरों की भावनाओं और दृष्टिकोण को समझना और उनसे संबंधित होना।

ये सभी आयाम प्रभावी अंतर-व्यक्तिगत संबंधों और सामाजिक योग्यता को विकसित करने के लिए आवश्यक हैं।

  • आत्म-जागरूकता: अपनी भावनाओं को पहचानना और समझना।
  • स्व-प्रबंधन: अपनी भावनाओं और व्यवहारों को विनियमित और नियंत्रित करना।
  • सामाजिक जागरूकता: दूसरों की भावनाओं को पहचानना और समझना (सहानुभूति)।
  • संबंध प्रबंधन: दूसरों के साथ बातचीत और संबंधों को प्रभावी ढंग से प्रबंधित करना।

सलोवी और मेयर के अनुसार, “अपने तथा दूसरे व्यक्तियों के संवेगों का परिवीक्षण करने और उनमें विभेदन करने की योग्यता तथा प्राप्त सूचना के अनुसार अपने चिंतन तथा व्यवहारों को निर्देशित करने की योग्यता ही सांवेगिक बुद्धि है”।

इसमें सहानुभूति, आत्म-जागरूकता, आत्म-नियमन, सामाजिक कौशल और अभिप्रेरणा शामिल है।

सफलता प्राप्त करने में महत्व:

  1. नेतृत्व: सहानुभूति, संचार और संघर्ष समाधान, जिससे टीम की बेहतर गतिशीलता और संगठनात्मक सफलता प्राप्त होती है।
  2. संबंध प्रबंधन: स्वस्थ पारस्परिक संबंधों को बढ़ावा देता है, जो सहयोग, नेटवर्किंग और करियर में उन्नति के लिए महत्वपूर्ण है।
  3. निर्णय लेना: तार्किकता और सांवेगिक निहितार्थ दोनों पर विचार करना, जिससे बेहतर परिणाम प्राप्त होंगे।
  4. अनुकूलनशीलता: लचीलेपन के साथ परिवर्तन, असफलताओं और चुनौतियों का सामना करें, अनुकूलनशीलता और नवीनता को बढ़ावा ।
  5. व्यक्तिगत कल्याण: उच्च सांवेगिक बुद्धि कम तनाव, बेहतर मानसिक स्वास्थ्य और समग्र कल्याण से संबंधित है, जो निरंतर सफलता और पूर्ति में योगदान देता है।

अपने तथा दूसरे व्यक्तियों के संवेगों का परिवीक्षण करने और उनमें विभेदन करने की योग्यता तथा प्राप्त सूचना के अनुसार अपने चिंतन तथा व्यवहारों को निर्देशित करने की योग्यता ही सांवेगिक बुद्धि है”। – (सैलोवी और मेयर)

प्रशासकों के लिए भावनात्मक बुद्धिमत्ता महत्वपूर्ण है –

  • बेहतर संचार: EI पारस्परिक कौशल को बढ़ाता है, जिससे स्पष्ट और अधिक प्रभावी संचार होता है। उदाहरण के लिए IAS दिव्या देवराजन (प्रभावी संचार के लिए 3 महीने के भीतर गोंडी सीखी)
  • संघर्ष समाधान: उच्च EI वाले व्यक्ति संघर्षों को अधिक प्रभावी ढंग से प्रबंधित और हल कर सकते हैं, जिससे सहयोगात्मक कार्य वातावरण को बढ़ावा मिलता है। उदाहरण के लिए IPS चेतन सिंह राठौर ने प्रदर्शनकारियों को राष्ट्रगान गाने के लिए राजी किया।
  • नेतृत्व कौशल: EI नेताओं को उनकी भावनाओं और जरूरतों को समझकर उनकी टीमों को प्रेरित और प्रोत्साहित करने में मदद करता है। उदाहरण के लिए IAS एन प्रभाकर रेड्डी ने अपने बच्चों को एक सरकारी नौकरी में दाखिला दिलाया।
  • अनुकूलनशीलता: उच्च EI पेशेवरों को बदलती परिस्थितियों के अनुकूल होने और कार्यस्थल की चुनौतियों का सामना करने में सक्षम बनाता है।
  • बेहतर निर्णय लेना: EI भावनात्मक विनियमन की सुविधा देता है, जिससे अधिक तर्कसंगत और संतुलित निर्णय लेने की प्रक्रिया होती है।

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