लोक प्रशासन: अर्थ, प्रकृति, क्षेत्र एवं महत्व

(Introduction – Optional hai yha)

परंपरागत रूप से, लोक प्रशासन की समाज में सीमित भूमिका होती थी। हालाँकि, समकालीन समय में निम्नलिखित कारकों के कारण इसकी भूमिका में काफी विस्तार हुआ है।

  • वैज्ञानिक और तकनीकी विकास: ‘बड़ी सरकार’ और विस्तारित सार्वजनिक प्रशासन गतिविधियों की ओर अग्रसर प्रगति।
  • औद्योगिक क्रांति: सामाजिक-आर्थिक समस्याओं का उद्भव जो सरकारी हस्तक्षेप को प्रेरित करता है।
  • कल्याणकारी राज्य में परिवर्तन: नागरिक कल्याण पर केंद्रित नकारात्मक ‘पुलिस राज्य’ से सकारात्मक ‘कल्याणकारी राज्य’ की ओर बदलाव।
  • आर्थिक नियोजन को अपनाना: कल्याणकारी राज्य के उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए योजना का कार्यान्वयन।
  • जनसंख्या विस्फोट: झुग्गी-झोपड़ियों का विकास और भुखमरी  जैसी सामाजिक-आर्थिक चुनौतियों में वृद्धि के कारण प्रशासनिक कार्रवाई की आवश्यकता है।
  • आधुनिक युद्ध की प्रकृति: आधुनिक युद्ध के लिए संसाधन जुटाने में बड़ी जिम्मेदारियाँ।
  • प्राकृतिक आपदाएँ: पर्यावरणीय क्षरण के कारण आपदाओं की बढ़ती आवृत्ति को संभालना।
  • सामाजिक संघर्ष और हिंसा: वर्ग संघर्ष और सांप्रदायिक दंगों जैसे बढ़ते संकटों के लिए प्रभावी संकट प्रबंधन की आवश्यकता है।

हालाँकि, आधुनिक कल्याणकारी राज्य द्वारा कार्यों के विस्तार के कारण प्रशासनिक शिथिलता आई है, जिससे आकांक्षाओं और प्रदर्शन के बीच अंतर पैदा हो गया है। इसके लिए संरचनात्मक, प्रक्रियात्मक और व्यवहारिक परिवर्तनों के माध्यम से क्षमता और योग्यता को बढ़ाने के लिए प्रशासनिक विकास की आवश्यकता है।

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