डिजिटल इंडिया पहल

फास्टैग (FASTag) का कार्यप्रणाली:

  • स्थापना: FASTag, एक पैसिव RFID टैग, वाहन की विंडस्क्रीन पर चिपकाया जाता है। इसमें एक चिप और एक अद्वितीय 13-अंकीय इलेक्ट्रॉनिक उत्पाद कोड (EPC) होता है।
  • स्कैनिंग: जैसे ही वाहन टोल प्लाजा के पास पहुँचता है, RFID स्कैनर FASTag को पढ़ता है।
  • डेटा ट्रांसमिशन: चिप वाहन की श्रेणी, वजन और FASTag ID जैसी जानकारी स्कैनर को भेजता है।
  • शुल्क गणना: इस डेटा के आधार पर टोल शुल्क स्वचालित रूप से गणना किया जाता है।
  • भुगतान: टोल राशि वाहन को रुकवाए बिना लिंक किए गए खाते से काट ली जाती है।
  • इंटरऑपरेबिलिटी: यह प्रणाली NETC पहल का हिस्सा है, जो यह सुनिश्चित करती है कि यह पूरे भारत के सभी टोल प्लाजाओं पर काम करती है।

भारतनेट दुनिया की सबसे बड़ी ग्रामीण ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी परियोजना है, जिसका उद्देश्य 2.5 लाख से अधिक ग्राम पंचायतों को ऑप्टिकल फाइबर के माध्यम से जोड़ना है।

ग्रामीण भारत में डिजिटल समावेशन को बढ़ावा देने में भारतनेट परियोजना की भूमिका

  • डिजिटल खाई को पाटना: भारतनेट ग्रामीण और दूरदराज़ के क्षेत्रों में इंटरनेट पहुंच सुनिश्चित करके डिजिटल खाई को कम करता है। ग्रामीण इंटरनेट सब्सक्रिप्शन (2015-2021): 200% वृद्धि (शहरी क्षेत्रों में 158%)।
  • ई-गवर्नेंस, ऑनलाइन शिक्षा और टेलीमेडिसिन: ग्रामीण क्षेत्रों में ई-गवर्नेंस सेवाओं (CSC), ऑनलाइन शिक्षा प्लेटफॉर्म (जैसे DIKSHA) और टेलीमेडिसिन (ई – संजीवनी) तक पहुंच को सक्षम बनाता है।
  • किसानों के लिए मददगार: किसान वास्तविक समय में मौसम की जानकारी, बाज़ार दरें, और PM-KISAN जैसी योजनाओं के लिए ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।
  • ग्रामीण उद्यमिता को प्रोत्साहन: छोटे व्यवसायों और किसानों को डिजिटल टूल्स देकर ग्रामीण उद्यमिता (भारतनेट उद्यमी) को समर्थन देता है।
  • डिजिटल बैंकिंग और UPI: ग्रामीण दुकानों में भी नकदी पर निर्भरता कम करते हुए, डिजिटल भुगतान और UPI को सक्षम बनाता है।
  • राज्य-स्तरीय प्रभाव: केरल, तमिलनाडु और गुजरात जैसे राज्यों में भारतनेट हज़ारों गांवों को जोड़ चुका है, जिससे ग्रामीण स्टार्टअप और डिजिटल सेवा केंद्र को बढ़ावा मिला है।
  • डिजिटल इंडिया की रीढ़: यह परियोजना डिजिटल इंडिया अभियान की रीढ़ बनकर समावेशी और न्यायसंगत डिजिटल विकास को सुनिश्चित करती है।
  • डिजिटल इंडिया कार्यक्रम 1 जुलाई 2015 को इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (एमईआईटीवाई) द्वारा, डिजिटल पहुंच, डिजिटल समावेशन, डिजिटल सशक्तीकरण को सुनिश्चित करके भारत को डिजिटल रूप से सशक्त समाज और ज्ञान-आधारित अर्थव्यवस्था में बदलने के उद्देश्य से लॉन्च किया गया था।
  • कार्यक्रम तीन प्रमुख दृष्टि क्षेत्रों पर केंद्रित है – प्रत्येक नागरिक के लिए मुख्य उपयोगिता के रूप में डिजिटल बुनियादी ढांचा, मांग पर शासन और सेवाएं, और नागरिकों का डिजिटल सशक्तिकरण।

उपलब्धियाँ

  1. डिजिटल पैठ को गहरा करना:  महत्वाकांक्षी सरकारी योजनाओं, जैसे भारतनेट परियोजना, दूरसंचार विकास योजना, आकांक्षी जिला (aspirational district )योजना आदि के माध्यम से 2015 और 2021 के बीच ग्रामीण इंटरनेट सदस्यता में 200 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जबकि शहरी क्षेत्रों में 158 प्रतिशत की वृद्धि हुई।
  2. भारत के ‘टेकेड’ की ओर मार्च (technology centered decade): दूरसंचार और नेटवर्किंग उत्पादों के लिए प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (पीएलआई) जैसी सरकारी योजनाएं घरेलू मोबाइल विनिर्माण के साथ-साथ नेटवर्क स्थापना को बढ़ावा देंगी।
  3. प्रौद्योगिकी आधारित स्टार्टअप-इनोवेशन इकोसिस्टम: TIDE 2.0, SAMRIDH योजना, विभिन्न क्षेत्रों में 42 उत्कृष्टता केंद्र (CoE), एक ‘MeitY स्टार्ट-अप हब’ (MSH), और एक छत्र कार्यक्रम GENESIS’ ( टियर-II और टियर-III शहरों में स्टार्टअप्स की खोज के लिए ) जैसी योजनाओं के माध्यम से 
  4. रोज़गार: नॉर्थ ईस्ट बीपीओ प्रमोशन स्कीम (एनईबीपीएस) और इंडिया बीपीओ प्रमोशन स्कीम (आईबीपीएस) योजनाओं के अंतर्गत → 52,000 से अधिक व्यक्तियों को प्रत्यक्ष रोजगार प्रदान करना।
  5. 5जी और 6जी के क्षेत्रों में अनुसंधान एवं विकास परियोजनाएं : 5 जी परिनियोजन
    1. जुलाई 2021 में प्रोजेक्ट “5G और उससे आगे  अगली पीढ़ी का वायरलेस अनुसंधान और मानकीकरण”।
    2. अगस्त 2023 में एंड-टू-एंड 5जी नेटवर्क (IOS-5GN) के लिए भारतीय ओपन सोर्स सॉफ्टवेयर प्लेटफॉर्म
  6. जीवन जीने में आसानी: आधार, यूपीआई, डिजिलॉकर, उमंग, जीवन प्रमाण,, मेरी पहचान, माईस्कीम आदि जैसे सार्वजनिक डिजिटल प्लेटफार्मों ने “जीवन जीने में आसानी” की सुविधा प्रदान की है और वास्तव में “अधिकतम शासन और न्यूनतम सरकार” की भावना को साकार किया है।
  7. डिजिटल पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर की विकास कहानी: UPI, CoWIN, e-RUPI, TReDS, अकाउंट एग्रीगेटर्स, ONDC, ओपन क्रेडिट इनेबलमेंट नेटवर्क (OCEN) आदि।

इसके सफल कार्यान्वयन के बाद, डिजिटल इंडिया कार्यक्रम को अगस्त 2023 में केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा 15,000 करोड़ रुपये के कुल परिव्यय के साथ विस्तार के लिए मंजूरी मिली। इस विस्तार का लक्ष्य कई उद्देश्यों को प्राप्त करना है:

  • आईटी पेशेवरों को पुनः कौशल प्रदान करना और उनका कौशल बढ़ाना: फ्यूचरस्किल्स प्राइम प्रोग्राम
  • एआई उत्कृष्टता केंद्रों की स्थापना: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में तीन उत्कृष्टता केंद्र स्वास्थ्य, कृषि और टिकाऊ शहरों पर ध्यान केंद्रित करेंगे।
  • साइबर सुरक्षा में पहल: राष्ट्रीय साइबर समन्वय केंद्र के साथ उपकरण विकास और समन्वय सहित साइबर सुरक्षा में नई पहल की जाएगी।

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