कृषि – प्रमुख फसलें : उत्पादन व वितरण

उपयुक्त उत्पादन स्थितियाँ:

  • तापमान: 25°C से 35°C तक का मध्यम तापमान इसके विकास में सहायक होता है।
  • वर्षा: बाजरा के लिए कम वर्षा की आवश्यकता होती है, आदर्श रूप से 20-35 सेमी के बीच।
  • मिट्टी: अच्छी जल निकास वाली बलुई दोमट मिट्टी खेती के लिए आदर्श होती है।
  • प्रमुख किस्में: राजस्थान 171, पूसा कम्पोजिट 383, आर.सी.बी.

प्रमुख उत्पादन क्षेत्र:

राजस्थान बाजरा संवर्धन मिशन के तहत NFSM-न्यूट्री अनाज मिशन (21 जिला) और बाजरा बीज मिनीकिट जैसी योजनाओं ने राजस्थान को अग्रणी उत्पादक के रूप में उभरने में मदद की है। अग्रणी बाजरा उत्पादक जिले:

  • बाड़मेर: क्षेत्रफल की दृष्टि से राजस्थान में सर्वाधिक बाजरा उत्पादक जिला। हाल ही में, बाड़मेर में बाजरे के लिए एक समर्पित अनुसंधान केंद्र की घोषणा की गई है
  • अलवर: अधिकतम उत्पादन के आधार पर अलवर राजस्थान में बाजरे के शीर्ष उत्पादक के रूप में उभरा है।
  • अन्य क्षेत्र: सवाई-माधोपुर, दौसा, करौली, टोंक

अतिरिक्त :

  • बाजरे के 5 फ़ायदे: भोजन, कपड़ा, उर्वरक, ईंधन और चारा
  • केंद्रीय बजट 2023-24: बाजरा → श्री अन्न

बागवानी को कृषि की उस शाखा के रूप में परिभाषित किया जा सकता है, जो फल, सब्जियों और मसालों के उत्पादन, भंडारण, संरक्षण और प्रबंधन पर केंद्रित है। यह खाद्य, औषधीय या सौंदर्य उद्देश्यों के लिए गहरे तरीके से उत्पन्न पौधों को शामिल करता है।

  • राजस्थान में बागवानी फसलों की स्थिति (2024)
    • क्षेत्रफल: 87.969 लाख हेक्टेयर
    • 2023-24 कृषि वर्ष में फल और सब्जियाँ:
      • फल (2023-24): उत्पादन (मीट्रिक टन में): 11,975,555
      • सब्जियां (2023-24): उत्पादन (मीट्रिक टन में): 2,711,816
      • राजस्थान लहसुन उत्पादन में दूसरे और प्याज उत्पादन में पांचवें स्थान पर है।
फल केलाबेर सीताफल आमपपीताअनार
उत्पादन में शीर्ष जिलाचित्तौड़गढ़जयपुर राजसमंदबांसवाड़ासिरोहीबाड़मेर
सब्ज़ी प्याजटमाटरआलूफूलगोभीतरबूजखरबूजा खीरा
उत्पादन में शीर्ष जिलासीकरजयपुरधौलपुरसीकरसीकर चित्तौड़गढ़बीकानेर
मसाला फसल धनियाजीरासौंफलहसुनअजवाइनमिर्चअदरकहल्दी
शीर्ष उत्पादक जिलाकोटा और बारांजोधपुरसिरोहीझालावाड़ बूंदी झालावाड़सवाई माधोपुर प्रतापगढ़ 
  • फूल -उत्पादन में शीर्ष जिला
  • गेंदा-चित्तौड़गढ़,फुलवारी-जैसलमेर,गुलाब- अजमेर

महत्व

  1. खाद्य और पोषण सुरक्षा: बागवानी फसलें जैसे फल और सब्जियां विटामिन और खनिजों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं, विशेष रूप से राजस्थान के ग्रामीण और जनजातीय लोगों के लिए।
  2. किसानों के लिए आय सृजन: बागवानी किसानों को अतिरिक्त आय प्रदान करती है, जो एक ही फसल पर निर्भरता को कम करने में मदद करती है और उनके वित्तीय स्थिरता को सुधारती है।
  3. ग्रामीण आर्थिक विकास: बागवानी राजस्थान के ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सृजन करने में मदद करती है और जीवन स्तर को सुधारने में सहायक है, जिससे गरीबी कम होती है।
  4. भारत के मसाला और औषधीय पौधों के उत्पादन में योगदान: राजस्थान भारत के कुल मसाला उत्पादन में लगभग 10% और औषधीय और सुगंधित पौधों के उत्पादन में 15% का योगदान करता है।
  5. खाद्य प्रसंस्करण के लिए कच्चा माल: राजस्थान में बागवानी फसलें रस, अचार और सूखे फल जैसे उत्पाद बनाने के लिए आवश्यक हैं।

राजस्थान में बागवानी को बढ़ावा देने के लिए प्रमुख पहलें

  1. राष्ट्रीय बागवानी मिशन (NHM): इसका उद्देश्य राजस्थान के 31 जिलों में बागवानी फसलों जैसे फल, मसाले और फूलों के क्षेत्र, उत्पादन और उत्पादकता को बढ़ाना है।
  2. राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (RKVY): यह योजना ताड़ के पाम की खेती, गैर-NHM क्षेत्रों में बागवानी विकास और शहरी क्षेत्रों में सब्जी क्लस्टरों पर केंद्रित है। यह विभिन्न जिलों में उत्कृष्टता के केंद्रों को सुदृढ़ करती है।
  3. प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY): यह योजना बागवानी फसलों के लिए फसल विफलता के खिलाफ 5% प्रीमियम दर पर बीमा प्रदान करती है।
  4. बागवानी निदेशालय: इसे 1989-90 में स्थापित किया गया था।
  5. प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (PMKSY): इस योजना में बागवानी एक प्रमुख गतिविधि के रूप में शामिल है।
  6. शोध संस्थान: CAZRI जोधपुर, कृषि अनुसंधान केंद्र जयपुर और बीकानेर में आदि। ये संस्थान बागवानी अनुसंधान और विकास पर ध्यान केंद्रित करते हैं।
  7. उत्कृष्टता के केंद्र: खजूर (जैसलमेर),अंजीर (सिरोही),साइट्रस पौधे / औषधीय और मसालेदार पौधे (झालावाड़ ),सब्जियां (बूंदी), सेब  (चित्तौड़गढ़), अनार और ड्रैगन फ्रूट (बस्सी , जयपुर) , (धोलपुर-  आंवला, आम, जैतून)

राजस्थान का बागवानी क्षेत्र आर्थिक विकास को बढ़ावा देता है, खाद्य सुरक्षा को सुदृढ़ करता है, सतत विकास को समर्थन प्रदान करता है, और आजीविका के अवसर प्रदान करता है। सरकारी कार्यक्रम और अनुसंधान उत्पादकता, आय, और ग्रामीण विकास में सुधार करने में मदद करते हैं।

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