व्यवहारवादी उपागम

परंपरागत लोक प्रशासन की सीमाएँव्यवहारवादी एवं मानव संबंध दृष्टिकोण से समाधानउदाहरण
कठोर नौकरशाही → सख्त पदसोपान, अमानवीय नियमलचीला निर्णय लेना → साइमन का सीमित तर्कशीलता सिद्धांतपंचायती राज में विकेंद्रीकरण
कर्मचारियों को मशीन जैसा समझना → केवल दक्षता पर ज़ोरसामाजिक व मनोवैज्ञानिक ज़रूरतों का महत्व मेयो का हॉथॉर्न अध्ययनटीमवर्क और सहभागी प्रबंधन
केवल आर्थिक प्रेरणा (टेलरवाद)आंतरिक प्रेरणा का महत्व → मैस्लो की आवश्यकताओं की श्रेणी, मैकग्रेगर का X और Y सिद्धांतआईएएस में नागरिक-केन्द्रित शासन
पूरी तरह तर्कसंगत निर्णयों की धारणासीमित तर्कशीलता → सीमित जानकारी व संज्ञानात्मक क्षमतानीति निर्माण में नज सिद्धांत
अनौपचारिक नेटवर्क की उपेक्षा → केवल औपचारिक ढांचे पर ध्यानअनौपचारिक संगठनों का महत्व → बर्नार्ड का हयोग और विश्वास सिद्धांतकेरल बाढ़ (2018) में आपदा राहत समन्वय
कर्मचारी कल्याण की उपेक्षा → असंतोष की स्थितिकर्मचारी कल्याण और नेतृत्व → मनोबल और प्रोत्साहनों पर ध्यानसार्वजनिक उपक्रमों (PSUs) में प्रदर्शन आधारित प्रोत्साहन

लोक प्रशासन में लोक चयन दृष्टिकोण 1960 के दशक में शुरू हुआ। विंसेंट ओस्ट्रोम ने प्रशासन का विश्लेषण करने के लिए आर्थिक तरीकों और व्यवहार संबंधी मान्यताओं का उपयोग करने का सुझाव दिया। यह  निम्नलिखित पर जोर देता है:

  1. उपभोक्ता उन्मुख दृष्टिकोण: यह ‘उपभोक्ता की भूमिका में नागरिक’ के साथ, ‘विकल्प’ के तत्व पर जोर देता है। यह नागरिकों को तर्कसंगत निर्णयकर्ता  के रूप में देखता है जो अपने स्वार्थ में कार्य करते हैं। यह सरकारी कार्यों को नागरिक प्राथमिकताओं और मूल्यों के साथ जोड़ने  पर जोर देता है।
  2. संस्थागत बहुलवाद, अर्थात उपभोक्ताओं की प्राथमिकताओं को बढ़ावा देने के लिए एजेंसियों की बहुलता
  3. लोकतांत्रिक विकेंद्रीकरण: सरकारी एजेंसियों के बीच स्वस्थ और लोकतांत्रिक प्रतिस्पर्धा को प्रोत्साहित करने के लिए निर्णय लेने के अधिकार का फैलाव।
  4. नौकरशाही से मुक्ति और प्रशासन में जन भागीदारी को बढ़ाना ।
  5. लोक प्रशासन को राजनीति के दायरे में रखकर लोक प्रशासन के प्रति राजनीतिक दृष्टिकोण

लोक चयन (उपागम) दृष्टिकोण इसका विरोध करता है: (i) प्रशासन की केंद्रीकृत नौकरशाही प्रणाली; (ii) योजना और नीति-निर्माण की केंद्रीकृत प्रणाली; (iii) राजनीति और प्रशासन के बीच द्वंद्व; (iv) गैर प्रतिबद्ध नौकरशाही; और (v) मोनोसेंट्रिक, पदानुक्रमित नौकरशाही प्रशासन।

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