विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी से संबंधित सरकारी नीतियाँ

राष्ट्रीय अंतःविषय साइबर-भौतिक प्रणाली मिशन (NM-ICPS)

  • NM-ICPS भारत सरकार की एक प्रमुख पहल है, जिसे विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (DST) द्वारा 2018 में शुरू किया गया था।
  • उद्देश्य: कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), रोबोटिक्स, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) जैसे साइबर-फिजिकल क्षेत्रों में प्रौद्योगिकी विकास को बढ़ावा देना।
  • बजट: ₹3,660.00 करोड़ रुपये
  • मिशन के अंतर्गत प्रमुख गतिविधियाँ:
    • प्रौद्योगिकी विकास
    • मानव संसाधन विकास
    • उद्यमिता विकास
    • अंतरराष्ट्रीय सहयोग
  • इस मिशन के तहत भारत के प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थानों में 25 टेक्नोलॉजी इनोवेशन हब्स (TIHs) की स्थापना की गई है।
  • मिशन की उपलब्धियाँ:
    •  सूचना प्रौद्योगिकी-परिचालन प्रौद्योगिकी (आईटी-ओटी) सुरक्षा परिचालन केंद्र (IT-OT SoC): किसी संगठन की सूचना प्रौद्योगिकी (IT) और परिचालन प्रौद्योगिकी (OT) अवसंरचना पर साइबर खतरों की निगरानी के लिए।
    • स्व-संप्रभु पहचान (Self-Sovereign Identity – SSI): डिजिटल क्रेडेंशियल्स के सुरक्षित भंडारण और प्रबंधन के लिए।
    • चरकडीटी प्लेटफ़ॉर्म (CharakDT): स्वास्थ्य देखभाल अनुप्रयोगों के लिए एकीकृत मानव डिजिटल ट्विन प्रणाली।
    • तिहान (TiHAN) टेस्टबेड: स्वायत्त नेविगेशन प्रौद्योगिकी विकास के लिए अत्याधुनिक टेस्टबेड, जो हवाई और स्थलीय दोनों प्रकार के स्वायत्त वाहनों के लिए उपयोगी है।
    • आईरास्ते (iRASTE): कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) की पूर्वानुमान क्षमताओं का उपयोग करके सड़क सुरक्षा बढ़ाने के लिए एप्लिकेशन है।
    • खनन के लिए होलोग्राफिक प्रौद्योगिकियां: दूरस्थ खदानों के दृश्यीकरण के लिए।
    • ओआरएएन (ओपन रेडियो एक्सेस नेटवर्क) मैसिव एमआईएमओ (मल्टीपल इनपुट मल्टीपल आउटपुट) 32टीआर (ट्रांसमिट-रिसीव) रेडियो यूनिट, बड़े एंटीना एरे का उपयोग करके 5G तकनीक को बढ़ाने के लिए, इस प्रकार ग्रामीण क्षेत्रों के लिए लंबी दूरी की कनेक्टिविटी को सक्षम करता है।

AI प्रौद्योगिकियों का एक समूह है जो मशीनों को उच्च स्तर की बुद्धिमत्ता के साथ कार्य करने और समझने, समझने और कार्य करने की मानवीय क्षमताओं का अनुकरण करने में सक्षम बनाता है।

AI को विनियमित करने के लिए भारत का दृष्टिकोण:

  • संप्रभु AI: भारत AI को विनियमित करने के लिए एक बहुआयामी दृष्टिकोण अपना रहा है, गोपनीयता और नैतिक विचारों को सुनिश्चित करते हुए स्वास्थ्य देखभाल और कृषि जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में अपने संप्रभु अनुप्रयोगों पर ध्यान केंद्रित कर रहा है।  
  • 2023 में डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम: व्यक्तिगत डेटा को प्रबंधित करने के तरीके को विनियमित करके एआई प्लेटफार्मों से संबंधित चिंताओं का समाधान करना, व्यक्तियों की गोपनीयता की सुरक्षा सुनिश्चित करना।
  • आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर वैश्विक साझेदारी: GPAI, के सदस्य के रूप में, भारत ने नई दिल्ली में 2023 GPAI शिखर सम्मेलन की मेजबानी की, जिसमें AI के प्रति जिम्मेदार , डेटा गवर्नेंस और काम, नवाचार और व्यावसायीकरण के भविष्य पर ध्यान केंद्रित किया गया।
  • नीति आयोग द्वारा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के लिए राष्ट्रीय रणनीति #AIForAll रणनीति: यह रणनीति स्वास्थ्य देखभाल, कृषि, शिक्षा, स्मार्ट शहरों और बुनियादी ढांचे, और स्मार्ट गतिशीलता और परिवर्तन पर ध्यान केंद्रित करने वाले AI R&D दिशानिर्देशों की रूपरेखा तैयार करती है।
  • AI विनियमन पर EAC-PM पेपर: यह पेपर पांच प्रमुख सिद्धांतों के साथ एक जटिल अनुकूली प्रणाली पर आधारित एक नवीन एआई विनियमन ढांचे का प्रस्ताव करता है:
    • विशेषज्ञ नियामक: व्यापक अधिदेश और त्वरित प्रतिक्रिया के साथ एक विशेषज्ञ नियामक निकाय की स्थापना करना।
    • पारदर्शिता: बाहरी ऑडिट और निरंतर निगरानी के लिए कोर एल्गोरिदम की खुली लाइसेंसिंग सुनिश्चित करना।
    • एआई जवाबदेही: मानकीकृत घटना रिपोर्टिंग प्रोटोकॉल को अनिवार्य करना और जवाबदेही की स्पष्ट रेखाओं को परिभाषित करना।
    • मैनुअल ओवरराइड और प्राधिकरण चोकप्वाइंट: एआई सिस्टम संचालन में मानव हस्तक्षेप को सशक्त बनाना।
    • रेलिंग और विभाजन: अवांछित एआई व्यवहार को सीमित करने के लिए सीमा शर्तों को लागू करना।
  • MEITY ने हाल ही में जनरेटिव आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के नियमन के लिए कई बड़े प्लेटफार्मों को एक सलाह जारी की। MeitY ने निर्धारित किया कि उन्हें भारत में काम करने के लिए सरकार की अनुमति लेनी होगी, परीक्षण चरणों के दौरान अस्वीकरण और प्रकटीकरण प्रदान करना होगा, और यह सुनिश्चित करना होगा कि उनके संसाधन एआई के माध्यम से पूर्वाग्रह, भेदभाव या चुनावी अखंडता के लिए खतरे की अनुमति न दें।

इस प्रकार, भारत का दृष्टिकोण एक संतुलित मार्ग पर जोर देता है, नैतिक उपयोग सुनिश्चित करते हुए एआई नवाचार को बढ़ावा देता है और व्यक्तिगत अधिकारों की सुरक्षा करता है।

AI को बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रीय पहल:

  • राष्ट्रीय AI पोर्टल: यह इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्रालय (MeitY), राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस डिवीजन (NeGD) और NASSCOM की एक संयुक्त पहल है।
  • आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर राष्ट्रीय कार्यक्रम (भारत): भारत की घरेलू पहल जिम्मेदार एआई, नवाचार और संभावित जोखिमों के साथ एआई के लाभों को संतुलित करने पर केंद्रित है।
  • फ्यूचर स्किल्स प्राइम: भारत में एक कार्यक्रम जो बदलते नौकरी परिदृश्य के लिए कार्यबल को तैयार करने के लिए एआई-संबंधित कौशल में reskilling और upskilling को बढ़ावा देता है।
  • कानूनी अनुसंधान में न्यायाधीशों की सहायता के लिए एक एआई आधारित पोर्टल SUPACE विकसित किया गया है। (न्यायालयों की दक्षता में सहायता के लिए सर्वोच्च न्यायालय पोर्टल)
  • जून 2020 में, भारत GPAI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर वैश्विक साझेदारी) का हिस्सा बन गया।
  • भारत और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच विज्ञान और प्रौद्योगिकी संबंधों को बढ़ाने के लिए यूएस इंडिया आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (USIAI) पहल शुरू की गई है।
  • National Mission on Interdisciplinary Cyber-Physical Systems:: भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) खड़गपुर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग पर टेक्नोलॉजी इनोवेशन हब (टीआईएच) की स्थापना की गई है।
  • आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस रिसर्च, एनालिटिक्स और नॉलेज एसिमिलेशन प्लेटफॉर्म: (Artificial Intelligence Research, Analytics and Knowledge Assimilation Platform):यह एक क्लाउड कंप्यूटिंग प्लेटफॉर्म है, जिसका लक्ष्य एआई के संबंध में भारत को उभरती अर्थव्यवस्थाओं में अग्रणी बनाना और शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, शहरीकरण और गतिशीलता जैसे क्षेत्रों में बदलाव लाना है।
  • सरकार ने युवाओं के लिए ‘रिस्पॉन्सिबल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) फॉर यूथ’ नाम से एक राष्ट्रीय कार्यक्रम शुरू किया है।
  • भारत AI मिशन: केंद्रीय मंत्रिमंडल ने एआई गणना क्षमता हासिल करने और इसे स्टार्ट-अप और शोधकर्ताओं को रियायती दरों पर पेश करने के लिए 10,300 करोड़ रुपये के भारत एआई मिशन को मंजूरी दी।

भारत सरकार ने 7 मार्च 2024 को IndiaAI मिशन की शुरुआत की, जिसका कुल बजट ₹10,371.92 करोड़ है। इसका उद्देश्य भारत को वैश्विक कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के क्षेत्र में अग्रणी बनाना और समाज के सभी वर्गों तक AI के लाभ पहुँचाना है।

इंडियाAI कार्यक्रम के 7 प्रमुख स्तंभ:

  1. इंडियाAI गणना क्षमता
    • सार्वजनिक-निजी साझेदारी के माध्यम से 10,000+ GPU के साथ एक उच्चस्तरीय और स्केलेबल AI कंप्यूटिंग इकोसिस्टम तैयार करना।
    • AI सेवा के रूप में (AI as a Service) और प्री-ट्रेंड मॉडल्स प्रदान करने के लिए AI मार्केटप्लेस का शुभारंभ।
  2. इंडिया AI नवाचार केंद्र:  स्वदेशी लार्ज मल्टीमॉडल मॉडल्स (Large Multimodal Models – LMMs) और क्षेत्र-विशिष्ट फाउंडेशनल मॉडल्स का विकास।
  3. इंडियाAI डैटासेट्स प्लेटफॉर्म: स्टार्टअप्स और शोधकर्ताओं के लिए उच्च गुणवत्ता वाले, गैर-व्यक्तिगत डेटा सेट्स तक निर्बाध पहुँच के लिए एकीकृत प्लेटफॉर्म का निर्माण।
  4. इंडियाAI एप्लिकेशन डेवलपमेंट इनिशिएटिव: केंद्रीय मंत्रालयों, राज्य विभागों, और संस्थानों के साथ सहयोग के माध्यम से महत्वपूर्ण क्षेत्रों में AI समाधान को बढ़ावा देना।
  5. इंडियाAI फ्यूचरस्किल्स
    • स्नातक, परास्नातक, और पीएचडी कार्यक्रमों में AI शिक्षा को बढ़ावा देना।
    • टियर 2 और टियर 3 शहरों में डेटा और AI लैब्स की स्थापना, बुनियादी AI प्रशिक्षण के लिए।
  6. इंडियाAI स्टार्टअप फाइनेंसिंग: नवीन AI परियोजनाओं के लिए फंडिंग तक सुगम पहुँच के माध्यम से गहन-तकनीकी AI स्टार्टअप्स को समर्थन।
  7. सुरक्षित और विश्वसनीय AI: जिम्मेदार AI विकास के लिए रूपरेखाएँ, उपकरण, और स्व-मूल्यांकन चेकलिस्ट विकसित करना।

भारत के AI इकोसिस्टम को मजबूत करने में भूमिका:

  • तकनीकी आत्मनिर्भरता: भारत को स्वदेशी AI तकनीकों के विकास में सक्षम बनाता है।
  • समावेशी विकास: विशेष रूप से टियर 2 व टियर 3 शहरों में AI की पहुंच सुनिश्चित करता है।
  • कुशल कार्यबल: AI शिक्षा व प्रशिक्षण को सशक्त बनाकर जनसांख्यिकीय लाभांश को उपयोग में लाता है।
  • स्टार्टअप समर्थन: फंडिंग व अवसंरचना द्वारा नवाचार को प्रोत्साहन देता है।
  • वैश्विक नेतृत्व: सार्वजनिक हित के लिए नैतिक और उत्तरदायी AI में भारत को नेतृत्व प्रदान करता है।
  • सामाजिक-आर्थिक रूपांतरण: स्वास्थ्य, कृषि और शासन जैसे क्षेत्रों में AI को अपनाने से विकास को गति मिलती है।

इस प्रकार, इंडियाAI मिशन समावेशी विकास और वैश्विक नेतृत्व के लिए AI की परिवर्तनकारी क्षमता का उपयोग करने की भारत की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। 

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