| नवीन लोक प्रशासन | नवीन लोक प्रबंधन |
| तार्किकता, कार्यप्रणाली के मुद्दे अधिक महत्वपूर्ण हैं | बाजार दृष्टिकोण के प्रति मजबूत प्रतिबद्धता |
| नागरिकों को ग्राहक के रूप में देखा जाता है | नागरिकों को ग्राहक के रूप में देखा जाता है |
| सामाजिक-आर्थिक विकास पर ध्यान केंद्रित करता है | सशक्त बनाने पर ध्यान केंद्रित करता है |
| लक्ष्य: सामाजिक समता | लक्ष्य: बाज़ार इक्विटी |
| कल्याणकारी सरकार की ओर ले जाता है | उद्यमशील सरकार की ओर ले जाता है। |
| लोकतांत्रिक प्रबंधन प्रथाओं की ओर सूक्ष्म, वृद्धिशील बदलाव | अधिक कट्टरपंथी |
| जवाबदेही: पेशेवर और कुशल सेवा वितरण पर केंद्रित है | जवाबदेही: व्यक्तिगत ग्राहकों को अपनी पसंद चुनने के लिए |
नव लोक प्रबंधन (NPM) आंदोलन के दौरान, ओसबोर्न और गैबलर ने नौकरशाही शासन को उद्यमी मॉडल में बदलने के लिए ‘रीइनवेंटिंग गवर्नमेंट’ में दस सिद्धांतों को प्रस्तावित किया।
- उत्प्रेरक सरकार → सरकार को सेवाऐं प्रदान करते रहने की बजाए सामाजिक समस्याओ को हल करनें के लिए सार्वजनिक क्षेत्र, निजी क्षेत्र और स्वयंसेवी/गैर सरकारी क्षेत्र को हरकत में आने के लिए उत्प्रेरित करना चाहिए।
- सामुदायिक-स्वामित्व वाली सरकार → नौकरशाही नियंत्रण को कम करते हुए समस्याओं को हल करने के लिए नागरिकों/समुदायों को सशक्त बनाना।
- प्रतिस्पर्धी सरकार → दक्षता और लागत में कमी के लिए प्रदाताओं के बीच प्रतिस्पर्धा को प्रोत्साहित करना।
- अभियान-उन्मुख सरकार → नियम-उन्मुख से लक्ष्य-उन्मुख संचालन में बदलाव।
- परिणाम-उन्मुख सरकार → केवल इनपुट के आधार पर नहीं, बल्कि परिणामों के आधार पर प्रदर्शन को मापना।
- ग्राहक-उन्मुख सरकार → नागरिकों को ग्राहक के रूप में मानना, विकल्प प्रदान करना और सेवा पहुँच में सुधार करना।
- उद्यमी सरकार → केवल खर्च करने के बजाय, शुल्क और उद्यम निधियों के माध्यम से राजस्व उत्पन्न करने पर ध्यान देना।
- पूर्वानुमानी सरकार → समस्याओं की पहचान करना और उनके उत्पन्न होने से पहले उनका समाधान करना।
- विकेंद्रीकृत सरकार → पदानुक्रम के स्थान पर सहभागितापूर्ण प्रबंधन और टीमवर्क को बढ़ावा देना।
- बाजार-उन्मुख सरकार → उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए बाजार तंत्र का उपयोग करें।
ओसबोर्न और गेबलर ने अपनी पुस्तक “Reinventing Government” (1992) में तर्क दिया कि सरकार को सभी सेवाएं स्वयं प्रदान करने (Rowing) के बजाय, उन्हें मार्गदर्शन (Steering) करना चाहिए। अर्थात् सरकार का मुख्य कार्य नीति निर्माण, विनियमन, रणनीति और निगरानीहोना चाहिए, न कि सेवा वितरण।
- रोइंग = प्रत्यक्ष सेवा वितरण
- स्टीयरिंग = नीति निर्माण, नियंत्रण, निगरानी, भागीदारी
NPM ढांचे में इस बदलाव के प्रभाव
| क्षेत्र | बदलाव का प्रभाव | भारतीय उदाहरण |
| राज्य की भूमिका | सरकार सेवा प्रदाता से मार्गदर्शक और नियामक बन गई है। | नीति आयोग – योजना आयोग की जगह, फंडिंग नहीं बल्कि नीति सुझाव देता है। |
| निजीकरण/आउटसोर्सिंग | सेवाएं अब निजी कंपनियों, एनजीओ या PPP मॉडल से दिलाई जाती हैं। | आयुष्मान भारत (PMJAY) – निजी अस्पतालों की भागीदारी।सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) – राजमार्ग निर्माण, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन आदि। |
| प्रदर्शन-उन्मुख प्रशासन | परिणामों, आउटपुट और KPI पर ध्यान केंद्रित। | PRAGATI मंच – परियोजनाओं की निगरानी के लिए डैशबोर्ड आधारित प्रणाली। |
| नागरिक-केंद्रित शासन | नागरिकों को ग्राहक की तरह देखा गया; सेवा गुणवत्ता पर ध्यान। | UMANG ऐप, MyGov पोर्टल – डिजिटल माध्यम से सेवाओं तक पहुंच। |
| विकेंद्रीकरण | स्थानीय स्वशासन इकाइयों को अधिक अधिकार और स्वायत्तता। | 73वां और 74वां संशोधन – पंचायतों और शहरी स्थानीय निकायों को अधिकार। |
| नवाचार व लचीलापन | प्रयोग, अनुकूलन और निजी भागीदारी से नई योजनाएं। | डिजिटल इंडिया, स्टार्टअप इंडिया, मोहल्ला क्लिनिक (दिल्ली)– सेवा नवाचार। |
NPM के तहत स्टीयरिंग के प्रमुख उपकरण
- PPP (Public-Private Partnership) – जैसे BOT मॉडल से राजमार्ग निर्माण
- आउटकम बजटिंग – प्रक्रियाओं के बजाय परिणामों पर जोर
- सिटीजन चार्टर – सेवा स्तर व जवाबदेही तय करते हैं
- ई-गवर्नेंस – डिजिटल माध्यम से शासन और पारदर्शिता (जैसे Digital India)
- सेवाओं का ठेके पर देना – जैसे कचरा प्रबंधन, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाएं
“रोइंग” से “स्टीयरिंग” की ओर बदलाव ने शासन की परिभाषा को नए सिरे से गढ़ा है। यह मॉडल दक्षता, नवाचार, और नागरिक-केंद्रित सेवाओं को बढ़ावा देता है। किन्तु, यह भी ज़रूरी है कि सरकार इस बदलाव के साथ-साथ पारदर्शिता, जवाबदेही और सामाजिक न्याय को बनाए रखे।
नवीन लोक प्रबंधन (एनपीएम) 1980 के दशक के अंत और 1990 के दशक की शुरुआत में वैश्वीकरण, उदारीकरण और निजीकरण की मांगों से प्रेरित होकर लोक प्रशासन में दूसरे बड़े परिवर्तन का प्रतिनिधित्व करता है। इसे ‘प्रबंधकीयवाद’ या ‘उद्यमशील सरकार’ के नाम से भी जाना जाता है।
- यह लोक चयन सिद्धांत और नव-टेलरवाद के तत्वों को जोड़ता है।
- एनपीएम का लक्ष्य “3ई” -अर्थव्यवस्था, दक्षता और प्रभावशीलता पर ध्यान केंद्रित करते हुए सार्वजनिक और निजी प्रशासन के तत्वों का मिश्रण करना है।
- यह समाज और अर्थव्यवस्था में राज्य की भूमिका में बुनियादी बदलाव की दृढ़ता से वकालत करता है। यह समाज और अर्थव्यवस्था के प्रमुख नियामक के रूप में ‘राज्य’ के मुकाबले ‘बाज़ार’ की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर देता है।
- एनपीएम के विरोधी लक्ष्य: एनपीएम पारंपरिक लोक प्रशासन के निम्नलिखित सिद्धांतों को खारिज करता है: (i) राजनीति-प्रशासन द्वंद्व (ii) पदसोपन -प्रभावित संगठन (iii) शक्ति का अति-केंद्रीयकरण (iv) प्रशासन में नियमों की प्रधानता
- रीइन्वेंटिंग गवर्नमेंट : ओसबोर्न और गैबलर ने “रीइन्वेंटिंग गवर्नमेंट” में नव लोक प्रबंधन (उद्यमशील सरकार) के दस लक्ष्यों (गुणों या सिद्धांतों) की पहचान की है।
- उत्प्रेरक सरकार : सरकार को सामाजिक मुद्दों को हल करने के लिए सभी क्षेत्रों में कार्रवाई के लिए प्रेरित करना चाहिए।
- समुदाय के स्वामित्व वाली सरकार : समुदायों को अपनी समस्याओं को हल करने के लिए सशक्त बनाना।
- सक्षम सरकार: दक्षता में सुधार और लागत कम करने के लिए प्रतिस्पर्धा शुरू करें।
- लक्ष्योन्मुखी सरकार:नियमों के बजाय लक्ष्यों पर ध्यान दें।
- परिणाम – निर्देशित सरकार: सफलता को परिणामों से मापें, इनपुट से नहीं।
- उपभोक्ता – निर्देशित सरकार: नागरिकों को ग्राहक मानें और विकल्प एवं सुविधा प्रदान करें।
- उद्यमी सरकार: केवल पैसा खर्च करने के बजाय पैसा कमाने पर भी ध्यान दें।
- पूर्वानुमानी सरकार: समस्याओं के उत्पन्न होने से पहले उन्हें पहचानें और रोकें।
- विकेंद्रित सरकार: अधिकार को निचले स्तर तक फैलाएं और टीम वर्क को प्रोत्साहित करें।
- बाज़ार-निर्देशित सरकार: लक्ष्यों को प्राप्त करने और परिवर्तन लाने के लिए बाजार तंत्र का उपयोग करें।
एनपीएम के इन सिद्धांतों ने दुनिया भर में सरकारों को पुनर्गठीत किया: सार्वजनिक उपक्रमों का निजीकरण, सरकारी आकार को कम करना, सरकारी संगठनों का निगमीकरण, बजट और कल्याण व्यय में कटौती, सिविल सेवा संरचनाओं में सुधार, प्रदर्शन माप और मूल्यांकन को लागू करना, निचले स्तरों पर प्राधिकरण का विकेंद्रीकरण, निजी एजेंसियों को सेवाएं आउटसोर्स करना, खुलेपन और पारदर्शिता को बढ़ावा देना, नागरिक भागीदारी को प्रोत्साहित करना, नागरिक चार्टर स्थापित करना और इसी तरह की अन्य पहलें ।
