एमबीओ (MBO), निर्णय प्रक्रिया:, तकनीक एवं मॉडल

यह कथन प्रबंधकीय निर्णय-निर्माण की एक महत्वपूर्ण सीमा को दर्शाता है। शास्त्रीय सिद्धांत यह मानते हैं कि प्रबंधक पूर्णतः तार्किक (Economic Man Model) होते हैं — अर्थात उनके पास पूर्ण जानकारी, असीमित समय और संज्ञानात्मक क्षमता होती है, जिससे वे सभी विकल्पों का मूल्यांकन करके सर्वोत्तम निर्णय ले सकते हैं। किंतु वास्तविकता में ऐसा संभव नहीं होता।

सीमित तार्किकता मॉडल (Bounded Rationality Model) या प्रशासनिक मानव मॉडल, जो हर्बर्ट साइमन द्वारा प्रस्तुत किया गया, इसकी व्याख्या करता है:

  • प्रबंधक सीमित तार्किकता के अंतर्गत कार्य करते हैं। उनकी तार्किकता निम्नलिखित बंधनों से सीमित होती है:
    • अपूर्ण जानकारी: सभी प्रासंगिक आँकड़े उपलब्ध नहीं होते।
    • सीमित संज्ञानात्मक क्षमता: मानव मस्तिष्क असीमित विकल्पों का विश्लेषण नहीं कर सकता।
    • समय और संसाधन की कमी: निर्णय अक्सर शीघ्रता से लेने पड़ते हैं।
    • वातावरण की जटिलता: अनिश्चितता और बदलते परिस्थितियाँ पूर्ण विश्लेषण कठिन बनाती हैं।
  • परिणामस्वरूप, प्रबंधक सर्वोत्तम (Optimal) निर्णय की खोज के बजाय संतोषजनक (Satisficing) निर्णय चुनते हैं — अर्थात जो परिस्थितियों में “पर्याप्त अच्छा” हो।
  • उदाहरण: एक प्रबंधक बाजार के सभी संभावित आपूर्तिकर्ताओं का मूल्यांकन करने के बजाय, समय की कमी के कारण पिछले संतोषजनक प्रदर्शन वाले आपूर्तिकर्ता को चुन लेता है।

इस प्रकार, प्रबंधक पूर्णतः तार्किक निर्णय नहीं ले पाते क्योंकि उनकी तार्किकता व्यावहारिक सीमाओं से बंधी होती है। यह मॉडल शास्त्रीय आर्थिक तार्किकता मॉडल की तुलना में अधिक यथार्थवादी है।

बीच एवं मिशेल के आकस्मिकता मॉडल के अनुसार, निर्णय लेने का कोई एक सर्वोत्तम तरीका नहीं होता। यह मॉडल निर्णय रणनीतियों के तीन प्रकारों की पहचान करता है:

  • सहायता प्राप्त विश्लेषणात्मक रणनीति: यह निर्णय लेने की सबसे विस्तृत तथा अधिक प्रयास वाली विधि है। इस रणनीति में निर्णयकर्ता समस्या का व्यवस्थित विश्लेषण करने के लिए औपचारिक साधनों, मॉडलों, जाँच-सूचियों अथवा सूत्रों का उपयोग करता है। इसमें बाहरी सहायता की मदद से सावधानीपूर्वक तथा संरचित विश्लेषण किया जाता है।
  • बिना सहायता वाली विश्लेषणात्मक रणनीति : इस रणनीति में निर्णयकर्ता अपने मन में ही सावधानीपूर्वक एवं व्यवस्थित रूप से विचार करता है। वह प्रत्येक विकल्प के लाभ एवं हानि का मूल्यांकन करता है, संभावित परिणामों की कल्पना करता है तथा किसी बाहरी साधन या सहायता का उपयोग किए बिना स्थिति का विश्लेषण करता है। यह विश्लेषणात्मक प्रक्रिया होती है, लेकिन पूरी तरह मानसिक प्रयास पर आधारित रहती है।
  • अविश्लेषणात्मक रणनीति: यह सबसे तेज़ एवं सरल निर्णय विधि है। इसमें निर्णय आदतों, सामान्य अनुभवजन्य नियमों (जैसे—“सावधानी में ही सुरक्षा है”) अथवा पूर्व अनुभवों के आधार पर लिए जाते हैं, बिना किसी गहन विश्लेषण के। इसमें सबसे कम समय एवं मानसिक प्रयास की आवश्यकता होती है।

अतः, निर्णयकर्ता स्थिति, व्यक्तिगत विशेषताओं तथा कार्य की माँगों के अनुसार इन तीनों रणनीतियों में से किसी एक का चयन करते हैं, ताकि न्यूनतम समय एवं प्रयास में संतोषजनक निर्णय तक पहुँचा जा सके।

आर्थिक मानव मॉडल निर्णय-निर्माण का एक आदर्श मॉडल है। यह मानता है कि निर्णयकर्ता पूर्ण रूप से तार्किक होता है और हमेशा सर्वोत्तम विकल्प चुनता है।

मुख्य मान्यताएँ

  • निर्णयकर्ता के पास समस्या की पूरी और सटीक जानकारी होती है।
  • वह सभी संभावित विकल्पों को जानता है।
  • प्रत्येक विकल्प का पूर्ण मूल्यांकन कर सकता है।
  • उसका उद्देश्य अधिकतम लाभ प्राप्त करना है।
  • वह भावनाओं या पूर्वाग्रहों से प्रभावित नहीं होता।

उदाहरण

एक कंपनी नया कारखाना लगाना चाहती है। इस मॉडल के अनुसार प्रबंधक सभी स्थानों की पूरी जानकारी इकट्ठा करेगा, लागत, बाजार, परिवहन आदि का पूरा विश्लेषण करेगा और सबसे ज्यादा लाभ देने वाले स्थान को चुनेगा।

सीमाएँ

  • वास्तविक जीवन में पूर्ण जानकारी उपलब्ध नहीं होती।
  • समय और मानसिक क्षमता सीमित होती है।

यह मॉडल आदर्श स्थिति दिखाता है, लेकिन व्यावहारिक रूप से सीमित उपयोगी है।

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