राजस्थान राज्य महिला आयोग राजस्थान में महिलाओं के अधिकारों की रक्षा, उनके सशक्तिकरण तथा लैंगिक समानता को बढ़ावा देने के लिए स्थापित एक महत्वपूर्ण संस्थान है। यह विषय राजस्थान राजनीतिक व्यवस्था के अंतर्गत आता है, जहाँ आयोग महिलाओं से संबंधित शिकायतों की सुनवाई कर न्याय सुनिश्चित करने का कार्य करता है। साथ ही, यह सरकार को नीतिगत सुझाव देकर महिला कल्याण हेतु प्रभावी कदम उठाने में सहयोग करता है।
राजस्थान राज्य महिला आयोग: पृष्ठभूमि
- महिला सशक्तिकरण सुनिश्चित करने के लिए 1979 में एक अंतर्राष्ट्रीय संधि, CEDAW (महिलाओं के विरुद्ध भेदभाव के उन्मूलन पर अभिसमय) पर हस्ताक्षर किए गए।
- भारत ने 9 जुलाई, 1993 को कुछ संशोधनों के साथ इस संधि पर हस्ताक्षर किए तथा महिला सशक्तिकरण के लिए अंतर्राष्ट्रीय प्रयासों के अनुरूप 1996 में राष्ट्रीय महिला नीति घोषित की गई। तत्पश्चात, राष्ट्रीय महिला आयोग तथा राज्य महिला आयोगों का गठन किया गया।
राजस्थान राज्य महिला आयोग स्थापना एवं विधिक स्वरूप
- आधार : राजस्थान राज्य महिला आयोग, 1999 विधेयक प्रस्तुत: 23 अप्रैल 1999।
- अधिसूचना व गठन: 15 मई 1999। (मुख्यालय: जयपुर)।
- तत्कालीन मुख्यमंत्री: अशोक गहलोत; राज्यपाल: अंशुमान सिंह।
- विनियम: ‘राजस्थान राज्य महिला आयोग विनियम 2007’ दिनांक 10 अगस्त 2007 को बने और 17 अगस्त 2007 को राजपत्र में प्रकाशित हुए।
- प्रकृति: यह एक सांविधिक (Statutory) और स्वायत्तशासी निकाय है।
- मूल उद्देश्य: महिलाओं पर होने वाली हिंसा, अत्याचार और असमानता को रोकना तथा हाशिये पर मौजूद महिलाओं को मुख्यधारा में लाना।
- राज्य में महिला नीति 8 मार्च, 2000 को जारी की गई ।
आयोग का गठन एवं संरचना (धारा 3)
- गठन : राजस्थान सरकार द्वारा अधिनियम की धारा 3 व अध्याय-2 के अंतर्गत ‘राजस्थान राज्य महिला आयोग’ का गठन किया गया है।
- संरचना [धारा 3(2)]: आयोग में कुल 5 सदस्य होंगे:
- 1 अध्यक्ष।
- 3 सदस्य (राज्य सरकार द्वारा नियुक्त)।
- 1 सदस्य सचिव।
- अनिवार्यता: इन 4 सदस्यों में से एक अनुसूचित जाति (SC) या अनुसूचित जनजाति (ST) की महिला और एक अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) की महिला होना अनिवार्य है।
- अध्यक्ष की योग्यता [धारा 3(3)]: अध्यक्ष एक विख्यात महिला होगी, जिसे महिलाओं की समस्याओं को निपटाने का पर्याप्त ज्ञान, अनुभव और उनके अधिकारों के प्रति प्रतिबद्धता हो।
- सदस्यों की योग्यता [धारा 3(4)]: ऐसी महिलाएँ जिनकी सत्यनिष्ठा और प्रतिष्ठा उच्च हो, जिन्हें महिलाओं के हितों की रक्षा, प्रोन्नयन और अधिकारों के संरक्षण का पर्याप्त ज्ञान या अनुभव हो।
- आयोग का सचिव [धारा 3(5) व 3(6)]:
- सचिव की नियुक्ति राज्य सरकार द्वारा की जाएगी।
- वह आयोग द्वारा प्रत्यायोजित शक्तियों और कृत्यों का पालन करेगी।
- वेतन: सचिव को उस पद और संवर्ग (Cadre) के अनुसार वेतन व भत्ते मिलेंगे जिससे उसे लाया गया है।
कार्यकाल एवं सेवा शर्तें (धारा 4)
- पदावधि: अध्यक्ष और प्रत्येक सदस्य का कार्यकाल 3 वर्ष का होगा।
- त्यागपत्र: अध्यक्ष या सदस्य राज्य सरकार को संबोधित अपने हस्ताक्षर युक्त लेख द्वारा किसी भी समय पद से त्यागपत्र दे सकते हैं।
- आकस्मिक रिक्ति [धारा 4(3)]: पद से हटाए जाने या त्यागपत्र के कारण हुई रिक्ति पर नियुक्त नया व्यक्ति केवल शेष पदावधि के लिए पद धारण करेगा।
- वेतन व भत्ते [धारा 4(4)]: राज्य सरकार द्वारा विहित पारिश्रमिक देय होगा। नियुक्ति के पश्चात सेवा शर्तों में कोई भी अहितकर परिवर्तन नहीं किया जाएगा।
आयोग की बैठक एवं कार्यप्रणाली (धारा 5, 6, 7)
- गणपूर्ति (Quorum) (धारा 5): बैठक के लिए अध्यक्ष सहित न्यूनतम 3 सदस्यों की उपस्थिति अनिवार्य है।
- अध्यक्षता (धारा 6): बैठक की अध्यक्षता अध्यक्ष द्वारा की जाएगी। उनकी अनुपस्थिति में उपस्थित सदस्यों द्वारा चुना गया सदस्य अध्यक्षता करेगा।
- निर्णय प्रक्रिया: समस्त निर्णय बहुमत से लिए जाएंगे। मत बराबर होने की स्थिति में अध्यक्ष (या अध्यक्षता करने वाले सदस्य) का निर्णायक मत होगा।
- विशेषज्ञ: बैठक में बुलाए गए किसी विषय विशेषज्ञ को मत देने का अधिकार नहीं होगा।
- वैधता (धारा 7): आयोग में किसी पद की रिक्ति के दौरान लिए गए निर्णय अविधिमान्य (Invalid) नहीं माने जाएंगे।
पद से हटाया जाना (धारा 8)
- राज्य सरकार आदेश द्वारा अध्यक्ष या सदस्य को निम्न परिस्थितियों में हटा सकती है:
- दिवालिया होने पर।
- नैतिक अधमता या आपराधिक क्रियाकलाप के अपराध में सिद्धदोष होने पर।
- विकृत चित्त (Unsound mind) होने पर।
- कार्य करने से इनकार करने या असमर्थ होने पर।
- अनुमति के बिना लगातार 3 बैठकों में अनुपस्थित रहने पर।
- पद का वित्तीय रूप से दुरुपयोग करने पर (सरकार की राय में)।
- नोट: हटाने से पूर्व संबंधित सदस्य को सुनवाई का युक्तियुक्त अवसर दिया जाना अनिवार्य है।
रिपोर्ट, परामर्श एवं नियम (धारा 14, 15, 16, 21, 22)
- रिपोर्ट (धारा 14): आयोग राज्य सरकार को वार्षिक एवं विशेष रिपोर्ट प्रस्तुत करेगा। सरकार इसे कारणों सहित राज्य विधानमंडल के समक्ष रखवाएगी।
- बैठक का स्थान (धारा 15): मुख्य स्थान जयपुर होगा, किंतु जांच हेतु राज्य में कहीं भी बैठक आयोजित की जा सकती है।
- बैठकों का विवरण:
- साधारण बैठक: सामान्यतः 2 माह में कम से कम एक बार।
- विशेष बैठक: अध्यक्ष स्वयं या न्यूनतम 3 सदस्यों के लिखित अनुरोध पर विशेष मुद्दे हेतु बुलाई जा सकती है।
- बैठकों का विवरण:
- परामर्श (धारा 16): राज्य सरकार महिलाओं से संबंधित प्रमुख नीतिगत विषयों पर आयोग से परामर्श करेगी।
- अपवाद (धारा 21): यह अधिनियम केंद्र सरकार, केंद्र के सार्वजनिक उपक्रमों (PSU) या केंद्र द्वारा नियंत्रित संस्थानों पर लागू नहीं होगा।
- नियम बनाने की शक्ति (धारा 22): राज्य सरकार को नियम बनाने की शक्ति प्राप्त है।
आयोग की शक्तियाँ (धारा 10)
आयोग को सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 के तहत एक सिविल न्यायालय की शक्तियाँ प्राप्त हैं:
- गवाहों को समन जारी करना और उनकी उपस्थिति सुनिश्चित करना।
- किसी भी दस्तावेज़ की खोज और प्रस्तुति का आदेश देना।
- शपथ-पत्रों (Affidavits) पर साक्ष्य प्राप्त करना।
- सार्वजनिक कार्यालय से किसी रिकॉर्ड या उसकी प्रतिलिपि प्राप्त करना।
- न्यायिक कार्यवाही: आयोग के सम्मुख प्रत्येक कार्यवाही IPC की धारा 193 और 228 के तहत ‘न्यायिक कार्यवाही’ मानी जाएगी।
- मजिस्ट्रेट को प्रेषण: यदि अपराध (जैसे धारा 175, 178 आदि) आयोग की उपस्थिति में होता है, तो वह मामले को संबंधित मजिस्ट्रेट को अग्रेषित कर सकता है।
आयोग के कार्य (धारा 11 और 12)
- आयोग के कृत्य (धारा 11): महिलाओं के अधिकारों का संरक्षण और हितों का प्रोन्नयन करना।
- अनुचित व्यवहार की जांच (धारा 12): आयोग निम्न आधारों पर जांच कर सकता है:
- पीड़ित महिला के लिखित परिवाद पर।
- पंजीकृत महिला संगठन के परिवाद पर।
- अपनी स्वयं की जानकारी या सूचना (Suo-motu) पर।
- सरकार के निवेदन पर।
- अनुचित व्यवहार की व्यक्तिगत जानकारी रखने वाले किसी व्यक्ति के परिवाद पर।
- सिफारिश पर कार्यवाही: आयोग की सिफारिश पर राज्य सरकार को 3 माह के भीतर की गई कार्यवाही की सूचना आयोग को देनी होगी।
- कानूनी समीक्षा: मौजूदा कानूनों की समीक्षा करना और उन्हें प्रभावी बनाने हेतु सरकार से संशोधनों की सिफारिश करना।
- भेदभाव रोकना: राज्य लोक सेवाओं और सार्वजनिक उद्यमों में महिलाओं के विरुद्ध होने वाले भेदभाव को रोकना।
- परामर्शदाता: महिलाओं को प्रभावित करने वाले नीतिगत मामलों पर राजस्थान सरकार को सलाह देना।
- निगरानी: महिला सुधार गृहों, लड़कियों के हॉस्टल और अस्पतालों की कार्यप्रणाली पर नज़र रखना।
- अभियोजन का अधिकार: केरल के बाद राजस्थान दूसरा ऐसा राज्य है जिसे अभियोजन (Prosecution) करने का अधिकार प्राप्त है।
सहायक सेवाएँ एवं प्रकोष्ठ
- जेंडर प्रकोष्ठ: लिंग संवेदीकरण हेतु युवाओं के लिए सेमिनार और कार्यशालाओं का आयोजन।
- शिकायत प्रकोष्ठ: व्हाट्सएप, ईमेल, पोर्टल या मौखिक शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई।
- हेल्पलाइन (181): 6 अगस्त, 2012 को शुरू हुई 24×7 हेल्पलाइन, जो अब ‘मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 181’ के साथ एकीकृत है।
- जन सुनवाई: राज्य के सभी 33 जिलों में नियमित अंतराल पर शिविर आयोजित करना।
- पुनर्वास: बेसहारा महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए गरिमापूर्ण पुनर्वास कार्यक्रम।
जिला एवं स्थानीय स्तर की समितियाँ
- जिला महिला सहायता समिति (1997 से): सभी 33 जिलों में कार्यरत।
- अध्यक्ष: जिला प्रमुख।
- उप-अध्यक्ष: जिला कलेक्टर।
- महिला डेस्क: राजस्थान के सभी पुलिस थानों में शिकायतों के निवारण हेतु स्थापित।
- महिला सलाह और सुरक्षा केंद्र (MSSK): 39 केंद्रों का संचालन NGOs द्वारा महिला पीड़ितों की सहायता हेतु किया जा रहा है।
सात सूत्री कार्यक्रम (महिला अधिकारिता – 2009)
महिलाओं के आर्थिक और सामाजिक सशक्तिकरण हेतु 7 मुख्य बिंदु:
- सुरक्षित मातृत्व।
- शिशु मृत्यु दर में कमी।
- जनसंख्या स्थिरीकरण।
- बाल विवाह की रोकथाम।
- बालिकाओं को कम से कम 10वीं कक्षा तक स्कूल में रोके रखना (Retainment)।
- महिलाओं के लिए सुरक्षित माहौल सुनिश्चित करना।
- स्वयं सहायता समूहों (SHG) के माध्यम से स्वरोजगार।
- निगरानी समिति: इसकी अध्यक्षता मुख्यमंत्री द्वारा की जाती है।
वर्तमान ढांचा एवं महत्वपूर्ण तथ्य
- संरचना: 1 अध्यक्ष + अधिकतम 4 सदस्य (SC/ST और OBC वर्ग का प्रतिनिधित्व अनिवार्य)।
- कार्यकाल: 3 वर्ष। (इस्तीफे के बाद नई नियुक्ति शेष कार्यकाल के लिए होती है)।
- प्रथम सदस्य: श्रीमती नगेंद्र बाला।
- दो बार सदस्य रहने वाली महिलाएँ: सुनीता सत्यार्थी व दमयंती बाकोलिया।
- वर्तमान पदाधिकारी:
- अध्यक्ष: श्रीमती रेहाना रियाज चिश्ती।
- सदस्य:
- श्रीमती सुमन यादव
- श्रीमती अंजना मेघवाल
- श्रीमती सुमित्रा जैन।
- सचिव: श्री विरेन्द्र सिंह।
- प्रथम सचिव: रश्मि प्रियदर्शिनी
राजस्थान राज्य महिला आयोग के अध्यक्षों की सूची
| क्र.सं. | नाम | विशेष जानकारी |
| 1 | श्रीमती कांता खतूरिया | प्रथम अध्यक्ष |
| 2 | प्रो. पवन सुराणा | RPSC की पूर्व सदस्य |
| 3 | श्रीमती तारा भंडारी | राजस्थान विधानसभा की पूर्व उपाध्यक्ष |
| 4 | श्रीमती मीरा महर्षि (IAS) | कार्यवाहक अध्यक्ष |
| 5 | डॉ. सरिता सिंह | कार्यवाहक अध्यक्ष |
| 6 | प्रो. लाड कुमारी जैन | – |
| 7 | श्रीमती सुमन शर्मा | – |
| 8 | श्रीमती रेहाना रियाज चिश्ती | वर्तमान अध्यक्ष (11.02.2022 से) |
महिला सशक्तिकरण हेतु महत्वपूर्ण विधिक अधिकार
- आपराधिक मामले में महिला की खोज केवल एक महिला पुलिस अधिकारी ही कर सकती है।
- महिला का मेडिकल परीक्षण केवल महिला चिकित्सक द्वारा ही किया जाएगा।
- जन्म और स्कूल प्रमाणपत्र में पिता के साथ माता का नाम लिखना अनिवार्य।
- महिला को बच्चा गोद लेने का पूर्ण अधिकार।
- आरक्षण: राज्य सरकार की नौकरियों में 30% और पंचायती राज संस्थाओं में 50% सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित।
