राजस्थान लोक सेवा आयोग राजस्थान राजनीतिक व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण संवैधानिक निकाय है, जिसका मुख्य कार्य राज्य की सेवाओं के लिए योग्य एवं सक्षम अभ्यर्थियों का चयन करना है। यह आयोग भर्ती प्रक्रियाओं को निष्पक्ष, पारदर्शी एवं योग्यता-आधारित बनाने में केंद्रीय भूमिका निभाता है। राजस्थान लोक सेवा आयोग प्रशासनिक दक्षता एवं सुशासन की स्थापना में भी सहायक होता है।
राजस्थान लोक सेवा आयोग की भूमिका और कार्य
- वर्ष 1923 में ली कमीशन (Lee Commission) ने भारत में संघ लोक सेवा आयोग की स्थापना की सिफारिश की।
- इस आयोग ने प्रांतीय लोक सेवा आयोगों की स्थापना के संबंध में कोई सिफारिश नहीं की थी।
- उस समय प्रांतीय सरकारें अपनी आवश्यकता अनुसार नियुक्तियाँ करने तथा सेवा नियम बनाने के लिए स्वतंत्र थीं।
- राजस्थान लोक सेवा आयोग एक संवैधानिक आयोग है। जिसका उल्लेख संविधान के भाग-14वें (अनुच्छेद 308-323) के दूसरे अध्याय (अनुच्छेद 315-323) में है।
- राजस्थान राज्य के गठन के समय कुल 22 रियासतों में से केवल 3 रियासतों में लोक सेवा आयोग कार्यरत थे:
- जयपुर (1940)
- जोधपुर (1939)
- बीकानेर (1946)
- रियासतों के विलय के उपरान्त दिनांक 16 अगस्त, 1949 को राजस्थान के तत्कालीन राजप्रमुख द्वारा राजस्थान लोक सेवा आयोग की स्थापना हेतु 28वाँ अध्यादेश जारी किया गया जो कि दिनांक 20 अगस्त, 1949 को प्रकाशित हुआ।
- इसी अध्यादेश में यह प्रावधान किया गया कि जिस दिन से आयोग में सदस्य नियुक्त करने की अधिसूचना प्रकाशित की जायेगी। उसी दिन से आयोग प्रभाव में आ जाएगा।
- राजस्थान राजपत्र में 22 दिसंबर 1949 को सदस्य नियुक्त करने की अधिसूचना प्रकाशित होने के साथ ही आयोग प्रभाव में आ गया। अर्थात् राजस्थान लोक सेवा आयोग की स्थापना दिनांक 22 दिसम्बर, 1949 को हुयी थी ।
- आयोग से संबंधित प्रमुख नियम –
- वर्ष 1951 में राजप्रमुख द्वारा आयोग के कार्यों को नियमित करने के लिए नियम बनाए गए:
- राजस्थान लोक सेवा आयोग सेवा शर्त नियम 1951
- राजस्थान लोक सेवा आयोग कार्यों की सीमा नियम 1951
- वर्ष 1951 में राजप्रमुख द्वारा आयोग के कार्यों को नियमित करने के लिए नियम बनाए गए:
- इन नियमों में संशोधन:
- 1961
- 1983
- अन्य नियम
- राजस्थान लोक सेवा आयोग (सेवा शर्त) विनियम 1974
- राज्यपाल सरदार जोगिन्द्र सिंह द्वारा बनाए गए।
- राजस्थान लोक सेवा आयोग (सेवा शर्त) विनियम 1974
- अनुच्छेद संख्या 16, 234, 315 से 323 तक विशेष रूप से लोक सेवा आयोगों के कार्य एवं अधिकार क्षेत्र के संबंध में है।
- कार्यप्रणाली संबंधी नियम
- राजस्थान लोक सेवा आयोग की कार्यप्रणाली निम्न नियमों द्वारा निर्धारित होती है:
- राजस्थान लोक सेवा आयोग नियम एवं शर्ते 1963
- राजस्थान लोक सेवा आयोग (शर्ते एवं प्रक्रिया का मान्यकरण) अध्यादेश 1975
- राजस्थान लोक सेवा आयोग अधिनियम 1976
- राजस्थान लोक सेवा आयोग की कार्यप्रणाली निम्न नियमों द्वारा निर्धारित होती है:
- राज्य पुनर्गठन के बाद 1957 में सत्यनारायण राव समिति की सिफारिश के आधार पर इसे अजमेर स्थानान्तरित किया गया।
- 21 अगस्त 1958 – मुख्यालय जयपुर से अजमेर स्थानांतरित किया गया।
- 21 अक्टूबर 2000 से – कार्यालय घूघरा घाटी, अजमेर में संचालित हो रहा है।
- आयोग का सचिव भारतीय प्रशासनिक सेवा का अधिकारी होता है। सचिव द्वारा समस्त प्रशासनिक एवं वित्तीय कार्य का निष्पादन किया जाता है।
लोक सेवा आयोग से संबंधित अनुच्छेद
| अनुच्छेद | विषय-वस्तु |
| 315 | संघ और राज्यों के लिए लोक सेवा आयोग का गठन |
| 316 | सदस्यों की नियुक्ति और पदावधि (कार्यकाल) |
| 317 | लोक सेवा आयोग के किसी सदस्य का हटाया जाना और निलंबित किया जाना |
| 318 | आयोग के सदस्यों और कर्मचारीवृंद की सेवा की शर्तों के बारे में विनियम बनाने की शक्ति |
| 319 | आयोग के सदस्यों द्वारा पद पर न रहने पर अन्य पद धारण करने के संबंध में प्रतिषेध (रोक) |
| 320 | लोक सेवा आयोगों के कृत्य (कार्य) |
| 321 | लोक सेवा आयोगों के कृत्यों का विस्तार करने की शक्ति |
| 322 | लोक सेवा आयोगों के व्यय (खर्चे) |
| 323 | लोक सेवा आयोगों के प्रतिवेदन (रिपोर्ट) |
अनुच्छेद 315: संघ और राज्यों के लिए लोक सेवा आयोग
- संघ के लिए एक लोक सेवा आयोग और प्रत्येक राज्य के लिए एक लोक सेवा आयोग होगा।
- दो या अधिक राज्य यह करार कर सकेंगे कि उनके लिए एक ही ‘संयुक्त लोक सेवा आयोग’ होगा, यदि उन राज्यों के विधान-मंडल ऐसा संकल्प पारित कर दें। तब संसद विधि द्वारा इसकी नियुक्ति का उपबंध करेगी।
- ऐसी विधि में उसे प्रभावी बनाने के लिए आवश्यक आनुषंगिक और पारिणामिक उपबंध हो सकेंगे।
- यदि किसी राज्य का राज्यपाल संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) से अनुरोध करे, तो वह राष्ट्रपति के अनुमोदन से उस राज्य की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए सहमत हो सकेगा।
- संविधान में ‘लोक सेवा आयोग’ के निर्देशों का अर्थ वही होगा जो उस विशिष्ट विषय (संघ या राज्य) की आवश्यकताओं की पूर्ति करता हो।
अनुच्छेद 316: सदस्यों की नियुक्ति और पदावधि
- आयोग के अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति संघ/संयुक्त आयोग के लिए राष्ट्रपति द्वारा और राज्य आयोग के लिए राज्यपाल द्वारा की जाएगी।परंतु: लगभग आधे सदस्य ऐसे होंगे जिन्हें भारत या राज्य सरकार के अधीन कम से कम 10 वर्ष का कार्य अनुभव हो।\
- (1क)यदि अध्यक्ष का पद रिक्त हो या वह अनुपस्थित हो, तो राष्ट्रपति या राज्यपाल आयोग के अन्य सदस्यों में से किसी एक को कार्यवाहक अध्यक्ष नियुक्त कर सकते हैं।
- सदस्य का कार्यकाल पद ग्रहण से 6 वर्ष तक होगा। आयु सीमा:
- संघ आयोग: 65 वर्ष।
- राज्य/संयुक्त आयोग: 62 वर्ष।
- नोट :- 41वां संविधान संशोधन (1976)- आयु सीमा 60 से बढ़ाकर 62 वर्ष की गई।
- इस्तीफा: सदस्य राष्ट्रपति (संघ) या राज्यपाल (राज्य) को संबोधित लिखित त्यागपत्र दे सकता है।
- हटाना: उन्हें अनुच्छेद 317 की प्रक्रिया से पद से हटाया जा सकता है।
- कार्यकाल समाप्त होने पर कोई भी सदस्य उसी पद पर पुनर्नियुक्ति का पात्र नहीं होगा।
अनुच्छेद 317: पद से हटाया जाना और निलंबित किया जाना
- अध्यक्ष या सदस्य को केवल ‘कदाचार’ के आधार पर राष्ट्रपति के आदेश से हटाया जाएगा, यदि सुप्रीम कोर्ट ने जांच के बाद हटाने की सिफारिश की हो।
- जांच के दौरान संघ/संयुक्त आयोग के मामले में राष्ट्रपति और राज्य आयोग के मामले में राज्यपाल सदस्य को निलंबित कर सकते हैं।
- नोट- RPSC के अध्यक्ष तथा सदस्यों की नियुक्ति राज्यपाल करता है लेकिन वह उन्हें पद से नहीं हटा सकता। अध्यक्ष तथा सदस्यों को पद से हटाने का अधिकार राष्ट्रपति को प्राप्त है।
- राष्ट्रपति बिना जांच के भी हटा सकते हैं, यदि सदस्य:
- (क) दिवालिया हो जाए।
- (ख) कार्यकाल के दौरान बाहर कहीं सवेतन (Paid) नौकरी करे।
- (ग) राष्ट्रपति की राय में मानसिक या शारीरिक रूप से अयोग्य हो।
- यदि सदस्य सरकारी संविदा (Contract) या लाभ में हिस्सा लेता है, तो वह ‘कदाचार’ का दोषी माना जाएगा।
अनुच्छेद 318: सेवा की शर्तों के बारे में विनियम बनाने की शक्ति
- संघ/संयुक्त आयोग के लिए राष्ट्रपति और राज्य आयोग के लिए राज्यपाल विनियमों द्वारा:
- (क) सदस्यों की संख्या और उनकी सेवा की शर्तों को निर्धारित करेंगे।
- (ख) कर्मचारीवृंद की संख्या और उनकी सेवा शर्तों का प्रावधान करेंगे।
- परंतु: नियुक्ति के पश्चात सेवा शर्तों में कोई अलाभकारी परिवर्तन नहीं किया जाएगा।
अनुच्छेद 319: पद पर न रहने पर पद धारण करने पर रोक
- (क) UPSC अध्यक्ष: भविष्य में किसी भी सरकारी नौकरी के पात्र नहीं होंगे।
- (ख) SPSC अध्यक्ष: UPSC के अध्यक्ष/सदस्य या अन्य SPSC के अध्यक्ष बन सकते हैं, पर कहीं और नौकरी नहीं।
- (ग) UPSC सदस्य: UPSC के अध्यक्ष या SPSC के अध्यक्ष बन सकते हैं, अन्यत्र नहीं।
- (घ) SPSC सदस्य: UPSC के अध्यक्ष/सदस्य या उसी/अन्य SPSC के अध्यक्ष बन सकते हैं, अन्यत्र नहीं।
अनुच्छेद 320: आयोग के कृत्य (कार्य)
- संघ और राज्य की सेवाओं में नियुक्तियों के लिए परीक्षाओं का संचालन करना।
- राज्यों के अनुरोध पर संयुक्त भर्ती की योजनाएं बनाना और सहायता करना।
- निम्नलिखित विषयों पर आयोग से परामर्श किया जाएगा:
- (क) भर्ती की पद्धतियां।
- (ख) नियुक्ति, पदोन्नति और स्थानांतरण के सिद्धांत।
- (ग) अनुशासनिक मामले।
- (घ) विधिक खर्चों की प्रतिपूर्ति के दावे।
- (ङ) सेवा के दौरान हुई क्षति के लिए पेंशन के दावे।
- अनुच्छेद 16(4) (आरक्षण) और अनुच्छेद 335 (SC/ST दावे) के मामलों में परामर्श आवश्यक नहीं है।
- परामर्श के संबंध में बनाए गए नियम संसद या विधान-मंडल के सामने कम से कम 14 दिन तक रखे जाएंगे।
अनुच्छेद 321: कृत्यों का विस्तार करने की शक्ति
- संसद या राज्य विधानमंडल कानून बनाकर आयोग को अतिरिक्त कार्य (स्थानीय निकाय या सार्वजनिक संस्थाओं से जुड़े) सौंप सकते हैं।
अनुच्छेद 322: आयोग के व्यय
- आयोग के वेतन, भत्ते और पेंशन सहित सभी खर्चे संघ के लिए भारत की संचित निधि पर और राज्य के लिए राज्य की संचित निधि पर भारित होंगे।
अनुच्छेद 323: आयोग के प्रतिवेदन (रिपोर्ट)
- संघ आयोग: अपनी वार्षिक रिपोर्ट राष्ट्रपति को देगा, जो इसे संसद के प्रत्येक सदन के सामने रखवाएंगे।
- राज्य आयोग: अपनी रिपोर्ट राज्यपाल को देगा, जो इसे राज्य विधान-मंडल के सामने रखवाएंगे।
यदि आयोग की सलाह नहीं मानी गई, तो सरकार को इसका कारण लिखित रूप में बताना होगा।
RPSC की संरचना
प्रारंभिक संरचना-
- स्थापना के समय आयोग में:
- 1 अध्यक्ष
- 2 सदस्य
- प्रथम अध्यक्ष – एस. के. घोष (तत्कालीन राजस्थान उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश)
- प्रथम सदस्य
- देवीशंकर तिवारी
- एन. आर. चंदोरकर
- बाद में एस. सी. त्रिपाठी (पूर्व सदस्य, UPSC) को अध्यक्ष नियुक्त किया गया।
सदस्यों की संख्या में परिवर्तन
| वर्ष | सदस्य संख्या |
| स्थापना | 2 सदस्य + 1 अध्यक्ष |
| 1962 | 3 + 1 |
| 1965 | 4 + 1 |
| 1985 | 5 + 1 |
| 2011 | 7 + 1 |
| 18 जुलाई 2025 | 10 + 1 (कुल 11) |
राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC): वर्तमान संरचना
| Sr. No. | नाम |
| 1. | श्री उत्कल रंजन साहू ( अध्यक्ष) |
| 2. | श्री बाबू लाल कटारा (निलंबित) |
| 3. | लेफ्टिनेंट कर्नल केसरी सिंह राठौड |
| 4. | श्री कैलाश चंद मीना |
| 5. | प्रो. अय्यूब खान |
| 6. | डॉ. सुशील कुमार बिस्सू |
| 7. | डॉ. अशोक कुमार कलवार |
| 8. | हेमंत प्रियदर्शी (रिटायर्ड IPS) |
| 9. | रिक्त |
| 10. | रिक्त |
| 11. | रिक्त |
| वर्तमान सचिव :- श्री राम निवास मेहता (IAS) | |
राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) के अध्यक्षों की सूची
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क्र. सं. |
अध्यक्ष का नाम |
कार्यकाल / श्रेणी |
विशेष विवरण |
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1 |
सर एस. के. घोष |
01-04-1949 से 25-01-1950 |
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2 |
श्री एस. सी. त्रिपाठी |
28-07-1950 से 07-08-1951 |
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3 |
श्री डी. एस. तिवारी |
– |
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5 |
श्री एल. एल. जोशी |
कार्यवाहक |
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7 |
डॉ. बी. एल. रावत |
– |
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8 |
श्री आर. सी. चौधरी |
– |
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11 |
श्री मोहम्मद याकूब |
– |
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17 |
श्री एस. सी. सिंगारिया |
कार्यवाहक |
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20 |
श्री पी. एस. यादव |
– |
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22 |
श्री एन. के. बैरवा |
– |
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23 |
डॉ. एस. एस. टाक |
कार्यवाहक |
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25 |
श्री एच. एन. मीना |
कार्यवाहक |
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|
26 |
श्री सी. आर. चौधरी |
– |
|
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27 |
श्री एम.एल. कुमावत |
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29 |
डॉ. हबीब खान गौरान |
– |
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30 |
डॉ. आर. डी. सैनी |
कार्यवाहक |
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31 |
डॉ. ललित के. पंवार |
– |
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32 |
श्री श्याम सुंदर शर्मा |
– |
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33 |
डॉ. राधेश्याम गर्ग |
– |
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34 |
श्री दीपक उप्रेती |
– |
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35 |
डॉ. भूपेन्द्र सिंह |
– |
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36 |
डॉ. शिव सिंह राठौड़ |
कार्यवाहक |
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37 |
श्री जसवन्त सिंह राठी |
कार्यवाहक |
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38 |
श्री संजय कुमार श्रोत्रिय |
– |
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39 |
श्री कैलाश चंद मीना |
कार्यवाहक |
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40 |
श्री उत्कल रंजन साहू |
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सचिव:
- प्रथम सचिव: श्री श्याम सुंदर शर्मा।
- प्रथम कार्यवाहक सचिव: श्री दलजीत सिंह।
- वर्तमान सचिव :- श्री राम निवास मेहता (IAS)
- प्रथम महिला सचिव: ओटिमा बोर्दिया (UPSC की सदस्य भी रहीं)।
- श्रीमती रोली सिंह, श्रीमती मुग्धा सिन्हा, मिस रेनू जयपाल और शुभम चौधरी भी सचिव रहीं।
राजस्थान लोक सेवा आयोग से संबंधित विशेष तथ्य
RPSC अध्यक्ष एवं सदस्य के रूप में महिलाएं –
- अब तक एक भी महिला अध्यक्ष नहीं बनी है।
- अब तक RPSC सदस्य के रूप में कुल 7 महिलाएं रही है –
- श्रीमती कांता खतुरिया (प्रथम महिला सदस्य, UPSC की सदस्य भी रहीं)
- श्रीमती कमला भील (पूर्व राज्य मंत्री)
- श्रीमती प्रकाशवती शर्मा (UPSC सदस्य रहीं)
- श्रीमती दिव्या सिंह
- श्रीमती राजकुमारी गुर्जर
- श्रीमती संगीता आर्य
- श्रीमती मंजू शर्मा
RPSC के सदस्य जो बाद में UPSC के सदस्य बने-
- कांता खतुरिया (राजस्थान महिला आयोग की अध्यक्ष भी रही ।)
- प्रकाशवती शर्मा
RPSC के सदस्य पद से इस्तीफा दिया –
- कांता खतुरिया (UPSC की सदस्य बनी)
- शिवपाल सिंह नांगल
- श्रीमती दिव्या सिंह
- श्याम सुन्दर शर्मा (सदस्य पद से इस्तीफा देकर अध्यक्ष बने)
अध्यक्ष के रूप में न्यूनतम कार्यकाल
- बी.एल. रावत (1.08.1966 से 3.09.1966)- 34 दिन
- एस. के. घोष (22.12.1949 – 25.01.1950)- 35 दिन
- पी.एस. यादव (1.10.1997 से 6.11.1997)- 37 दिन
RPSC के वे सदस्य जो अन्य सेवाओं से रहे-
- श्री रघुकुल तिलक (वाईस चांसलर व राजस्थान के राज्यपाल )
- श्री एन.एल. जैन (भूतपूर्व विधान सभा अध्यक्ष)
- श्रीमती कमला भील (राजस्थान सरकार में भूतपूर्व राज्य मंत्री )
- श्री धूलेश्वर मीणा (भूतपूर्व सांसद)
- श्रीमती कांता खतुरिया (Ex. विधानसभा सदस्य)
- श्री ओ.पी. गुप्ता(भूतपूर्व मुख्य सचेतक राजस्थान विधानसभा )
कार्यवाहक अध्यक्ष (अब तक 8)
- एल. एल.जोशी
- एस. सी. सिंघारिया
- एस. एस. टाक
- एच. एल. मीना
- आर. डी. सैनी
- शिवसिंह राठौड़
- जसवंत सिंह राठी ( कार्यवाहक अध्यक्ष के रूप में सबसे छोटा 15 दिन का कार्यकाल)
- कैलाश चंद मीणा (वर्तमान में)
अन्य तथ्य-
- प्रथम महिला सदस्य – कांता खतुरिया
- राज्य के मुख्य सचिव जो RPSC के सदस्य रहे- एस.डी. उज्ज्वल
- RPSC के वर्तमान सचिव रामनिवास मेहता है
- राज्य के मुख्य सचिव जो RPSC के सदस्य रहे- एस.डी. उज्ज्वल
- आयोग के वह अध्यक्ष जो कॉलेज शिक्षा के निदेशक रहे- श्री आर.एस. कपूर
- प्रथम अध्यक्ष जिनका संबंध भारतीय पुलिस सेवा (IPS) से रहा – श्री पी.एस. यादव
- आयोग के वह सदस्य जो पूर्व में लोकसभा के सदस्य भी रहे- श्री धुलेश्वर मीना
- आयोग के वह सदस्य जो पूर्व में राजस्थान विधानसभा में मुख्य सचेतक (Chief Whip) रहे – श्री ओ.पी. गुप्ता
राज्य लोकसेवा आयोग का सचिवालय
- संरचना: आयोग में एक सचिव व अन्य अधिकारी होते हैं।
- भूमिका: सचिव आयोग प्रशासन का व्यावहारिक कार्यपालक होता है।
- नियुक्ति: सचिव या तो भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) का अधिकारी होता है या आयोग के उपसचिव पद से पदोन्नत होकर सचिव के पद पर नियुक्त किया जा सकता है।
- राज्यपाल की भूमिका: सचिव की किसी भी प्रकार की नियुक्ति के संबंध में राज्यपाल की अनुमति आवश्यक है। वेतन तथा भत्तों का निर्धारण भी राज्यपाल द्वारा किया जाता है।
- कार्यकाल: सामान्यतः 5 साल का होता है, किंतु इस नियम का पालन सामान्यतः नहीं किया जाता है।
- अनुशासनात्मक कार्यवाही: सचिव के प्रति किसी भी प्रकार की कार्यवाही का अधिकार आयोग के अध्यक्ष को है, लेकिन सचिव को राज्यपाल के समक्ष ऐसी कार्यवाही के विरूद्ध अपील करने का अधिकार है।
- कर्मचारियों की नियुक्ति: आयोग सचिवालय के राजपत्रित कर्मचारियों की नियुक्ति सचिव, आयोग के अध्यक्ष की अनुमति से करता है।
RPSC संघटकीय ढांचा
- आयोग का कार्य सुचारू रूप से चलाने के लिए इसे 06 भागों में बांटा गया है:
- प्रशासनिक संभाग
- भर्ती संभाग
- परीक्षा संभाग
- लेखा संभाग
- विधि संभाग
- शोध संभाग
महत्वपूर्ण समितियां और वित्तीय प्रावधान
- आयोग के व्यय (अनु. 322): राज्य लोक सेवा आयोग के समस्त व्यय राज्य की संचित निधि पर भारित होंगे।
- RPSC की स्थायी प्री-लिटिगेशन समिति:
- गठन: 1 मार्च 2019
- अध्यक्ष: माननीय सदस्य (RPSC अध्यक्ष द्वारा मनोनीत)
- सदस्य: सचिव (RPSC) एवं विधि परामर्शी।
- सदस्य सचिव: संयुक्त सचिव RPSC।
- कार्य: अभ्यर्थी की समस्याओं का निराकरण व न्यायालयवाद में कमी लाना।
- सुधार हेतु गठित समितियां:
- M.L. कुमावत समिति (2021)
- विजय व्यास समिति
- वासुदेव देवनानी अध्ययन दल (2024): इन्होंने हरियाणा लोक सेवा आयोग का अध्ययन किया।
- इनकी रिपोर्ट के बाद सदस्यों की संख्या (अध्यक्ष सहित) 8 से बढ़ाकर 11 कर दी गई है।
राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) में नवाचार
| 1984 | राजस्थान राज्य एवं अधीनस्थ सेवाओं हेतु संवीक्षा परीक्षा प्रारंभ |
| 2011 | ऑनलाइन एप्लीकेशन की शुरुआत |
| 2011 | ऑनलाइन परीक्षा आयोजन का प्रारंभ |
| 2013 | मेमोरी ऑनलाइन परीक्षा समीक्षा सॉफ्टवेयर |
| 2014 | ऑनलाइन आपत्तियां लेने की सुविधा |
| 2016 | ऑनलाइन मार्किंग सिस्टम |
| 2016 | उत्तर पुस्तिका ऑनलाइन डाउनलोड करने की सुविधा |
| 2017 | दिव्यांगजन अनुरूप पोर्टल |
| 2018 | स्टेट रिक्रूटमेंट पोर्टल |
| 2022 | वन टाइम रजिस्ट्रेशन (OTR) |
